Pitru Paksha Maha Bharani Shradh 2026: पितृ पक्ष के भरणी श्राद्ध को खास महत्व दिया गया है. भरणी श्राद्ध को ‘महा भरणी श्राद्ध’ के नाम से भी जाना जाता है. मान्यतानुसार, इस दिन भरणी श्राद्ध करने से गया जी श्राद्ध के बराबर फल मिलता है. इस दिन उन पूर्वजों के लिए श्राद्ध (तर्पण, पिंडदान) किया जाता है, जिनकी मृत्यु तृतीया तिथि (कृष्ण या शुक्ल पक्ष) और भरणी नक्षत्र में हुई. पंचांग के अनुसार, आश्विन कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि मंगलवार, 29 सितंबर को पड़ रही है. इस दिन भरणी नक्षत्र का भी संयोग बन रहा है. ऐसे में आइए जानते हैं कि महा भरणी श्राद्ध के लिए मुहूर्त, विधि और महत्व जानिए.
भरणी श्राद्ध 2026 मुहूर्त
- कुतुप मुहूर्त- 11 बजकर 29 मिनट से 12 बजकर 27 मिनट तक
- रौहिण मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 17 मिनट से 1 बजकर 05 मिनट तक
- अपराह्न काल मुहूर्त- दोपहर 1 बजकर 05 मिनट से 3 बजकर 28 मिनट तक
भरणी नक्षत्र कब से कब तक रहेगा
पंचांग के अनुसार, भरणी नक्षत्र सुबह 9 बजकर 03 मिनट से शुरू होगा और दोपहर दो बजकर 42 मिनट तक रहेगा.
नोट- स्थानीय समय के अनुसार, कुतुप, रौहिण, भरणी नक्षत्र अपराह्न काल के मुहूर्त में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है.
भरणी श्राद्ध का महत्व
शास्त्रों के अनुसार, ‘भरणी श्राद्ध’ भरणी नक्षत्र में करना अच्छा माना गया है. ऐसा इसलिए क्योंकि इस नक्षत्र के देवता यम हैं. गरुड़ पुराण में यम को मृत्यु का कारक माना गया है. इसलिए महा भरणी का श्राद्ध भरणी नक्षत्र में करने की परंपरा है. गरुड़ पुराण के अनुसार, भरणी नक्षत्र में पितरों का श्राद्ध करने से ‘गया श्राद्ध’ जितना पुण्य मिलता है.
भरणी क्यों है यम का नक्षत्र?
ज्योतिष शास्त्र में वर्णित 27 नक्षत्रों में भरणी दूसरे स्थान पर आता है. इस नक्षत्र के स्वामी यम हैं. यम को धर्म और मृत्यु का स्वामी माना गया है. यम देव हर इंसान के जीवन का लेखा-जोखा रखते हैं. साथ ही दिवंगत आत्मा को ग्रहण कर उचित स्थान देते हैं. धर्मशास्त्र के जानकार पं. धर्मनाथ झा ने बताया कि जब चंद्रमा यम के नक्षत्र (भरणी) में हो, तो इस दौरान किया गया श्राद्ध यम देवता की उपस्थिति में होता है, जिससे दिवंगत के लिए किया श्राद्ध फलदायी होता है.
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भरणी श्राद्ध की आसान विधि
- सुबह नहाकर साफ और सफेद वस्त्र धारण करें. इतना करने के बाद पितरों का ध्यान करते हुए श्राद्ध का संकल्प करें.
- पूर्वजों के नाम और गोत्र को बोलते हुए श्राद्ध कर्म शुरू करें. इसमें कुश, जल, काले तिल और सफेद फूल आदि का प्रयोग किया जाता है.
- परंपरा के अनुसार पके हुए चावल, तिल, घी और अन्य सामग्रियों को मिलाकर पिंड बनाएं. श्राद्ध कर्म के दौरान पूर्वजों को पिंड अर्पित करने की परंपरा है.
- हाथ में शुद्ध जल में काले तिल और कुश लेकर पितृ तर्पण करें.
- तर्पण के बाद अपनी परंपरा के अनुसार ब्राह्मण को भोजन कराएं. साथ ही उन्हें अपने सामर्थ्य के अनुसार अन्न, वस्त्र, दक्षिणा आदि दान करें.
भरणी श्राद्ध को लेकर इन बातों का ध्यान रखें
धर्मशास्त्र की मान्यता के अनुसार, महा भरणी श्राद्ध के लिए कुतुप और रौहिण मुहूर्त का विशेष ध्यान रखना चाहिए. इस दिन का श्राद्ध अपराह्न काल समाप्त होने से पहले कर लेना चाहिए. कर्मकांड के जानकार महापात्र पं. वरुण झा ने बताया कि पितृ पक्ष में भरणी श्राद्ध मध्याह्न काल के दौरान पड़ने वाले भरणी नक्षत्र की अवधि में करना चाहिए.
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