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Author name: Vinod Jha

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आत्महत्या या हत्या? सुरेंद्र कोली की मौत पर निठारी पीड़ित के पिता ने उठाए सवाल

निठारी कांड के मामलों में आरोपी रहे सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद एक पीड़ित के पिता ने उसकी मौत को लेकर सवाल उठाए हैं. Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, 2006 के निठारी मामले में पीड़ित रही 15 वर्षीय लड़की के पिता झब्बू लाल ने दावा किया कि कोली ने आत्महत्या नहीं की, बल्कि उसकी हत्या की गई है. हरिद्वार की चाय की दुकान में मिला शव सुरेंद्र कोली का शव शुक्रवार को हरिद्वार के सप्त सरोवर रोड स्थित एक किराए की चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला. पुलिस ने घटनास्थल की फॉरेंसिक जांच कराई है. शुरुआती तौर पर पुलिस ने मौत को आत्महत्या का मामला माना है और जांच जारी है. शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है. झब्बू लाल ने सवाल उठाया कि जेल से रिहा होने के बाद कई महीने बाहर रहने के दौरान कोली ने आत्महत्या क्यों की. उन्होंने आरोप लगाया कि कोली के पास निठारी मामले से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारी हो सकती थी और इसी वजह से उसकी हत्या की गई. ये भी पढ़ें: जेल से बाहर आने के बाद स्वतंत्र भारद्वाज का वीडियो वायरल, खुद को शेर बताते हुए ASP नेता को चुनौती देते आया नजर 2025 में आखिरी निठारी मामले में भी हुआ था बरी सुरेंद्र कोली 2006 में सामने आए निठारी कांड के मामलों में लंबे समय तक आरोपी रहा. उसे कई मामलों में दोषी ठहराया गया था और मौत की सजा सुनाई गई थी. बाद में अदालतों ने उसे अलग-अलग मामलों में बरी कर दिया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 2025 में निठारी से जुड़े उसके आखिरी मामले में भी उसे बरी कर दिया था. इसके साथ ही वह निठारी से जुड़े सभी 13 मामलों में बरी हो गया था. निठारी कांड दिसंबर 2006 में सामने आया था, जब नोएडा के सेक्टर 31 स्थित एक मकान के आसपास मानव अवशेष मिलने के बाद मामले की जांच शुरू हुई थी. इस मामले में कई बच्चों और युवतियों के लापता होने की घटनाएं सामने आई थीं. The post आत्महत्या या हत्या? सुरेंद्र कोली की मौत पर निठारी पीड़ित के पिता ने उठाए सवाल appeared first on Naya Vichar.

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पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान गिरफ्तार, 6 अक्टूबर को है उपचुनाव

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, कोलकाता में कांग्रेस ने दावा किया है कि पार्टी के नंदीग्राम उम्मीदवार मिलन प्रधान को गिरफ्तार कर लिया गया है. कांग्रेस का कहना है कि यह गिरफ्तारी मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उन्हें समर्थन देने के कुछ ही घंटे बाद हुई. पार्टी ने इस कार्रवाई को लेकर सवाल उठाए हैं. कांग्रेस ने दावा किया कि मिलन प्रधान को 2007 में जमीन अधिग्रहण के खिलाफ हुए प्रदर्शन के संबंध में गिरफ्तार किया गया है. ये भी पढ़ें: TMC Symbol Freeze : ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को भेजे ये तीन नाम और नए चुनाव चिन्ह, देखें पूरी सूची ममता ने कांग्रेस को समर्थन देने की घोषणा की पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने शुक्रवार (18 सितंबर) को घोषणा की कि नंदीग्राम विधानसभा उपचुनाव में उनकी पार्टी कांग्रेस का समर्थन करेगी. उन्होंने यह घोषणा उनके खेमे की उम्मीदवार के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद चुनाव से हटने के कुछ घंटों बाद की. ममता ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के नाम और चुनाव चिह्न पर रोक लगाने के निर्वाचन आयोग के फैसले की भी आलोचना की और कहा कि यह कदम ‘मनमाना’ है. ममता ने आरोप लगाया कि बीजेपी देश भर में विपक्षी दलों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है. उन्होंने कहा, ‘‘बीजेपी ने न केवल बंगाल में बल्कि अन्य राज्यों में भी चुनावों में धांधली की है और अब विपक्षी दलों को खत्म करने की कोशिश कर रही है.” पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम और रेजीनगर विधानसभा सीटों पर 6 अक्टूबर को उपचुनाव होगा. दोनों सीटों पर मतदान के बाद 9 अक्टूबर को वोटों की गिनती की जाएगी और चुनाव के नतीजे सामने आएंगे. तृणमूल कांग्रेस ने कांग्रेस को दिया था ये प्रस्ताव कांग्रेस की बंगाल इकाई ने मंगलवार, 15 सितंबर को दावा किया कि तृणमूल कांग्रेस ने इस महीने की शुरुआत में उसके केंद्रीय नेताओं से संपर्क किया था. कांग्रेस के मुताबिक, छह अक्टूबर के नंदीग्राम उपचुनाव में सीट छोड़ने का प्रस्ताव दिया गया था. हालांकि, तृणमूल ने कांग्रेस के इस दावे को खारिज कर दिया. The post पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम से कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान गिरफ्तार, 6 अक्टूबर को है उपचुनाव appeared first on Naya Vichar.

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यूपी में कृषि निदेशालय में नौकरी पाने का मौका, सैलरी होगी 45000 से ज्यादा

UP Sarkari Naukri 2026: यूपी में जूनियर इंजीनियर एग्रीकल्चर भर्ती में आवेदन योग्य उम्मीदवार आयोग की आधिकारिक वेबसाइट- upsssc.gov.in के जरिए ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. आवेदन करने की आखिरी तारीख 7 अक्टूबर 2026 तय की गई है. ऐसे में उम्मीदवारों को आखिरी तारीख का इंतजार किए बिना फॉर्म भर देना चाहिए. UP Sarkari Naukri 2026: जूनियर इंजीनियर की भर्ती UPSSSC की इस भर्ती के तहत जूनियर इंजीनियर एग्रीकल्चर के कुल 134 पद भरे जाएंगे. आवेदन करने वाले उम्मीदवार के पास UPSSSC PET 2025 का स्कोर कार्ड होना जरूरी है. इसके अलावा शैक्षणिक योग्यता भी पूरी करनी होगी. उम्मीदवार को किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 10वीं पास होना चाहिए. साथ ही किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या बोर्ड से 3 साल का एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग डिप्लोमा होना जरूरी है. ऐसे करें UPSSSC JE Agriculture के लिए आवेदन आवेदन करने के लिए सबसे पहले UPSSSC की आधिकारिक वेबसाइट upsssc.gov.in पर जाएं. वहां Junior Engineer Agriculture Main Examination 2026 के आवेदन लिंक पर क्लिक करें. इसके बाद PET 2025 से जुड़ी जरूरी जानकारी भरकर लॉगिन करें. अब आवेदन फॉर्म में मांगी गई व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी दर्ज करें. इसके बाद जरूरी दस्तावेज अपलोड करें और 25 रुपये आवेदन फीस जमा करें. फॉर्म सबमिट करने से पहले सभी जानकारी अच्छी तरह जांच लें. इसके बाद आवेदन फॉर्म का फाइनल सबमिशन करें और उसकी कॉपी डाउनलोड करके अपने पास जरूर रख लें. UPSSSC JE Recruitment 2026 Notification Check Here कौन कर सकता है अप्लाई? इस भर्ती में आवेदन करने के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम उम्र 40 साल निर्धारित की गई है. उम्र की गणना 1 जुलाई 2026 के आधार पर की जाएगी. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को प्रशासनी नियमों के अनुसार अधिकतम उम्र सीमा में छूट मिलेगी. इसलिए आवेदन करने से पहले अपनी कैटेगरी के हिसाब से आयु सीमा जरूर देख लें. भत्तों के साथ 45 हजार से ज्यादा सैलरी जूनियर इंजीनियर एग्रीकल्चर पद के लिए पे लेवल-6 वेतनमान लागू है. पुराने वेतनमान के अनुसार इस पद के लिए पे बैंड 9,300 से 34,800 रुपये और ग्रेड पे 4,200 रुपये बताया गया है. 7वें वेतन आयोग के पे लेवल-6 के हिसाब से शुरुआती बेसिक पे 35,400 रुपये होता है. इसके अलावा कर्मचारी को नियमानुसार DA, HRA समेत दूसरे भत्ते भी मिलते हैं. इन भत्तों को जोड़ने पर ग्रॉस सैलरी 45 हजार रुपये से ज्यादा हो सकती है. हालांकि वास्तविक इन-हैंड सैलरी पोस्टिंग की जगह और लागू भत्तों के आधार पर अलग हो सकती है. ये भी पढ़ें: BEd वाले बाहर, नहीं भर सकते UP PRT टीचर का फॉर्म, 12000 से ज्यादा वैकेंसी एप्लीकेशन फीस सिर्फ 25 रुपये इस भर्ती के लिए आवेदन शुल्क काफी कम रखा गया है. सामान्य, OBC और EWS वर्ग के उम्मीदवारों को 25 रुपये शुल्क देना होगा. SC और ST वर्ग के लिए भी आवेदन शुल्क 25 रुपये है. दिव्यांग उम्मीदवारों के लिए भी शुल्क 25 रुपये निर्धारित है. फीस का भुगतान UPI, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या नेट बैंकिंग के जरिए किया जा सकता है. ऑनलाइन आवेदन की आखिरी तारीख 7 अक्टूबर 2026 है, जबकि फॉर्म में सुधार करने की आखिरी तारीख 14 अक्टूबर 2026 है. ये भी पढ़ें: UPSC इंजीनियरिंग सर्विस के लिए आवेदन शुरू, पिछले साल से डबल हो गई वैकेंसी The post यूपी में कृषि निदेशालय में नौकरी पाने का मौका, सैलरी होगी 45000 से ज्यादा appeared first on Naya Vichar.

समस्तीपुर

जन संवाद में डीएम ने सुनी आमजनों की समस्याएं, अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई का निर्देश

नया विचार न्यूज़ समस्तीपुर- समाहरणालय सभागार में शुक्रवार को आयोजित जन संवाद कार्यक्रम में जिलाधिकारी रोशन कुशवाहा ने जिले के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे आमजनों की समस्याएं और शिकायतें सुनीं। इस दौरान भूमि एवं राजस्व, आवास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण विकास, विद्युत और आपूर्ति समेत विभिन्न विभागों से जुड़े मामले सामने आए। जिलाधिकारी ने प्रत्येक मामले को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित पदाधिकारियों से आवश्यक जानकारी ली और नियमानुसार समस्याओं के त्वरित एवं गुणवत्तापूर्ण निष्पादन का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जन संवाद में प्राप्त आवेदनों पर प्राथमिकता के आधार पर कार्रवाई की जाए। शिकायतों के निपटारे में अनावश्यक विलंब नहीं हो और आवेदकों को की गई कार्रवाई की जानकारी भी दी जाए। डीएम ने कहा कि आमजनों की समस्याओं का समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से समाधान करना जिला प्रशासन की प्राथमिकता है। जन संवाद के माध्यम से प्रशासन और आम जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित किया जा रहा है। इसके साथ ही पात्र लाभुकों को प्रशासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाने और शिकायतों का नियमानुसार समाधान सुनिश्चित किया जा रहा है। कार्यक्रम में अपर समाहर्ता ब्रजेश कुमार, जिला पंचायत राज पदाधिकारी विष्णु देव मंडल, राजस्व प्रभारी धर्मराज समेत अन्य जिला स्तरीय पदाधिकारी और कर्मी मौजूद थे।

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Dupahiya 2 OTT Release: निरहुआ की नई एंट्री के साथ फिर दौड़ेगी ‘दुपहिया’, प्राइम वीडियो ने अनाउंस की रिलीज डेट

Dupahiya Season 2 OTT Release: ‘दुपहिया’ की पहली सीरीज में एक बाइक की चोरी ने धड़कपुर गांव की पूरी जिंदगी बदल दी थी. 25 साल से क्राइम फ्री इस गांव में पहली बार चोरी हुई और इसके बाद एक के बाद एक ऐसी गड़बड़ियां शुरू हुईं कि हर कोई परेशान हो गया. अब यही गांव एक बार फिर लौट रहा है, लेकिन इस बार मामला और भी बड़ा होने वाला है. ‘दुपहिया सीजन 2’ की रिलीज डेट सामने आ गई है. गजराज राव और रेणुका शहाणे स्टारर यह कॉमेडी सीरीज अक्टूबर में प्राइम वीडियो पर आएगी. आइए जानते हैं कब और क्या देखने को मिलेगा. कब रिलीज होगा ‘दुपहिया 2’? View on Instagram अमेजन प्राइम वीडियो ने सोशल मीडिया पर इस सीरीज का नया पोस्टर शेयर करते हुए रिलीज की तारीख का ऐलान कर दिया है. ‘दुपहिया 2’ आने वाली 1 अक्टूबर 2026 को सीधे आपके मोबाइल और टीवी स्क्रीन यानी प्राइम वीडियो पर रिलीज होगी. पोस्टर में लिखा गया है, ‘सुनो सुनो सुनो, धड़कपुर अब क्राइम फ्री नहीं रहा.’ नए पोस्टर में दो लड़के और एक लड़की कुर्सी पर हाथ बंधे हुए लाचार बैठे दिखाई दे रहे हैं, जिससे साफ है कि इस बार मामला और भी टेढ़ा होने वाला है. ये भी पढ़ें: Friday OTT Releases: वीकेंड का प्लान यहीं बनाइए, 18 सितंबर को ओटीटी पर आ रही हैं ये 7 फिल्में-सीरीज इस बार क्या नया देखने को मिलेगा? पहले सीजन की कहानी जहां खत्म हुई थी, वहां रोशनी की शादी रुक गई थी और चोरी हुई बाइक का मामला भी उलझा रह गया था. अब सीजन 2 में देखना यह होगा कि क्या रोशनी और भूगोल के पिता बनवारी झा (गजराज राव) को उनका प्रमोशन मिल पाएगा? वहीं गांव की मुखिया पुष्पलता (रेणुका शहाणे) इस नए झमेले से गांव को कैसे बचाएंगी? मेकर्स का कहना है कि इस बार कहानी में पहले से ज्यादा हंसी, नए चैलेंज और मजेदार ड्रामे का तड़का होगा. ये भी पढ़ें: Friday South OTT Releases: सूरज ढलते ही एलियन बनने वाली दुल्हन से रवि तेजा के एक्शन तक, इन साउथ फिल्मों से बनाएं वीकेंड एंटरटेनिंग कास्ट में हुई भोजपुरी स्टार ‘निरहुआ’ की एंट्री इस नए सीजन में पुराने सभी चहेते चेहरे तो लौट ही रहे हैं, साथ ही एक नया बड़ा नाम भी जुड़ गया है. गजराज राव, रेणुका शहाणे, यशपाल शर्मा, स्पर्श श्रीवास्तव, भुवन अरोड़ा और शिवानी रघुवंशी के साथ-साथ इस बार भोजपुरी सुपरस्टार दिनेश लाल यादव उर्फ निरहुआ भी नजर आने वाले हैं. निरहुआ के जुड़ने से धड़कपुर गांव की कॉमेडी का रंग और भी गाढ़ा होने वाला है. The post Dupahiya 2 OTT Release: निरहुआ की नई एंट्री के साथ फिर दौड़ेगी ‘दुपहिया’, प्राइम वीडियो ने अनाउंस की रिलीज डेट appeared first on Naya Vichar.

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टाटा स्टील के टिनप्लेट डिवीजन में फिर हादसा, एक मजदूर की मौत, दो घायल, एक हफ्ते में दूसरी दुर्घटना

जमशेदपुर : टाटा स्टील के टिनप्लेट डिवीजन में हादसे में एक मजदूर की मौत हो गई है. वहीं, दो मजदूर गंभीर है. गंभीर हालत में टीएमएच के सीसीयू में इलाज जारी है. जानकारी के मुताबिक कंपनी विस्तारिकरण के दौरान बड़ी बाउंड्री बनाई जा रही है. इसी सिलसिले में मिट्टी भरने का काम हो रहा था. इसी दौरान हादसे में मजदूर की मौत हो गई है. मृतक की पहचान नहीं हो सकी है. हालांकि सूत्रों के मुताबिक मृतक मजदूर बागबेड़ा का रहने वाला है. वहीं, कंपनी द्वारा अभी तक इस मामले में आधिकारिक तौर पर कोई बयान नहीं आया है. उलझे विधायक प्रतिनिधि गुंजन यादव. आधे घंटे में पहुंचे कंपनी के अधिकारी, नहीं तो करेंगे गेट जाम : गुंजन घटना के बाद विधायक प्रतिनिधि गुंजन यादव टिनप्लेट अस्पताल पहुंचे. उन्हेंने कंपनी के अधिकारियों की जिम्मेवारी को लेकर सवाल खड़ा किया. इसी दाैरान कंपनी से जुड़े एक व्यक्ति से किसी बात को लेकर बकझक हो गयी. गुंजन यादव ने कहा – कंपनी की भारी लापरवाही है. इस क्षेत्र में भाजपा के दो मंडल अध्यक्ष हैं. लेकिन, किसी को भी जानकारी नहीं दी गयी. उन्होंने अल्टीमेटम देते हुए कहा कि आधे घंटे के अंदर कंपनी के अधिकारी बातचीत करें, नहीं तो कंपनी गेट जाम कर दिया जायेगा. The post टाटा स्टील के टिनप्लेट डिवीजन में फिर हादसा, एक मजदूर की मौत, दो घायल, एक हफ्ते में दूसरी दुर्घटना appeared first on Naya Vichar.

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PMOS में सिर्फ दवा नहीं, सही लाइफस्टाइल भी जरूरी, जानें डॉक्टर की सलाह और सही डाइट-एक्सरसाइज

डॉ. रजनी बगई, सीनियर कंसल्टेंट – गायनेकोलॉजी एवं प्रसूति विज्ञान, नारायण अस्पताल, हावड़ा और चूनावटी PCOS Lifestyle: पॉलीएंडोक्राइन मेटाबॉलिक ओवेरियन सिंड्रोम (PMOS), जिसे पहले पॉलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (PCOS) कहा जाता था, एक ऐसी बीमारी है जिसके होने की पूरी वजह अभी साफ नहीं है. इतना जरूर पता है कि शरीर में हार्मोन का संतुलन बिगड़ने से कई तरह की समस्याएं शुरू हो सकती हैं. इससे ओव्यूलेशन में परेशानी, शरीर में एंड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन का बढ़ना, इंसुलिन का ठीक से काम न करना और लंबे समय तक सूजन जैसी स्थिति हो सकती है. इसकी वजह से पीरियड्स अनियमित हो सकते हैं, चेहरे या शरीर पर ज्यादा बाल आ सकते हैं और मुहांसे भी हो सकते हैं. लंबे समय में इसका असर प्रजनन क्षमता, डायबिटीज और हृदय रोग के जोखिम पर भी पड़ सकता है. कुछ मामलों में कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है. PMOS में मोटापे का क्या कनेक्शन है? यह अभी साफ नहीं है कि PMOS की वजह से वजन बढ़ता है या ज्यादा वजन होने से PMOS का खतरा बढ़ता है. हालांकि, PMOS से जूझ रही 30 प्रतिशत से ज्यादा स्त्रीएं ओवरवेट या मोटापे से ग्रस्त होती हैं. साथ ही, PMOS वाली स्त्रीओं के लिए वजन कम करना दूसरी स्त्रीओं की तुलना में मुश्किल हो सकता है. अच्छी बात यह है कि शरीर का सिर्फ 5-10 प्रतिशत वजन कम होने पर भी इंसुलिन प्रतिरोध और अनियमित पीरियड्स जैसी कई समस्याओं में सुधार देखा गया है. इसलिए आहार और व्यायाम PMOS को मैनेज करने के अहम तरीके हैं. PMOS में खान-पान क्यों जरूरी है? खान-पान में बदलाव करके वजन कम करने से PMOS में लंबे समय से बनी सूजन को कम करने और शरीर में बढ़े हुए पुरुष हार्मोन को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, अभी तक ऐसा कोई एक खास डाइट प्लान नहीं मिला है, जिसे PMOS के लिए सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाए. इसलिए किसी ट्रेंड या फैड डाइट के पीछे भागने के बजाय ऐसा खाना चुनना बेहतर है, जिसे लंबे समय तक आसानी से अपनाया जा सके. PMOS में व्यायाम का क्या फायदा है? एरोबिक एक्सरसाइज PMOS वाली स्त्रीओं में BMI कम करने में मदद कर सकती है. एक अध्ययन में पाया गया कि PMOS वाली स्त्रीओं के लिए बेहतर स्वास्थ्य परिणाम पाने के लिए हर सप्ताह कम से कम 120 मिनट तेज गति वाला व्यायाम जरूरी हो सकता है. हालांकि, अभी पर्याप्त सबूत नहीं हैं कि कोई एक खास तरह का व्यायाम बाकी व्यायामों से ज्यादा फायदेमंद है. कुछ अध्ययनों में योग को दूसरे व्यायामों से बेहतर बताया गया है, लेकिन इसके समर्थन में उपलब्ध सबूत बहुत मजबूत नहीं हैं. PMOS में सकारात्मक सोच भी जरूरी PMOS से जूझने वाली स्त्रीओं को वजन बढ़ने, शरीर पर ज्यादा बाल आने और मुहांसों की वजह से अपनी बॉडी इमेज को लेकर परेशानी हो सकती है. इससे आत्मविश्वास कम हो सकता है और रोजाना की लाइफस्टाइल में जरूरी बदलाव करना भी मुश्किल लग सकता है. इसलिए PMOS को मैनेज करने में आत्मविश्वास बनाए रखना और सकारात्मक सोच रखना भी जरूरी है. जब स्त्रीओं को यह पता होता है कि उन्हें जो बदलाव करने हैं, वे आसान और लंबे समय तक अपनाए जा सकते हैं, तो उन्हें अपनी दिनचर्या में शामिल करना भी आसान होता है. इसी वजह से बहुत मुश्किल फैड डाइट या महंगे एक्सरसाइज प्रोग्राम कई बार उल्टा असर डाल सकते हैं. डाइट और एक्सरसाइज को आसान और टिकाऊ बनाएं 71 देशों में हुए अध्ययनों के आधार पर PMOS के लिए तैयार प्रमाण-आधारित दिशानिर्देशों में सभी स्त्रीओं के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव की सलाह दी गई है. इसमें किसी एक खास डाइट या व्यायाम को जरूरी नहीं बताया गया है. दिशानिर्देशों के अनुसार, कुछ शारीरिक गतिविधि करना बिल्कुल सक्रिय न रहने से बेहतर है. इसी तरह, स्वस्थ खान-पान के सामान्य नियमों के अनुसार अपनाया गया कोई भी संतुलित आहार स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद हो सकता है. 2023 के प्रमाण-आधारित PCOS दिशानिर्देशों के अनुसार वजन बढ़ने से रोकने के लिए: 18-64 साल की उम्र में हर सप्ताह कम से कम 150-300 मिनट मध्यम-तीव्रता वाली शारीरिक गतिविधि या 75-150 मिनट तेज गति वाली एरोबिक गतिविधि करने की सलाह दी गई है. इसके साथ सप्ताह में 2 अलग-अलग दिनों में मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज भी करनी चाहिए. वजन कम करने के लिए: हर सप्ताह 250 मिनट मध्यम-तीव्रता वाली गतिविधि या 150 मिनट तेज-तीव्रता वाली गतिविधि का लक्ष्य रखा जा सकता है. इसके साथ, संभव हो तो सप्ताह में 2 अलग-अलग दिनों में मांसपेशियों को मजबूत करने वाली एक्सरसाइज करनी चाहिए. किशोरों के लिए: हर दिन कम से कम 60 मिनट मध्यम से तेज गति वाली शारीरिक गतिविधि का लक्ष्य रखना चाहिए. इसमें सप्ताह में कम से कम 3 बार मांसपेशियों और हड्डियों को मजबूत करने वाली गतिविधियां शामिल होनी चाहिए. मध्यम और तेज व्यायाम में क्या अंतर है? मध्यम-तीव्रता वाली गतिविधि का मतलब ऐसा व्यायाम है, जिससे आपकी हार्ट रेट अधिकतम स्तर के करीब 50-60 प्रतिशत तक पहुंच जाए. इस दौरान आप बात कर सकते हैं, लेकिन गाना नहीं गा पाएंगे. वहीं तेज-तीव्रता वाले व्यायाम में हार्ट रेट करीब 70-90 प्रतिशत तक पहुंच सकता है. इस दौरान सांस लेने के लिए रुकने से पहले आप सिर्फ कुछ शब्द ही बोल पाएंगे. यह भी पढ़ें: 76 की उम्र में भी कैसे फिट और एक्टिव हैं पीएम मोदी? जानें उनकी खास आदतें The post PMOS में सिर्फ दवा नहीं, सही लाइफस्टाइल भी जरूरी, जानें डॉक्टर की सलाह और सही डाइट-एक्सरसाइज appeared first on Naya Vichar.

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AK-47 आरोप से MLC चुनाव तक… मोकामा में बढ़ी अदावत, आमने-सामने आए अनंत सिंह-नीरज कुमार

Anant Singh vs Neeraj Kumar “नीरज कुमार ने मेरे घर में AK-47 रखवाकर मुझे फंसाया था और जेल भिजवाया था.” मोकामा विधायक अनंत सिंह के इस आरोप ने जेडीयू के भीतर चल रही नेतृत्वक खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है. पटना MLC चुनाव से ठीक पहले अनंत सिंह ने जेडीयू के एमएलसी नीरज कुमार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए उन्हें चुनाव में हराने की बात कही है. वहीं, नीरज कुमार ने भी इन आरोपों पर पलटवार करते हुए कहा कि अगर अनंत सिंह के पास कोई प्रमाण है तो उन्हें कोर्ट जाना चाहिए. अनंत सिंह ने शुक्रवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि MLC चुनाव पार्टी का चुनाव नहीं है और वह नीरज कुमार को हराकर रहेंगे. उन्होंने नीरज कुमार पर अपने और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह के चुनाव का विरोध करने का भी आरोप लगाया. अपराधियों के लिए कहर हैं नीरज कुमार ने अनंत सिंह के आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “बहुत लोग हमारे ऊपर आरोप लगा रहे हैं. हम तो अपराधियों के लिए कहर हैं.” AK-47 से जुड़े आरोप पर उन्होंने कहा कि अगर अनंत सिंह के पास प्रमाण है तो वह कोर्ट जाएं. नीरज कुमार ने आरोपों को अनर्गल बताते हुए कहा कि इसके लिए कानूनी रास्ता अपनाया जाना चाहिए. इस विवाद के बीच शुक्रवार को जेडीयू के ओरिएंटेशन कार्यक्रम में भी अनंत सिंह और केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की गैरमौजूदगी चर्चा का विषय रही. कार्यक्रम में पार्टी के विधायकों और विधान पार्षदों की मौजूदगी अनिवार्य थी. ऐसे में दोनों नेताओं के नहीं पहुंचने को लेकर पार्टी के अंदर और बाहर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं. बिहार से जुड़ी अन्य ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें.. 2015 में बदले रिश्ते, जब आमने-सामने आए अनंत-नीरज अनंत सिंह और नीरज कुमार दोनों मोकामा की नेतृत्व से जुड़े हैं और दोनों भूमिहार समुदाय से आते हैं. दोनों का संबंध जेडीयू से रहा है. लेकिन 2015 के विधानसभा चुनाव ने दोनों नेताओं के रिश्तों में बड़ा बदलाव ला दिया. 2015 में जेडीयू ने मोकामा विधानसभा सीट से अनंत सिंह की जगह नीरज कुमार को अपना उम्मीदवार बनाया. नीरज कुमार जेडीयू के टिकट पर मैदान में उतरे, जबकि अनंत सिंह ने निर्दलीय चुनाव लड़ा. चुनाव में अनंत सिंह ने नीरज कुमार को करीब 18 हजार वोटों से हराया. अनंत सिंह को 54,005 वोट मिले, जबकि नीरज कुमार को 35,657 वोट मिले. इस चुनाव के बाद दोनों नेताओं के बीच नेतृत्वक दूरी बढ़ने की चर्चा होती रही. मोकामा बना सियासी टकराव का केंद्र दोनों नेताओं की नेतृत्व का मुख्य केंद्र मोकामा रहा है. एक ही इलाके से आने और लंबे समय तक एक ही पार्टी से जुड़े रहने के बावजूद दोनों के बीच नेतृत्वक मतभेद समय के साथ बढ़ते गए. मोकामा और आसपास के इलाकों में नेतृत्वक प्रभाव, समर्थकों के नेटवर्क और संगठन में पकड़ को लेकर भी दोनों खेमों के बीच खींचतान की चर्चा होती रही है. अनंत सिंह के करीबियों का दावा है कि जब वह जेल में थे, तब नीरज कुमार ने उन्हें जेडीयू का टिकट दिए जाने का विरोध किया था. वहीं, अनंत सिंह और सोनू-मोनू गिरोह के बीच हुए विवाद के दौरान भी दोनों नेताओं के बीच दूरी बढ़ने की बात कही जाती है. 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी दोनों के बीच तल्खी की चर्चा सामने आई. खासकर नीरज कुमार के मोकामा को लेकर दिए गए ‘टेटन’ वाले बयान को अनंत सिंह के खिलाफ टिप्पणी के तौर पर देखा गया. ‘टेटन’ वाले बयान ने बढ़ाई तल्खी 2025 के विधानसभा चुनाव से पहले केंद्रीय मंत्री ललन सिंह की पहल के बाद अनंत सिंह की जेडीयू में वापसी हुई और पार्टी ने उन्हें मोकामा से उम्मीदवार बनाया. उस समय अनंत सिंह जेल में थे और ललन सिंह ने उनके चुनाव प्रचार की जिम्मेदारी संभाली थी. नीरज कुमार ने अनंत सिंह के लिए चुनाव प्रचार करने से इनकार किया था. उन्होंने कहा था कि आपराधिक पृष्ठभूमि वाले व्यक्ति के लिए प्रचार कर वह अपने माथे पर कलंक का टीका नहीं लगाना चाहते. इसी दौरान उन्होंने “मोकामा की तकदीर पर टेटन लग गया है” जैसी टिप्पणी की थी. अनंत सिंह के करीबियों के मुताबिक, यह टिप्पणी उनके खिलाफ सीधा नेतृत्वक हमला थी. अब MLC चुनाव में नीरज कुमार को हराने के ऐलान और AK-47 से जुड़े गंभीर आरोपों के बाद दोनों नेताओं के बीच पुरानी नेतृत्वक तल्खी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है. Also Read ‘AK-47 रखकर फंसाया, जेल भिजवाया’, JDU की बैठक के बीच अनंत सिंह का नीरज कुमार पर हमला The post AK-47 आरोप से MLC चुनाव तक… मोकामा में बढ़ी अदावत, आमने-सामने आए अनंत सिंह-नीरज कुमार appeared first on Naya Vichar.

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नंदीग्राम उपचुनाव: सीएम शुभेंदु से मुलाकात के बाद ममता खेमे की उम्मीदवार ने वापस लिया नामांकन

पश्चिम बंगाल के नंदीग्राम उपचुनाव में शुक्रवार को बड़ा नेतृत्वक उलटफेर सामने आया. ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट की उम्मीदवार संचिता प्रधान डे ने अपना नामांकन वापस ले लिया. इससे नंदीग्राम उपचुनाव में ममता खेमे की ओर से कोई उम्मीदवार नहीं रह गया है. खास बात यह है कि नामांकन वापस लेने से पहले संचिता प्रधान डे ने राज्य सचिवालय नबान्न में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की थी. शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात के बाद वापस लिया नामांकन संचिता प्रधान डे शुक्रवार दोपहर अपने पति सत्यजीत के साथ नबान्न पहुंचीं. वहां उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी से मुलाकात की. दोनों के बीच काफी देर तक बातचीत हुई. इसके बाद संचिता ने नंदीग्राम उपचुनाव से अपना नामांकन वापस ले लिया. नामांकन वापसी की अंतिम तारीख शनिवार है. ये भी पढे़ं: पाकिस्तान में लॉकडाउन जैसे नियम, रात 9 बजे बाजार बंद, शादी में सिर्फ एक डिश, जानें क्यों बढ़ी मुश्किलें? कुछ दिन पहले ही बनाया गया था उम्मीदवार ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस गुट ने 13 सितंबर को नंदीग्राम उपचुनाव के लिए संचिता प्रधान डे को उम्मीदवार घोषित किया था. वह पेशे से शिक्षिका हैं और नंदीग्राम की स्थानीय नेतृत्व में भी सक्रिय रही हैं. इसके बाद 16 सितंबर को उन्होंने नंदीग्राम सीट से अपना नामांकन दाखिल किया था. उस समय तृणमूल कांग्रेस के दोनों गुट पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न पर दावा कर रहे थे. अब नामांकन वापसी के बाद ममता खेमे के लिए नंदीग्राम उपचुनाव में उम्मीदवार का सवाल फिर से अहम हो गया है. चुनाव आयोग ने 6 अक्टूबर को नंदीग्राम समेत पश्चिम बंगाल की विधानसभा सीटों पर उपचुनाव की तारीख तय की है. The post नंदीग्राम उपचुनाव: सीएम शुभेंदु से मुलाकात के बाद ममता खेमे की उम्मीदवार ने वापस लिया नामांकन appeared first on Naya Vichar.

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यूपी में 2027 चुनाव से पहले राज्यसभा का चुनावी रण, बीजेपी की दावेदारी मजबूत, दलित वोट पर सपा की नज़र, शून्य की कगार पर बसपा

UP Rajya Sabha Election: उत्तर प्रदेश की नेतृत्व में आगामी नवंबर महीने में बड़ा सियासी उलटफेर देखने को मिलेगा. राज्य की 10 उच्च सदन सीटों पर कार्यकाल समाप्त होने के कारण चुनाव आयोजित कराए जाएंगे. विधानसभा चुनाव 2027 से ठीक पहले यह मुकाबला सभी प्रमुख दलों के लिए शक्ति प्रदर्शन का मंच बन चुका है. वर्तमान में विधानसभा के बदले समीकरणों से प्रत्येक पार्टी अपनी रणनीति को अंतिम रूप देने में जुटी है. इस प्रक्रिया के माध्यम से नेतृत्वक ताकत का आकलन भी आसानी से किया जा सकेगा. राज्यसभा चुनाव: नया समीकरण उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की 10 सीटों पर विधायकों के संख्या बल के हिसाब से नया गणित बना है. 2017 के चुनाव आधार पर बीजेपी के पास 9 और सपा के पास 1 सीट थी. बदला हुआ समीकरण इस प्रकार है: बीजेपी (8 सीटें): मजबूत संख्या बल से बीजेपी आसानी से 8 सीटें जीत सकती है. समाजवादी पार्टी (2 सीटें): बदला गणित सपा के पक्ष में है, जिससे उसे 2 सीटों का लाभ तय है. बसपा (0 सीट): कम विधायकों के कारण बसपा का खाता खाली रहेगा. सपा का पीडीए दांव और दलित नेतृत्व समाजवादी पार्टी दो सीटों पर जीत दर्ज करने की स्थिति में है। पहली सीट पर अनुभवी नेता रामगोपाल यादव का दोबारा चुना जाना तय माना जा रहा है. दूसरी रिक्ति के लिए अखिलेश यादव सामाजिक संतुलन साधने की तैयारी में हैं. पार्टी इस बार किसी गैर-यादव पिछड़ा या दलित उम्मीदवार को सदन में भेज सकती है. इसके जरिए ‘पीडीए’ फॉर्मूले को जमीन पर मजबूती देने का प्रयास रहेगा. पश्चिम उत्तर प्रदेश के समीकरण संभालने के लिए गुर्जर अथवा जाट उम्मीदवार को भी जिम्मेदारी देने पर विचार जारी है. बीजेपी की रणनीति और बसपा का घटता जनाधार हिंदुस्तानीय जनता पार्टी विधानसभा में अपनी मजबूत स्थिति के बल पर 8 सीटें जीतने का अनुमान लगा रही है. पूर्व उप मुख्यमंत्री के रिक्त स्थान पर वरिष्ठ ब्राह्मण चेहरे को अवसर दिया जा सकता है. इसके अतिरिक्त, लोकसभा चुनावों में पिछड़ने वाले क्षेत्रीय दिग्गजों को भी मौका मिलने की संभावना जताई जा रही है. दूसरी तरफ, विधायकों की कमी के कारण बहुजन समाज पार्टी की उपस्थिति समाप्त होने के कगार पर है. प्रस्तावक न मिलने से बसपा के लिए उम्मीदवार उतारना अत्यंत कठिन साबित हो रहा है. क्षेत्रीय संतुलन और आगामी चुनाव की बिसात राज्यसभा की इन 10 सीटों के नतीजे न केवल संसद में दलों की ताकत तय करेंगे, बल्कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए एक बड़ा नेतृत्वक संदेश भी देंगे. बीजेपी जहां अपने ब्राह्मण, पिछड़े और जाट-गुर्जर समीकरणों के सहारे पूर्वांचल से लेकर पश्चिम यूपी तक अपनी पकड़ बनाए रखना चाहती है, वहीं समाजवादी पार्टी का पूरा जोर ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को मजबूत आधार देने पर है. बीएसपी का इस चुनाव से बाहर होना यह साफ संकेत देता है कि राज्य में अब मुख्य मुकाबला सीधे तौर पर बीजेपी और सपा के बीच ही सिमट कर रह गया है. Must Read: इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकीलों का महासंग्राम, 30 पदों पर 263 दावेदार, जानें कब आएंगे परिणाम The post यूपी में 2027 चुनाव से पहले राज्यसभा का चुनावी रण, बीजेपी की दावेदारी मजबूत, दलित वोट पर सपा की नज़र, शून्य की कगार पर बसपा appeared first on Naya Vichar.

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