Hot News

ताजा ख़बर

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ऑल-ब्लैक लुक में और भी स्टाइलिश हुई Hyundai Exter, ₹8.13 लाख में लॉन्च हुआ नया Knight Edition

साउथ कोरियाई कार कंपनी Hyundai ने अपनी एंट्री-लेवल SUV Exter का नया Knight Edition लॉन्च कर दिया है. पूरी तरह ब्लैक लुक वाली इस स्पेशल एडिशन की शुरुआती एक्स-शोरूम कीमत 8.13 लाख रुपये रखी गई है. खास बात यह है कि Exter Knight की एंट्री ऐसे समय हुई है, जब कंपनी की Knight रेंज ने 2022 में शुरुआत के बाद से अब तक 1 लाख यूनिट की बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है. Hyundai Exter Knight: वेरिएंट और कलर ऑप्शन Hyundai Exter के नए स्पेशल एडिशन को चार वेरिएंट में पेश किया गया है. इसमें पेट्रोल मैनुअल, पेट्रोल AMT और Hy-CNG Duo जैसे ऑप्शन मिलते हैं. कलर की बात करें तो आप इसे Titanium Black, Atlas White, Starry Night, Titan Grey और Golden Bronze जैसे पांच रंगों में खरीद सकते हैं. हालांकि, इस स्पेशल एडिशन में सिर्फ लुक और डिजाइन से जुड़े बदलाव किए गए हैं. इंजन और बाकी मैकेनिकल हिस्सों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. ये भी पढ़ें: Mahindra BE6 Sporteq का टीजर जारी, ट्रिपल-स्क्रीन के साथ आएगी नई इलेक्ट्रिक SUV, 15 अगस्त को होगी लॉन्च Hyundai Exter Knight: एक्सटीरियर Hyundai Exter Knight को नॉर्मल Exter से अलग दिखाने के लिए कंपनी ने इसके लुक में कई बदलाव किए हैं. पूरी SUV को ब्लैक थीम दी गई है. हालांकि, इसका वही बॉक्सी डिजाइन और मजबूत लुक बरकरार रखा गया है. आगे की तरफ ब्लैक कलर की ग्रिल, बंपर और Hyundai के लोगो मिलते हैं. नीचे दिया गया सिल्वर हिस्सा भी अब ब्लैक फिनिश में है. साइड से देखें तो इसमें 15-इंच के ब्लैक अलॉय व्हील दिए गए हैं. इनके पीछे रेड ब्रेक कैलिपर्स नजर आते हैं. साथ ही, ब्लैक रूफ रेल्स भी मिलती हैं. पीछे की तरफ भी ब्लैक थीम को जारी रखा गया है. यहां बंपर इंसर्ट, स्किड प्लेट और Hyundai लोगो को ब्लैक फिनिश दी गई है. वहीं, टेलगेट पर ‘Knight’ बैज इसे नॉर्मल Exter से अलग लुक देता है. Hyundai Exter Knight: इंटीरियर अंदर बैठते ही इसका स्पोर्टी लुक देखने को मिलता है. स्टैंडर्ड कार में जहां नेवी ब्लू और व्हाइट का डुअल-टोन इंटीरियर मिलता है, वहीं इस मॉडल में पूरा केबिन ब्लैक रखा गया है.  AC वेंट, सेंटर कंसोल और सीटों की सिलाई में ब्रास कलर के टच दिए गए हैं. रात के समय एम्बर कलर की फुटवेल लाइटिंग केबिन के माहौल को और खास बनाती है. Hyundai Exter Knight: कीमत, इंजन और गियरबॉक्स Hyundai Exter Knight को कंपनी ने HX 6 और HX 10 जैसे दो ट्रिम में उतारा है. इसकी कीमत की बात करें तो टॉप मॉडल AMT की कीमत ₹9.60 लाख तक जाती है. वहीं, अगर आप CNG का ऑप्शन लेना चाहते हैं, तो Hy-CNG Duo की कीमत इन दोनों पेट्रोल मॉडल के बीच रखी गई है. वेरिएंट इंजन ट्रांसमिशन कीमत (एक्स-शोरूम) HX 6 Knight 1.2L Kappa पेट्रोल MT ₹8,13,500 HX 6 Knight 1.2L Kappa पेट्रोल AMT ₹8,73,500 HX 6 Knight 1.2L Bi-fuel Kappa पेट्रोल + CNG MT ₹9,09,500 HX 10 Knight 1.2L Kappa पेट्रोल AMT ₹9,60,500 मैकेनिकल तौर पर Hyundai Exter Knight में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया है. इसमें पहले की तरह 1.2-लीटर Kappa पेट्रोल इंजन मिलता है, जिसे 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स या Smart Auto AMT के साथ जोड़ा गया है. इसके अलावा, कंपनी इसका CNG वर्जन भी देती है, जिसमें पेट्रोल के साथ CNG का यूज होता है और 5-स्पीड मैनुअल गियरबॉक्स मिलता है. ये भी पढ़ें: Mahindra ने टीज किया नया पिकअप, Scorpio N से मिलती है डिजाइन, 14 अगस्त को होगा डेब्यू The post ऑल-ब्लैक लुक में और भी स्टाइलिश हुई Hyundai Exter, ₹8.13 लाख में लॉन्च हुआ नया Knight Edition appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

JPSC गड़बड़ी मामला: बिंसिस के निदेशक अरुण ने करोड़ों की संपत्ति अर्जित की, फिल्म भी बनायी; नाम रखा सेटर्स

JPSC Exam Scam: जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में हुई गड़बड़ी मामले में शामिल कंपनी बिंसिस के निदेशक अरुण शर्मा है जिन्हें एक दिन पहले ही रांची पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार किया है. वहीं गड़बड़ी में शामिल पाई गई एक और नई कंपनी आईसीएन इंडिया के निदेशक मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह हैं. इन दोनों आरोपियों से अरुण कुमार और आरके सिंह ने करोड़ रुपए से अधिक की संपत्ति अर्जित की. इनमें बिहार में शिक्षण संस्थान, पुणे में होटल और दिल्ली-गुरुग्राम में जमीन-मकान शामिल हैं. अरुण कुमार ने मुंबई स्थित अपने फिल्म निर्माण संस्थान के जरिए फिल्म निर्माण में पैसा लगाने और नोएडा में शूटिंग के नाम पर उत्तर प्रदेश प्रशासन से सब्सिडी भी ली. इन लोगों ने 2019 में सेटर्स नामक फिल्म भी बनाई. उनके भाई श्रीकांत उर्फ लल्लू को वर्ष 2011 के अखिल हिंदुस्तानीय आयुर्विज्ञान संस्थान की स्नातकोत्तर प्रवेश परीक्षा लीक मामले में सीबीआई ने आरोपी बनाया था. अरुण ने रक्षा अनुसंधान संगठन की परीक्षाओं में भी किया घपला सीआईडी को बताया गया है कि अरुण कुमार ने रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की परीक्षाओं में अधिकारी महेंद्र कपूर के साथ मिलकर अभ्यर्थियों को गलत तरीके से पास कराया. सैन्य अभियंता सेवा, पुणे की वर्ष 2021-22 की परीक्षा में करीब 300 अभ्यर्थियों के उत्तर पत्रकों में छेड़छाड़ की, जबकि दिल्ली में जेएनयू के समीप आयोजित राष्ट्रीय प्रतिरक्षा अनुसंधान संस्थान की वर्ष 2020 की परीक्षा में करीब 20 अभ्यर्थियों को इसी तरह नौकरी दिलाई गई. झारखंड में तीन जुलाई 2022 को आयोजित जेएसएससी कनीय अभियंता परीक्षा का प्रश्न पत्र तीन दिन पहले ही लीक कर बिहार-झारखंड के करीब 700 अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया, जिसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी. इस मामले में अरुण कुमार के सहयोगी अभिषेक कुमार की गिरफ्तारी हुई थी जबकि अरुण कुमार भाग गया था. इसी तरह 28 जनवरी 2024 की स्नातक स्तरीय परीक्षा में भी अरुण कुमार और आरके सिंह ने राजस्थान के परीक्षा माफिया गिरोह के साथ मिलकर बिहार के गया- औरंगाबाद में प्रश्न पत्र रटवाये, जिसके बाद यह परीक्षा भी रद्द हुई. वर्ष 2017 में बिहार के नवीनगर स्थित रेल भर्ती परीक्षा और वर्ष 2019 में बिहार सिपाही भर्ती से जुड़े 14 करोड़ रुपए के कथित गबन मामले में भी अरुण कुमार का नाम सामने आया, जिसमें शास्त्रीनगर थाने में प्राथमिकी दर्ज होने की बात कही गई है. परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता गुप्ता को थी गड़बड़ियों की जानकारीः रणवीर सिंह टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह ने बताया कि जितनी तरह की गड़बड़ियां होती थीं, उनकी जानकारी परीक्षा उपनियंत्रक श्वेता कुमारी गुप्ता को थी. वह जानती थी कि सभी काम उसके लालपुर स्थित आवासीय कार्यालय में होता था. श्वेता गुप्ता को एसीएफ, एफआरओ के इंटरव्यू और 14वीं जेपीएससी परीक्षा के संचालन और निगरानी का काम तत्कालीन अध्यक्ष ने सौंपा था. श्वेता गुप्ता ने ही 14वीं सिविल सेवा परीक्षा की आंसर सीट व्हाट्सएप पर उसके कर्मी उस्मान और पीके सिंह को भेजी थी, ताकि ओएमआर सीट में गड़बड़ी की जा सके. चयनित अभ्यर्थी की ओएमआर शीट स्ट्रांग रूम से निकाल कर वह लोगों को देता था, जिसके बाद खाली छोड़े गए गोलों को भर कर उसके अंक बढ़ा दिए जाते थे. अभय तिवारी के उम्मीदवार हजारीबाग के अजीत यादव, रांची की नीतू कुमारी, दीपशिखा कुमारी, पलामू के संतोष राम, चतरा के संजीत यादव समेत हजारीबाग के वीरेन्द्र कुमार यादव और शशि कुमार समेत कुछ अन्य लोगों के अंक उसने बढ़वाए. अभय तिवारी और धर्मेन्द्र ने कहा था एफआरओ के एक अभ्यर्थी से आठ से दस लाख रुपए मिलेंगे. रामवीर सिंह ने बताया कि उसे एफआरओ पीटी परीक्षा के तुरंत बाद अभय तिवारी, धर्मेन्द्र और आनंद और रवि ने 15 नाम दिए थे. उन्हें सफल कराना था. उसने मुख्य परीक्षा की कॉपी आयोग से निकाल उन लोगों को दिए, जिसके जवाब उन लोगों ने रांची और हजारीबाग के अलग-अलग स्थानों पर लिखवाए. ये भी पढ़ें- JPSC नियुक्ति घोटाला: जिस सिंडिकेट से जुड़ा है अभय, उसका नेटवर्क पूरे देश में, दर्जनों परीक्षाओं में की है गड़बड़ी डॉ जमाल से टीडीपीएल कनेक्शन पर सवाल, बोले- आरोप तथ्य से परे जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी की जांच कर रही सीआईडी के बुलावे पर बुधवार को जेपीएससी के पूर्व सदस्य डॉ जमाल अहमद सीआईडी कार्यालय पहुंचे. सीआईडी ने उनका बयान दर्ज किया. डॉ जमाल अहमद ने किसी भी गड़बड़ी में अपनी भूमिका से इनकार किया. उन्होंने कहा कि जिस मुद्दे पर उन्हें असहमति होती थी, आयोग की बैठकों में वह अपनी बात मजबूती से रखते थे. टीडीपीएल कंपनी के चयन में किसी तरह की गड़बड़ी या उसके माध्यम से छात्रों की गलत तरीके से नियुक्ति की उन्हें कोई जानकारी नहीं है. उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों को तथ्यों से परे बताया. उल्लेखनीय है कि टीडीपीएल के मार्केटिंग मैनेजर अभय तिवारी ने डॉ जमाल अहमद समेत आयोग के अन्य सदस्यों पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने आरोप लगाया था कि सभी मिलकर गलत तरीके से भर्तियां कराते थे. इंटरव्यू में अध्यक्ष के आदेश पर अभ्यर्थियों को गलत तरीके से अंक दिए जाते थे. हजारीबाग के एक एजेंट के माध्यम से पूरा स्पोर्ट्स संचालित होने का भी आरोप लगाया गया था. इस मामले में सीआईडी इससे पहले जेपीएससी की पूर्व सदस्य डॉ अजीता भट्टाचार्य से पूछताछ कर चुकी है. अब आयोग की एक अन्य पूर्व सदस्य डॉ अनिमा हांसदा से भी पूछताछ की जाएगी. मुख्य सचिव कार्यालय के कर्मी धर्मेंद्र से भी पूछताछ सीआईडी ने मुख्य सचिव कार्यालय के कर्मी धर्मेंद्र पर भी शिकंजा कसना शुरू कर दिया है. रिमांड की अवधि बढ़ाए जाने के बाद उससे दोबारा पूछताछ की जा रही है. बुधवार को सीआईडी ने अन्य आरोपियों के बयानों के आधार पर धर्मेंद्र से कई सवाल पूछे. उससे पूछा गया कि पूर्व मुख्य सचिव एल खियांग्ते से उसके कैसे संबंध थे. टीडीपीएल और बिसिस कंपनी के संपर्क में वह कैसे आया और दोनों से पैसों का लेन-देन कब और किस माध्यम से हुआ. पूछताछ में धर्मेंद्र ने कहा कि एल खियांग्ते मुख्य सचिव थे, तभी से वह उनके संपर्क में था. पांच दिनों की रिमांड पर लिए गए बिंसिस के निदेशक जेएसएससी की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी के आरोप में मुंबई से गिरफ्तार बिंसिस कंपनी के निदेशक अरुण कुमार को सीआईडी ने बुधवार को पांच दिनों की

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

होर्मुज पर ट्रंप की ‘स्टील की दीवार’ वाले दावे को ईरान ने नकारा, कहा- शर्तें माने अमेरिका तभी खुलेगा रास्ता

Strait Of Hormuz: ईरान ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के होर्मुज स्ट्रेट पर पूर्ण नियंत्रण वाले दावे को खारिज कर दिया है. ईरान का कहना है कि यह अहम समुद्री मार्ग अभी भी अवरुद्ध है और तेहरान की शर्तें स्वीकार किए जाने तक इसे दोबारा पूरी तरह नहीं खोला जाएगा. फारस की खाड़ी स्ट्रेट प्राधिकरण (PGSA) ने एक पोस्ट में कहा कि अमेरिकी अधिकारियों के बार-बार यह कहने से कि होर्मुज स्ट्रेट अब अवरुद्ध नहीं है, जमीनी स्थिति नहीं बदलती. अमेरिकी अधिकारियों के दावे और बार-बार दिए गए बयान कि होर्मुज स्ट्रेट अब अवरुद्ध नहीं है, वास्तविकता को नहीं बदलते हैं. होर्मुज स्ट्रेट अभी भी अवरुद्ध है और ईरान की शर्तें स्वीकार किए जाने तक इसे दोबारा नहीं खोला जाएगा- फारस की खाड़ी स्ट्रेट प्राधिकरण ट्रंप ने किया था पूर्ण नियंत्रण का दावा ईरान की यह प्रतिक्रिया ट्रंप के उस बयान के कुछ घंटों बाद आई, जिसमें उन्होंने ट्रुथ सोशल पर दावा किया था कि अमेरिका का होर्मुज स्ट्रेट पर पूर्ण नियंत्रण है और वह इसे बरकरार रखेगा. ट्रंप ने क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिक तैनाती को स्टील की दीवार बताया था. अमेरिका का होर्मुज स्ट्रेट पर पूर्ण नियंत्रण है. मुझे लगता है कि हम इसे बरकरार रखेंगे. हमारी नौसैनिक नाकाबंदी को हर कोई स्टील की दीवार कह रहा है और ईरान इसके बारे में कुछ नहीं कर सकता- डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान ने रखीं होर्मुज स्ट्रेट खोलने की शर्तें ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के नव नियुक्त प्रमुख मोहसेन रेजाई ने भी साफ किया है कि तेहरान होर्मुज स्ट्रेट को तब तक पूरी तरह नहीं खोलेगा, जब तक अमेरिका उसकी सभी शर्तों को पूरा नहीं करता. रेजाई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा अमेरिका को युद्ध और नाकाबंदी खत्म करनी होगी ईरान की जब्त संपत्तियों को जारी करना होगा लेबनान और गाजा समेत पूरे क्षेत्र में युद्धविराम पर सहमत होना होगा. कई हफ्तों से बना हुआ है तनाव इस क्षेत्र में ईरानी, इजरायली और अमेरिकी सेनाओं के बीच कई हफ्तों से सैन्य तनाव बना हुआ है. इससे बड़े क्षेत्रीय संघर्ष की आशंका भी बढ़ रही है. तेहरान पहले भी चेतावनी दे चुका है कि यदि ईरान पर बाहरी दबाव बढ़ता है तो समुद्री यातायात को प्रतिबंधित या बाधित किया जा सकता है. दूसरी ओर, अमेरिका ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी है और नौवहन की स्वतंत्रता को अपनी प्राथमिक सुरक्षा चिंताओं में रखा है. पर्दे के पीछे बातचीत भी जारी ट्रंप और ईरान की ओर से कड़े बयान ऐसे समय आ रहे हैं, जब दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच अप्रत्यक्ष राजनयिक बातचीत भी चल रही है. इन चर्चाओं का मकसद होर्मुज संकट को कम करना और नियमित समुद्री यातायात बहाल करने की शर्तों पर सहमति बनाना है. क्यों इतना अहम है होर्मुज स्ट्रेट? होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है. इस रास्ते से वैश्विक पेट्रोलियम व्यापार का करीब 20 प्रतिशत गुजरता है. ऐसे में इस क्षेत्र में तनाव बढ़ने का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है. Also Read: डोनाल्ड ट्रंप का दावा, होर्मुज में अमेरिकी नौसेना ने खड़ी की स्टील की दीवार; कहा- तेहरान कुछ नहीं कर सकता The post होर्मुज पर ट्रंप की ‘स्टील की दीवार’ वाले दावे को ईरान ने नकारा, कहा- शर्तें माने अमेरिका तभी खुलेगा रास्ता appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया? जानें भारत में सूतक काल मान्य होगा या नहीं!

Chandra Grahan 2026: बीती रात यानी 12 अगस्त 2026 को साल का अंतिम सूर्य ग्रहण लगा. अब कुछ ही दिनों बाद साल का दूसरा और आखिरी चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है. खास बात यह है कि यह चंद्र ग्रहण रक्षाबंधन के दिन पड़ेगा. ऐसे में भाई-बहन के इस खास त्योहार पर ग्रहण का प्रभाव और हिंदुस्तान में इसके सूतक काल की स्थिति जानना जरूरी है. ज्योतिषीय दृष्टि से भी इस ग्रहण को महत्वपूर्ण माना जा रहा है. कब लगेगा चंद्र ग्रहण 2026? 28 अगस्त को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण लगेगा. ग्रहण की शुरुआत सुबह 6 बजकर 55 मिनट पर उपच्छाया के स्पर्श से होगी. इसके बाद सुबह 8 बजकर 4 मिनट पर चंद्रमा प्रच्छाया में प्रवेश करेगा. वहीं, परमग्रास का समय सुबह 9 बजकर 43 मिनट रहेगा. यह आंशिक चंद्र ग्रहण होगा. खास बात यह है कि इस दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा, ऐसे में चंद्र ग्रहण को लेकर लोगों की खास दिलचस्पी बनी हुई है. ज्योतिषाचार्य डॉ एन के बेरा ने बताया कि पंचांग के अनुसार, ग्रहण श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि पर लगेगा, जिस दिन रक्षाबंधन का पर्व भी मनाया जाएगा. यह खंडग्रास यानी आंशिक चंद्र ग्रहण होगा. क्या हिंदुस्तान में मान्य होगा सूतक काल? यह चंद्र ग्रहण हिंदुस्तान में दिखाई नहीं देगा. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस स्थान पर ग्रहण दिखाई नहीं देता, वहां सामान्य तौर पर ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं माना जाता. इसलिए हिंदुस्तान में इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल मान्य नहीं होगा और रक्षाबंधन से जुड़े पूजा-पाठ सहित सामान्य धार्मिक कार्य किए जा सकेंगे. यदि चंद्र ग्रहण हिंदुस्तान में दिखाई देता, तो मान्यता के अनुसार ग्रहण शुरू होने से करीब 9 घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता. इस दौरान पूजा-पाठ, भोजन और शुभ कार्यों को लेकर कई धार्मिक नियम माने जाते हैं. कहां दिखाई देगा चंद्र ग्रहण? 28 अगस्त का यह आंशिक चंद्र ग्रहण हिंदुस्तान में दिखाई नहीं देगा. हालांकि, यूरोप, अफ्रीका, पश्चिमी एशिया और उत्तर एवं दक्षिण अमेरिका के कई हिस्सों में इसे देखा जा सकेगा. दृश्यता स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. ग्रहण के दौरान क्या करें? धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ग्रहण का समय मंत्र जाप और आध्यात्मिक साधना के लिए विशेष माना जाता है. इस दौरान भगवान का स्मरण करते हुए चंद्र मंत्र, नवग्रह मंत्र, गायत्री मंत्र या महामृत्युंजय मंत्र का जाप किया जा सकता है. ग्रहण समाप्त होने के बाद स्नान और जरूरतमंदों को दान करने की परंपरा भी बताई गई है. ये भी पढ़ें: अगस्त 2026 में दिखेगा ‘ब्लड मून’, आसमान में नजर आएगा अद्भुत चंद्र ग्रहण रक्षाबंधन पर ग्रहण का क्या असर? चूंकि यह ग्रहण हिंदुस्तान में दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां रक्षाबंधन की पूजा और राखी बांधने की परंपराओं पर ग्रहण संबंधी रोक लागू नहीं होगी. भाई-बहन सामान्य तरीके से त्योहार मना सकते हैं. हालांकि, ग्रहण को लेकर ज्योतिषीय मान्यताओं में राशि और नक्षत्र के आधार पर इसके प्रभाव की अलग-अलग व्याख्या की जाती है. The post रक्षाबंधन पर चंद्र ग्रहण का साया? जानें हिंदुस्तान में सूतक काल मान्य होगा या नहीं! appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

लोन लेने वालों के लिए RBI का नया फरमान, ब्याज दर से लेकर EMI तक बदल सकता है पूरा हिसाब

लोन लेने वाले ग्राहकों के लिए Reserve Bank of India (RBI) ने ब्याज दरों को लेकर नया प्रस्ताव रखा है. केंद्रीय बैंक ने सभी रेगुलेटेड एंटिटीज (REs) के लिए लोन की ब्याज दरों पर एक समान और साफ नियम बनाने का ड्राफ्ट पेश किया है. इसका मकसद बैंकों और NBFCs में ब्याज दर तय करने की प्रक्रिया को पारदर्शी बनाना और ग्राहकों को ज्यादा साफ जानकारी देना है. प्रस्ताव में फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट दोनों तरह के लोन के लिए बेंचमार्क और स्प्रेड तय करने का तरीका स्पष्ट करने की बात कही गई है. यानी ग्राहक को यह समझने में आसानी होगी कि उसके लोन की ब्याज दर आखिर कैसे तय हुई. क्या है RBI का नया प्रस्ताव? नए फ्रेमवर्क के तहत सभी लोन को बेंचमार्क रेट और एक तय स्प्रेड से जोड़ा जाएगा. यह स्प्रेड किसी रेगुलेटेड एंटिटी की बोर्ड-अप्रूव्ड और पारदर्शी इंटरनल पॉलिसी के आधार पर तय होगा. प्रस्ताव के मुताबिक लोन की कीमत बेंचमार्क रेट से कम नहीं रखी जा सकेगी. जेफरीज के मुताबिक कई NBFCs फिलहाल PLR से कम दर पर लोन देते हैं. ऐसे मामलों में उन्हें अपना बेंचमार्क बदलकर नए फ्रेमवर्क के मुताबिक करना पड़ सकता है. फ्लोटिंग रेट लोन में क्या बदलेगा? RBI ने बैंकों के फ्लोटिंग रेट पर्सनल और MSME लोन के लिए एक्सटर्नल बेंचमार्क से लिंकिंग को बरकरार रखने का प्रस्ताव दिया है. वहीं MCLR की गणना को भी एक समान करने की बात कही गई है. इसके तहत MCLR की गणना नए डिपॉजिट और बॉरोइंग की मंथली मार्जिनल कॉस्ट के 3-मंथ मूविंग एवरेज के आधार पर करने का प्रस्ताव है. इसके अलावा फ्लोटिंग रेट लोन की इंटरेस्ट रेट रीसेट पीरियॉडिसिटी को अधिकतम 3 महीने तक रखने का प्रस्ताव है. ये भी पढ़ें: 10 और 20 रुपये के आएंगे प्लास्टिक नोट, प्रशासन ने 200 करोड़ नोटों के परीक्षण को दी मंजूरी ब्याज की गणना कैसे होगी? RBI ने इंटरेस्ट कैलकुलेशन को भी एक समान करने का प्रस्ताव रखा है. इसके तहत: ब्याज डेली रिड्यूसिंग बैलेंस के आधार पर निकाला जाएगा. एक्चुअल/एक्चुअल डे-काउंट कन्वेंशन लागू करने का प्रस्ताव है. ब्याज में मंथली रेस्ट का इस्तेमाल होगा. WCDL फैसिलिटीज में फिक्स्ड-टेन्योर ड्रॉडाउन को इंटरेस्ट रेट और स्प्रेड तय करने के लिए अलग लोन माना जा सकता है. जेफरीज का मानना है कि एक्चुअल/एक्चुअल डे-काउंट कन्वेंशन लागू करने में शुरुआत में कुछ ऑपरेशनल चुनौतियां आ सकती हैं. ग्राहकों और लेंडर्स पर क्या असर होगा? Citi के मुताबिक RBI का कंसोलिडेटेड इंटरेस्ट रेट्स डायरेक्शंस फ्रेमवर्क ट्रांसपेरेंसी, बॉरोअर प्रोटेक्शन और रेट गवर्नेंस को मजबूत करने की दिशा में है. प्रस्ताव के कुछ अहम बदलाव इस तरह हैं: प्रस्तावित बदलाव क्या मतलब है स्प्रेड रिविजन नॉन-CRP स्प्रेड कंपोनेंट्स 3 साल तक लॉक रहेंगे; CRP में बदलाव क्रेडिट प्रोफाइल बदलने पर ही होगा APR कैप ₹50,000 तक के माइक्रोफाइनेंस और स्मॉल-वैल्यू रिटेल लोन के लिए APR की अधिकतम सीमा तय होगी डे-काउंट एक्चुअल/एक्चुअल कन्वेंशन को स्टैंडर्ड किया जाएगा रीसेट पीरियड फ्लोटिंग रेट लोन में रीसेट पीरियड अधिकतम 3 महीने होगा MCLR 3 महीने के नए डिपॉजिट और बॉरोइंग की औसत मार्जिनल कॉस्ट के आधार पर गणना होगी APR कैप से हाई-यील्ड स्मॉल-टिकट लोन पर निर्भर लेंडर्स की कमाई पर दबाव पड़ सकता है. साथ ही शुरुआत में कंप्लायंस कॉस्ट और कामकाज की जटिलता बढ़ सकती है. हालांकि, प्रस्ताव में 29 अप्रैल की ट्रांजिशन डेडलाइन से लेंडर्स को तैयारी के लिए समय मिलने की बात कही गई है. ये भी पढ़ें: Delhi Lakshmi Yojana : कब आएगी लक्ष्मी योजना की पहली किस्त? यहां जानें अपडेट The post लोन लेने वालों के लिए RBI का नया फरमान, ब्याज दर से लेकर EMI तक बदल सकता है पूरा हिसाब appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

हाजीपुर में मॉर्निंग वॉक पर निकले ठेकेदार की पांच गोली मारकर हत्या, बिना पोस्टमार्टम कराए शव को घर लेकर लौटे परिजन

Hajipur Murder News : हाजीपुर जिला के सदर थाना क्षेत्र के दिग्घी नया टोला में गुरुवार की सुबह अपराधियों ने कंस्ट्रक्शन ठेकेदार राम नरेश राय की गोली मारकर हत्या कर दी. अपराधियों ने ठेकेदार को नजदीक से ताबड़तोड़ पांच गोलियां मारीं, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई. घटना के बाद से इलाके में दहशत का माहौल है और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है. रोज की तरह टहलने निकले थे ठेकेदार प्राप्त जानकारी के अनुसार, मृतक राम नरेश राय कंस्ट्रक्शन का काम करते थे. वह हर दिन की तरह सुबह में टहलने के लिए निकलते थे आज भी सुबह में वह निकले थे लेकिन उनके साथ कोई भी उनके साथ ही नहीं था हर दिन उनके साथ लगभग 5 से 6 लोग सुबह में रहते थे. बिना पोस्टमार्टम कराए शव लेकर लौटे स्वजन घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई. परिजनों ने आनन-फानन में शव को सदर अस्पताल पहुंचाया, लेकिन बाद में बिना पोस्टमार्टम कराए ही स्वजन शव को अपने घर वापस ले आए. हालांकि, घटना की सूचना मिलते ही सदर थाना की पुलिस मौके पर पहुंच गई और पूरे मामले की बारीकी से छानबीन में जुट गई है. परिवार का विवरण मृतक राम नरेश राय अपने घर पर माता-पिता के साथ रहते थे. उनकी पत्नी पटना में रहकर उनके इकलौते बेटे की पढ़ाई-लिखाई संभाल रही हैं. वही परिवार में कोहराम मच गया है. पुलिस का कहना है कि अपराधियों की पहचान और हत्या के कारणों का पता लगाने के लिए हर बिंदु पर जांच की जा रही है. समाचार अपडेट हो रही है… Also Read : हाजीपुर में कर्नाटक पुलिस की छापेमारी, 98 लाख लूट और हत्या का आरोपी को किया गिरफ्तार The post हाजीपुर में मॉर्निंग वॉक पर निकले ठेकेदार की पांच गोली मारकर हत्या, बिना पोस्टमार्टम कराए शव को घर लेकर लौटे परिजन appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

JPSC नियुक्ति घोटाला: जिस सिंडिकेट से जुड़ा है अभय, उसका नेटवर्क पूरे देश में, दर्जनों परीक्षाओं में की है गड़बड़ी

JPSC Recruitment Scam: सीआईडी जेपीएससी की विभिन्न परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों की जांच करने के क्रम में रोज नए खुलासे कर रही है. इस क्रम में जांच एजेंसी को भर्ती की दूसरी परीक्षाओं के बारे में भी रोज नई जानकारी मिल रही है. सार यह है कि टीडीपीएल, बिंसिस, आइसीएन जैसी कुछ कंपनियां झारखंड ही नहीं, देश के कई राज्यों में परीक्षाओं का संचालन करती रहती हैं. लेकिन इनके नाम नियुक्ति घोटाले में सामने आ रहे हैं. बिंसिस निदेशक गिरफ्तार, जांच के घेरे में ICN इंडिया के निदेशक बिंसिस और आईसीएन पर आरोप है कि दोनों के निदेशकों ने सीजीएल समेत अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी और फर्जीवाड़ा की. बताया जाता है कि इन कंपनियों का एक सिंडिकेट है, जिसमें पूरे देश के लोग जुड़े हैं. झारखंड से अभय तिवारी इसी सिंडिकेट का एक अहम हिस्सा था, जबकि मुख्य सचिव कार्यालय में कार्यरत धर्मेंद्र भी इस सिंडिकेट का एक अहम कड़ी बन चुका था. अब जांच के आगे बढ़ने के क्रम में नई कंपनी, नए निदेशक और सिंडिकेट के नए नामों का खुलासा हो रहा है. इसी कड़ी में अब नया नाम जेएसएससी में परीक्षा संचालन का काम कर चुकी कंपनी बिंसिस का सामने आया है. जिसके निदेशक अरुण शर्मा है और जिन्हें रांची पुलिस ने मंगलवार को मुंबई से गिरफ्तार किया. इसके अलावा एक नई कंपनी आईसीएन इंडिया का नाम सामने आया है, जिसके निदेशक मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह हैं. ब्लैकलिस्ट के बाद नाम बदलकर काम हासिल करने का आरोप दोनों आरोपियों के विरुद्ध शिकायत मिली है कि उन्होंने झारखंड में हुई स्नातक स्तरीय परीक्षा सीजीएल समेत अन्य परीक्षाओं में गड़बड़ी की. दोनों कंपनियों ने जेएसएससी में परीक्षा संचालन का काम किया था. बताया जा रहा है कि वर्ष 2023 में बिंसिस टेक्नोलॉजी को ब्लैकलिस्ट किया गया, जिसके बाद इन्हीं लोगों ने नाम बदलकर आईसीएन इंडिया के नाम पर आयोग से जुड़ी परीक्षाओं का काम हासिल कर लिया. जिसमें जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष के निजी सहायक ब्रज कुमार की मदद ली गई. इन लोगों ने गलत तरीके से टेंडर लिया और बाद में ब्लैकलिस्ट भी हुए. लेकिन जो भी कंपनी यहां काम लेती थी, उससे ये सांठगांठ कर लेते थे. सूत्रों के अनुसार मिथिलेश सिंह उर्फ आरके सिंह ने अपने पुत्र नवीन किशोर के नाम पर दिल्ली के द्वारका स्थित आईसीएन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड बनाई. वहीं अरुण कुमार पर आरोप है कि अपने ऊपर मुकदमा दर्ज होने के बाद वह अपने चालक भूषण पासवान और सहयोगी अजीत कुमार को बिंसिस टेक्नोलॉजी में निदेशक बनाकर स्वयं हिस्सेदार बने रहे. बहुत कम कर्मियों के बाद भी फर्जी कागजातों के आधार पर परीक्षा के काम का टेंडर हासिल किया गया. ये भी पढ़ें- रांची में स्त्री यात्रियों के लिए बढ़ेगी सुविधा, शहर में चलेंगी 10 नई पिंक सिटी बसें ’14वीं JPSC में 100 से अधिक, बैकलॉग में 100 अभ्यर्थी पास कराए’ टीडीपीएल कंपनी कर्मी उस्मान ने बताया कि उसने 2025 में टेक्निकल स्टाफ के रूप में टीडीपीएल में काम शुरू किया. वहीं प्रदीप कुमार सिंह इंजीनियर के रूप में कार्यरत थे. ओएमआर का काम प्रदीप कुमार और ओएमएस का काम हेमंत कुमार वर्मा करते थे. इन सबमें टेंपरिंग और मैनुपुलेशन का काम हेमंत कुमार वर्मा और संजय मिलकर करते थे. संजय, अभय तिवारी और श्वेता के संपर्क में रहता था. टेंपरिंग के लिए कंपनी के निदेशक रामवीर सिंह और सतपाल सिंह की टीम बाहर से आती थी. वह टीम की मॉनिटरिंग करता था. इस काम के लिए उसे बिल एमाउंट का 20% देने का वादा किया गया था. उसने बताया कि 14वीं जेपीएससी में 100 से अधिक, एसीएफ एफआरओ में सौ, जेपीएससी बैकलॉग में भी 100 अभ्यर्थी पैसे देकर पास हुए. रामवीर सिंह ने सबकुछ मैनेज किया, प्रदीप कुमार सिंह ने ओएमआर शीट में और संजय कुमार ने मेंस की आंसरसीट में गड़बड़ी की. इन परीक्षाओं में गड़बड़ी कराने का है आरोप रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की परीक्षा, रेल भर्ती, बिहार सिपाही भर्ती, जेपीएससी परीक्षाओं, सैन्य अभियंता सेवा पुणे की वर्ष 2021-22 की परीक्षा, जेएसएससी जेई परीक्षा, स्नातक स्तरीय परीक्षा, राजस्थान पीसीएस, तेलंगाना मेडिकल परीक्षा, पंजाब राज्य की परीक्षाएं और एनटीपीसी की परीक्षाएं. परीक्षा में CDPO 10-10 लाख लेकर कराई थी नियुक्ति अभय तिवारी ने अपने बयान में एक आईएएस अधिकारी का नाम भी लिया है. उसने बताया है कि टीडीपीएल के रामवीर सिंह और सतपाल सिंह संबंधित आईएएस अधिकारी के यहां आते-जाते थे. अभय ने कहा कि उसने उन लोगों से सुना था कि उक्त अधिकारी के भी तीन लोगों का चयन जेपीएससी 14वीं परीक्षा में कराया गया है. इसके अलावा अभय तिवारी ने यह भी बताया कि सीडीपीओ की परीक्षा में भी टीडीपीएल ने 10-10 लाख रुपए लेकर जनरल सीट पर झारखंड के बाहर के अभ्यर्थियों को सफल कराया. तिवारी ने बताया कि हरिओम टावर में सानंद प्रकाश के नाम पर कमरा लिया गया था. इसके अलावा अन्य जगहों पर लखनऊ, पंजाब और हरियाणा से उसके एजेंट सतपाल एवं मिश्रा लोगों को बुलाते थे और उनसे उत्तर लिखवाते थे. अच्छा उत्तर लिखवाने के लिए प्रोफेसरों की भी मदद ली जाती थी. एसीएफ और एफआरओ की परीक्षा में पास कराने के लिए उसने 40 लाख रुपए दिए. ये भी पढ़ें- आंदोलनकारी छात्रों के बीच पहुंचे रघुवर दास, बोले- मांगें पूरी नहीं हुईं तो मैं भी अनशन पर बैठूंगा The post JPSC नियुक्ति घोटाला: जिस सिंडिकेट से जुड़ा है अभय, उसका नेटवर्क पूरे देश में, दर्जनों परीक्षाओं में की है गड़बड़ी appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

सुबह उठकर सबसे पहले फोन देखते हैं? बदल लें ये आदत, जानें ‘No-Phone Morning’ के फायदे

आज के समय में मोबाइल फोन हमारी जिंदगी का जरूरी हिस्सा बन चुका है. सुबह आंख खुलते ही कई लोगों का हाथ सबसे पहले फोन की तरफ जाता है. कोई सोशल मीडिया चेक करता है, तो कोई मैसेज और ईमेल देखने लगता है. लेकिन क्या दिन की शुरुआत इसी तरह करना सही है? इसी सोच के साथ इन दिनों ‘नो-फोन मॉर्निंग’ का ट्रेंड काफी चर्चा में है. क्या है ‘नो-फोन मॉर्निंग’? नो-फोन मॉर्निंग का मतलब है कि सुबह उठने के तुरंत बाद कुछ समय तक मोबाइल से दूरी बनाए रखना. इसमें लोग करीब 30 मिनट से एक घंटे तक फोन नहीं देखते. इस दौरान वे अपनी सुबह की शुरुआत बिना स्क्रीन के करते हैं. आप चाहें तो इस समय टहल सकते हैं, एक्सरसाइज कर सकते हैं, गहरी सांस ले सकते हैं या कुछ देर शांत बैठ सकते हैं. सुबह फोन न देखने से मूड पर क्या असर पड़ता है? सुबह उठते ही सोशल मीडिया, समाचारें या काम से जुड़े मैसेज देखने से दिमाग पर एक साथ काफी जानकारी आ जाती है. इससे दिन की शुरुआत तनाव और बेचैनी के साथ हो सकती है. वहीं, कुछ समय फोन से दूर रहने पर दिमाग को आराम से जागने और दिन के लिए तैयार होने का मौका मिलता है. सुबह फोन न देखने से आपका ध्यान अपने काम पर बेहतर तरीके से लग सकता है. खासकर सोशल मीडिया से दूरी बनाने पर दूसरों की जिंदगी से अपनी तुलना करने की आदत भी कम हो सकती है. इससे मन हल्का और मूड बेहतर महसूस हो सकता है. सुबह की शुरुआत ऐसे करें सुबह उठकर सबसे पहले एक गिलास पानी पिएं और कुछ मिनट खुली हवा में रहें. हल्की स्ट्रेचिंग या वॉक करें. चाहें तो कुछ देर मेडिटेशन या जर्नलिंग भी कर सकते हैं. अगर फोन से दूरी बनाना मुश्किल लगता है, तो उसे रात में ही बेड से दूर रखकर चार्ज करें. हालांकि, हर व्यक्ति पर इसका असर अलग हो सकता है. जरूरी नहीं कि आपको पूरे एक घंटे फोन से दूर रहना ही पड़े. शुरुआत 15-20 मिनट से करें और धीरे-धीरे इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं. यह भी पढ़ें: शिशु का पढ़ाई में नहीं लगता मन? स्टडी रूम से जुड़े इन वास्तु के नियमों पर दें ध्यान The post सुबह उठकर सबसे पहले फोन देखते हैं? बदल लें ये आदत, जानें ‘No-Phone Morning’ के फायदे appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

2007 वाला करिश्मा दोहराएंगी मायावती? यूपी में अखिलेश-योगी के बीच BSP का ‘कमबैक प्लान’ तैयार!

UP Politics: उत्तर प्रदेश की सियासत में 2027 का विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन इसकी तैयारी का असर अभी से दिखने लगा है. कभी यूपी की सत्ता पर पूर्ण बहुमत के साथ राज करने वाली बहुजन समाज पार्टी अब अपनी खोई हुई जमीन वापस पाने की कोशिश में है. ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या मायावती 2027 में फिर मजबूत वापसी कर पाएंगी और अखिलेश यादव व योगी आदित्यनाथ के बीच अपनी सियासी जगह बना पाएंगी? BSP के सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है? बीएसपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपना पुराना वोट बैंक वापस जोड़ने की है. इसी बीच चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को लेकर भी चर्चा तेज है. सवाल उठ रहा है कि क्या मायावती 2027 से पहले किसी पेशेवर चुनावी रणनीतिकार की मदद लेंगी? हालांकि, अब तक प्रशांत किशोर और मायावती या बीएसपी के किसी शीर्ष नेता के बीच औपचारिक बातचीत की कोई पुष्टि नहीं हुई है. 2007 में सत्ता के शिखर पर पहुंची थी BSP बीएसपी के सियासी सफर पर नजर डालें तो पार्टी की स्थिति में बड़ा बदलाव आया है. 2007 के विधानसभा चुनाव में बीएसपी ने 206 सीटें जीतकर पूर्ण बहुमत की प्रशासन बनाई थी. लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में पार्टी सिर्फ एक सीट पर सिमट गई. इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी का खाता तक नहीं खुल सका. यही वजह है कि 2027 के चुनाव से पहले पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपनी सियासी जमीन को फिर से मजबूत करने की है. प्रशांत किशोर का नाम क्यों आया चर्चा में? महाराष्ट्र में हाल ही में चुनावी रणनीतिकार और जन सुराज पार्टी के नेता प्रशांत किशोर ने सुनेत्रा पवार और उनके बेटे पार्थ पवार से मुंबई में लंबी मुलाकात की. इस दौरान महाराष्ट्र की भविष्य की नेतृत्व और मराठा, दलित व मुस्लिम समीकरण को लेकर चर्चा होने की बात सामने आई. क्या मायावती भी PK की मदद लेंगी? इसी घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहा है कि क्या मायावती भी यूपी चुनाव से पहले प्रशांत किशोर की मदद ले सकती हैं. हालांकि, बीएसपी की अब तक की नेतृत्व को देखें तो मायावती बाहरी चुनावी रणनीतिकारों के बजाय अपने पारंपरिक कैडर, भाईचारा कमेटियों और राज्य स्तरीय समन्वयकों के नेटवर्क पर भरोसा करती रही हैं. अखिलेश यादव भी कर चुके हैं I-PAC के साथ काम वहीं, अखिलेश यादव प्रशांत किशोर की कंपनी I-PAC के मार्गदर्शन में काम कर चुके हैं. ऐसे में 2027 के चुनाव से पहले बीएसपी और प्रशांत किशोर के संभावित समीकरण को लेकर सियासी चर्चा होना स्वाभाविक है, हालांकि इसकी कोई औपचारिक पुष्टि नहीं हुई है. दलित वोट बैंक BSP की सबसे बड़ी ताकत रहा बीएसपी का सबसे मजबूत आधार लंबे समय से दलित वोट रहा है, खासकर जाटव समाज. पार्टी की सोशल इंजीनियरिंग में दलित, ब्राह्मण और मुस्लिम समीकरण भी अहम रहा है. लेकिन पिछले एक दशक में गैर-जाटव दलित समुदायों में बीजेपी ने अपनी पकड़ मजबूत की है. पासी, धोबी, वाल्मीकि और कोरी जैसी जातियों के बीच बीजेपी की पैठ बढ़ी है. मुस्लिम वोटों के खिसकने से भी लगा झटका दूसरी तरफ, 2019 के गठबंधन और फिर 2022 व 2024 के चुनावों में बीएसपी की कमजोर स्थिति के बीच मुस्लिम मतदाताओं ने बीजेपी को हराने के लिए बड़े पैमाने पर सपा और कांग्रेस का रुख किया. इसका सीधा असर बीएसपी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ा. जानकारों के मुताबिक सड़क पर उतरना जरूरी नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि सत्ता से बाहर होने के बाद बीएसपी और उसके नेताओं की जमीनी सक्रियता कम हुई. आंदोलन और सड़क पर संघर्ष से दूरी को भी पार्टी के कमजोर होते जनाधार की एक बड़ी वजह माना जा रहा है. सिर्फ सोशल मीडिया से नहीं बनेगी बात जानकारों के मुताबिक अगर बीएसपी 2027 में वापसी करना चाहती है तो उसे केवल प्रेस नोट और सोशल मीडिया तक सीमित रहने के बजाय दलित, पिछड़े और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर जमीन पर उतरना होगा. पेपर लीक से महंगाई तक मुद्दों पर आंदोलन की जरूरत यूपी विधानसभा चुनाव 2027 से पहले पेपर लीक, महंगाई और कस्टडी डेथ जैसे मुद्दों को लेकर आंदोलन खड़ा करना और गैर-जाटव दलितों व अति-पिछड़ों को संगठन में अहम जिम्मेदारी देना पार्टी के लिए जरूरी हो सकता है. ‘संविधान बचाओ’ नैरेटिव से BSP को नुकसान 2024 में सपा और कांग्रेस ने ‘संविधान बचाओ’ के नैरेटिव के जरिए दलित वोटों में सेंध लगाई थी. ऐसे में बीएसपी के सामने अपने पारंपरिक मतदाताओं को फिर से अपने साथ जोड़ने की चुनौती है. मायावती अब भी दलित नेतृत्व का बड़ा चेहरा यूपी में मायावती आज भी दलित समाज की सबसे बड़ी और सर्वमान्य राष्ट्रीय नेताओं में शामिल हैं. हालांकि, उनकी आक्रामक नेतृत्व में आई कमी से पार्टी कैडर में निराशा की बात कही जाती है. वहीं, चंद्रशेखर आजाद पिछले कुछ वर्षों में ज्यादा आक्रामक अंदाज में नेतृत्व करते नजर आए हैं. आकाश आनंद से BSP को नई उम्मीद दूसरी ओर, मायावती के भतीजे आकाश आनंद को बीएसपी का भविष्य माना जा रहा है. फिलहाल वह पार्टी के नेशनल कोऑर्डिनेटर हैं. अपनी जनसभाओं में आकाश आनंद आक्रामक भाषण शैली के साथ युवाओं, खासकर Gen-Z से संवाद बनाने की कोशिश करते दिखाई दिए हैं. रोजगार और शिक्षा पर युवाओं से कनेक्ट करने की कोशिश आकाश आनंद ने हाथरस के सादाबाद में रोजगार, शिक्षा और स्वाभिमान जैसे मुद्दों को लेकर प्रशासन पर निशाना साधा. वहीं, पार्टी के संगठनात्मक फैसलों में अब भी मायावती का प्रभाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है. ऐसे में 2027 का विधानसभा चुनाव बीएसपी के लिए महज सत्ता में वापसी की कोशिश नहीं, बल्कि अपने पुराने नेतृत्वक आधार को दोबारा मजबूत करने और उसे बचाए रखने की भी बड़ी परीक्षा माना जा रहा है. पदयात्राओं से कैडर में आ सकती है नई ऊर्जा अगर मायावती आकाश आनंद को संगठन और चुनावी फैसलों में ज्यादा स्वतंत्रता देती हैं और वह चुनाव से पहले पूरे उत्तर प्रदेश में आक्रामक पदयात्राएं करते हैं, तो पार्टी के कमजोर पड़े जनाधार में नई ऊर्जा आ सकती है. यह भी पढ़ें: 2027 विधानसभा चुनाव के लिए अखिलेश यादव का मास्टर प्लान तैयार, सर्वे टीम तय करेगी किसे मिलेगा सपा का टिकट The post 2007 वाला करिश्मा दोहराएंगी मायावती? यूपी में अखिलेश-योगी के बीच

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

सोनू को सिविल सर्विस, अभिजीत को कंप्यूटर साइंस में बनाना था करियर, लद्दाख ट्रिप ने छीन ली दो दोस्तों की जिंदगी

Bhojpur Two Youths Dies In Ladakh landslide: लेह-लद्दाख की खूबसूरत वादियों में घूमने और जिंदगी के सुनहरे सपने देखने निकले भोजपुर के दो होनहार युवकों की यात्रा मंगलवार को खारदुंगला दर्रे के पास हुए भूस्खलन के साथ हमेशा के लिए थम गयी. एक ही बाइक पर सवार अभिजीत आनंद और सोनू कुमार पहाड़ से गिरे मलबे और भारी पत्थरों की चपेट में आ गये. हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गयी. एक तरफ अभिजीत कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने की तैयारी कर रहा था, तो दूसरी ओर सोनू का सपना सिविल सर्विस में जाने का था. परिवार को उम्मीद थी कि दोनों पढ़-लिखकर अपने सपनों को पूरा करेंगे, लेकिन लद्दाख की एक यात्रा ने दो परिवारों की जिंदगी में ऐसा खालीपन छोड़ दिया, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा. दस दोस्तों ने साथ शुरू की थी लद्दाख यात्रा अभिजीत और सोनू अकेले लद्दाख घूमने नहीं गये थे. उनके साथ कुल 10 युवकों का ग्रुप था. इनमें चार युवक बिहिया के रहने वाले थे, जबकि छह युवक दिल्ली से इस यात्रा में शामिल हुए थे. सभी दोस्तों ने पहले जम्मू पहुंचने की योजना बनाई. जम्मू पहुंचने के बाद पांच बाइक किराये पर ली गयीं और पूरा ग्रुप बाइक से लेह-लद्दाख की ओर रवाना हुआ. दोस्तों के लिए यह यात्रा लंबे समय से बनायी गयी योजना का हिस्सा थी. पहाड़, बर्फीली चोटियां, ऊंचे दर्रे और लद्दाख की प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने का उत्साह सभी के बीच था. यात्रा के दौरान युवकों ने कई जगहों पर तस्वीरें भी खींचीं और यादें संजोयीं. उन्हें क्या पता था कि यही यात्रा उनके दो साथियों की जिंदगी की आखिरी यात्रा बन जाएगी. चार बाइकों पर सवार आठ युवक बच गये मंगलवार को जब पूरा ग्रुप खारदुंगला दर्रे के पास से गुजर रहा था, तभी अचानक पहाड़ से भूस्खलन हुआ. देखते ही देखते भारी मलबा और पत्थर सड़क की ओर आ गिरे. इस दौरान चार बाइकों पर सवार आठ युवक किसी तरह सुरक्षित बच गये, लेकिन एक बाइक पर सवार अभिजीत और सोनू मलबे की चपेट में आ गये. हादसा इतना अचानक हुआ कि दोनों को संभलने या बचने का मौका तक नहीं मिला. भूस्खलन के मलबे और भारी पत्थरों की चपेट में आने से दोनों की मौत हो गयी. हादसे की समाचार जैसे ही उनके साथियों और स्थानीय लोगों के माध्यम से परिजनों तक पहुंची, बिहिया में मातम पसर गया. एक साथ यात्रा पर निकले दस दोस्तों में से आठ का सुरक्षित बचना राहत की बात थी, लेकिन दो दोस्तों को हमेशा के लिए खो देने का दर्द पूरे ग्रुप और दोनों परिवारों के लिए बेहद भारी था. मृतक अभिजीत आनंद और सोनू कुमार की फाइल फोटो। दो दोस्तों के सपनों का सफर अधूरा रह गया अभिजीत और सोनू सिर्फ यात्रा के साथी नहीं थे, बल्कि करीबी दोस्त भी थे. दोनों अलग-अलग जगहों पर पढ़ाई कर रहे थे, लेकिन दोस्ती ने उन्हें एक साथ बांधे रखा था. लद्दाख की यात्रा भी इसी दोस्ती का हिस्सा थी. एक का सपना कंप्यूटर साइंस की दुनिया में अपनी पहचान बनाना था और दूसरा सिविल सर्विस में जाकर देश और समाज की सेवा करना चाहता था. दोनों अपने-अपने क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी कर रहे थे. परिवार और दोस्तों को भरोसा था कि आने वाले वर्षों में दोनों अपने सपनों को पूरा करेंगे. लेकिन मंगलवार का दिन उनके जीवन की आखिरी तारीख बन गया. खारदुंगला के पास अचानक हुए भूस्खलन ने न केवल दो जिंदगियां छीन लीं, बल्कि दो परिवारों के भविष्य की उम्मीदों को भी गहरा आघात पहुंचाया. बिहिया में समाचार पहुंचते ही मचा कोहराम हादसे की सूचना बिहिया पहुंचते ही दोनों युवकों के घरों पर लोगों की भीड़ जुटने लगी. रिश्तेदार, परिचित और स्थानीय लोग परिवार को ढांढस बंधाने के लिए पहुंचने लगे. किसी को यकीन नहीं हो रहा था कि कुछ दिन पहले हंसते-मुस्कुराते हुए लद्दाख घूमने निकले दोनों युवक अब इस दुनिया में नहीं हैं. बिहिया के लोगों के लिए भी यह घटना बेहद दुखद है. दोनों युवक कम उम्र में ही अपनी पढ़ाई और भविष्य को लेकर आगे बढ़ रहे थे. उनकी मौत की समाचार ने पूरे इलाके को शोक में डाल दिया. रोती-बिलखती अभिजीत की मां गुरुवार को घर पहुंचेगा दोनों का पार्थिव शरीर परिजनों के अनुसार, लद्दाख में आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोनों युवकों के पार्थिव शरीर को एंबुलेंस से दिल्ली लाया जाएगा. इसके बाद दिल्ली से पटना और फिर बिहिया स्थित उनके पैतृक आवास लाया जाएगा. परिजनों को गुरुवार तक दोनों के पार्थिव शरीर के पहुंचने की उम्मीद है. पार्थिव शरीर के घर पहुंचने के बाद अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. परिवार के साथ-साथ बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी अंतिम दर्शन के लिए पहुंच सकते हैं. खूबसूरत सफर की सबसे दर्दनाक तस्वीर लद्दाख की यात्रा दोनों दोस्तों के लिए जिंदगी की खूबसूरत याद बनने वाली थी. दोस्तों का पूरा ग्रुप एक साथ निकला था, लेकिन किसी ने नहीं सोचा था कि वही सफर दो दोस्तों की जिंदगी का आखिरी सफर बन जाएगा. चार बाइकों पर सवार आठ दोस्तों का सुरक्षित बच जाना जहां राहत की बात है, वहीं अभिजीत और सोनू की मौत ने पूरे ग्रुप को अंदर तक झकझोर दिया है. पहाड़ों की खूबसूरती के बीच आया अचानक भूस्खलन अपने पीछे दो परिवारों का कभी न भरने वाला दुख छोड़ गया. अभिजीत की आंखों में कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना था और सोनू सिविल सर्विस में जाने की तैयारी कर रहा था. दोनों के सपने बड़े थे, मंजिल अभी दूर थी और सफर अभी बाकी था. लेकिन नियति को शायद कुछ और ही मंजूर था. लद्दाख की वह यात्रा, जो जिंदगी की यादगार यात्रा बनने निकली थी, दो होनहार दोस्तों की जिंदगी का आखिरी सफर बन गयी. Also Read: लद्दाख में भोजपुर के दो दोस्तों की दर्दनाक मौत, लैंडस्लाइड की चपेट में आई बाइक; बिहिया में पसरा मातम The post सोनू को सिविल सर्विस, अभिजीत को कंप्यूटर साइंस में बनाना था करियर, लद्दाख ट्रिप ने छीन ली दो दोस्तों की जिंदगी appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top