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Author name: Vinod Jha

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‘बेटा मिलने तक नहीं हटेंगे’… प्रेमानंद महाराज के आश्रम के बाहर 3 महीने से लापता अनुज के लिए परिवार का धरना

UP News: तीन महीने से बेटे का इंतजार कर रहे हाथरस के एक परिवार की बेचैनी अब वृंदावन तक पहुंच गई है. 16 वर्षीय अनुज चौधरी के लापता होने से परेशान माता-पिता और ग्रामीण केली कुंज आश्रम के बाहर धरने पर बैठ गए. परिवार का दावा है कि अनुज दीक्षा लेने के बाद से घर नहीं लौटा है. वहीं, आश्रम की ओर से परिजनों को हर संभव सहयोग का भरोसा दिया गया है. तीन महीने से नहीं मिला अनुज हाथरस के सादाबाद कोतवाली क्षेत्र के बारामई खेड़ा गांव निवासी राजवीर सिंह का 16 वर्षीय बेटा अनुज चौधरी करीब तीन महीने से लापता है. परिवार के अनुसार, अनुज अपनी ननिहाल पानीगांव आता-जाता था. इसी दौरान वह वृंदावन में प्रेमानंद महाराज के दर्शन के लिए जाने लगा. बाद में उसने दीक्षा लेने की इच्छा जताई और परिवार के मुताबिक, करीब तीन महीने पहले दीक्षा ली. आश्रम के बाहर बैठे परिजन अनुज के वापस नहीं लौटने पर परिजन शुक्रवार को ग्रामीणों के साथ वृंदावन स्थित केली कुंज आश्रम पहुंचे. परिवार ने आश्रम से अनुज को सामने लाने की मांग की. काफी देर तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिलने पर परिजन आश्रम के बाहर धरने पर बैठ गए. धरने में अनुज के माता-पिता, दादी, चार बहनें, चाचा और गांव के अन्य लोग शामिल रहे. परिवार का कहना है कि बेटा मिलने तक वे वहां से नहीं जाएंगे. पुलिस ने आश्रम में की पूछताछ हंगामे की सूचना मिलने पर सीओ वृंदावन संदीप सिंह और कोतवाली प्रभारी अश्वनी कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. पुलिस ने परिजनों से पूरे मामले की जानकारी ली. इसके बाद अधिकारी आश्रम के अंदर गए और अनुज से जुड़े रिकॉर्ड और जानकारी जुटाई. आश्रम की ओर से आए एक साधक ने परिवार को बताया कि अनुज की फोटो सेवादारों के अलग-अलग ग्रुप में साझा की गई थी. गुरु पूर्णिमा के दौरान बड़ी संख्या में शिष्य आए थे और अनुज के वहां मौजूद होने की बात भी कही गई. साधक ने परिवार को रिकॉर्ड और वीडियो दिखाने की बात कहते हुए आगे भी सहयोग का भरोसा दिया. हाथरस में पहले से दर्ज है मुकदमा पुलिस के अनुसार, अनुज के लापता होने के मामले में हाथरस के सादाबाद में मुकदमा दर्ज है. सीओ वृंदावन ने बताया कि केली कुंज आश्रम के दीक्षा संबंधी रिकॉर्ड की जांच की जा रही है. वहीं, अनुज की दादी मुन्नी का आरोप है कि वह दर्शन के लिए आश्रम आया था, लेकिन इसके बाद वापस घर नहीं लौटा. परिवार का कहना है कि उन्हें अब तक अनुज के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है. इसी वजह से वे आश्रम के बाहर धरने पर बैठे हैं. Also Read: गांधी जयंती पर यूपी वालों को बड़ा तोहफा, खादी खरीदने पर मिलेगी 25% छूट, CM योगी ने किया ऐलान; जानें कब तक उठाएं फायदा The post ‘बेटा मिलने तक नहीं हटेंगे’… प्रेमानंद महाराज के आश्रम के बाहर 3 महीने से लापता अनुज के लिए परिवार का धरना appeared first on Naya Vichar.

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भाजपा जिलाध्यक्ष पर दुष्कर्म का आरोप: बलिया की महिला पदाधिकारी बोली- वीडियो वायरल करने की धमकी देकर किया शोषण

UP News: उत्तर प्रदेश के बलिया में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी की एक स्त्री पदाधिकारी ने पार्टी के जिला अध्यक्ष समेत कई लोगों पर वीडियो बनाकर धमकाने, शोषण करने और दुष्कर्म करने के गंभीर आरोप लगाए हैं. स्त्री का दावा है कि आरोपियों ने कथित वीडियो वायरल करने की धमकी देकर उसे लंबे समय तक डराया-धमकाया. जब उसने विरोध किया तो कथित वीडियो वायरल कर दिया गया. स्त्री ने बातचीत में खुद को भाजपा जिला कार्यसमिति की सदस्य बताया है. उसका आरोप है कि घटना के बाद उसने स्थानीय कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए कई दिनों तक प्रयास किया, लेकिन उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई. बाद में उच्च अधिकारियों से शिकायत के बाद प्राथमिकी दर्ज होने का दावा किया गया है. वीडियो बनाकर धमकाने का लगाया आरोप स्त्री के मुताबिक, संजय मिश्रा, आलोक सिंह मोनू, गणेश गुप्ता और अजीत मिश्रा चंदन समेत कुछ लोगों ने उसका कथित वीडियो बनाया. उसका आरोप है कि इसी वीडियो को वायरल करने की धमकी देकर उसके साथ शोषण किया गया. स्त्री ने दावा किया कि जब उसने आरोपित लोगों का विरोध किया और आगे ऐसा करने से मना किया तो कथित वीडियो वायरल कर दिया गया. इसके बाद उसने पुलिस से शिकायत की. 15 दिन तक थाने के चक्कर लगाने का दावा स्त्री का कहना है कि वह प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए करीब 15 दिनों तक कोतवाली के चक्कर लगाती रही, लेकिन उसकी शिकायत दर्ज नहीं की गई. उसका आरोप है कि भाजपा जिला अध्यक्ष के प्रभाव के कारण उसकी एफआईआर रोकी गई. स्त्री के अनुसार, बाद में उसने उच्च अधिकारियों से शिकायत की, जिसके बाद मामला दर्ज हुआ. उसका यह भी दावा है कि प्राथमिकी में उसके द्वारा बताए गए कुछ नाम शामिल नहीं किए गए या धाराएं हल्की रखी गईं. स्त्री का कहना है कि उसने अपने बयान और शपथ पत्र के माध्यम से पुलिस के सामने अपनी बात रखी है. जिलाध्यक्ष पर क्या आरोप लगाए? स्त्री ने भाजपा जिला अध्यक्ष संजय मिश्रा पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पार्टी कार्यालय में कथित तौर पर स्त्रीओं का शोषण किया जाता है. उसने मानसिक, आर्थिक और शारीरिक शोषण के आरोप भी लगाए. हालांकि, ये सभी स्त्री द्वारा लगाए गए आरोप हैं. इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि इस स्तर पर नहीं हुई है. पुलिस की विवेचना के बाद ही आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. अन्य स्त्रीओं के शोषण का भी दावा स्त्री ने दावा किया कि यह केवल उसके साथ हुई घटना नहीं है और कुछ अन्य स्त्रीएं भी कथित तौर पर प्रताड़ित हुई हैं. हालांकि, उसने जिन अन्य स्त्रीओं का जिक्र किया है, उनके नाम या उनकी ओर से सामने आकर की गई कोई स्वतंत्र शिकायत इस बातचीत में सामने नहीं आई है. स्त्री ने कहा कि वह अपने लिए न्याय की मांग के साथ-साथ कथित रूप से प्रताड़ित अन्य स्त्रीओं के लिए भी आवाज उठा रही है. पुलिस जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई स्त्री का कहना है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बाद उसने पुलिस को अपना विस्तृत बयान और शपथ पत्र दिया है. अब उसे विवेचना की स्थिति की जानकारी नहीं है. मामले में लगाए गए आरोप गंभीर प्रकृति के हैं. ऐसे में पुलिस की जांच, दर्ज एफआईआर, मेडिकल/फॉरेंसिक साक्ष्य, इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य और संबंधित पक्षों के बयान से ही पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आएगी. यह भी पढ़ें: देवरिया में RSS कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या, ब्रेकर को लेकर विवाद ने लिया खूनी मोड़ बलिया से अमित कुमार पांडेय की रिपोर्ट The post भाजपा जिलाध्यक्ष पर दुष्कर्म का आरोप: बलिया की स्त्री पदाधिकारी बोली- वीडियो वायरल करने की धमकी देकर किया शोषण appeared first on Naya Vichar.

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UP Congress में नई टीम का ऐलान, आराधना मिश्रा अध्यक्ष और इमरान मसूद कार्यकारी अध्यक्ष, क्या है 2027 विधानसभा चुनाव से पहले की नई रणनीति?

UP Congress New President: उत्तर प्रदेश कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव करते हुए पार्टी ने आराधना मिश्रा ‘मोना’ को प्रदेश कांग्रेस कमेटी का नया अध्यक्ष नियुक्त किया है. वहीं, सहारनपुर से लोकसभा सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है. इसके अलावा कांग्रेस ने देवेंद्र निषाद और आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष नियुक्त किया है. यह बदलाव 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले प्रदेश संगठन में किया गया है. रामपुर खास से तीन बार विधायक हैं आराधना मिश्रा आराधना मिश्रा प्रतापगढ़ की रामपुर खास विधानसभा सीट से कांग्रेस विधायक हैं और कांग्रेस विधायक दल की नेता भी रह चुकी हैं. वह वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की बेटी हैं. आराधना मिश्रा दो दशक से अधिक समय से सक्रिय नेतृत्व में हैं और रामपुर खास सीट से तीन बार विधायक रह चुकी हैं. उत्तर प्रदेश विधानसभा की आधिकारिक जानकारी में भी रामपुर खास से उनकी सदस्यता और पिता के रूप में प्रमोद तिवारी का नाम दर्ज है. इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी सहारनपुर से लोकसभा सांसद इमरान मसूद को यूपी कांग्रेस में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है. इससे पहले वह उत्तर प्रदेश कांग्रेस में उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. आराधना मिश्रा को प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ ‘लड़की हूं, लड़ सकती हूं’ अभियान में सक्रिय भूमिका निभाने वाली नेताओं में बताया गया है. वहीं, पार्टी के भीतर उत्तर प्रदेश में संगठन को लेकर लंबे समय से बदलाव की चर्चा चल रही थी. नई टीम में सामाजिक प्रतिनिधित्व पर जोर आराधना मिश्रा की नियुक्ति के साथ अजय राय का उत्तर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर कार्यकाल खत्म हो गया है. अब प्रदेश संगठन की जिम्मेदारी नई टीम के हाथों में होगी. पार्टी ने प्रदेश अध्यक्ष के साथ कार्यकारी अध्यक्ष और वरिष्ठ उपाध्यक्षों की नियुक्ति की है. इस बदलाव को 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों से जोड़कर देखा जा रहा है. अलग-अलग सामाजिक समूहों को प्रतिनिधित्व नई टीम में आराधना मिश्रा के रूप में ब्राह्मण चेहरा, इमरान मसूद के जरिए मुस्लिम प्रतिनिधित्व और देवेंद्र निषाद व आलोक प्रसाद को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाए जाने से अलग-अलग सामाजिक समूहों को जगह मिली है. वहीं, राजेंद्र पाल गौतम पहले से उत्तर प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. इस वजह से कांग्रेस के नए संगठन को ब्राह्मण, मुस्लिम, दलित और OBC प्रतिनिधित्व के नजरिए से भी देखा जा रहा है. Must Read- UP में आया ‘समाजवादी पानी’, बोतल पर नेताओं की फोटो देख लोग हैरान, जानिए बुलंदशहर सपा दफ्तर की वायरल तस्वीरों का पूरा सच The post UP Congress में नई टीम का ऐलान, आराधना मिश्रा अध्यक्ष और इमरान मसूद कार्यकारी अध्यक्ष, क्या है 2027 विधानसभा चुनाव से पहले की नई रणनीति? appeared first on Naya Vichar.

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3 अक्टूबर 2026: एक ही दिन 2 इंटरनेशनल मैच खेलने उतरेगी टीम इंडिया, 28 साल बाद बना संयोग

India Pakistan cricket final 2026: हिंदुस्तानीय क्रिकेट के लिए शनिवार, 3 अक्टूबर 2026 का दिन बेहद खास रहने वाला है. टीम इंडिया एक ही दिन दो अलग-अलग देशों के खिलाफ दो बड़े मुकाबले स्पोर्ट्सेगी. सुबह जापान में एशियन गेम्स 2026 के क्रिकेट फाइनल में हिंदुस्तान का सामना पाकिस्तान से होगा, जबकि दोपहर में हिंदुस्तानीय टीम वेस्टइंडीज के खिलाफ तीन मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा और आखिरी मुकाबला स्पोर्ट्सेगी. ये भी पढ़ें: Viral Video: चैंपियन बनने के बाद डीजे ब्रावो के गाने पर जमकर नाची स्त्री हॉकी टीम सुबह पाकिस्तान के खिलाफ गोल्ड मेडल की लड़ाई एशियन गेम्स 2026 के पुरुष क्रिकेट का फाइनल हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच 3 अक्टूबर को जापान के निशिन स्थित कोरोगी स्पोर्ट्स पार्क में स्पोर्ट्सा जाएगा. यह मुकाबला गोल्ड मेडल के लिए होगा. हिंदुस्तानीय समय के अनुसार मैच सुबह 10 बजे शुरू होगा. हिंदुस्तान ने सेमीफाइनल में श्रीलंका को 124 रन से हराकर फाइनल में जगह बनाई. हिंदुस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 20 ओवर में 7 विकेट पर 169 रन बनाए, जिसमें ईशान किशन ने नाबाद 80 रन की पारी स्पोर्ट्सी. इसके बाद हिंदुस्तानीय गेंदबाजों ने श्रीलंका को 45 रन पर समेट दिया. दूसरी ओर, पाकिस्तान ने बांग्लादेश को हराकर फाइनल का टिकट हासिल किया. अब दोनों टीमें गोल्ड मेडल के लिए आमने-सामने होंगी. दोपहर में वेस्टइंडीज के खिलाफ तीसरा ODI एशियन गेम्स के फाइनल के कुछ घंटे बाद हिंदुस्तानीय क्रिकेट फैंस को एक और मुकाबला देखने को मिलेगा. हिंदुस्तान और वेस्टइंडीज के बीच तीन मैचों की वनडे सीरीज का तीसरा और अंतिम मैच न्यू चंडीगढ़ के PCA इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, मुल्लांपुर में स्पोर्ट्सा जाएगा. यह मुकाबला हिंदुस्तानीय समयानुसार दोपहर 2 बजे शुरू होगा, जबकि टॉस करीब 1:30 बजे होगा. यह मुकाबला मुल्लांपुर के इस मैदान पर पहला पुरुष ODI भी होगा. ये भी पढ़ें: Video: ‘मुकाबले से पहले मां रातभर सो नहीं पाई थीं’, गोल्ड मेडल जीतने के बाद अंकिता भकत ने किया खुलासा 1998 में भी एक दिन स्पोर्ट्से थे दो मुकाबले हिंदुस्तानीय क्रिकेट में 3 अक्टूबर 2026 की यह स्थिति नई जरूर है, लेकिन एक दिन में दो अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों का उदाहरण पहले भी मिल चुका है. 12 सितंबर 1998 को हिंदुस्तान की एक टीम ने कुआलालंपुर में कॉमनवेल्थ गेम्स के ग्रुप मैच में कनाडा का सामना किया था. हिंदुस्तान ने यह मुकाबला 112 रन से जीता था. हिंदुस्तान ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 157/9 बनाए थे, जिसके जवाब में कनाडा की टीम 45 रन पर ऑलआउट हो गई थी. उसी दिन टोरंटो में हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच सहारा ‘फ्रेंडशिप’ कप का पहला वनडे भी स्पोर्ट्सा गया. हिंदुस्तान ने इस मुकाबले में पाकिस्तान को 6 विकेट से हराया था. यानी 1998 में भी हिंदुस्तान ने एक ही तारीख को दो अलग-अलग मुकाबले स्पोर्ट्से और दोनों में जीत हासिल की थी. The post 3 अक्टूबर 2026: एक ही दिन 2 इंटरनेशनल मैच स्पोर्ट्सने उतरेगी टीम इंडिया, 28 साल बाद बना संयोग appeared first on Naya Vichar.

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ज्ञानेश ब्रो, जस्ट रिजाइन…, तस्वीरों में देखें CJP का प्रदर्शन, जानें क्या हैं मांगें

मुंबई के शिवाजी पार्क में शुक्रवार, 2 अक्टूबर को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ यानी CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया. गांधी जयंती के मौके पर हुए इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा और अलग-अलग छात्र संगठनों से जुड़े लोग पहुंचे. प्रदर्शनकारियों के हाथों में मीम वाले पोस्टर, फिल्मी डायलॉग और चुनाव से जुड़े सवाल लिखी तख्तियां नजर आईं. गांधी की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहनकर पहुंचे लोग प्रदर्शन के दौरान मंच पर मौजूद कई लोग महात्मा गांधी की तस्वीर वाली टी-शर्ट पहने नजर आए. मंच पर अहिंसा और सादगी से जुड़े गांधी के विचारों के साथ डॉ. बीआर आंबेडकर को श्रद्धांजलि देने वाले संदेश भी लगाए गए थे. ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की क्यों हो रही मांग? CJP का कहना है कि चुनाव आयोग के कामकाज और मतदाता सूची में किए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर सवाल उठ रहे हैं. संगठन का आरोप है कि इससे लोगों के वोट देने के अधिकार पर असर पड़ सकता है. इसलिए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को इस्तीफे देना चाहिए. CJP संस्थापक अभिजीत दीपके ने कहा कि मुंबई के प्रदर्शन को आगे देश के दूसरे हिस्सों में भी ले जाया जाएगा. उन्होंने संकेत दिया कि आंदोलन का अगला पड़ाव दिल्ली का जंतर-मंतर होगा. सीजेपी ने इसे ‘जेल भरो आंदोलन’ का नाम दिया है. संगठन का कहना है कि जब तक उसकी मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा. ये भी पढ़ें: Jantar Mantar Protest : ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहीं नेहा बोरा हिरासत में, घसीटकर ले गई दिल्ली पुलिस; देखें Video The post ज्ञानेश ब्रो, जस्ट रिजाइन…, तस्वीरों में देखें CJP का प्रदर्शन, जानें क्या हैं मांगें appeared first on Naya Vichar.

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Bihar Politics: लालू के बुलावे पर पटना लौटीं रोहिणी, तेजस्वी की अनुपस्थिति ने खड़े किए कई सवाल?

Rohini Acharya Patna Return बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) को मिली हार और भाई तेजस्वी यादव के साथ विवाद की चर्चाओं के बाद पटना छोड़कर सिंगापुर गईं रोहिणी आचार्य गुरुवार शाम एक बार फिर अपने पिता लालू प्रसाद के बुलावे पर पटना पहुंचीं. रोहिणी आचार्य के पटना लौटते ही आरजेडी में उनकी संभावित भूमिका को लेकर कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गई हैं.पटना पहुंचने के बाद पत्रकारों से बातचीत में रोहिणी आचार्य ने कहा कि वह अपने पिता के बुलावे पर पटना आई हैं और उनके आने को नेतृत्व के चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए. हालांकि, पार्टी सूत्रों का दावा है कि राजद रोहिणी आचार्य को कोई बड़ी जिम्मेदारी देने पर विचार कर रहा है. सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में लालू प्रसाद ने पार्टी के शीर्ष नेताओं और परिवार के सदस्यों से बातचीत भी की है. MLC चुनाव के बीच रोहिणी की वापसी रोहिणी आचार्य का पटना लौटना ऐसे समय हुआ है, जब बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए चुनाव होने हैं। इन सीटों पर 23 अक्टूबर को मतदान होना है. राजद ने आठ में से छह सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं. इनमें तीन सीटों पर राजद और कांग्रेस के प्रत्याशी आमने-सामने हैं. कांग्रेस और राजद के बीच इन सीटों पर अलग-अलग उम्मीदवार उतारे जाने के बाद महागठबंधन के भीतर चुनावी तालमेल को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में रोहिणी आचार्य की पटना वापसी को लेकर नेतृत्वक हलकों में भी अलग-अलग चर्चाएं शुरू हो गई हैं. रोहिणी आचार्य को करीब से जानने वाले लोगों का कहना है कि वह अपनी बात सीधे तौर पर रखने के लिए जानी जाती हैं. ऐसे में उनकी नेतृत्वक भूमिका को लेकर अभी से कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं. हालांकि, उनकी भविष्य की भूमिका को लेकर अंतिम तस्वीर किसी औपचारिक घोषणा के बाद ही साफ होगी. बिहार से जुड़ी अन्य ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें.. रोहिणी की वापसी नेतृत्वक रूप से अहम रोहिणी आचार्य के पटना पहुंचने पर वरिष्ठ पत्रकार अजय कुमार ने कहा कि पहली नजर में यह पिता और बेटी के बीच का पारिवारिक मामला दिखाई देता है, लेकिन लालू प्रसाद के नेतृत्वक कदमों को व्यापक नेतृत्वक संदर्भ में भी देखा जाता रहा है. उन्होंने कहा कि विपक्ष कई मौकों पर रोहिणी आचार्य के बयानों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए राजद पर निशाना साधता रहा है. ऐसे में उनके पटना लौटने से विपक्ष के पास मौजूद इस मुद्दे की नेतृत्वक धार कम हो सकती है. अजय कुमार ने यह भी कहा कि रोहिणी आचार्य और लालू प्रसाद के बीच भावनात्मक संबंधों को भी इस पूरे घटनाक्रम से अलग करके नहीं देखा जा सकता. एयरपोर्ट पर दिखा परिवार का साथ गुरुवार को पटना एयरपोर्ट पर रोहिणी आचार्य के पहुंचने पर लालू प्रसाद और राबड़ी देवी ने उनका स्वागत किया. रोहिणी अपनी मां राबड़ी देवी और पिता लालू प्रसाद से गले मिलती नजर आईं. लालू प्रसाद भी बेटी को रिसीव करने एयरपोर्ट पहुंचे थे. इस दौरान मीसा हिंदुस्तानी भी मौजूद थीं. परिवार की इस तस्वीर के बाद रोहिणी और परिवार के बीच चल रहे विवाद को लेकर भी चर्चा शुरू हुई. हालांकि, एयरपोर्ट पर तेजस्वी यादव की मौजूदगी नहीं थी. इसे लेकर भी नेतृत्वक गलियारों में चर्चा हुई. इस पर राजद प्रवक्ता चितरंजन गगन ने सफाई देते हुए कहा कि तेजस्वी यादव दिल्ली में थे, इसलिए वह पटना एयरपोर्ट नहीं पहुंच सके. ‘नेतृत्व के लिए नहीं आई हूं’, फिर सोशल मीडिया पोस्ट पर चर्चा पटना पहुंचने के बाद रोहिणी आचार्य ने कहा कि वह अपने माता-पिता के साथ रहने के लिए पटना आई हैं और उनके आने का मकसद नेतृत्व नहीं है. हालांकि, सिंगापुर में रहते हुए रोहिणी आचार्य की ओर से सोशल मीडिया पर किए गए कई पोस्ट नेतृत्वक मुद्दों से जुड़े रहे हैं. उन्होंने राजद में नई नियुक्तियों और पार्टी से जुड़े कुछ फैसलों पर सवाल भी उठाए थे. यही वजह है कि उनके पटना लौटने के बाद उनके नेतृत्वक रुख और पार्टी में संभावित भूमिका को लेकर चर्चा फिर तेज हो गई है. फिलहाल राजद की ओर से रोहिणी आचार्य को किसी नई जिम्मेदारी दिए जाने की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है. ऐसे में उनकी पटना वापसी के पीछे पारिवारिक कारण हैं या इसके साथ कोई नेतृत्वक भूमिका भी जुड़ने वाली है, इस पर अंतिम तस्वीर पार्टी के अगले फैसले के बाद ही साफ होगी. Also Read अनंत सिंह के बागी तेवर से JDU में बढ़ी बेचैनी, संजय झा ने ललन सिंह को दिया ‘डैमेज कंट्रोल’ का जिम्मा The post Bihar Politics: लालू के बुलावे पर पटना लौटीं रोहिणी, तेजस्वी की अनुपस्थिति ने खड़े किए कई सवाल? appeared first on Naya Vichar.

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145km की रेंज, 32 लीटर स्टोरेज और Smart Key… Honda QC3 खरीदने से पहले जान लें ये 5 खूबियां

Honda ने इलेक्ट्रिक स्कूटर सेगमेंट में एक और कदम आगे बढ़ाते हुए हाल ही में Honda QC3 लॉन्च कर दिया है. कंपनी ने इसे खासतौर पर फैमिली यूज को ध्यान में रखकर तैयार किया है. यानी डेली ऑफिस, बाजार या दूसरे छोटे-मोटे कामों के लिए ऐसा स्कूटर, जिसे चलाना आसान हो और सफर के दौरान ज्यादा टेंशन भी न हो. हिंदुस्तान में Honda QC3 की शुरुआती कीमत 1.35 लाख रुपये (एक्स-शोरूम, दिल्ली) रखी गई है. फिलहाल इसकी बिक्री दिल्ली, आगरा, सूरत, कटक और कोल्लम जैसे चुनिंदा शहरों के Honda RedWing डीलरशिप से शुरू होगी. तो आखिर Honda QC3 में ऐसा क्या खास है, जो इसे कंपनी का अब तक का सबसे बेहतर इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर बनाता है? आइए जानते हैं इसके 5 सबसे बड़े हाइलाइट्स. साफ-सुथरा फैमिली लुक के साथ प्रीमियम कलर ऑप्शन Honda QC3 का डिजाइन ऐसा रखा गया है, जो देखने में काफी साफ-सुथरा और स्टाइलिश लगता है. इसके फ्रंट में शार्प LED हेडलाइट दी गई है, जिसे सीधे फ्रंट एप्रन पर लगाया गया है. हेडलाइट के साथ इंटीग्रेटेड DRLs भी मिलते है. कलर की बात करें तो Honda QC3 को कई स्टाइलिश शेड्स में पेश किया गया है. इसमें Matt Photon Gray Metallic, Pearl Precious White, Pearl Shallow Blue और Pearl Siren Blue जैसे कलर ऑप्शन मिलते हैं. 145 km की रेंज के साथ फास्ट चार्जिंग Honda QC3 में 3 kWh का लिथियम-आयन बैटरी पैक दिया गया है. कंपनी के मुताबिक, यह एक बार फुल चार्ज होने पर 145km तक की IDC रेंज देता है. खास बात यह है कि QC1 के 80km की रेंज के मुकाबले यह काफी बड़ी छलांग है. बैटरी को चार्ज करने में भी बहुत ज्यादा वक्त नहीं लगता. कंपनी के फास्ट चार्जर की मदद से इसे 0 से 80 परसेंट तक चार्ज करने में करीब 2 घंटे 40 मिनट लगते हैं. यानी कुछ घंटों की चार्जिंग के बाद आप इसे फिर से रोजमर्रा के काम के लिए यूज कर सकते हैं. ये भी पढ़ें: 190km रेंज, 90kmph स्पीड और 35 लीटर स्टोरेज… इन फीचर्स के बावजूद Simple Energy ने बंद किया अपना ये इलेक्ट्रिक स्कूटर सीट के नीचे बड़ा स्टोरेज स्पेस इलेक्ट्रिक स्कूटर में बड़ी बैटरी लगाने की वजह से अक्सर अंडरसीट स्टोरेज कम हो जाता है, लेकिन Honda ने QC3 में इस चीज का अच्छा ध्यान रखा है. स्कूटर में करीब 32 लीटर का अंडरसीट स्टोरेज मिलता है, जिसमें हेलमेट के साथ रोजमर्रा का सामान या छोटी-मोटी ग्रॉसरी भी आसानी से रख सकते हैं. Honda QC3 के फ्रंट एरिया में USB चार्जिंग पोर्ट दिया गया है. यानी सफर के दौरान फोन की बैटरी खत्म होने की चिंता कम हो जाएगी और जरूरत पड़ने पर आप चलते-चलते स्मार्टफोन चार्ज कर सकेंगे. स्मार्ट कनेक्टिविटी और 5 इंच की कलर TFT स्क्रीन आज के समय में स्कूटर सिर्फ आने-जाने का साधन नहीं रह गया है, बल्कि उसमें स्मार्ट फीचर्स भी काफी मायने रखते हैं. इसी को ध्यान में रखते हुए QC3 में 5-इंच का फुल कलर TFT डिस्प्ले दिया गया है. इसकी स्क्रीन को इस तरह डिजाइन किया गया है कि तेज धूप में भी इस पर दिखाई देने वाली डिटेल्स आसानी से पढ़ी जा सके. स्कूटर में Honda RoadSync ऐप का सपोर्ट भी मिलता है. ब्लूटूथ के जरिए स्मार्टफोन को इससे कनेक्ट करने के बाद राइडर डैशबोर्ड पर ही टर्न-बाय-टर्न नेविगेशन, इनकमिंग कॉल और SMS अलर्ट के साथ म्यूजिक कंट्रोल जैसी सुविधाओं का यूज कर सकता है. इसके अलावा, QC3 में स्मार्ट की (Smart Key) की सुविधा भी मिलती है. यानी बार-बार चाबी निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी. इससे स्कूटर को कीलेस तरीके से स्टार्ट करने के साथ रिमोट से अनलॉक किया जा सकता है. कम्फर्टेबल राइडिंग के साथ सेफ्टी का भी पूरा ध्यान आगे की तरफ टेलिस्कोपिक फोर्क्स और पीछे ट्विन शॉक एब्जॉर्बर्स दिए गए हैं. यानी शहर की टूटी-फूटी सड़कों, गड्ढों और स्पीड ब्रेकर से गुजरते वक्त ज्यादा झटके महसूस नहीं होंगे. स्कूटर में दोनों पहियों पर 12-इंच के अलॉय व्हील्स मिलते हैं, जिनके साथ ट्यूबलेस टायर लगे हैं. ब्रेकिंग के लिए आगे डिस्क और पीछे ड्रम ब्रेक दिया गया है. साथ में CBS भी मिलता है, जो अचानक ब्रेक लगाने की सिचुएशन में स्कूटर को ज्यादा कंट्रोल के साथ रोकने में मदद करता है. चौड़ा हैंडलबार, बड़ी और सपाट सीट के साथ स्पेशियस फ्लोरबोर्ड दिया गया है. ऐसे में रोज ऑफिस जाने से लेकर शहर में लंबी राइड तक, राइडर और पीछे बैठने वाले दोनों को बैठने में ज्यादा परेशानी नहीं होगी. ये भी पढ़ें: 92km से 212km की रेंज, कीमत 49,999 रुपये से शुरू… TVS के ये 3 इलेक्ट्रिक स्कूटर डेली यूज के लिए हैं बेस्ट The post 145km की रेंज, 32 लीटर स्टोरेज और Smart Key… Honda QC3 खरीदने से पहले जान लें ये 5 खूबियां appeared first on Naya Vichar.

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Watch video: लखनऊ में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर सपा का प्रदर्शन, पुलिस ने कार्यकर्ताओं को उठा-उठाकर पटका

Lucknow News: लखनऊ के हजरतगंज चौराहे पर शुक्रवार को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर धरना-प्रदर्शन किया. प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की और ज्ञानेश कुमार से पद से इस्तीफा देने की मांग उठाई. प्रदर्शन को देखते हुए मौके पर पुलिस बल तैनात किया गया. पुलिस ने प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया और उन्हें ईको गार्डन भेज दिया. सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं होती, तब तक उनका विरोध जारी रहेगा. हजरतगंज चौराहे पर जुटे सपा कार्यकर्ता शुक्रवार को सपा कार्यकर्ता हजरतगंज चौराहे पर जुटे और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया. कार्यकर्ताओं ने उनके इस्तीफे की मांग उठाई. इस दौरान मौके पर पुलिस की तैनाती रही. पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सपा कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया. इसके बाद उन्हें ईको गार्डन भेज दिया गया. उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए यह कार्रवाई की. ‘मांगों पर सुनवाई तक जारी रहेगा विरोध’ प्रदर्शन कर रहे सपा कार्यकर्ताओं का कहना है कि उनकी मांगों पर सुनवाई होने तक विरोध जारी रहेगा. यह प्रदर्शन ऐसे समय हुआ है, जब मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विपक्षी दलों की ओर से देश के अलग-अलग हिस्सों में प्रदर्शन किए जा रहे हैं. वीडियो में पुलिस की कार्रवाई दिखी प्रदर्शन से जुड़े वीडियो में पुलिसकर्मी प्रदर्शनकारियों को मौके से हटाते हुए दिखाई दे रहे हैं. आपके उपलब्ध वीडियो के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों को पुलिसकर्मी गोद में उठाकर ले जाते हुए भी नजर आ रहे हैं. हालांकि, उपलब्ध समाचार रिपोर्ट में इस विशेष दृश्य का अलग से विवरण नहीं दिया गया है. इसलिए इसे वीडियो में दिखाई देने वाले दृश्य के रूप में ही लिखा जाना उचित है. यह भी पढ़ें: UP Politics: केशव मौर्य ने अखिलेश यादव के PDA को बताया ‘परिवार डेवलपमेंट एजेंसी’, बोले- 2027 में सपा सैफई की ओर जाएगी The post Watch video: लखनऊ में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर सपा का प्रदर्शन, पुलिस ने कार्यकर्ताओं को उठा-उठाकर पटका appeared first on Naya Vichar.

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Parveen Hooda Photo Story: 22 महीने का बैन, छूटा ओलंपिक… एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर चमकीं परवीन हुड्डा

ब्रॉन्ज़ मेडल छिनने के गम से निकलकर परवीन हुड्डा ने एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर इतिहास रचा. जानें उनकी अविश्वसनीय वापसी की कहानी. The post Parveen Hooda Photo Story: 22 महीने का बैन, छूटा ओलंपिक… एशियन गेम्स में गोल्ड जीतकर चमकीं परवीन हुड्डा appeared first on Naya Vichar.

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धर्मेंद्र के बाद अब CEC ज्ञानेश के इस्तीफा की मांग पर अड़े दीपके, क्या दूसरी बार मोदी सरकार को झुका पाएगी CJP?

25 जुलाई 2026 को तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने CJP के प्रदर्शन के बीच अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. अब करीब 69 दिन बाद, 2 अक्टूबर की शाम 4 बजे CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मुंबई के शिवाजी पार्क में आंदोलन शुरू कर दिया है. मुंबई पुलिस से अनुमति नहीं मिलने के बावजूद दीपके के समर्थकों के शिवाजी पार्क पहुंचने की उम्मीद है. ऐसे में जानते हैं कि दीपके ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे समेत किन मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे हैं और क्या दीपके और उनकी पार्टी दूसरी बार मोदी प्रशासन को झुका पाएंगे? ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किन मांगों को लेकर प्रदर्शन कर रहे दीपके? CJP ने CEC ज्ञानेश कुमार से जुड़े मामले में चार बड़ी मांगें रखी हैं- 1-CEC ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दें. 2-ज्ञानेश कुमार के खिलाफ FIR दर्ज हो. 3-CEC और चुनाव आयुक्त की नियुक्ति वाले कानून में बदलाव हो. 4- SIR से से जुड़े दस्तावेजों और फैसलों की जांच होनी चाहिए. क्या CEC ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना पड़ सकता है? किसी आंदोलन के कारण देश के मुख्य चुनाव आयुक्त को उनके पद से नहीं हटाया जा सकता है. इसके लिए एक तय संवैधानिक प्रक्रिया होती है. संविधान के अनुच्छेद 324(5) के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिन आधार पर सुप्रीम कोर्ट के जज को हटाया जाता है. इस प्रक्रिया को महाभियोग के नाम से जानते हैं. मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने के लिए सबसे पहले संसद के किसी एक सदन में प्रस्ताव का नोटिस देना होगा. लोकसभा में ऐसे नोटिस पर कम से कम 100 सांसदों और राज्यसभा में कम से कम 50 सांसदों के हस्ताक्षर जरूरी होते हैं. नोटिस लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति को सौंपा जाता है. मार्च 2026 में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ लोकसभा सांसदों के हस्ताक्षर वाला ऐसा नोटिस दिया भी गया था, जिसे लोकसभा अध्यक्ष ने स्वीकार नहीं किया था. नोटिस मिलने के बाद लोकसभा अध्यक्ष या राज्यसभा के सभापति उपलब्ध सामग्री और लगाए गए आरोपों को देखते हैं. उनके पास प्रस्ताव को स्वीकार करने या खारिज करने का अधिकार होता है. अगर प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया जाता, तो प्रक्रिया वहीं खत्म हो जाती है. प्रस्ताव मंजूर हुआ तो बनेगी जांच समिति अगर प्रस्ताव स्वीकार कर लिया जाता है, तो आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई जाती है. इसमें सुप्रीम कोर्ट का एक जज, किसी हाईकोर्ट का मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित विधिवेत्ता शामिल होता है. समिति आरोपों, दस्तावेजों और सबूतों की जांच करती है और संबंधित पक्ष को अपना बचाव रखने का मौका भी मिलता है. अगर जांच समिति आरोपों को सही नहीं पाती, तो आगे की कार्रवाई खत्म हो जाती है. लेकिन अगर समिति साबित कदाचार या अक्षमता का निष्कर्ष देती है, तो हटाने का प्रस्ताव संसद में चर्चा और मतदान के लिए लिया जा सकता है. CEC को हटाने के लिए दोनों सदनों में विशेष बहुमत जरूरी है. प्रस्ताव को हर सदन की कुल सदस्य संख्या के बहुमत के साथ-साथ उस दिन उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई समर्थन से पास होना होता है. अगर लोकसभा और राज्यसभा दोनों जरूरी बहुमत से प्रस्ताव पास कर देते हैं, तो मामला राष्ट्रपति के पास जाता है. इसके बाद राष्ट्रपति हटाने का आदेश जारी कर सकते हैं. तभी मुख्य चुनाव आयुक्त औपचारिक रूप से पद से हटेंगे. दीपके के लिए प्रशासन को दूसरी बार झुकाना क्यों मुश्किल? दीपके के लिए इस बार प्रशासन को झुकानना दो वजहों से बेहद मुश्किल लगता है- पहला- नंबर गेम : लोकसभा में कुल 540 सदस्य हैं. अगर सभी सदस्य मतदान करते हैं तो दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 वोट चाहिए होंगे. मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक NDA के पास 318, INDIA ब्लॉक के पास 184 और अन्य दलों के पास 38 सांसद हैं. INDIA और अन्य को जोड़ दें तो संख्या 222 होती है, जो 360 से काफी कम है. वहीं राज्यसभा में कुल 243 सदस्य हैं. अगर सभी सदस्य वोट करें तो दो-तिहाई के लिए 162 वोट चाहिए होंगे. यहां NDA के पास 147, INDIA ब्लॉक के पास 67 और अन्य के पास 29 सदस्य हैं. INDIA और अन्य को मिलाकर संख्या 96 होती है. हालांकि वास्तविक जरूरी संख्या उस दिन सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों पर निर्भर करेगी. दूसरा- प्रशासन खुद को कमजोर नहीं दिखाना चाहेगी: CJP के आंदोलन के बीच केंद्र प्रशासन किसी जल्दबाजी वाले फैसले नहीं ले सकती है. नेतृत्वक तौर पर विपक्ष ऐसे किसी कदम को प्रशासन के दबाव में झुकने के रूप में पेश कर सकता है. इस कारण CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे या हटाने का फैसला सीधे प्रशासन नहीं लेगी. धर्मेंद्र प्रधान का मामला इससे अलग क्यों था? सीजेपी के करीब एक महीने के आंदोलन के बाद 25 जुलाई को केंद्रीय मंत्री पद से धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था. लेकिन मौजूदा मांग और धर्मेद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग में काफी फर्क है. धर्मेंद्र प्रधान केंद्रीय मंत्री थे. केंद्रीय मंत्री राष्ट्रपति के अधीन पद पर रहते हैं और व्यवहारिक रूप में प्रधानमंत्री की सलाह पर मंत्रिपरिषद में बने रहते हैं. लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त संवैधानिक पद पर हैं और उन्हें विशेष सुरक्षा मिली हुई है. इसलिए शिक्षा मंत्री के इस्तीफे वाले घटनाक्रम को CEC के मामले पर सीधे लागू नहीं हो सकता है. ज्ञानेश कुमार स्वेच्छा से इस्तीफा दे सकते हैं, लेकिन उन्हें पद से पटाने के लिए एक संवेधानिक प्रक्रिया से गुजरना होगा. क्या ज्ञानेश कुमार के खिलाफ FIR हो सकती है? CJP ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग कर रही है. यह हिस्सा कानूनी तौर पर सबसे पेचीदा है. 2023 के मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त अधिनियम की धारा 16 CEC और दूसरे चुनाव आयुक्तों को उनके आधिकारिक कामकाज से जुड़ी कार्रवाई के मामले में कानूनी सुरक्षा देती है. कानून के मुताबिक मौजूदा या पूर्व CEC अथवा इलेक्शन कमिश्नर द्वारा अपने आधिकारिक कर्तव्य निभाते हुए किए गए काम, बोले गए शब्द या लिए गए फैसले से संबंधित सिविल या क्रिमिनल सुनवाई पर विशेष संरक्षण लागू होता है. क्या सीईसी पर

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