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‘मेरी नौकरी जाएगी या बचेगी?’ — JPSC/JSSC विवाद में सबसे बड़े 7 सवाल

TDPL से जुड़ी परीक्षाओं पर उठे सवालों और JPSC-JSSC भर्ती विवाद के बीच प्रशासन ने JSSC-CGL 2024 समेत TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला किया है. प्रशासन ने 2014 से हुई परीक्षाओं की व्यापक जांच की बात भी कही है. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. अब असली लड़ाई अदालत, प्रशासन और अभ्यर्थियों के बीच अगले कदम को लेकर है. 1. परीक्षा रद्द हुई तो नौकरी का क्या होगा? यह सबसे बड़ा सवाल है. अगर किसी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया ही रद्द कर दी जाती है, तो उससे हुई नियुक्तियों पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर नियुक्त कर्मचारी की नौकरी अपने-आप खत्म हो जाएगी. अदालत यह देख सकती है कि गड़बड़ी पूरी परीक्षा में थी या कुछ उम्मीदवारों/केंद्रों तक सीमित थी. यही वजह है कि अभ्यर्थियों के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी. JPSC-JSSC आंदोलन 2. पहले से नौकरी कर रहे उम्मीदवारों का क्या? मान लीजिए किसी उम्मीदवार ने परीक्षा पास की, नियुक्ति मिली और वह कई महीनों या वर्षों से नौकरी कर रहा है. अब यदि उस परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो दो अलग-अलग हित सामने आते हैं- एक तरफ: निष्पक्ष भर्ती और परीक्षा की विश्वसनीयता. दूसरी तरफ: उस उम्मीदवार का अधिकार, जिसने संभवतः अपनी मेहनत से परीक्षा पास की है. इसीलिए अदालतें आम तौर पर यह भी देखती हैं कि क्या पूरी चयन प्रक्रिया दूषित थी या केवल कुछ मामलों में गड़बड़ी हुई. यह सवाल इसलिए और महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रशासन ने TDPL से जुड़ी परीक्षाओं के परिणाम और चयन प्रक्रियाओं को भी जांच के दायरे में रखा है. 3. क्या दोबारा परीक्षा होगी? अगर परीक्षा रद्द होती है, तो सबसे संभावित विकल्पों में से एक री-एग्जाम हो सकता है. लेकिन यहां भी कई सवाल हैं- क्या सभी उम्मीदवार दोबारा परीक्षा देंगे? क्या उम्र सीमा में छूट मिलेगी? क्या आवेदन शुल्क फिर लिया जाएगा? क्या पुराने उम्मीदवारों को सीधे मौका मिलेगा? क्या नया सिलेबस या नई परीक्षा एजेंसी होगी? इन सवालों का जवाब प्रशासन और संबंधित आयोगों की अगली अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा. यानी अभ्यर्थियों के लिए ‘परीक्षा रद्द’ होना कहानी का अंत नहीं, बल्कि एक नई परीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत हो सकती है. Read more: TDPL की कहानी: Data Processing Company से JPSC-JSSC विवाद तक 4. क्या पुरानी कटऑफ और मेरिट लिस्ट बच सकती है? यह सवाल भी बेहद महत्वपूर्ण है. अगर परीक्षा की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता साबित होती है, तो पुरानी मेरिट लिस्ट को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. लेकिन यदि जांच में यह सामने आता है कि गड़बड़ी सीमित थी और अधिकांश प्रक्रिया निष्पक्ष रही, तो उम्मीदवार अदालत में पुराने परिणाम को बचाने की मांग कर सकते हैं. यानी फैसला केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि ‘गड़बड़ी हुई या नहीं’, बल्कि इस पर भी कि गड़बड़ी कितनी व्यापक थी और उसका चयन पर कितना असर पड़ा. 5. कोर्ट ने अब तक क्या कहा है? यह मामला यहीं सबसे ज्यादा पेचीदा हो जाता है. राज्य प्रशासन के परीक्षा रद्द करने के फैसलों के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC की 11वीं और 13वीं सिविल सेवा परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के प्रशासनी फैसले पर रोक लगाई है. इससे उन सफल अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है. इसका सीधा मतलब है: प्रशासन का फैसला अंतिम नहीं है. अदालत यह तय कर सकती है कि किसी परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना उचित है या फिर केवल दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करके चयन प्रक्रिया को बचाया जा सकता है. 6. TDPL वाली परीक्षाओं का क्या होगा? यही वह सवाल है जिसने पूरे विवाद को बड़ा बना दिया है. TDPL यानी TSR Data Processing Private Limited झारखंड की कई प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी रही है. अब एजेंसी की भूमिका जांच के केंद्र में है. एजेंसी को लेकर पहले भी कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग के सवाल उठे थे. इसके बावजूद बाद में उसे परीक्षा संबंधी काम मिला. प्रशासन ने अब TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं को व्यापक जांच के दायरे में रखा है और उनसे जुड़े परिणाम तथा चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि विवाद अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा. 7. प्रशासन बनाम कोर्ट, अगला कदम क्या? अब सबसे दिलचस्प लड़ाई यहीं होगी. प्रशासन का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए कठोर कदम जरूरी हैं. दूसरी तरफ, सफल उम्मीदवारों का तर्क है कि अगर उनकी कोई गलती नहीं है तो उन्हें सामूहिक रूप से दंडित क्यों किया जाए? यही वह जगह है जहां ‘परीक्षा की शुचिता’ और ‘उम्मीदवारों के अधिकार’ आमने-सामने आते हैं. प्रशासन ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने और 2014 से हुई परीक्षाओं की जांच की बात कही है. वहीं, छात्रों की मांग जांच को CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की भी रही है. असली सवाल: गलती सिस्टम की थी, तो सजा किसे? झारखंड का मौजूदा परीक्षा विवाद आखिरकार इसी सवाल पर आकर टिकता है. अगर सिस्टम में गड़बड़ी थी, तो उसका नुकसान उन युवाओं को कितना उठाना चाहिए जिन्होंने वर्षों तक तैयारी की? और दूसरी तरफ- अगर परीक्षा प्रक्रिया ही संदिग्ध हो गई है, तो केवल नियुक्तियां बचाने के लिए उसे वैध कैसे माना जा सकता है? यही कारण है कि यह मामला सिर्फ JPSC या JSSC का नहीं है. यह उस पूरे भर्ती मॉडल की परीक्षा है जिसमें प्रशासन, आयोग, निजी परीक्षा एजेंसी और लाखों अभ्यर्थियों के बीच भरोसा सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है. एक परीक्षा रद्द करना आसान हो सकता है, लेकिन उसके बाद पैदा हुए भरोसे के संकट को ठीक करना कहीं ज्यादा मुश्किल है. The post ‘मेरी नौकरी जाएगी या बचेगी?’ — JPSC/JSSC विवाद में सबसे बड़े 7 सवाल appeared first on Naya Vichar.

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DU में पढ़ने से अब कोई रोक नहीं सकता, इन 11 कॉलेज में मिलेगा 12वीं के आधार पर एडमिशन

DU UG Admission 2026: दिल्ली यूनिवर्सिटी में अब CUET UG नहीं बल्कि 12वीं के आधार पर एडमिशन दिया जाएगा. यूनिवर्सिटी से जुड़े 11 कॉलेज में 12वीं के मार्क्स पर एडमिशन दिया जाएगा. खुद यूनिवर्सिटी ने खाली सीटों को भरने के लिए ये फैसला लिया है. आपकी जानकारी के लिए बता दें कि कई राउंड की काउंसलिंग के बाद भी जब यूनिवर्सिटी में सीटें खाली रह गई हैं तो यह फैसला लिया गया है. ये व्यवस्था स्थाई नहीं है. केवल छात्रों को एक और मौका देने के लिए लिया गया है. खाली सीटों को भरने के लिए लिया गया फैसला DU के सभी मुख्य कोर्सेज में एडमिशन CUET UG के आधार पर होता है. हालांकि, कई राउंड की काउंसलिंग के बाद भी कई कॉलेज में बड़ी संख्या में सीटें खाली रह गई हैं. भगिनी निवेदिता कॉलेज और अदिति महाविद्यालय में इससे पहले से ही 12वीं के आधार पर एडमिशन का ऐलान कर दिया था. इन कॉलेजों के कैंपस में कम सुविधा होने के कारण यहां की सीट्स खाली रह गई हैं. वहीं अब 12वीं के आधार पर एडमिशन देने वाले कॉलेज की संख्या कुल मिलाकर 11 हो गई है. DU के किन 11 कॉलेज में मिलेगा 12वीं के आधार पर एडमिशन अदिति महाविद्यालय भगिनी निवेदिता कॉलेज श्याम लाल कॉलेज जाकिर हुसैन दिल्ली कॉलेज (सांध्य) राजधानी कॉलेज कालिंदी कॉलेज विवेकानंद कॉलेज पीजीडीएवी कॉलेज (सांध्य) शहीद राजगुरु कॉलेज ऑफ एप्लाइड साइंसेज फॉर विमेन डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज स्वामी श्रद्धानंद कॉलेज DU Notice.pdf किन छात्रों को मिलेगा फायदा? यह फैसला उन छात्रों के लिए राहत लेकर आया है जिन्होंने CUET-UG नहीं दिया या अच्छा स्कोर हासिल नहीं कर पाए. अब वे संबंधित कॉलेजों में उपलब्ध सीटों के लिए अपने 12वीं बोर्ड परीक्षा के मार्क्स के आधार पर अप्लाई कर सकते हैं. हालांकि, प्रवेश पूरी तरह कॉलेजों द्वारा जारी मेरिट सूची और सीटों की उपलब्धता पर निर्भर करेगा. छात्रों को क्या करना चाहिए? इच्छुक उम्मीदवारों को संबंधित कॉलेजों की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर आवेदन प्रक्रिया, पात्रता, सीटों की संख्या और महत्वपूर्ण तिथियों की जानकारी लेनी चाहिए. क्योंकि प्रत्येक कॉलेज अपनी अलग मेरिट सूची और प्रवेश कार्यक्रम जारी कर सकता है. DU एडमिशन से जुड़ी मुख्य बातें DU ने 11 कॉलेजों को 12वीं के मार्क्स पर एडमिशन की अनुमति दी. CUET के कई राउंड के बाद भी सीटें खाली रहने पर फैसला लिया गया. BA, BCom, BSc Physical Science समेत कई कोर्स शामिल. प्रवेश केवल खाली सीटों पर होगा. मेरिट 12वीं बोर्ड के मार्क्स के आधार पर तैयार की जाएगी. संबंधित कॉलेज अलग-अलग प्रवेश कार्यक्रम जारी करेंगे. ये भी पढ़ें: WhatsApp पर पहुंचा BSc एग्रीकल्चर का प्रश्नपत्र, छत्तीसगढ़ कृषि विश्वविद्यालय ने रद्द की परीक्षा The post DU में पढ़ने से अब कोई रोक नहीं सकता, इन 11 कॉलेज में मिलेगा 12वीं के आधार पर एडमिशन appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: JSSC-CGL और CDPO परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक

राणा प्रताप की रिपोर्ट JSSC CGL Exam: झारखंड प्रशासन द्वारा परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली चार अलग-अलग याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. JSSC-CGL समेत CDPO, FRO और FSO परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य प्रशासन के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशासन के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने JSSC-CGL और CDPO परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने के राज्य प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दी है. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. CDPO और JSSC-CGL से जुड़ी याचिकाओं पर हुई सुनवाई  याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने अदालत में पक्ष रखा. याचिकाओं के जरिए राज्य प्रशासन द्वारा CDPO (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी) परीक्षा का विज्ञापन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है. इसके साथ ही JSSC-CGL परीक्षा और उससे संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश के खिलाफ भी याचिका दाखिल की गई है. ये भी पढ़ें- झारखंड में ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत करेगा JUSNL, खरीदेगा 4.25 करोड़ के बिजली उपकरण JPSC परीक्षाओं पर प्रशासन से जवाब कुछ याचिकाकर्ताओं ने JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा तथा फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियों को रद्द करने के प्रशासन के फैसले को भी चुनौती दी है. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CDPO और JSSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा को रद्द करने के मामले में राज्य प्रशासन और JPSC से जवाब मांगा है. CID जांच के बाद परीक्षाएं रद्द, अनियमितताओं की जांच  दरअसल, CID जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य प्रशासन ने 18 अगस्त की देर रात उन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था, जिनमें TDPL की भूमिका सामने आई थी. साथ ही वर्ष 2014 के बाद आयोजित सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की घोषणा भी की गई थी. 22 परीक्षाएं रद्द, 6 स्थगित और 17 जांच के दायरे में  इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से परीक्षा रद्द करने, कुछ परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाने से संबंधित अधिसूचना जारी की गई.अधिसूचना के अनुसार 22 परीक्षाएं रद्द की गई हैं, जबकि 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित की गई है. वहीं 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है. ये भी पढ़ें- त्योहारों से पहले महंगी हुई मिठास, महीने भर में चीनी 14 रुपये और गुड़ 15 रुपये चढ़े The post झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: JSSC-CGL और CDPO परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक appeared first on Naya Vichar.

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Video : पुलिस स्टेशन पहुंचे राहुल गांधी, पेलेट गन पीड़ित भी साथ, धरने पर बैठे

Video : शुक्रवार को दिल्ली में उस समय सियासी हलचल बढ़ गई, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी संसद मार्ग थाने पहुंचे. उनके साथ वह युवक भी था, जिसे 20 जुलाई के Gen Z प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पेलेट गन से चोट लगी थी. राहुल गांधी ने युवक के साथ थाने पहुंचकर मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की और पुलिस से कार्रवाई की अपील की. न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो जारी किया है. इस वीडियो में राहुल जमीन पर बैठे नजर आ रहे हैं. कांग्रेस ने दावा किया है कि 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया था. यह दावा प्रदर्शन के बाद कुछ लोगों के घायल होने की समाचार सामने आने के बाद किया गया. हालांकि, दिल्ली पुलिस कई बार पेलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है. वहीं, CRPF ने इस मामले पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. ये भी पढ़ें: Video: प्रदर्शनकारी छात्रों से मिले राहुल गांधी, बोले- हिंसक शासन के सामने डटे युवा, लड़कियों पर गर्व FIR दर्ज करने की मांग पर अड़े राहुल गांधी राहुल गांधी संसद मार्ग थाने के डीसीपी कार्यालय पहुंचे. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, जंतर-मंतर प्रदर्शन में घायल साहिल लोचव ने 14 अगस्त को वकीलों के साथ दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने न तो शिकायत का I/O नंबर दिया और न ही उसकी रसीद दी. 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब राहुल गांधी घायल युवक के साथ थाने पहुंचे और FIR दर्ज करने तथा जांच अधिकारी का नंबर देने की मांग की. The post Video : पुलिस स्टेशन पहुंचे राहुल गांधी, पेलेट गन पीड़ित भी साथ, धरने पर बैठे appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: JSSC-CGL और CDPO परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक

राणा प्रताप की रिपोर्ट JSSC CGL Exam: झारखंड प्रशासन द्वारा परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने संबंधी जारी अधिसूचना को चुनौती देने वाली चार अलग-अलग याचिकाओं पर शुक्रवार को झारखंड हाईकोर्ट में सुनवाई हुई. JSSC-CGL समेत CDPO, FRO और FSO परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य प्रशासन के फैसले के खिलाफ दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने प्रशासन के परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है. न्यायमूर्ति दीपक रोशन की अदालत ने JSSC-CGL और CDPO परीक्षा का विज्ञापन रद्द करने के राज्य प्रशासन के आदेश पर रोक लगा दी है. मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. CDPO और JSSC-CGL से जुड़ी याचिकाओं पर हुई सुनवाई  याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और पीएएस पति ने अदालत में पक्ष रखा. याचिकाओं के जरिए राज्य प्रशासन द्वारा CDPO (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी) परीक्षा का विज्ञापन रद्द किए जाने के फैसले को चुनौती दी गई है. इसके साथ ही JSSC-CGL परीक्षा और उससे संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के आदेश के खिलाफ भी याचिका दाखिल की गई है. ये भी पढ़ें- झारखंड में ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत करेगा JUSNL, खरीदेगा 4.25 करोड़ के बिजली उपकरण JPSC परीक्षाओं पर प्रशासन से जवाब कुछ याचिकाकर्ताओं ने JPSC की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा तथा फूड सेफ्टी ऑफिसर की नियुक्तियों को रद्द करने के प्रशासन के फैसले को भी चुनौती दी है. सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने CDPO और JSSC की 11वीं से 13वीं परीक्षा को रद्द करने के मामले में राज्य प्रशासन और JPSC से जवाब मांगा है. CID जांच के बाद परीक्षाएं रद्द, अनियमितताओं की जांच  दरअसल, CID जांच के दौरान सामने आए तथ्यों के आधार पर राज्य प्रशासन ने 18 अगस्त की देर रात उन परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था, जिनमें TDPL की भूमिका सामने आई थी. साथ ही वर्ष 2014 के बाद आयोजित सभी नियुक्ति परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की घोषणा भी की गई थी. 22 परीक्षाएं रद्द, 6 स्थगित और 17 जांच के दायरे में  इसके बाद कार्मिक, प्रशासनिक सुधार तथा राजभाषा विभाग की ओर से परीक्षा रद्द करने, कुछ परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और अन्य परीक्षाओं को जांच के दायरे में लाने से संबंधित अधिसूचना जारी की गई.अधिसूचना के अनुसार 22 परीक्षाएं रद्द की गई हैं, जबकि 6 परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित की गई है. वहीं 17 परीक्षाओं को जांच के दायरे में रखा गया है. ये भी पढ़ें- त्योहारों से पहले महंगी हुई मिठास, महीने भर में चीनी 14 रुपये और गुड़ 15 रुपये चढ़े The post झारखंड हाईकोर्ट का फैसला: JSSC-CGL और CDPO परीक्षा रद्द करने के आदेश पर रोक appeared first on Naya Vichar.

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जयपुर में CJP कार्यकर्ताओं से मारपीट पर आशुतोष रांका की चेतावनी- 48 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो शिक्षा मंत्री के खिलाफ होगा आंदोलन

जयपुर के प्रशासनी स्कूल की बदहाल स्थिति को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है. CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता आशुतोष रांका ने आरोप लगाया है कि स्कूल की स्थिति देखने पहुंचे उनके कार्यकर्ताओं पर पथराव किया गया, उनके वाहनों में तोड़फोड़ की गई और टीम के सदस्यों के साथ मारपीट की गई. बड़ा आंदोलन करने की चेतावनी आशुतोष रांका ने कहा, “आज पूरे देश ने भाजपा की गुंडागर्दी लाइव देखी. पुलिस को पता था कि वहां पत्थरबाजी पहले से हो रही थी, फिर भी पुलिस ने हाथ खड़े कर दिए. पुलिस ने बोला कि हम कुछ नहीं करेंगे, ये आपका मैटर है. ये सब कुछ मदन दिलावर के कहने पर हुआ है…. 48 घंटे का समय दे रहे हैं या तो इन गुंडों को अरेस्ट कीजिए और ऑर्डर विड्रॉ कीजिए वरना ये आंदोलन स्कूलों से बढ़कर मदन दिलावर के इस्तीफे तक जाएगा.” प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का लगाया आरोप आशुतोष रांका का दावा है कि इस हमले के दौरान उनकी टीम के कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें भी आईं और स्त्रीओं के फोन तोड़े गए. रांका ने इसे राजस्थान के लोकतंत्र के लिए “काला दिन” बताते हुए प्रशासन पर कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है. ये भी पढ़ें: यूपी में शहीद परिवार की बेटियों को योगी प्रशासन का तोहफा, 10% कम अंक पर भी मिलेगी स्कूटी लंबे समय से तबेले में स्कूल संचालित होने का दावा CJP नेता का दावा है कि जयपुर के बगरू स्थित रामपुरा-कंवरपुरा प्रशासनी प्राथमिक स्कूल की हालत बेहद खराब है और स्कूल लंबे समय से भैंसों के तबेले में चल रहा है. उनका कहना है कि उनकी टीम इसी बदहाल स्थिति को देखने और स्कूल की मरम्मत की मांग को लेकर वहां पहुंची थी. The post जयपुर में CJP कार्यकर्ताओं से मारपीट पर आशुतोष रांका की चेतावनी- 48 घंटे में कार्रवाई नहीं हुई तो शिक्षा मंत्री के खिलाफ होगा आंदोलन appeared first on Naya Vichar.

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Video : पुलिस स्टेशन पहुंचे राहुल गांधी, पेलेट गन पीड़ित भी साथ, धरने पर बैठे

Video : शुक्रवार को दिल्ली में उस समय सियासी हलचल बढ़ गई, जब कांग्रेस सांसद राहुल गांधी संसद मार्ग थाने पहुंचे. उनके साथ वह युवक भी था, जिसे 20 जुलाई के Gen Z प्रदर्शन के दौरान कथित तौर पर पेलेट गन से चोट लगी थी. राहुल गांधी ने युवक के साथ थाने पहुंचकर मामले में एफआईआर दर्ज करने की मांग की और पुलिस से कार्रवाई की अपील की. न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो जारी किया है. इस वीडियो में राहुल जमीन पर बैठे नजर आ रहे हैं. कांग्रेस ने दावा किया है कि 20 जुलाई के ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) के जवानों ने प्रदर्शनकारियों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया था. यह दावा प्रदर्शन के बाद कुछ लोगों के घायल होने की समाचार सामने आने के बाद किया गया. हालांकि, दिल्ली पुलिस कई बार पेलेट गन के इस्तेमाल से इनकार कर चुकी है. वहीं, CRPF ने इस मामले पर अब तक कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. ये भी पढ़ें: Video: प्रदर्शनकारी छात्रों से मिले राहुल गांधी, बोले- हिंसक शासन के सामने डटे युवा, लड़कियों पर गर्व FIR दर्ज करने की मांग पर अड़े राहुल गांधी राहुल गांधी संसद मार्ग थाने के डीसीपी कार्यालय पहुंचे. कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक, जंतर-मंतर प्रदर्शन में घायल साहिल लोचव ने 14 अगस्त को वकीलों के साथ दिल्ली पुलिस को लिखित शिकायत दी थी, लेकिन पुलिस ने न तो शिकायत का I/O नंबर दिया और न ही उसकी रसीद दी. 17 अगस्त को ईमेल और फोन के जरिए भी शिकायत की गई, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. अब राहुल गांधी घायल युवक के साथ थाने पहुंचे और FIR दर्ज करने तथा जांच अधिकारी का नंबर देने की मांग की. The post Video : पुलिस स्टेशन पहुंचे राहुल गांधी, पेलेट गन पीड़ित भी साथ, धरने पर बैठे appeared first on Naya Vichar.

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ऑपरेशन सिंदूर: महिला पायलट ने उड़ाया था लश्कर का आतंकी ठिकाना, मुरीदके पर Su-30MKI से किया था हमला

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हिंदुस्तानीय सेना की कार्रवाई से जुड़ी एक अहम जानकारी सामने आई है. लश्कर-ए-तैयबा के मुरीदके स्थित मुख्यालय पर हमला करने वाले हिंदुस्तानीय वायुसेना के स्ट्राइक पैकेज में एक स्त्री फाइटर पायलट भी शामिल थीं. यह वही ठिकाना था जिसे हिंदुस्तान के मोस्ट वांटेड आतंकियों में शामिल हाफिज सईद के नेतृत्व वाले आतंकी संगठन का मुख्यालय माना जाता है. उनकी भूमिका अब डिस्कवरी चैनल की डॉक्यूमेंट्री सीरीज ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ के जरिए सामने आई है, हालांकि सुरक्षा कारणों से उनकी पहचान गुप्त रखी गई है. मुरीदके स्ट्राइक में शामिल थीं स्त्री पायलट द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, रक्षा सूत्रों ने बताया कि स्त्री अधिकारी फ्लाइट लेफ्टिनेंट के पद पर थीं और उस मिशन का हिस्सा थीं, जिसने मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालय को निशाना बनाया. रिपोर्ट के मुताबिक, वह Su-30MKI उड़ा रही थीं.  यह दो इंजन वाला मल्टीरोल फाइटर विमान लंबी दूरी के कई तरह के हथियार ले जाने में सक्षम है. यह लड़ाकू विमान रैम्पेज और ब्रह्मोस एयर-टू-ग्राउंड मिसाइल जैसे हथियारों को इस्तेमाल करने में सक्षम है.  ऑपरेशन सिंदूर के दौरान करीब 87 घंटे तक चले सैन्य संघर्ष में इन हथियार प्रणालियों का इस्तेमाल किया गया था. हालांकि, सूत्रों ने यह बताने से इनकार किया कि मुरिदके पर हमले के लिए इनमें से किस मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था. उनका कहना था कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियारों से जुड़ी जानकारी अभी गोपनीय है. सिर्फ एक नहीं, कई स्त्री पायलट थीं मिशन का हिस्सा रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया कि ऑपरेशन सिंदूर में एक से अधिक स्त्री फाइटर पायलटों ने हिस्सा लिया था.  87 से 88 घंटे चले इस भीषण सैन्य संघर्ष में कुछ स्त्री पायलटों ने Su-30MKI, जबकि कुछ ने राफेल लड़ाकू विमानों को उड़ाया. कुछ अभियानों में स्त्री अधिकारी पायलट की भूमिका में थीं, जबकि कुछ मामलों में उन्होंने वेपन सिस्टम ऑपरेटर (WSO) की जिम्मेदारी संभाली. एक सूत्र ने स्त्री और पुरुष पायलटों के बीच भूमिका को लेकर कहा, ‘एक बार जब वे फाइटर स्ट्रीम में शामिल हो जाते हैं, तो उन्हें सिर्फ फाइटर पायलट के तौर पर देखा जाता है, पुरुष या स्त्री के रूप में नहीं. दोनों को समान प्रशिक्षण मिलता है और उनकी ऑपरेशनल भूमिकाएं भी समान होती हैं.’ ये भी पढ़ें:- इमरान खान को फिर अदियाला जेल भेजा गया, 6 घंटे में खत्म हुई अस्पताल की ‘राहत’ पहले दिन नौ ठिकानों पर हुआ था हमला ऑपरेशन सिंदूर 7 मई 2025 को शुरू हुआ था. 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुआ आतंकी हमले में 26 नागरिकों की मौत हुई थी. इसके जवाब में हिंदुस्तानीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर शुरू किया, जिसके पहले दिन सेना ने कुल नौ ठिकानों को निशाना बनाया था.  इनमें से दो महत्वपूर्ण लक्ष्य मुरिदके में लश्कर-ए-तैयबा का मुख्यालय और बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद का मुख्यालय थे. इन दोनों ठिकानों पर हिंदुस्तानीय वायुसेना ने कार्रवाई की थी. बाकी सात स्थानों को हिंदुस्तानीय सेना ने लोइटरिंग म्यूनिशन और लंबी दूरी की तोपों के जरिए निशाना बनाया था. View on Instagram IAF में स्त्री फाइटर पायलटों की बढ़ती भूमिका ऑपरेशन सिंदूर ने हिंदुस्तानीय वायुसेना में स्त्रीओं की भागीदारी भी साफ की. 2015-16 में स्त्रीओं को फाइटर एविएशन में शामिल करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी. आज स्त्री अधिकारी एसयू-30एमकेआई, राफेल, मिग-29 और तेजस जैसे अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमानों को ऑपरेट कर रही हैं. डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री में सैन्य अभियान से जुड़े अधिकारियों के अनुभव भी शामिल हैं. हालांकि मुरिदके मिशन में शामिल पायलटों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन उनकी भागीदारी यह दिखाती है कि हिंदुस्तानीय वायुसेना में स्त्री फाइटर पायलट अब वास्तविक युद्ध अभियानों का भी हिस्सा बन चुकी हैं. ये भी पढ़ें:- पोलैंड बोला: आतंकी चाहे जहां छिपे हों, हिंदुस्तान को पीछा करने का हक, ऑपरेशन सिंदूर और 1971 की जंग में हमने साथ दिया The post ऑपरेशन सिंदूर: स्त्री पायलट ने उड़ाया था लश्कर का आतंकी ठिकाना, मुरीदके पर Su-30MKI से किया था हमला appeared first on Naya Vichar.

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राखी पर भाई का मुंह कराएं मीठा, बनाएं ये 5 Homemade Desserts

Raksha Bandhan Homemade Desserts: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के प्यार और खूबसूरत यादों से जुड़ा होता है. इस दिन राखी बांधने के साथ-साथ एक-दूसरे का मुंह मीठा कराने की भी परंपरा है. अगर इस बार आप बाजार से मिठाई लाने के बजाय घर पर ही कुछ स्पेशल बनाना चाहती हैं, तो होममेड डेजर्ट एक बढ़िया ऑप्शन हो सकते हैं. आइए जानते हैं राखी पर बनाए जाने वाले 5 आसान और स्वादिष्ट डेजर्ट के बारे में. 1. चॉकलेट ब्राउनी अगर आपके भाई को चॉकलेट पसंद है, तो राखी पर चॉकलेट ब्राउनी जरूर ट्राई करें. इसे बनाने के लिए मैदा, कोको पाउडर, चीनी, मक्खन, दूध और चॉकलेट की जरूरत होगी. सभी चीजों को मिलाकर एक गाढ़ा बैटर तैयार करें और इसे बेक कर लें. ऊपर से थोड़ी पिघली हुई चॉकलेट या ड्राई फ्रूट्स डालकर सजाएं. गरम ब्राउनी को आइसक्रीम के साथ सर्व करें, तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाएगा. PC: Freepik यह भी पढ़ें: The post राखी पर भाई का मुंह कराएं मीठा, बनाएं ये 5 Homemade Desserts appeared first on Naya Vichar.

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11वीं-13वीं JPSC और FSO भर्ती को रद्द करने के फैसले पर HC की रोक का क्या है मतलब?

झारखंड में प्रशासनी नौकरी की भर्ती को लेकर चल रहा विवाद अब हाईकोर्ट पहुंच गया है. प्रशासन ने कथित गड़बड़ियों के चलते कई भर्ती परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया था. इनमें कुछ ऐसी भर्तियां भी शामिल थीं, जिनमें उम्मीदवारों की नियुक्ति हो चुकी थी और वे प्रशासनी नौकरी कर रहे थे. अब 20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट ने 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा और इन परीक्षाओं के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने के प्रशासन के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी है. इससे नौकरी कर रहे कर्मचारियों को बड़ी राहत मिली है. लेकिन इसका यह मतलब नहीं है कि उनकी नौकरी हमेशा के लिए सुरक्षित हो गई है. मामला अभी अदालत में है और अंतिम फैसला बाद में आएगा. पहले समझिए प्रशासन ने क्या फैसला लिया था 18 अगस्त को झारखंड प्रशासन ने 22 भर्ती परीक्षाओं और भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया था. इसके अलावा प्रशासन ने 6 भर्ती प्रक्रियाओं को जांच पूरी होने तक रोक दिया और 17 पुरानी JPSC भर्तियों की जांच CID को सौंप दी गई. इस तरह कुल 45 भर्ती प्रक्रिया प्रशासन के इस फैसले से प्रभावित हुईं. प्रशासन ने यह कदम भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और लंबे समय से चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उठाया. ये भी पढ़ें: प्रशासनी भर्ती परीक्षाओं को लेकर विवादों के पीछे क्या है कारण ? जानिए सिस्टम में कहां है गड़बड़ी जिनकी नौकरी लग चुकी है, उनका क्या होगा? प्रशासन के फैसले की सबसे बड़ी पेचीदगी यह थी कि कुछ परीक्षाएं सिर्फ परीक्षा या परिणाम के स्तर पर नहीं थीं, बल्कि उनके जरिए नियुक्तियां भी हो चुकी थीं. आसान भाषा में कहें तो कई परीक्षाओं का रिजल्ट आ गया था तो कई परीक्षा के रिजल्ट के आधार पर उम्मीदवारों की नौकरी भी लग चुकी थी. उदाहरण के लिए 11वीं से 13वीं जेपीएससी संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा के जरिए 342 पदों पर नियुक्तियां हुई थीं. इसी तरह JSSC-CGL के जरिए करीब 1,932 उम्मीदवारों की नियुक्ति हो चुकी थी. इसके अलावा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी और खाद्य सुरक्षा पदाधिकारी जैसी कुछ दूसरी भर्ती में नियुक्ति अपने अंतिम चरण तक पहुंच चुकी थीं. ऐसे में अगर पूरी भर्ती प्रक्रिया रद्द होती, तो इसका सीधा असर उन लोगों पर पड़ता जिन्होंने परीक्षा पास की, चयन पाया और नौकरी जॉइन कर ली. अब समझिए 20 अगस्त को हाईकोर्ट ने क्या कहा? 20 अगस्त को झारखंड हाईकोर्ट ने अपने फैसले में 11वीं-13वीं JPSC परीक्षा और फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) भर्ती को रद्द करने के प्रशासन के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी. इसके साथ ही इन परीक्षाओं के आधार पर हुई नियुक्तियों को रद्द करने वाली अधिसूचनाओं के अमल पर भी रोक लगा दी गई. मामले में अदालत ने राज्य प्रशासन से जवाब मांगा है. इस मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी. आसान भाषा में इसका मतलब है कि अभी प्रशासन सिर्फ अपने रद्दीकरण आदेश के आधार पर इन कर्मचारियों की नौकरी खत्म नहीं कर सकती. यहां एक जरूरी बात ये है कि हाईकोर्ट ने अभी यह अंतिम फैसला नहीं दिया है कि प्रशासन का रद्दीकरण पूरी तरह गलत है या भर्ती प्रक्रिया में कोई गड़बड़ी हुई ही नहीं थी. तो अब किसी की नौकरी नहीं जाएगी ? नहीं, अभी ऐसा कहना सही नहीं होगा. हाईकोर्ट का आदेश फिलहाल एक अंतरिम राहत है. यानी जिन कर्मचारियों की नौकरी पर प्रशासन के फैसले से खतरा पैदा हुआ था, उनमें फिलहाल सिर्फ JPSC 11वीं-13वीं और FSO भर्ती से जुड़े कर्मचारियों पर ही यह कार्रवाई रुकी है. वे तत्काल तौर पर राहत में हैं. बाकी भर्तियों (जैसे JSSC-CGL, CDPO) से जुड़े कर्मचारियों की याचिकाओं पर अभी सुनवाई होनी बाकी है. लेकिन भर्ती प्रक्रिया की वैधता को लेकर विवाद अभी खत्म नहीं हुआ है. आगे अदालत में प्रशासन की दलील, जांच में सामने आए तथ्य और प्रभावित कर्मचारियों की बात सुनेगी. इसके बाद ही इस मामले पर अंतिम फैसला लिया जाएगा. इसलिए इसे नौकरी हमेशा के लिए बच गई कहना सही नहीं होगा. इससे ज्यादा सही बात यह है कि फिलहाल नौकरी खत्म करने की कार्रवाई पर रोक लग गई है. प्रशासन के फैसले का क्यों विरोध कर रहे नियुक्त कर्मचारी ? नियुक्त कर्मचारियों का कहना है अगर भर्ती प्रक्रिया में किसी अधिकारी, एजेंसी या किसी दूसरे व्यक्ति ने गड़बड़ी की है, तो उसकी सजा उन उम्मीदवारों को क्यों मिले जिन्होंने नियम के मुताबिक परीक्षा दी और मेहनत से नौकरी हासिल किया? यानी अगर कोई उम्मीदवार खुद किसी गड़बड़ी में शामिल नहीं है, तो सिर्फ भर्ती प्रक्रिया में हुई कथित अनियमितता की वजह से उसकी नौकरी छीनना कितना सही है. यह बड़ा कानूनी सवाल है. इसी मुद्दे को लेकर कोर्ट में प्रशासन के फैसले को चुनौती दी गई थी. याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह दलील दी गई कि संबंधित कर्मचारियों को पर्याप्त मौका दिए बिना उनकी नियुक्ति रद्द करना उचित नहीं है. हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश से फिलहाल इसी तरह की दलीलों को राहत मिली है. ये भी पढ़ें: वंदे मातरम के आखिरी चार श्लोक में क्या है जिसे कांग्रेस नहीं गाती? समझिए पूरा विवाद यह पूरा विवाद शुरू कैसे हुआ? इस विवाद की शुरुआत 14वीं झारखंड संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा की प्रारंभिक परीक्षा के रिजल्ट को लेकर उठे सवालों से तेज हुई. कुछ अभ्यर्थियों ने रिजल्ट, श्रेणीवार कटऑफ और मूल्यांकन की प्रक्रिया पर सवाल उठाए. इसके बाद सोशल मीडिया पर एक कथित ओएमआर शीट सामने आई. हालांकि, उसकी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई थी. मामला बढ़ने के बाद राज्य प्रशासन ने इसकी जांच सीआईडी को सौंप दी. इसके बाद एक विशेष जांच दल(SIT) बनाया गया और जांच का दायरा परीक्षा कराने वाली एजेंसी तक भी पहुंचा. धीरे-धीरे विवाद सिर्फ 14 वीं जेपीएससी परीक्षा तक सीमित नहीं रहा. दूसरी भर्ती परीक्षाएं और प्रक्रियाएं भी जांच के दायरे में आने लगीं. इसके बाद छात्रों का आंदोलन करीब 26 दिनों तक चला. आंदोलन और जांच के बीच प्रशासन ने कई भर्ती परीक्षाओं और प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला लिया. अब आगे क्या होगा? अब इस मामले में तीन बातें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण होंगी. प्रशासन हाईकोर्ट में क्या सबूत देती है? राज्य प्रशासन को अब अदालत के सामने यह बताना होगा कि उसने भर्ती

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