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ईस्ट जोन ने तीसरी बार जीता दलीप ट्रॉफी का खिताब, 13 साल बाद ईशान की कप्तानी में बना चैंपियन

Duleep Trophy Final: दलीप ट्रॉफी 2026 में ईस्ट जोन ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताब अपने नाम कर लिया. चेन्नई के एम.ए. चिदंबरम स्टेडियम में स्पोर्ट्से गए फाइनल में ईशान किशन की कप्तानी वाली टीम ने 13 साल का इंतजार खत्म किया. ईस्ट जोन ने आखिरी बार 2012-13 में दलीप ट्रॉफी जीती थी. इससे पहले टीम ने 2011-12 में भी खिताब अपने नाम किया था. इस जीत के साथ ईस्ट जोन के नाम अब दलीप ट्रॉफी के तीन खिताब हो गए हैं. ईशान किशन ने स्पोर्ट्सी 270 रन की कप्तानी पारी ईशान किशन ने जड़ा दोहरा शतक (फोटो- सोशल मीडिया) दलीप ट्रॉफी फाइनल में ईस्ट जोन ने टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने का फैसला किया. टीम ने पहली पारी में 708 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया. कप्तान ईशान किशन ने बल्ले से टीम की जीत की नींव रखी और 334 गेंदों पर 270 रन की शानदार पारी स्पोर्ट्सी. उनकी पारी में 30 चौके और 7 छक्के शामिल रहे. ईशान के अलावा कुमार कुशाग्र ने 101 रन बनाए. शिखर मोहन ने 85, अभिमन्यु ईश्वरन ने 72, अनुकूल रॉय ने 45, वैभव सूर्यवंशी ने 44 और कुनैन कुरैशी ने 40 रन का योगदान दिया. साउथ जोन के लिए त्रिपुराना विजय ने 4 विकेट लिए, जबकि चामा मिलिंद और श्रेयस गोपाल को 2-2 विकेट मिले. 336 रन पर सिमट गया साउथ जोन 708 रन के जवाब में साउथ जोन की पहली पारी 336 रन पर खत्म हो गई. कप्तान तिलक वर्मा 99 रन बनाकर शतक से चूक गए. देवदत्त पडिक्कल ने 62 और चामा मिलिंद ने 43 रन बनाए. नारायण जगदीशन ने 32, शेख रशीद ने 27, स्मरण रविचंद्रन ने 23 और श्रेयस गोपाल ने 26 रन जोड़े. ईस्ट जोन की ओर से मुकेश कुमार ने 3 विकेट लिए. मोहम्मद शमी, कुनैन कुरैशी और शिखर मोहन को 2-2 विकेट मिले. पहली पारी के आधार पर ईस्ट जोन को 372 रन की बड़ी बढ़त मिली. ये भी पढ़ें: झारखंड के कुशाग्र को दलीप ट्रॉफी में शतक लगाने का मिला इनाम, अब ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ मचाएंगे धमाल दूसरी पारी में भी ईस्ट जोन का दबदबा दूसरी पारी में ईस्ट जोन की शुरुआत अच्छी नहीं रही. वैभव सूर्यवंशी 8 और अभिमन्यु ईश्वरन सिर्फ 3 रन बनाकर आउट हो गए. इसके बाद शिखर मोहन ने 52 रन की पारी स्पोर्ट्सी. कप्तान ईशान किशन ने एक बार फिर शानदार बल्लेबाजी की और 98 गेंदों पर 80 रन बनाए. कुमार कुशाग्र ने 46 रन का योगदान दिया. वहीं कुनैन कुरैशी ने नाबाद 116 और अनुकूल रॉय ने 64 रन बनाए. ईस्ट जोन ने अपनी दूसरी पारी मजबूत स्थिति में घोषित की और साउथ जोन के सामने विशाल लक्ष्य रखा. ईशान किशन ने फाइनल में बल्ले से कमाल किया. उन्होंने दोनों पारियों में कुल 350 रन बनाए. पहली पारी में 270 और दूसरी पारी में 80 रन की उनकी पारियां ईस्ट जोन की खिताबी जीत में सबसे बड़ा कारण बनीं. 13 साल बाद फिर चैंपियन बना ईस्ट जोन ईस्ट जोन के लिए यह जीत इसलिए भी खास है क्योंकि टीम को दलीप ट्रॉफी जीतने के लिए 13 साल इंतजार करना पड़ा. 2011-12 और 2012-13 में लगातार दो खिताब जीतने के बाद टीम पहली बार 2026 में चैंपियन बनी. ईशान किशन की कप्तानी में मिली इस जीत के साथ ईस्ट जोन ने दलीप ट्रॉफी के इतिहास में अपना तीसरा खिताब दर्ज कर लिया. ये भी पढ़ें: अफगानिस्तान सीरीज और एशियन गेम्स के लिए यश ठाकुर की टीम इंडिया में एंट्री, हर्षित राणा की जगह मिला मौका The post ईस्ट जोन ने तीसरी बार जीता दलीप ट्रॉफी का खिताब, 13 साल बाद ईशान की कप्तानी में बना चैंपियन appeared first on Naya Vichar.

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18 साल से कम उम्र के बच्चे नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने 18 साल से कम उम्र के बच्चों को सोशल मीडिया के इस्तेमाल के दौरान उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दाखिल की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र प्रशासन को नोटिस जारी किया है. याचिका में यह मांग की गई है कि नाबालिग अगर सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं तो उसमें माता-पिता या कानूनी अभिभावक की जरूरी भागीदारी शामिल होनी चाहिए. इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स, 2021 में बदलाव की मांग NGO जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस की याचिका में कहा गया है कि फेसबुक और स्नैपचैट (इंडिया) जैसे प्लेटफॉर्म यूजर्स को 13 साल की उम्र से अकाउंट बनाने की इजाजत दे देते हैं, जबकि 13 साल की उम्र में बच्चों की समझ बहुत विकसित नहीं होती है. हिंदुस्तानीय कानून के अनुसार 18 साल से कम उम्र के लोगों को नाबालिग माना जाता है. याचिका में यह कहा गया है कि इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी रूल्स, 2021 में बदलाव किया जाए ताकि यह पक्का हो सके कि कोई भी डिजिटल प्लेटफॉर्म माता-पिता या कानूनी अभिभावक की सहमति के बिना 18 साल से कम उम्र के शिशु के साथ कॉन्ट्रैक्ट न करे. माता-पिता की मंजूरी जरूरी एनजीओ ने अपनी याचिका में यह मांग भी की है कि ऐसी गाइडलाइंस हों कि किसी नाबालिग को डिजिटल प्लेटफॉर्म एक्सेस करने या इस्तेमाल करने की इजाजत हो, तो ऐसी एक्सेस कानूनी तौर पर मान्यता प्राप्त तरीके से हो जिसमें माता-पिता या कानूनी अभिभावक शामिल हों. माता-पिता या अभिभावक का वेरिफिकेशन/e-KYC शामिल हो ताकि उन्हें सुरक्षित माहौल मिले. बच्चों को सुरक्षित माहौल में ही सोशल मीडिया तक पहुंच देने के पीछे एनजीओ का उद्देश्य उन्हें यौन शोषण, ट्रैफिकिंग,साइबरबुलिंग और उम्र के हिसाब से गलत कंटेंट जैसे रिस्क के खतरे में डालने से बचाना है. सोशल मीडिया पर बच्चों के सामने कौन-कौन से खतरे? याचिका में बच्चों को डिजिटल प्लेटफॉर्म का स्वतंत्र रूप से इस्तेमाल करने से जुड़े कई संभावित खतरों का जिक्र किया गया है. इसमें ऑनलाइन ग्रूमिंग, यौन शोषण, मानव तस्करी, साइबरबुलिंग, निजी डेटा का दुरुपयोग और उम्र के लिहाज से अनुपयुक्त कंटेंट शामिल हैं. याचिका में यह भी चिंता जताई गई है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों के आधार पर उनके की जा सकती है. इससे बच्चों की निजता और सुरक्षा से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं. ये भी पढ़ें :छात्र को नोटिस भेजने पर भड़के CJI: बोले- कार्रवाई का सवाल ही नहीं, मजिस्ट्रेट से मांगेंगे स्पष्टीकरण The post 18 साल से कम उम्र के शिशु नहीं चला पाएंगे सोशल मीडिया? सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को भेजा नोटिस appeared first on Naya Vichar.

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Duleep Trophy Final Day 5 Live: कुनैन कुरैशी शतक के करीब, 700 के पार पहुंचा ईस्ट जोन की बढ़त

दलीप ट्रॉफी फाइनल के पांचवें दिन ईस्ट जोन की टीम खिताब जीतने के इरादे से उतरेगी. वहीं साउथ जोन को कोई चमत्कार की उम्मीद होगी. ईस्ट जोन अभी तक 584 रन से आगे. पांचवें दिन के लाइव अपडेट्स के लिए आप हमारे साथ जुड़े रहें. The post Duleep Trophy Final Day 5 Live: कुनैन कुरैशी शतक के करीब, 700 के पार पहुंचा ईस्ट जोन की बढ़त appeared first on Naya Vichar.

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20 हजार करोड़ के नुकसान के बाद भी बिहार में जारी रहेगी शराबबंदी, सीएम सम्राट ने बताई ये वजह

Samrat Choudhary On Bihar Liquor Ban: बिहार में पूर्ण शराबबंदी आगे भी जारी रहेगी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया है कि प्रशासन इस फैसले से कोई समझौता नहीं करेगी. उन्होंने कहा कि शराबबंदी से राज्य को हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है. इसके बावजूद प्रशासन शराबबंदी को खत्म करने के पक्ष में नहीं है. मुख्यमंत्री ने समाचार एजेंसी ANI से बातचीत में शराबबंदी से लेकर बाढ़, रोजगार और पलायन जैसे कई मुद्दों पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि शराबबंदी सिर्फ राजस्व का विषय नहीं है. यह बिहार की आधी आबादी के सम्मान से जुड़ा ऐतिहासिक फैसला है. स्त्रीओं के आग्रह पर लागू हुई थी शराबबंदी सम्राट चौधरी ने कहा कि नीतीश कुमार ने स्त्रीओं के आग्रह पर बिहार में शराबबंदी लागू की थी. प्रशासन के इस फैसले का सकारात्मक असर भी देखने को मिला है. मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि शराबबंदी को लेकर प्रशासन की नीति में कोई बदलाव नहीं होगा. राजस्व का नुकसान होने के बावजूद पूर्ण शराबबंदी जारी रहेगी. 20 हजार करोड़ का राजस्व नुकसान, फिर भी समझौता नहीं बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद प्रशासन को शराब से मिलने वाले राजस्व का बड़ा हिस्सा गंवाना पड़ा है. मुख्यमंत्री के मुताबिक, इससे हर साल करीब 20 हजार करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हो रहा है. इसके बावजूद प्रशासन शराबबंदी को आर्थिक नजरिये से ही नहीं देख रही है. मुख्यमंत्री ने इसे स्त्रीओं के सम्मान और सामाजिक बदलाव से जोड़कर बताया. View on Instagram नीतीश कुमार को बताया पिता तुल्य मुख्यमंत्री ने नीतीश कुमार के साथ अपने लंबे नेतृत्वक संबंधों का भी जिक्र किया. उन्होंने कहा कि वह पिछले 30 सालों से नीतीश कुमार के साथ काम कर रहे हैं. उन्होंने नीतीश कुमार को पिता तुल्य बताया. भाजपा के अगले नेता को लेकर पूछे गए सवाल पर सम्राट चौधरी ने कहा कि यह फैसला पार्टी का शीर्ष नेतृत्व करता है. उन्होंने इसे भाजपा का आंतरिक मामला बताया. 2030 तक पलायन रोकने का दावा मुख्यमंत्री ने बिहार से पलायन को लेकर भी बड़ा दावा किया. उन्होंने कहा कि 2030 से पहले राज्य से पलायन रोक दिया जाएगा. उनके मुताबिक, तब तक पढ़ाई से लेकर रोजगार तक बेहतर व्यवस्था तैयार हो जाएगी. प्रशासन का जोर राज्य में ही युवाओं के लिए शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें बाढ़ को लेकर हाईलेवल डैम की तैयारी बाढ़ के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नेपाल से आने वाली कोसी और गंडक जैसी नदियों के कारण बिहार में बाढ़ की समस्या आती है. हाईलेवल डैम बनाने को लेकर डीपीआर की सहमति बन चुकी है. फिलहाल बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव का काम युद्ध स्तर पर चल रहा है. नदियों के भीतरी इलाकों में रहने वाले करीब 20 हजार लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है. उनके लिए सामुदायिक रसोई भी चलाई जा रही है. फरक्का बराज को लेकर भी उठाया सवाल सम्राट चौधरी ने फरक्का बराज को भी बिहार के लिए नुकसानदायक बताया. उन्होंने कहा कि इसके कारण गंगा नदी में गाद जमा हो रही है. इससे नदी की चौड़ाई अलग-अलग जगहों पर बढ़ गई है. मुख्यमंत्री के अनुसार, बक्सर में गंगा की चौड़ाई करीब 4 किमी, पटना में 11 किमी, बेगूसराय में 17 किमी और भागलपुर में 26 किमी तक हो जाती है. उन्होंने कहा कि फरक्का जल संधि को लेकर बिहार की मांग स्पष्ट है. राज्य को पीने, खेती और उद्योग के लिए जरूरत के अनुसार किसी भी समय पानी लेने का अधिकार मिलना चाहिए. इस मुद्दे पर केंद्र प्रशासन से बातचीत की गई है. Also Read: प्रशांत किशोर पर सम्राट चौधरी बोले- वो बेचारा है, उसको करने दीजिए, बांकीपुर हार पर कहा- BJP के लिए अलार्मिंग, गलती हुई है… The post 20 हजार करोड़ के नुकसान के बाद भी बिहार में जारी रहेगी शराबबंदी, सीएम सम्राट ने बताई ये वजह appeared first on Naya Vichar.

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Explainer : होर्मुज से लेकर पनामा तक संकट में समुद्री ट्रेड रूट! क्या बदलने वाला है ग्लोबल सप्लाई चेन का गणित

दुनिया के समुद्री व्यापार का पुराना गणित बदल रहा है. अब सवाल सिर्फ यह नहीं है कि जहाज को सबसे छोटे और सस्ते रास्ते से कैसे पहुंचाया जाए. दरअसल, पश्चिम एशिया में युद्ध ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही को प्रभावित किया है, तो दूसरी तरफ पनामा नहर में पानी की कमी के कारण जहाजों की आवाजाही सीमित है. नतीजा जहाजों को वैकल्पिक रास्ते तलाशने पड़ रहे हैं, सफर लंबा और महंगा हो रहा है. ऐसे में युद्ध, पानी की कमी और बढ़ती शिपिंग लागत के कारण शिपिंग कंपनियों के सामने नया सवाल है कि व्यापार के लिए कौन सा ट्रेड रूट सही है और वो कितना सुरक्षित है. होर्मुज में तनाव से शिपिंग पर कितना असर? होर्मुज दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में से एक है. यहां से बड़ी मात्रा में तेल और गैस की सप्लाई होती है. इसलिए इस रास्ते में कोई बड़ी रुकावट आती है तो उसका असर सिर्फ जहाजों तक नहीं रहता, बल्कि तेल की कीमत, माल ढुलाई, खाने-पीने की चीजों और दूसरी चीजों की लागत पर भी पड़ सकता है. UNCTAD के अनुसार होर्मुज दुनिया के अहम समुद्री चेकपॉइंट में शामिल है. यूएन ट्रेड एंड डेवलपमेंट (UN Trade and Development), जिसे पहले यूएनसीटीएडी (UNCTAD) के नाम से जाना जाता था, संयुक्त राष्ट्र की एक प्रमुख अंतर-प्रशासनी संस्था है. इसकी स्थापना 1964 में हुई थी. यह वैश्विक व्यापार, निवेश और विकास से जुड़े मुद्दों पर रिसर्च, आंकड़े और नीतिगत विश्लेषण उपलब्ध कराती है.  होर्मुज में तनाव के कारण मौजूदा स्थिति देखें तो बाजार और जहाजों की ट्रैकिंग के आंकड़े काफी कुछ बताते हैं. रॉयटर्स के मुताबिक, बुधवार को होर्मुज से सिर्फ 7 कमोडिटी जहाज गुजरे. एक दिन पहले यह संख्या 12 थी, जबकि पिछले 10 दिनों का औसत करीब 14 था. होर्मुज में तनाव का तेल की कीमतों पर भी असर दिख रहा है. 10 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 101.10 डॉलर प्रति बैरल था. रॉयटर्स के मुताबिक, अगस्त की शुरुआत के मुकाबले इसकी कीमत करीब 30 फीसदी बढ़ी है. हालांकि यह बाजार का आंकड़ा है, आईएमओ या यूएनसीटीएडी का आधिकारिक आंकड़ा नहीं. जहाजों का किराया भी बढ़ा है. एसएंडपी ग्लोबल के बाजार आंकड़ों के मुताबिक, 9 सितंबर को अरब गल्फ से सुदूर पूर्व जाने वाले बड़े वीएलसीसी टैंकर का किराया रिकॉर्ड 161.93 डॉलर प्रति मीट्रिक टन तक था. पनामा नहर में पानी की कमी क्यों बनी चिंता? होर्मुज में समस्या युद्ध की वजह से है, लेकिन पनामा नहर एक दूसरी तरह के खतरे का संकेत कर रही है. यहां सवाल है कि जहाज चलाने के लिए नहर में पानी कितना उपलब्ध है. पनामा नहर प्राधिकरण के मुताबिक, 3 सितंबर से रोजाना 9 नियोपनामैक्स और 25 पैनामैक्स, यानी कुल 34 जहाजों के लिए स्लॉट हैं. 15 सितंबर से यह संख्या घटकर 32 जहाज रोजाना हो जाएगी. पानी की कमी के कारण क्षमता घटने से जहाजों का इंतजार और शिपिंग लागत बढ़ सकती है. पनामा नहर में जहाजों की आवाजाही लॉक सिस्टम और पानी की उपलब्धता पर निर्भर करती है. अलग-अलग आकार के जहाजों के लिए अलग लॉक हैं और हर दिन सीमित संख्या में जहाजों को गुजरने की अनुमति मिलती है. पैनामैक्स लॉक अपेक्षाकृत छोटे जहाजों के लिए होता है, जबकि नियोपनामैक्स लॉक बड़े जहाजों के लिए बनाए जाते हैं. प्राधिकरण के मुताबिक, नहर के आसपास के इलाके में उम्मीद से कम बारिश हुई है. एल नीनो का असर भी रहा है. पानी बचाने के लिए कई कदम उठाए गए हैं, लेकिन इसके बावजूद जहाजों की संख्या सीमित करनी पड़ी है। पनामा नहर इसलिए अहम है क्योंकि यह अटलांटिक और प्रशांत महासागर के बीच जहाजों का रास्ता काफी छोटा कर देती है. अगर यहां जहाजों की संख्या कम होती है तो उन्हें इंतजार करना पड़ सकता है या फिर लंबा रास्ता चुनना पड़ सकता है. ये भी पढ़ें: पेट्रोल-डीजल की कीमत से लेकर महीने की EMI तक, होर्मुज संकट का आपकी जेब पर कितना पड़ेगा असर? क्या केप ऑफ गुड होप फिर बन रहा है अहम रास्ता? जब कोई छोटा समुद्री रास्ता ज्यादा जोखिम वाला हो जाता है तो कंपनियां लंबा रास्ता चुनने लगती हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण लाल सागर और स्वेज नहर के मामले में केप ऑफ गुड होप का रास्ता है. रॉटरडैम पोर्ट के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, सिंगापुर से रॉटरडैम तक स्वेज नहर के रास्ते की दूरी करीब 8,288 नॉटिकल मील है. वहीं केप ऑफ गुड होप से होकर जाने पर यह दूरी करीब 11,755 नॉटिकल मील हो जाती है. यानी करीब 3,467 नॉटिकल मील ज्यादा. जाहिर है, ज्यादा दूरी का मतलब ज्यादा ईंधन, ज्यादा समय और ज्यादा खर्च. लेकिन अगर छोटे रास्ते पर युद्ध, हमले या बीमा का खतरा बहुत ज्यादा हो जाए तो कंपनियों के लिए लंबा रास्ता भी ज्यादा सुरक्षित और व्यावहारिक विकल्प हो सकता है. समुद्री ट्रेड रूट चेंज होने पर हिंदुस्तान पर क्या असर होगा ? हिंदुस्तान के लिए यह मुद्दा और भी अहम है क्योंकि हिंदुस्तान अपनी ऊर्जा जरूरतों के एक बड़े हिस्से के लिए दूसरे देशों पर निर्भर है. रॉयटर्स के मुताबिक जनवरी में हिंदुस्तान के करीब 55 फीसदी कच्चे तेल का आयात मध्य पूर्व से आया था. हिंदुस्तान अपनी एलएनजी जरूरत का करीब दो-तिहाई हिस्सा भी मध्य पूर्व से लेता है. लेकिन संकट बढ़ने के बाद हिंदुस्तान ने दूसरे देशों से तेल और गैस लेने की कोशिश तेज कर दी है. रॉयटर्स के मुताबिक, अप्रैल-जुलाई 2026 के बीच हिंदुस्तान के कच्चे तेल आयात में रूस की औसत हिस्सेदारी 43.25 फीसदी रही और मध्य पूर्व की हिस्सेदारी करीब 30 फीसदी रह गई. जबकि जुलाई में अकेले रूस की हिस्सेदारी 50.83 फीसदी तक पहुंची. एलएनजी में भी हिंदुस्तान दूसरे विकल्प तलाश रहा है. पेट्रोनेट एलएनजी ने कतर से सितंबर की सप्लाई को लेकर अनिश्चितता जताई थी. इसके बाद हिंदुस्तान ने ओमान, अमेरिका, नाइजीरिया और अंगोला जैसे देशों से सप्लाई बढ़ाने की कोशिश की. यानी हिंदुस्तान के लिए बात सिर्फ इतनी नहीं है कि तेल और गैस कहां से खरीदना है. सवाल यह भी है कि वह तेल और गैस हिंदुस्तान तक किस रास्ते से आएगा और वह रास्ता कितना सुरक्षित है. क्या यह अस्थायी संकट है या समुद्री ट्रेड रूट का नया नक्शा? अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि दुनिया का व्यापार पूरी तरह

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Bigg Boss 20 Verdict: लड़ाई, कैमरा, attention सबको सब चाहिए… बस गेम किसे खेलना है, ये अभी तय नहीं!

BB20 Verdict: बिग बॉस के घर में अभी ठीक से चप्पलें भी अपनी जगह नहीं ढूंढ पाई हैं, लेकिन कंटेस्टेंट्स ने एक-दूसरे की नीयत, attitude और personality का पूरा पोस्टमार्टम शुरू कर दिया है. आमतौर पर पहले हफ्ते लोग दोस्त बनते हैं, एक-दूसरे को समझते हैं, थोड़ा awkward होते हैं, पर यहां तो मामला उल्टा चल रहा. कंटेस्टेंट्स ने दोस्ती की जगह दुश्मनी शुरू कर दी है, पर मजेदार बात ये है कि हर कंटेस्टेंट्स खुद को सबसे शांत और समझदार बता रहा है. भाई, आप ही बतायें अगर घर में आठ लोग एक साथ बोल रहे हैं कि “मैं लड़ाई नहीं करता”, तो फिर लड़ कौन रहा है? छोटी बात, बड़ा तमाशा एपिसोड 4 में आम्रपाली दुबे और अरिश्फा खान की तकरार ने खूब मसाला दिया. दोनों के बीच बात शुरू हुई एक comment से और पहुंच गई personal zone तक. और फिर तो ………… यही Bigg Boss का magic है. बिग बॉस के घर में अगर कोई पूछ दे- “आपकी उम्र कितनी है?” तो अगले पांच मिनट में लगता है जैसे संसद का विशेष सत्र बुलाया गया हो.  कंटेस्टेंट्स की बात सुभानल्लाह आम्रपाली की पर्सनैलिटी में दम है. वह अपनी बात रखने से पीछे नहीं हटतीं, लेकिन थोड़ा कंट्रोल जरूरी है. क्योंकि Bigg Boss में सामने वाला अगर एक तीर चलाए और आप पूरा तरकश खोल दें, तो फायदा किसका होगा?  जिसने तीर चलाया उसका. अरिश्फा को भी थोड़ा Bigg Boss को समझना पड़ेगा अरिश्फा के लिए भी एक बात समझना जरूरी है. यहां कोई आपको चिढ़ाएगा. कोई provoke करेगा. कोई आपकी बात का गलत मतलब निकालेगा. और कोई ऐसा भी मिलेगा जो सिर्फ यह देखने के लिए button दबाएगा कि आप react कब करती हैं. इसलिए हर बार reaction देना, मतलब दूसरे contestant को free content देना. और Bigg Boss के घर में free content सबसे महंगी चीज होती है. कनिका मान की strategy के क्या कहने आज कनिका को देखकर लगा कि कम से कम किसी ने घर में volume के अलावा strategy भी लेकर एंट्री मारी है. कप्तानी टास्क में उनका फैसला हो या दूसरे मुद्दों पर उनका रवैया, वह हर जगह सिर पटकने की बजाय मौके को समझती दिख रही हैं, पर अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि कनिका mastermind हैं. लेकिन इतना जरूर है- जो contestant पहले हफ्ते ही अपना पूरा पत्ता खोल दे, वह दूसरे हफ्ते में क्या नया दिखायेगा? कनिका शायद पत्ते बचाकर चल रही हैं. यंग डीएसए- Energy अच्छी है, ब्रेक भी रखिए! यंग के पास energy की कमी नहीं है. इतनी energy कि कभी-कभी लगता है Bigg Boss को इनके लिए अलग से “Mute” button देना पड़ेगा. लेकिन उनकाे फायदा यह है कि वह boring नहीं हैं. पर खतरा यह भी है कि हर वक्त reaction देने से धीरे-धीरे audience को लग सकता है कि भाई के पास हर सवाल का जवाब और हर बात पर opinion तैयार है. थोड़ा रहस्य भी रहने दीजिए. काजी- भाई, पहले गेम समझ लो फिर गुस्सा करना! काजी का नाम लिए बिना आज के episode की बात अधूरी है. उनकी और युंग की टकराहट ने एक बात साफ कर दी- दोनों में patience की कमी है और ego की supply भरपूर. काजी में personality है, लेकिन कई बार ऐसा लगता है कि उन्हें हर situation में अपनी बात साबित करनी है. Bigg Boss में यह attitude शुरू में बहुत अच्छा लगता है. फिर धीरे-धीरे audience के मन में सवाल चलने लगता है- “भाई, आप सही हो सकते हैं… लेकिन हर पांच मिनट में साबित करना जरूरी है क्या?” काजी के लिए जरूरी होगा कि वह सिर्फ reaction देने वाले contestant न बनें. क्योंकि अगर दूसरे लोग आपकी एक छोटी सी बात पर आपको trigger कर दें और आप तुरंत मैदान में उतर जाएं, तो game की remote control आपके हाथ में नहीं, सामने वाले के हाथ में चली जायेगी. अभी काजी को थोड़ा observe करना होगा, थोड़ा calculate करना होगा और हर लड़ाई को personal battle बनाने से बचना होगा. क्योंकि उनमें potential है. लेकिन काजी साहब potential को temper के नीचे दबने मत दीजिए ! Mary Kom- नाम बड़ा है, लेकिन Bigg Boss में reputation नहीं, reaction का पंच चलता है अब बात Mary Kom की. उनकी सबसे बड़ी strength उनकी personality और उनका real-life stature, लेकिन Bigg Boss का घर ऐसी जगह है जहां बाहर की achievement आपको शुरुआत में respect दिला सकती है, trophy नहीं. Kitchen को लेकर Rhiti Tiwari से हुई बहस छोटी लग सकती है, लेकिन ऐसे ही छोटे moments से घर में perception बनते हैं. और Mary Kom के लिए यही सबसे interesting challenge है. लोग उन्हें champion के रूप में जानते हैं. लेकिन Bigg Boss पूछेगा- “Champion हैं, ठीक है… लेकिन घर के pressure में आपका temperament कैसा है?” अगर वह शांत रहते हुए अपनी बात मनवा लेती हैं, तो यह उनके game की बड़ी strength होगी. क्योंकि हर argument को boxing match बनाना जरूरी नहीं है. यहां सामने वाले को knock-out नहीं, audience को connect करना है. और फिलहाल Mary Kom को भी यही balance बनाना होगा. Rhiti की असली परीक्षा अभी बाकी है Rhiti Tiwari के सामने सबसे बड़ा challenge कोई दूसरा contestant नहीं, बल्कि अपनी पहचान बनाना है. क्योंकि audience उन्हें सिर्फ Manoj Tiwari की बेटी के तौर पर नहीं देखना चाहती. वह जानना चाहती है कि Rhiti खुद कैसी हैं, उनका game क्या है और pressure में उनकी personality कैसी रहती है. अभी कुछ छोटे conflicts से presence बना रही हैं. लेकिन सिर्फ kitchen में बहस करके कोई Bigg Boss winner नहीं बनता. ऐसा होता, तो घर का सबसे अच्छा cook ही trophy ले जाता. और बाकी लोग? कुछ contestants को देखकर अभी भी यही सवाल है- “आप यहां game स्पोर्ट्सने आए हैं या attendance लगाने?” पहले हफ्ते में invisible रहना भी strategy हो सकती है, लेकिन बहुत ज्यादा invisible रह गए, तो audience पूछेगी ही नहीं कि आप कहां हैं. और Bigg Boss में सबसे खतरनाक चीज है- लड़ाई हारना नहीं, याद भी नहीं रहना. इस वक्त मेरा गेम-मीटर क्या कहता है? कनिका : शांत हैं, लेकिन नजर रखिए. आम्रपाली : strong हैं, पर गुस्से पर control करना होगा. अरिश्फा : personality है, पर reaction कम करना होगा. युंग : entertaining हैं, थोड़ा brake भी जरूरी है. Rhiti : potential है, लेकिन अपनी identity बनानी होगी.  बाकी : भाई, पहले थोड़ा दिखिए…

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झारखंड SIR : मांडर में 35 जीवित ग्रामीणों को दिखाया ‘गायब’, जमशेदपुर में अफगानी नागरिक बने मतदाता

रांची : रांची जिले के मांडर प्रखंड अंतर्गत सुरसा गांव के बूथ संख्या 191 में मतदाता सूची (SIR) से फर्जी तरीके से 35 ग्रामीणों के नाम हटाने का मामला सामने आया है. नेतृत्वक दलों से जुड़े दो बूथ लेवल एजेंटों (BLA) द्वारा रची गई इस साजिश का बीएलओ (BLO) की तत्परता और सतर्कता के कारण समय रहते पर्दाफाश हो गया. फर्जीवाड़े की समाचार मिलते ही स्थानीय ग्रामीणों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया. बुधवार को अंजुमन इस्लामिया कमेटी, सुरसा के नेतृत्व में ग्रामीणों ने मांडर की सीओ सह सहायक निर्वाचन निबंधन पदाधिकारी चंचला कुमारी और थाना प्रभारी को ज्ञापन सौंपकर दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है. फॉर्म-7 भरकर जमा किए थे झूठे दावे मामले का खुलासा तब हुआ जब गत छह सितंबर को दो बीएलए ने बीएलओ के पास 35 मतदाताओं के नाम एसआईआर सूची से विलोपित करने के लिए ‘फॉर्म-7’ भरकर जमा कराया. इन फॉर्मों में संबंधित मतदाताओं को गांव से अनुपस्थित या स्थायी रूप से स्थानांतरित (Shifted) दर्शाया गया था. बीएलओ को जब संदेह हुआ तो उन्होंने तुरंत इसकी जानकारी ग्रामीणों और सीओ को दी. भौतिक सत्यापन में पाया गया कि जिन 35 लोगों के नाम हटाने का आवेदन दिया गया था, वे सभी वर्तमान में गांव में ही निवास कर रहे हैं. ग्रामीणों का आरोप है कि नेतृत्वक बीएलए द्वारा बीएलओ पर फॉर्म स्वीकार करने और हस्ताक्षर करने का दबाव भी बनाया गया था, जिसे खारिज करते हुए बीएलओ ने सभी फॉर्म अधिकारियों को सौंप दिए. सीओ चंचला कुमारी ने ग्रामीणों को मामले की निष्पक्ष जांच कर कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है. ये भी पढ़ें: आज रांची समेत 11 जिलों में भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी 3 अफगानी नागरिकों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए जमशेदपुर पूर्वी विधानसभा क्षेत्र के मतदान केंद्र संख्या 286 की मतदाता सूची में तीन अफगानी नागरिकों के नाम शामिल होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है. एसआईआर (SIR) प्रक्रिया के दौरान भौतिक सत्यापन और दस्तावेजों की जांच के बाद मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के निर्देश पर तीनों के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं. पहचान में आए अफगानी नागरिकों के नाम आसिल खान, मोहम्मद असलम और मोहम्मद इब्राहिम हैं. जांच में सामने आया कि ये तीनों पिछले 26 वर्षों से गोलमुरी थाना क्षेत्र के टुइलाडुंगरी स्थित कांग्रेस के जिला महामंत्री वसीम खान के आवास में किराएदार के रूप में रह रहे हैं. चुनाव आयोग ने DC और SP को दिए जांच के आदेश एसआईआर के तहत जब संदिग्ध पाए गए इन तीनों व्यक्तियों से नागरिकता और निवास से संबंधित दस्तावेज मांगे गए, तो प्रस्तुत किए गए कागजात पूरी तरह मिसमैच (अमान्य) पाए गए. इसके बाद जब गहन जांच की गई और उनके पासपोर्ट खंगाले गए, तब स्पष्ट हुआ कि तीनों वास्तव में अफगानिस्तान के नागरिक हैं. मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने जमशेदपुर के उपायुक्त (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को पत्र लिखकर मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं. प्रशासन अब इस बात की पड़ताल कर रहा है कि विदेशी नागरिकों के नाम मतदाता सूची में दर्ज होना महज एक प्रशासनिक लापरवाही थी या इसके पीछे कोई गहरी साजिश शामिल थी. ये भी पढ़ें: सिमडेगा में नौकरी दिलाने के नाम पर 5-6 करोड़ की ठगी, भिएसके फाउंडेशन से जुड़े 6 आरोपी गिरफ्तार The post झारखंड SIR : मांडर में 35 जीवित ग्रामीणों को दिखाया ‘गायब’, जमशेदपुर में अफगानी नागरिक बने मतदाता appeared first on Naya Vichar.

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सही फैसला लेकिन काफी देर कर दी, राजनीति से अशोक सिद्धार्थ के संन्यास पर बोली मायावती

Mayawati BSP News: आज श्री अशोक सिद्धार्थ द्वारा नेतृत्व से संन्यास लेने की घोषणा अति-देर से उठाया गया यह सही क़दम है. बहुजन समाज पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष मायावती ने पार्टी हित में एक अत्यंत कड़ा निर्णय लेते हुए अपने भतीजे आकाश आनंद को बीएसपी से पूरी तरह से मुक्त कर दिया है. इससे पहले उन्हें राष्ट्रीय संयोजक के पद से हटाया गया था. मायावती के अनुसार, आकाश आनंद पार्टी और आंदोलन के प्रति समर्पित रहने के बजाय पारिवारिक संबंधों को अधिक प्राथमिकता दे रहे थे. अशोक सिद्धार्थ के फैसले का नेतृत्वक असर यह पूरा घटनाक्रम आकाश आनंद के ससुर और पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ के नेतृत्व से संन्यास लेने से जुड़ा हुआ है. मायावती ने स्पष्ट कहा कि यदि अशोक सिद्धार्थ काफी समय पहले ही नेतृत्व छोड़ने का निर्णय ले लेते, तो पार्टी, बहुजन आंदोलन और आकाश आनंद को विपरीत परिस्थितियों का सामना नहीं करना पड़ता. इसके कारण बीएसपी नेतृत्व को भी बार-बार कड़े और सख्त फैसले लेने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता. बहुजन आंदोलन के सिद्धांत और त्याग का संदेश बीएसपी प्रमुख ने जोर देकर कहा कि पार्टी की नींव बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर और मान्यवर कांशीराम के त्याग, संघर्ष तथा निष्काम सेवा के सिद्धांतों पर आधारित है. बहुजन आंदोलन में निजी और पारिवारिक स्वार्थ के लिए कोई जगह नहीं है. पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं और नेताओं को व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं से ऊपर उठकर काम करना होगा, तभी शोषित और वंचित बहुजन समाज देश का शासक वर्ग बनने का अपना लक्ष्य हासिल कर सकेगा. यूपी में पूर्ण बहुमत की प्रशासन बनाने का संकल्प अंत में मायावती ने बीएसपी के सभी समर्पित कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे विरोधियों के किसी भी षड्यंत्र से प्रभावित न हों. वे पूरी निष्ठा, लगन और मेहनत के साथ उत्तर प्रदेश में बीएसपी की पूर्ण बहुमत वाली प्रशासन बनाने के अभियान में जुट जाएं. पार्टी का मुख्य उद्देश्य राज्य में एक बार फिर ‘सर्वजन हिताय, सर्वजन सुखाय’ के सिद्धांत पर मजबूत कानून-व्यवस्था और पारदर्शी शासन व्यवस्था कायम करना है. Must Read: 35 साल का सफर और एक भावुक पत्र,मायावती की शर्त मान अशोक सिद्धार्थ ने त्यागी नेतृत्व,आकाश आनंद की वापसी तय? The post सही फैसला लेकिन काफी देर कर दी, नेतृत्व से अशोक सिद्धार्थ के संन्यास पर बोली मायावती appeared first on Naya Vichar.

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VIDEO: PoK में फिर सड़कों पर उतरे लोग, महिला-पुरुषों के साथ बच्चे भी प्रोटेस्ट में शामिल; मुजफ्फराबाद में जवानों की बढ़ी तैनाती

PoK Protest: 9 सितंबर को आजाद जम्मू-कश्मीर (AJK) के साउथ बाग स्थित चितरा टोपी में स्थानीय लोगों ने एक विरोध मार्च निकाला. यह विरोध प्रदर्शन जम्मू-कश्मीर जॉइंट पब्लिक एक्शन कमेटी (JAAC) के आह्वान पर हुआ. जम्मू-कश्मीर जॉइंट पब्लिक एक्शन कमेटी (JAAC) के आह्वान पर हुए प्रदर्शन में स्त्रीएं, पुरुष और शिशु शामिल हुए. बढ़ती महंगाई के खिलाफ उठाई आवाज ग्रामीण पहाड़ी सड़क पर निकाले गए मार्च के दौरान लोगों ने अपनी मांगों और अधिकारों को लेकर आवाज उठाई. प्रदर्शनकारियों ने दाल और आटे समेत जरूरी खाद्य वस्तुओं की बढ़ती कीमतों का विरोध किया. JAAC के मुताबिक, मार्च में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने हिस्सा लिया. तीन महीने से जारी है आंदोलन PoK में तीन महीने से अधिक समय से पाकिस्तान प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन जारी हैं. प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि प्रशासन लोगों से संवाद कर समस्या का समाधान निकालने के बजाय उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है. पाकिस्तानी सेना पर हिंसा के आरोप प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी सेना पर आंदोलन की आवाज दबाने, हिंसा करने और लोगों को जबरन हिरासत में लेने के आरोप लगाए हैं. आंदोलन का नेतृत्व कर रही JAAC का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक आंदोलन जारी रहेगा. मुजफ्फराबाद में बढ़ाई गई सेना की तैनाती इसी बीच PoK की राजधानी मुजफ्फराबाद में एक बार फिर बड़ी संख्या में सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है. लगातार जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाए जाने से इलाके में तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. ये भी पढ़ें: VIDEO: ऑस्ट्रेलिया में पाकिस्तानी शख्स से प्यार और शादी, पति ने घर लाकर 12 साल तक बंधक बनाया The post VIDEO: PoK में फिर सड़कों पर उतरे लोग, स्त्री-पुरुषों के साथ शिशु भी प्रोटेस्ट में शामिल; मुजफ्फराबाद में जवानों की बढ़ी तैनाती appeared first on Naya Vichar.

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क्या आप भी खाना चंद मिनटों में खत्म कर देते हैं? जानें कितनी होनी चाहिए Eating Speed

Healthy Eating Habits: काम की बात सीरीज में हम रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी उन छोटी-बड़ी बातों पर चर्चा करते हैं, जिनका सामना हम अक्सर करते हैं. आज बात खाना खाने की आदत की. भागदौड़ में कई लोग खाना जल्दी-जल्दी खा लेते हैं और कभी मोबाइल देखते हुए तो कभी काम के बीच में ही खाना खत्म कर देते हैं. ऐसे में सवाल है कि क्या बहुत तेजी से खाना सेहत के लिए ठीक है. क्या खाना खाने में 20-30 मिनट लगाना जरूरी है. हाल में ही अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने FSSAI के Eat Right India से बातचीत में बताया कि वह खाना खाने में करीब 30 मिनट का समय देते हैं. तो आइए, आज की काम की बात में जानते हैं कि धीरे खाने से क्या फायदा हो सकता है और खाना खाते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.  पंकज त्रिपाठी ने बताया खाने का आसान तरीका अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने बताया कि अच्छी सेहत, दिनभर एनर्जी बनाए रखने और दिमाग को एक्टिव रखने के लिए सिर्फ क्या खा रहे हैं, यह ही नहीं बल्कि कैसे खा रहे हैं, यह भी जरूरी है. FSSAI का #EatRightIndia अभियान भी रोज के खान-पान को बेहतर बनाने पर जोर देता है. इसमें ज्यादा प्रोसेस्ड फूड से बचने और ताजा खाना खाने के साथ-साथ भोजन को आराम से और ध्यान देकर खाने की बात कही गई है. View on Instagram क्या खाना खाने के लिए 30 मिनट का समय तय करना चाहिए? नहीं, हर व्यक्ति के लिए 30 मिनट का कोई तय नियम नहीं है. जरूरी यह है कि खाना बहुत जल्दबाजी में न खाया जाए. अगर आप आमतौर पर कुछ ही मिनटों में पूरी प्लेट खत्म कर देते हैं, तो अपनी इटिंग स्पीड थोड़ी कम करने की कोशिश (Healthy Eating Habits) कर सकते हैं. आराम से खाना, निवाले को अच्छी तरह चबाना और बीच-बीच में रुकना ज्यादा महत्वपूर्ण है. जल्दी खाना खाने से क्या परेशानी हो सकती है? बहुत तेजी से खाने पर कई बार व्यक्ति को यह समझने का समय नहीं मिलता कि उसका पेट भर रहा है. ऐसे में जरूरत से ज्यादा खाना खाया जा सकता है. धीरे खाने से खाने के बीच थोड़ा समय मिलता है और भूख कम होने के संकेतों को पहचानना आसान हो सकता है. यानी खाना सिर्फ प्लेट खत्म करने के लिए नहीं, बल्कि शरीर की जरूरत को समझते हुए खाना जरूरी है. पेट भरने का संकेत मिलने में इतना समय क्यों लगता है? खाना शुरू करने के बाद पेट और दिमाग के बीच लगातार सिग्नल का आदान-प्रदान होता है. पेट में खाना पहुंचने और पाचन प्रक्रिया शुरू होने के बाद शरीर कई तरह के संकेत भेजता है. इन संकेतों को दिमाग तक पहुंचने और भरने महसूस होने में कुछ समय लग सकता है. यही वजह है कि बहुत तेजी से खाने पर व्यक्ति को बाद में अचानक यह महसूस हो सकता है कि उसने जरूरत से ज्यादा खाना खा लिया. क्या खाना जल्दी खाने से गैस या पेट फूलने की समस्या हो सकती है? कुछ लोगों में इसकी संभावना हो सकती है. जल्दी खाते समय बड़े निवाले लेने या खाना खाते हुए बात करने से भोजन के साथ ज्यादा हवा निगलने की समस्या हो सकती है. इससे डकार या पेट फूलने जैसा बेचैनी महसूस हो सकता है. लेकिन हर बार गैस या एसिडिटी का कारण सिर्फ जल्दी खाना नहीं होता. इन समस्याओं के पीछे दूसरी स्वास्थ्य संबंधी वजहें भी हो सकती हैं. PC: AI Generated खाना खाते समय मोबाइल चलाना भी गलत आदत है? अगर आपका ध्यान पूरी तरह मोबाइल पर है, तो आप खाने पर ठीक से ध्यान नहीं दे पाते. ऐसे में खाना कितनी तेजी से खाया जा रहा है या पेट कब भरने लगा, इसे महसूस करना मुश्किल हो सकता है. इसलिए खाना खाते समय कुछ देर मोबाइल को दूर रखना एक आसान बदलाव हो सकता है. इससे आपका ध्यान भोजन पर रहेगा और आप अपनी भूख व पेट भरने के संकेतों को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे. Healthy Eating Habits: धीरे खाने की आदत डालने के लिए क्या करें? छोटे निवाले लें. हर निवाले को अच्छी तरह चबाएं. निवाला निगलने के बाद ही अगला निवाला लें. खाना खाते समय मोबाइल या टीवी से दूरी रखें. खाने को जल्दी खत्म करने की कोशिश न करें. खाते समय बीच-बीच में अपनी भूख पर ध्यान दें. पेट संतुष्ट महसूस होने लगे तो सिर्फ प्लेट खत्म करने के लिए खाते न रहें. छोटी बात हो या रोज की कोई परेशानी, सही जानकारी काम आसान कर सकती है. ऐसी ही एक और काम की जानकारी के साथ अगली कड़ी में फिर मिलेंगे. यह भी पढ़ें: दूध उबालकर भी जल्दी फट जाता है? कहीं आप तो नहीं कर रहे ये गलतियां The post क्या आप भी खाना चंद मिनटों में खत्म कर देते हैं? जानें कितनी होनी चाहिए Eating Speed appeared first on Naya Vichar.

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