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Author name: Vinod Jha

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क्या अभिजीत दीपके चाहते थे 10 अक्टूबर का आंदोलन असफल हो? ये 3 कारण दे रहे संकेत

अभिजीत दीपके, आशुतोष रंका और सौरव दास जो नीट पेपर लीक आंदोलन के दौरान जेन जी के हीरो बन गए थे, उन्हें डिटेन कर लिया गया है. प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए मेट्रो, ट्रेन और सड़क यातायात पर भी रोक लगाई गई ताकि प्रदर्शनकारी जंतर-मंतर तक ना पहुंच सकें. यहां सवाल यह उठता है कि अगर अभिजीत दीपके और उनकी पार्टी को आंदोलन सफल बनाना था और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करना था, तो उन्होंने दिल्ली पुलिस को यह मौका ही क्यों दिया कि वह उनके खिलाफ घेराबंदी कर दे? यह स्थिति दीपके की मंशा पर सवाल खड़े करती है. आइए समझते हैं, वो कौन से संकेत हैं, जो यह बता रहे हैं कि दीपके नहीं चाहते थे कि यह आंदोलन सफल हो. प्रदर्शन की इजाजत मांगने में देरी करना सीजेपी ने 10 अक्टूबर के प्रदर्शन के लिए आवेदन 7 अक्टूबर को किया, जबकि वे इस बात से अच्छी तरह वाकिफ थे कि प्रशासन यह नहीं चाहती है कि प्रदर्शन हो. ऐसे में उन्हें नियमों का खास ख्याल रखते हुए समय पर इजाजत के लिए आवेदन करना चाहिए था, पर उन्होंने ऐसा नहीं किया. परिणाम यह हुआ कि दिल्ली पुलिस ने आवेदन देर से करने की बात कहकर प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी. दिल्ली जाने की सूचना को किया वायरल आमतौर पर प्रशासन विरोधी प्रदर्शनों के दौरान नेताओं को इस बात की शंका रहती है कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है. इस वजह से वे अपने मूवमेंट को गुप्त रखते हैं. वे यह स्पष्ट नहीं करते हैं कि वे कैसे और कब प्रदर्शन स्थल तक पहुंच सकते हैं. अभिजीत दीपके और सीजेपी के नेताओं ने खुलकर बताया कि वे कैसे और कब दिल्ली पहुंच रहे हैं. उन्होंने कहा कि हम गिरफ्तार होने आ रहे हैं. नहीं बनाया प्लान बी किसी भी बड़े आंदोलन में जब नेताओं को पहले से गिरफ्तारी की आशंका होती है तो वे प्रदर्शनकारियों को एकजुट रखने और आंदोलन जारी रखने के लिए वैकल्पिक रणनीति तैयार रखते हैं. जिसे कहा जाता है कि अगर कोई योजना सफल ना हो तो प्लान बी रेडी रखना चाहिए. सीजेपी के नेता अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका ने गिरफ्तारी की आशंका पहले ही जताई थी. इसके बावजूद उन्होंने आंदोलन को सफल बनाने के लिए कोई प्लान बी रेडी नहीं रखा. 10 अक्टूबर को दिल्ली एयरपोर्ट पर उन्हें हिरासत में ले लिया गया, उसके बाद अभिजीत दीपके ने वीडियो जारी कर यह कहा कि आंदोलन की कमान अब अजिंक्य शिंदे संभालेंगे. अजिंक्य शिंदे एक नया नाम हैं, जिन्हें प्रदर्शनकारी जानते भी नहीं है, ऐसे में विश्वास की कमी होती है और आंदोलन कमजोर होता है. ये भी पढ़ें : CJP प्रोटेस्ट पर दिल्ली पुलिस का शिकंजा, प्रदर्शन रोकने के लिए उठाए ये 5 कदम; जानें कैसे की प्लानिंग? The post क्या अभिजीत दीपके चाहते थे 10 अक्टूबर का आंदोलन असफल हो? ये 3 कारण दे रहे संकेत appeared first on Naya Vichar.

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तस्वीरों में आंदोलन: इंदिरा के खिलाफ ‘सिंहासन खाली करो…’ से ‘रंग दे बंसती…’ तक, मम्मी-पापा से कितना अलग है Gen Z का आंदोलन

10 अक्टूबर को दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से पहले 250 से ज्यादा ट्रेनें रद्द कर दी गईं. CJP के प्रवक्ता आशुतोष रांका ने कहा कि इंदिरा गांधी के शासनकाल में इमरजेंसी के दौरान भी ट्रेनों को रद्द नहीं किया गया था. रांका के इस बयान ने लोगों के मन में इंदिरा इमरजेंसी और अब के नेतृत्वक आंदोलनों की यादें ताजा हो गयीं हैं. ऐसे में रामधारी सिंह दिनकर की कविता ‘जनतंत्र का जन्म’ की पंक्तियां-‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ याद आती हैं. ये वही पंक्तियां हैं, जिसने रामलीला मैदान में प्रदर्शनकारियों में इंदिरा गांधी की प्रशासन के खिलाफ जोश भर दिया था. वर्ष 2026 के आंदोलनों में भी प्रदर्शनकारियों ने गीतों के जरिए अपनी बात रखी. इस बार उनके होंठों पर था—‘मेरा रंग दे बसंती चोला, मेरा रंग दे बसंती चोला.’ Gen Z ने 1970 के दशक के आंदोलनों को अपनी आंखों से नहीं देखा. इमरजेंसी के दौर की कहानियां उन्हें अपने मम्मी-पापा और किताबों के जरिए ही पता चलीं. लेकिन, उन कहानियों को याद करते ही आज भी आम-आवाम के जेहन में जयप्रकाश नारायण, रामलीला मैदान में उमड़ी भीड़ और हाथों में तख्तियां लिये प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें उभर आती हैं. उम्मीद है कि नेतृत्वक आंदोलनों के किस्से सुनकर आपके जेहन में भी कुछ कहानियां और किताबों में छपी तस्वीरें ताजा हो जाती होंगी. तो आइए, आज दिल्ली में CJP के प्रदर्शन के बहाने तस्वीरों के जरिए बीते 50 साल के दौरान बड़े नेतृत्वक आंदोलनों की कहानी जानते हैं… 1975 में प्रदर्शन करने आये लोगों को आसानी से पुलिस रोक रही है. 2026 में आंदोलन कर रहे प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस को जरूरत से ज्यादा मशक्कत करनी पड़ रही है. यह समय के साथ आंदोलन के बदलते स्वरूप को दिखाता है. 1975 में आंदोलन के दौरान रामलीला मैदान में लाखों की भीड़ संयम से लाइन में बैठी नजर आ रही है. जबकि 2026 Gen Z प्रोटेस्ट के दौरान प्रदर्शनकारी टीशर्ट खोलकर हवा में लहराते नजर आए. 1975 में इमरजेंसी के खिलाफ सड़क पर उतरते ही कुछ इस तरह एमके स्टालीन को हिरासत में लिया गया था. जबकि 10 अक्टूबर 2026 को प्रोटेस्ट करने दिल्ली आ रहे दीपके और उनके साथियों को दिल्ली पुलिस ने फ्लाइट से ही हिरासत में ले लिया. The post तस्वीरों में आंदोलन: इंदिरा के खिलाफ ‘सिंहासन खाली करो…’ से ‘रंग दे बंसती…’ तक, मम्मी-पापा से कितना अलग है Gen Z का आंदोलन appeared first on Naya Vichar.

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डिटेंशन के बाद का प्लान पहले से था तैयार? CJP ने जारी किया दीपके का वीडियो, बताया अब कौन करेगा प्रदर्शन का नेतृत्व

CJP के मुताबिक अभिजीत दीपके ने संभावित गिरफ्तारी की आशंका को देखते हुए शुक्रवार रात ही यह वीडियो रिकॉर्ड कर लिया था. इसमें बताया गया है कि जब तक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका हिरासत में रहेंगे, तब तक संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कमान संभालेंगे. गिरफ्तारी की आशंका के बीच पहले ही रिकॉर्ड कर लिया था वीडियो CJP से जुड़े सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा जानकारी के मुताबिक, अभिजीत दीपके ने पहले ही अंदाजा लगा लिया था कि उन्हें हिरासत में लिया जा सकता है. इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने शुक्रवार रात वीडियो रिकॉर्ड किया, ताकि उनकी गैरमौजूदगी में भी प्रदर्शन के नेतृत्व को लेकर स्थिति स्पष्ट रहे. सोशल प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो- ये भी पढ़ें: दिल्ली प्रोटेस्ट से दूर कहां हैं सोनम वांगचुक? वीडियो शेयर कर क्यों बोले- और भी गम हैं जमाने में, सियासत के सिवा दिल्ली में CJP के प्रदर्शन को लेकर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी है. संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहा है. प्रमुख नेताओं की हिरासत के बीच अब सबकी नजर इस बात पर है कि अजिंक्य शिंदे के नेतृत्व में प्रदर्शन किस तरह आगे बढ़ता है. The post डिटेंशन के बाद का प्लान पहले से था तैयार? CJP ने जारी किया दीपके का वीडियो, बताया अब कौन करेगा प्रदर्शन का नेतृत्व appeared first on Naya Vichar.

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CJP प्रोटेस्ट पर दिल्ली पुलिस का शिकंजा, प्रदर्शन रोकने के लिए उठाए ये 5 कदम; जानें कैसे की प्लानिंग?

नीट पेपर लीक के खिलाफ किए गए प्रदर्शन से दिल्ली पुलिस ने जिस तरह निपटा था, उससे उनकी छवि बिगड़ी थी. इतना ही नहीं प्रशासन को भी बैकफुट पर आना पड़ा था, लेकिन इस बार दिल्ली पुलिस ने पहले से ही तैयारी कर ली थी, ताकि नौबत लाठीचार्ज जैसी सख्ती तक ना पहुंचे और पुलिस की छवि के साथ-साथ कानून-व्यवस्था भी ना बिगड़े. 1. प्रोटेस्ट की नहीं दी इजाजत दिल्ली पुलिस ने इस बार जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट की इजाजत नहीं दी. दिल्ली पुलिस ने प्रोटेस्ट की इजाजत देने में कोई नरमी नहीं दिखाई और पूरी सख्ती से यह बात कही कि प्रोटेस्ट के लिए 10 दिन पहले इजाजत लेनी होती है. कॉकरोच जनता पार्टी की ओर से प्रोटेस्ट के लिए आवेदन 7 अक्टूबर को आया था. दिल्ली पुलिस की ज्वाइंट कमिश्नर नुपूर प्रसाद ने 9 अक्टूबर को कहा कि पिछले प्रदर्शन में उन्होंने जिस तरह का व्यवहार किया था, उसे देखते हुए भी उन्हें प्रदर्शन की इजाजत नहीं दी गई. उन्होंने बताया कि पिछली बार प्रदर्शन की अनुमति दिए जाने के बावजूद प्रदर्शनकारियों ने अपने अंडरटेकिंग का पालन नहीं किया और पुलिस की ओर से बताए गए कानूनी दिशानिर्देशों का भी उल्लंघन किया था. 2. सीजेपी के तमाम नेताओं को किया डिटेन दिल्ली पुलिस ने इस बार यह तय कर लिया था कि वह प्रोटेस्ट नहीं होने देगी. इसी वजह से उनकी तैयारी भी पूरी थी. दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के तीनों बड़े चेहरे अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रंका को दिल्ली घुसते ही प्लेन से ही उठा लिया. उन्हें इस बात का मौका ही नहीं दिया कि वे किसी भी तरह प्रदर्शन कर सकें. हालांकि प्लाइट से अभिजीत दीपके ने जो वीडियो शेयर किया, उसमें स्त्री पुलिसकर्मी उन्हें यह कहती हुई नजर आ रही हैं कि यह गिरफ्तारी नहीं है. इन तीनों के अलावा उन तमाम लोगों को भी डिटेन कर लिया गया है, जो प्रदर्शन स्थल जाकर कुछ हंगामा खड़ा कर सकते थे. इनमें यूट्‌यूबर ध्रुव राठी और सीजेपी की लीगल हेड भी शामिल है. इतना ही नहीं सीजेपी प्रोटेस्ट के समर्थकों पर भी प्रशासन ने सख्ती दिखाई है और उनके घरों के बाहर पुलिस बल तैनात कर दिया है. 3. 57 मेट्रो स्टेशन को किया बंद पुलिस ने इसकी पूरी तैयारी की थी कि जंतर-मंतर तक प्रदर्शनकारियों को पहुंचने नहीं दिया जाएगा. इसके लिए पुलिस ने दिल्ली की लाइफ लाइन यानी मेट्रो स्टेशन को बंद कर दिया, ताकि प्रदर्शनकारी मेट्रो स्टेशन तक ना पहुंच सकें. इसकी तैयारी एक दिन पहले से ही कर ली गई थी. 4. दिल्ली पहुंचने के तमाम रास्तों को किया गया बंद दिल्ली पुलिस की बैरिकेडिंग, फोटो-पीटीआई ऐसी संभावना भी थी कि सड़क और रेल मार्ग से प्रदर्शनकारी दिल्ली पहुंच सकते हैं. इस संभावना को खत्म करने के लिए कई ट्रेनें रद्द कर दी गईं. इतना ही नहीं दिल्ली से जिन राज्यों की सीमाएं जुड़ती हैं वहां भी बैरिकेडिंग कर दी गई, ताकि प्रदर्शनकारी वहां से दिल्ली में प्रवेश ना कर पाएं. खासकर उत्तर प्रदेश के इलाके में सख्ती की गई. 5. प्रदर्शनकारियों की धरपकड़, उन्हें जमा होने नहीं दिया दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों को जमा नहीं होने देने की प्लानिंग की थी, इसके तहत वहां निषेधाज्ञा लागू कर दिया था ताकि भीड़ ना जमा हो पाए. इतना ही नहीं पुलिस ने अलग-अलग जगहों पर कार्रवाई करते हुए प्रदर्शनकारियों को रोका, ताकि वे एकजुट होकर प्रदर्शन स्थल तक न पहुंच सकें. इस कार्रवाई के तहत 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया. पुलिस की इस कार्रवाई का असर सीजेपी के उस अभियान पर पड़ा, जिसके तहत समर्थकों से 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पहुंचने की अपील की गई थी. प्रदर्शनकारियों की आवाजाही पर रोक, नेताओं की हिरासत और प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने में आई बाधाओं ने समर्थकों को एकजुट होने से रोकने में भूमिका निभाई. ये भी पढ़ें : CJP Protest Latest Live Updates Hindi : अभिजीत दीपके, रांका-सौरव फ्लाइट के अंदर ही हिरासत में, केजरीवाल ने बताया तानाशाही The post CJP प्रोटेस्ट पर दिल्ली पुलिस का शिकंजा, प्रदर्शन रोकने के लिए उठाए ये 5 कदम; जानें कैसे की प्लानिंग? appeared first on Naya Vichar.

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CJP Protest: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज करने पहुंचे प्रभात खबर के पत्रकार प्रशांत डिटेन

CJP Protest: दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन की कवरेज करने पहुंचे नया विचार के पत्रकार प्रशांत को भी डिटेन किया गया है. पत्रकार प्रदर्शन से जुड़ी समाचारों को कवर करने के लिए मौके पर पहुंचे थे. प्रशांत को बस से कहीं ले जाया जा रहा था. इस दौरान उन्होंने पुलिस से सवाल भी किया कि मीडिया वाले यहां प्रदर्शन को कवर करने आए हैं. उन्हें क्यों डिटेन किया जा रहा है. ये भी पढ़ें: CJP Protest Video: ‘मैं यहां गिरफ्तार होने आया हूं’, देखें अभिजीत दीपके के साथ फ्लाइट के अंदर क्या हुआ View on Instagram दिल्ली पुलिस ने लगभग 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया पीटीआई सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने नई दिल्ली के अलग-अलग इलाकों से करीब 200 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया है. प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर पहुंचने से रोकने के लिए पुलिस ड्रोन से भी नजर रख रही है. सूत्रों ने यह भी बताया कि यूट्यूबर ध्रुव राठी को गुरुग्राम के सेक्टर-56 से हिरासत में लिया गया है. वहीं, कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का दावा है कि दिल्ली में विमान उतरने के बाद उसके नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को हिरासत में ले लिया गया. पार्टी ने अपनी लीगल टीम की प्रमुख रत्ना सिंह और तीन अन्य वकीलों को हिरासत में लिए जाने का भी दावा किया है. The post CJP Protest: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की कवरेज करने पहुंचे नया विचार के पत्रकार प्रशांत डिटेन appeared first on Naya Vichar.

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CP Radhakrishnan Deoghar Visit Live: AIIMS देवघर के होनहारों का सम्मान: उपराष्ट्रपति ने बांटी मेडिकल डिग्रियां, 11 छात्रों को मिला विशेष पुरस्कार

उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन देवघर पहुंचे हैं. वे एम्स के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे और छात्रों को डिग्री प्रदान करेंगे. The post CP Radhakrishnan Deoghar Visit Live: AIIMS देवघर के होनहारों का सम्मान: उपराष्ट्रपति ने बांटी मेडिकल डिग्रियां, 11 छात्रों को मिला विशेष पुरस्कार appeared first on Naya Vichar.

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अभिजीत दीपके-सौरभ दास सहित CJP प्रोटेस्ट के 5 बड़े नेता डिटेन, ध्रुव राठी गुरुग्राम से हिरासत में लिए गए

CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है. जिसके लिए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे. उन्हें दिल्ली एयरपोर्ट पर उतरने के बाद हिरासत में लिया गया. पार्टी के सह-संयोजक सौरभ दास और नेता आशुतोष रांका को भी विमान से उतरने के बाद हिरासत में ले लिया गया है. ध्रुव राठी को भी हिरासत में लिया गया यूट्यूबर ध्रुव राठी को दिल्ली से सटे गुरुग्राम में हिरासत में लिया गया. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुग्राम पुलिस के सादे कपड़ों में आए कर्मियों ने उन्हें शनिवार सुबह हिरासत में लिया. पुलिस के एक अधिकारी ने कहा कि राठी को दिल्ली में प्रदर्शन की अनुमति नहीं होने और बीएनएस 163 लागू होने के बारे में समझाने की कोशिश की गई थी, लेकिन वह प्रदर्शन में शामिल होने की बात कह रहे थे. सीजेपी के लीगल हेड रत्ना सिंह भी हिरासत में CJP की कानूनी टीम की प्रमुख रत्ना सिंह ने भी हिरासत में लिए जाने की बात कही है. टाइम्स ऑफ इंडिया के मुताबिक, उन्होंने बताया कि उन्हें तीन अन्य वकीलों के साथ हिरासत में लिया गया. क्यों हो रहा है प्रदर्शन? CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया था. पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रही है. प्रदर्शन का एक प्रमुख मुद्दा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उठाए गए सवाल हैं. प्रदर्शनकारियों ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों और वोटरों के नाम हटाए जाने पर चिंता जताई है. ये भी पढ़ें: दिल्ली प्रोटेस्ट से दूर कहां हैं सोनम वांगचुक? वीडियो शेयर कर क्यों बोले- और भी गम हैं जमाने में, सियासत के सिवा दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार कर दिया था. इसके बाद राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी की गई और कई इलाकों में बैरिकेडिंग की गई. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शन से पहले दिल्ली में करीब 200 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी. पुलिस की कार्रवाई और प्रदर्शन की अनुमति को लेकर CJP तथा प्रशासन के बीच टकराव बढ़ गया है. The post अभिजीत दीपके-सौरभ दास सहित CJP प्रोटेस्ट के 5 बड़े नेता डिटेन, ध्रुव राठी गुरुग्राम से हिरासत में लिए गए appeared first on Naya Vichar.

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CJP Protest Video: ‘मैं यहां गिरफ्तार होने आया हूं’, देखें अभिजीत दीपके के साथ फ्लाइट के अंदर क्या हुआ

CJP Protest Video: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को उनकी फ्लाइट के अंदर से ही हिरासत में ले लिया गया. तीनों को दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होना था. प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा बढ़ा दी है और कई जगहों पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जा रहा है. अभिजीत दीपके को लेकर दिल्ली पहुंची फ्लाइट के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) एयरपोर्ट पर उतरने के कुछ देर बाद दिल्ली पुलिस के जवान विमान के अंदर पहुंचे. इस दौरान अभिजीत दीपके ने पुलिस से कहा, “मैं यहां गिरफ्तार होने आया हूं, मुझे गिरफ्तार कर लीजिए.” इस पर पुलिसकर्मियों ने जवाब दिया, “नहीं, यह गिरफ्तारी नहीं है. कृपया सहयोग करें.” सीजेपी ने बयान जारी कर अपने नेताओं को हिरासत में लिए जाने की निंदा की है. पार्टी का आरोप है कि उसके नेताओं को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से रोकने के लिए पहले से योजना बनाई गई थी. सीजेपी के नेता मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे, ताकि जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल हो सकें. View on Instagram The post CJP Protest Video: ‘मैं यहां गिरफ्तार होने आया हूं’, देखें अभिजीत दीपके के साथ फ्लाइट के अंदर क्या हुआ appeared first on Naya Vichar.

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CJP Protest: भारत में आंदोलन के बिना पद क्यों नहीं छोड़ते आरोपी मंत्री-अधिकारी, ब्रिटेन में 5 साल में 4 प्रधानमंत्रियों ने छोड़ी कुर्सी

जून 2023 में बालासोर ट्रेन हादसे में 250 से ज्यादा लोगों की मौत हुई, लेकिन रेलवे मंत्री का इस्तीफा नहीं हुआ. अप्रैल 2026 में पहलगाम में आतंकियों ने नाम पूछकर 26 लोगों की हत्या की, लेकिन किसी मंत्री की जावबदेही तय नहीं हुई. सितंबर 2025 को तमिलनाडु के करूर में अभिनेता से नेता बने विजय की रैली में 39 लोग मारे गए. इसके 8 महीने बाद विजय मुख्यमंत्री बन गए. इन घटनाओं ने नेतृत्वक और प्रशासनिक जवाबदेही को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए. कांग्रेस, बीजेपी समेत तमाम नेतृत्वक दलों के नेता और बड़े अधिकारी गंभीर आरोपों के बावजूद अपने पद पर बने रहते हैं. 25 जुलाई 2026 को बीते 12 सालों में पहली बार ऐसा हुआ, जब हिंदुस्तान प्रशासन ने विरोध प्रदर्शनों के चलते ताकतवर मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा लिया. अब 77 दिनों के बाद एक बार फिर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) से इस्तीफा मांगने के लिए दिल्ली में प्रदर्शन कर रही है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि हिंदुस्तान में गंभीर आरोपों के बाद भी नेता और अधिकारी पद क्यों नहीं छोड़ते हैं? एक गर्भवती हिंदुस्तानीय स्त्री की मौत पर पुर्तगाली स्वास्थ्य मंत्री ने दिया था इस्तीफा साल 2018 की बात है. डॉक्टर मार्टा टेमिडो पुर्तगाल की स्वास्थ्य मंत्री बनीं. 2 साल बाद कोरोना काल के दौरान टेमिडो ने देश को इस महामारी से उबारने में खास भूमिका निभाई. इसके बाद वह पूरे देश की आइकॉन लेडी बन गईं. लेकिन, 2022 में एक हिंदुस्तानीय गर्भवती स्त्री की मौत के बाद मंत्री टेमिडो ने अपनी जिम्मेदारी स्वीकारते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, मैटरनिटी वॉर्ड में जगह न मिलने की वजह से एक 34 वर्षीय गर्भवती हिंदुस्तानीय पर्यटक को दूसरे अस्पताल ट्रांसफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई. इस घटना की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए मार्टा टेमिडो ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. इसी तरह जापान में नाओतो कान ने 2011 में फुकुशिमा परमाणु आपदा के बाद प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. उन्होंने इस घटना की जिम्मेदारी किसी और पर देने के बजाय खुद स्वीकार किया था. गंभीर आरोपों में घिरने के बाद भी हिंदुस्तानीय नेता और अधिकारी पद क्यों नहीं छोड़ते हैं? पूर्व राज्यसभा सांसद फौजिया खान अपने एक लेख में बताती हैं कि 1956 में एक रेल दुर्घटना के बाद लाल बहादुर शास्त्री ने रेल मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था. नैतिक जवाबदेही की गहरी भावना से प्रेरित उनके इस फैसले ने नेतृत्व का एक उच्च मानक स्थापित किया, जो आज के समय में बहुत कम देखने को मिलता है. यह घटना तब और अब के बीच के अंतर को जाहीर करता है. इससे पता चलता है कि हिंदुस्तानीय नेतृत्व से जवाबदेही क्यों गायब हो गई है? शास्त्री के तरह ही अधिकारियों की बात करें तो टी. एन. शेषन एक बड़ा उदाहरण हैं. उन्होंने चुनाव व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए कड़े कदम उठाए. इसी तरह, ईमानदार और नियमों को लागू करने वाले अधिकारी भ्रष्टाचार कम कर सकते हैं. लेकिन, अब जो हालात हैं, उसे देखकर लगता है कि हिंदुस्तानीय नेतृत्व में नैतिक उत्तरदायित्व और जवाबदेही लगातार कम होती जा रही है. जहां पहले नेता सीधे तौर पर दोषी न होने पर भी नैतिक कारणों से इस्तीफा दे देते थे, वहीं आज का नेतृत्वज्ञ वर्ग अक्सर ऐसे कदम उठाने से बचता है और दोष दूसरों पर डालने का विकल्प चुनता है. यही वजह है कि अब नेता हो या अधिकारी अपने पद से इस्तीफा देने से बचते हैं. क्या हिंदुस्तानीय नेता और अधिकारी कम जवाबदेह हैं? पूर्व राज्यसभा सांसद फौजिया खान कहती हैं कि जो हालात हैं, उसे देखकर ऐसा ही लगता है कि नेता और अधिकारी लोकतंत्र, संविधान और लोगों के प्रति कम जवाबदेह होते जा रहे हैं. हिंदुस्तानीय नेतृत्व और प्रशासन में जवाबदेही का क्षरण दूरगामी परिणाम लाता है. जब नेता और अधिकारी जिम्मेदारी से बचते हैं, तो व्यवस्था में जनता का विश्वास कम हो जाता है. लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब उसके नेता अपने कार्यों, नीतियों और निर्णयों के लिए जवाबदेह हों. जवाबदेही के बिना, लोकतांत्रिक शासन की नींव ही कमजोर हो जाती है, जिससे नागरिक अपनी गलतियों को सुधारने के लिए हर पांच साल में होने वाले चुनावों पर ही निर्भर हो जाते हैं. हमें यह समझना होगा कि जवाबदेही केवल एक नेतृत्वक उपकरण नहीं, बल्कि एक नैतिक दायित्व है. जैसा कि नेतृत्वक दार्शनिक हन्ना एरेंड्ट ने कहा था, “नेताओं का दायित्व केवल अपने कार्यों के लिए उत्तर देना ही नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि सत्ता जनता की सेवा में बनी रहे.” इसलिए हिंदुस्तानीय नेतृत्व को इस भावना को एक बार फिर जिंदा करना होगा. सार्वजनिक संस्थानों को भी यह सुनिश्चित करने में अधिक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए कि जवाबदेही शासन का एक महत्वपूर्ण पहलू बनी रहे. अब जानिए कैसे आरोपों में घिरते ही 5 साल में 4 प्रधानमंत्रियों ने अपने पद से दिया इस्तीफा लॉकडाउन पार्टी और बोरिस जॉनसन का इस्तीफा: ब्रिटेन में 2022 में तत्कालीन प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन को इस्तीफा देना पड़ा था. उन पर आरोप थे कि कोरोना काल में जब लोग अपने घरों में कैद थे उस वक्त वह अपने दोस्तों के साथ पार्टी कर रहे थे. उन पर आरोप था कि न सिर्फ उन्होंने लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन किया बल्कि अपनी पार्टियों के लिए सदन को झूठ भी कहा. इन विवादों के कुछ दिनों बाद उन्हें अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा था. झूठे वादे पर लिज ट्रस ने 45 दिनों में छोड़ी कुर्सी: जॉनसन के बाद कंजर्वेटिव पार्टी ने लिज ट्रस को प्रधानमंत्री नियुक्त किया. लिज देश की आर्थिक स्थिति सुधारने जैसे बड़े वादों के साथ प्रधानमंत्री चुनी गई थी, पीएम बनने के बाद वह एक मिनी बजट लेकर आई जिसका नतीजा यह रहा की ब्रिटेन की करेंसी की वैल्यू क्रैश हो गई. वह वादा पूरा नहीं कर पाई इसके चलते उन्हें 45 दिन के भीतर अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी. पत्नी की कंपनी को फायदा पहुंचाने के आरोप में कुर्सी गई: लिज ट्रस के बाद 2024 में हिंदुस्तानवंशी ऋषि सुनक ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बने, उन्होंने भी देश की वित्तीय स्थिति को लेकर बड़े-बड़े वादे किए. हालांकि, जल्द ही वह अपनी पत्नी अक्षता मूर्ति की

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CJP Protest: दिल्ली में स्कूल-कोर्ट ऑनलाइन, कनॉट प्लेस में दुकानें बंद रखने की सलाह

CJP Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर होने वाले इस प्रदर्शन के मद्देनजर नई दिल्ली के कई इलाकों में बैरिकेडिंग की गई है. कनॉट प्लेस में दुकानों और दफ्तरों को बंद रखने की सलाह दी गई है. वहीं, पहाड़गंज के कुछ होटलों को बाहर से आने वाले छात्रों और युवाओं को कमरे देने के मामले में सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं. कक्षा 6 से 12 तक की पढ़ाई ऑनलाइन पीटीआई के इनपुट के मुताबिक, सरदार पटेल विद्यालय ने अभिभावकों को सूचित किया है कि शनिवार को कक्षा 6 से 12 तक के विद्यार्थियों की पढ़ाई ऑनलाइन होगी. स्कूल ने नई दिल्ली इलाके में बड़े पैमाने पर बैरिकेडिंग और विद्यार्थियों की सुरक्षा से जुड़ी चिंताओं को देखते हुए यह फैसला लिया है. स्कूल ने शुक्रवार को विद्यार्थियों के लिए स्टे-बैक सुविधा भी बंद कर दी है. शनिवार को होने वाला एक्टिविटी वीक का उद्घाटन कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया है. इसकी नई तारीख बाद में घोषित की जाएगी. कई स्कूलों ने बदला कार्यक्रम प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित होने की आशंका के बीच अन्य स्कूलों ने भी अपने कार्यक्रमों में बदलाव किया है. रघुबीर सिंह जूनियर मॉडर्न स्कूल ने अभिभावक-शिक्षक बैठक की तारीख बदल दी है. हिंदुस्तानीय विद्या भवन के मेहता विद्यालय ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों की स्पोर्ट्स दिवस की प्रैक्टिस और अतिरिक्त कक्षाएं रद्द कर दी हैं. कॉलेजों की परीक्षाएं भी स्थगित दिल्ली के कुछ कॉलेजों ने 10 अक्टूबर को होने वाली परीक्षाएं भी टाल दी हैं. हिंदुस्तानी विद्यापीठ कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग ने अपनी मिड-टर्म परीक्षाएं शनिवार से सोमवार के लिए पुनर्निर्धारित की हैं. महाराजा अग्रसेन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी ने भी परीक्षाएं 12 अक्टूबर तक स्थगित कर दी हैं. अदालतों और व्यावसायिक इलाकों में भी असर प्रदर्शन को देखते हुए अदालतों के कामकाज को ऑनलाइन करने की व्यवस्था की गई है. कनॉट प्लेस में दुकानों और दफ्तरों को बंद रखने की सलाह दी गई है, ताकि भीड़ और यातायात संबंधी परेशानियों से बचा जा सके. पहाड़गंज के होटलों को निर्देश द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पहाड़गंज के कम से कम छह होटलों को बाहर से आने वाले छात्रों और युवाओं को कमरे देने के संबंध में सतर्क रहने के निर्देश मिले हैं. होटल संचालकों से ऐसे लोगों के पहुंचने पर पुलिस को सूचना देने के लिए भी कहा गया है. ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन CJP ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का आह्वान किया है. संगठन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहा है. मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी विवाद के बीच यह प्रदर्शन प्रस्तावित है. प्रदर्शन से पहले सुरक्षा व्यवस्था कड़ी किए जाने और मेट्रो सेवाओं में संभावित व्यवधान की आशंका का असर स्कूलों, कॉलेजों और अन्य संस्थानों के कार्यक्रमों पर पड़ा है. ये भी पढ़ें: VIDEO: CJP के प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस अलर्ट, RAF-पिंक फोर्स तैनात; बॉडी कैम से रिकॉर्ड होगा एक्शन The post CJP Protest: दिल्ली में स्कूल-कोर्ट ऑनलाइन, कनॉट प्लेस में दुकानें बंद रखने की सलाह appeared first on Naya Vichar.

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