अमेरिका में हिंदुस्तानीय आईटी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड पाने का रास्ता मुश्किल हो सकता है. अमेरिकी प्रशासन ने टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएलटेक समेत आठ टेक कंपनियों की ग्रीन कार्ड से जुड़ी पीईआरएम प्रक्रिया पर रोक लगाई है. इस सूची में माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी भी शामिल हैं. इस फैसले से इन कंपनियों के उन विदेशी कर्मचारियों की स्थायी निवास पाने की प्रक्रिया में देरी हो सकती है, जिनके मामले इस प्रक्रिया से जुड़े हैं. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि सभी कर्मचारियों की नौकरी या एच-1बी वीजा खत्म हो गया है.
अमेरिका ने किन 8 टेक कंपनियों पर की कार्रवाई?
इस सूची में चार हिंदुस्तानीय कंपनियां- टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएलटेक शामिल हैं. इनके अलावा कॉग्निजेंट, माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी और फ्रांस की कैपजेमिनी का नाम भी सामने आया है.
ये कंपनियां अलग-अलग तरह की तकनीकी सेवाएं देती हैं. टीसीएस, इंफोसिस, विप्रो और एचसीएलटेक सॉफ्टवेयर और आईटी सेवाओं के लिए जानी जाती हैं. माइक्रोसॉफ्ट विंडोज और क्लाउड सेवाएं देती है, जबकि एडोबी फोटो, वीडियो और पीडीएफ से जुड़े सॉफ्टवेयर बनाती है. कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी दूसरी कंपनियों को तकनीकी सेवाएं और सलाह देती हैं.
ग्रीन कार्ड और पीईआरएम क्या है?
ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है. कई हिंदुस्तानीय कर्मचारी पहले एच-1बी जैसे वर्क वीजा पर अमेरिका जाते हैं और बाद में कंपनी की मदद से ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करते हैं.
PERM इस प्रक्रिया का एक अहम चरण है. इसमें कंपनी को यह दिखाना होता है कि संबंधित नौकरी के लिए अमेरिकी कर्मचारियों को मौका देने की जरूरी प्रक्रिया पूरी की गई है और विदेशी कर्मचारी को नौकरी देने से जुड़े नियमों का पालन हुआ है.
इस प्रक्रिया पर रोक लगने से प्रभावित कंपनियां नए आवेदन दाखिल नहीं कर पाएंगी और लंबित मामलों की प्रक्रिया भी रुक सकती है. इससे कुछ कर्मचारियों को ग्रीन कार्ड मिलने में देरी हो सकती है.
H-1B वीजा और IT जॉब्स पर क्या असर होगा?
एच-1बी वीजा विदेशी पेशेवरों को अमेरिका में तय शर्तों के तहत काम करने की अनुमति देता है, जबकि ग्रीन कार्ड स्थायी निवास का रास्ता है. दोनों अलग-अलग हैं. PERM प्रक्रिया पर रोक लगने का मतलब यह नहीं है कि कर्मचारियों का मौजूदा एच-1बी वीजा अपने आप रद्द हो जाएगा.
इसी तरह, इस फैसले से सभी हिंदुस्तानीय आईटी कर्मचारियों की नौकरी जाने का दावा करना भी सही नहीं होगा. हालांकि, जिन कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया प्रभावित हुई है, उन्हें इंतजार करना पड़ सकता है. वास्तविक असर हर कर्मचारी के मामले और उसकी वीजा स्थिति पर निर्भर करेगा.
हिंदुस्तानीय IT कंपनियों की भर्ती पर क्या असर पड़ेगा?
टीसीएस, इंफोसिस और दूसरी हिंदुस्तानीय आईटी कंपनियां अमेरिकी ग्राहकों को सॉफ्टवेयर और तकनीकी सेवाएं देती हैं. इस फैसले के बाद उन्हें अमेरिका में कर्मचारियों को भेजने और उनके स्थायी निवास से जुड़ी योजनाओं पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है.
हालांकि, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कंपनियां हिंदुस्तान में भर्ती बढ़ा देंगी या अमेरिका में नौकरियां कम कर देंगी. अमेरिकी प्रशासन ने अपनी कार्रवाई के पीछे विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने से जुड़े नियमों के कथित गलत इस्तेमाल और अमेरिकी कर्मचारियों के अवसरों की रक्षा करने की बात कही है. इन आरोपों को साबित हुआ अपराध नहीं माना जाना चाहिए.
आगे क्या होगा?
इस कार्रवाई का सबसे सीधा असर उन कर्मचारियों पर पड़ सकता है, जिनकी ग्रीन कार्ड प्रक्रिया PERM चरण में है. बाकी कर्मचारियों की नौकरी और वीजा पर असर उनकी अलग-अलग परिस्थितियों पर निर्भर करेगा.
हिंदुस्तानीय आईटी प्रोफेशनल्स के लिए जरूरी है कि वे ग्रीन कार्ड और एच-1बी वीजा को एक जैसा न समझें. फिलहाल इस फैसले को सभी हिंदुस्तानीय टेक कर्मचारियों की नौकरी पर खतरे के रूप में देखना सही नहीं होगा. आगे का असर इस बात पर निर्भर करेगा कि रोक कितने समय तक लागू रहती है और अमेरिकी अधिकारी प्रभावित मामलों पर क्या फैसला लेते हैं.
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