Kanpur Fake Encounter Case: उत्तर प्रदेश के कानपुर में 35 साल पुराने कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है. आरोप है कि वर्ष 1991 में महाराजपुर के तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी ने मुफ्त में प्लॉट नहीं मिलने पर राकेश पाठक समेत 12 लोगों को हाईवे पर लूट की साजिश रचने के झूठे मामले में फंसा दिया था. पुलिस ने उस समय मुठभेड़ के बाद आरोपियों के पास से असलहे और बम बरामद होने का दावा किया था. शिकायत पर सीबीसीआईडी ने जांच की, तो मुठभेड़ और बरामदगी की कहानी फर्जी पायी गयी. मामले में कुल 18 पुलिसकर्मी आरोपी थे, जिनमें छह की मौत हो चुकी है. शेष 12 के खिलाफ अब महाराजपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी गयी है.
मुफ्त में प्लॉट नहीं मिलने पर फंसाने का आरोप
चकेरी के गांधीग्राम निवासी देवी प्रसाद पाठक ने शासन को शिकायत भेजकर आरोप लगाया था कि तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी ने मुफ्त में प्लॉट नहीं मिलने पर उनके छोटे भाई राकेश पाठक समेत 12 लोगों को लूट के झूठे मुकदमों में फंसाया था. शासन ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच सीबीसीआईडी, कानपुर को सौंप दी थी.
सीबीसीआईडी जांच में फर्जी निकली मुठभेड़ की कहानी
मामले की जांच तत्कालीन निरीक्षक आरपी सिंह ने की थी. जांच के बाद उनकी अंतिम प्रगति आख्या 25 सितंबर 1995 को (Crime Branch Criminal Investigation Departmen) सीबीसीआईडी मुख्यालय, लखनऊ से अनुमोदित हुई. जांच में पुलिस की ओर से बतायी गयी मुठभेड़ और असलहों की बरामदगी की कहानी फर्जी पायी गयी.
हाईवे पर डीसीएम लूटने की साजिश का दावा
पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक, 22 अगस्त 1991 को तत्कालीन थानाध्यक्ष विद्यासागर त्रिपाठी को मुखबिर से सूचना मिली थी कि नरवल मोड़ के पास जीटी रोड पर बदमाश वाहनों को रोककर लूटपाट करने वाले हैं. पुलिस मौके पर पहुंची थी. पुलिस का दावा था कि 23 अगस्त की रात करीब 12:30 बजे बदमाशों ने सड़क पर पेड़ की डालियां डालकर एक डीसीएम रोकने की कोशिश की.
इसी दौरान पुलिस और बदमाशों के बीच मुठभेड़ होने की बात कही गयी. पुलिस ने राकेश पाठक समेत 12 लोगों को गिरफ्तार करने का दावा किया था. इस कार्रवाई के आधार पर महाराजपुर थाने में दो मुकदमे दर्ज किये गये. पहले मुकदमे में डकैती और हत्या के प्रयास से संबंधित धाराएं लगायी गयीं, जबकि दूसरे मुकदमे में शस्त्र अधिनियम और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत कार्रवाई की गयी.
डीसीएम चालक और क्लीनर ने नकारा पुलिस का दावा
हाईवे पर जिस डीसीएम को लूटने की साजिश की बात कही गयी थी, उसके चालक उमाशंकर पासी और क्लीनर बृजेन्द्र सिंह ने सीबीसीआईडी जांच में पुलिस की मुठभेड़ की कहानी को नकार दिया था. दोनों के मुताबिक, 22 अगस्त 1991 को वे डीसीएम में साबुन लादकर कानपुर से बनारस जा रहे थे. शाम करीब आठ बजे रामादेवी चौराहे पर एक सिपाही उनकी डीसीएम में बैठा. इसके बाद छह अन्य लोग भी गाड़ी में सवार हुए और डीसीएम को महाराजपुर थाने ले जाया गया.
थाने में तीन लोगों को पकड़ने की बात कही
चालक और क्लीनर के अनुसार, थाने में दरोगा और दो-तीन सिपाही डीसीएम में बैठे लोगों की जांच करने लगे. पांच लोगों में से दो भाग गये, जबकि तीन को पकड़ लिया गया. पुलिस ने उनके पास से दो तमंचे, कारतूस और तीन बम मिलने की बात कही थी. इसके बाद पुलिसकर्मी दबिश देने गये और अन्य लोगों को पकड़कर लाये. वे अपने साथ एक रायफल और बंदूक भी लाये थे.
लिखे हुए कागजों पर कराये हस्ताक्षर
डीसीएम चालक और क्लीनर ने जांच के दौरान बताया था कि पुलिसकर्मियों ने उनसे लिखे हुए कागजों पर हस्ताक्षर कराये, लेकिन उन्हें पढ़कर नहीं सुनाया. दोनों ने स्पष्ट रूप से कहा था कि नरवल मोड़ पर बदमाशों ने उनकी डीसीएम रोककर लूटने की कोशिश नहीं की थी. उनके बयान ने पुलिस की ओर से बतायी गयी मुठभेड़ की कहानी पर सवाल खड़े किये थे.
1997 में अदालत ने सभी आरोपियों को किया बरी
मामले के तत्कालीन विवेचक रमेश चंद्र भटोले ने जांच के बाद आरोपपत्र अदालत में दाखिल किये थे. शिकायतकर्ता देवी प्रसाद पाठक के अनुसार, वर्ष 1997 में अदालत ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया था. इसके बावजूद पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज होने में लंबा समय लग गया.
33 साल तक दबी रही जांच रिपोर्ट
शिकायतकर्ता देवी प्रसाद पाठक के अनुसार, शासन ने वर्ष 1991 में ही सीबीसीआईडी को जांच के आदेश दे दिये थे. सीबीसीआईडी ने 1993 में जांच रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी थी, लेकिन इसके बावजूद मामले में कार्रवाई नहीं हुई. अब जांच रिपोर्ट भेजे जाने के वर्षों बाद आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गयी है.
सीबीसीआईडी ने दर्ज करायी प्राथमिकी
सीबीसीआईडी के निरीक्षक और मामले के विवेचक सुशील कुमार ने महाराजपुर थाने में प्राथमिकी दर्ज करायी है. कुल 18 आरोपी पुलिसकर्मियों में छह की मौत हो चुकी है, जबकि शेष 12 के खिलाफ कार्रवाई की गयी है. डीसीपी ईस्ट सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि इस मामले में सीबीसीआईडी ने प्राथमिकी दर्ज करायी है. आगे मामले की पैरवी भी सीबीसीआईडी ही करेगी.
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