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Author name: Vinod Jha

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क्या है अमेरिका का नया फोर्स्ड लेबर टैरिफ, जानिए भारत पर 10% टैक्स से आपकी जेब पर क्या होगा असर?

अमेरिका ने 24 जुलाई से हिंदुस्तान से आयात होने वाले सामान पर 10% टैरिफ (आयात शुल्क) लागू कर दिया है. यह फैसला अमेरिकी ट्रेड एक्ट-1974 के सेक्शन 301 के तहत लिया गया है. अमेरिका का कहना है कि यह कदम फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से जुड़े सामान पर सख्ती के लिए उठाया गया है. गौरतरलब है कि ट्रम्प प्रशासन द्वारा 15% अस्थायी ग्लोबल टैरिफ समाप्त होने के बाद नया 10% टैरिफ लागू किया गया है. सेक्शन 301 क्या है और फोर्स्ड लेबर से इसका क्या संबंध है? सेक्शन 301 अमेरिका के ट्रेड एक्ट-1974 का एक प्रावधान है. इसके तहत अगर अमेरिकी प्रशासन को लगता है कि किसी देश की व्यापारिक नीतियां या प्रथाएं अमेरिकी कारोबार, उद्योगों या व्यापार हितों के लिए अनुचित हैं, तो वह उस देश के खिलाफ व्यापारिक कार्रवाई कर सकती है. इस कार्रवाई में अमेरिकी प्रशासन, अतिरिक्त आयात शुल्क (टैरिफ) लगा सकती है. कुछ उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध लगा सकती है. दूसरे व्यापारिक प्रतिबंध लागू कर सकती है. इसकी जांच अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) करता है. जांच के दौरान संबंधित देश से जवाब मांगा जाता है और जरूरत पड़ने पर बातचीत भी होती है. इसके बाद राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर कार्रवाई लागू की जाती है. गौरतलब है कि इस मामले में अमेरिका ने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से जुड़े सप्लाई चेन जोखिमों को कार्रवाई का आधार बनाया है. यानी सेक्शन 301 स्वयं फोर्स्ड लेबर से संबंधित कानून नहीं है, बल्कि यह एक ऐसा कानूनी प्रावधान है जिसके तहत अमेरिका विभिन्न व्यापारिक कारणों, जिनमें फोर्स्ड लेबर से जुड़े मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं, के आधार पर टैरिफ या अन्य व्यापारिक प्रतिबंध लगा सकता है. फोर्स्ड लेबर यानी जबरन मजदूरी से क्या मतलब है फोर्स्ड लेबर यानी जबरन मजदूरी, इसका मतलब होता है कि किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के खिलाफ काम कराना. जैसे कि.. किसी व्यक्ति द्वारा धमकी देकर काम कराया जाना काम करने के बाद भी उसका वेतन रोक लिया जाना पहले से लिए गए कर्ज को खत्म करने के लिए पर काम करवाना किसी व्यक्ति का पासपोर्ट या दूसरे दस्तावेज जब्त कर, उससे अपनी शर्तों पर काम करवाना कम मजदूरी या फिर काम का अतिरिक्त बोझ होने के बाद भी नौकरी छोड़ने की आजादी नहीं देना दरअसल, अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानता है. ऐसा पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति या सस्थान और संगठन पर कार्रवाई कर सकता है. हिंदुस्तान पर 10% तो दूसरे देशों पर कितना अतिरिक्त टैरिफ अमेरिका का कहना है कि अगर किसी देश से आने वाले सामान में फोर्स्ड लेबर का इस्तेमाल पाया जाता है, तो उस पर अतिरिक्त टैरिफ या आयात प्रतिबंध लगाया जा सकता है. इसका मकसद कंपनियों पर दबाव बनाना है, ताकि उनकी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी से बने सामान का इस्तेमाल न हो. अमेरिका ने कुल 60 देश (17 देशों पर 10% टैरिफ और 43 देशों पर 12.5% टैरिफ)पर अतिरिक्त टैरिफ लगाया है. आपकी जेब पर क्या असर पड़ेगा? फिलहाल यह टैरिफ हिंदुस्तानीय उपभोक्ताओं के लिए महंगाई का बड़ा कारण नहीं दिखता. हालांकि अगर लंबे समय तक निर्यात प्रभावित रहता है, तो रोजगार, उद्योगों की आय और निवेश के जरिए इसका असर धीरे-धीरे वित्तीय स्थिति और आम लोगों तक पहुंच सकता है. इसे ऐसे समझिए.. हिंदुस्तान में कपड़े सस्ते होंगे? जरूरी नहीं है कि कपड़े सस्ते हों लेकिन यदी निर्यात घटता है तो कुछ कंपनियां घरेलू बाजार में ज्यादा सामान बेच सकती हैं, लेकिन कीमतों में बड़ी गिरावट की संभावना फिलहाल कम है. क्या नौकरियों पर असर होगा? यदि निर्यात लंबे समय तक घटा तो इन सेक्टरों में रोजगार पर दबाव आएगा और इसका सीधा असर आय और खपत पर पड़ सकता है. क्या हिंदुस्तान में महंगाई बढ़ेगी? इस टैरिफ से सीधे तौर पर हिंदुस्तान में महंगाई बढ़ने की संभावना कम है क्योंकि यह हिंदुस्तानीय निर्यात पर लगाया गया टैक्स है, आयात पर नहीं. The post क्या है अमेरिका का नया फोर्स्ड लेबर टैरिफ, जानिए हिंदुस्तान पर 10% टैक्स से आपकी जेब पर क्या होगा असर? appeared first on Naya Vichar.

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भोजशाला मामला: नमाज के लिए 1.3 किमी दूर जगह देने पर विवाद, SC में 29 जुलाई को सुनवाई

Dhar Bhojshala Case: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (24 जुलाई) को मुस्लिम पक्ष की उस याचिका पर 29 जुलाई को सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें आरोप लगाया गया है कि मध्य प्रदेश प्रशासन ने नमाज के लिए धार के विवादित भोजशाला परिसर से काफी दूर वैकल्पिक जगह तय की है. मुस्लिम पक्ष की मांग है कि शुक्रवार की नमाज (जुमे की नमाज) के लिए भोजशाला परिसर के पास ही जगह मुहैया कराई जाए. मुस्लिम पक्ष ने वैकल्पिक जगह पर उठाए सवाल 22 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने याचिका को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने का आश्वासन दिया था. हालांकि, शुक्रवार को वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने सुनवाई के अंत में इस मामले का जिक्र उल्लेख किया, क्योंकि याचिका सूची में शामिल नहीं थी. अहमदी ने आरोप लगाया कि राज्य प्रशासन के अधिकारी नमाज के लिए आसपास जगह उपलब्ध नहीं करा रहे हैं और जुमे की नमाज दो बार छूट चुकी है. उन्होंने कहा कि प्रशासन की ओर से दी गई जगह करीब 1.3 किलोमीटर दूर है. प्रशासन ने दूरी को लेकर मुस्लिम पक्ष की दलील का किया विरोध राज्य प्रशासन की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुस्लिम पक्ष की दलीलों का विरोध किया. उन्होंने कहा कि वैकल्पिक स्थान करीब 900 मीटर दूर है. इस पर हुजेफा अहमदी ने कहा कि सड़क मार्ग से दूरी 1.3 किलोमीटर है और आरोप लगाया कि अदालत के आदेशों का पालन नहीं करने की कोशिश की जा रही है. सुप्रीम कोर्ट ने 29 जुलाई को सुनवाई तय की चीफ जस्टिस सूर्यकांत की पीठ ने मुस्लिम पक्ष की अंतरिम याचिका पर सुनवाई के लिए 29 जुलाई की तारीख तय की है. भोजशाला मामले में पहले भी दिया गया था निर्देश मध्य प्रदेश हाई कोर्ट के उस फैसले के खिलाफ मुस्लिम पक्ष की अपीलों पर सुनवाई करते हुए, जिसमें भोजशाला परिसर को देवी सरस्वती का मंदिर घोषित किया गया था, सुप्रीम कोर्ट ने 14 जुलाई को राज्य प्रशासन को निर्देश दिया था. कोर्ट ने कहा था कि मामले में अंतिम फैसला आने तक दोपहर 1 बजे से 3 बजे तक जुमे की नमाज के लिए विवादित स्थल के पास कोई दूसरी खुली जगह उपलब्ध कराई जाए. Also Read: CJP Protest: धर्मेंद्र प्रधान को हटाने पर अड़ी CJP, जानिए 3 मांगों पर प्रशासन ने क्या दिया जवाब The post भोजशाला मामला: नमाज के लिए 1.3 किमी दूर जगह देने पर विवाद, SC में 29 जुलाई को सुनवाई appeared first on Naya Vichar.

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NEET आंदोलन में साजिश का एंगल, सुप्रीम कोर्ट बोला- NIA जांच पर केंद्र सरकार ले सकती है फैसला

Supreme Court : NEET पेपर लीक के विरोध में 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए छात्र आंदोलन को लेकर एक नया मोड़ सामने आया है. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, याचिकाकर्ता और अधिवक्ता बरुण सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में मांग की है कि यह जांच होनी चाहिए कि क्या इस प्रदर्शन में नेतृत्वक कार्यकर्ताओं या देश विरोधी तत्वों ने घुसपैठ कर आंदोलन को भड़काने की कोशिश की थी. उन्होंने कहा है कि इससे केंद्र प्रशासन को कमजोर करने की साजिश की आशंका है. कोर्ट ने केंद्र प्रशासन के पास भेजा मामला वकील बरुण सिन्हा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि NIA जांच का आदेश देने का अधिकार केंद्र प्रशासन के पास है. इसलिए अदालत ने उन्हें निर्देश दिया कि वे अपनी शिकायत केंद्र प्रशासन या संबंधित सक्षम प्राधिकरण के सामने रखें. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संबंधित प्राधिकरण शिकायत पर कानून के हिसाब से उचित फैसला ले सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता बरुण सिन्हा की याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत सक्षम प्राधिकरण को दें, जिसके बाद संबंधित अधिकारी आवश्यक कार्रवाई पर निर्णय ले सकते हैं. तोड़फोड़ और सार्वजनिक संपत्ति का भी उठा मुद्दा याचिका में प्रदर्शन के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने तथा सड़कों और सार्वजनिक स्थानों को बाधित करने का मुद्दा भी उठाया गया. इस पर भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता अपनी शिकायत सक्षम प्राधिकरण को दें, जिसके बाद संबंधित अधिकारी आवश्यक कार्रवाई पर निर्णय ले सकते हैं. पहले से विवादों में है NEET आंदोलन NEET पेपर लीक मामले को लेकर देशभर में छात्रों का विरोध प्रदर्शन जारी है. वहीं 20 जुलाई के जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद पुलिस कार्रवाई, लाठीचार्ज और कथित बल प्रयोग को लेकर भी कई याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में पहुंच चुकी हैं. विपक्ष और छात्र संगठनों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने की बात कह रहा है. अब NIA जांच की मांग सामने आने के बाद यह मामला केवल छात्र आंदोलन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि नेतृत्वक और कानूनी बहस का भी विषय बन गया है. यह भी पढ़ें– राहुल गांधी ने घायल छात्र से की मुलाकात, बोले- तिरंगा लेकर कर रहा था प्रदर्शन पुलिस ने चलाई पैलेट गन The post NEET आंदोलन में साजिश का एंगल, सुप्रीम कोर्ट बोला- NIA जांच पर केंद्र प्रशासन ले सकती है फैसला appeared first on Naya Vichar.

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राहुल गांधी ने घायल छात्र से की मुलाकात, बोले- तिरंगा लेकर कर रहा था प्रदर्शन पुलिस ने चलाई पैलेट गन

Rahul Gandhi : लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन के दौरान घायल हुए एक युवक को मीडिया के सामने पेश किया. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, राहुल गांधी ने दावा किया कि युवक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लेकर खड़ा था, तभी उस पर पैलेट गन चलाई गई. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी प्रशासन कह रही है कि पैलेट गन का इस्तेमाल नहीं हुआ, जबकि युवक की एक आंख की रोशनी चली गई है. राहुल गांधी ने कहा कि हजारों छात्रों पर लाठीचार्ज और पेलेट गन का इस्तेमाल किया गया. पुलिस भर्ती परीक्षा और पेपर लीक का भी उठाया मुद्दा कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि घायल युवक ने पुलिस भर्ती परीक्षा दी थी, लेकिन पेपर लीक होने से उसका भविष्य प्रभावित हुआ. उन्होंने कहा कि नौकरी की मांग कर रहे युवाओं की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग किया गया. उन्होंने केंद्र प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की. नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने दावा किया कि युवक शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान तिरंगा लेकर खड़ा था, तभी दिल्ली की ओर से उस पर पैलेट गन चलाई गई. पहले भी आंदोलनों में पेलेट गन के इस्तेमाल पर उठते रहे हैं सवाल हिंदुस्तान में पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर पहले भी कई बार विवाद हो चुका है. खासकर जम्मू-कश्मीर में प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन चलाने के मामलों में आंखों की रोशनी जाने जैसी घटनाएं सामने आई थीं. मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी दलों ने समय-समय पर इसके इस्तेमाल पर सवाल उठाए हैं. अब जंतर-मंतर छात्र प्रदर्शन को लेकर भी इसी तरह के आरोपों ने नेतृत्वक बहस तेज कर दी है. प्रशासन और विपक्ष आमने-सामने नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के आरोपों के बाद छात्र आंदोलन का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय नेतृत्व के केंद्र में आ गया है।. विपक्ष मोदी प्रशासन से जवाब मांग रहा है, जबकि प्रशासन पहले ही पेलेट गन के इस्तेमाल के आरोपों से इनकार कर चुकी है. अब इस मामले में जांच और आधिकारिक तथ्यों का इंतजार किया जा रहा है. यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद से लेकर सड़क तक नेतृत्वक टकराव का कारण बन सकता है. यह भी पढ़ें- पेपर लीक पर सख्ती बढ़ेगी, फास्ट-ट्रैक कोर्ट के मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी The post राहुल गांधी ने घायल छात्र से की मुलाकात, बोले- तिरंगा लेकर कर रहा था प्रदर्शन पुलिस ने चलाई पैलेट गन appeared first on Naya Vichar.

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भूख हड़ताल खत्म होने के बाद क्या खाएं? डाइटिशियन ने बताया ‘Body Reset’ का बेस्ट तरीका

What to eat after a long hunger strike: NEET परीक्षा पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था में सुधार और जवाबदेही की मांग को लेकर छात्रों के समर्थन में 26 दिनों तक भूख हड़ताल पर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने आखिरकार अपना अनशन समाप्त कर दिया है. ऐसे में एक बड़ा सवाल यह उठता है कि इतने लंबे समय तक भोजन न करने के बाद शरीर को सामान्य आहार कैसे दिया जाए. क्या अनशन खत्म होते ही सामान्य खाना खाना सुरक्षित होता है? लंबे समय तक भूखे रहने से शरीर में कौन-कौन से बदलाव आते हैं और ऐसी स्थिति में किस तरह की डाइट, सावधानियां और मेडिकल निगरानी जरूरी होती है? इन सभी सवालों के जवाब जानने के लिए हमने डाइटिशियन मोनिका दीक्षित से बातचीत की. उन्होंने इस पूरे विषय पर विस्तार से जानकारी दी है, जिसे हम इस लेख में आपके साथ साझा कर रहे हैं. सबसे पहले डॉक्टर से कराएं बॉडी चेक-अप Liquid Diet, AI Image वह बताती हैं, “लंबे समय तक भूखे रहने के बाद भोजन की शुरुआत हमेशा लिक्विड डाइट से करनी चाहिए. शुरुआत में ORS, नारियल पानी या अन्य साफ तरल पदार्थ दिए जा सकते हैं. इसके बाद पतला सूप, दाल का पानी और चावल का मांड दिया जा सकता है.” इसके बाद सॉफ्ट डाइट दें Healthy Diet, AI Image वह कहती हैं, “अगले 2–3 दिनों में भोजन की मात्रा और विविधता धीरे-धीरे बढ़ाई जाती है. इसके बाद व्यक्ति को सामान्य संतुलित आहार पर लाया जाता है, जिसमें दाल, सब्जी, रोटी, चावल और यदि व्यक्ति खाता हो तो अंडा, पनीर या अन्य प्रोटीन शामिल किए जा सकते हैं.” शुरुआत में इन बातों का रखें ध्यान डाइटिशियन के मुताबिक, शुरुआत में तला-भुना, बहुत मसालेदार या बहुत मीठा भोजन नहीं देना चाहिए. एक बार में ज्यादा खाना खिलाने के बजाय दिन में 5–6 छोटे-छोटे भोजन देना बेहतर होता है. पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी जरूरी है. क्या होता है रीफीडिंग सिंड्रोम? (What is Refeeding Syndrome?) इस बारे में मोनिका दीक्षित बताती हैं, “अगर कोई व्यक्ति 15 दिन से अधिक समय तक भूखा रहने के बाद अचानक भारी भोजन या ज्यादा मात्रा में कार्बोहाइड्रेट जैसे चावल, रोटी, मिठाई या ग्लूकोज लेना शुरू कर देता है, तो रीफीडिंग सिंड्रोम होने की संभावना बढ़ जाती है.” वह आगे कहती हैं, “रीफीडिंग सिंड्रोम एक गंभीर स्थिति है, जो लंबे समय तक भूखा रहने या बहुत कम खाने के बाद अचानक अधिक मात्रा में भोजन, विशेषकर कार्बोहाइड्रेट लेने पर हो सकती है. ऐसे मामलों में इलेक्ट्रोलाइट्स (फॉस्फेट, पोटैशियम और मैग्नीशियम) तथा विटामिन B1 (थायमिन) की निगरानी भी की जाती है.” यह भी पढ़ें: क्या आप भी दूध के साथ खाते हैं ये चीजें? आज ही बदल लें ये आदत The post भूख हड़ताल खत्म होने के बाद क्या खाएं? डाइटिशियन ने बताया ‘Body Reset’ का बेस्ट तरीका appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड : 7000 रुपये के लिए दोस्त ने आधी रात को ले ली दोस्त की जान

गुमला से दुर्जय पासवान की रिपोर्ट Gumla News: झारखंड के गुमला जिले में दोस्ती जैसा पवित्र रिश्ता तार-तार हो गया. गुमला से सटी पुग्गु खोपाटोली गांव में दोस्ती के रिश्ते को कलंकित करने वाली सनसनीखेज वारदात सामने आई है. समाचार है कि सिर्फ 7000 रुपये की खातिर दोस्त ने अपने ही दोस्त की जान ले ली. पुराने लेन-देन के विवाद में एक दोस्त ने अपने ही घनिष्ठ मित्र की सोते समय पत्थर के भारी सिलबट्टे (सिल्लोड) से सिर कुचलकर हत्या कर दी. दोस्त को मारने के बाद थाने में किया समर्पण दोस्त की जान लेने के बाद आरोपी खुद सदर थाना पहुंचा और पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया. मृतक की पहचान गांव निवासी 42 वर्षीय अनुभूषण टोप्पो के रूप में हुई है, जबकि हत्या का आरोप उसके मित्र जगन्नाथ उरांव उर्फ बोचे पर है. सूचना मिलने के बाद सदर थाना पुलिस मौके पर पहुंची. शव को कब्जे में लेकर पंचनामा किया और पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया. मुंबई से लौटने के बाद फिर बढ़ा विवाद जानकारी के अनुसार, अनुभूषण टोप्पो और जगन्नाथ उरांव लंबे समय से घनिष्ठ मित्र थे. दोनों जून महीने में मुंबई से मजदूरी कर गांव लौटे थे और खेती-बाड़ी का काम कर रहे थे. दोनों के बीच पैसों का लेन-देन भी था. बताया जाता है कि करीब पांच साल पहले अनुभूषण ने जगन्नाथ से 7000 रुपये उधार लिए थे, जिसे वह वापस नहीं कर रहा था. इसी बात को लेकर दोनों के बीच अक्सर कहासुनी होती रहती थी. पहले से बनाई थी हत्या की योजना आरंभिक जानकारी के अनुसार, आरोपी पिछले एक सप्ताह से हत्या की योजना बना रहा था. गुरुवार रात उसने अपने मित्र को बहाने से घर बुलाया. दोनों ने साथ खाना खाया और दोनों एक ही कमरे में सो गए. देर रात करीब डेढ़ बजे जब अनु भूषण गहरी नींद में था, तभी जगन्नाथ ने पत्थर के बड़े सिलबट्टे से उसके सिर पर कई वार कर दिए. गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई. हत्या के बाद दूसरे घर में जाकर सोया, सुबह पहुंचा थाने वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी मौके से निकल गया और गांव के ही एक दूसरे घर में जाकर रात बिताई. शुक्रवार सुबह वह सीधे सदर थाना पहुंचा और पुलिस के सामने हत्या की बात कबूलते हुए आत्मसमर्पण दिया. इसके बाद पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी. मानसिक स्थिति को लेकर भी चर्चा ग्रामीणों के अनुसार, पिछले करीब 15 दिनों से जगन्नाथ का व्यवहार असामान्य हो गया था. वह अपनी पत्नी पर बेवजह शक करता था और अक्सर उसके साथ मारपीट करता था. इसी कारण उसकी पत्नी अलग रह रही थी. हालांकि, पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है और मानसिक स्थिति के दावे की भी पड़ताल की जा रही है. इसे भी पढ़ें: झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: 60 साल पुरानी जमाबंदी प्रशासनिक आदेश से रद्द नहीं की जा सकती जगन्नाथ के भाई भी बुजुर्ग की ले चुका है जान ग्रामीणों ने बताया कि आरोपी का भाई ललित उरांव भी करीब पांच साल पहले बरिसा गांव में एक बुजुर्ग स्त्री की हत्या के मामले में जेल जा चुका है. हाल ही में वह जेल से बाहर आया है. पुलिस का कहना है कि आरोपी से पूछताछ की जा रही है और हत्या के पीछे की परिस्थितियों की गहन जांच जारी है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी. इसे भी पढ़ें: गिरिडीह में साइबर ठगों पर पुलिस का शिकंजा, संयुक्त छापेमारी में दो आरोपी गिरफ्तार The post झारखंड : 7000 रुपये के लिए दोस्त ने आधी रात को ले ली दोस्त की जान appeared first on Naya Vichar.

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Ampier Nexus इलेक्ट्रिक स्कूटर में क्या-क्या मिलता है? खरीदने से पहले देखें इसके फीचर

देश में इलेक्ट्रिक स्कूटरों का बाजार तेजी से बढ़ता जा रहा है. पेट्रोल के बढ़ते दामों के बीच कस्टमर्स का ध्यान लगातार ई-स्कूटर की तरफ है. टीवीएस, हीरो, ओला, एथर और बजाज जैसी कंपनियां मार्केट में एक के बाद एक धांसू रेंज वाले स्कूटर्स ला रहे हैं, लेकिन आज हम आपको एम्पीयर इलेक्ट्रिक के बारे में बताएंगे, जिसकी स्कूटर भी शानदार है. Ampier Nexus स्कूटर का नाम ज्यादा पॉपुलर नहीं है, लेकिन इसकी खासियत आपका दिल जीत सकती है. यदि आप TVS और Ather को छोड़कर इसे खरीदना चाहते हैं, तो इसमें क्या-क्या मिलता है उसे जान लीजिए. इस आर्टिकल में इसका हरेक फीचर बताएंगे. Ampier Nexus का स्मार्ट टेक्नोलॉजी  कंपनी की तरफ से एम्पीयर नेक्सस में टेक्नोलॉजी पर भरपूर जोर दिया गया है. इसमें 7 इंच का TFT टचस्क्रीन डिस्प्ले मिलता है, जिससे आप अपना स्मार्टफोन कनेक्ट कर सकते हैं. NxG.io पावर्ड इंटेलिजेंस मिलता है, जो राइडिंग एक्सपिरियंस को शानदार बनाता है. इस स्कूटर में टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन, हिल होल्ड असिस्ट और पिंग माय स्कूटर जैसे फंक्शन मिलते हैं, जिससे पार्किंग में इसे ढूंढना आसान हो जाता है. इसके अलावा एम्पीयर मोबाइल ऐप के माध्यम से राइडर अपनी लोकेशन शेयर कर सकते हैं. साथ ही, कॉल और SMS अलर्ट सीधे स्कूटर के डिस्प्ले पर देख सकते हैं. इसमें कई राइडिंग मोड, एक रिवर्स मोड, पार्क असिस्ट और OTA (ओवर-द-एयर) जैसे फीचर्स मिलते हैं.  Ampier Nexus का जबरदस्त रेंज  कोई भी खरीदार इलेक्ट्रिक स्कूटर लेने जाता है तो उसके दिमाग में सबसे पहला सवाल रेंज आता है. इस मामले में एम्पीयर नेक्सस लाजवाब है. कंपनी इस स्कूटर में 3kWh का LFP बैटरी पैक ऑफर करती है, जो एक बार फूल चार्ज होने के बाद 136 किलोमीटर तक राइड करवा सकती है. शहर में डेली ड्राइव करने वालों के लिए यह रेंज शानदार है. कंपनी दावा करती है कि इस बैटरी की लाइफ 2,00,000 KM है, जो इसकी क्षमता को दर्शाता है. इसके अलावा एम्पीयर इसके ऊपर इंडस्ट्री की बेस्ट 5 साल या 75 हजार किलोमीटर की बैटरी वारंटी ऑफर कर रही है. इसके बैटरी को 3 घंटे 22 मिनट में 0 से 80 पर्सेंट तक चार्ज किया जा सकता है.  ये भी पढ़ें: 70 हजार रुपये से कम में आने वाली Honda Shine 100 में क्या-क्या मिलता है? जान लें इसके हर फीचर Ampier Nexus का शानदार परफॉर्मेंस  इस स्कूटर में 5 किलोवाट वाला मोटर सेट किया गया है, जो फासटेस्ट एक्सलरेशन और स्मूद पावर डिलीवरी देती है. इसकी टॉप स्पीड 93 kmph बताई गई है. यह स्पीड केवल शहरों ही नहीं, बल्कि छोटे-मोटे स्ट्रेच हाइवे के लिए भी पर्याप्त है. इसकी पावर डिलीवरी प्रोडेक्टेबल रखी गई है, जिसका मतलब है कि नए राइडर के लिए इसे कंट्रोल कर पाना ईजी है.  Ampier Nexus डेली यूज के लिए आरामदायक  यदि आप डेली आरामदायक राइडिंग का अनुभव लेना चाहते हैं, तो एम्पीयर नेक्सस बढ़िया चॉइस हो सकती है. इसमें अपराइट राइडिंग पोस्चर और लंबी-चौड़ी आरामदायक सीट मिलती है. इसका सस्पेशन सेटअप हिंदुस्तानीय सड़कों के गड्ढों और आसमान सतहों के झटकों को अच्छी तरह झेलने के लिए ट्यून किया गया है, जिससे डेली का सफर कम थकान वाली होगी. इसके अलावा स्कूटर का चेसिस कॉर्नरिंग के समय तेज स्पीड पर भी काफी स्थिर रहती है, जो राइडर के कॉन्फिडेंस को बढ़ाता है. ये भी पढ़ें: 60 हजार रुपये से कम में आने वाली TVS Sport 110 में क्या-क्या मिलता है? जानें इसके हरेक फीचर The post Ampier Nexus इलेक्ट्रिक स्कूटर में क्या-क्या मिलता है? खरीदने से पहले देखें इसके फीचर appeared first on Naya Vichar.

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जुलाई 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा? यहां जानें पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त

Ravi Pradosh Vrat: हिंदू पंचांग के अनुसार, प्रत्येक माह के कृष्ण और शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को प्रदोष व्रत रखा जाता है. यह व्रत भगवान शिव को समर्पित होता है. वर्ष 2026 में आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 26 जुलाई 2026 (रविवार) को पड़ रही है. रविवार के दिन होने के कारण इसे रवि प्रदोष व्रत कहा जाता है. धार्मिक मान्यता है कि इस व्रत को विधि-विधान से करने पर भगवान शिव के साथ-साथ सूर्य देव की भी कृपा प्राप्त होती है. इससे उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, मान-सम्मान और सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है. रवि प्रदोष व्रत जुलाई 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि का समय इस प्रकार है: व्रत की तिथि: 26 जुलाई 2026 (रविवार) त्रयोदशी तिथि प्रारंभ: 26 जुलाई 2026, दोपहर 1:58 बजे त्रयोदशी तिथि समाप्त: 27 जुलाई 2026, शाम 4:15 बजे प्रदोष काल (पूजा मुहूर्त): शाम 7:16 बजे से रात 9:21 बजे तक रवि प्रदोष व्रत पूजा विधि सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. भगवान शिव का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लें. पूरे दिन व्रत का पालन करें और शिव मंत्रों का स्मरण करें. शाम को प्रदोष काल से पहले पुनः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें. शिवलिंग का जल, गंगाजल, दूध, दही, शहद और पंचामृत से अभिषेक करें. भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, चंदन और अक्षत अर्पित करें. इसके बाद रवि प्रदोष व्रत कथा का पाठ करें. भगवान शिव को फल, मिठाई और अन्य नैवेद्य का भोग लगाएं. ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जाप करें. अंत में दीप प्रज्ज्वलित कर भगवान शिव की आरती करें और अपनी मनोकामना की प्रार्थना करें. रवि प्रदोष व्रत का धार्मिक महत्व धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, प्रदोष काल में भगवान शिव कैलाश पर्वत पर आनंद तांडव करते हैं. इसलिए इस समय की गई शिव पूजा का विशेष फल प्राप्त होता है. रविवार को पड़ने वाला प्रदोष व्रत सूर्य देव से भी संबंधित माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु तथा मान-सम्मान की प्राप्ति होती है. साथ ही कुंडली में सूर्य की स्थिति मजबूत होती है. यह भी पढ़ें: महाप्रभु की घर वापसी आज, पुरी में बाहुड़ा यात्रा में उमड़ेगा आस्था का महासागर यहभी पढ़ें: मौसीबाड़ी से लौटेंगे भगवान जगन्नाथ, रांची रथयात्रा महोत्सव का होगा भव्य समापन The post जुलाई 2026 का आखिरी प्रदोष व्रत कब रखा जाएगा? यहां जानें पूजा की तिथि और शुभ मुहूर्त appeared first on Naya Vichar.

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CJP Protest: धर्मेंद्र प्रधान को हटाने पर अड़ी CJP, जानिए 3 मांगों पर सरकार ने क्या दिया जवाब

CJP Protest: शुक्रवार (24 जुलाई) को CJP के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह से मुलाकात की. बैठक के बाद CJP के प्रवक्ता सौरव दास और आशुतोष रंका ने मीडिया को बातचीत की जानकारी दी. CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल ने दिल्ली पुलिस की ओर से युवाओं को हिरासत में लिए जाने का मुद्दा प्रशासन के सामने प्रमुखता से उठाया. हमने प्रशासन को बताया कि दिल्ली पुलिस कल रात से लेकर पूरे दिन और आज भी बड़ी संख्या में युवा पुरुषों और स्त्रीओं को हिरासत में ले रही है. हिरासत में लिए जा रहे लोगों में वे लोग शामिल हैं जो जंतर-मंतर से अपने घर लौट रहे थे, जो विरोध स्थल की ओर जा रहे थे और यहां तक कि वे लोग भी जो प्रदर्शनकारियों के लिए खाना पहुंचा रहे थे. सौरव दास, प्रवक्ता सीजेपी सौरव दास ने आरोप लगाया कि पुलिस चुनिंदा युवाओं को हिरासत में ले रही है और वकीलों के साथ धक्का-मुक्की और बदसलूकी भी की जा रही है. उन्होंने कहा कि इस तरह की कार्रवाई से प्रशासन और युवाओं के बीच भरोसे की कमी और बढ़ेगी. उन्होंने कहा कि प्रशासन की शुरुआती प्रतिक्रिया यह थी कि ऐसी कोई घटना नहीं हो रही है. हालांकि, प्रशासन ने आश्वासन दिया कि यदि इस तरह की घटनाएं हो रही हैं तो उन्हें जारी नहीं रहने दिया जाएगा और दिल्ली पुलिस को आवश्यक निर्देश दिए जाएंगे. धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़ा CJP CJP के प्रवक्ता आशुतोष रंका ने कहा कि बैठक में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर विस्तार से चर्चा हुई. हमने बहुत स्पष्ट शब्दों में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे या केंद्रीय मंत्रिमंडल से उन्हें हटाए जाने के अलावा कुछ भी स्वीकार्य नहीं होगा. आशुतोष रंका, CJP के प्रवक्ता रंका ने कहा कि देश के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन जारी हैं और युवाओं में गुस्सा और नाराजगी है. उन्होंने कहा कि युवाओं की भावना साफ है कि धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा और उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त किया जाना चाहिए. उन्होंने बताया कि प्रशासन ने इस मांग पर अपना जवाब देने के लिए कल दोपहर तक का समय मांगा है. प्रशासन के सामने सीजेपी ने रखीं तीन प्रमुख मांगें कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) ने शुक्रवार को केंद्र प्रशासन के सामने अपनी तीन प्रमुख मांगें रखीं. पार्टी ने साफ कर दिया है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर कोई समझौता नहीं होगा. कॉजपा ने दूसरी मांग के रूप में नीट परीक्षा रद्द होने के बाद आत्महत्या करने वाले छात्रों के परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा देने की मांग उठाई है. इसके अलावा, पार्टी ने आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज सभी एफआईआर वापस लेने की भी मांग की है. कॉजपा के दो प्रतिनिधियों ने नई दिल्ली स्थित विट्ठलभाई पटेल हाउस में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह के साथ करीब दो घंटे तक चली बैठक में ये तीनों मांगें रखीं. The post CJP Protest: धर्मेंद्र प्रधान को हटाने पर अड़ी CJP, जानिए 3 मांगों पर प्रशासन ने क्या दिया जवाब appeared first on Naya Vichar.

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पेपर लीक पर सख्ती बढ़ेगी, फास्ट-ट्रैक कोर्ट के मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने प्रश्नपत्र लीक के मामलों पर सख्ती बढ़ाने के लिए नए विधेयक के मसौदे को मंजूरी दे दी है. इस प्रस्तावित कानून में पेपर लीक के दोषियों के लिए कठोर सजा, जेल और जुर्माने की व्यवस्था की गई है. पेपरलीक के मामलों के त्वरित निपटारे के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट का प्रावधान भी इस मसौदे में किया गया है. यह जानकारी पीटीआई न्यूज एजेंसी की ओर से दी गई है. प्रशासन का कहना है कि इस कानून का उद्देश्य परीक्षाओं को निष्पक्ष रूप से आयोजित करना है, ताकि छात्रों का भविष्य बेहतर बन सके. विधेयक को संसद के मौजूदा मानसून सत्र में ही पेश किए जाने की बात प्रशासन ने कही है. The post पेपर लीक पर सख्ती बढ़ेगी, फास्ट-ट्रैक कोर्ट के मसौदे को कैबिनेट की मंजूरी appeared first on Naya Vichar.

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