स्त्री पत्रकार ऋचा परासर ने राहुल गांधी और अन्य लोगों के खिलाफ नई दिल्ली जिले के डीसीपी को शिकायत दी है. उन्होंने 12 अक्टूबर 2026 को सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन की रिपोर्टिंग के दौरान कथित बदसलूकी, धमकी और आपराधिक बल के इस्तेमाल का आरोप लगाते हुए तत्काल FIR दर्ज करने की मांग की है. शिकायत में हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (BNS), 2023 की पांच धाराओं के तहत कार्रवाई की मांग की गई है.
क्या है पूरा मामला?
ऋचा परासर की शिकायत के मुताबिक,12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन के दौरान रिपोर्टिंग करते समय उनके साथ कथित तौर पर दुर्व्यवहार किया गया.शिकायत में राहुल गांधी और अन्य लोगों पर धमकी देने और आपराधिक बल का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए गए हैं. दावा किया गया है कि घटना के समय पत्रकार तीन महीने की गर्भवती थीं. घटना के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती भी होना पड़ा था. इस घटना से जुड़ा वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था.
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स्त्री पत्रकार का क्या है आरोप?
पत्रकार ऋचा परासर के आरोपों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के बाहर राहुल गांधी के निकलने के दौरान उन्होंने उनसे सवाल करने के लिए अपना माइक आगे किया था. इसी दौरान राहुल गांधी ने कथित तौर पर उन्हें कंधे से पकड़कर खींचा.
ऋचा का आरोप है कि इसके बाद राहुल गांधी के सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें धक्का दिया, जिससे वह सीढ़ियों पर गिर गईं. उन्होंने यह भी दावा किया कि इस घटना में उनका फोन टूट गया. ऋचा ने बताया कि घटना के बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने पेट में हल्के दर्द की शिकायत की. उनके मुताबिक, वह उस समय तीन महीने की गर्भवती थीं, लेकिन उन्होंने पहले इस बारे में किसी को जानकारी नहीं दी थी.पत्रकार के अनुसार, अस्पताल में जांच के दौरान उन्होंने नर्स को अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में बताया. इसके बाद उनका एक्स-रे नहीं किया गया और अल्ट्रासाउंड कराया गया.
किन धाराओं में कार्रवाई की मांग?
ऋचा परासर ने हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023 की धारा 74, 115(2), 131, 125 और 3(5) के तहत कार्रवाई की मांग की है.
- धारा 74: स्त्री की गरिमा को ठेस पहुंचाने के इरादे से हमला करने या आपराधिक बल का इस्तेमाल करने से संबंधित है।
- धारा 115(2): जानबूझकर चोट पहुंचाने के लिए सजा का प्रावधान करती है।
- धारा 131: उन मामलों में हमला या आपराधिक बल इस्तेमाल करने की सजा से संबंधित है, जो धारा 130 में बताए गए गंभीर हमले की श्रेणी में नहीं आते।
- धारा 125: ऐसे लापरवाह या उतावले कृत्य से संबंधित है, जिससे मानव जीवन या व्यक्तिगत सुरक्षा को खतरा पैदा हो सकता है।
- धारा 3(5): जब कई लोग साझा इरादे से कोई आपराधिक कृत्य करते हैं, तो उनकी संयुक्त जिम्मेदारी तय करने से संबंधित है.
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