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Author name: Vinod Jha

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कल 5 जुलाई का राशिफल: मेष से मीन के लिए करियर, धन, परिवार और सेहत के लिहाज से कैसा रहेगा आपका दिन

Kal Ka Rashifal 5 July 2026: आने वाले कल 5 जुलाई 2026 रविवार का दिन कई राशियों के लिए नए अवसर लेकर आ सकता है, वहीं कुछ लोगों को निर्णय लेते समय अतिरिक्त सावधानी बरतने की जरूरत होगी. करियर, व्यापार, परिवार, स्वास्थ्य और आर्थिक मामलों में ग्रहों के संकेत आपके दिन की दिशा तय कर सकते हैं. आइए जानते हैं सभी 12 राशियों का विस्तृत राशिफल. कल का मेष राशिफल कल निवेश से जुड़े मामलों में जल्दबाजी से बचें और बड़े फैसले फिलहाल टालना बेहतर रहेगा. स्वास्थ्य में सुधार के संकेत हैं और पुरानी परेशानी से राहत मिल सकती है. परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने का अवसर मिलेगा. जीवनसाथी का सहयोग और स्नेह आपका मन प्रसन्न करेगा.शुभ अंक: 4 | शुभ रंग: मैरून कल का वृषभ राशिफल प्रभावशाली व्यक्ति से मुलाकात भविष्य के लिए लाभदायक साबित हो सकती है. किसी अनुभवी व्यक्ति की सलाह आपके लिए फायदेमंद रहेगी, लेकिन हर राय पर भरोसा न करें. रचनात्मक कार्यों में सफलता मिलेगी और अपनों के साथ यादगार समय बिताने का अवसर मिलेगा.शुभ अंक: 8 | शुभ रंग: क्रीम कल का मिथुन राशिफल ऊर्जा और आत्मविश्वास से भरपूर दिन रहेगा. कार्यक्षेत्र में आपकी प्रतिभा की सराहना होगी और लोग आपके व्यक्तित्व से प्रभावित होंगे. प्रेम संबंधों में मधुरता बनी रहेगी तथा विवाहित जीवन में रोमांस बढ़ेगा. शुभ अंक: 2 | शुभ रंग: आसमानी कल का कर्क राशिफल स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहना जरूरी होगा, विशेषकर यदि पहले से किसी बीमारी से जूझ रहे हैं. जीवनसाथी के साथ घूमने की योजना बन सकती है, हालांकि उसमें थोड़ी रुकावट संभव है. कोई महत्वपूर्ण निर्णय भविष्य में लाभदायक साबित होगा.शुभ अंक: 6 | शुभ रंग: ऑफ व्हाइट कल का सिंह राशिफल आर्थिक दृष्टि से दिन मजबूत रहेगा. आय के नए स्रोत खुल सकते हैं और घर में सुख-सुविधाओं पर खर्च करने का अवसर मिलेगा. धार्मिक माहौल घर की सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाएगा. लगातार शुभ समाचार मिलने से मन प्रसन्न रहेगा.शुभ अंक: 9 | शुभ रंग: नारंगी कल का कन्या राशिफल मित्रों और परिवार का सहयोग आपको मानसिक मजबूती देगा. पुराने आर्थिक दायित्व धीरे-धीरे पूरे हो सकते हैं. समय पर कार्य पूरे करने की आदत आपके लिए सफलता का मार्ग खोलेगी. पारिवारिक रिश्तों को समय देना लाभदायक रहेगा.शुभ अंक: 3 | शुभ रंग: पिस्ता हरा कल का तुला राशिफल दिन थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है, लेकिन परिवार का साथ हर मुश्किल को आसान बना देगा. सकारात्मक सोच और धैर्य के साथ आगे बढ़ेंगे तो परिस्थितियां आपके पक्ष में होती जाएंगी. मेहनत का फल देर से ही सही, लेकिन अवश्य मिलेगा.शुभ अंक: 1 | शुभ रंग: हल्का बैंगनी कल का वृश्चिक राशिफल पुराने अनुभवों से सीख लेकर नए अवसरों की तलाश करें. कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत सफलता का रास्ता खोलेगी. जीवनसाथी के साथ छोटी-मोटी नोकझोंक हो सकती है, लेकिन रिश्तों में विश्वास बनाए रखना जरूरी होगा.शुभ अंक: 5 | शुभ रंग: जामुनी कल का धनु राशिफल आत्मविश्वास और सकारात्मक सोच आपके लिए सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगी. लंबे समय से रुके कार्य आगे बढ़ सकते हैं. अफवाहों या दूसरों की बातों में आने के बजाय अपने विवेक से निर्णय लें. प्रेम संबंधों में भी विश्वास बनाए रखें.शुभ अंक: 7 | शुभ रंग: केसरिया कल का मकर राशिफल यात्रा के योग बन रहे हैं और काम के सिलसिले में बाहर जाना पड़ सकता है. नई जगहों पर मिले अवसर भविष्य में लाभ पहुंचा सकते हैं. परिवार का आशीर्वाद और सहयोग आपके आत्मविश्वास को बढ़ाएगा.शुभ अंक: 10 | शुभ रंग: स्लेटी नीला ये भी पढ़ें: जुलाई में बदलेंगे कई ग्रहों के समीकरण, जानें ग्रह स्थिति, कर्क संक्रांति और शुभ योग कल का कुंभ राशिफल व्यस्त दिनचर्या के बीच खुद के स्वास्थ्य और आराम का भी ध्यान रखें. जीवनसाथी का सहयोग किसी महत्वपूर्ण कार्य में सफलता दिला सकता है. आपकी सूझबूझ कठिन परिस्थितियों को भी सरल बना देगी. शुभ अंक: 11 | शुभ रंग: इंडिगो कल का मीन राशिफल कल का दिन आपके सपनों को नई दिशा देने वाला रहेगा. किसी भी साझेदारी में कदम रखने से पहले सभी पहलुओं पर अच्छी तरह विचार करें. आत्मविश्वास के साथ लिया गया निर्णय भविष्य में लाभ दिला सकता है. बाहरी सहयोग से नए अवसर भी प्राप्त होंगे.शुभ अंक: 12 | शुभ रंग: हल्का फिरोजी The post कल 5 जुलाई का राशिफल: मेष से मीन के लिए करियर, धन, परिवार और सेहत के लिहाज से कैसा रहेगा आपका दिन appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में मुखिया का चुनाव लड़ने से पहले पढ़ लें ये खबर, 10 साल बाद बदल सकता है आरक्षण रोस्टर, जानिए क्या है नियम

Bihar Panchayat Chunav: बिहार में होने वाले पंचायत चुनाव की तैयारियां धीरे-धीरे अंतिम चरण में पहुंच रही हैं. हालांकि चुनाव की तारीख अभी घोषित नहीं हुई है, लेकिन गांवों में नेतृत्वक हलचल तेज हो गई है. इस बार सबसे ज्यादा चर्चा पंचायतों के आरक्षण रोस्टर को लेकर है. माना जा रहा है कि करीब 10 साल बाद कई पंचायतों में आरक्षण की श्रेणी बदल सकती है. इसका सीधा असर मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य, जिला परिषद सदस्य, वार्ड सदस्य और पंच के चुनाव पर पड़ेगा. क्यों चर्चा में है आरक्षण रोस्टर? पंचायत चुनाव में किस पंचायत की सीट सामान्य होगी और कौन-सी सीट अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अत्यंत पिछड़ा वर्ग या स्त्री के लिए आरक्षित होगी, इसका फैसला आरक्षण रोस्टर से होता है. यही वजह है कि इस बार हजारों संभावित उम्मीदवार अंतिम सूची का इंतजार कर रहे हैं. 10 साल बाद बदल सकता है आरक्षण चक्र पंचायत राज नियमों के अनुसार पंचायतों में आरक्षण हमेशा एक जैसा नहीं रहता. यह रोटेशन सिस्टम के तहत तय होता है. पिछली बार वर्ष 2016 में आरक्षण रोस्टर लागू किया गया था. अब 2026 में नया चक्र पूरा होने के कारण कई पंचायतों में आरक्षण बदलने की संभावना है. अगर ऐसा होता है तो कई सामान्य सीटें आरक्षित हो सकती हैं. वहीं, कुछ आरक्षित सीटें जनरल कैटेगरी में भी आ सकती हैं. इससे कई पुराने जनप्रतिनिधियों और नए उम्मीदवारों की चुनावी रणनीति पूरी तरह बदल सकती है. किन पदों पर होगा चुनाव? पंचायत चुनाव में इन प्रमुख पदों के लिए मतदान कराया जाएगा. मुखिया सरपंच पंचायत समिति सदस्य जिला परिषद सदस्य वार्ड सदस्य पंच इन सभी पदों के लिए आरक्षण रोस्टर अलग-अलग पंचायतों के हिसाब से तय किया जाएगा. 2011 की जनगणना बनेगी आधार सूत्रों के अनुसार इस बार भी पंचायतों का आरक्षण वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर तैयार किया जा रहा है. नई जनगणना के आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण फिलहाल पुराने आंकड़ों का ही इस्तेमाल किया जाएगा. जिला स्तर पर पंचायतवार डेटा पोर्टल पर अपलोड किया जा रहा है. इसके बाद नियमानुसार आरक्षण रोस्टर तैयार होगा और अंतिम सूची जारी की जाएगी. उम्मीदवारों ने अभी से शुरू कर दिया जनसंपर्क अंतिम सूची आने से पहले ही बिहार के लगभग सभी जिलों में संभावित उम्मीदवार एक्टिव हो गए हैं. गांव-गांव जाकर लोगों से मुलाकात की जा रही है. सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी बढ़ गई है. स्थानीय बैठकों और पंचायत स्तर की गतिविधियों में भी संभावित उम्मीदवार लगातार नजर आ रहे हैं. हालांकि अधिकांश दावेदार अभी खुलकर चुनाव लड़ने की घोषणा नहीं कर रहे हैं. उनका कहना है कि पहले आरक्षण सूची जारी हो जाए, उसके बाद अंतिम फैसला लिया जाएगा. मौजूदा जनप्रतिनिधियों की बढ़ी चिंता आरक्षण में संभावित बदलाव ने वर्तमान मुखिया, सरपंच, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों की चिंता भी बढ़ा दी है. कई जनप्रतिनिधियों को डर है कि उनकी सीट किसी दूसरे वर्ग के लिए आरक्षित हो सकती है. ऐसी स्थिति में उन्हें या तो नई रणनीति बनानी होगी या फिर किसी दूसरे क्षेत्र से चुनाव लड़ने पर विचार करना पड़ सकता है. बदल सकते हैं चुनावी समीकरण नेतृत्वक जानकारों का मानना है कि यदि इस बार बड़े स्तर पर आरक्षण में बदलाव होता है तो कई पंचायतों में नए चेहरे सामने आएंगे. वहीं, कई पुराने नेताओं के लिए चुनाव पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो सकता है. इससे पूरे बिहार के पंचायत चुनाव का समीकरण बदल सकता है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें अंतिम सूची के बाद और गर्म होगा माहौल विशेषज्ञों का कहना है कि जैसे ही पंचायतवार अंतिम आरक्षण सूची जारी होगी, चुनावी गतिविधियां और तेज हो जाएंगी. नेतृत्वक दलों से जुड़े स्थानीय कार्यकर्ता भी अपने-अपने समर्थित उम्मीदवारों के पक्ष में रणनीति बनाना शुरू कर देंगे. गांवों में जनसभाएं, बैठकें, प्रचार और चुनावी तैयारियां तेजी पकड़ लेंगी. फिलहाल सभी की नजर राज्य निर्वाचन आयोग और पंचायत राज विभाग की ओर से जारी होने वाली अंतिम आरक्षण सूची पर टिकी है. इसी सूची के बाद बिहार पंचायत चुनाव 2026 की तस्वीर काफी हद तक साफ हो जाएगी. Also Read: पटना जू में आने वाले हैं तीन नए मेहमान, बच्चों के साथ घूमने की कर लें तैयारी, मैसूर से आ रहा है जिराफ The post बिहार में मुखिया का चुनाव लड़ने से पहले पढ़ लें ये समाचार, 10 साल बाद बदल सकता है आरक्षण रोस्टर, जानिए क्या है नियम appeared first on Naya Vichar.

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बेंगलुरु डे-केयर कांड: बच्चों के मन में बैठ गया बाथरूम का डर, नहलाने की बात सुन भागते हैं बच्चे

बेंगलुरु के ब्रूकफील्ड स्थित कैपजेमिनी कैंपस के अंदर बने एक डे-केयर सेंटर में बच्चों के साथ दुर्व्यवहार का मामला सामने आने के बाद पेरेंट्स ने अपनी परेशानी शेयर की. ढाई साल की एक बच्ची के माता-पिता ने पुलिस को बताया कि डे-केयर में दाखिले के बाद उनकी बेटी को बाथरूम से बहुत डर लगने लगा है. दोनों आईटी प्रोफेशनल हैं. करीब आठ महीने पहले अपनी इकलौती बेटी को इस डे-केयर में इन्होंने छोड़ना शुरू किया था. वायरल वीडियो सामने आने के बाद पुलिस ने बच्ची के माता-पिता से बातचीत की. दक्षिण-पूर्व बेंगलुरु के डीसीपी मोहम्मद सुजीथा के नेतृत्व में पुलिस टीम ने बच्ची के माता-पिता और वीडियो में दिख रहे दूसरे शिशु के परिजनों से भी पूछताछ की. वीडियो में ‘लिटिल स्कॉलर्स’ डे-केयर सेंटर की आया छोटे बच्चों के साथ सख्ती और दुर्व्यवहार करती नजर आ रही हैं. एक वीडियो में एक छोटी बच्ची बाथरूम में बंद होकर रोते हुए “अम्मा… अम्मा…” पुकारती दिख रही है. बच्ची की मां ने पुलिस को बताया कि इस घटना के बाद उनकी बेटी को बाथरूम और टॉयलेट से बहुत डर लगने लगा है. बाथरूम और टॉयलेट के नाम से डरने लगे हैं शिशु बच्ची के माता-पिता ने जांच कर रहे पुलिस अधिकारियों को बताया कि डे-केयर में दाखिले के कुछ ही समय बाद उसकी आदतें बदलने लगी थीं. वह बाथरूम या टॉयलेट जाने से मना कर देती थी और वहां का नाम सुनते ही रोने लगती थी. नहलाने या टॉयलेट ले जाने पर भी वह कमरे से बाहर भागने की कोशिश करती थी. माता-पिता ने बताया कि पहले उन्हें इसकी वजह समझ नहीं आई, लेकिन वायरल वीडियो देखने के बाद उन्हें पता चला कि बच्ची को बार-बार बाथरूम में बंद किया जाता था. उनका मानना है कि इसी कारण उसके मन में बाथरूम और टॉयलेट का गहरा डर बैठ गया. यह भी पढ़ें : बेंगलुरु : IT कंपनी के डेकेयर में बच्चों से दुर्व्यवहार, रोने पर बच्चों को वाशिंग मशीन और बाथरूम में किया जाता था बंद बच्चों को फ्रंट-लोडिंग वॉशिंग मशीन के अंदर डाल दिया जाता था पुलिस के मुताबिक, वायरल वीडियो में दिख रहा है कि जब दो से तीन साल के शिशु रोते या शोर करते थे, तो उनकी देखभाल करने वाली स्त्रीएं उन्हें डराती-धमकाती थीं. आरोप है कि बच्चों को फ्रंट-लोडिंग वॉशिंग मशीन के अंदर डाल दिया जाता था, जबरन वेस्टर्न टॉयलेट पर बैठाया जाता था, उनके मुंह में जेट स्प्रे से पानी डाला जाता था. इतना ही नहीं उन्हें बाथरूम में बंद कर चुप रहने के लिए धमकाया जाता था. The post बेंगलुरु डे-केयर कांड: बच्चों के मन में बैठ गया बाथरूम का डर, नहलाने की बात सुन भागते हैं शिशु appeared first on Naya Vichar.

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Prashant Kishor : दूसरों की सरकार बनाने वाले PK, बांकीपुर उपचुनाव में क्या साबित करना चाहते हैं?

Prashant Kishor : नेतृत्व में चर्चा, खर्चा और परचा का बहुत महत्त्व होता है. परचा और खर्चा तो खैर वक्त की बात है, फिलहाल चर्चा है की प्रशांत किशोर का बांकीपुर से चुनाव लड़ना लगभग तय है. शनिवार 4 जुलाई को जन सुराज पार्टी की कोर कमेटी की बैठक होनी है और फिर इस चर्चे के ऊपर मुहर लग सकती है. चुनाव आयोग की तरफ से कि 30 जुलाई को बिहार की बांकीपुर विधानसभा सीट पर उपचुनाव के लिए मतदान होगा. तो सवाल ये है की क्या प्रशांत किशोर को आत्मबोध हो गया है? बांकीपुर से चुनाव लड़कर वह गलती सुधारी जा रही है जो 2025 चुनाव में ना लड़ कर उन्होंने की थी? Prashant Kishor : दूसरों की प्रशासन बनाते-बनाते, अब अपनी नेतृत्व चमकाने की बारी? तमिलनाडु में चुनावी रणनीति बनाकर मुख्यमंत्री को जीत दिलाने के बाद अब लगता है कि प्रशांत किशोर ने अपनी ही नेतृत्वक ब्रांडिंग का प्रोजेक्ट हाथ में ले लिया है. वर्षों तक वे दूसरों की चुनावी नैया पार लगाते रहे, कभी नरेंद्र मोदी, कभी ममता बनर्जी, कभी अरविंद केजरीवाल, तो हाल के दिनों में तमिलनाडु की नेतृत्व में भी उनकी भूमिका चर्चा में रही. लेकिन सवाल हमेशा यही पूछा जाता रहा कि जो व्यक्ति दूसरों को जीत दिलाने का दावा करता है, वह खुद चुनाव जीतकर क्यों नहीं दिखाता? शायद इसी सवाल का जवाब देने के लिए प्रशांत किशोर ने बिहार की सबसे चर्चित सीटों में से एक बांकीपुर को चुना है. यह सिर्फ एक उपचुनाव नहीं, बल्कि उनकी अपनी नेतृत्वक विश्वसनीयता की परीक्षा भी है. क्या 2025 की गलती अब सुधारी जा रही है? 2025 के विधानसभा चुनाव में जन सुराज ने लगभग पूरे बिहार में उम्मीदवार उतारे, लेकिन पार्टी का खाता तक नहीं खुल सका. उससे भी बड़ा सवाल यह उठा कि बदलाव की नेतृत्व की बात करने वाले प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान से दूर क्यों रहे? आलोचकों ने इसे उनकी सबसे बड़ी नेतृत्वक भूल बताया. अब अगर वे बांकीपुर से चुनाव लड़ते हैं, तो इसे उसी गलती को सुधारने की कोशिश के तौर पर भी देखा जा रहा है. फर्क सिर्फ इतना है कि इस बार उन्होंने कोई आसान सीट नहीं, बल्कि बीजेपी के सबसे मजबूत गढ़ों में से एक को चुना है. बांकीपुर : सिर्फ एक सीट नहीं, बीजेपी की प्रतिष्ठा है बांकीपुर (पूर्व में पटना वेस्ट) का नेतृत्वक इतिहास इसे सामान्य विधानसभा सीट नहीं रहने देता. पहले नवीन सिन्हा और फिर उनके बेटे नितिन नवीन पिछले लगभग तीन दशकों से यहां बीजेपी का झंडा बुलंद करते रहे हैं. नितिन नवीन अब बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन चुके हैं और राज्यसभा चले गए हैं, जिसके बाद यह सीट खाली हुई है. ऐसे में यह चुनाव सिर्फ विधायक चुनने का नहीं, बल्कि नितिन नवीन की नेतृत्वक साख की भी परीक्षा माना जा रहा है. उम्मीदवार कोई भी हो, लेकिन नेतृत्वक संदेश यही जाएगा कि लड़ाई आखिरकार नितिन नवीन के प्रभाव की है. पीके का निशाना सिर्फ बीजेपी नहीं है अगर प्रशांत किशोर चाहते, तो किसी अपेक्षाकृत आसान सीट से चुनाव लड़ सकते थे. लेकिन बांकीपुर चुनने के पीछे उनकी रणनीति कहीं बड़ी दिखाई देती है. वे जानते हैं कि अगर बीजेपी के सबसे सुरक्षित किले में सेंध लगती है, तो उसका संदेश बिहार ही क्या देश भर में जाएगा. एक तरफ जहां विपक्ष के एक-एक क्षत्रप जैसे ममता, स्टालिन और केजरीवाल धराशायी हो गए है, यह जीत पीके को विपक्ष की राजनीती में नया आयाम दे सकती है.  यही वजह है कि वे इस उपचुनाव को सिर्फ स्थानीय मुकाबला नहीं, बल्कि प्रशासन के वादों पर जनमत संग्रह बता रहे हैं. रोजगार, पलायन, शिक्षा और युवाओं के भविष्य जैसे मुद्दों को सामने रखकर वे प्रशासन विरोधी माहौल को अपने पक्ष में मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही वे यह भी याद दिला रहे हैं कि लोगों ने वोट नीतीश कुमार के चेहरे पर दिया था, लेकिन बाद में नेतृत्व बदल गया. इसी मुद्दे को वे जनता के विश्वास से जोड़ रहे हैं. 2025 की बिहार चुनाव पर मेरी पुस्तक यहां पढ़ें   इतिहास बताता है, गढ़ भी ढहते हैं हिंदुस्तानीय नेतृत्व में ऐसे कई उदाहरण हैं जब सबसे मजबूत माने जाने वाले गढ़ भी उपचुनाव में ढह गए. 2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद गोरखपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा था. इसलिए सिर्फ किसी सीट का इतिहास जीत की गारंटी नहीं होता. शायद यही गणित प्रशांत किशोर भी लगा रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि प्रशासन से नाराज मतदाता, खासकर युवा, इस चुनाव को एक संदेश देने के अवसर के रूप में देख सकते हैं. हार में नुकसान कम, जीत में फायदा बड़ा बेशक, बांकीपुर का सामाजिक और चुनावी गणित आज भी बीजेपी के पक्ष में माना जाता है. जन सुराज की संगठनात्मक ताकत भी अभी उस स्तर पर नहीं है कि मुकाबला आसान हो जाए. लेकिन नेतृत्वक दृष्टि से देखें तो इस चुनाव में प्रशांत किशोर के पास खोने के लिए अपेक्षाकृत कम और पाने के लिए बहुत कुछ है. अगर वे हारते हैं, तो कहा जाएगा कि बीजेपी के गढ़ में हारना अस्वाभाविक नहीं था. लेकिन अगर वे जीत जाते हैं, तो यह सिर्फ एक सीट की जीत नहीं होगी. यह उनकी नेतृत्वक स्वीकार्यता की पहली बड़ी मुहर होगी. जन सुराज को पहली विधानसभा सीट मिलेगी और प्रशांत किशोर पहली बार बिहार विधानसभा में एक प्रभावी विपक्षी चेहरे के रूप में स्थापित हो सकते हैं. अंतिम सवाल और विशेषज्ञों की राय इसलिए बांकीपुर का यह उपचुनाव दो उम्मीदवारों के बीच का सामान्य मुकाबला नहीं है. एक तरफ बीजेपी अपने सबसे प्रतिष्ठित नेतृत्वक किले को बचाने की कोशिश करेगी, तो दूसरी तरफ प्रशांत किशोर यह साबित करना चाहेंगे कि वे सिर्फ चुनावी रणनीतिकार नहीं, बल्कि जनता का चुनाव जीतने वाले नेता भी बन सकते हैं. अब देखना यह है कि बांकीपुर उनके लिए नेतृत्वक सेल्फ गोल साबित होता है या फिर यही सीट उनके लंबे नेतृत्वक सफर की पहली बड़ी जीत और नया टर्निंग पॉइंट बन जाती है. इस मुद्दे पर जाने-माने नेतृत्वक विश्लेषक नरेंद्र कुमार का मानना ​​है कि NDA जीतेगी, लेकिन मुकाबला कड़ा होगा. बांकीपुर (जिसे पहले पटना वेस्ट के नाम से जाना जाता था)

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वृषभ साप्ताहिक राशिफल 5 से 11 जुलाई तक: इस सप्ताह सफलता के साथ मिलेगी आर्थिक मजबूती

Vrishabh Saptahik Rashifal, वृषभ राशि: इस सप्ताह आपके जीवन में परिवार का सहयोग, आर्थिक लाभ के नए अवसर और कार्यक्षेत्र में चुनौतियों के बीच सफलता के संकेत हैं. हालांकि स्वास्थ्य और रिश्तों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी होगी. जानिए इस सप्ताह का पूरा राशिफल, लकी अंक, शुभ रंग और प्रभावी उपाय. पारिवारिक जीवन इस सप्ताह घर-परिवार में मेलजोल और सकारात्मक माहौल बना रहेगा. सामाजिक कार्यों में हिस्सा लेने से समाज में आपकी साख और जुड़ाव बढ़ेगा. प्राकृतिक स्थलों की यात्रा की योजना बन सकती है, जो पूरे परिवार को मानसिक शांति और ऊर्जा प्रदान करेगी. व्यापार और नौकरी कार्यक्षेत्र में अपनी वर्तमान स्थिति को बनाए रखना आपके लिए एक बड़ी चुनौती साबित हो सकता है. आपके विरोधी बहुत सक्रिय रहेंगे, लेकिन आपके प्रभावशाली व्यक्तित्व और विवेकपूर्ण निर्णयों के आगे उनकी सारी चालें असफल होंगी. करियर और शिक्षा इस दौरान दिखावे और आडंबर से पूरी तरह दूरी बनाए रखें. दूसरों की नकल करने या अनावश्यक प्रतिस्पर्धा में फंसने से बचें. छात्रों को अपनी सादगी और सहजता पर ध्यान देना चाहिए, क्योंकि यही आपकी सबसे बड़ी ताकत साबित होगी. स्वास्थ्य इस सप्ताह सेहत को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज न करें. फेफड़ों से संबंधित समस्याएं परेशानी का कारण बन सकती हैं. सांस लेने या एलर्जी से जुड़े लक्षणों को हल्के में न लें, समय रहते डॉक्टरी सलाह अवश्य लें. आर्थिक स्थिति आर्थिक दृष्टिकोण से सप्ताह लाभदायक रहेगा. नई आय के स्रोत सामने आ सकते हैं. इस दौरान अचानक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना भी बनी हुई है, जिससे आपकी आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी. प्रेम जीवन रिश्तों में संतुलन बनाए रखने के लिए आपको थोड़ा झुकना पड़ सकता है. आपका स्वभाव अकसर अड़ियल रहता है, लेकिन प्रेम संबंधों को बचाने और तालमेल बनाने के लिए समझदारी व लचीलापन दिखाना जरूरी होगा. लकी अंक: 1, 7लकी रंग: भूरा, हरा उपाय घर के पास स्थित मंदिर में जाकर भगवान गणेश को भोग अर्पित करें और पंडित से विधिपूर्वक पूजन कराएं. बाद में प्रसाद गरीबों में वितरित करें, इससे बाधाएं दूर होंगी और सुख-शांति बनी रहेगी. The post वृषभ साप्ताहिक राशिफल 5 से 11 जुलाई तक: इस सप्ताह सफलता के साथ मिलेगी आर्थिक मजबूती appeared first on Naya Vichar.

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खामेनेई की अंतिम विदाई शुरू, 9 को होंगे सुपुर्द- ए- खाक, अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं हजारों लोग

Khamenei’s final farewell : ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत हो गई है. छह दिन तक चलने वाले इस कार्यक्रम में करीब दो करोड़ लोगों के शामिल होने की उम्मीद है. तेहरान में उमड़ा जनसैलाब ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत शनिवार ( 4 जुलाई ) से तेहरान में हो गई. राजधानी के ग्रैंड मोसल्ला में हजारों लोग सुबह से ही अंतिम दर्शन के लिए पहुंचने लगे. ईरानी प्रशासन का दावा है कि अगले तीन दिनों में 1.5 से 2 करोड़ लोग अंतिम यात्रा में शामिल हो सकते हैं. यह 1989 में अयातुल्ला रुहोल्ला खोमैनी के अंतिम संस्कार के बाद देश का सबसे बड़ा जनसमूह माना जा रहा है. Scenes from the Funeral Prayer Ceremony for Iran’s Supreme Leader Ayatollah Ali Khamenei During the ceremony, Iran’s Foreign Minister Abbas Araghchi and the Speaker of the Iranian Parliament, Mohammad Bagher Ghalibaf, were moved to tears. pic.twitter.com/2YCkPBmsDX — Iran Updates🚨 (@IranUpdatesNow) July 3, 2026 4 जुलाई की तारीख बनी चर्चा का विषय खामेनेई के अंतिम संस्कार की शुरुआत 4 जुलाई को हुई, जो अमेरिका के स्थापना दिवस की 250वीं वर्षगांठ भी है. हालांकि ईरान ने आधिकारिक तौर पर इसे प्रतीकात्मक नहीं बताया, लेकिन समारोह के दौरान “डेथ टू अमेरिका” और “बदला-बदला” जैसे नारे गूंजते रहे. इससे इस तारीख को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा तेज हो गई है. छह दिन तक चलेगा अंतिम संस्कार खामेनेई अंतिम संस्कार का कार्यक्रम 4 से 9 जुलाई तक चलेगा. 4 और 5 जुलाई को तेहरान में आम लोग अंतिम दर्शन करेंगे। 6 जुलाई को राजधानी में अंतिम यात्रा निकाली जाएगी. इसके बाद 7 जुलाई को पार्थिव शरीर कोम ले जाया जाएगा, 8 जुलाई को इराक के नजफ और कर्बला में श्रद्धांजलि दी जाएगी और 9 जुलाई को उनके गृह नगर मशहद में दफनाया जाएगा. नई नेतृत्व पर दुनिया की नजर इस पूरे कार्यक्रम के दौरान नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई पर भी सबकी नजर बनी हुई है. माना जा रहा है कि वह अपने पिता की मौत के बाद पहली बार बड़े सार्वजनिक कार्यक्रम में दिखाई दे सकते हैं. हालांकि, उनकी सेहत को लेकर अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है. दुनिया भर के नेताओं ने दी श्रद्धांजलि खामेनेई की अंतिम विदाई में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, विदेश मंत्री अब्बास अराघची सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ, रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव और हमास, हिज्बुल्लाह तथा तालिबान के प्रतिनिधियों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित की. हिंदुस्तान की ओर से केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा और बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन शामिल हुए. नन्ही पोती का ताबूत देख भावुक हुए लोग समारोह का सबसे भावुक दृश्य तब देखने को मिला जब खामेनेई के ताबूत के साथ उनके परिवार के उन सदस्यों के ताबूत भी रखे गए, जिनकी हालिया हमले में मौत हुई थी. इनमें उनकी बड़ी बेटी, दामाद, नए सर्वोच्च नेता की पत्नी और सिर्फ 14 महीने की पोती का छोटा ताबूत भी शामिल था. इस दृश्य को देखकर कई लोग भावुक होकर रो पड़े. कड़ी सुरक्षा और बदले की चेतावनी तेहरान में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं. कई सड़कें बंद कर दी गई हैं और भीड़ को नियंत्रित करने के लिए विशेष व्यवस्था की गई है. इस बीच संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा कि “शहीद नेता के खून का बदला पूरी दुनिया सुनेगी.” वहीं सेना प्रमुख अमीर हातामी ने अमेरिका और इजराइल को चेतावनी देते हुए कहा कि ईरान जरूरत पड़ने पर फिर से जवाब देने के लिए तैयार है. यह भी पढ़ें- ईरान के वार्ताकारों की हत्या की साजिश, इजराइल ने रिपोर्ट को बताया ‘फेक न्यूज’ The post खामेनेई की अंतिम विदाई शुरू, 9 को होंगे सुपुर्द- ए- खाक, अंतिम दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं हजारों लोग appeared first on Naya Vichar.

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तेल लगाते समय न करें ये 5 गलतियां, वरना तेजी से बढ़ सकता है हेयर फॉल

Hair Oiling Mistakes: बालों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए तेल लगाना एक पुरानी और असरदार आदत मानी जाती है. लेकिन कई बार लोग तेल तो लगाते हैं, फिर भी बाल झड़ने की समस्या कम नहीं होती. इसकी एक बड़ी वजह तेल लगाने का गलत तरीका भी हो सकता है. अगर आप भी बालों में तेल लगाते हैं, तो कुछ सामान्य गलतियों से बचना जरूरी है. आइए जानते हैं ऐसी 5 गलतियां, जो हेयर फॉल बढ़ाने का कारण बन सकती हैं. 1. बहुत ज्यादा तेल लगाना (Hair Oiling Mistakes) कई लोगों को लगता है कि जितना ज्यादा तेल लगाएंगे, बाल उतने ही मजबूत होंगे. जबकि जरूरत से ज्यादा तेल लगाने से स्कैल्प पर धूल और गंदगी जल्दी चिपकने लगती है. इससे बालों की जड़ें प्रभावित हो सकती हैं और स्कैल्प की सफाई भी मुश्किल हो जाती है. बालों की लंबाई और घनत्व के हिसाब से ही तेल लगाना बेहतर माना जाता है. PC: AI Generated 2. बहुत जोर से मसाज करना तेल लगाते समय तेज दबाव के साथ मसाज करना भी सही नहीं है. कई लोग नाखूनों से सिर खुजलाते हुए या जोर-जोर से रगड़ते हुए तेल लगाते हैं, जिससे बाल टूट (Hair Oiling Mistakes) सकते हैं और स्कैल्प में जलन भी हो सकती है. हमेशा उंगलियों के पोरों से हल्के हाथों से गोलाई में मसाज करें. 3. कई दिनों तक तेल लगाकर छोड़ देना कुछ लोग एक बार तेल लगाने के बाद उसे दो से तीन दिन तक नहीं धोते. इससे स्कैल्प पर तेल, पसीना और धूल जमा हो सकती है, जो खुजली, डैंड्रफ और बाल झड़ने जैसी समस्याओं को बढ़ा सकती है. आमतौर पर कुछ घंटों बाद या रातभर तेल लगाकर अगली सुबह बाल धोना बेहतर माना जाता है. 4. गंदे बालों में बार-बार तेल लगाना अगर स्कैल्प पहले से ही गंदा है और उस पर बार-बार तेल लगाया जाए, तो रोमछिद्र बंद (Hair Oiling Mistakes) हो सकते हैं. इससे स्कैल्प की सफाई प्रभावित होती है और बाल कमजोर पड़ सकते हैं. इसलिए जरूरत पड़ने पर पहले बालों को साफ करें और फिर तेल लगाएं. PC: AI Generated 5. हर किसी के लिए एक ही तेल इस्तेमाल करना हर इंसान के बाल और स्कैल्प की जरूरत अलग होती है. किसी को नारियल का तेल सूट करता है, तो किसी को बादाम, तिल या आंवले वाला तेल. सिर्फ दूसरों की सलाह देखकर कोई भी तेल इस्तेमाल करने के बजाय अपनी जरूरत और बालों के प्रकार के अनुसार तेल चुनना बेहतर होता है. अगर स्कैल्प से जुड़ी कोई समस्या है, तो एक्सपर्ट की सलाह लेना भी सही रहेगा. बालों में तेल लगाने का सही तरीका तेल को हल्का गुनगुना करके लगाने से वह आसानी से स्कैल्प तक पहुंच सकता है. उंगलियों के पोरों से धीरे-धीरे मसाज करें और जरूरत के हिसाब से ही तेल लगाएं. इसके बाद समय पर हल्के शैंपू से बाल धो लें. साथ ही संतुलित आहार, पर्याप्त पानी और अच्छी नींद भी बालों की सेहत के लिए उतनी ही जरूरी है. यह भी पढ़ें: बारिश के दिनों में अचानक बढ़ जाता है बालों का झड़ना? टेंशन लेने की जरूरत नहीं, अपनाएं ये सिंपल हेयर केयर टिप्स The post तेल लगाते समय न करें ये 5 गलतियां, वरना तेजी से बढ़ सकता है हेयर फॉल appeared first on Naya Vichar.

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प्रेमानंद जी महाराज: घर हो या बाहर, खाना खाने से पहले बस कर लें ये एक काम, होगा कल्याण 

Premanand Ji Maharaj: हिंदुस्तान के प्रसिद्ध हिंदू आध्यात्मिक गुरु और संत प्रेमानंद जी महाराज ने प्रतिदिन भोजन करने से पहले श्रद्धापूर्वक भगवान को भोग लगाने की सलाह दी है. महाराज का कहना है कि सच्चे मन से भगवान को भोग लगाने से व्यक्ति का कल्याण होता है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. इसलिए भगवान को भोग लगाए बिना भोजन नहीं करना चाहिए. View this post on Instagram A post shared by Bhajan Marg Official (@bhajanmarg_official) बाहर खाना खाते समय भोग कैसे लगाएं? प्रेमानंद जी महाराज ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति घर से बाहर भोजन कर रहा हो और भगवान को प्रत्यक्ष रूप से भोग नहीं लगा सकता हो, तो ऐसी स्थिति में मानसिक रूप से भोग लगाना चाहिए. महाराज के अनुसार, जब आपके सामने भोजन परोसा जाए, तो उसे ग्रहण करने से पहले हाथ जोड़कर भगवान का स्मरण करें. मन ही मन भगवान को इस भोजन के लिए धन्यवाद दें और कहें, “प्रभु, आपकी कृपा से मुझे यह भोजन प्राप्त हुआ है. मैं इसे आपको अर्पित करता हूं.” इसके बाद भगवान का जयकारा लगाकर श्रद्धापूर्वक भोजन ग्रहण करें. भोजन तामसिक हो तो क्या करें? प्रेमानंद जी महाराज ने बताया कि भगवान को कभी भी तामसिक भोजन का भोग नहीं लगाना चाहिए. यदि भोजन में प्याज, लहसुन, मांस, मछली, अंडा या अन्य तामसिक पदार्थ शामिल हों, तो उसका मानसिक भोग भी भगवान को नहीं लगाना चाहिए. इसे उचित नहीं माना जाता है. भगवान को हमेशा सात्विक भोजन ही अर्पित करना चाहिए. यह भी पढ़ें: Vastu Tips: हाथ में नहीं टिकता पैसा? घर में रखी ये चीजें हो सकती हैं इसकी वजह The post प्रेमानंद जी महाराज: घर हो या बाहर, खाना खाने से पहले बस कर लें ये एक काम, होगा कल्याण  appeared first on Naya Vichar.

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25 साल पहले हुई थी पहली मुलाकात, 5 जुलाई को बनेंगी आमिर खान की तीसरी वाइफ, जानें कैसे शुरू हुई लवस्टोरी

Aamir Khan Gauri Spratt Love Story: 25 साल पहले आमिर खान और गौरी स्प्रैट की मुलाकात बेंगलुरु में हुई थी. फिर दोनों अपनी लाइफ में बिजी हो गए, लेकिन किस्मत ने फिर उन्हें मिलवा दिया. इस बार स्टार्स ने एक दूसरे से दोस्ती की. फिर बातचीत के दौरान उन्हें प्यार हो गया और अब 5 जुलाई को आमिर और गौरी शादी करने जा रहे हैं. Aamir Khan Gauri Kept Their Relationship Secret: आमिर खान-गौरी ने अपने रिश्ते को रखा था सीक्रेट शुरुआत में आमिर और गौरी ने अपने रिश्ते को मीडिया लाइमलाइट से दूर रखा. दुनिया को उनके रिश्ते के बारे में तब पता चला, जब आमिर ने अपने 60वें जन्मदिन के मौके पर पहली बार गौरी को ऑफिशियल तौर पर मिलवाया. उन्होंने कहा था कि सही मौका है, जब सभी गौरी से मिलें. Aamir khan gauri spratt Aamir Khan On love story with Gauri: गौरी संग अपनी लवस्टोरी पर क्या बोले थे आमिर खान गौरी संग अपनी लवस्टोरी पर आमिर खान ने एक इंटरव्यू में कहा था कि अब वह पहले से ज्यादा मैच्योर और सुकून भरी जिंदगी जी रहे हैं. गौरी उनकी जिंदगी में शांति और खुशियां लेकर आई हैं. आमिर ने आगे कहा कि रीना दत्ता और किरण राव से भी रिश्ता मजबूत था, लेकिन वक्त के साथ चीजें बदल गई. वहीं गौरी के साथ उन्हें ऐसा महसूस होता है कि अब उनकी जिंदगी पूरी हो गई है. Aamir khan kiran rao Aamir Khan Confirms Marriage: आमिर खान ने शादी की कंफर्म आमिर खान ने 3 जुलाई को मीडिया संग बातचीत में कंफर्म किया था, ”हां, मेरी शादी 5 जुलाई को हो रही है. बहुत छोटी-सी शादी है, घर पर ही करेंगे.” उन्होंने सभी से उनकी प्राइवेसी का सम्मान करने और नए सफर के लिए दुआएं देने की अपील भी की. यह आमिर खान की तीसरी शादी होगी. उन्होंने पहली शादी 1986 में रीना दत्ता से की थी, जिनसे उनके दो शिशु जुनैद और ईरा खान है. साल 2002 में उनका तलाक हो गया. साल 2005 में आमिर ने किरण राव से शादी की. साल 2021 में दोनों ने अलग होने का फैसला लिया. दोनों का बेटा आजाद राव है. यह भी पढ़ें- कितनी अमीर हैं आमिर खान की होने वाली पत्नी, जानें गौरी स्प्रैट की नेटवर्थ यह भी पढ़ें- पता नहीं डिटेल्स कैसे हुई लीक, गौरी स्प्रैट संग शादी की चर्चाओं पर बोले आमिर खान The post 25 साल पहले हुई थी पहली मुलाकात, 5 जुलाई को बनेंगी आमिर खान की तीसरी वाइफ, जानें कैसे शुरू हुई लवस्टोरी appeared first on Naya Vichar.

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500 शहरों की बदलने वाली है तस्वीर, क्या अब यहीं मिलेंगी नौकरी और कमाई के मौके?

Middle Class Growth: अगर आप किसी छोटे शहर में रहते हैं और अक्सर सोचते हैं कि अच्छी नौकरी या बेहतर कमाई के लिए बड़े शहर जाना ही पड़ेगा, तो आने वाले सालों में यह सोच बदल सकती है. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को फ्रांस में आयोजित एक आर्थिक सम्मेलन में कहा कि हिंदुस्तान के करीब 500 शहर आने वाले समय में नए आर्थिक केंद्र (Economic Hubs) बन सकते हैं. यानी रोजगार, कारोबार और निवेश के मौके अब सिर्फ मेट्रो शहरों तक सीमित नहीं रहेंगे. उन्होंने बताया कि आज हिंदुस्तान की करीब 31% आबादी मिडिल क्लास है और यही वर्ग देश की वित्तीय स्थिति को सबसे ज्यादा गति दे रहा है. क्या अब छोटे शहरों में भी बढ़ेंगे मौके? आज भी लाखों लोग बेहतर नौकरी और करियर के लिए अपने शहर छोड़कर दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु या पुणे जैसे शहरों का रुख करते हैं. लेकिन प्रशासन का मानना है कि आने वाले वर्षों में टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी तेजी से विकास होगा. अगर ऐसा होता है तो लोगों को अपने ही शहर के आसपास बेहतर नौकरी, बिजनेस और कमाई के अवसर मिल सकते हैं. इससे बड़े शहरों पर दबाव भी कम होगा और छोटे शहरों की वित्तीय स्थिति भी मजबूत होगी. मिडिल क्लास को क्यों कहा गया देश का असली इंजन? वित्त मंत्री ने कहा कि मिडिल क्लास सिर्फ विकास का फायदा उठाने वाला वर्ग नहीं है, बल्कि वही विकास को आगे बढ़ा रहा है. आसान भाषा में समझें तो जब लोग घर खरीदते हैं, बच्चों की पढ़ाई पर खर्च करते हैं, गाड़ी लेते हैं, यात्रा करते हैं या रोजमर्रा की खरीदारी करते हैं, तो बाजार में पैसा घूमता है और कारोबार बढ़ता है. यही वजह है कि हिंदुस्तान में होने वाले करीब 93% खर्च मिडिल क्लास और थोड़ा अधिक आय वाले परिवारों से आता है. एक नजर में बड़ी बातें मुद्दा जानकारी हिंदुस्तान की मिडिल क्लास आबादी 31% हर साल बढ़ने की रफ्तार 6.3% कुल खर्च में हिस्सेदारी करीब 93% नए आर्थिक केंद्र लगभग 500 शहर MSME का निर्यात में योगदान करीब 40% प्रशासन क्या कर रही है? मिडिल क्लास को मजबूत बनाने के लिए प्रशासन कई कदम उठा रही है. इनमें शामिल हैं— आसान बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं GST में राहत और बदलाव बिना गारंटी वाले लोन प्रधानमंत्री आवास योजना छोटे कारोबार और MSME को बढ़ावा इन योजनाओं का मकसद लोगों की आय बढ़ाना और नए रोजगार के अवसर तैयार करना है. AI से डरने की नहीं, सीखने की जरूरत? आज कई लोगों को लगता है कि AI आने से नौकरियां कम हो जाएंगी. इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि प्रशासन देशभर में AI स्किलिंग प्रोग्राम चला रही है ताकि लोग नई तकनीक सीखकर बेहतर अवसर हासिल कर सकें. उन्होंने बताया कि हिंदुस्तान के करीब 40% एक्सपोर्ट में MSME का योगदान है और ये छोटे उद्योग भी तेजी से AI का इस्तेमाल कर रहे हैं. ऐसे में आने वाले समय में AI की जानकारी रखने वाले लोगों की मांग और बढ़ सकती है. ये भी पढ़ें: 8th Pay Commission : भुवनेश्वर में शुरू होगी अहम बैठक, सैलरी, पेंशन और HRA पर क्या होगा फैसला The post 500 शहरों की बदलने वाली है तस्वीर, क्या अब यहीं मिलेंगी नौकरी और कमाई के मौके? appeared first on Naya Vichar.

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