‘आशिक बनाया आपने’ से रातोंरात पहचान बनाने वाली जमशेदपुर की तनुश्री दत्ता कुछ साल बाद फिल्मों से दूर हो गईं. साल 2008 में फिल्म ‘हॉर्न ओके प्लीज’ के सेट पर नाना पाटेकर के साथ उनका विवाद हुआ था. तनुश्री ने नाना पर ‘गलत तरीके से छूने’ के आरोप लगाए, जिन्हें नाना पाटेकर ने खारिज कर दिया. क्या इस विवाद का असर तनुश्री के करियर पर पड़ा? हां, तनुश्री के दावों के अनुसार, टॉप की रेस में शामिल हो चुकी उस एक्ट्रेस के हाथों से रातों रात फिल्में छूटने लगीं और एक वक्त ऐसा भी आया, जब इंडस्ट्री के डायरेक्टर्स ने उनसे किनारा कर लिया था.
हालांकि, इसका कोई पक्का सबूत नहीं है. लेकिन इस मामले ने बॉलीवुड में चलने वाले कैंप और लॉबी के स्पोर्ट्स पर सवाल जरूर खड़े किए
करीब 40 साल से फिल्म इंडस्ट्री को करीब से देख रहे सीनियर एंटरटेनमेंट जर्नलिस्ट इंदरमोहन पन्नू बताते हैं कि बॉलीवुड में कैंपबाजी कोई नई बात नहीं है. उनके मुताबिक, कई बार किसी कलाकार या टेक्नीशियन को एक खास ग्रुप से जुड़ा मान लिया जाता है. इसके बाद दूसरे ग्रुप के लोग उसके साथ काम करने से बचने लगते हैं. इसका सबसे ज्यादा नुकसान उन लोगों को होता है, जिनके पास बड़े नामों का सहारा नहीं होता.
सुशांत टीवी से फिल्मों में आए थे. ‘काई पो चे!’, ‘एमएस धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’ और ‘छिछोरे’ जैसी फिल्मों से उन्होंने अपनी पहचान बनाई. इसके बावजूद उनकी मौत के बाद यह सवाल उठा कि क्या उन्हें इंडस्ट्री में वह सपोर्ट मिला, जो बड़े फिल्मी परिवारों से आने वाले कलाकारों को आसानी से मिल जाता है.
कंगना रनौत ने उस दौरान करण जौहर और बॉलीवुड के प्रभावशाली लोगों पर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि सुशांत के साथ इंडस्ट्री में गलत व्यवहार हुआ और उन्हें अलग-थलग किया गया. सोशल मीडिया पर भी कई लोगों ने दावा किया कि सुशांत को फिल्मों से दूर रखने की कोशिश की गई. हालांकि, इन आरोपों को किसी साबित हो चुकी साजिश की तरह पेश करना सही नहीं होगा.
सुशांत की मौत की जांच और उनके करियर को लेकर उठे सवाल दो अलग बातें हैं. उनकी मौत के पीछे किसी फिल्मी कैंप का हाथ होने का कोई पक्का सबूत सामने नहीं आया. लेकिन इस घटना ने एक सवाल जरूर खड़ा किया: क्या इंडस्ट्री में बाहर से आने वाले कलाकारों को अपनी जगह बनाने के लिए ज्यादा संघर्ष करना पड़ता है?
कंगना रनौत: बॉलीवुड के ग्रुप पर खुलकर बोलीं
कंगना रनौत उन एक्ट्रेसेज में हैं, जिन्होंने बॉलीवुड के कैंप और नेपोटिज्म पर खुलकर बात की. सुशांत की मौत के बाद उन्होंने फिल्म इंडस्ट्री के कुछ बड़े नामों पर सवाल उठाए. उनका कहना रहा है कि बॉलीवुड में कुछ प्रभावशाली लोगों का ऐसा ग्रुप है, जो यह तय करने की ताकत रखता है कि किसके साथ काम करना है और किससे दूरी बनानी है.
क्या इसके पीछे किसी खास कैंप का हाथ था? इसका कोई निर्णायक सबूत नहीं है. विवेक के करियर में गिरावट के कई कारण हो सकते हैं. लेकिन उनका अनुभव यह सवाल जरूर उठाता है कि अगर किसी एक्टर का किसी बड़े स्टार से विवाद हो जाए, तो क्या इंडस्ट्री में उसके लिए काम करना मुश्किल हो सकता है?
अभय देओल ने भी उठाए थे सवाल
अभय देओल ने भी बॉलीवुड में लॉबी और अवॉर्ड शो के तरीके पर सवाल उठाए थे. फिल्म ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ के लिए अवॉर्ड्स में उनकी और फरहान अख्तर की कैटेगरी को लेकर उन्होंने आपत्ति जताई थी. उनका कहना था कि उन्हें सहायक कलाकारों की श्रेणी में रखा गया, जबकि ऋतिक रोशन और कैटरीना कैफ को मुख्य कलाकारों की श्रेणी में जगह मिली.
अभय ने इस मामले को लॉबिंग से जोड़कर देखा और अवॉर्ड शो की व्यवस्था पर सवाल उठाए. उन्होंने यह भी कहा था कि फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा होने के बावजूद कई बार उन्हें बाहरी जैसा महसूस होता है.
इसका मतलब यह नहीं कि हर स्टार किड सफल हो जाता है या हर आउटसाइडर के साथ भेदभाव होता है. सवाल सिर्फ इतना है कि क्या दोनों को अपनी प्रतिभा दिखाने का बराबर मौका मिलता है? अगर किसी कलाकार को ऑडिशन तक पहुंचने का मौका ही न मिले, तो उसकी एक्टिंग का फैसला कैसे होगा?
तनुश्री दत्ता का मामला क्या सवाल छोड़ता है?
तनुश्री और नाना पाटेकर का विवाद 2008 में हुआ था. साल 2018 में तनुश्री ने इस मामले को फिर सार्वजनिक रूप से उठाया, जिसके बाद यह मीटू आंदोलन से जुड़ी बड़ी चर्चाओं में शामिल हुआ. नाना ने आरोपों से इनकार किया था.
मुंबई पुलिस ने 2019 में पर्याप्त सबूत नहीं मिलने के आधार पर मामले में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी. इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि किसी लॉबी ने तनुश्री का करियर खत्म कर दिया.
लेकिन उनका मामला एक सवाल जरूर छोड़ता है. विवाद के बाद उनके करियर पर कितना असर पड़ा? क्या उन्हें पहले की तरह फिल्में मिलीं या उनके फिल्मों से दूर होने के पीछे दूसरे कारण थे? इसका जवाब देने के लिए उनके करियर और उस दौर के बयानों की अलग से पड़ताल करनी होगी.
तनुश्री का उदाहरण कैंपबाजी का पक्का सबूत नहीं है. यह उस सवाल को उठाने का आधार है, जो बॉलीवुड में लंबे समय से चर्चा में है. अगर किसी कलाकार का किसी प्रभावशाली व्यक्ति से विवाद हो जाए, तो क्या उसके लिए पहले की तरह काम करना आसान रहता है?
क्या बिना किसी कैंप के बॉलीवुड में सफलता नहीं मिल सकती?
बिल्कुल मिल सकती है. बॉलीवुड और ओटीटी में ऐसे कई कलाकार हैं, जिन्होंने फिल्मी परिवार से न होने के बावजूद अपनी जगह बनाई है. लेकिन यह भी सच है कि संपर्क, पहचान, पीआर और बड़े लोगों का भरोसा काम पाने में मदद कर सकता है.
हर असफलता के पीछे लॉबी की साजिश तलाशना गलत होगा. लेकिन यह पूछना भी जरूरी है कि कलाकार को काम उसकी प्रतिभा के आधार पर मिल रहा है या उसके संपर्क देखकर फैसला हो रहा है.
बॉलीवुड में चुनौती सिर्फ एक फिल्म हासिल करना नहीं है. असली चुनौती लगातार काम पाना और अपनी जगह बनाए रखना है. अगर किसी कलाकार को अपनी प्रतिभा दिखाने का मौका ही नहीं मिलता, तो फिर उसकी योग्यता का फैसला आखिर कौन करेगा?
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