Hot News

Explainer: चीन के मेगा डैम के जवाब में भारत का पावर प्रोजेक्ट, सियांग में क्यों भड़की हिंसा? समझें पूरा मामला

अरुणाचल प्रदेश के पासीघाट में 11,200 मेगावाट की प्रस्तावित सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट (SUMP) के विरोध में प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठी. शुक्रवार रात उपद्रवियों ने नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) के कार्यालय और एक पुलिस थाने में आग लगा दी. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष समेत तीन नेताओं के आवासों में तोड़फोड़ और लूटपाट की घटनाएं भी सामने आईं. हालात को संभालने के लिए केंद्र प्रशासन ने केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के त्वरित प्रतिक्रिया बल (RAF) की दो कंपनियां राज्य में भेजी हैं.

लेकिन सवाल है कि आखिर इस परियोजना को लेकर इतना विरोध क्यों हो रहा है? चीन के तिब्बत में बन रहे विशाल बांध से हिंदुस्तान की क्या चिंता है और सियांग परियोजना को लेकर स्थानीय लोग क्यों विरोध कर रहे हैं? आइए, समझते हैं पूरा मामला.

क्या है सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट?

सियांग अपर मल्टीपर्पज प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश में प्रस्तावित 11,200 मेगावाट क्षमता की एक बड़ी जलविद्युत परियोजना है. इसे नेशनल हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर कॉर्पोरेशन (NHPC) द्वारा तैयार किया जाएगा. यह लगभग दो दशक पुरानी योजना है, जिसे हाल के दिनों में फिर से गति मिली है.

इस परियोजना को समझने के लिए नदी का रास्ता जानना जरूरी है. तिब्बत से निकलने वाली यारलुंग त्सांगपो नदी जब अरुणाचल प्रदेश में प्रवेश करती है, तो इसे सियांग नदी कहा जाता है. आगे चलकर यही नदी असम में ब्रह्मपुत्र बन जाती है.

चीन के मेगा डैम से हिंदुस्तान को क्या है खतरा ?

चीन तिब्बत में यारलुंग त्सांगपो नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा ‘मेडोग डैम’ बना रहा है. हिंदुस्तान प्रशासन की चिंता है कि अगर चीन कभी पानी के प्राकृतिक प्रवाह को रोकता है या अचानक छोड़ता है, तो पूर्वोत्तर हिंदुस्तान में भारी तबाही आ सकती है.

इसी वजह से सियांग नदी पर हिंदुस्तान की प्रस्तावित परियोजना को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है. इस विशाल परियोजना के जरिए हिंदुस्तान पानी के स्टॉक और नियंत्रण को अपने हाथ में रखना चाहता है.

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार, यह प्रोजेक्ट लगभग 9 अरब क्यूबिक मीटर पानी का भंडारण कर सकता है, जो असम और अरुणाचल प्रदेश की सिंचाई और बाढ़ प्रबंधन की जरूरतों को पूरा करने में मददगार साबित होगा.

ये भी पढ़ें: कूचबिहार बॉर्डर पर बवाल: BSF जवानों पर लाठी-पत्थरों से हमला, जवाब में चला साउंड ग्रेनेड

स्थानीय लोग इस परियोजना का विरोध क्यों कर रहे हैं?

इस परियोजना को लेकर स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता जमीन, विस्थापन, पर्यावरण और अपनी सांस्कृतिक पहचान को लेकर है.

विस्थापन और पुश्तैनी जमीन का संकट

इस मेगा प्रोजेक्ट के कारण ऊपरी सियांग जिले के मुख्यालय यांगयोंग समेत कई पारंपरिक गांव और पुश्तैनी जमीनें पूरी तरह जलमग्न हो सकती हैं. इससे हजारों लोगों के बेघर होने की आशंका है.

भूकंप और बांध की सुरक्षा का डर

पूरा क्षेत्र अत्यधिक भूकंप-संवेदनशील सिस्मिक जोन V के अंतर्गत आता है. स्थानीय लोगों का तर्क है कि इस भू-भाग पर इतना भारी-भरकम बांध बनाना बड़े भूकंप या भूस्खलन के समय बड़ी तबाही का कारण बन सकता है.

नदी, जंगल और आजीविका पर असर

सियांग नदी घाटी की जैव विविधता, जंगल और स्थानीय लोगों की मछली पकड़ने तथा कृषि पर आधारित आजीविका पर भी असर पड़ने की आशंका है. लोगों का कहना है कि यह नदी उनके लिए सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि उनकी संस्कृति और पहचान है.

प्रदर्शनकारियों की क्या हैं मांगें?

प्रशासन द्वारा प्री-फिजिबिलिटी रिपोर्ट (PFR) और सर्वे का काम शुरू किए जाने के बाद से ही स्थानीय संगठनों ने इसका विरोध तेज कर दिया था.

प्रदर्शनकारी मांग कर रहे हैं कि सर्वे का काम तुरंत रोका जाए, पहले गिरफ्तार किए गए कार्यकर्ताओं को रिहा किया जाए, क्षेत्र से केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) को हटाया जाए और स्थानीय पारंपरिक संस्थाओं का सम्मान किया जाए.

दूसरी ओर, प्रशासन का कहना है कि अभी केवल परियोजना की संभावनाओं का अध्ययन किया जा रहा है और किसी भी निर्माण से पहले जनता के हितों को ध्यान में रखा जाएगा.

पासीघाट में कैसे भड़की हिंसा?

सियांग, अपर सियांग और पूर्वी सियांग जिलों में प्रस्तावित बिजली परियोजना के विरोध में शुक्रवार को 12 घंटे का बंद आयोजित किया गया था.

मुख्यमंत्री पेमा खांडू के कार्यालय की ओर से जारी बयान के मुताबिक, बंद काफी हद तक शांतिपूर्ण रहा, लेकिन इसके समाप्त होने के बाद पासीघाट में हिंसा भड़क उठी. यह हिंसा शनिवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे तक जारी रही.

अरुणाचल प्रदेश पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, शुक्रवार रात पूर्वी सियांग जिले में भीड़ ने NHPC के कार्यालय और एक पुलिस थाने में आग लगा दी. भाजपा की प्रदेश इकाई के अध्यक्ष कलिंग मोयोंग समेत तीन नेताओं के आवासों में तोड़फोड़ की गई. प्रदर्शनकारियों के पथराव में कई पुलिसकर्मी घायल हो गए.

हिंसा के बाद केंद्र ने RAF की दो कंपनियां भेजीं

हिंसा के बाद केंद्र प्रशासन ने CRPF की दंगा-रोधी इकाई RAF की दो कंपनियां अरुणाचल प्रदेश भेजने का निर्देश दिया.

अधिकारियों के मुताबिक, करीब 250 जवानों वाली इन दोनों कंपनियों को हिंदुस्तानीय वायुसेना के विमान से नवी मुंबई से अरुणाचल प्रदेश भेजा जाना था. ये टुकड़ियां रविवार तक पासीघाट पहुंचकर तैनात हो जाएंगी.

RAF नीली वर्दी पहनने वाली CRPF की एक विशेष दंगा-रोधी इकाई है. हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में CRPF की कई अन्य इकाइयां पहले से तैनात हैं.

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने क्या कहा?

मुख्यमंत्री पेमा खांडू ने पासीघाट में हुई तोड़फोड़, आगजनी, लूटपाट और संपत्ति के नुकसान की घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है.

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन का अधिकार लोकतंत्र का एक आवश्यक हिस्सा है, लेकिन यह जरूरी है कि प्रदर्शन कानून के दायरे में रहें और इनके कारण संपत्ति को नुकसान न पहुंचे तथा सार्वजनिक व्यवस्था बाधित न हो.

खांडू ने कहा कि राज्य प्रशासन सभी संगठनों और संघों के साथ बातचीत के लिए तैयार है. प्रशासन परियोजना के संभावित लाभों, इसके प्रतिकूल प्रभावों और स्थानीय समुदायों की चिंताओं एवं आशंकाओं पर विस्तृत चर्चा करना चाहती है.

उन्होंने बताया कि प्रशासन ने संवाद के प्रयास किए हैं और हितधारकों को बैठकों में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया है. प्रतिनिधियों को ईटानगर, पासीघाट या उनकी सुविधा के अनुसार किसी भी स्थान पर बैठक का प्रस्ताव दिया गया है.

The post Explainer: चीन के मेगा डैम के जवाब में हिंदुस्तान का पावर प्रोजेक्ट, सियांग में क्यों भड़की हिंसा? समझें पूरा मामला appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top