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Author name: Vinod Jha

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शुभमन गिल ने टी20 क्रिकेट में रचा इतिहास, सबसे तेज 6000 रन बनाने वाले तीसरे भारतीय बने

Shubman Gill T20 Record: गुजरात टाइटंस के कप्तान शुभमन गिल टी20 क्रिकेट में सबसे तेज 6000 रन बनाने वाले हिंदुस्तान के तीसरे बैटर बन गए हैं. इस सूची में केएल राहुल और विराट कोहली पहले से ही शामिल हैं. गिल ने यह उपलब्धि 185 पारियों में हासिल की. सबसे तेज 6000 रन बनाने वाले हिंदुस्तानीय बल्लेबाज केएल राहुल – 166 पारियांविराट कोहली – 184 पारियांशुभमन गिल – 185 पारियां सबसे तेज 6000 रन बनाने वाले बल्लेबाज वेस्टइंडीज के पूर्व विस्फोटक बल्लेबाज क्रिस गेल टी20 क्रिकेट में सबसे तेज 6000 रन बनाने खिलाड़ी हैं. उन्होंने 162 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की. दूसरे नंबर पाकिस्तान के बाबर आजम हैं, जिसने 165 पारियों में 6000 रन बनाए थे. तीसरे नंबर पर हिंदुस्तान के केवल राहुल हैं, जिसने 166 पारियों में यह उपलब्धि हासिल की. चौथे नंबर पर शॉन मार्श (180 पारी) और पांचवें नंबर पर डेवोन कॉनवे हैं, जिसने भी 180 पारियों में 6000 रन बनाए हैं. ओवरऑल लिस्ट (पारियां) 162 – क्रिस गेल165 – बाबर आजम166 – केएल राहुल180 – शॉन मार्श180 – डेवोन कॉनवे184 – विराट कोहली185 – शुभमन गिल The post शुभमन गिल ने टी20 क्रिकेट में रचा इतिहास, सबसे तेज 6000 रन बनाने वाले तीसरे हिंदुस्तानीय बने appeared first on Naya Vichar.

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आयकर विभाग बड़ा में फेरबदल: रांची, धनबाद और हजारीबाग में बदले कमिश्नर, निशा उरांव को रायपुर की कमान

Income Tax Transfer, रांची (विवेक चंद्रा की रिपोर्ट): केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के तहत आयकर विभाग में बड़े पैमाने पर फेरबदल करते हुए अधिकारियों के तबादले और पदस्थापन (Transfer-Posting) का बड़ा आदेश जारी किया है. इस ऑल इंडिया स्तर के आदेश का सीधा असर बिहार-झारखंड रीजन पर पड़ा है. इसके तहत झारखंड के रांची, जमशेदपुर, धनबाद और हजारीबाग समेत कई प्रमुख शहरों में प्रिंसिपल कमिश्नर, कमिश्नर, एडिशनल, ज्वाइंट, डिप्टी और असिस्टेंट कमिश्नर स्तर के आला अधिकारियों की नई तैनाती की गई है, जबकि कई अधिकारियों को राज्य से बाहर का रास्ता दिखाया गया है. सलिल मिश्रा बने जमशेदपुर के नए PCIT जारी आधिकारिक अधिसूचना के अनुसार, जमशेदपुर में पदस्थापित सलिल मिश्रा को प्रोमोशन (पदोन्नति) का बड़ा तोहफा मिला है. उन्हें पदोन्नति के बाद जमशेदपुर में PCIT (RU)-1 के महत्वपूर्ण पद पर तैनात किया गया है. इसके साथ ही विभाग ने उन पर भरोसा जताते हुए रांची PCIT का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया है. दूसरी ओर, रांची में लंबे समय से अपनी सेवा दे रहे अमिताभ कुमार सिन्हा का तबादला देश की राजधानी दिल्ली कर दिया गया है. दिल्ली में वे अब PCIT (AU)-1 का मुख्य दायित्व संभालेंगे. कमिश्नर स्तर पर भी हुए मुख्य बदलाव सीबीडीटी ने कमिश्नर (CIT) रैंक के अधिकारियों की जिम्मेदारी में व्यापक बदलाव किए हैं. आशीष कुमार देहारिया को CIT (अपील) यूनिट-1, रांची के पद पर पदस्थापित किया गया है. वहीं, हुइड्रोम रोबिंद्रो सिंह को कोयलांचल धनबाद में CIT (अपील) यूनिट-1 का नया कमिश्नर नियुक्त किया गया है. उसी तरह संजय कुमार को हजारीबाग स्थित ADG (NADT-RC) के महत्वपूर्ण पद पर तैनाती मिली है. इसके अलावा हिंदुस्तान भूषण गर्ग को जमशेदपुर CIT (अपील) यूनिट-1 का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है. Also Read: ममता शर्मसार: चलती ट्रेन से मां ने दुधमुंही बच्ची को नीचे फेंका, सरायकेला-खरसावां ट्रैक पर मिला शव निशा उरांव बनीं रायपुर की नई कमिश्नर झारखंड कैडर की तेजतर्रार अधिकारी राखी निशा उरांव को छत्तीसगढ़ के रायपुर में CIT (अपील) यूनिट-1 के पद पर कमिश्नर रैंक में नई और बड़ी जिम्मेदारी सौंपी गई है. एडिशनल, ज्वाइंट, डिप्टी और असिस्टेंट कमिश्नर स्तर पर भी फेरबदल सीबीडीटी ने बिहार-झारखंड के संयुक्त क्षेत्र में बड़ी संख्या में एडिशनल (अपर) और ज्वाइंट (संयुक्त) कमिश्नर स्तर के अधिकारियों को तैनात किया है. इनमें मुख्य रूप से स्वरलिपि रॉय, संदीप गांगुली, राहुल मिश्रा, अदिति रॉय मल्लिक, संदीपन खान और रवि कांत कुमार चौधरी के नाम शामिल हैं. इसके अलावा, डिप्टी (उप) और असिस्टेंट (सहायक) कमिश्नर स्तर पर भी कई युवा चेहरों को इस रीजन में लाया गया है, जिनमें सम्राट सुबोध कुमार, सुरेंद्र चौधरी, चंद्रकांत झा, गौरव मल्लिक, शिव प्रिया और अंकित मिश्रा शामिल हैं. झारखंड से बाहर भेजे गए अधिकारी रूटीन और प्रशासनिक आवश्यकताओं के तहत सीबीडीटी ने कुछ अधिकारियों का झारखंड से बाहर भी ट्रांसफर किया है. एडिशनल कमिश्नर सौरभ उपाध्याय को रांची से दिल्ली मुख्यालय भेजा गया है. वहीं, एडिशनल कमिश्नर ऋषिकेश पांडेय का तबादला रांची से पश्चिम बंगाल रीजन में किया गया है. डिप्टी कमिश्नर डेविड टोप्पो, नूपुर मुखर्जी और अमित कुमार सिन्हा का भी ट्रांसफर झारखंड से दूसरे राज्यों में कर दिया गया है. 28 मई तक हर हाल में देना होगा योगदान केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) ने तबादला आदेश जारी करने के साथ ही सभी अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए हैं. बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार, स्थानांतरित और नए पदस्थापित किए गए सभी अधिकारियों को 28 मई 2026 तक अपने निर्धारित नए कार्यस्थल पर पहुंचकर हर हाल में अपना योगदान (जॉइनिंग रिपोर्ट) सुनिश्चित करना होगा. Also Read: पुलिस हमले से लेवी वसूली तक, सारंडा-कोल्हान के सक्रिय नक्सलियों पर दर्ज हैं कई गंभीर केस The post आयकर विभाग बड़ा में फेरबदल: रांची, धनबाद और हजारीबाग में बदले कमिश्नर, निशा उरांव को रायपुर की कमान appeared first on Naya Vichar.

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ईरान यूरेनियम संवर्धन पर समझौते के लिए तैयार नहीं, मोजतबा खामेनेई ने ट्रंप की मांग को ठुकराया

Iran US War: ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने साफ कर दिया है कि तेहरान यूरेनियम संवर्धन पर समझौता नहीं करेगा. उन्होंने आदेश दिया है कि समृद्ध यूरेनियम का भंडार देश से बाहर नहीं जाना चाहिए. उन्होंने यह आदेश देकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्रमुख मांग को खारिज कर दिया है. घरेलू सुरक्षा से समझौता नहीं: ईरान शीर्ष प्रशासनिक और सैन्य अधिकारी इस बात से आश्वस्त हैं कि यूरेनियम पर नियंत्रण छोड़ना और उसे विदेश भेजना घरेलू सुरक्षा को बुरी तरह से कमजोर कर देगा. देश भविष्य में वाशिंगटन और तेल अवीव द्वारा सैन्य घुसपैठ के प्रति कहीं अधिक असुरक्षित हो जाएगा. रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के संवैधानिक ढांचे के तहत, सर्वोच्च नेता सभी महत्वपूर्ण राज्य नीतियों पर अंतिम अधिकार रखते हैं. ईरान चाहता है स्थायी समाधान ईरानी प्रशासन के अधिकारियों का कहा है कि उनका प्राथमिक उद्देश्य युद्ध की कानूनी रूप से बाध्यकारी और स्थायी समाप्ति सुनिश्चित करना है, जिसके लिए पुख्ता और विश्वसनीय गारंटी दी जाए. न तो संयुक्त राज्य अमेरिका और न ही इजराइल भविष्य में कोई सैन्य अभियान शुरू करेंगे. तेहरान ने परमाणु बम बनाने के किसी भी गुप्त इरादे से लगातार इनकार किया है. इजराइली पीएम का ईरान के खिलाफ कड़ा रुख इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के खिलाफ अपना कड़ा रुख बनाए रखा है. उन्होंने साथ कहा- जब तक ईरान के कब्जे से समृद्ध यूरेनियम पूरी तरह से हटा नहीं दिया जाता, तेहरान क्षेत्रीय प्रॉक्सी मिलिशिया को दी जाने वाली वित्तीय और भौतिक सहायता पूरी तरह से समाप्त नहीं कर देता, और देश के बैलिस्टिक मिसाइल बुनियादी ढांचे को पूरी तरह से नष्ट नहीं कर दिया जाता, तब तक वह शत्रुता समाप्त करने पर विचार नहीं करेंगे. ये भी पढ़ें: ईरान संकट पर अमेरिका-इजराइल में मतभेद? डोनाल्ड ट्रंप और नेतन्याहू के बीच हुई बहस हिंदुस्तान का एक और दुश्मन ढेर: पुलवामा हमले की साजिश रचने वाला आतंकी हमजा बुरहान मारा गया The post ईरान यूरेनियम संवर्धन पर समझौते के लिए तैयार नहीं, मोजतबा खामेनेई ने ट्रंप की मांग को ठुकराया appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल: फालता में कड़ी सुरक्षा के बीच पड़े 88 फीसदी वोट, मैदान से गायब रहे ‘पुष्पा’

मुख्य बातें जहांगीर पूरी तरह रहे नदारद जगह-जगह दिखे केंद्रीय बल के जवान आखिर क्यों दोबारा चुनाव कराना पड़ा स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप जहांगीर के पीछे हटने से बदल गया चुनावी माहौल भाजपा ने इसे बताया ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ की हार पूरे इलाके में सुरक्षा का रहा अभूतपूर्व इंतजाम Falta Re-Polling: कोलकाता. दक्षिण 24 परगना के फालता विधानसभा केंद्र में गुरुवार को कड़ी सुरक्षा के बीच 285 बूथों पर पुनर्मतदान हुआ. सुबह सात बजे से शुरू हुए मतदान के दौरान पूरे इलाके को सुरक्षा के कड़े घेरे में रखा गया. चुनाव आयोग की ओर से 35 कंपनी केंद्रीय बलों की तैनाती रही, जबकि हर बूथ पर वेब कास्टिंग के जरिये नजर रखी गयी. किसी भी अप्रिय स्थिति से निबटने के लिए 35 क्विक रिस्पॉन्स टीम भी तैयार रखी गयी थी. शाम सात बजे तक के आंकड़ों के अनुसार यहां 87.85 फीसदी मतदान हुआ. जहांगीर पूरी तरह रहे नदारद इस बार सबसे ज्यादा चर्चा तृणमूल उम्मीदवार जहांगीर खान उर्फ ‘पुष्पा’ को लेकर ही रही. पुनर्मतदान से ठीक 48 घंटे पहले जहांगीर ने चुनावी मैदान से हटने का ऐलान कर दिया था. हालांकि नामांकन वापसी की समय-सीमा गुजर जाने के कारण इवीएम में उनका नाम और तृणमूल का चुनाव चिन्ह बना रहा. लेकिन प्रचार से लेकर मतदान के दिन भी जहांगीर पूरी तरह नदारद रहे. उनके घर और पार्टी कार्यालय पर ताला लटका मिला. जगह-जगह दिखे केंद्रीय बल के जवान मतदान के दौरान कुछ संवेदनशील इलाकों में युवकों के अनावश्यक रूप से जमा होने की शिकायत मिली. इसके बाद केंद्रीय बल के जवानों को सक्रिय होते देखा गया. जवानों ने भीड़ हटाकर लोगों को मतदान केंद्रों के आसपास से खदेड़ा और स्थिति को नियंत्रित किया. सुरक्षा बल लगातार इलाके में फ्लैग मार्च और पेट्रोलिंग कर रहे हैं ताकि किसी भी तरह की गड़बड़ी या दबाव की स्थिति पैदा न हो सके. आखिर क्यों दोबारा चुनाव कराना पड़ा 29 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव के दौरान फालता के कई बूथों में भारी अनियमितताओं के आरोप लगे थे. चुनाव आयोग को इवीएम में टेप और स्याही लगाने जैसी शिकायतें मिली थीं. विपक्ष ने बूथ कैप्चरिंग और वोटरों को प्रभावित करने के आरोप लगाये थे. भाजपा नेता और मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुद चुनाव आयोग से दोबारा मतदान कराने की मांग की थी. आयोग ने वेब कास्टिंग और रिपोर्ट की जांच के बाद पूरे विधानसभा क्षेत्र में पुनर्मतदान कराने का फैसला लिया. स्थानीय लोगों ने लगाए गंभीर आरोप पुनर्मतदान के दौरान कई स्थानीय मतदाताओं ने दावा किया कि पिछले चुनावों में उन्हें स्वतंत्र रूप से वोट नहीं डालने दिया जाता था. कुछ लोगों ने आरोप लगाया कि जहांगीर खान और उनके समर्थक बूथों पर दबाव बनाते थे. एक मतदाता ने कहा कि पहले लाइन से लोगों को खींचकर बाहर निकाल दिया जाता था और धमकी दी जाती थी. कुछ लोगों का दावा था कि उंगली पर स्याही लगाने के बावजूद उन्हें वोट डाले बिना लौटना पड़ता था. इस बार केंद्रीय बलों की मौजूदगी के कारण कई मतदाताओं ने खुलकर मतदान करने की बात कही. बूथों के बाहर सुबह से लंबी कतारें देखी गयीं. जहांगीर के पीछे हटने से बदल गया चुनावी माहौल जहांगीर खान लंबे समय से फालता और डायमंड हार्बर इलाके में तृणमूल के प्रभावशाली नेता माने जाते रहे हैं. 2024 लोकसभा चुनाव में इसी क्षेत्र से अभिषेक बनर्जी को बड़ी बढ़त दिलाने में उनकी अहम भूमिका मानी जाती थी. लेकिन पुनर्मतदान से पहले अचानक उनका पीछे हटना नेतृत्वक हलकों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया. जहांगीर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि वह फलता के विकास और शांति के लिए चुनावी लड़ाई से खुद को अलग कर रहे हैं. उन्होंने मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा फालता के लिए घोषित विशेष पैकेज का भी जिक्र किया. हालांकि, नेतृत्वक गलियारों में इसे तृणमूल की अंदरूनी कमजोरी और दबाव की नेतृत्व से जोड़कर देखा जा रहा है. तृणमूल ने भी साफ कर दिया कि चुनाव से हटने का फैसला जहांगीर का व्यक्तिगत निर्णय है. भाजपा ने इसे बताया ‘डायमंड हार्बर मॉडल’ की हार भाजपा लगातार दावा कर रही है कि फलता का पुनर्मतदान तृणमूल की चुनावी रणनीति और कथित दबाव की नेतृत्व पर जनता का जवाब है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने रोड शो कर लोगों से 100 प्रतिशत मतदान की अपील की थी. भाजपा नेताओं का कहना है कि जिस इलाके को कभी अभिषेक बनर्जी का मजबूत गढ़ कहा जाता था, वहीं अब तृणमूल उम्मीदवार चुनाव मैदान छोड़ने को मजबूर हो गये. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें पूरे इलाके में सुरक्षा का रहा अभूतपूर्व इंतजाम 35 कंपनी केंद्रीय बलों की तैनात–सभी 285 बूथों पर वेब कास्टिंग–हर बूथ पर केंद्रीय जवानों की मौजूदगी–35 क्विक रिस्पॉन्स टीम सक्रिय–संवेदनशील इलाकों में लगातार फ्लैग मार्चचुनाव आयोग ने पहले ही साफ कर दिया था कि किसी भी तरह की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जायेगी. Also Read: ‘इतनी गैरजिम्मेदाराना हरकत क्यों…’, हाई कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी पर की कड़ी टिप्पणी The post बंगाल: फालता में कड़ी सुरक्षा के बीच पड़े 88 फीसदी वोट, मैदान से गायब रहे ‘पुष्पा’ appeared first on Naya Vichar.

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CSK ने जीता टॉस, गुजरात टाइटंस की पहले बल्लेबाजी, देखें प्लेइंग XI

CSK vs GT, IPL 2026: चेन्नई सुपरकिंग्स के कप्तान रुतुराज गायकवाड़ ने गुजरात टाइटंस के खिलाफ टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया. सुपरकिंग्स ने दो बदलाव करते हुए गुरजपनीत सिंह और मैथ्यू शॉर्ट को एकादश में शामिल किया है. टाइटंस ने भी एक बदलाव करते हुए साई किशोर की जगह प्रसिद्ध कृष्णा को मौका दिया है. चेन्नई सुपर किंग्स (प्लेइंग इलेवन) संजू सैमसन (विकेटकीपर), रुतुराज गायकवाड़ (कप्तान), उर्विल पटेल, डेवाल्ड ब्रेविस, शिवम दुबे, मैथ्यू शॉर्ट, अंशुल कंबोज, नूर अहमद, स्पेंसर जॉनसन, मुकेश चौधरी और गुरजापनीत सिंह. गुजरात टाइटंस (प्लेइंग इलेवन) साई सुदर्शन, शुबमन गिल (कप्तान), जोस बटलर (विकेटकीपर), निशांत सिंधु, वाशिंगटन सुंदर, जेसन होल्डर, राशिद खान, राहुल तेवतिया, कगिसो रबाडा, अरशद खान, मोहम्मद सिराज. 🚨 Toss 🚨@ChennaiIPL won the toss and elected to field first against @gujarat_titans Updates ▶️ https://t.co/p5TP9NLREX #TATAIPL | #KhelBindaas | #GTvCSK pic.twitter.com/vfypgrTs9Q — IndianPremierLeague (@IPL) May 21, 2026 इम्पैक्ट प्लेयर चेन्नई सुपर किंग्स इम्पैक्ट प्लेयर: कार्तिक शर्मा, मैकनील नोरोन्हा, सरफराज खान, कुलदीप यादव, अमन खान.गुजरात टाइटंस इम्पैक्ट प्लेयर: प्रसिद्ध कृष्णा, अनुज रावत, ग्लेन फिलिप्स, कुलवंत खेजरोलिया, कुमार कुशाग्र. The post CSK ने जीता टॉस, गुजरात टाइटंस की पहले बल्लेबाजी, देखें प्लेइंग XI appeared first on Naya Vichar.

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चंद्रनाथ रथ हत्याकांड: ‘CBI नहीं आती तो मेरा एनकाउंटर हो जाता’, गलत गिरफ्तारी पर छलका राज सिंह का दर्द

Chandranath Rath Murder Case: चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में जिस राज सिंह को स्थानीय पुलिस ने गलत तरीके से गिरफ्तार किया था, उसे CBI ने रिहा करवा लिया है. CBI ने खुद कोर्ट में एक अर्जी दाखिल कर कहा कि राज सिंह का इस मामले से कोई लेना-देना नहीं है. CBI समय पर नहीं आती, तो एनकाउंटर हो जाता : राज सिंह रिहाई के बाद राज सिंह ने कहा- अगर CBI समय पर नहीं आती, तो उनका एनकाउंटर हो जाता. राज सिंह का कहना है कि उन्हें लगातार धमकियां दी गईं और उन पर दबाव डाला गया. मीडिया और CBI का शुक्रिया अदा करते हुए राज सिंह ने कहा- उनके परिवार ने CBI को CCTV फुटेज और सबूत मुहैया कराए, जिससे उनकी बेगुनाही साबित करने में मदद मिली. एक कपड़ों की दुकान से खरीदा गया कुर्ता उनके लिए एक अहम सबूत बन गया. CBI has secured the release of Raj Singh, who had been wrongfully arrested by local police in the Chandranath Rath murder case. The CBI itself filed an application in court, stating that Raj Singh had no involvement in the case. Upon conducting its own investigation, the CBI… — ANI (@ANI) May 21, 2026 CBI ने असली अपराधी राजकुमार उर्फ ​​राज सिंह को किया गिरफ्तार CBI ने असली अपराधी राजकुमार उर्फ ​​राज सिंह को मुजफ्फरनगर से गिरफ्तार कर लिया है; वह इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड और मुख्य आरोपी है. CBI और उत्तर प्रदेश पुलिस को एक गुप्त सूचना मिली, जिसके बाद आरोपी को गिरफ्तार किया गया. आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है और इस कार्रवाई के दौरान हथियार भी बरामद किए गए हैं. ये भी पढ़ें: आरजी कर मामला: 48 घंटे के भीतर फिर से शुरू हो जांच, कलकत्ता हाई कोर्ट का आदेश The post चंद्रनाथ रथ हत्याकांड: ‘CBI नहीं आती तो मेरा एनकाउंटर हो जाता’, गलत गिरफ्तारी पर छलका राज सिंह का दर्द appeared first on Naya Vichar.

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Cockroach Janta Party का X अकाउंट भारत में ‘withheld’ हुआ, आखिर इसका मतलब क्या है और ये बैन से कितना अलग है?

X पर एक दिलचस्प मामला सामने आया है. हाल ही में एक मजाकिया अंदाज में चलने वाला और युवाओं द्वारा शुरू किया गया नेतृत्वक आंदोलन ‘Cockroach Janata Party (CJP)’ का X अकाउंट हिंदुस्तान में अचानक ‘withheld’ कर दिया गया. बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई एक लीगल डिमांड के बाद की गई है. जैसे ही लोगों ने इस अकाउंट को खोलने की कोशिश की, उन्हें एक मैसेज दिखा जिसमें लिखा था कि यह हैंडल किसी कानूनी अनुरोध की वजह से हिंदुस्तान में प्रतिबंधित कर दिया गया है.  CJP के फाउंडर अभिषेक दीपके ने आरोप लगाया कि इसके पीछे हिंदुस्तानीय प्रशासन का हाथ है और उन्होंने कहा कि यह कदम प्रशासन की आलोचना करने वाली आवाजों को दबाने की कोशिश है. लेकिन इन सारी नेतृत्वक चर्चाओं के बीच, बहुत से यूजर्स का एक बहुत सीधा सा सवाल भी था कि आखिर X पर ‘withheld’ का मतलब होता क्या है? तो आखिर ‘Withheld’ अकाउंट होता क्या है? आमतौर पर लोग समझते हैं कि जब किसी अकाउंट पर पाबंदी लगती है तो वह या तो पूरी तरह बैन हो जाता है या सस्पेंड कर दिया जाता है. लेकिन असल में ‘withheld account’ ऐसा नहीं होता. जब X (पहले Twitter) किसी अकाउंट को withheld करता है, तो उसका मतलब होता है कि वह अकाउंट सिर्फ किसी एक खास देश में ब्लॉक किया गया है. बाकी दुनिया में वह अकाउंट बिल्कुल नॉर्मल तरीके से चलता रहता है. यानी हिंदुस्तान के बाहर के लोग उस प्रोफाइल को देख सकते हैं, उसके पोस्ट पढ़ सकते हैं और उसे फॉलो भी कर सकते हैं. लेकिन हिंदुस्तान के अंदर यूजर्स को उस अकाउंट की जगह सिर्फ ‘Withheld Account’ का मैसेज दिखाई देता है. कंपनी के मुताबिक, इस तरह की पाबंदियां अक्सर लोकल कानूनों, कोर्ट के आदेशों या प्रशासनी निर्देशों का पालन करने के लिए लगाई जाती हैं. इसमें कई बार पॉलिटिकल कंटेंट, हेट स्पीच से जुड़े नियम, नेशनल सिक्योरिटी या किसी देश के खास कानून शामिल हो सकते हैं. क्या कोई ‘Withheld Account’ दोबारा वापस मिल सकता है? हां, तकनीकी रूप से ऐसा संभव है. अगर किसी यूजर को लगता है कि उसका अकाउंट गलत तरीके से withheld किया गया है, तो वह X (Twitter) Support के जरिए अपील कर सकता है. इसके अलावा, जरूरत पड़ने पर वह कानूनी तरीके से भी संबंधित अथॉरिटी के सामने इस फैसले को चुनौती दे सकता है. हिंदुस्तान में ऐसे मामलों में कई बार आदेश सीधे MeitY (Ministry of Electronics and Information Technology) की तरफ से जुड़े होते हैं. X की तरफ से भी इस तरह की कंट्री-लेवल पॉलिसी और रेस्ट्रिक्शन को लेकर साफ गाइडलाइंस दी गई हैं, जिनमें अपील करने का प्रोसेस बताया जाता है.हालांकि, जिन देशों में यह प्रतिबंध लागू होता है, वहां के बाहर के लोग उस अकाउंट को नॉर्मल तरीके से यूज कर सकते हैं. कुछ यूजर्स अपने क्षेत्र में ब्लॉक होने की सिचुएशन में VPN का सहारा भी लेते हैं. लेकिन ध्यान रहे कि यह सिर्फ एक्सेस का एक तरीका है, असली प्रतिबंध को हटाता नहीं है. यह भी पढ़ें: Instagram पर छाई Cockroach Janta Party, 5 दिन में 12.7M फॉलोअर्स जोड़ BJP को छोड़ा पीछे The post Cockroach Janta Party का X अकाउंट हिंदुस्तान में ‘withheld’ हुआ, आखिर इसका मतलब क्या है और ये बैन से कितना अलग है? appeared first on Naya Vichar.

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छोड़ी डॉक्टरी, UPSC को बनाया टारगेट, AIR 87 लाकर चमकी सयाली

Sayali Bhika Pagar AIR 87: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में से एक माना जाता है. हर साल लाखों छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं, लेकिन सफलता उन्हीं को मिलती है जो कड़ी मेहनत के साथ-साथ एक सही दिशा में आगे बढ़ते हैं. ऐसी ही एक प्रेरणादायक कहानी है महाराष्ट्र के नासिक जिले की रहने वाली सयाली भीका पगार की. सयाली ने यूपीएससी सिविल सर्विस एग्जाम में पूरे देश में 87वीं रैंक हासिल की है. आइए सयाली की UPSC की जर्नी को करीब से जानते हैं.  Sayali Bhika Pagar AIR 87: कौन है सयाली पगार?  सयाली पगार महाराष्ट्र के नासिक जिले के कलवन की रहने वाली है. उनके पिता का नाम भिका पगार है. सयाली के पिता इंडियन रिजर्व बैंक (RBI) में डिप्टी जनरल मैनेजर हैं. सयाली बचपन से ही पढ़ने में काफी होनहार स्टूडेंट रही है. उनकी यह सफलता उन सभी युवाओं के लिए एक मिसाल है जो समाज में बदलाव लाने का सपना देखते हैं. मेडिकल की पढ़ाई से सिविल सर्विसेज तक का सफर सयाली का शैक्षणिक और भौगोलिक बैकग्राउंड काफी अलग और दिलचस्प रहा है. उन्होंने अपनी स्कूलिंग सालबोनी के केंद्रीय विद्यालय से पूरी की. इसके बाद की पढ़ाई उन्होंने मैसूर से की. आगे चलकर उन्होंने बेंगलुरु के सप्तगिरी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च सेंटर से अपनी एमबीबीएस (MBBS) की पढ़ाई पूरी की. डॉक्टर बनने के बाद भी उनके मन में कुछ और करने की इच्छा थी, जिसने उन्हें सिविल सेवा की तरफ मोड़ा. क्यों छोड़ा डॉक्टरी का पेशा? सयाली ने बताया कि उनका झुकाव हमेशा से पब्लिक सर्विस की तरफ था. वे (Sayali Bhika Pagar AIR 87) हमेशा से लोगों के बीच रहकर उनके लिए काम करना चाहती थी. यही एक बड़ी वजह थी कि उन्होंने पहले मेडिकल की पढ़ाई चुनी. लेकिन बाद में उन्हें एहसास हुआ कि सिविल सर्विस में जाना चाहती है.  हेल्थ, एजुकेशन और स्त्री सशक्तिकरण पर फोकस अपनी इस सफलता के बाद सयाली प्रशासन और गवर्नेंस में अपना बेहतरीन योगदान देना चाहती हैं. सयाली ने बताया कि वह भविष्य में स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार करने के लिए काम करना चाहती हैं. इसके साथ ही उनका विशेष ध्यान स्त्री सशक्तिकरण (Women Empowerment) पर रहेगा, ताकि समाज में स्त्रीओं की स्थिति को और मजबूत किया जा सके. Sayali Bhika Pagar AIR 87: अनुशासन और प्लानिंग ने दिलाई सफलता सयाली का मानना है कि यूपीएससी में सफलता पाने के लिए डिसिप्लिन और सही प्लानिंग सबसे ज्यादा जरूरी है. सयाली महीनों और हफ्तों के हिसाब से अपने टारगेट तय करती थी और अपनी पढ़ाई के दौरान उनका बहुत सख्ती से पालन करती थी. उनके अनुसार, नियमित रूप से पढ़ाई करना और अपने प्लान पर टिके रहना ही जीत की चाबी है. यह भी पढ़ें: तमिलनाडु के राजा मोहिदीन का कमाल, तीसरे प्रयास में हासिल की UPSC AIR 7 The post छोड़ी डॉक्टरी, UPSC को बनाया टारगेट, AIR 87 लाकर चमकी सयाली appeared first on Naya Vichar.

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छोटे से जामुन के बीज में छिपे हैं बड़े हेल्थ बेनिफिट्स, जान गए तो नहीं करेंगे इन्हें फेंकने की गलती

Jamun Seeds Benefits: गर्मियों का मौसम आ चुका है और ऐसे में अब आपको बाजारों में आसानी से जामुन देखने को मिल जाएंगे. यह फल सिर्फ खाने में स्वादिष्ट नहीं होता है, इसे हमारे सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद माना जाता है. अक्सर जब हम जामुन खाते हैं तो हमारी यह आदत होती है कि हम इसके बीज को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन आयुर्वेद और हेल्थ एक्सपर्ट्स की अगर मानें तो इसके बीज में भी न्यूट्रिएंट्स का भरमार होता है. आपको शायद यह जानकर हैरानी हो लेकिन छोटे से दिखने वाले जामुन के बीज में आपको एंटीऑक्सिडेंट्स, फाइबर, आयरन, कैल्शियम और इस तरह के कई जरूरी कम्पाउंड्स मिल जाते हैं जिन्हें आपके शरीर के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. हालांकि, आपको इन बीजों का इस्तेमाल कभी भी किसी बीमारी को ठीक करने के लिए नहीं करना चाहिए, लेकिन अगर आप फिर भी इनका इस्तेमाल सही मात्रा में करते हैं तो आपकी सेहत के लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मददगार जामुन के इन छोटे-छोटे बीजों को हमेशा से डायबिटीज कंट्रोल करने से जोड़कर देखा जाता रहा है. इसमें आपको जैंबोलिन और जैंबोसिन जैसे एलिमेंट्स मिल जाते हैं, जो आपके शरीर में शुगर के एब्जॉर्प्शन को धीमा करने में मदद कर सकते हैं. यह एक बड़ी वजह है कि कुछ लोग जामुन के बीजों का पाउडर तैयार करके इसका इस्तेमाल करना पसंद करते हैं. जब आप रेगुलर बेसिस पर और सीमित मात्रा में इसका सेवन करते हैं, तो आपको अपने ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखने में मदद मिलती है. अगर आप पहले से डाइबिटीज की दवाई ले रहे हैं, तो जामुन के बीजों का इस्तेमाल करने से पहले एक बार आपको अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लेनी चाहिए. ये भी पढ़ें: नौतपा के दौरान इन लोगों को होता है हीट स्ट्रोक और लू लगने का ज्यादा खतरा, भूलकर भी न करें ये लापरवाही डाइजेशन को मजबूत बनाने में मददगार अगर आपको कब्ज, गैस या फिर अपच जैसी समस्याएं रहती है तो ऐसे में भी जामुन के बीज आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. इनमें आपको भरपूर मात्रा में फाइबर मिल जाता है, जो आपकी मदद डाइजेशन को बेहतर बनाने में करता है. यह आपके आंतों को हेल्दी रखने में तो मदद करता ही है, बल्कि साथ ही आपकी मदद पेट को साफ रखने में भी कर सकता है. कई लोगों को जिन्हें ब्लोटिंग जैसी प्रॉब्लम रहती है अक्सर वे लोग इसका सेवन करना फायदेमंद मानते हैं. जब आप रेगुलर बेसिस पर और सही मात्रा में इसका सेवन करते हैं तो यह आपके डाइजेशन के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. शरीर को मिलते हैं पावरफुल एंटीऑक्सीडेंट्स जामुन के बीजों में आपको भरपूर मात्रा में पावरफुल एंटीऑक्सिडेंट्स मिल जाते हैं. ये आपकी मदद शरीर में मौजूद फ्री रैडिकल्स से लड़ने में करते हैं. बता दें ये फ्री रैडिकल्स आपके सेल्स को नुकसान पहुंचा सकते हैं. कई हेल्थ एक्सपर्ट्स का यह भी मानना रहा है कि एंटीऑक्सिडेंट्स आपकी मदद शरीर में सूजन को कम करने में और साथ ही आपकी इम्युनिटी को बेहतर बनाने में कर सकते हैं. यह एक बड़ी वजह है कि जामुन के बीजों को आपकी ओवरऑल हेल्थ के लिए काफी ज्यादा फायदेमंद माना जाता है. ये भी पढ़ें: ऑफिस की कुर्सी से चिपके रहने के कारण अकड़ गई है कमर? हर दिन करें ये 5 आसान एक्सरसाइज और पाएं तुरंत आराम वजन कंट्रोल करने में मिल सकती है मदद अगर आप अपने बढ़े हुए वजन को कम करने की कोशिश कर रहे हैं, तो ऐसे में भी जामुन के ये बीज आपके लिए फायदेमंद साबित हो सकते हैं. इनमें भरपूर मात्रा में फाइबर पाया जाता है, जो आपके पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस करने में मदद कर सकते हैं. जब आपको बार-बार भूख नहीं लगती है, तो आप ओवरईटिंग करने से बचे हुए रहते हैं. इसके अलावा जामुन के ये बीज आपके मेटाबोलिज्म को भी बूस्ट करने में मदद कर सकते हैं. अगर आप बढ़े हुए वजन को कम करना चाहते हैं तो सिर्फ जामुन के बीज नहीं, बल्कि एक बैलेंस्ड डाइट लेना और रेगुलर एक्सरसाइज करना भी आपके लिए जरूरी हो जाता है. हार्ट और लिवर हेल्थ के लिए भी फायदेमंद जामुन के बीजों में आपको फ्लेवोनॉइड्स और एलैजिक एसिड जैसे एलिमेंट्स मिल जाते हैं. ये आपकी मदद शरीर में इन्फ्लेमेशन को कम करने में कर सकते हैं. जब आप इनका सेवन करना शुरू करते हैं तो आपके हार्ट हेल्थ को सपोर्ट मिल सकता है. इसके अलावा जामुन के इन बीजों को आपके लिवर के लिए भी फायदेमंद बताया जाता है. हालांकि, इनके कोई ठोस सबूत नहीं है, इसलिए इन बीजों को एक मेडिकल ट्रीटमेंट की तरह इस्तेमाल करने की सलाह नहीं दी जाती है. ये भी पढ़ें: डाइट से एक्स्ट्रा शुगर कम करने के लिए डेली लाइफ में शामिल करें ये आदतें, बीमारियों से बचना है तो जरूर जान लें कैसे करें जामुन के बीजों का इस्तेमाल? जामुन के बीजों का इस्तेमाल करने से पहले आपको इन्हें अच्छी तरह से धोकर सुखा लेना होगा. जब ये अच्छी तरह से सूख जाए तो आपको इन्हें पीसकर एक पाउडर तैयार कर लेना है. आमतौर अगर देखा जाए तो जामुन के बीज को आधा चम्मच या फिर एक चम्मच गुनगुने पानी के साथ लेने को कहा जाता है. लेकिन इसकी जो सही मात्रा होती है वह आपके उम्र और आपकी हेल्थ कंडीशन पर ज्यादा निर्भर करती है. अगर आप इसका सेवन करने की सोच रहे हैं तो पेजले अपने डॉक्टर या फिर डाइटीशियन की सलाह जरूर लें. इन बातों का रखें खास ख्याल अगर आप जामुन के बीजों का जरूरत से ज्यादा सेवन करने लगते हैं, तो इसकी वजह से आपको फायदा नहीं बल्कि नुकसान भी हो सकता है. इसकी वजह से आपका ब्लड शुगर लेवल काफी ज्यादा कम हो सकता है और साथ ही आपको डाइजेशन से जुड़ी प्रॉब्लम्स भी हो सकती हैं. गर्भवती स्त्रीओं, छोटे बच्चों और किसी सीरियस बीमारी से जूझ रहे लोगों को इसका सेवन बिना डॉक्टर की सलाह लिए भूलकर भी नहीं करना चाहिए. ये भी पढ़ें: क्या आप भी रातभर जागकर पुरानी बातें सोचते रहते हैं? जानें ओवरथिंकिंग

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सिर्फ 10 साल की उम्र में नक्सली बन गया था करण उर्फ डांगुर, पूरी कहानी जानें पिता की जुबानी

पश्चिमी सिंहभूम गोइलकेरा संजय पांडेय की रिपोर्ट Naxalite Surrender: सारंडा का कुख्यात नक्सली करण उर्फ डांगुर ने गुरुवार 21 मई 2026 को रांची में पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया. उसके सरेंडर के बाद पहली बार उसके पिता फाड़ तियूर ने बेटे के नक्सली बनने और फिर मुख्यधारा में लौटने की कहानी नया विचार से साझा की. पिता के अनुसार, करण महज 10 साल की उम्र में नक्सलियों के संपर्क में आ गया था. जिस उम्र में उसके हाथों में किताबें होनी चाहिए थीं, उस उम्र में उसे बंदूक थमा दी गई. चौथी-पांचवीं कक्षा में आया नक्सलियों के संपर्क में करण उर्फ डांगुर पश्चिमी सिंहभूम जिले के सांगा जटा गांव का रहने वाला है. उसके पिता फाड़ तियूर ने बताया कि जब करण चौथी-पांचवीं कक्षा में पढ़ता था, तभी गांव के ही नक्सली सागेन अंगारिया उर्फ श्याम लाल ने उसे बहला-फुसलाकर संगठन से जोड़ दिया. शुरुआत में करण को माओवादी संगठन के मिलिशिया दस्ते में शामिल किया गया. उससे पुलिस की गतिविधियों की जानकारी जुटाने, राशन-पानी की व्यवस्था करने और गांवों में संदेश पहुंचाने का काम कराया जाता था. धीरे-धीरे संगठन में उसकी भूमिका बढ़ती चली गई. किताब की जगह हाथ में थमा दी गई बंदूक पिता फाड़ तियूर बताते हैं कि जिस उम्र में बच्चों को स्कूल में पढ़ाई करनी चाहिए, उस समय करण को जंगलों में ट्रेनिंग दी जाने लगी. संगठन ने उसे हथियार चलाने और पुलिस से बचने की तकनीक सिखाई. कुछ समय बाद उसे मिलिशिया सदस्य से एरिया कमिटी मेंबर बना दिया गया. संगठन की ओर से उसे एसएलआर बंदूक भी दी गई. इसके बाद वह सक्रिय रूप से नक्सली गतिविधियों में शामिल हो गया. लेवी वसूली के दौरान हुआ था गिरफ्तार फाड़ तियूर ने बताया कि वर्ष 2017 में करण अपने साथियों के साथ गोइलकेरा के डेरवा इलाके में एक ठेकेदार से लेवी वसूलने पहुंचा था. इसी दौरान पुलिस ने चारों ओर से घेराबंदी कर उसे गिरफ्तार कर लिया था. पुलिस ने उसके पास से एक देसी पिस्टल, जिंदा गोली और नक्सली पर्चा बरामद किया था. गिरफ्तारी के बाद करण कुछ वर्षों तक जेल में रहा. जेल से बाहर आने के बाद वह घर लौटा, लेकिन कुछ समय बाद फिर से संगठन में शामिल हो गया. छह महीने में एक बार आता था घर पिता के अनुसार संगठन में दोबारा शामिल होने के बाद करण कभी-कभी छह महीने में एक बार घर आता था. हाल के दिनों में कोल्हान क्षेत्र में चल रहे नक्सल विरोधी अभियान और माओवादी इजराइल पूर्ति के मारे जाने के बाद परिवार की चिंता बढ़ गई थी. फाड़ तियूर ने बताया कि एक मुठभेड़ के बाद करण घर आया था. उसने खाना खाया और फिर जंगल की ओर चला गया. इस दौरान सुरक्षा बलों ने उसके घर की तलाशी भी ली थी. पुलिस ने उस पर दो लाख रुपये का इनाम घोषित कर रखा था. इसे भी पढ़ें: कोल्हान के युवक-युवतियों ने क्यों थामा बंदूक? पढ़ें सरेंडर करने वाले नक्सलियों की कहानी पिता चाहते थे बेटा लौट आए मुख्यधारा में करण के पिता ने कहा कि अब वे बेटे को जंगल और हिंसा की जिंदगी से बाहर निकालना चाहते थे. उन्होंने करण को आत्मसमर्पण कर सामान्य जीवन जीने की सलाह दी. लगातार सुरक्षा दबाव, परिवार की चिंता और बदलते माहौल के बीच आखिरकार करण उर्फ डांगुर ने आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का फैसला लिया. स्थानीय लोगों का मानना है कि करण की वापसी क्षेत्र के अन्य भटके युवाओं के लिए भी एक बड़ा संदेश है कि हिंसा का रास्ता छोड़कर सामान्य जीवन अपनाया जा सकता है. इसे भी पढ़ें: अब कुख्यात नक्सली गुणा हांसदा भी करना चाहता है सरेंडर, मुख्यधारा में लौटने जताई इच्छा The post सिर्फ 10 साल की उम्र में नक्सली बन गया था करण उर्फ डांगुर, पूरी कहानी जानें पिता की जुबानी appeared first on Naya Vichar.

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