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Vishwakarma Puja 2026: भगवान विश्वकर्मा की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान, जानें क्या करें और क्या न करें

Vishwakarma Puja 2026: विश्वकर्मा पूजा का पावन पर्व हर साल 17 सितंबर को धूमधाम से मनाया जाता है. इस दिन भगवान विश्वकर्मा की आराधना की जाती है, जिन्हें देवताओं का शिल्पकार माना जाता है. इस दिन कारखानों, दुकानों, गैरेज और अन्य कार्यस्थलों पर मशीनों, औजारों और वाहनों की भी पूजा का खास महत्व है. पूजा के दिन कुछ कामों को शुभ माना जाता है, तो कुछ चीजों से बचने की सलाह दी जाती है. कहते हैं कि सही विधि और नियमों का पालन कर पूजा करने से शुभ फल की प्राप्ति होती है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस दिन क्या करें और क्या नहीं. विश्वकर्मा पूजा के दिन क्या करें? कार्यस्थल और औजारों की सफाई करें: पूजा से पहले दुकान, फैक्ट्री, गैरेज और औजारों व मशीनों की अच्छी तरह साफ-सफाई करें. औजारों और मशीनों की पूजा करें: अपने काम से जुड़ी वस्तुओं, औजारों, मशीनों, वाहनों और इलेक्ट्रॉनिक सामान की पूजा करें. इन पर रोली या सिंदूर से स्वास्तिक बनाएं और फूल व अक्षत अर्पित करें. मंत्र का जाप करें: पूजा के दौरान भगवान विश्वकर्मा का ध्यान करें और ‘ॐ विश्वकर्मणे नमः’ मंत्र का जाप करें. कारीगरों और मजदूरों का सम्मान करें: इस दिन अपने कर्मचारियों, कारीगरों, मिस्त्रियों और मजदूरों का सम्मान करें. उन्हें प्रसाद या अपनी क्षमता के अनुसार उपहार भी दे सकते हैं. दान-पुण्य करें: कन्या संक्रांति के अवसर पर जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र या अपनी सामर्थ्य के अनुसार अन्य जरूरी सामान का दान करना शुभ माना जाता है. ये भी पढ़ें: Rishi Panchami 2026: ऋषि पंचमी आज, यहां जानें पूजा का शुभ मुहूर्त, विधि और धार्मिक महत्व विश्वकर्मा पूजा के दिन क्या न करें? औजारों और मशीनों का इस्तेमाल न करें: धार्मिक मान्यता के अनुसार, पूजा के दिन औजारों और मशीनों को विश्राम दिया जाता है. इसलिए इनके इस्तेमाल से बचने की परंपरा है. औजारों का अपमान न करें: औजारों पर पैर लगाना, उन्हें इधर-उधर फेंकना या गंदा छोड़ना उचित नहीं माना जाता है. तामसिक चीजों का सेवन न करें: पूजा के दिन तामसिक चीजों जैसे मांस, मछली, अंडा, प्याज, लहसुन और शराब समेत अन्य चीजों का सेवन नहीं करना चाहिए. ऐसा करना अशुभ माना जाता है. पुराने वाहन या मशीन बेचने से बचें: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन काम से जुड़ी वस्तुओं और वाहनों की बिक्री करने से बचना शुभ माना जाता है. कर्मचारियों से विवाद न करें: इस दिन अपने सहयोगियों, कारीगरों और मजदूरों के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करना शुभ माना जाता है. इसलिए बेवजह विवाद से बचें. ये भी पढ़ें: Ganesh Chaturthi Special: चंद्रमा ने उड़ाया गणेश जी का मजाक, क्रोधित होकर दिया यह श्राप, जानें गणेश चतुर्थी से संबंधित ये पौराणिक कथा The post Vishwakarma Puja 2026: भगवान विश्वकर्मा की पूजा में रखें इन बातों का ध्यान, जानें क्या करें और क्या न करें appeared first on Naya Vichar.

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पश्चिम बंगाल सरकार ने 252 मदरसों को बंद करने के लिए भेजा नोटिस, क्या भारत में गैर कानूनी है मदरसा चलाना? जानें नियम

अक्सर ये सवाल सोशल मीडिया और दुसरे माध्यम से उठता रहता है. मदरसों के संचालन को लेकर कई और भी सवाल है जिसका जवाब खोजा जाता है. अक्सर होने वाले सवालों में, क्या हर मदरसे का रजिस्ट्रेशन जरूरी है? क्या बिना मान्यता वाला मदरसा चल सकता है? और क्या प्रशासन ऐसे संस्थानों को बंद कर सकती है? जैसे सवाल शामिल है. इस लेख में हम इन्ही सवालों के जवाब जानेंगे. मदरसों के संचालन को लेकर किए जाने वाले सवालों का जवाब पूरे देश में एक जैसा नहीं है, क्योंकि मदरसा शिक्षा मुख्य रूप से राज्य के कानूनों और वहां की शिक्षा व्यवस्था के तहत आती है. उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश में मदरसा बोर्ड की व्यवस्था है, जबकि दूसरे राज्यों में अलग नियम लागू हैं. पहले समझिए, रजिस्ट्रेशन और मान्यता में क्या अंतर है? सबसे जरूरी बात यह है कि मदरसे का रजिस्ट्रेशन और शैक्षणिक मान्यता एक ही चीज नहीं हैं. दोनों की अपनी अलग कानूनी भूमिका है. किसी मदरसे को चलाने वाली संस्था का कानूनी रूप से अस्तित्व होना (Legally recognized) और उसे शैक्षणिक मान्यता मिलना (government approved) दो अलग प्रक्रियाएं हैं. रजिस्ट्रेशन का मतलब है कि संस्था किसी लागू कानून के तहत कानूनी रूप से गठित है. यह सोसाइटी, ट्रस्ट या कानून में उपलब्ध किसी दूसरे वैध ढांचे के जरिए हो सकता है. लेकिन सिर्फ रजिस्ट्रेशन करा लेने से किसी संस्था को अपने आप मदरसे के रूप में शैक्षणिक मान्यता नहीं मिल जाती. दूसरी तरफ, मान्यता का संबंध शिक्षा व्यवस्था से है. इसमें संबंधित राज्य प्रशासन, मदरसा बोर्ड या सक्षम प्राधिकरण यह देख सकता है कि संस्था तय शैक्षणिक और प्रशासनिक मानकों को पूरा करती है या नहीं. यही वजह है कि कोई मदरसा गैर कानूनी या कानूनी, इस स्थिति समझने के लिए सिर्फ यह देखना पर्याप्त नहीं है कि उसका रजिस्ट्रेशन हुआ है या नहीं. यह भी देखना जरूरी है कि उसे शैक्षणिक मान्यता मिली है या नहीं. उत्तर प्रदेश में क्या है मदरसों के लिए नियम ? उत्तर प्रदेश में मदरसा शिक्षा की व्यवस्था उत्तर प्रदेश बोर्ड ऑफ मदरसा एजुकेशन एक्ट, 2004 के तहत चलती है. राज्य में मान्यता प्राप्त मदरसों के लिए बोर्ड से जुड़ी व्यवस्था और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया लागू है. इस कानून को लेकर 2024 में बड़ा कानूनी विवाद हुआ. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मार्च 2024 में पूरे कानून को असंवैधानिक घोषित कर दिया था. इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा. 5 नवंबर 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को पलट दिया और मदरसा एक्ट को संवैधानिक माना. अदालत ने माना कि राज्य प्रशासन मदरसों में शिक्षा के मानक, पाठ्यक्रम और परीक्षा व्यवस्था को नियंत्रित कर सकती है. हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने कानून के एक महत्वपूर्ण हिस्से पर रोक लगाई. मदरसा बोर्ड की कामिल और फाजिल जैसी उच्च शिक्षा की डिग्रियां देने की व्यवस्था को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग कानून(UGC) के साथ टकराव के कारण असंवैधानिक माना गया. ये भी पढ़ें: BRICS गाला डिनर में इसलिए परोसा गया वेज खाना, राहुल गांधी के 80% हिंदुस्तानीय नॉन-वेजिटेरियन वाले दावे की क्या है सच्चाई? क्या बिना मान्यता वाला मदरसा चल सकता है? यह सवाल भी बेहद महत्वपूर्ण है. जनवरी 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने कहा कि सिर्फ मान्यता नहीं होने के आधार पर किसी मदरसे को बंद नहीं किया जा सकता, अगर उसे बंद करने के लिए लागू कानून में स्पष्ट आधार मौजूद नहीं है. लेकिन यहां एक बड़ा फर्क समझना जरूरी है कि बिना मान्यता वाला मदरसा चल रहा हो, तो इसका अर्थ यह नहीं है कि उसे मान्यता प्राप्त मदरसे जैसी सभी सुविधाएं मिलेंगी. ऐसे संस्थान को प्रशासनी अनुदान, बोर्ड की परीक्षाओं में शामिल होने या छात्रों की योग्यता को प्रशासनी शिक्षा व्यवस्था में मान्यता दिलाने में दिक्कत हो सकती है. यानी चलाने का अधिकार और प्रशासनी शैक्षणिक लाभ पाने का अधिकार अलग-अलग बातें हैं. क्या प्रशासन मदरसों की पढ़ाई नियंत्रित कर सकती है? हां, लेकिन नियंत्रण की सीमा, कानून और संविधान से तय होती है. संविधान का अनुच्छेद 30 धार्मिक और भाषाई अल्पसंख्यकों को अपनी पसंद के शिक्षण संस्थान स्थापित और संचालित करने का अधिकार देता है. लेकिन यह अधिकार पूरी तरह नियमन (Regulation) से बाहर नहीं है. सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि राज्य प्रशासन शिक्षा की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए उचित नियम बना सकती है. इसका मकसद यह सुनिश्चित करना हो सकता है कि छात्रों को जरूरी शैक्षणिक स्तर की शिक्षा मिले. इसलिए मदरसे का धार्मिक चरित्र बनाए रखने का अधिकार और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने की राज्य की जिम्मेदारी, दोनों को साथ देखा जाता है. क्या मदरसों को लेकर हर राज्य में एक ही नियम है? नहीं, यह इस पूरे मुद्दे की सबसे महत्वपूर्ण बात है. उत्तर प्रदेश में मदरसा बोर्ड की अलग व्यवस्था है. वहीं उत्तराखंड ने 2025 में अपने पुराने मदरसा बोर्ड को खत्म कर अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था बनाई. इसके तहत अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों के लिए नया नियामक ढांचा तैयार किया गया है। पश्चिम बंगाल में भी मदरसों के रजिस्ट्रेशन, निरीक्षण और नियमन को लेकर व्यवस्था मजबूत करने पर प्रशासन की नजर है.इसी के तहत पश्चिम बंगाल प्रशासन ने राज्य के 252 मदरसों को बंद करने और करीब 100 अन्य मदरसों को कारण बताओ नोटिस भेजा है. मदरसों के लिए प्रशासनी मदद और मान्यता क्यों जरूरी है? मदरसे का कानूनी अस्तित्व और प्रशासनी सहायता अलग-अलग विषय हैं. अगर कोई संस्था प्रशासनी अनुदान, बोर्ड की परीक्षा, प्रमाणपत्र या किसी प्रशासनी योजना का लाभ लेना चाहती है तो उसे संबंधित नियमों और पात्रता शर्तों को पूरा करना पड़ता है. केंद्र की SPMM जैसी योजनाओं में भी पात्रता के लिए निर्धारित शर्तें पूरी करनी होती हैं. इसलिए किसी मदरसे के लिए केवल संस्था के रूप में पंजीकृत होना पर्याप्त नहीं माना जाता. हर मदरसे का रजिस्ट्रेशन और मान्यता क्यों जरूरी है? सीधा जवाब है कि रजिस्ट्रेशन और मान्यता की जरूरत इस बात पर निर्भर करती है कि मदरसा किस राज्य में है, किस कानून के तहत चल रहा है और वह कौन-कौन से प्रशासनी या शैक्षणिक लाभ चाहता है. कुल मिलाकर तस्वीर यह है कि मदरसा चलाने का संवैधानिक अधिकार है, लेकिन शिक्षा की गुणवत्ता, प्रशासन, परीक्षा और प्रशासनी सहायता से जुड़े नियमों का पालन राज्य कानून के अनुसार करना

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Thar और Scorpio की छुट्टी करने आ रही JSW Combat, लुक ऐसा कि देखते ही हो जाएंगे दीवाने, जानें SUV में क्या मिलेगा खास

JSW Motors हिंदुस्तानीय बाजार में अपनी पहली एसयूवी ‘Combat’ को उतारने की तैयारी कर रही है. यह धांसू एसयूवी ग्लोबल मार्केट में बिकने वाली मशहूर Chery Jetour T2 पर आधारित होगी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह 5-सीटर प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) एसयूवी दिवाली के आसपास हिंदुस्तान में एंट्री कर सकती है. इसकी संभावित एक्स-शोरूम कीमत 30 से 50 लाख रुपये के बीच होने का अनुमान है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इसका दमदार रफ-एंड-टफ लुक, हाइब्रिड तकनीक और प्रीमियम फीचर्स महिंद्रा थार (Thar) और स्कॉर्पियो-एन (Scorpio-N) जैसी दमदार गाड़ियों के दीवानों को अपनी ओर खींच पाएगा? आइए विस्तार से जानते हैं. JSW Combat का लुक क्यों खींच रहा सबका ध्यान जेएसडब्ल्यू कॉम्बैट का डिजाइन जेटूर T2 से प्रेरित होगा, जो इसे एक बॉक्सी और मस्कुलर लुक देता है. सड़कों पर इसकी दमदार मौजूदगी दर्ज कराने के लिए इसमें कई खास डिजाइन एलिमेंट्स शामिल किए गए हैं: फ्रंट और साइड प्रोफाइल: एसयूवी में स्क्वेयर शेप वाले LED हेडलैंप्स, चंकी बंपर, मोटी बॉडी क्लैडिंग और 20-इंच के बड़े अलॉय व्हील्स देखने को मिलेंगे. रियर डिजाइन: छत पर रूफ रेल्स, पीछे वर्टिकल LED टेललैंप्स और टेलगेट पर लगा स्पेयर व्हील इसके ऑफ-रोडिंग कैरेक्टर को और निखारते हैं. Thar और Scorpio-N के मुकाबले कहां खडी होगी Combat अगर आप सोच रहे हैं कि कॉम्बैट सीधे तौर पर थार या स्कॉर्पियो-एन को टक्कर देगी, तो यहां कीमत और पोजीशनिंग को समझना जरूरी है: फीचर JSW Combat (संभावित) Mahindra Scorpio-N Mahindra Thar (बेस मॉडल से टॉप) संभावित कीमत ₹30 लाख – ₹50 लाख ₹13.85 लाख – ₹24.54 लाख ₹11.35 लाख से शुरू पावरट्रेन 1.5L प्लग-इन हाइब्रिड (PHEV) 2.0L पेट्रोल / 2.2L डीजल 2.0L पेट्रोल / 2.2L डीजल ड्राइव टाइप FWD (शुरुआत में) RWD / 4WD 4WD / RWD खासियत 90km EV रेंज, प्रीमियम ADAS 7-सीटर स्पेस, दमदार रोड प्रेजेंस हार्डकोर ऑफ-रोडिंग क्षमता निष्कर्ष: ऊपर दी गई सभी जानकारियां और स्पेसिफिकेशन ग्लोबल जेटूर T2 मॉडल और ऑटो रिपोर्ट्स पर आधारित हैं. हिंदुस्तानीय बाजार में कॉम्बैट की लॉन्चिंग, आधिकारिक एक्स-शोरूम कीमत और वास्तविक रेंज की अंतिम पुष्टि खुद JSW Motors के जरिए ही की जाएगी. ये भी पढ़ें: इस बाइक को लेने के बाद पेट्रोल का खर्च रह जाएगा करीब आधा, लेकिन खरीदने से पहले जान लें ये 5 जरूरी बातें The post Thar और Scorpio की छुट्टी करने आ रही JSW Combat, लुक ऐसा कि देखते ही हो जाएंगे दीवाने, जानें SUV में क्या मिलेगा खास appeared first on Naya Vichar.

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Delhi Crime: गोल्डी बराड़ के नाम पर महिला से मांगी 200 करोड़ की रंगदारी, जान से मारने की धमकी

Delhi Crime: दिल्ली के वीआईपी इलाके सिविल लाइंस में एक स्त्री को गैंगस्टर गोल्डी बराड़ के नाम से धमकी भरा वॉट्सऐप कॉल आया है. विदेशी नंबर से आई इस कॉल में सिरफिरे ने स्त्री से 200 करोड़ रुपये की भारी-भरकम रंगदारी मांगी है. पैसे न देने पर स्त्री और उसके पति को जान से मारने की सीधी धमकी दी गई है. रात में आया इंटरनेशनल कॉल दिल्ली पुलिस ने बताया, सिविल लाइंस क्षेत्र में अपनी पुश्तैनी संपत्ति के साथ रहने वाली 50 वर्षीय स्त्री के मोबाइल पर 7 सितंबर की रात करीब 10:44 बजे एक अनजान विदेशी नंबर से वॉट्सऐप कॉल आई. फोन उठाने पर कॉलर ने खुद को कुख्यात गैंगस्टर गोल्डी बराड़ बताया. उसने दावा किया कि उसके पास स्त्री के बारे में पूरी जानकारी है. इसके बाद आरोपी ने सीधे 200 करोड़ रुपये की मांग कर डाली. बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज अचानक आई इस कॉल से दंपत्ति दहशत में आ गया. मामले की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई. शुरुआती जांच के बाद दिल्ली पुलिस ने 10 सितंबर को हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 351(4), 308(4) और 61(2) के तहत मामला दर्ज कर लिया है. फर्जी कॉल या संपत्ति विवाद? जांच जारी दिल्ली पुलिस मामले की हर पहलू से गहन जांच कर रही है. पुलिस का कहना है कि यह जांच का विषय है कि कॉल सचमुच गोल्डी बराड़ या उसके गिरोह ने की है, या फिर किसी परिचित ने संपत्ति या आपसी रंजिश के चलते गैंगस्टर के नाम का इस्तेमाल कर खौफ पैदा करने की कोशिश की है. फिलहाल नंबर की सर्विलांस और लोकेशन ट्रेस की जा रही है. ये भी पढ़ें: जम्मू-कश्मीर: राजौरी पुलिस ने किया लश्कर के नेटवर्क का भंडाफोड़, 3 मददगार गिरफ्तार The post Delhi Crime: गोल्डी बराड़ के नाम पर स्त्री से मांगी 200 करोड़ की रंगदारी, जान से मारने की धमकी appeared first on Naya Vichar.

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बिहार के 8 लाख से ज्यादा लोगों को दिए जायेंगे 7-7 हजार रुपये, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया ऐलान

Flood Victim Relief Fund: बिहार में लाखों लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. कई जिलों में बाढ़ की वजह से स्थिति गंभीर बनी हुई है. लेकिन इस बीच प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड में है. बाढ़ पीड़ितों के लिए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने जरूरी फैसला लिया है. बाढ़ पीड़ितों को प्रशासन की ओर से सहायता राशि दी जाएगी. 579.23 करोड़ सहायता देने की तैयारी जानकारी के मुताबिक, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 8 लाख से भी ज्यादा बाढ़ पीड़ितों को 7-7 हजार रुपये सहायता राशि देने का ऐलान किए. बाढ़ पीड़ितों के खाते में डीबीटी के माध्यम से बैंक अकाउंट में ट्रांसफर किए जायेंगे. यह फैसला पीड़ितों के लिए बेहद खास माना जा रही है. आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों की लिस्ट मंगा ली गई है. इन परिवारों को 579.23 करोड़ अनुग्रह सहायता के तौर दिए जाने की तैयारी है. 15 जिलों में लोग बाढ़ से प्रभावित बिहार के 15 जिलों में करीब 49.36 लाख लोग बाढ़ की चपेट में हैं. कई इलाकों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं. पटना में गंगा और पुनपुन नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. दूसरी तरफ, प्रशासन भी पूरी तरह से अलर्ट मोड में है. बिहार से जुड़ी अन्य ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें केंद्र की टीम आएगी बिहार सोमवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बताया था कि 16 सितंबर को केंद्र प्रशासन की टीम बिहार पहुंचेगी और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करेगी. उन्होंने यह भी बताया था कि यह टीम केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आने वाली है. सम्राट चौधरी के मुताबिक, गृह मंत्री अमित शाह ने खुद फोन कर उन्हें केंद्रीय टीम के बिहार आने की जानकारी दी. बिहार की नदियों में उफान बरकरार नेपाल में हो रही बारिश और पिछले दिनों आई बाढ़ की वजह से बिहार में नदियां उफनाई हुईं हैं. कई नदियां खतरे के लाल निशान के ऊपर बह रही है. आपदा प्रबंधन विभाग (डीएमडी) की माने तो, फिलहाल 15 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं. इन जिलों में पटना, भोजपुर, सारण, वैशाली, भागलपुर, बेगूसराय, बक्सर, समस्तीपुर, मुंगेर, कटिहार, लखीसराय, खगड़िया, पूर्णिया, मधेपुरा और अररिया शामिल है. टोटल 88 प्रखंडों की 575 ग्राम पंचायतों के 49.36 लाख लोग बाढ़ से प्रभावित हैं. Also Read: दिल्ली-पटना बुलेट ट्रेन हाई स्पीड रेल कॉरिडोर का DPR तैयार, 865 किमी लंबा बिछेगा ट्रैक, जानिए ताजा अपडेट The post बिहार के 8 लाख से ज्यादा लोगों को दिए जायेंगे 7-7 हजार रुपये, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया ऐलान appeared first on Naya Vichar.

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Nandigram By-Poll: बीजेपी ने शुभेंदु के पूर्व पीए चंद्रनाथ की मां पर जताया भरोसा, जानिए हसी रानी रथ का सियासी सफर

कोलकाता. नंदीग्राम उपचुनाव में भाजपा की उम्मीदवार मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी स्वर्गीय चंद्रनाथ रथ की माता हसी रानी रथ बनी है. वह आज अपना नामांकन दाखिल करेंगी. मुख्यमंत्री की उपस्थिति में बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और समर्थकों के साथ जुलूस निकालकर वह अपना नामांकन प्रस्तुत करेंगी. हालांकि, भाजपा की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. मंदिर जा कर की पूजा इससे पूर्व भाजपा नेतृत्व की उपस्थिति में हासी रानी रथ जानकीनाथ मंदिर पहुंची. सुदीप दास ने मंदिर के सामने हसिरानी रथ का स्वागत किया. इसके बाद, हसिरानी रथ ने नंदीग्राम जानकीनाथ मंदिर (राम सीता मंदिर) में पूजा-अर्चना की. नंदीग्राम विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा की उम्मीदवार हसी रानी रथ नंदीग्राम प्रथम ब्लॉक के जानकी नाथ मंदिर पहुंचीं. सबको था नाम का इंतजार नंदीग्राम मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी द्वारा छोड़ा गया एक महत्वपूर्ण केंद्र है. सभी की निगाहें इस बात पर टिकी थीं कि भाजपा वहां के उपचुनाव में किसे मैदान में उतारेगी. कई नामों पर चर्चा हो रही थी. हालांकि, सबसे ज्यादा अटकलें स्वर्गीय चंद्रनाथ की माता के नाम पर लगाई जा रही थीं. आखिरकार, समाचार है कि ये अटकलें सच हुई हैं. मुख्यमंत्री की उपस्थिति में होगा नामांकन नंदीग्राम में उनके नाम के पोस्टर पहले ही लग चुके हैं. हसी रानी रथ नामांकन दाखिल करने से पहले नंदीग्राम विधानसभा क्षेत्र 210 के जानकीनाथ मंदिर में पूजा करने पहुंची हैं. उनके मंदिर रवाना होने से पहले ही कार्यकर्ता और समर्थक इकट्ठे होने शुरू हो गए थे. समर्थकों के साथ एक विशाल जुलूस निकालकर अपना नामांकन दाखिल करेंगी. जुलूस हल्दिया कदमतला चौराहे पर स्थित जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय पहुंचेगा. शुवेंदु अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे. जिम्मेदारी लेने को तैयार थी चंद्रनाथ की मां गौरतलब है कि चंद्रनाथ की मां ने इससे पहले एक साक्षात्कार में बताया था कि अगर उन्हें कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है, तो वे उसे पूरी लगन से निभाएंगी. उन्होंने कहा था, “मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी हमारे परिवार के संरक्षक हैं. अगर वे मुझे कोई बड़ी जिम्मेदारी देते हैं, तो मैं उसे पूरी निष्ठा से स्वीकार करूंगी. मैं 1998 से नेतृत्व में हूं. मैं दो बार पंचायत सदस्य रह चुकी हूं. मैं तीन बार पंचायत समिति की सदस्य रह चुकी हूं. इस बार भी अगर मुझे कोई बड़ी जिम्मेदारी दी जाती है, तो मैं उसे पूरी लगन से निभाने की कोशिश करूंगी.” छह अक्टूबर को होगा मतदान गौरतलब है कि राज्य की दो विधानसभा सीटों, नंदीग्राम और रेजिनगर में 6 अक्टूबर को उपचुनाव हो रहे हैं. नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि 16 सितंबर है. तृणमूल कांग्रेस ममता गुट, रीतब्रत गुट, सीपीएम और कांग्रेस अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर चुकी हैं. वहीं दूसरी ओर, नंदीग्राम में भाजपा के उम्मीदवार का नाम सामने आ चुका है, लेकिन रेजिनगर के उम्मीदवार की घोषणा अभी तक नहीं हुई है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें ममता ने नये चहरे पर जताया भरोसा इस बीच, नंदीग्राम के कालीघाट से तृणमूल ने बेरोजगार शिक्षिका संचिता प्रधान दे को मैदान में उतारा है. नेतृत्वक गलियारों में ऐसी अफवाहें थीं कि ममता बनर्जी खुद नंदीग्राम से चुनाव लड़ सकती हैं. इन अटकलों को खारिज करते हुए ममता ने एक बिल्कुल नए चेहरे पर भरोसा जताया है. वहीं, रीतब्रत गुट से एहतेशामुल हक को उम्मीदवार बनाया गया है. वामपंथी दल की ओर से सीपीआई के शांतिगोपाल गिरि को मैदान में उतारा गया है. Also Read: शुभेंदु अधिकारी ने ठुकराई विश्व हिंदू परिषद की मांग, बोले- दुर्गा पूजा में मांसाहार पर रोक नहीं The post Nandigram By-Poll: बीजेपी ने शुभेंदु के पूर्व पीए चंद्रनाथ की मां पर जताया भरोसा, जानिए हसी रानी रथ का सियासी सफर appeared first on Naya Vichar.

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IND vs AFG Live Streaming: फ्री में कब, कहां और कैसे देखें भारत-अफगानिस्तान का दूसरा टी20?

IND vs AFG 2nd T20 Free Live Streaming: हिंदुस्तान और अफगानिस्तान के बीच तीन मैचों की टी20 सीरीज का दूसरा मुकाबला 15 सितंबर 2026 को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में स्पोर्ट्सा जाएगा. हिंदुस्तानीय टीम पहला मुकाबला जीतकर सीरीज में 1-0 से आगे है और दूसरे टी20 में जीत के साथ सीरीज अपने नाम करना चाहेगी. वहीं अफगानिस्तान की नजर वापसी पर होगी. अगर आप भी यह मुकाबला लाइव देखना चाहते हैं और जानना चाहते हैं कि हिंदुस्तान-अफगानिस्तान दूसरा टी20 कब, कहां और कैसे देख सकते हैं, टीवी पर कौन सा चैनल मैच दिखाएगा और फ्री में लाइव मैच देखने का विकल्प क्या है, तो यहां आपको पूरी जानकारी मिलेगी. हिंदुस्तान-अफगानिस्तान दूसरा टी20 कब और कहां होगा? हिंदुस्तान और अफगानिस्तान के बीच दूसरा टी20 मुकाबला 15 सितंबर, मंगलवार को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में स्पोर्ट्सा जाएगा. मुकाबला हिंदुस्तानीय समयानुसार शाम 7:30 बजे शुरू होगा. इससे आधे घंटे पहले यानी शाम 7 बजे टॉस होगा. टीवी पर कहां देख सकते हैं IND vs AFG 2nd T20? हिंदुस्तान और अफगानिस्तान के बीच दूसरे टी20 मुकाबले का लाइव टेलीकास्ट Sony Sports Network के चैनलों पर किया जाएगा. टीवी दर्शक सोनी स्पोर्ट्स नेटवर्क के संबंधित चैनल पर मैच का सीधा प्रसारण देख सकते हैं. ये भी पढ़ें: IND vs AFG: वैभव सूर्यवंशी IN, संजू सैमसन OUT? दूसरे टी20 में दो बदलाव के साथ उतरेगी टीम इंडिया! IND vs AFG 2nd T20 की Live Streaming कहां होगी? जो दर्शक मोबाइल या अन्य डिजिटल डिवाइस पर मुकाबला देखना चाहते हैं, उनके लिए फैनकोड ऐप पर हिंदुस्तान-अफगानिस्तान दूसरे टी20 की लाइव स्ट्रीमिंग उपलब्ध होगी. यानी टीवी के अलावा दर्शक FanCode के जरिए भी मैच को लाइव देख सकते हैं. हिंदुस्तान-अफगानिस्तान दूसरा टी20 फ्री में कैसे देखें? अगर आप बिना अतिरिक्त स्ट्रीमिंग शुल्क के मैच देखना चाहते हैं, तो DD Sports पर मुकाबले के लाइव प्रसारण का विकल्प उपलब्ध है. इस तरह टीवी पर DD Sports के जरिए दर्शक हिंदुस्तान और अफगानिस्तान के बीच दूसरे टी20 का लाइव मुकाबला देख सकते हैं. IND vs AFG 2nd T20: एक नजर में पूरी जानकारी सवाल जवाब मैच हिंदुस्तान vs अफगानिस्तान, दूसरा टी20 तारीख 15 सितंबर 2026 जगह अरुण जेटली स्टेडियम, दिल्ली टॉस शाम 7:00 बजे मैच शुरू शाम 7:30 बजे टीवी पर Sony Sports Network Live Streaming FanCode ऐप फ्री में लाइव DD Sports सीरीज स्थिति हिंदुस्तान 1-0 से आगे सीरीज जीतने उतरेगी टीम इंडिया हिंदुस्तान ने सीरीज के पहले मुकाबले में जीत दर्ज कर 1-0 की बढ़त हासिल कर ली है. ऐसे में दूसरे टी20 में जीत हिंदुस्तानीय टीम को सीरीज भी दिला देगी. दूसरी ओर अफगानिस्तान के लिए यह मुकाबला बेहद अहम है, क्योंकि हारने पर तीन मैचों की सीरीज उसके हाथ से निकल जाएगी. यही वजह है कि दिल्ली में होने वाला दूसरा टी20 दोनों टीमों के लिए अहम मुकाबला माना जा रहा है. ये भी पढ़ें: IND vs AFG: बारिश बिगाड़ेगी हिंदुस्तान-अफगानिस्तान का स्पोर्ट्स? जानें मैच के दौरान कैसा रहेगा दिल्ली का मौसम The post IND vs AFG Live Streaming: फ्री में कब, कहां और कैसे देखें हिंदुस्तान-अफगानिस्तान का दूसरा टी20? appeared first on Naya Vichar.

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अब विदेशों में बिकेंगे झारखंड के जैविक और प्राकृतिक उत्पाद, केंद्र सरकार ने तैयार किया नया प्लान

Jharkhand Organic Farming: झारखंड में पारंपरिक तरीके से खेती करने वाले किसानों और जंगलों से प्राकृतिक उत्पाद जुटाने वाले संग्राहकों के लिए अच्छी समाचार है. हिंदुस्तान प्रशासन ने जैविक और प्राकृतिक खेती के क्लस्टरों को सशक्त बनाने के लिए नयी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) जारी की है. इसका सीधा लाभ झारखंड को मिलने की संभावना है. नई व्यवस्था के तहत राज्य के जैविक और प्राकृतिक उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने की तैयारी की जाएगी. केंद्र प्रशासन ने इसकी जानकारी झारखंड समेत सभी राज्यों को दी है. पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों को मिलेगी प्राथमिकता केंद्र प्रशासन की नई नीति में पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों के उत्पादों को प्राथमिकता देने की रणनीति बनाई गई है. झारखंड का बड़ा हिस्सा पहाड़ी और आदिवासी बहुल है. कई क्षेत्रों में किसान पारंपरिक तरीके से खेती करते हैं और रासायनिक खाद एवं कीटनाशकों का इस्तेमाल अपेक्षाकृत कम होता है. ऐसे क्षेत्र जैविक और प्राकृतिक उत्पादों के लिए महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं. नई SOP का उद्देश्य बेहतर प्रदर्शन करने वाले किसान समूहों, क्लस्टरों, किसान उत्पादक संगठनों (FPO) और स्वयं सहायता समूहों की पहचान कर उन्हें मजबूत करना है. इसके बाद उनके उत्पादों को घरेलू बाजार के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय बाजार के लिए तैयार किया जाएगा. ये भी पढ़ें- सिमडेगा पहुंचीं मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की, डीसी-एसपी से विकास योजनाओं और विधि-व्यवस्था की ली जानकारी एनपीओपी सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया होगी आसान अंतर्राष्ट्रीय बाजार में जैविक उत्पादों के निर्यात के लिए प्रमाणन जरूरी है. इसी को ध्यान में रखते हुए नेशनल प्रोग्राम फॉर ऑर्गेनिक प्रोडक्शन (NPOP) सर्टिफिकेशन की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है. इसे पहले की तुलना में आसान बनाने की कोशिश की गई है. यूरोप, अमेरिका और मिडिल ईस्ट जैसे बाजारों में जैविक उत्पादों के लिए थर्ड पार्टी सर्टिफिकेशन की मांग रहती है. अब प्रशासन की ओर से वित्तीय सहायता उपलब्ध कराकर किसानों और उत्पादक समूहों को NPOP सर्टिफिकेशन दिलाने की योजना है. इससे केवल घरेलू स्तर पर PGS प्रमाणन वाले किसानों के लिए भी अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच का रास्ता खुल सकता है. कोल्ड स्टोरेज से पैकेजिंग तक मिलेगा इंफ्रास्ट्रक्चर जैविक और प्राकृतिक उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने के लिए क्लस्टर विकसित किए जाएंगे. चयनित क्लस्टरों में कोल्ड स्टोरेज, प्रोसेसिंग यूनिट, पैकेजिंग, ग्रेडिंग और सुखाने जैसी बुनियादी सुविधाएं विकसित करने के लिए वित्तीय मदद दी जाएगी. झारखंड में टमाटर, मटर, अन्य सब्जियों और मोटे अनाज यानी मिलेट्स का उत्पादन बड़े स्तर पर होता है. पर्याप्त भंडारण की सुविधा नहीं होने के कारण कई बार उत्पाद खराब हो जाते हैं. पीकेवीवाइ और आरकेवीवाइ जैसी योजनाओं के तहत चयनित क्लस्टरों में आधुनिक भंडारण, ग्रेडिंग और पैकेजिंग की सुविधा मिलने से किसानों को इसका लाभ मिल सकता है. ये भी पढ़ें- CID की टीम पहुंची YBN University, परीक्षा घोटाले में शिवांगन कोचिंग संचालक समेत दो गिरफ्तार महुआ, चिरौंजी और करंज जैसे उत्पादों को मिल सकती है पहचान झारखंड के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में कई ऐसे उत्पाद मिलते हैं, जो प्राकृतिक रूप से तैयार होते हैं. इनमें करंज, करंज हनी, चिरौंजी और महुआ जैसे उत्पाद शामिल हैं. नई नीति के तहत ऐसे प्राकृतिक उत्पादों को भी बाजार उपलब्ध कराने और उनकी पहचान बढ़ाने पर जोर दिया जा सकता है. इसके अलावा राज्य के विशेष और जीआइ टैग वाले उत्पादों की पहचान कर उन्हें वैश्विक बाजार में प्रमोट करने की संभावना भी है. इससे जंगलों पर निर्भर रहने वाले स्थानीय संग्राहकों को भी बाजार का लाभ मिल सकता है. नेशनल ब्रांड से सीधे बाजार तक पहुंचेंगे किसान नेशनल को-ऑपरेटिव ऑर्गेनिक्स लिमिटेड (NCOL) की ओर से तैयार किए जा रहे ‘नेशनल ब्रांड’ से झारखंड के किसानों के जैविक उत्पादों को जोड़ने की योजना है. इससे उत्पादों को बड़ी कंपनियों, ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म और घरेलू रिटेल चेन तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है. इस व्यवस्था से किसानों की बाजार तक सीधी पहुंच बढ़ने और बिचौलियों पर निर्भरता कम होने की उम्मीद है. उत्पादों की बेहतर पैकेजिंग, प्रमाणन और ब्रांडिंग के जरिए झारखंड के जैविक उत्पादों को देश के साथ-साथ विदेशों में भी पहचान दिलाने की कोशिश होगी. ये भी पढ़ें- झारखंड में उर्दू शिक्षकों के 7232 पद खाली, बहाली का इंतजार करते बीते दो साल किसानों और जंगलों से जुड़े संग्राहकों को मिल सकता है लाभ सिधकोफेड के सचिव राकेश कुमार सिंह ने कहा कि झारखंड के जंगलों और ग्रामीण क्षेत्रों में ऐसे कई उत्पाद हैं, जो प्राकृतिक और जैविक रूप से तैयार होते हैं. केंद्र की नई नीति से इन उत्पादों को बाजार और प्रोत्साहन मिलने की संभावना है. इसका लाभ जंगलों में रहने वाले उत्पाद संग्राहकों को भी मिल सकता है. The post अब विदेशों में बिकेंगे झारखंड के जैविक और प्राकृतिक उत्पाद, केंद्र प्रशासन ने तैयार किया नया प्लान appeared first on Naya Vichar.

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Vastu Tips: घर में रखे नकली पौधे और फूल कहीं बढ़ा तो नहीं रहे नकारात्मकता? जानें वास्तु के ये जरूरी नियम

Vastu Tips:  घर की सजावट करने के लिए लोग अपने घर को नकली और आर्टिफिशियल पौधों से सजाते हैं. घर में रौनक तो बन जाती है, पर क्या आपको पता है लंबे समय ताक रखे फूल भरे, टूटे या फीके पड़ चुके कृक्रिन पौधे पर के वातावरण में भारीपन और नकारात्मकता ला सकते हैं. जीवित और प्राकृतिक पौधे घर पर  ताजगी और सकारात्मक ऊर्जा का संचार बढ़ाते हैं. आइए जानें नकली और आर्टिफिशियल वास्तु के नजरिए से कैसे अशुभ हैं. नकली और आर्टिफिशियल चीजें वास्तु के नजरिए से क्यों अशुभ मानी जाती हैं? नैचुरल वाइब्स का मिलता है आभाव वास्तु शास्त्र में प्रकृतिक चीजों को सकारात्मक और जीवंत ऊर्जा से जोड़ा जाता है. कृत्रिम यानी आर्टिफिशियल वस्तुओं से नैचुरल वाइब्स नहीं मिलती. प्लास्टिक के पौधों नहीं होते विकास के प्रतीक हरे पेड़ पौधों को जीवन और विकास के प्रतीक माना जाता है. सूखे या प्लास्टिक के पौधों को लंबे समय तक घर में रखना शुभ नहीं माना जाता. नकली फूलों से ताजगी का आभाव ताजे फूल सकारात्मकता, सुंदरता और प्रसन्नता के प्रतीक माने जाते हैं. नकली फूलों में उस प्राकृतिक ताजगी का अभाव होता है. ये भी पढ़ें: Vastu Tips: बेड के नीचे रखते हैं पुराना सामान? इन 6 चीजों से तुरंत बनाएं दूरी, बिगड़ सकता है घर का माहौल नकली फव्वारे भी हैं जल के आर्टिफिशियल श्रोत घर में अगर आप पानी का नकली फव्वारा लगाते हैं तो वो पानी का आर्टिफिशियल श्रोत माना जाता है, इसे प्रकृतिक जल के प्रवाह की तरह समृद्धि से जोड़ा नहीं जा सकता है. पक्षी या जानवरों की मूर्तियां अगर आप घर में पक्षी या जानवरों की मूर्तियां रखते हैं तो उनकी दिशा सही होनी चाहिए. गलत जगह रखी वस्तुएं वास्तु संतुलन को प्रभावित कर सकती हैं. प्राकृतिक चीजों को दें प्राथमिकता घर में ताजे फूल, स्वस्थ पौधे, स्वच्छ जल और प्राकृतिक सामग्री का संतुलित इस्तेमाल वास्तु की दृष्टि से अधिक सकारात्मक माना जाता है. सही दिशा और स्थान का चयन घर के पूजा स्थल पर हमेशा नैचुरल पौधे रखने चाहिए. इससे पवित्रता और शांति महसूस होती है. घर के मुख्य द्वार पर नकली पौधे नहीं रखने चाहिए. धूम मिट्टी लगने से उनका बचाव करना मुश्किल हो जाता है. यहां पुराने या मुरझाए हुए पौधे रखना अशुभ माना जाता है. बैडरूम में बहुत अधिक कृत्रिम सजावट या भारी डिजाइन वाले पौधों को रखने से बचना चाहिए, ताकि कमरा सहज और शांत बना रहे. The post Vastu Tips: घर में रखे नकली पौधे और फूल कहीं बढ़ा तो नहीं रहे नकारात्मकता? जानें वास्तु के ये जरूरी नियम appeared first on Naya Vichar.

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VIDEO : प्रभात खबर के पत्रकार से मारपीट करने वाले SK आजाद के ‘काले कारनामे’, वीडियो में देखिए पूरा खुलासा

SK Azad Private Clinic : सहरसा सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉक्टर एसके आजाद से जुड़ा विवाद अब प्राइवेट प्रैक्टिस के आरोपों तक पहुंच गया है. नया विचार के पत्रकार से कथित मारपीट और विवाद का वीडियो सामने आने के बाद अस्पताल की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. कुछ मरीजों ने डॉक्टर के व्यवहार और निजी क्लीनिक में प्रैक्टिस करने का आरोप लगाया है. मामले में डीएम के आदेश पर जांच कमेटी गठित होने की बात सामने आयी है. ‘हम तेरा बाप हैं’ वाले डॉक्टर पर अब प्राइवेट प्रैक्टिस का आरोप सहरसा सदर अस्पताल के प्रभारी अधीक्षक डॉक्टर एसके आजाद से जुड़ा विवाद अब लगातार तूल पकड़ रहा है. 12 सितंबर को अस्पताल में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकार और डॉक्टर के बीच हुए विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था. वीडियो में डॉक्टर द्वारा पत्रकार से कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा में बात किये जाने को लेकर सवाल उठे थे. मरीजों ने डॉक्टर के व्यवहार पर उठाये सवाल वीडियो में बातचीत के दौरान कुछ मरीजों ने डॉक्टर एसके आजाद के व्यवहार को लेकर भी आरोप लगाये. एक मरीज ने दावा किया कि डॉक्टर मरीजों की बात सुनने के बजाय डांटते हैं और उनका व्यवहार अच्छा नहीं रहता. एक अन्य व्यक्ति ने भी कहा कि डॉक्टर से सवाल पूछने पर उसके साथ गुस्से में व्यवहार किया गया था. पंचवटी चौक स्थित निजी क्लीनिक का दावा बातचीत में स्थानीय लोगों ने दावा किया कि डॉक्टर एसके आजाद पंचवटी चौक के आसपास निजी क्लीनिक में मरीजों को देखते हैं. लोगों ने निजी संस्थान का नाम मनोरमा मेमोरियल अस्पताल बताया. हालांकि, निजी प्रैक्टिस से जुड़े इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी. निजी प्रैक्टिस को लेकर स्वास्थ्य विभाग के आदेश का हवाला रिपोर्ट में बिहार स्वास्थ्य विभाग के उस आदेश का भी हवाला दिया गया है, जिसमें प्रशासनी चिकित्सकों की निजी प्रैक्टिस को लेकर निर्देश दिये गये हैं. ऐसे में अब सवाल उठ रहा है कि यदि कोई प्रशासनी चिकित्सक निजी प्रैक्टिस कर रहा है, तो उसके खिलाफ विभागीय स्तर पर क्या कार्रवाई होगी. वीडियो में देखिए पूरी सच्चाई… The post VIDEO : नया विचार के पत्रकार से मारपीट करने वाले SK आजाद के ‘काले कारनामे’, वीडियो में देखिए पूरा खुलासा appeared first on Naya Vichar.

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