IPS Shailja Das Success Story: वर्दी पहनना सिर्फ एक नौकरी पाना नहीं, बल्कि ऐसी जिम्मेदारी उठाना है, जहां हर फैसले पर लोगों की नजर होती है. बिहार के सहरसा की शैलजा दास ने महज 23 साल की उम्र में आईपीएस बनकर यंगेस्ट ऑफिसर्स की लिस्ट में शामिल हो गईं. उनकी जर्नी के पीछे एक लंबा संघर्ष रहा है. आइए इसपर एक नजर डालते हैं.
सहरसा में बीता बचपन, यहीं से शुरू हुई पढ़ाई
शैलजा दास का जन्म 7 नवंबर 1997 को बिहार के सहरसा जिले में हुआ था. सहरसा के कायस्थ टोला में उनका पैतृक घर है. उनकी शुरुआती पढ़ाई बुद्धा पब्लिक स्कूल से हुई. साल 2013 में उन्होंने दसवीं की परीक्षा अच्छे अंकों के साथ पास की. इसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली का रुख किया.
दिल्ली में पूरी की पढ़ाई
दसवीं के बाद शैलजा ने दिल्ली पब्लिक स्कूल से 12वीं की पढ़ाई पूरी की. स्कूली शिक्षा के बाद उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफेंस कॉलेज में दाखिला लिया. यहां से ग्रेजुएशन पूरा करने के बाद उनके सामने करियर की राह चुनने का मौका था. उन्होंने सिविल सेवा में जाने का फैसला किया और UPSC की तैयारी शुरू कर दी.
UPSC में हासिल की 83वीं रैंक
UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करना आसान नहीं है. इसमें देशभर के लाखों युवा शामिल होते हैं और सफलता उन्हीं को मिलती है, जो लंबे समय तक तैयारी में जुटे रहते हैं. शैलजा ने भी इस परीक्षा के लिए मेहनत की और अपनी तैयारी को अंजाम तक पहुंचाया.
महज 23 साल में बनीं IPS
साल 2021 की सिविल सेवा परीक्षा में उन्होंने ऑल इंडिया 83वीं रैंक हासिल की. इस सफलता के साथ उनका हिंदुस्तानीय पुलिस सेवा (IPS) में चयन हुआ. उन्हें बिहार कैडर मिला, यानी अब उन्हें अपने ही राज्य में पुलिस अधिकारी के तौर पर काम करने का मौका मिलने वाला था. उस वक्त उनकी उम्र करीब 23 साल थी.
ट्रेनिंग से शुरू हुआ पुलिस सेवा का सफर
IPS बनने के बाद शैलजा दास की असली जिम्मेदारी शुरू हुई. ट्रेनिंग पूरी करने के दौरान उन्होंने पुलिस व्यवस्था को करीब से समझा और अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं. वह लालगंज में ट्रेनी के तौर पर थाना प्रभारी की भूमिका में भी रहीं. इसके बाद उन्हें नालंदा जिले के हिलसा में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) की जिम्मेदारी मिली.
इस पद पर रहते हुए पुलिस व्यवस्था संभालना, अपराध से जुड़े मामलों की निगरानी करना और इलाके में कानून-व्यवस्था बनाए रखना जैसे काम उनकी जिम्मेदारियों का हिस्सा रहे. इन अनुभवों के साथ उनका पुलिस करियर आगे बढ़ता गया.
नालंदा से पटना तक, मिली बड़ी जिम्मेदारी
पुलिस विभाग में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालने के बाद शैलजा दास की तैनाती पटना में हुई. फिलहाल वह पटना सिटी एसपी (ईस्ट) के पद पर कार्यरत हैं. इस जिम्मेदारी के तहत उन्हें शहर के पूर्वी हिस्से की पुलिस व्यवस्था और कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों को देखना होता है.
अगस्त 2026 के आखिर में पटना में छात्र संगठनों और BPSC से जुड़े प्रदर्शन के दौरान भी वह चर्चा में आईं. प्रदर्शन के बीच उनका सख्त रवैया और गुस्से में बात करते हुए वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसके बाद उनके नाम की चर्चा और बढ़ गई.
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शैलजा दास की कहानी से क्या सीख सकते हैं युवा?
शैलजा दास का सफर दिखाता है कि एक लक्ष्य तय करने के बाद लगातार मेहनत करते रहना कितना जरूरी है. सहरसा से अपनी पढ़ाई शुरू करने वाली शैलजा दिल्ली के प्रतिष्ठित कॉलेज तक पहुंचीं, फिर UPSC पास कर IPS अधिकारी बनीं. आज वह बिहार में पुलिस विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल रही हैं.
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