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Author name: Vinod Jha

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असम बाढ़ का कहर: 80 लोगों की मौत, 379 गांव पानी में डूबे, 1.92 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित

Assam Floods: असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है. डिजास्टर रिपोर्टिंग एंड इंफॉर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम (DRIMS) की 31 जुलाई तक की रिपोर्ट के अनुसार, राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 80 हो गई है. वहीं, पांच जिलों में 1,92,799 लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं. बाढ़ से मची है तबाही बाढ़ से 1,92,799 लोग अब भी प्रभावित हैं. 17 रेवेन्यू सर्कल और 379 गांव बाढ़ की चपेट में हैं. प्रभावित जिलों में शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और चराइदेव शामिल हैं. चराइदेव सबसे ज्यादा प्रभावित है, जहां 77,456 लोग प्रभावित हुए हैं. शिवसागर में 63,492 और जोरहाट में 34,067 लोग बाढ़ से जूझ रहे हैं. राज्य में 15,430 हेक्टेयर फसल क्षेत्र अब भी जलमग्न है. असम बाढ़ का कहर फसल क्षेत्र को भी भारी नुकसान, कई लोगों ने बढ़ाया मदद का हाथ बाढ़ ने राज्य के कृषि क्षेत्र को भी प्रभावित किया है. DRIMS रिपोर्ट के अनुसार 15,430 हेक्टेयर फसल क्षेत्र प्रभावित हुआ है. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने उद्योगपति गौतम अडानी द्वारा मुख्यमंत्री राहत कोष में 11 करोड़ रुपये देने के फैसले की सराहना की. गौतम अडानी जी ने असम बाढ़ से प्रभावित लोगों की सहायता के लिए मुख्यमंत्री राहत कोष में 11 करोड़ रुपये का ऑनलाइन योगदान दिया है. इससे प्रभावित परिवारों की मदद के हमारे प्रयासों को मजबूती मिलेगी. असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा राहत राशि के सही इस्तेमाल का भरोसा मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि राहत कोष में मिलने वाली हर राशि का इस्तेमाल पूरी ईमानदारी के साथ किया जाएगा. प्रभावित लोगों के पुनर्वास में लगाया जाएगा. पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ खर्च किया जाएगा. असम बाढ़ का कहर कार्तिक आर्यन ने दिए 1 करोड़ रुपये बाढ़ राहत अभियान में अभिनेता कार्तिक आर्यन ने भी योगदान दिया है. कार्तिक आर्यन ने असम मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपये दान किए. मुख्यमंत्री सरमा ने उनके योगदान को प्रभावित लोगों के लिए मददगार बताया. मुस्लिम राष्ट्रीय मंच भी करेगा आर्थिक सहयोग मुस्लिम राष्ट्रीय मंच (MRM) ने भी असम बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए आर्थिक मदद देने का ऐलान किया है. MRM के राष्ट्रीय संयोजक शाहिद सईद ने बताया- संगठन की कोर टीम की बैठक में असम मुख्यमंत्री राहत कोष में योगदान देने और प्रभावित समुदायों तक राहत पहुंचाने के प्रयास तेज करने का फैसला लिया गया है. The post असम बाढ़ का कहर: 80 लोगों की मौत, 379 गांव पानी में डूबे, 1.92 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित appeared first on Naya Vichar.

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Video : ‘मंदिर दान चोरी’ की एक्टिंग कर घिरे पप्पू यादव, थाने में दर्ज हुई शिकायत

Video :  पूर्णिया से निर्दलीय सांसद पप्पू यादव के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई है. आरोप है कि उन्होंने शुक्रवार को संसद परिसर में राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी के मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान उनके प्रदर्शन के तरीके पर आपत्ति जताई गई, जिसके बाद शिकायत दर्ज कर आगे की कार्रवाई की मांग की गई. रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली के जहांगीरपुरी थाने में सूर्य मैथिल नाम के व्यक्ति ने पप्पू यादव के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि संसद परिसर में किए गए उनके विरोध प्रदर्शन से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं. न्यूज एजेंसी ANI से बातचीत में सूर्य मैथिल ने आरोप लगाया कि संसद के बाहर विरोध प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव ने धार्मिक प्रतीकों का अपमान किया. उन्होंने कहा कि इसी वजह से उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई गई है. एएनआई से बातचीत में सूर्य मैथिल ने आरोप लगाया, “पप्पू यादव ने भगवा रंग का अपमान किया. संसद के बाहर किए गए उनके प्रदर्शन को राहुल गांधी, डिंपल यादव, अवधेश प्रसाद और INDIA गठबंधन के अन्य सांसदों का समर्थन मिला. प्रदर्शन के दौरान उन्होंने भगवान रामलला विराजमान की तस्वीर अपने पैरों के नीचे रखी, जिससे सनातन समाज की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं.” ये भी पढ़ें: भगवा चोला, दानपेटी और संसद में ‘शॉर्ट प्ले’, पप्पू यादव का अनोखा प्रदर्शन, राहुल गांधी ने भी दिया दान शुक्रवार को संसद परिसर में विपक्षी सांसदों ने अनोखे अंदाज में प्रदर्शन किया. उन्होंने नुक्कड़ नाटक के जरिए राम मंदिर के चंदे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाते हुए केंद्र प्रशासन पर निशाना साधा. इस प्रदर्शन को लेकर संसद परिसर में काफी देर तक सियासी हलचल और चर्चा का माहौल बना रहा. The post Video : ‘मंदिर दान चोरी’ की एक्टिंग कर घिरे पप्पू यादव, थाने में दर्ज हुई शिकायत appeared first on Naya Vichar.

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देवघर ही नहीं, देश के इन राज्यों में भी विराजमान हैं बाबा वैद्यनाथ, जानें कहां-कहां हैं प्रसिद्ध मंदिर

डॉ राकेश कुमार सिन्हा ‘रवि’ Baba Baidyanath Temple: श्रावण मास में द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल बाबा वैद्यनाथ की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. झारखंड की सांस्कृतिक राजधानी देवघर स्थित श्री वैद्यनाथ धाम में हर वर्ष लाखों श्रद्धालु जलाभिषेक के लिए पहुंचते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सुल्तानगंज से उत्तरवाहिनी गंगा का जल लेकर पदयात्रा करते हुए देवघर में जलार्पण की परंपरा रामायण काल से चली आ रही है, जिसकी शुरुआत स्वयं भगवान श्रीराम ने की थी. यही वजह है कि श्रावणी मेला देश के सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में गिना जाता है. महाराष्ट्र और तेलंगाना में भी है वैद्यनाथ का विशेष स्थान शिव पुराण में वर्णित “परल्या वैद्यनाथं च” श्लोक के आधार पर कई विद्वान तेलंगाना के हैदराबाद के निकट स्थित परली को वैद्यनाथ ज्योतिर्लिंग मानते हैं. वहीं महाराष्ट्र के नांदेड़ जिले के परली में भी श्री वैद्यनाथ का प्रसिद्ध मंदिर है. इतिहास के अनुसार इन दोनों मंदिरों का जीर्णोद्धार मालवा की प्रसिद्ध शासिका महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने कराया था. बिहार, काशी और उज्जैन में भी मिलते हैं बाबा वैद्यनाथ बिहार के कैमूर जिले के रामगढ़ में प्रतिहार वंश द्वारा स्थापित प्राचीन वैद्यनाथ मंदिर स्थित है. गया के विष्णुपद मंदिर के निकट ‘वैद्यनाथ बैटका’ नाम से प्रसिद्ध शिव मंदिर भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है. वहीं उज्जैन के 84 प्रमुख शिवलिंगों में श्री वैद्यनाथ का विशेष स्थान है. काशी में कामाख्या कुंड के पास अंतर्वेदी परिक्रमा मार्ग पर स्थित वैद्यनाथ मंदिर भी धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है. हिमालय से दक्षिण हिंदुस्तान तक फैली है बाबा वैद्यनाथ की महिमा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा, उत्तराखंड के अल्मोड़ा और हरिद्वार, असम के कामाख्या क्षेत्र, ओडिशा के भुवनेश्वर, मध्य प्रदेश के छतरपुर, तमिलनाडु के रामेश्वरम तथा पश्चिम बंगाल के कोलकाता में भी बाबा वैद्यनाथ के प्रसिद्ध मंदिर स्थापित हैं. ये सभी मंदिर अलग-अलग ऐतिहासिक और धार्मिक मान्यताओं से जुड़े हैं तथा वर्षभर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने रहते हैं. ये भी पढ़ें: बाबा धाम में उमड़ा आस्था का सैलाब, दूसरे दिन 1.05 लाख श्रद्धालुओं ने किया जलाभिषेक, कांवरियों पर बरसा सुगंधित गुलाब जल देश के प्रमुख वैद्यनाथ मंदिर देवघर (झारखंड) – द्वादश ज्योतिर्लिंग, विश्व प्रसिद्ध बाबा वैद्यनाथ धाम. परली (महाराष्ट्र) – प्राचीन वैद्यनाथ मंदिर, अहिल्याबाई होल्कर द्वारा जीर्णोद्धार. परली (तेलंगाना) – शिव पुराण में वर्णित वैद्यनाथ से जुड़ी मान्यता. रामगढ़, कैमूर (बिहार) – प्रतिहार वंशकालीन प्राचीन मंदिर. गया (बिहार) – विष्णुपद मंदिर के निकट ‘वैद्यनाथ बैटका’. उज्जैन और काशी – प्रमुख शिव तीर्थों में वैद्यनाथ का विशेष स्थान. कांगड़ा, हरिद्वार, अल्मोड़ा, कामाख्या, भुवनेश्वर, रामेश्वरम, छतरपुर और कोलकाता – प्रमुख वैद्यनाथ मंदिरों के लिए प्रसिद्ध. The post देवघर ही नहीं, देश के इन राज्यों में भी विराजमान हैं बाबा वैद्यनाथ, जानें कहां-कहां हैं प्रसिद्ध मंदिर appeared first on Naya Vichar.

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क्या मंत्री दीपक प्रकाश पूरे 5 साल पद पर बने रहेंगे? देवेश कुमार के इस्तीफे से टला संकट, लेकिन कहानी अभी खत्म नहीं हुई

Minister Deepak Prakash: बिहार की नेतृत्व में एक इस्तीफे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. भाजपा विधान परिषद सदस्य (MLC) देवेश कुमार के इस्तीफे के बाद पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश का तत्काल नेतृत्वक संकट तो टल गया है, लेकिन क्या अब वह 2030 तक बिना किसी परेशानी के मंत्री बने रहेंगे? इसका जवाब इतना सीधा नहीं है. असल में यह सिर्फ एक मंत्री पद का मामला नहीं है. इसके पीछे संविधान, सुप्रीम कोर्ट, भाजपा की चुनावी रणनीति और उपेंद्र कुशवाहा की नेतृत्वक ताकत. चारों एक साथ काम करते दिख रहे हैं. आइए समझते हैं पूरा मामला. पहले समझिए, संकट आया क्यों था? दीपक प्रकाश बिहार प्रशासन में पंचायती राज मंत्री हैं, लेकिन वह विधानसभा या विधान परिषद किसी भी सदन के सदस्य नहीं थे. संविधान के अनुसार कोई भी व्यक्ति मंत्री तो बन सकता है, लेकिन उसे तय समय सीमा के भीतर विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना जरूरी होता है. ऐसा नहीं होने पर मंत्री पद छोड़ना पड़ता है. इसी मुद्दे को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. अदालत में सवाल उठा कि बिना किसी सदन का सदस्य बने दीपक प्रकाश आखिर कब तक मंत्री रह सकते हैं. यहीं से नेतृत्वक हलचल तेज हो गई. देवेश कुमार के इस्तीफे से कैसे निकला रास्ता? संकट बढ़ने के बीच भाजपा ने बड़ा फैसला लिया. पार्टी के MLC देवेश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. अब इस खाली हुई सीट पर दीपक प्रकाश को विधान परिषद भेजने की तैयारी है. जैसे ही वह MLC बनेंगे, फिलहाल उनका मंत्री पद सुरक्षित हो जाएगा. यानी तत्काल खतरा टल गया है. लेकिन क्या अब पांच साल तक मंत्री बने रहेंगे? यहीं सबसे बड़ा सवाल है. इसका जवाब वर्तमान परिस्थिति के अनुसार फिलहाल ‘नहीं’ माना जा रहा है. कारण यह है कि देवेश कुमार राज्यपाल मनोनीत कोटे से 17 मार्च 2021 को MLC बने थे. उनका कार्यकाल मार्च 2027 तक ही था. अगर दीपक प्रकाश इसी सीट पर विधान परिषद पहुंचते हैं तो उन्हें नया छह साल का कार्यकाल नहीं मिलेगा. वह केवल बचा हुआ कार्यकाल पूरा करेंगे, जो मार्च 2027 तक है. मतलब लगभग आठ महीने बाद यह सीट फिर खाली हो जाएगी. उस समय दीपक प्रकाश को दोबारा विधानसभा या विधान परिषद का सदस्य बनना होगा. ऐसा नहीं होने पर उनका मंत्री पद फिर संकट में पड़ सकता है. यानी अभी का समाधान स्थायी नहीं, बल्कि अस्थायी माना जा रहा है. फिर भाजपा ने इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा लगातार यह संदेश देते रहे कि दीपक प्रकाश सिर्फ कुछ महीनों के लिए नहीं, बल्कि पूरे कार्यकाल के लिए मंत्री बने हैं. उन्होंने सार्वजनिक मंचों से भी यही कहा कि यह फैसला केवल उनकी पार्टी का नहीं, बल्कि पूरे NDA का है. जब सुप्रीम कोर्ट में मामला पहुंचा तब भी दीपक प्रकाश ने कहा कि प्रशासन अदालत में जवाब देगी और वह संवैधानिक प्रावधानों तथा NDA नेतृत्व के भरोसे मंत्री हैं. भाजपा पर भी लगातार दबाव बढ़ रहा था. सूत्रों के मुताबिक आखिरकार दिल्ली नेतृत्व से संकेत मिलने के बाद देवेश कुमार ने इस्तीफा दे दिया. बताया जा रहा है कि बिहार भाजपा के शीर्ष नेताओं ने भी इस फैसले के पक्ष में जोर लगाया. यानी उपेंद्र कुशवाहा की नेतृत्वक दबाव की रणनीति इस बार असरदार साबित हुई. उपेंद्र कुशवाहा की बात भाजपा क्यों टाल नहीं सकी? इसकी कई वजहें हैं. 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में RLM के चार विधायक जीतकर आए. इनमें एक विधायक स्वयं उपेंद्र कुशवाहा की पत्नी स्नेहलता कुशवाहा हैं. चुनाव के बाद कई बार चर्चा चली कि पार्टी के विधायक टूट सकते हैं या भाजपा में विलय हो सकता है, लेकिन उपेंद्र कुशवाहा ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया. दूसरी तरफ भाजपा भी उन्हें नाराज करने का जोखिम नहीं लेना चाहती. जातीय गणना के अनुसार बिहार में कुशवाहा समाज की आबादी करीब 4.2 प्रतिशत है. करीब 50 विधानसभा सीटों और नौ लोकसभा सीटों पर इस समाज का प्रभाव माना जाता है. बिहार की नेतृत्व में एक-दो प्रतिशत वोट का बदलाव भी सत्ता का गणित बदल देता है. ऐसे में भाजपा के लिए उपेंद्र कुशवाहा सिर्फ सहयोगी दल के नेता नहीं, बल्कि अहम सामाजिक आधार वाले सहयोगी हैं. इसी वजह से कुछ महीने पहले भाजपा ने अपने विधायकों के समर्थन से उपेंद्र कुशवाहा को राज्यसभा भी भेजा था. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें अब देवेश कुमार का नेतृत्वक भविष्य क्या होगा? इस्तीफा देने के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि देवेश कुमार को क्या मिलेगा. उन्होंने इस्तीफे के बाद मीडिया से बातचीत में साफ कहा है कि वह पार्टी के सच्चे कार्यकर्ता हैं और नेतृत्व जो जिम्मेदारी देगा, उसे स्वीकार करेंगे. भाजपा के अंदर चर्चा है कि उन्हें संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिल सकती है. हालांकि फिलहाल यह तय नहीं है. क्या देवेश कुमार का कद घट गया? इसका जवाब भी अभी जल्दबाजी में देना मुश्किल होगा. MLC पद छोड़ने से उनकी वर्तमान संवैधानिक जिम्मेदारी जरूर खत्म हुई है, लेकिन अंतिम आकलन उनकी अगली भूमिका तय होने के बाद ही होगा. देवेश कुमार पहले बिहार भाजपा के प्रदेश महासचिव रह चुके हैं. संजय जायसवाल के प्रदेश अध्यक्ष रहने के दौरान संगठन में उनकी मजबूत पकड़ थी. बाद में सम्राट चौधरी के प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद नई टीम बनी और वह संगठन की मुख्य जिम्मेदारियों से बाहर हो गए. उन्हें केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय का करीबी माना जाता है. पत्रकारिता से नेतृत्व में आए देवेश कुमार को भाजपा के दिवंगत नेता अरुण जेटली ने सक्रिय नेतृत्व में आगे बढ़ाया था. दिल्ली संगठन में भी उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है. अब अगला कदम विधान परिषद की खाली सीट पर चुनाव या नामांकन की प्रक्रिया है. यदि दीपक प्रकाश MLC बन जाते हैं तो उनका मंत्री पद तत्काल सुरक्षित हो जाएगा. लेकिन मार्च 2027 के बाद स्थिति फिर बदलेगी. उस समय उन्हें दोबारा किसी सदन की सदस्यता हासिल करनी होगी. तभी वह मंत्री पद पर बने रह सकेंगे. देवेश कुमार के इस्तीफे ने दीपक प्रकाश के मंत्री पद पर मंडरा रहा तत्काल संकट जरूर टाल दिया है. लेकिन इसे स्थायी समाधान नहीं कहा जा सकता. Also Read: कौन हैं देवेश कुमार? पत्रकार से BJP नेता

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Ather के नए इलेक्ट्रिक स्कूटर की पहली झलक आई सामने, लॉन्च से पहले CEO ने शेयर की फोटो

Ather Energy के CEO तरुण मेहता ने कंपनी के आने वाले EL प्लेटफॉर्म पर बेस्ड इलेक्ट्रिक स्कूटर की फोटो शेयर की है. यह स्कूटर अभी फैक्ट्री की असेंबली लाइन पर तैयार हो रहा है. इस फोटो से लोगों को लॉन्च से पहले इसकी पहली झलक देखने को मिली है. कंपनी इस स्कूटर की पूरी जानकारी 29 अगस्त 2026 को होने वाले Ather Community Day में देगी और उसी दिन इसे लॉन्च भी करेगी. Ather के नए स्कूटर का डिजाइन तरुण मेहता की ओर से शेयर की गई असेंबली लाइन की फोटो में Ather का नया प्रोडक्शन स्कूटर काफी हद तक EL01 कॉन्सेप्ट जैसा नजर आता है. इसमें हैंडलबार पर लगा हेडलाइट और फ्रंट एप्रन पर चौड़ी LED DRL दी गई है. इतना ही नहीं, इसका ओवरऑल डिजाइन भी पिछले साल Ather की ओर से फाइल किए गए डिजाइन पेटेंट से काफी मिलता-जुलता दिखाई देता है.  सबसे खास बात यह है कि इस स्कूटर में मेटल बॉडी देखने को मिल सकती है. अगर ऐसा होता है, तो यह Ather के मौजूदा स्कूटर्स से बिल्कुल अलग होगा. ऐसा इसलिए क्योंकि कंपनी अब तक अपने सभी मॉडल्स में पॉलिमर बॉडी पैनल का यूज करती आई है. फोटो में दिखे बड़े व्हील्स और नए प्लेटफॉर्म फोटो में स्कूटर के पहिए भी साफ नजर आ रहे हैं. इसमें आगे 14-इंच का बड़ा व्हील दिया गया है, जबकि पीछे 12-इंच का व्हील देखने को मिल रहा है. Ather ने Community Day 2025 में बताया था कि उसके नए EL प्लेटफॉर्म को 26 लाख किलोमीटर से ज्यादा की रियल रोड टेस्टिंग के बेस्ड पर तैयार किया गया है. कंपनी का कहना है कि यह प्लेटफॉर्म इतना लचीला है कि इसी पर अलग-अलग साइज और जरूरतों के हिसाब से कई तरह के इलेक्ट्रिक स्कूटर बनाए जा सकते हैं.  इतना ही नहीं, यह प्लेटफॉर्म 2kWh से 5kWh तक की बैटरी को सपोर्ट करेगा. इसके साथ साइलेंट गियर-ड्राइव मोटर, ऑन-बोर्ड चार्जर और लंबे सर्विस इंटरवल जैसी सुविधाएं भी मिलेंगी. कितनी हो सकती है कीमत? Ather का यह नया स्कूटर करीब 1 लाख रुपये से 1.25 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) की कीमत में लॉन्च हो सकता है. फिलहाल Ather Rizta की शुरुआती कीमत 1.21 लाख रुपये है, जबकि Ather 450 सीरीज 1.28 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) से शुरू होती है. लेकिन नया EL01 इन दोनों से नीचे की रेंज में आ सकता है. ये भी पढ़ें: Hero ने लॉन्च किया Vida VX2 GO FB, 128km रेंज और फिक्स्ड बैटरी के साथ मिलेगा नया ऑप्शन The post Ather के नए इलेक्ट्रिक स्कूटर की पहली झलक आई सामने, लॉन्च से पहले CEO ने शेयर की फोटो appeared first on Naya Vichar.

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जंतर-मंतर विवाद: PM मोदी पर टिप्पणी करने वाली युवती ने हाथ जोड़कर मांगी माफी, कहा- मैं शर्मिंदा हूं

दिल्ली के जंतर-मंतर पर 23 जुलाई को प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित तौर पर आपत्तिजनक नारे लगाने वाली युवती अब माफी की गुहार लगा रही हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपना माफीनामा पेश किया है. अपने पोस्ट में उसने दोनों हाथ जोड़कर पूरे देश से माफी मांगी है. युवती ने कहा- 15 साल की हूं, दूसरों के प्रभाव में आ गई थी वायरल वीडियो में युवती ने खुद को 15 साल का बताया है. उनका कहना है कि वह अपने दोस्तों के साथ कनॉट प्लेस घूमने के बाद जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन में पहुंची थीं. वहां मौजूद लोगों को प्रधानमंत्री के खिलाफ नारे लगाते देख वह भी उनके प्रभाव में आ गईं. ‘गंभीर गलती हो गई, अपने व्यवहार पर बहुत शर्मिदा हूं’ आरोपी युवती ने कहा कि उनसे गंभीर गलती हुई है और वह अपने व्यवहार पर बहुत शर्मिंदा हैं. उसने इसे अपनी पहली और आखिरी गलती कहा है. उन्होंने कहा कि वह पूरे देश से क्षमा मांगती हैं. View on Instagram पीएम मोदी ने छात्रों को सुधार का अवसर देने की कही बात यह वीडियो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस वीडियो संदेश के कुछ घंटों बाद सामने आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदर्शन के दौरान उनके और उनकी दिवंगत मां के खिलाफ लगाए गए अपमानजनक नारे बेहद दुखद थे. इसके बावजूद उन्होंने कहा कि युवाओं को अपनी गलतियों से सीखने और सुधार का अवसर मिलना चाहिए. नोएडा एक्सप्रेसवे थाने एफआईआर दर्ज पीएम मोदी के खिलाफ आपत्तिजनक नारे के खिलाफ 29 जुलाई को नोएडा के एक्सप्रेसवे थाने में एफआईआर दर्ज की गई. शिकायत में आरोप लगाया गया कि प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया, जिससे संवैधानिक पद की गरिमा प्रभावित हुई और सार्वजनिक शांति भंग होने की आशंका उत्पन्न हुई. दिल्ली पुलिस को सौंपी गई जांच नोएडा पुलिस ने बताया कि मामला दिल्ली में घटित होने के कारण एफआईआर दर्ज कर जांच के लिए दिल्ली पुलिस को स्थानांतरित कर दिया गया है. पुलिस के अनुसार, अधिवक्ता स्मृति सिंह की शिकायत पर हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं 352, 353(1) और 356(1) के तहत मामला दर्ज किया गया है. पुलिस ने सोसाइटी में की पूछताछ पुलिस के मुताबिक, आरोपी युवती नोएडा के सेक्टर-168 स्थित एक हाउसिंग सोसाइटी में अपनी मां के साथ रहती थीं. उपलब्ध जानकारी के अनुसार, प्रदर्शन के बाद से वह अपने फ्लैट पर वापस नहीं लौटी हैं. पुलिस ने सोसाइटी का दौरा कर सुरक्षा कर्मियों और अन्य लोगों से पूछताछ भी की है. आयोजकों ने आपराधिक कार्रवाई पर उठाए सवाल इधर, प्रदर्शन का आयोजन करने वाली कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने युवती के खिलाफ दर्ज आपराधिक मामले पर आपत्ति जताई है. पार्टी की मुख्य न्यायिक समिति के प्रवक्ता सौरभ दास ने कहा कि किसी भी व्यक्ति द्वारा अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल उचित नहीं माना जा सकता, लेकिन ऐसी टिप्पणियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को प्रभावित कर सकता है. उनका कहना था कि यदि किसी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा है तो उसके लिए मानहानि जैसे कानूनी उपाय उपलब्ध हैं, न कि आपराधिक कार्रवाई. Also Read: जंतर-मंतर विवाद पर PM मोदी का युवाओं के नाम वीडियो संदेश, बोले- ‘मैं इन बच्चों को माफ करना चाहता हूं’ The post जंतर-मंतर विवाद: PM मोदी पर टिप्पणी करने वाली युवती ने हाथ जोड़कर मांगी माफी, कहा- मैं शर्मिंदा हूं appeared first on Naya Vichar.

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सुरक्षा अलर्ट के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले, 10 दिन में गई 3 जान

जम्मू-कश्मीर में 10 दिनों के भीतर हुए दो आतंकी हमलों में दो गैर-स्थानीय मजदूरों और एक पुलिसकर्मी समेत तीन लोगों की मौत हुई है. पहला हमला पिछले हफ्ते अनंतनाग में हुआ था, जिसमें हेड कॉन्स्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की जान चली गई. अप्रैल 2025 में पहलगाम हमले के बाद घाटी में यह पहला बड़ा आतंकी हमला था. पहलगाम हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी. शुक्रवार (31 जुलाई) को जम्मू-कश्मीर के कुलगाम जिले में दूसरा आतंकी हमला हुआ. इस हमले में छत्तीसगढ़ के दो गैर-स्थानीय मजदूरों की मौत हो गई. शुरुआती जानकारी में एक मजदूर की मौत की पुष्टि हुई थी, लेकिन घायल मजदूर ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है. प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि दूसरे घायल मजदूर बोपिंदर को पहले जीएमसी अनंतनाग ले जाया गया, जहां से बाद में उसे सौरा स्थित एसकेआईएमएस अस्पताल रेफर किया गया. इलाज के दौरान उसकी भी मौत हो गई. ये भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर के कुलगाम में आतंकी हमला: छत्तीसगढ़ के मजदूर की मौत, दूसरा घायल; TRF ने ली जिम्मेदारी अधिकारियों ने बताया कि दोनों मजदूर 20 से 30 साल की आयु के थे और छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे. इस हमले से करीब 10 दिन पहले अनंतनाग शहर में भी आतंकवादियों ने एक पुलिस अधिकारी की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या कर दी थी. साल 2024 में श्रीनगर में दो मजदूरों की हत्या कर दी गई थी इससे पहले 2024 में जम्मू कश्मीर की ग्रीष्मकालीन (गर्मी के मौसम में) राजधानी श्रीनगर में भी दो मजदूरों की आतंकियों ने हत्या कर दी थी. सात फरवरी 2024 को पंजाब के दो मजदूरों अमृतपाल सिंह और रोहित मसीह की श्रीनगर के शहीद गंज इलाके में एक आतंकवादी ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. The post सुरक्षा अलर्ट के बीच जम्मू-कश्मीर में आतंकी हमले, 10 दिन में गई 3 जान appeared first on Naya Vichar.

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क्रिकेटर बनने का था सपना लेकिन किस्मत ने बदल दिया रास्ता, चोट से जूझते हुए तेजस्विन ने जीता ब्रॉन्ज मेडल

Tejaswin Shankar: कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में तेजस्विन शंकर ने हिंदुस्तानीय एथलेटिक्स के लिए ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो इससे पहले कोई हिंदुस्तानीय नहीं कर पाया था. ग्लासगो में उन्होंने पुरुष डेकाथलॉन में 7976 अंक जुटाकर ब्रॉन्ज मेडल जीता और इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले हिंदुस्तानीय एथलीट बन गए. खास बात यह रही कि सिर्फ दो दिन पहले घुटने की पुरानी चोट (पैटेलर टेंडिनाइटिस) के कारण वह अपने पसंदीदा हाई जंप इवेंट से बाहर हो गए थे. दर्द के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और 10 कठिन स्पर्धाओं को पूरा कर इतिहास रच दिया. मेरे लिए बेहद खास पल मेडल जीतने के बाद तेजस्विन ने कहा, ‘चार साल पहले बर्मिंघम में हाई जंप में ब्रॉन्ज जीता था और अब डेकाथलॉन में पदक जीतना किसी सपने के सच होने जैसा है. लिंडन विक्टर और डेमियन वार्नर जैसे दिग्गजों के साथ पोडियम पर खड़ा होना मेरे लिए बेहद खास पल है.’ क्रिकेटर बनना चाहते थे शंकर 21 दिसंबर 1998 को दिल्ली में जन्मे तेजस्विन का पहला सपना क्रिकेटर बनने का था. वह तेज गेंदबाज बनना चाहते थे. उनके पिता हरीशंकर बीसीसीआई के वकील थे और घर में क्रिकेट का माहौल था. लेकिन कम उम्र में ही पिता का ब्लड कैंसर से निधन हो गया. इस हादसे ने उनकी जिंदगी बदल दी. स्कूल के दिनों में सरदार पटेल विद्यालय के शारीरिक शिक्षा शिक्षक सुनील कुमार ने उनके लंबे कद और एथलेटिक क्षमता को पहचाना. उन्होंने तेजस्विन को क्रिकेट छोड़कर हाई जंप अपनाने की सलाह दी. 16 साल की उम्र में बनाया रिकॉर्ड महज 16 साल की उम्र में उन्होंने 2.18 मीटर की छलांग लगाकर 12 साल पुराना राष्ट्रीय इंडोर रिकॉर्ड तोड़ दिया. इसके बाद उन्हें अमेरिका की कैनसस स्टेट यूनिवर्सिटी में छात्रवृत्ति मिली, जहां उन्होंने 2018 में 2.29 मीटर की छलांग लगाकर हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय रिकॉर्ड बनाया. वह दो बार NCAA डिवीजन-1 हाई जंप चैंपियन भी बने. Also Read: मेरी वापसी सही दिशा में, जानिए CWC में सिल्वर मेडल जीतने के बाद नीरज चोपड़ा ने क्या कहा इस स्पर्धा का पहला मेडल ग्लासगो 2026 में चुनौती और भी बड़ी थी. घुटने की चोट के कारण हाई जंप से हटना पड़ा, लेकिन उन्होंने डेकाथलॉन में उतरने का फैसला किया. शुरुआत में उन्हें खुद भरोसा नहीं था कि शरीर 10 इवेंट तक साथ देगा. फिर भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आखिरकार हिंदुस्तान को इस स्पर्धा का पहला कॉमनवेल्थ मेडल दिला दिया. PM मोदी ने X पर दी बधाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेजस्विन शंकर की उपलब्धि पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा, हिंदुस्तानीय खिलाड़ी लगातार इतिहास रच रहे हैं और देश का गौरव बढ़ा रहे हैं. ग्लासगो कॉमनवेल्थ गेम्स में पुरुष डेकाथलॉन में ब्रॉन्ज मेडल जीतने पर तेजस्विन शंकर को बधाई. उन्होंने 10 स्पर्धाओं में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन किया. भविष्य के लिए उन्हें मेरी शुभकामनाएं. Also Read: बांस के भाले से शुरू हुआ सफर… आखिरी थ्रो में यशवीर सिंह ने जीता ब्रॉन्ज The post क्रिकेटर बनने का था सपना लेकिन किस्मत ने बदल दिया रास्ता, चोट से जूझते हुए तेजस्विन ने जीता ब्रॉन्ज मेडल appeared first on Naya Vichar.

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बांस के भाले से शुरू हुआ सफर… आखिरी थ्रो में यशवीर सिंह ने जीता ब्रॉन्ज

Yashvir Singh : कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में हिंदुस्तान के 24 वर्षीय यशवीर सिंह ने अपनी मेहनत, आत्मविश्वास और जज्बे से एक ऐसी कहानी लिख दी, जो हर युवा खिलाड़ी के लिए प्रेरणा बन गई है. पुरुष जैवलिन थ्रो फाइनल में यशवीर ने आखिरी प्रयास में 85.41 मीटर का पर्सनल बेस्ट थ्रो फेंककर ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया. इस शानदार प्रदर्शन के साथ नीरज चोपड़ा (सिल्वर) और यशवीर सिंह ने हिंदुस्तान को जैवलिन में डबल पोडियम दिलाया. पहला अंतरराष्ट्रीय मेडल भी यह मेडल सिर्फ एक जीत नहीं, बल्कि संघर्ष से सफलता तक की कहानी है. फाइनल में यशवीर की शुरुआत अच्छी नहीं रही थी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी. आखिरी थ्रो से पहले उनके मन में सिर्फ एक ही लक्ष्य था—मेडल. उन्होंने बताया, ‘मेरा पहला अंतरराष्ट्रीय मेडल है और मैं बेहद खुश हूं. मैंने देखा कि ब्रॉन्ज मेडल की दूरी 82 मीटर के आसपास है. मैंने खुद से कहा कि मैं इससे पहले भी 82 मीटर पार कर चुका हूं, इसलिए इससे आगे भी फेंक सकता हूं. पांचवें प्रयास तक कुछ खास नहीं हुआ, इसलिए आखिरी थ्रो में मैंने पूरी ताकत लगा दी और वही मेरे लिए मेडल लेकर आया.’ पिता से सिखी बारीकियां यशवीर का यह सफर आसान नहीं रहा. बचपन में उनकी रुचि बास्केटबॉल में थी, लेकिन स्कूल के दिनों में उन्होंने जैवलिन थ्रो को अपनाया. शुरुआत में संसाधनों की कमी के चलते वह बांस के बने भाले से अभ्यास करते थे. धीरे-धीरे उन्होंने प्रोफेशनल जैवलिन के साथ ट्रेनिंग शुरू की. उनके पिता राय सिंह, जो खुद राष्ट्रीय स्तर के जैवलिन थ्रोअर रह चुके हैं, ने उन्हें स्पोर्ट्स की बारीकियां सिखाईं और तकनीक पर खास ध्यान दिलाया. ऐसे किया चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई यशवीर पहली बार तब सुर्खियों में आए, जब उन्होंने हिंदुस्तानीय अंडर-20 फेडरेशन कप में नीरज चोपड़ा का मीट रिकॉर्ड तोड़ दिया. 2022 में वह 80 मीटर का आंकड़ा पार करने वाले चुनिंदा हिंदुस्तानीय खिलाड़ियों में शामिल हुए. इसके बाद 2025 एशियाई एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 82.57 मीटर के साथ पांचवें स्थान पर रहे और इसी प्रदर्शन के आधार पर विश्व रैंकिंग कोटा से विश्व एथलेटिक्स चैंपियनशिप के लिए क्वालिफाई किया. पीएम ने भी किया एक्स पर पोस्ट उनकी इस उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी उन्हें बधाई दी. उन्होंने कहा कि यशवीर ने अपने शानदार प्रदर्शन से देश का नाम रोशन किया है. उनका यह जज्बा कई युवा खिलाड़ियों को प्रेरित करेगा. Also Read: मेरी वापसी सही दिशा में, जानिए CWC में सिल्वर मेडल जीतने के बाद नीरज चोपड़ा ने क्या कहा The post बांस के भाले से शुरू हुआ सफर… आखिरी थ्रो में यशवीर सिंह ने जीता ब्रॉन्ज appeared first on Naya Vichar.

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JPSC नियुक्ति घोटाला: OMR गड़बड़ी के बाद रद्द हो सकती है परीक्षा, सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए एल खियांग्ते

रांची: जेपीएससी परीक्षा में गड़बड़ी मामले में CID ने JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते से शुक्रवार (31 जुलाई) को फिर से तीसरे दिन करीब 9 घंटे तक पूछताछ की. इसके बाद देर शाम उन्हें घर जाने की अनुमति दी गई. अब तक की जांच में सीआईडी को 14वीं सिविल सेवा पीटी परीक्षा में गड़बड़ी के कई सबूत मिले हैं. OMR शीट में गड़बड़ी के मामले में सुमन सौरभ की गिरफ्तारी और उसके द्वारा गलत तरीके से पीटी पास करने की बात स्वीकार करने के बाद परीक्षा में गड़बड़ी की पुष्टि हो चुकी है. इधर, इस्तीफा दे चुके आयोग के अध्यक्ष एल खियांग्ते पूछताछ के दौरान चुप्पी साधे हुए हैं. इन सभी तथ्यों को देखते हुए अब इस बात की प्रबल संभावना है कि जेपीएससी पीटी परीक्षा रद्द की जा सकती है. सीआईडी द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद छात्र OMR शीट की कार्बन कॉपी भेज रहे हैं. जांच के क्रम में बड़ी संख्या में गड़बड़ियां मिल रही हैं. कई सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए खियांग्ते इधर, आयोग के सदस्यों की भूमिका को लेकर पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते, परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक और कर्मी अभय तिवारी द्वारा दी गई जानकारी के आधार पर अब सीआईडी की रडार पर जेपीएससी के कुछ सदस्य और अन्य लोग भी आ सकते हैं. शुक्रवार को सीआईडी अधिकारियों ने भर्ती प्रक्रिया, परीक्षा संचालन, चयन प्रक्रिया और निजी एजेंसी की भूमिका पर खियांग्ते से सवाल पूछे. उनसे पूछा गया कि OMR शीट परीक्षा कार्य में जुटे टीडीपीएल के दफ्तर में कैसे गई, ओएमआर शीट में गड़बड़ी कैसे हुई और इसके लिए जिम्मेदार कौन है. खियांग्ते कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे रहे. जेपीएससी कार्यालय के साथ-साथ परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी टीडीपीएल के कार्यालय में भी तलाशी ली गई थी. जांच में टीडीपीएल के दफ्तर से कई ओएमआर शीट बरामद हुई हैं. यही ओएमआर शीट अब एल खियांग्ते से हो रही पूछताछ में गड़बड़ी की जड़ तलाशने का आधार बन रही हैं. सुमन सौरभ की गिरफ्तारी से मिले सुराग जांच में गुरुवार को हजारीबाग पुलिस की मदद से गिरफ्तार अभ्यर्थी सुमन सौरभ से सीआईडी को कुछ और चौंकाने वाले तथ्य मिले हैं. सौरभ पर आरोप है कि उसने झारखंड संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता परीक्षा (पीटी) अनुचित तरीके से पास की थी. सुमन के पास से जो ओएमआर शीट मिली, वह जांच में दिखाए गए अभिलेखों से मेल नहीं खा रही थी. उसने यह भी कबूला कि उसने परीक्षा में सिर्फ 48 प्रश्नों के उत्तर भरे थे, इसके बावजूद वह पास घोषित हो गया. रिमांड पर लिए गए लोगों को भेजा जेल सीआईडी ने रिमांड पर लिए गए तत्कालीन उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, मार्केटिंग मैनेजर मनोज तिवारी, तकनीकी प्रोग्रामर मो उस्मान व मो एजाद तथा टीडीपीएल कर्मी को पूछताछ के बाद जेल भेज दिया. पूछताछ में मिले तथ्यों पर सौरभ सुमन की गिरफ्तारी की गई. इसके बाद सीआईडी ने इन लोगों की रिमांड दो दिनों के लिए और बढ़ाई. इस दौरान पूर्व अध्यक्ष एल खियांग्ते के सामने इन सभी को बैठाकर पूछताछ की गई और उनसे सच्चाई उगलवाई गई. पीटी में 2204 अभ्यर्थी सफल घोषित जेपीएससी की 14वीं सिविल सेवा पीटी 19 अप्रैल 2026 को राज्य के 564 केंद्रों पर ली गई थी. दो जुलाई की देर रात इसका रिजल्ट निकला. इसमें 2204 अभ्यर्थियों को मुख्य परीक्षा में शामिल होने की अनुमति दी गई. मुख्य परीक्षा 25 से 27 जुलाई 2026 तक होनी थी, लेकिन इसे स्थगित कर दिया गया. उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता को सिविल सेवा (रेगुलर), सिविल सेवा (बैकलॉग), फॉरेस्ट रेंज ऑफिसर, सहायक वन संरक्षक और जेट की जिम्मेदारी सौंप दी थी. The post JPSC नियुक्ति घोटाला: OMR गड़बड़ी के बाद रद्द हो सकती है परीक्षा, सवालों के स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए एल खियांग्ते appeared first on Naya Vichar.

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