Hot News

Author name: Vinod Jha

nayavichar.com पर संपादक हैं। पटना स्थित स्वतंत्र पत्रकार और लेखक व एक दशक से अधिक का व्यापक अनुभव है। पत्रकारिता, प्रकाशन और विज्ञापन में अनुभव सभी प्रकार की सामग्री के साथ काम करने में सक्षम बनाता है: ब्लॉग पोस्ट, सोशल मीडिया सामग्री अच्छी तरह से शोध किए गए लेख और साथ ही प्रेस विज्ञप्तियाँ। यदि आप उच्च-गुणवत्ता वाली सामग्री की तलाश में हैं, तो nayavicharnews@gmail.com पर संपर्क करें। विशेषताएँ: रिपोर्टिंग, पत्रकारिता, लेखन और संचार, सोशल मीडिया

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Astrology Special: क्या होता है कुंडली में केंद्राधिपति दोष? शुभ ग्रह अशुभ कैसे बनता, समझें ज्योतिष का नियम

Kendra Adhipati Dosh: ज्योतिष में केंद्राधिपति दोष का नाम सुनते ही एक सवाल सामने आता है कि शुभ ग्रह आखिर अशुभ कैसे हो सकता? इसका जवाब सिर्फ ग्रह के स्वभाव में नहीं है. इसे समझने के लिए यह देखना जरूरी है कि वह ग्रह किस भाव का स्वामी है और वह भाव किन चीजों का प्रतिनिधित्व करता है. इसे समझने के लिए सबसे पहले यह जानना होगा कि केंद्र भाव क्या होते हैं. ज्योतिष में सूर्योदय, दोपहर, सूर्यास्त और मध्यरात्रि की इस यात्रा को क्रमशः पहला, चौथा, सातवां और दसवां भाव माना जाता है. इन्हीं भावों को केंद्र भाव कहा जाता है. इनके स्वामी को केंद्रेश या केंद्राधिपति कहा जाता है. केंद्र भाव हमारे जीवन में होने वाली गतिविधियों और कर्म से जुड़े हैं. किसी लक्ष्य को हासिल करने के लिए हमें लगातार प्रयास करने पड़ते हैं. इस दौरान कई तरह की परिस्थितियां सामने आती हैं, जिन्हें पार करते हुए हमें अपने काम को आगे बढ़ाना होता है. इस लिहाज से केंद्र भाव हमारे कर्म, गतिविधि और लक्ष्य की दिशा में किए जाने वाले प्रयासों को भी दर्शाते हैं. शुभ ग्रह अशुभ क्यों हो जाता है? शुभ ग्रह से हम आमतौर पर ज्ञान, समझ, सलाह और सही दिशा की उम्मीद करते हैं. लेकिन, जब वही ग्रह किसी केंद्र भाव का स्वामी बनता है, तो उसकी भूमिका सिर्फ सलाह देने तक सीमित नहीं रहती. अब उसे किसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए जिम्मेदारी उठानी पड़ती है और प्रयास भी करने पड़ते हैं. यानी गुरु जैसे शुभ ग्रह को भी सिर्फ रास्ता दिखाने वाला नहीं रहना है, बल्कि जरूरत पड़ने पर खुद मैदान में उतरकर काम पूरा करना है. यहीं से केंद्राधिपति दोष को समझने की पहली कड़ी सामने आती है. जब किसी शुभ ग्रह को लक्ष्य हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करने पड़ते हैं, जिम्मेदारियां उठानी पड़ती हैं और परिस्थितियों से जूझना पड़ता है, तो उसकी स्वाभाविक सहजता पर दबाव आ सकता है. यही वजह है कि शुभ ग्रह केंद्र का स्वामी बनने पर कार्यात्मक रूप से अलग भूमिका निभाने लगता है. अशुभ ग्रह के मामले में क्या होता है? अब इसके उलट किसी स्वाभाविक अशुभ ग्रह को देखें. उसके साथ आम तौर पर संघर्ष, दबाव, अनुशासन, कठोरता और मेहनत जैसे गुण जुड़े होते हैं. लेकिन, जब ऐसा ग्रह किसी केंद्र भाव का स्वामी बनता है, तो लक्ष्य हासिल करने और काम पूरा करने की जिम्मेदारी उसके हिस्से में भी आती है. ऐसी स्थिति में उसे सिर्फ बाधा पैदा करने वाली भूमिका में नहीं रहना होता, बल्कि काम को आगे बढ़ाने और पूरा करने के लिए अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल करना पड़ता है. यानी जिस ग्रह की पहचान संघर्ष और कभी-कभी परेशानी या रुकावट पैदा करने से जुड़ी होती है, वही जब किसी काम को पूरा करने की जिम्मेदारी संभालता है तो उसकी यही खूबियां उपयोगी साबित हो सकती हैं. ऐसे में उसकी स्वाभाविक अशुभता का प्रभाव कुछ हद तक कम हो सकता है. सीधी भाषा में कहें तो, शुभ ग्रह को जब किसी लक्ष्य के लिए लगातार मेहनत और जिम्मेदारी उठानी पड़ती है, तो वह कार्यात्मक रूप से अशुभ भूमिका में आ सकता है. वहीं, अशुभ ग्रह जब किसी जिम्मेदारी को पूरा करने में जुटता है, तो उसकी स्वाभाविक अशुभता का असर कुछ कम हो सकता है. केंद्र के साथ दूसरे भाव की जिम्मेदारी अब एक दूसरी स्थिति को समझिए. अगर कोई ग्रह केंद्र भाव का स्वामी होने के साथ-साथ केंद्र और त्रिकोण के अलावा किसी दूसरे भाव का भी मालिक है, तो उसके ऊपर एक अतिरिक्त जिम्मेदारी आ जाती है. केंद्र और त्रिकोण के अलावा बाकी भावों की भी अपनी अलग प्रकृति होती है. इनमें से कई भाव जीवन की चुनौतियों, संघर्षों, बाधाओं और उन परिस्थितियों को दिखाते हैं जो हमारे सामान्य जीवन-प्रवाह में रुकावट पैदा कर सकती हैं. ऐसे में केंद्रेश को केवल प्रयास करके लक्ष्य हासिल करने की जिम्मेदारी नहीं निभानी पड़ती, बल्कि दूसरे भाव के स्वामित्व के कारण उससे जुड़ी परिस्थितियों को भी संभालना पड़ता है. यानी एक तरफ उसे कर्म और प्रयास की दिशा में काम करना है, तो दूसरी तरफ ऐसे भाव की जिम्मेदारी भी उठानी है जो जीवन में चुनौती या रुकावट से जुड़ा हो. इसे भी केंद्राधिपति दोष को समझने की एक दिशा माना जा सकता है. ये भी पढ़ें: Astro Special: क्या होता है ज्योतिष का संधि काल गंडांत? शुभ कार्यों के लिए अशुभ क्यों एक ग्रह, दो दिशाएं अगर कोई ग्रह लग्न को छोड़कर एक से अधिक केंद्र भावों का स्वामी बनता है, तो उसके ऊपर एक से ज्यादा क्षेत्रों की जिम्मेदारी आ जाती है. इन दोनों क्षेत्रों की जरूरतें हमेशा एक जैसी हों, यह जरूरी नहीं है. ऐसे में एक ही ग्रह को अपनी ऊर्जा और प्रयास दो अलग दिशाओं में लगाने पड़ सकते हैं. एक तरफ एक तरह के लक्ष्य को पूरा करने की जरूरत हो सकती है और दूसरी तरफ किसी दूसरे क्षेत्र की जिम्मेदारी सामने आ सकती है.यही अतिरिक्त जिम्मेदारी कई बार ग्रह पर दबाव बढ़ा देती है. इसे भी केंद्राधिपति दोष के एक अन्य पहलू के रूप में समझा जा सकता है. केंद्राधिपति दोष है क्या? केंद्राधिपति दोष को सिर्फ यह कहकर समझ लेना कि “शुभ ग्रह अशुभ हो जाता है”, पूरी बात नहीं है. ग्रह वही रहता है. उसका मूल स्वभाव भी अपनी जगह रहता है. बदलती है तो उसकी भूमिका. कुंडली में वह किन भावों का मालिक है, उन भावों से उसके ऊपर कौन-कौन सी जिम्मेदारियां आती हैं और ये जिम्मेदारियां आपस में किस तरह जुड़ती हैं. इन्हीं बातों से उसकी कार्यात्मक भूमिका समझ में आती है. केंद्र अधिपति दोष (इंफोग्राफिक्स- AI Generated) ये भी पढ़ें: Gandant Dosh: कुंडली में गंडांत दोष है या नहीं? चंद्रमा, गुरु और इन योगों से ऐसे समझें इसका असली प्रभाव आसान शब्दों में कहें तो दोष हमेशा ग्रह के भीतर नहीं होता. बात उस भूमिका की भी है, जो उसे कुंडली में निभानी पड़ रही है. अलग-अलग भावों की जिम्मेदारियां जब एक ही ग्रह के हिस्से में आती हैं, तो उनके आपसी संबंध से उस ग्रह के फल देने का तरीका भी बदल सकता है. यही नजरिया केंद्राधिपति दोष को केवल “शुभ ग्रह के अशुभ होने” की धारणा से आगे ले जाकर समझने में

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

PM Modi Birthday: मेलोनी ने कहा ‘मेरे दोस्त’, नेतन्याहू बोले- भारत वर्ल्ड पावर, पुतिन ने भी दी बधाई

PM Modi Birthday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार (17 सितंबर 2026) को 76 वर्ष के हो गए हैं. इस मौके पर देश के साथ-साथ दुनिया के कई नेताओं ने उन्हें जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने पीएम मोदी को अपना दोस्त बताते हुए उनके स्वास्थ्य और सफलता की कामना की. वहीं इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अपने संदेश में मोदी के नेतृत्व की तारीफ की, जबकि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने हिंदुस्तान-रूस संबंधों को मजबूत करने में उनके योगदान का उल्लेख किया. मेलोनी ने कहा- Happy Birthday My Friend इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री मोदी को जन्मदिन की बधाई दी. उन्होंने लिखा, Happy birthday to my friend @narendramodi और उनके लिए स्वास्थ्य, ऊर्जा और सफलता की कामना की. मेलोनी ने अपने संदेश में कहा कि इटली और हिंदुस्तान अपनी गहरी दोस्ती को लगातार मजबूत कर रहे हैं और दोनों देश सहयोग तथा समृद्धि से जुड़े भविष्य के निर्माण की दिशा में साथ काम कर रहे हैं. मेरे मित्र @narendramodi को जन्मदिन की शुभकामनाएं, मैं उनके अच्छे स्वास्थ्य, ऊर्जा और सफलता की कामना करती हूं. इटली और हिंदुस्तान अपनी गहरी मित्रता को मजबूत करते हुए, अपने राष्ट्रों के लिए सहयोग और समृद्धि के भविष्य का निर्माण कर रहे हैं- इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी इजरायल के पीएम नेतन्याहू ने क्या कहा? इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी पीएम मोदी को जन्मदिन की शुभकामनाएं दीं. उन्होंने मोदी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके नेतृत्व ने हिंदुस्तान को “world power” में बदलने में भूमिका निभाई है. यह नेतन्याहू की ओर से मोदी के नेतृत्व को लेकर किया गया आकलन है. नेतन्याहू ने हिंदुस्तान और इजरायल के बीच दोस्ती और साझेदारी का भी जिक्र किया तथा दोनों देशों के संबंधों को और आगे ले जाने की उम्मीद जताई. जन्मदिन मुबारक हो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी! आपके नेतृत्व ने हिंदुस्तान को विश्व शक्ति में बदल दिया है- इजरायल के बेंजामिन नेतन्याहू पुतिन ने हिंदुस्तान-रूस संबंधों का किया जिक्र रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी प्रधानमंत्री मोदी को उनके 76वें जन्मदिन पर बधाई दी. क्रेमलिन की ओर से जारी संदेश में पुतिन ने कहा कि हिंदुस्तान और रूस के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने में मोदी के व्यक्तिगत योगदान को कम करके नहीं आंका जा सकता. पुतिन ने पिछले सप्ताह नई दिल्ली की अपनी यात्रा के दौरान मिले स्वागत के लिए भी प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद किया. उन्होंने दोनों नेताओं के बीच हुई बातचीत को सार्थक और स्पष्ट बताया तथा कहा कि रूस हिंदुस्तान के साथ द्विपक्षीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर सहयोग जारी रखना चाहता है. 76 साल के हुए पीएम मोदी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के वडनगर में हुआ था. वे 26 मई 2014 को पहली बार हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री बने. इस साल उनके जन्मदिन पर देश-विदेश के कई नेताओं की ओर से शुभकामना संदेश सामने आए हैं. Also Read: PM मोदी को दोस्त पुतिन ने खास अंदाज में किया विश, कहा- आपकी समझदारी और विजन कमाल का है The post PM Modi Birthday: मेलोनी ने कहा ‘मेरे दोस्त’, नेतन्याहू बोले- हिंदुस्तान वर्ल्ड पावर, पुतिन ने भी दी बधाई appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

IND vs AFG 3rd T20 Live Score: टॉस जीतकर अफगानिस्तान करेगा पहले गेंदबाजी, भारत सीरीज में 2-0 से आगे

हिंदुस्तान और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की T20I सीरीज का आखिरी मुकाबला गुरुवार, 17 सितंबर को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में स्पोर्ट्सा जा रहा है. अफगानिस्तान ने टॉस जीतकर हिंदुस्तान को पहले बल्लेबाजी करने को न्योता दिया है. हिंदुस्तान ने एक बदलाव और अफगानिस्तान ने 2 बदलाव किया है. सीरीज में हिंदुस्तान 2-0 से आगे है. The post IND vs AFG 3rd T20 Live Score: टॉस जीतकर अफगानिस्तान करेगा पहले गेंदबाजी, हिंदुस्तान सीरीज में 2-0 से आगे appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

पीएम मोदी के लिए पुरुलिया में जले ‘आशीर्वाद के दीये’, एक लाख दीप से बनाया नरेंद्र मोदी का विशाल चित्र

PM Modi Birthday Celebration: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के मौके पर पश्चिम बंगाल के पुरुलिया शहर में एक अनोखा आयोजन देखने को मिला. ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के तहत पुरुलिया इंडोर स्टेडियम में एक लाख दीये से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विशाल चित्र तैयार किया गया है. 2500 वर्गफीट में बना है पीएम मोदी का विशाल चित्र झारखंड से आये 11 कलाकरों ने 2500 वर्गफीट एरिया में इस कलाकृति को तैयार किया है. नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) के गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर देश के प्रधानमंत्री के तौर पर सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं. इसी शृंखला में पुरुलिया में भी भव्य कार्यक्रमों का आयोजन हो रहा है. ये भी पढ़ें: पीएम मोदी ने बंगाल में ‘पीएम आवास योजना’ के 50 लाख लाभार्थियों की सूची तैयार करने की घोषणा की : शुभेंदु अधिकारी बोकारो, गिरिडीह और हजारीबाग के कलाकारों का कमाल कलाकार सुजय कुमार ने बताया कि झारखंड राज्य के बोकारो, गिरिडीह, हजारीबाग के कुल 11 कलाकरों ने 3 दिन की मेहनत से अलग-अलग रंगों के एक लाख दीयों का इस्तेमाल करके मोजेक आर्ट के रूप में इस कलाकृति को तैयार किया है. मोजेक आर्ट आमतौर पर अलग-अलग सामग्री या वेस्ट मटेरियल से बनायी जाती है, लेकिन इस बार करीब एक लाख दीयों का इस्तेमाल कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर बनायी गयी है. ये भी पढ़ें: PM Modi Birthday: बंगाल में महीने भर का ‘सेवा संकल्प अभियान’, शुभेंदु अधिकारी की अपील- घरों, संस्थानों और मंदिरों में दीये जलायें ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत होंगे कई कार्यक्रम हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक लोकल नेता ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन (17 सितंबर) इस साल भव्य रूप से पुरुलिया में मनाया जा रहा है. इस साल उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं. इसकी शुरुआत ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम से हुआ है. ये भी पढ़ें: पीएम मोदी के जन्मदिन पर बंगाल मनायेगा ‘अन्नपूर्णा दिवस’, शुभेंदु अधिकारी का ऐलान The post पीएम मोदी के लिए पुरुलिया में जले ‘आशीर्वाद के दीये’, एक लाख दीप से बनाया नरेंद्र मोदी का विशाल चित्र appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

बिहार में राहत बांटने पहुंचे शख्स के फलों के डिब्बों पर टूट पड़ी भीड़, बेटियों से भी हुई धक्का-मुक्की

Bihar Flood: बिहार में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए हरियाणा से पहुंचे एक व्यक्ति का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है. वीडियो में कुछ लोग राहत सामग्री के रूप में लाये गये फलों के डिब्बों पर चढ़कर फल उठाते और वहां से जाते नजर आ रहे हैं. इस दौरान हरियाणा से पहुंचे युवक उन्हें बार-बार समझाने की कोशिश करते दिख रहे हैं. वह लोगों से कहते नजर आते हैं कि यह सामान वह इतनी दूर से उनकी मदद के लिए लेकर आये हैं, फिर इस तरह अफरातफरी क्यों मचायी जा रही है. मैं इतनी दूर से सिर्फ आपके लिए आया हूं जरूरतमंदों के बीच फल बांटने पहुंचे एनजीओ ‘हर मैदान फतेह सोसाइटी’ के अध्यक्ष सहज दुग्गल इस स्थिति से काफी परेशान नजर आये. उन्होंने घटना से जुड़ा वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर भी शेयर किया है. वीडियो में वह बिखरे हुए फलों के डिब्बों और लोगों की भीड़ के बीच खड़े दिखाई दे रहे हैं. वह लोगों से बार-बार पूछते नजर आते हैं कि फल लेने के दौरान इस तरह की अफरातफरी क्यों मचायी गयी. बिहार से जुड़ी अन्य ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें.. डिब्बों पर चढ़कर फल लेने लगी भीड़ सहज दुग्गल के वीडियो में बड़ी संख्या में लोग फल लेने के लिए आगे बढ़ते दिख रहे हैं. इस दौरान कुछ लोग डिब्बों पर चढ़ गये और उनमें रखे फल निकालकर ले जाने लगे. सहज लोगों को ऐसा करने से रोकने और समझाने की कोशिश करते नजर आ रहे हैं. वह कहते दिख रहे हैं कि इस तरह फल लेने से वितरण के लिए लाये गये डिब्बे खराब हो जायेंगे. वीडियो में सहज एक बुजुर्ग स्त्री की ओर भी इशारा करते हैं, जिसके हाथ में फल नजर आ रहे हैं. वहीं, कुछ लड़कों से जब वह इस बारे में सवाल करते हैं, तो वे मुस्कुराते हुए दिखाई देते हैं. बिखरे हुए डिब्बों की ओर इशारा करते हुए सहज बार-बार सवाल करते हैं, “आप सब डिब्बे क्यों खराब कर रहे हैं? क्या आप अपनी हरकतों से खुश हैं?” View on Instagram बेटियों के साथ भी धक्का-मुक्की सहज अपनी दो बेटियों के साथ बिहार के बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री लेकर पहुंचे थे। उनका दावा है कि फल वितरण के दौरान भीड़ के अचानक टूट पड़ने से स्थिति बेकाबू हो गय. इस दौरान उनकी बेटियों के साथ भी धक्का-मुक्की हुई. सहज ने कहा कि जिन लोगों की मदद के लिए वह सामान लेकर पहुंचे थे, उसी सामान को लेने की कोशिश में उनकी बेटियों को भी धक्का दिया गया. वह इस घटना से काफी निराश नजर आये. उन्होंने कहा, “मेरी बेटियां भी मेरे साथ थीं. जो सामान हमने उनके लिए खरीदा था, उसे लेने की कोशिश में लोगों ने उन्हें बहुत धक्का दिया. इससे मैं बहुत निराश हूं.” इसके बाद सहज ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि वह इतनी दूर से सिर्फ जरूरतमंदों की मदद के लिए बिहार आये हैं. उन्होंने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा, “मैं इतनी दूर से सिर्फ आपके लिए आया हूं. आप मेरे साथ ऐसा क्यों कर रहे हैं?” View on Instagram वीडियो को लेकर सोशल मीडिया पर बहस सहज के वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं. कुछ यूजर्स ने कहा कि राहत सामग्री बांटने के दौरान इस तरह की अफरातफरी से जरूरतमंद लोगों की मदद करने के लिए पहुंचने वाले स्वयंसेवकों का मनोबल प्रभावित हो सकता है. वहीं, कुछ लोगों ने भीड़ के व्यवहार पर सवाल उठाये. कुछ यूजर्स का कहना था कि राहत सामग्री वितरण के दौरान कतार और उचित व्यवस्था होनी चाहिए, ताकि सभी जरूरतमंदों तक सामान पहुंच सके. हालांकि, घटना को लेकर सोशल मीडिया पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं. View on Instagram बिहार में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित बिहार में सितंबर की शुरुआत से ही कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. राज्य के 15 जिलों में 50 लाख से अधिक लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आयी है. ऐसे हालात में अलग-अलग राज्यों से सामाजिक संगठन और स्वयंसेवी समूह राहत सामग्री लेकर बिहार पहुंच रहे हैं. इसी क्रम में हरियाणा से सहज दुग्गल भी अपनी टीम के साथ बाढ़ प्रभावित लोगों के बीच फल बांटने पहुंचे थे. राहत सामग्री के वितरण के दौरान हुई अफरातफरी का उनका वीडियो अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. Also Read बाढ़ में डूबा बिहार, राहत पर गरमाई सियासत; पप्पू यादव का तेजस्वी पर हमला, PK ने BJP को घेरा The post बिहार में राहत बांटने पहुंचे शख्स के फलों के डिब्बों पर टूट पड़ी भीड़, बेटियों से भी हुई धक्का-मुक्की appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद बचे सिर्फ ये दो नक्सली, इन जंगलों में छिपे हैं, जानें असीम ने कहां छिपा रखा है हथियार

जमशेदपुर : झारखंड के जंगलों से लाल आतंक का चैप्टर अब अपने आखिरी पन्नों पर पहुंच चुका है. 2.20 करोड़ का इनामी नक्सली असीम मंडल उर्फ आकाश की गिरफ्तारी हो गयी है. सूत्रों के मुताबिक, कभी खौफ का पर्याय रहे पूर्वी सिंहभूम के जंगलों में अब नक्सलियों का पूरा साम्राज्य ढह चुका है. वहां सिर्फ दो ही सक्रिय नक्सली – मंगल और मालती बचे हैं. फिलहाल दोनों नक्सली घाटशिला के पास झारखंड-बंगाल के सीमावर्ती घने जंगलों में अपनी जान बचाकर छिपे हुए हैं. दोनों पर कुल 30-35 मामले दर्ज हैं. दोनों 25-30 वर्ष के बीच के बताये जा रहे हैं. फिल्मी अंदाज में वेश बदलकर बंगाल भागा था असीम खुलासे के मुताबिक, गिरफ्तारी से कुछ समय पहले तक असीम मंडल, मंगल और मालती एक ही दस्ते में साथ सक्रिय थे. सुरक्षाबलों की बढ़ती दबिश से घबराए असीम मंडल ने घाटशिला के जंगलों में अपने खतरनाक हथियार जमीन के भीतर छिपा दिए. इसके बाद उसने एक शातिर चाल चलते हुए माओवादी लिबास उतारा और आम स्थानीय ग्रामीण का रूप धर लिया. इसी हुलिए में वह झारखंड से निकलकर सीधा पश्चिम बंगाल के पूर्व मेदिनीपुर जिले के ललाट गांव जा पहुंचा. वहां वह पूरी तरह छिपकर एक साधारण नागरिक की जिंदगी जी रहा था. लेकिन, कोलकाता एसटीएफ की पैनी और सतर्क नजरों से वह बच नहीं सका और आखिरकार शिकंजे में आ गया. ललाट गांव में सर्च ऑपरेशन चलाती पुलिस. गिरोह के कई चेहरों का हुआ खौफनाक अंत दूसरी ओर, इस गिरोह के कई चेहरों का अंत बेहद खौफनाक रहा. जहां एक तरफ श्याम सिंह की बीमारी से तड़पकर मौत हो गई, वहीं समीर सिंह सारंडा के जंगलों में सुरक्षाबलों के साथ हुई भीषण मुठभेड़ में ढेर हो गया. साथ ही पिछले ही महीने दलमा की तराई से मदन महतो, सागर सिंह उर्फ विरेन और मीणा को भी गिरफ्तार कर लिया गया था. The post असीम मंडल की गिरफ्तारी के बाद बचे सिर्फ ये दो नक्सली, इन जंगलों में छिपे हैं, जानें असीम ने कहां छिपा रखा है हथियार appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

UPSC वीडियो विवाद : बंगाल की IPS बुशरा बानो का ट्रांसफर, ‘अस्सलाम अलैकुम’ और ‘इंशाहल्लाह’ पर मचा बवाल

IPS ‍Bushra Bano Transfer: संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) परीक्षा की अपनी तैयारी और सफलता की यात्रा पर एक वीडियो बनाने की वजह से विवादों में आयीं 2021 बैच की आईपीएस (IPS) अधिकारी बुशरा बानो का पश्चिम बंगाल प्रशासन ने तबादला (Transfer) कर दिया है. खड़गपुर की एडिशनल एसपी (Additional SP) के पद पर तैनात बुशरा बानो को अब स्टेट आर्म्ड पुलिस (State Armed Police) में डिप्टी कमांडेंट बना दिया गया है. बुशरा बानो का तबादला उस विवादित वीडियो के वायरल होने और सोशल मीडिया पर आलोचनाओं के तुरंत बाद हुआ है, जिसमें उन्होंने धार्मिक और पारंपरिक संबोधन किया था. वीडियो में क्या था? ‘अस्सलाम अलैकुम’ से शुरुआत और ‘जजाकल्लाह’ पर विवाद सोशल मीडिया पर 13 सितंबर को पोस्ट किये गये वीडियो में आईपीएस अधिकारी बुशरा बानो ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की रेजिडेंशियल कोचिंग अकादमी (RCA) द्वारा अपनी यूपीएससी तैयारी में मिली मदद का जिक्र किया था. वीडियो की शुरुआत उन्होंने ‘अस्सलाम अलैकुम’ से की. इसके बाद अपनी यात्रा का विवरण देते हुए ‘इंशाहल्लाह’ कहा और अंत ‘जजाकल्लाह’ शब्द के साथ किया. बुशरा बानो. सोशल मीडिया पर हुई बुशरा की ट्रॉलिंग वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ (पूर्व में ट्विटर) पर कई यूजर्स ने इस पर आपत्ति जतायी. यूजर्स ने सवाल उठाया कि एक सेवारत हिंदुस्तानीय पुलिस अधिकारी को वीडियो में ‘जय हिंद’ या ‘वंदे मातरम्’ जैसे राष्ट्रीय संबोधनों का उपयोग करना चाहिए था. ये भी पढ़ें: पश्चिम बंगाल में ट्रांसफर-पोस्टिंग, CID के ADG समेत 28 IPS का तबादला हिंदू लीगल फंड ने गृह सचिव से की शिकायत विवाद बढ़ने के बाद ‘एक्स’ हैंडल ‘हिंदू लीगल फंड’ (Hindu Legal Fund) ने दावा किया कि उसने पश्चिम बंगाल के गृह सचिव के पास आईपीएस बुशरा बानो के खिलाफ शिकायत दर्ज करायी है. ये भी पढ़ें: कोलकाता पुलिस ने कई थाना प्रभारी, अपर प्रभारी अधिकारियों का तबादला किया शिकायत में क्या हैं आरोप? शिकायत में आरोप लगाया गया कि हिंदुस्तानीय राज्य का प्रतिनिधित्व करने वाले एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को सार्वजनिक संवाद में पूरी तरह से तटस्थता बनाये रखनी चाहिए. धार्मिक शब्दावली की बजाय राष्ट्रीय संबोधनों का प्रयोग करना चाहिए. तबादले पर प्रशासन की सफाई राज्य प्रशासन द्वारा जारी ट्रांसफर ऑर्डर में बुशरा बानो के तबादले का कारण नियमित प्रशासनिक फेरबदल बताया गया है. इसमें वायरल वीडियो या सोशल मीडिया पर हुई आलोचना का कोई उल्लेख नहीं किया गया है. बुशरा की जगह पार्थ घोष को खड़गपुर का नया एडिशनल एसपी नियुक्त किया गया है. शुभेंदु मंडल को चंदननगर पुलिस कमिश्नरेट में एडिशनल डिप्टी कमिश्नर (ADC) बना दिया गया है. The post UPSC वीडियो विवाद : बंगाल की IPS बुशरा बानो का ट्रांसफर, ‘अस्सलाम अलैकुम’ और ‘इंशाहल्लाह’ पर मचा बवाल appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Masik Durga Ashtami: मासिक दुर्गाष्टमी पर करें ये 5 आसान काम, मां दुर्गा की कृपा से खुलेंगे सुख-समृद्धि के रास्ते

Masik Durga Ashtami: मासिक दुर्गा अष्टमी हर महीने शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है. पंचांग के अनुसार, इस साल यह व्रत 19 सितंबर को यानी शुक्रवार के दिन रखा जाएगा. शास्त्रों के अनुसार यह दिन आदि शक्ति जगतजननी मां जगदंबा की कृपा पाने के लिए खास होता है. मान्यतानुसार, इस दिन श्रद्धा से मां दुर्गा की पूजा अर्चना करने के साथ-साथ कुछ खास उपाय किए जाएं, तो जीवन में सुख-समृद्धि आ सकती है. मासिक दुर्गा अष्टमी (भाद्रपद) तिथि व्रत विवरण तारीख और दिन समय अष्टमी तिथि आरंभ 18 सितंबर (शुक्रवार) दोपहर 1 बजे अष्टमी तिथि समाप्त 19 सितंबर (शनिवार) दोपहर 3:26 बजे मासिक दुर्गा अष्टमी व्रत 19 सितंबर (शनिवार) सूर्योदय के साथ दुर्गा अष्टमी आसान पूजा विधि मासिक दुर्गा अष्टमी के दिन सुबह उठकर स्नान इत्यादि दैनिक कर्म से निवृत हो जाए. साफ-सुथरे कपड़े पहनकर घर के पूजा स्थान पर एक छोटी चौकी स्थापित कर उस पर लाल रंग का कपड़ा बिछाएं और मां दुर्गा की तस्वीर रखें. पूजा स्थल पर लाल रंग का आसन बिछाकर बैठ जाएं और मां दुर्गा का स्मरण करते हुए अपने ऊपर और चारों दिशाओं में गंगाजल का छिड़कें. मां दुर्गा धूप-दीप, फूल इत्यादि से उनकी पूजा करें. इसके बाद दुर्गा सप्तशती में दिए गए द्वात्रिंश नाम (मां दुर्गा के 32 नाम) या दुर्गा चालीसा का पाठ करें. मां दुर्गा को फल, मिठाई या नारियल का भोग लगाएं. धूप-दीप या कपूर से मां दुर्गा की आरती करें. आरती करने के बाद भूलवश हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगे. पूजन के अंत में प्रसाद बांटें. दुर्गा सप्तशती में वर्णित द्वात्रिंश स्तुति श्लोक दुर्गा दुर्गार्ति शमनी दुर्गापद्विनिवारिणी दुर्गामच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी दुर्गतोद्वारिणी दुर्ग निहन्त्री दुर्गमापहा दुर्गम ज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी दुर्गमाङ्गी दुर्गमाता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्लभा दुर्गधारिणी मां दुर्गा के 32 नाम दुर्गा दुर्गार्तिशमनी दुर्गापद्विनिवारिणी दुर्गमच्छेदिनी दुर्गसाधिनी दुर्गनाशिनी दुर्गतोद्धारिणी दुर्गनिहन्त्री दुर्गमापहा दुर्गमज्ञानदा दुर्गदैत्यलोकदवानला दुर्गमा दुर्गमालोका दुर्गमात्मस्वरूपिणी दुर्गमार्गप्रदा दुर्गमविद्या दुर्गमाश्रिता दुर्गमज्ञानसंस्थाना दुर्गमध्यानभासिनी दुर्गमोहा दुर्गमगा दुर्गमार्थस्वरूपिणी दुर्गमासुरसंहन्त्री दुर्गमायुधधारिणी दुर्गमांगी दुर्गमता दुर्गम्या दुर्गमेश्वरी दुर्गभीमा दुर्गभामा दुर्गभा दुर्गदारिणी ये भी पढ़ें: Radha Ashtami 2026: कब है राधा अष्टमी? जानें तारीख और महत्व दुर्गा अष्टमी के आसान उपाय मासिक दुर्गा अष्टमी के दिन 2 से 10 वर्ष की कन्या को नियंत्रण देकर घर पर बुलाएं. कन्या के पैर धोकर उनका पूजन करें और उन्हें खीर-पूड़ी, हलवा या खिलाएं. कन्या भोजन के बाद उन्हें दक्षिणा या उनका पसंदीदा चीज भेंट करें. मां दुर्गा को खीर का भोग लगाएं. प्रसाद के रूप में लोगों के बीच बांटें. घर के दरवाजे पर घी का दीपक जलाएं, इससे नकारात्मक ऊर्जा दूर होगी. दुर्गा अष्टमी के दिन घर में लगी हुई तुलसी के नजदीक घी या तिल के तेल का दीया जलाएं. दुर्गा अष्टमी के दिन मां दुर्गा को जल से भरा एकाक्षी (एक आंख वाला) नारियल भेंट करें. इससे जीवन में सुख-समृद्धि आती है. The post Masik Durga Ashtami: मासिक दुर्गाष्टमी पर करें ये 5 आसान काम, मां दुर्गा की कृपा से खुलेंगे सुख-समृद्धि के रास्ते appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Prithvi Shaw-Akriti Agarwal Breakup: सगाई के 6 महीने बाद अलग हुए पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल, पोस्ट लिखकर बोलीं- दिल भारी है…

Prithvi Shaw-Akriti Agarwal Breakup: मार्च में सगाई कर अपने रिश्ते को ऑफिशियल करने वाले हिंदुस्तानीय क्रिकेटर पृथ्वी शॉ और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर आकृति अग्रवाल अब अलग हो गए हैं. कुछ महीने पहले तक दोनों की सगाई की तस्वीरें सोशल मीडिया पर छाई हुई थीं, लेकिन अब दोनों ने आपसी सहमति से रिश्ते को खत्म करने का फैसला किया है. ब्रेकअप की समाचार सामने आते ही फैंस के बीच भी इसे लेकर काफी बातें होने लगीं. हालांकि, इस रिश्ते के खत्म होने की असली वजह क्या है, इसे लेकर दोनों ने ज्यादा कुछ नहीं बताया है. आकृति ने अब एक पोस्ट शेयर कर लोगों से उनकी प्राइवेसी का सम्मान करने और बिना वजह अटकलें न लगाने की अपील की है. आकृति अग्रवाल ने पोस्ट में क्या लिखा? View on Instagram इस पूरे मामले पर आकृति अग्रवाल ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक लंबा पोस्ट लिखकर रिश्ते के खत्म होने की जानकारी दी. उन्होंने लिखा कि वह बहुत भारी मन से यह बात बता रही हैं कि उन्होंने और पृथ्वी ने अपनी मंजिलें अलग करने का फैसला लिया है. आकृति ने बताया कि भविष्य को लेकर दोनों के अलग-अलग लक्ष्य और ऐसी परिस्थितियां थीं, जिसकी वजह से उन्हें यह मुश्किल कदम उठाना पड़ा. ‘हम एक-दूसरे की इज्जत करते हैं, लेकिन रास्ते अलग हैं’ आकृति ने अपने बयान में कहा कि भले ही वे अलग हो रहे हैं, लेकिन उनके दिल में एक-दूसरे के लिए प्यार और फिक्र हमेशा रहेगी. उन्होंने लिखा कि दोनों ने यह सच्चाई स्वीकार कर ली है कि उनकी राहें एक नहीं हो सकतीं. इसके साथ ही उन्होंने फैंस और मीडिया से अपील की कि इस मुश्किल घड़ी में उनकी प्राइवेसी का सम्मान किया जाए और किसी भी तरह की मनगढ़ंत कहानियां या झूठी अफवाहें न उड़ाई जाएं. सगाई की तस्वीरें डिलीट, दोनों ने किया अनफॉलो पृथ्वी शॉ इंस्टाग्राम फॉलोइंग लिस्ट अलग होने की जानकारी देने के बाद आकृति ने पृथ्वी शॉ के साथ अपनी सगाई की तस्वीरें भी इंस्टाग्राम से हटा दी हैं. उन्होंने पृथ्वी को सोशल मीडिया पर अनफॉलो भी कर दिया है. वहीं पृथ्वी शॉ ने भी आकृति को अनफॉलो कर दिया है और उनके साथ शेयर की गई तस्वीरें अपने सोशल मीडिया अकाउंट से हटा दी हैं. इन बदलावों के बाद दोनों के अलग होने की बात और साफ हो गई. जुलाई में भी उड़ी थीं ब्रेकअप की अफवाहें आपको बता दें कि इससे पहले जुलाई के महीने में भी दोनों के अलग होने की चर्चा जोरों पर थी. तब आकृति ने एक पोस्ट में धोखे का जिक्र किया था, जिसके बाद लोगों को लगा कि दोनों का ब्रेकअप हो गया है. हालांकि उस समय आकृति ने सामने आकर सफाई दी थी और कहा था कि वह पोस्ट पृथ्वी के लिए नहीं था और वे दोनों एक साथ खुश हैं. लेकिन अब आखिरकार दोनों ने हमेशा के लिए अलग होने का आधिकारिक फैसला ले लिया है. दूसरी तरफ इस पूरे मामले पर पृथ्वी शॉ ने अब तक पूरी तरह चुप्पी साधी हुई है. The post Prithvi Shaw-Akriti Agarwal Breakup: सगाई के 6 महीने बाद अलग हुए पृथ्वी शॉ और आकृति अग्रवाल, पोस्ट लिखकर बोलीं- दिल भारी है… appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

मोदी की कूटनीति और बदलती यूरेशिया की तस्वीर… सेंट्रल एशिया के दौरे पर क्या-क्या खेल हुआ?

प्रधानमंत्री के रूप में उनके कार्यकाल की विदेश नीति को देखें तो एक महत्वपूर्ण बदलाव यह रहा है कि हिंदुस्तान ने अपनी कूटनीतिक सक्रियता को केवल पारंपरिक पड़ोसी देशों तक सीमित नहीं रखा. मध्य एशिया यानी Central Asia हिंदुस्तान की व्यापक यूरेशियाई रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनकर उभरा है. कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उज्बेकिस्तान—ये पांच देश सिर्फ तेल, गैस और यूरेनियम के कारण महत्वपूर्ण नहीं हैं. इनके जरिए हिंदुस्तान की नजर ऊर्जा सुरक्षा, कनेक्टिविटी, आतंकवाद-रोधी सहयोग, महत्वपूर्ण खनिजों, डिजिटल टेक्नोलॉजी और यूरेशियाई रणनीतिक संतुलन पर भी है. और यहीं से कहानी दिलचस्प होती है. 3D Map of Central Asia 2015 में मोदी ने बदला Central Asia का कूटनीतिक गणित हिंदुस्तान का Central Asia से संबंध नया नहीं है. सिल्क रूट के दौर में हिंदुस्तान और मध्य एशिया के बीच व्यापार के साथ-साथ विचारों, धर्म, संस्कृति और ज्ञान का भी आदान-प्रदान हुआ. बौद्ध धर्म के प्रसार से लेकर सूफी परंपराओं तक दोनों क्षेत्रों के बीच ऐतिहासिक संपर्क रहा है. लेकिन सोवियत संघ के विघटन के बाद भौगोलिक और नेतृत्वक परिस्थितियों ने हिंदुस्तान की आर्थिक पहुंच को सीमित कर दिया. फिर आया जुलाई 2015. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ही यात्रा में उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान—पांचों Central Asian देशों का दौरा किया. विदेश मंत्रालय ने इसे हिंदुस्तान के Central Asian partners के साथ जुड़ाव में महत्वपूर्ण गति देने वाली यात्रा के रूप में दर्ज किया है. यह सिर्फ पांच देशों की यात्रा नहीं थी. इसका संदेश था—Central Asia हिंदुस्तान की विदेश नीति के peripheral map पर नहीं, strategic map पर है. Read more: BRICS 2026: विरोधाभासों का मंच क्यों बना दिल्ली शिखर सम्मेलन? जानिए दोस्त कौन, प्रतिद्वंद्वी कौन? 4C से आगे बढ़ी हिंदुस्तान की Central Asia Policy 2012 में हिंदुस्तान ने Connect Central Asia Policy के जरिए इस क्षेत्र के साथ संबंधों को पुनर्जीवित करने की कोशिश की थी. इसका जोर broadly चार क्षेत्रों पर था— Commerce Connectivity Consular cooperation Culture लेकिन समस्या थी—connectivity हिंदुस्तान और Central Asia के बीच पाकिस्तान और अफगानिस्तान की जटिल भू-नेतृत्व मौजूद थी. इसलिए हिंदुस्तान को वैकल्पिक रास्तों की जरूरत थी. यहीं से Chabahar Port और INSTC का महत्व बढ़ता है. मोदी प्रशासन ने रिश्तों को संस्थागत कैसे बनाया? 2019 में India-Central Asia Dialogue की शुरुआत हुई. इसका उद्देश्य नेतृत्वक, सुरक्षा, आर्थिक, विकास और सांस्कृतिक सहयोग को संस्थागत रूप देना था. इसके बाद 27 जनवरी 2022 को पहला India-Central Asia Summit हुआ, जिसकी मेजबानी प्रधानमंत्री मोदी ने वर्चुअल प्रारूप में की. पांचों Central Asian देशों के राष्ट्राध्यक्ष इसमें शामिल हुए. 2025 में चौथे India-Central Asia Dialogue के दौरान हिंदुस्तान और पांचों देशों ने व्यापार, डिजिटल भुगतान, वित्तीय संपर्क, pharmaceuticals, IT, agriculture, energy और INSTC जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया. यानी हिंदुस्तान की नीति अब केवल high-level visits तक सीमित नहीं है. यह धीरे-धीरे institutional engagement में बदल रही है. रूस और चीन के बीच हिंदुस्तान की जगह कहां है? Central Asia की नेतृत्व को समझने के लिए तीन शक्तियों को देखना जरूरी है— रूस, चीन और हिंदुस्तान. एससीओ शिखर सम्मेलन (Photo: X) लेकिन हिंदुस्तान के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है? हिंदुस्तान की रणनीति के सामने सबसे बड़ी समस्या अभी भी geography है. Central Asia तक हिंदुस्तान की सीधी land connectivity नहीं है. इसलिए Chabahar और INSTC जैसे routes बेहद महत्वपूर्ण हैं. दूसरी चुनौती Afghanistan है. अफगानिस्तान में अस्थिरता या सुरक्षा संबंधी जोखिम South Asia और Central Asia के बीच connectivity को प्रभावित कर सकते हैं. तीसरी चुनौती है—China की आर्थिक उपस्थिति और Russia की पारंपरिक security influence. इसलिए Central Asia में हिंदुस्तान की रणनीति किसी त्वरित breakthrough की कहानी नहीं है. यह long game है. West की नजर से हिंदुस्तान की चुनौती Turan Research Center के Director Joseph Epstein के आकलन के अनुसार, हिंदुस्तान का वैश्विक कद बढ़ा है, लेकिन Central Asia में ठोस और dominant presence बनाना अभी भी कठिन है. उनके अनुसार Russia की security presence और China का economic footprint क्षेत्र में गहरा है. हिंदुस्तान की भौगोलिक सीमाएं भी उसकी operational reach को प्रभावित करती हैं. लेकिन Epstein यह भी रेखांकित करते हैं कि हिंदुस्तान के पास soft power, education, digital public infrastructure और cultural links जैसे ऐसे माध्यम हैं, जिनके जरिए Central Asian देशों के साथ संबंधों को diversify किया जा सकता है. यही हिंदुस्तान की संभावित strategic niche है. असली सवाल: क्या Central Asia हिंदुस्तान का नया strategic frontier है? Central Asia में हिंदुस्तान की कहानी किसी एक summit, किसी एक port या किसी एक agreement की कहानी नहीं है. यह तीन स्तरों पर चल रही है— पहला—Security: आतंकवाद, extremism, Afghanistan और regional stability. दूसरा—Connectivity: Chabahar, INSTC और नए transport corridors. तीसरा—Resources & Technology: Uranium, critical minerals, energy, pharmaceuticals, AI और Digital Public Infrastructure. और इसके ऊपर है एक चौथा layer—civilizational diplomacy हिंदुस्तान Central Asia को केवल पांच देशों के समूह के रूप में नहीं देखता. यह हिंदुस्तान के लिए उस विशाल Eurasian space का हिस्सा है, जहां इतिहास, भूगोल, संसाधन और रणनीति एक-दूसरे से जुड़ते हैं. मोदी की Central Asia policy का असली अर्थ प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर उनकी विदेश नीति को Central Asia के संदर्भ में देखें तो पिछले एक दशक की सबसे महत्वपूर्ण बात institutionalisation दिखाई देती है. 2015 में पांचों देशों की यात्रा से शुरू हुआ high-level outreach आगे चलकर India-Central Asia Dialogue और 2022 Summit तक पहुंचा. 2026 में Uzbekistan के साथ Comprehensive Strategic Partnership और Bishkek SCO Summit ने इस engagement को एक और व्यापक Eurasian context दिया. लेकिन Central Asia में हिंदुस्तान की कहानी अभी पूरी नहीं हुई है. Diplomat and Assistant Professor Samantha Karmakar on Central Asia भूगोल, Afghanistan, connectivity और China-Russia की गहरी मौजूदगी इसे एक लंबी रणनीतिक प्रक्रिया बनाते हैं. इसलिए Central Asia में हिंदुस्तान की नीति को किसी तात्कालिक geopolitical contest की बजाय एक long-term strategic investment के रूप में देखना अधिक उपयोगी है. हिंदुस्तान का लक्ष्य केवल वहां मौजूद होना नहीं है—बल्कि Eurasia में ऐसा strategic space बनाना है, जहां connectivity, technology, resources और diplomacy के जरिए New Delhi की स्वतंत्र भूमिका बनी रहे. लेखिका: Samantha Karmakar, Foreign Policy Analyst, Diplomacy & Strategic Affairs Read more: सिंगूर के साये से निकलकर क्या बंगाल बन रहा है हिंदुस्तान का नया आर्थिक

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top