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CM रेवंत रेड्डी का अमेरिका दौरा रद्द, MEA ने क्यों नहीं दी क्लीयरेंस ?

तेलंगाना की सियासत में इस वक्त सबसे बड़ा मुद्दा बन गया है मुख्यमंत्री ए रेवंत रेड्डी का रद्द हुआ अमेरिका दौरा. केंद्र प्रशासन ने साफ तौर पर रेवंत रेड्डी को अमेरिका जाने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने उनकी अमेरिका यात्रा के लिए नेतृत्वक मंजूरी देने से सीधा इनकार कर दिया, जिसके बाद CM को अपना विदेश दौरा बीच में ही समेटना पड़ा. MEA ने क्यों रोका दौरा? विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि हम मुख्यमंत्रियों के हर विदेश दौरे का आकलन करते हैं. दौरा पद की गरिमा और उद्देश्य के अनुरूप होना चाहिए. रणधीर जायसवाल ने साफ किया कि रेवंत रेड्डी का अमेरिका दौरे का प्रस्तावित कार्यक्रम “उचित नहीं पाया गया.” इसी वजह से फाइल खारिज कर दी गई. ब्रिटेन की मिली मंजूरी, अमेरिका की नहीं इस दाैरे में खास बात ये है कि केंद्र ने सीएम रेवंत रेड्डी को ब्रिटेन जाने की मंजूरी दे दी थी, लेकिन अमेरिका के लिए रेड सिग्नल दिखा दिया. इससे सवाल उठ रहे हैं कि आखिर अमेरिका दौरे के एजेंडे में ऐसा क्या था जो MEA को नागवार गुजरा? लंदन से सीधे हैदराबाद लौटेंगे CM अमेरिका का दरवाजा बंद होने के बाद अब रेवंत रेड्डी अपना दौरा छोटा कर रहे हैं. सीएम ऑफिस के मुताबिक, वह फिलहाल ब्रिटेन में हैं और रविवार को लंदन से सीधी फ्लाइट लेकर हैदराबाद लौट आएंगे.अब इस पूरे मामले पर तेलंगाना में सियासी जंग छिड़ गई है. विपक्ष इसे रेवंत रेड्डी की कूटनीतिक नाकामी बता रहा है, तो कांग्रेस इसे केंद्र की बदले की नेतृत्व करार दे रही है. ये भी पढ़ें: राहुल गांधी के धरने पर जेपी नड्डा का वार- ‘कैमरा-सेंट्रिक ड्रामा’ से सुर्खियों में रहना चाहते हैं, न्याय से कोई लेना-देना नहीं The post CM रेवंत रेड्डी का अमेरिका दौरा रद्द, MEA ने क्यों नहीं दी क्लीयरेंस ? appeared first on Naya Vichar.

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नीदरलैंड्स से भिड़ेंगी भारत की पुरुष-महिला टीमें, हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल पर होगी नजरें

FIH Hockey World Cup 2026: एफआईएच हॉकी विश्व कप बेल्जियम और नीदरलैंड्स 2026 के दूसरे चरण में हिंदुस्तानीय पुरुष और स्त्री हॉकी टीमों के सामने मजबूत चुनौती है. दोनों टीमों की शुरुआत नीदरलैंड्स के खिलाफ मुकाबले से होगी. खास बात यह है कि पेरिस ओलंपिक 2024 में पुरुष और स्त्री दोनों वर्गों में स्वर्ण पदक जीतने वाली नीदरलैंड्स की टीम अपने घरेलू मैदान पर हिंदुस्तान के सामने होगी. स्त्री टीम की पहली भिड़ंत नीदरलैंड्स से हिंदुस्तानीय स्त्री टीम 21 अगस्त को दूसरे चरण के अपने अभियान की शुरुआत करेगी. एम्स्टेलवीन के वागेनर स्टेडियम में होने वाले पूल-ई के मुकाबले में हिंदुस्तान का सामना मेजबान नीदरलैंड्स से रात 9:30 बजे होगा. हिंदुस्तान ने पहले चरण में बिना कोई मुकाबला गंवाए दूसरे चरण में जगह बनाई. टीम ने दक्षिण अफ्रीका को 6-1 से हराया, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला गोलरहित ड्रॉ रहा. इससे पहले चीन के खिलाफ भी हिंदुस्तान ने अंक बांटे थे.चीन के खिलाफ ड्रॉ के कारण हिंदुस्तान और चीन दोनों के खाते में एक-एक अंक दूसरे चरण में पहुंचा है. अब दोनों टीमों की कोशिश पूल-ई में शीर्ष दो स्थानों में जगह बनाने की होगी, क्योंकि दूसरे चरण के पूल-ई और पूल-एफ से शीर्ष दो टीमें सेमीफाइनल में पहुंचेंगी. ऑस्ट्रेलिया से भी होगी कड़ी टक्कर नीदरलैंड्स के बाद हिंदुस्तानीय स्त्री टीम 23 अगस्त को ऑस्ट्रेलिया से भिड़ेगी. यह मुकाबला रात 10:30 बजे स्पोर्ट्सा जाएगा.अब तक हिंदुस्तानीय टीम ने आक्रमण और डिफेंस के बीच अच्छा संतुलन दिखाया है. दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 6-1 की बड़ी जीत ने टीम की आक्रामक क्षमता दिखाई, जबकि इंग्लैंड के खिलाफ गोल नहीं खाने से डिफेंस की मजबूती भी सामने आई. पुरुष टीम भी नीदरलैंड्स से भिड़ेगी हिंदुस्तानीय पुरुष टीम 22 अगस्त को दूसरे चरण का पहला मुकाबला स्पोर्ट्सेगी. उसका सामना नीदरलैंड्स से शाम 7:30 बजे होगा. इसके बाद 24 अगस्त को हिंदुस्तान अर्जेंटीना के खिलाफ उतरेगा. यह मुकाबला शाम 6:15 बजे शुरू होगा.स्त्री टीम के विपरीत पुरुष टीम अपने साथ कोई अंक लेकर दूसरे चरण में नहीं पहुंची है. पूल-डी में इंग्लैंड ने हिंदुस्तान को 4-2 से हराकर शीर्ष स्थान हासिल किया था और वह अपने अंक के साथ अगले चरण में पहुंचा है.हिंदुस्तान ने पूल चरण में वेल्स को 3-1 से हराकर अभियान शुरू किया था. इसके बाद पाकिस्तान के खिलाफ 5-3 की जीत दर्ज कर दूसरे स्थान पर रहते हुए अगले चरण में जगह बनाई. Also Read: कुलदीप की फॉर्म पर स्पिन कोच बहूतुले को भरोसा, बोले- गॉल में हालात के हिसाब से बदला अपना अंदाज पाकिस्तान पर जीत से बढ़ा आत्मविश्वास पाकिस्तान के खिलाफ मुकाबले में हिंदुस्तानीय टीम ने आक्रामक हॉकी का शानदार प्रदर्शन किया. टीम ने मौके बनाने के साथ उन्हें गोल में बदलने में भी सफलता हासिल की और 5-3 से जीत दर्ज की. लेकिन दूसरे चरण में समीकरण बदल चुके हैं. अब हिंदुस्तान को नीदरलैंड्स जैसी मजबूत टीम के खिलाफ शुरुआत से ही अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना होगा. तकनीकी रूप से मजबूत और रणनीतिक अनुशासन के लिए पहचानी जाने वाली डच टीम के खिलाफ छोटी सी गलती भी हिंदुस्तान पर भारी पड़ सकती है. सेमीफाइनल की राह के लिए जीत जरूरी हिंदुस्तान की पुरुष और स्त्री दोनों टीमों के सामने दूसरे चरण की शुरुआत में ही ओलंपिक चैंपियन नीदरलैंड्स की चुनौती है. ऐसे में दोनों मुकाबले हिंदुस्तानीय टीमों के लिए खुद को दुनिया की शीर्ष टीमों के सामने परखने का बड़ा मौका होंगे. दूसरे चरण में हर मुकाबले का नतीजा सेमीफाइनल की दौड़ पर सीधा असर डालेगा. ऐसे में नीदरलैंड्स के खिलाफ मजबूत शुरुआत हिंदुस्तान के लिए आगे की राह आसान करने में अहम साबित हो सकती है. Also Read:सलमान-रिजवान की गलती से पाकिस्तान ने गंवाया विकेट का मौका, सोशल मीडिया पर वीडियो हुआ वायरल The post नीदरलैंड्स से भिड़ेंगी हिंदुस्तान की पुरुष-स्त्री टीमें, हॉकी विश्व कप के सेमीफाइनल पर होगी नजरें appeared first on Naya Vichar.

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‘मेरी नौकरी जाएगी या बचेगी?’ JPSC/JSSC विवाद से जुड़े सबसे जरूरी 7 सवाल और जवाब

TDPL से जुड़ी परीक्षाओं पर उठे सवालों और JPSC-JSSC भर्ती विवाद के बीच प्रशासन ने JSSC-CGL 2024 समेत TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं, उनके परिणामों और चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला किया है. प्रशासन ने 2014 से हुई परीक्षाओं की व्यापक जांच की बात भी कही है. लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती. अब असली लड़ाई अदालत, प्रशासन और अभ्यर्थियों के बीच अगले कदम को लेकर है. 1. परीक्षा रद्द हुई तो नौकरी का क्या होगा? यह सबसे बड़ा सवाल है. अगर किसी परीक्षा की पूरी प्रक्रिया ही रद्द कर दी जाती है, तो उससे हुई नियुक्तियों पर भी सवाल उठना स्वाभाविक है. लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर नियुक्त कर्मचारी की नौकरी अपने-आप खत्म हो जाएगी. अदालत यह देख सकती है कि गड़बड़ी पूरी परीक्षा में थी या कुछ उम्मीदवारों/केंद्रों तक सीमित थी. यही वजह है कि अभ्यर्थियों के लिए आगे की कानूनी प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होगी. JPSC-JSSC आंदोलन 2. पहले से नौकरी कर रहे उम्मीदवारों का क्या? मान लीजिए किसी उम्मीदवार ने परीक्षा पास की, नियुक्ति मिली और वह कई महीनों या वर्षों से नौकरी कर रहा है. अब यदि उस परीक्षा की प्रक्रिया पर सवाल उठते हैं, तो दो अलग-अलग हित सामने आते हैं- एक तरफ: निष्पक्ष भर्ती और परीक्षा की विश्वसनीयता. दूसरी तरफ: उस उम्मीदवार का अधिकार, जिसने संभवतः अपनी मेहनत से परीक्षा पास की है. इसीलिए अदालतें आम तौर पर यह भी देखती हैं कि क्या पूरी चयन प्रक्रिया दूषित थी या केवल कुछ मामलों में गड़बड़ी हुई. यह सवाल इसलिए और महत्वपूर्ण है क्योंकि प्रशासन ने TDPL से जुड़ी परीक्षाओं के परिणाम और चयन प्रक्रियाओं को भी जांच के दायरे में रखा है. 3. क्या दोबारा परीक्षा होगी? अगर परीक्षा रद्द होती है, तो सबसे संभावित विकल्पों में से एक री-एग्जाम हो सकता है. लेकिन यहां भी कई सवाल हैं- क्या सभी उम्मीदवार दोबारा परीक्षा देंगे? क्या उम्र सीमा में छूट मिलेगी? क्या आवेदन शुल्क फिर लिया जाएगा? क्या पुराने उम्मीदवारों को सीधे मौका मिलेगा? क्या नया सिलेबस या नई परीक्षा एजेंसी होगी? इन सवालों का जवाब प्रशासन और संबंधित आयोगों की अगली अधिसूचना से ही स्पष्ट होगा. यानी अभ्यर्थियों के लिए ‘परीक्षा रद्द’ होना कहानी का अंत नहीं, बल्कि एक नई परीक्षा प्रक्रिया की शुरुआत हो सकती है. Read more: TDPL की कहानी: Data Processing Company से JPSC-JSSC विवाद तक 4. क्या पुरानी कटऑफ और मेरिट लिस्ट बच सकती है? यह सवाल भी बेहद महत्वपूर्ण है. अगर परीक्षा की प्रक्रिया में गंभीर अनियमितता साबित होती है, तो पुरानी मेरिट लिस्ट को बनाए रखना मुश्किल हो सकता है. लेकिन यदि जांच में यह सामने आता है कि गड़बड़ी सीमित थी और अधिकांश प्रक्रिया निष्पक्ष रही, तो उम्मीदवार अदालत में पुराने परिणाम को बचाने की मांग कर सकते हैं. यानी फैसला केवल इस बात पर निर्भर नहीं करेगा कि ‘गड़बड़ी हुई या नहीं’, बल्कि इस पर भी कि गड़बड़ी कितनी व्यापक थी और उसका चयन पर कितना असर पड़ा. 5. कोर्ट ने अब तक क्या कहा है? यह मामला यहीं सबसे ज्यादा पेचीदा हो जाता है. राज्य प्रशासन के परीक्षा रद्द करने के फैसलों के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने JPSC की 11वीं और 13वीं सिविल सेवा परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के प्रशासनी फैसले पर रोक लगाई है. इससे उन सफल अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है. इसका सीधा मतलब है: प्रशासन का फैसला अंतिम नहीं है. अदालत यह तय कर सकती है कि किसी परीक्षा को पूरी तरह रद्द करना उचित है या फिर केवल दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई करके चयन प्रक्रिया को बचाया जा सकता है. 6. TDPL वाली परीक्षाओं का क्या होगा? यही वह सवाल है जिसने पूरे विवाद को बड़ा बना दिया है. TDPL यानी TSR Data Processing Private Limited झारखंड की कई प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी रही है. अब एजेंसी की भूमिका जांच के केंद्र में है. एजेंसी को लेकर पहले भी कार्रवाई और ब्लैकलिस्टिंग के सवाल उठे थे. इसके बावजूद बाद में उसे परीक्षा संबंधी काम मिला. प्रशासन ने अब TDPL द्वारा कराई गई परीक्षाओं को व्यापक जांच के दायरे में रखा है और उनसे जुड़े परिणाम तथा चयन प्रक्रियाओं को रद्द करने का फैसला किया है. इसका मतलब है कि विवाद अब केवल एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा. 7. प्रशासन बनाम कोर्ट, अगला कदम क्या? अब सबसे दिलचस्प लड़ाई यहीं होगी. प्रशासन का तर्क है कि भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता बहाल करने के लिए कठोर कदम जरूरी हैं. दूसरी तरफ, सफल उम्मीदवारों का तर्क है कि अगर उनकी कोई गलती नहीं है तो उन्हें सामूहिक रूप से दंडित क्यों किया जाए? यही वह जगह है जहां ‘परीक्षा की शुचिता’ और ‘उम्मीदवारों के अधिकार’ आमने-सामने आते हैं. प्रशासन ने भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाने और 2014 से हुई परीक्षाओं की जांच की बात कही है. वहीं, छात्रों की मांग जांच को CBI जैसी केंद्रीय एजेंसी को सौंपने की भी रही है. असली सवाल: गलती सिस्टम की थी, तो सजा किसे? झारखंड का मौजूदा परीक्षा विवाद आखिरकार इसी सवाल पर आकर टिकता है. अगर सिस्टम में गड़बड़ी थी, तो उसका नुकसान उन युवाओं को कितना उठाना चाहिए जिन्होंने वर्षों तक तैयारी की? और दूसरी तरफ- अगर परीक्षा प्रक्रिया ही संदिग्ध हो गई है, तो केवल नियुक्तियां बचाने के लिए उसे वैध कैसे माना जा सकता है? यही कारण है कि यह मामला सिर्फ JPSC या JSSC का नहीं है. यह उस पूरे भर्ती मॉडल की परीक्षा है जिसमें प्रशासन, आयोग, निजी परीक्षा एजेंसी और लाखों अभ्यर्थियों के बीच भरोसा सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है. एक परीक्षा रद्द करना आसान हो सकता है, लेकिन उसके बाद पैदा हुए भरोसे के संकट को ठीक करना कहीं ज्यादा मुश्किल है. The post ‘मेरी नौकरी जाएगी या बचेगी?’ JPSC/JSSC विवाद से जुड़े सबसे जरूरी 7 सवाल और जवाब appeared first on Naya Vichar.

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राहुल गांधी के धरने पर जेपी नड्डा का वार- ‘कैमरा-सेंट्रिक ड्रामा’ से सुर्खियों में रहना चाहते हैं, न्याय से कोई लेना-देना नहीं

दिल्ली में संसद मार्ग थाने के बाहर राहुल गांधी के धरने को लेकर केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कांग्रेस नेता पर हमला बोला. एएनआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक,जेपी नड्डा ने कहा कि यह धरना न तो छात्रों के लिए है और न ही न्याय की मांग को लेकर, बल्कि कांग्रेस की नेतृत्वक हताशा और राहुल गांधी की मीडिया में बने रहने की कोशिश का प्रतीक है. जेपी नड्डा ने कहा कि 20 जुलाई की घटना का सुप्रीम कोर्ट पहले ही संज्ञान ले चुका है और पूर्व न्यायाधीश की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय हाई-पावर्ड कमेटी गठित की गई है. नड्डा ने सवाल उठाया कि जब देश की सर्वोच्च अदालत मामले की जांच कर रही है, तब पुलिस थाने के बाहर कैमरों के सामने बैठकर राहुल गांधी क्या साबित करना चाहते हैं? उन्होंने पूछा कि क्या विपक्ष के नेता को देश की न्यायपालिका पर भरोसा नहीं है? ‘कैमरा-सेंट्रिक ड्रामा’ बताया जेपी नड्डा ने राहुल गांधी के विरोध प्रदर्शन को ‘कैमरा-सेंट्रिक ड्रामा’ करार दिया. उन्होंने कहा कि इस प्रदर्शन का मकसद मुद्दे का समाधान तलाशना नहीं, बल्कि राहुल गांधी को लगातार सुर्खियों में बनाए रखना है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस इस प्रदर्शन के जरिए नेतृत्वक फायदा लेने की कोशिश कर रही है. वंदे मातरम् विवाद से जोड़कर साधा निशाना जेपी नड्डा ने कांग्रेस पर ‘वंदे मातरम्’ को लेकर देशभर में उठ रहे सवालों का भी जिक्र किया. उन्होंने आरोप लगाया कि राष्ट्रीय गीत के कथित अपमान और तिरंगे की डिजाइन वाले केक से जुड़े विवाद को लेकर कांग्रेस पहले ही आलोचनाओं का सामना कर रही है. जेपी नड्डा का दावा है कि इसी आलोचना से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी ने नया नेतृत्वक ड्रामा खड़ा किया है. कांग्रेस पर लगाया मुद्दा भटकाने का आरोप केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि कांग्रेस मौजूदा विवाद से पैदा हुई नेतृत्वक असहजता को दबाने के लिए जनता का ध्यान दूसरे मुद्दे पर ले जाना चाहती है. उन्होंने राहुल गांधी के धरने को इसी रणनीति का हिस्सा बताते हुए इसे कांग्रेस की ‘नेतृत्वक हताशा’ करार दिया. ये भी पढ़ें: पैलेट गन मामले में FIR को लेकर राहुल गांधी का धरना, बोले- ‘ऊपर से आदेश’ की बात कह रही पुलिस The post राहुल गांधी के धरने पर जेपी नड्डा का वार- ‘कैमरा-सेंट्रिक ड्रामा’ से सुर्खियों में रहना चाहते हैं, न्याय से कोई लेना-देना नहीं appeared first on Naya Vichar.

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पैलेट गन मामले में FIR को लेकर राहुल गांधी का धरना, बोले- ‘ऊपर से आदेश’ की बात कह रही पुलिस

पैलेट गन से घायल होने का आरोप लगाने वाले साहिल लोचब (19) के साथ कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने के बाहर धरना दिया. राहुल गांधी का आरोप है कि पुलिस शिकायत के बावजूद FIR दर्ज नहीं कर रही है. उन्होंने दावा किया कि पुलिस के अनुसार FIR दर्ज न करने के लिए ‘ऊपर से आदेश’ मिले हैं. पीड़ित को साथ लेकर थाने पहुंचे राहुल इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अमुसार राहुल गांधी पहले लोचब के साथ कनॉट प्लेस थाने पहुंचे. बाद में उन्हें बताया गया कि नई दिल्ली के डीसीपी सचिन शर्मा संसद मार्ग थाने में हैं. इसके बाद राहुल गांधी वहां पहुंचे और मामले की जांच को लेकर जानकारी मांगी. पुलिस द्वारा FIR दर्ज नहीं किए जाने के आरोप के बाद वह थाने के बाहर धरने पर बैठ गए. राहुल गांधी ने कहा कि लोचब की आंख में तीन और शरीर में करीब 200 छर्रे लगे हैं. उन्होंने घायल छात्र के शरीर से निकाले गए धातु के छर्रे भी मीडिया को दिखाए. ‘पुलिस ने नहीं चलाई तो फिर किसने चलाई?’ राहुल गांधी ने कहा कि दिल्ली पुलिस पेलेट गन चलाने से इनकार कर रही है. उन्होंने सवाल उठाया कि अगर पुलिस ने पैलेट गन नहीं चलाई तो फिर गोली किसने चलाई. उन्होंने दावा किया कि पीड़ित की शिकायत पर FIR दर्ज न करने के लिए पुलिस को ‘ऊपर से आदेश’ दिए गए हैं. इस दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और कुमारी शैलजा समेत कई कांग्रेस नेता और कार्यकर्ता भी थाने पहुंच गए और राहुल गांधी के धरने में शामिल हुए. दिल्ली पुलिस ने क्या कहा? दिल्ली पुलिस ने राहुल गांधी के आरोपों पर कहा कि पीड़ित की शिकायत स्वीकार कर ली गई है. पुलिस के मुताबिक 20 जुलाई को दर्ज मामलों की जांच पहले से क्राइम ब्रांच कर रही है और एक जांच अधिकारी भी नियुक्त किया गया है. पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता को सूचित किया गया है कि उसकी शिकायत भी क्राइम ब्रांच को भेजी जाएगी. कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस जांच अधिकारी का नाम बताने से भी इनकार कर रही है. 20 जुलाई के प्रदर्शन से जुड़ा है विवाद 20 जुलाई को छात्रों ने परीक्षा पेपर लीक के विरोध में संसद की ओर मार्च किया था. प्रदर्शन के दौरान कई लोगों के घायल होने के बाद पैलेट गन के इस्तेमाल का आरोप सामने आया. कांग्रेस का दावा है कि प्रदर्शनकारियों पर RAF के जवानों ने पैलेट गन का इस्तेमाल किया, जबकि दिल्ली पुलिस लगातार इससे इनकार करती रही है. CRPF की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं. एक RTI के जरिए सामने आई जानकारी के अनुसार, घटना में कम से कम 10 लोगों को पैलेट से चोट लगने की बात सामने आई थी. इसी मामले को लेकर संसद के मानसून सत्र में भी विपक्ष ने प्रशासन पर सवाल उठाए थे. राहुल गांधी ने अमित शाह पर भी साधा निशाना राहुल गांधी पहले भी इस मामले में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जिम्मेदार ठहरा चुके हैं. शुक्रवार को उन्होंने सोशल मीडिया पोस्ट में शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि FIR दर्ज होगी, न्यायिक जांच होगी और दोषी पाए जाने वाले लोगों पर कार्रवाई की जाएगी. उन्होंने यह भी सवाल किया कि गृह मंत्री इस मुद्दे पर संसद में जवाब देने से क्यों बच रहे हैं. Also read : Video: पैलेट गन पीड़ित की FIR के लिए थाने में डटे राहुल गांधी, साथ देने प्रियंका भी पहुंचीं सुप्रीम कोर्ट ने बनाई विशेषज्ञ समिति पेलेट गन और पुलिस के कथित अत्यधिक बल प्रयोग का मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंच चुका है. शीर्ष अदालत ने 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा अत्यधिक और असंगत बल प्रयोग के आरोपों की जांच के लिए एक विशेषज्ञ समिति गठित की है. इस बीच राहुल गांधी के ताजा धरने के बाद यह विवाद एक बार फिर नेतृत्वक रूप से गरमा गया है. The post पैलेट गन मामले में FIR को लेकर राहुल गांधी का धरना, बोले- ‘ऊपर से आदेश’ की बात कह रही पुलिस appeared first on Naya Vichar.

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6 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के दोषी बंटी को 20 साल जेल की सजा, पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया फैसला

UP News: आगरा में छह साल की बच्ची से दुराचार के करीब छह साल पुराने मामले में पॉक्सो कोर्ट ने आरोपी को दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है. अदालत ने आरोपी पर 20 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है. विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट संगीता कुमारी ने पीड़िता के बयान और अभियोजन पक्ष की दलीलों को अहम मानते हुए यह फैसला सुनाया. कोर्ट ने पीड़िता को मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया के लिए फैसले की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने के निर्देश भी दिए हैं. घर में ही छह साल की बच्ची से किया था दुराचार मामला आगरा के थाना हरीपर्वत क्षेत्र का है. अभियोजन के मुताबिक, आरोपी बंटी पुत्र राधे निवासी रतनपुरा, आगरा, पीड़िता के परिवार के यहां संचालित जूता कारखाने में कारीगर के तौर पर काम करता था. 13 जून 2020 को उसने वादी की छह वर्षीय बेटी के साथ उसके घर में ही दुराचार किया. बच्ची की चीख सुनकर उसकी मां मौके पर पहुंची तो आरोपी वहां से फरार हो गया. परिवार के लोगों ने आरोपी के घर जाकर शिकायत करने का प्रयास किया, लेकिन वह वहां भी नहीं मिला. इसके बाद पुलिस को तहरीर दी गई और आरोपी के खिलाफ दुराचार व पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया. पीड़िता, माता-पिता और डॉक्टर समेत कई लोगों की गवाही पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद अदालत में आरोप पत्र दाखिल किया. सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से पीड़िता, उसकी मां और पिता के बयान दर्ज कराए गए. इसके अलावा डॉक्टर नीता कुलश्रेष्ठ, विवेचक अजय कौशल और पुलिसकर्मी सुमित कुमार ने भी अदालत में गवाही दी. वहीं, बचाव पक्ष ने आरोपी को निर्दोष साबित करने के लिए जसवंत सिंह और पवन कुमार को गवाह के रूप में पेश किया. पीड़िता की गवाही को माना अहम, आरोपी को 20 साल की कैद विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट संगीता कुमारी ने पीड़िता के बयान और विशेष लोक अभियोजक विमलेश आनंद की ओर से पेश किए गए तर्कों को मामले में महत्वपूर्ण माना. साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने बंटी को दोषी ठहराते हुए 20 वर्ष के कठोर कारावास और 20 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई. साथ ही पीड़िता को प्रतिकर दिलाने के लिए फैसले की प्रति जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजने का आदेश दिया गया है. Must Read- 3 बच्चों की मां को 6 बच्चों के पिता से हुआ प्यार, कोर्ट मैरिज के बाद अब एक छत के नीचे पलेंगे 9 शिशु, पढ़ें अनोखे निकाह की कहानी The post 6 वर्षीय बच्ची से दुष्कर्म के दोषी बंटी को 20 साल जेल की सजा, पॉक्सो कोर्ट ने सुनाया फैसला appeared first on Naya Vichar.

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सुनीता आहूजा को धोखा दिया तो भिखारी बन जाओगे… जब गोविंदा को इस शख्स ने दी थी वार्निंग

Govinda Mom On Cheating Sunita Ahujसुनीता आहूजा को धोखा दिया तो भिखानी बन जाओगे… जब गोविंदा को इस शख्स ने दी थी वार्निंगa: बॉलीवुड एक्टर गोविंदा का एक पुराना इंटरव्यू एक बार फिर सोशल मीडिया पर चर्चा में है. इसमें उन्होंने अपने मां निर्मला देवी की कही एक बात को याद किया है. Govinda Mom Warned Actor About Sunita Ahuja: गोविंदा को इस शख्स ने सुनीता आहूजा को लेकर दी थी वार्निंग बॉलीवुड बबल संग बातचीत में गोविंदा ने अपनी मां निर्मला देवी और पत्नी सुनीता आहूजा के रिश्ते को लेकर कई बातें शेयर की थीं. उन्होंने बताया था कि उनकी मां सुनीता को काफी पसंद करती थी और उन्हें लक्ष्मी मानती थी. उनका मानना था कि सुनीता के घर में आने से परिवार के लिए अच्छे दिन शुरू हुए. हालांकि, उनकी मां ने एक वार्निंग भी दी थी. गोविंदा के मुताबिक, निर्मला देवी ने उनसे साफ कहा था कि अगर उन्होंने कभी सुनीता को धोखा दिया, तो एक दिन ऐसी हालत आ जाएगी कि उन्हें भीख मांगनी पड़ेगी, क्योंकि सुनीता परिवार के लिए शुभ हैं. सुनीता आहूजा और गोविंदा, फोटो- इंस्टाग्राम Govinda-Sunita Ahuja Divorce Controversy: गोविंदा और सुनीता आहूजा के बीच तलाक को लेकर बढ़ा विवाद गोविंदा और सुनीता आहूजा का रिश्ता ठीक नहीं चल रहा है. सुनीता ने पति और अभिनेत्री कोमल रानी स्वर्णकार को लेकर दावा किया कि दोनों शादी करने वाले थे, इसलिए उन्होंने तलाक की अर्जी वापस ले ली. दरअसल सुनीता ने दिसंबर 2024 में मुंबई की बांद्रा फैमिली कोर्ट में तलाक की अर्जी दाखिल की थी. कुछ समय बाद गोविंदा के वकील ललित बिंदल ने इस बात को कंफर्म किया था. साथ ही बताया था कि दोनों के बीच सुलह हो चुकी है. इसके बाद दोनों को कई मौकों पर साथ देखा गया, जिसके चलते तलाक की समाचारों पर विराम लगा. हालांकि, सुनीता अपने बेटे यशवर्धन आहूजा के साथ उसी फैमिली कोर्ट के बाहर फिर नजर आईं. बाद में सुनीता के मैनेजर ने बताया कि वह पुराने तलाक मामले के सिलसिले में कोर्ट गई थीं और अर्जी वापस लेने का प्रोसेस चल रहा है. ये भी पढ़ें: गोविंदा- सुनीता के रिश्ते में नया ट्विस्ट, राखी सावंत से बातचीत में सुनीता ने किया दूसरी शादी को लेकर दावा ये भी पढ़ें: Sunita Govinda से Shweta Raja तक, जब बाॅलीवुड की शादियां bedroom से निकलकर पब्लिक प्लेटफॉर्म पर पहुंची The post सुनीता आहूजा को धोखा दिया तो भिखारी बन जाओगे… जब गोविंदा को इस शख्स ने दी थी वार्निंग appeared first on Naya Vichar.

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‘प्यार-मोहब्बत’ के लिए जल्दी खत्म करते थे क्लास? छात्रों की शिकायत पर शिक्षक-शिक्षिका का ट्रांसफर

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में एक शिक्षक और अतिथि स्त्री शिक्षिका कथित तौर पर साथ समय बिताने और प्यार-मोहब्बत करने के लिए कक्षाएं समय से पहले खत्म कर देते थे. इसकी शिकायत के बाद दोनों शिक्षकों पर कार्रवाई की गई और उनका ट्रांसफर कर दिया गया है. आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला. बच्चों ने पढ़ाई डिस्टर्ब होने की बात कही छिंदवाड़ा में जिला मुख्यालय से करीब 70 किलोमीटर दूर बीछ बाहरी गांव के प्रशासनी स्कूल के छात्रों ने एक शिकायत की. छात्रों ने जनसुनवाई के दौरान कलेक्टरेट पहुंचकर आरोप लगाया कि शिक्षक और अतिथि स्त्री शिक्षिका कथित तौर पर साथ समय बिताने के लिए कक्षाएं समय से पहले खत्म कर देते थे, जिससे उनकी पढ़ाई डिस्टर्ब हो रही थी. ये भी पढ़ें: खुद की गर्दन पर चाकू चला रेलवे लाइन पर जा लेटा युवक… जानें पूरी वारदात जांच के बाद दोनों शिक्षकों का ट्रांसफर शिकायत के बाद कलेक्टर ने जनजातीय कार्य विभाग के सहायक आयुक्त सत्येंद्र सिंह मरकाम को जांच के निर्देश दिए. पीटीआई के अनुसार जांच समिति की रिपोर्ट के बाद दोनों शिक्षकों को तत्काल स्कूल से हटाकर अलग-अलग स्कूलों में ट्रांसफर कर दिया गया. इसके साथ ही नए अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति के आदेश भी जारी किए गए हैं. हालांकि, दोनों शिक्षकों ने आरोपों से इनकार किया है और अतिथि शिक्षिका ने इसे उन्हें पद से हटाने की साजिश बताया है. The post ‘प्यार-मोहब्बत’ के लिए जल्दी खत्म करते थे क्लास? छात्रों की शिकायत पर शिक्षक-शिक्षिका का ट्रांसफर appeared first on Naya Vichar.

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राजस्थान स्कूल विवाद: CJP के आरोप को बीजेपी ने किया खारिज, ग्रामीणों ने कहा-वे स्कूल तोड़ने आए थे तो बहस हुई

Jaipur CJP Clash: राजस्थान के जयपुर जिले के रामपुरा-कंवरपुरा गांव में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की टीम और स्थानीय लोगों के बीच हुए विवाद ने नेतृत्वक रंग ले लिया है. CJP का आरोप है कि प्रशासनी स्कूल की स्थिति देखने पहुंची उनकी टीम पर हमला किया गया, पत्थरबाजी हुई और गाड़ियों में तोड़फोड़ की गई. वहीं गांव वालों ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि मौके पर सिर्फ तीखी बहस हुई थी. BJP विधायक ने क्या कहा? विवाद के बीच BJP विधायक गोपाल शर्मा ने कहा- CJP क्या है? घर के अंदर Cockroach का क्या काम? घर में शिशु और युवा होते हैं. उनके इस बयान के बाद नेतृत्वक बयानबाजी और तेज हो गई. कांग्रेस ने प्रशासन को घेरा मामले पर राजस्थान के नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने हिंसा की निंदा की. उन्होंने कहा कि किसी भी स्थिति में हिंसा सही नहीं है और प्रशासनी स्कूलों की वास्तविक स्थिति लोगों के सामने आनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन प्रशासनी स्कूलों की खराब हालत को छिपाने की कोशिश कर रही है. राजस्थान कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भी CJP टीम पर कथित हमले की निंदा की. उन्होंने आरोप लगाया कि टीम का विरोध करने वाले लोग BJP से जुड़े थे और किसी को स्कूल की स्थिति देखने से रोकना गलत है. स्कूल की स्थिति देखने पहुंची थी CJP टीम CJP कार्यकर्ता आशुतोष रांका के मुताबिक उनकी टीम रामपुरा-कंवरपुरा में एक प्रशासनी स्कूल की स्थिति देखने पहुंची थी. उनका दावा है कि यह स्कूल लंबे समय से एक अस्थायी ढांचे में चल रहा है और टीम यह जानना चाहती थी कि पिछले एक साल में यहां क्या सुधार हुआ है. रांका ने आरोप लगाया कि टीम के पहुंचने से पहले ही वहां कुछ लोग मौजूद थे और बाद में उन पर हमला कर दिया गया. रांका का आरोप- पत्थर फेंके, गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई आशुतोष रांका ने आरोप लगाया कि CJP कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की गई, पत्थर फेंके गए और उनकी गाड़ियों को नुकसान पहुंचाया गया. उन्होंने पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठाए. रांका ने मांग की कि कथित हमलावरों को 48 घंटे के भीतर गिरफ्तार किया जाए. साथ ही उन्होंने शिक्षा विभाग के उस आदेश को वापस लेने की मांग की, जिसमें प्रशासनी स्कूलों में बाहरी लोगों की एंट्री, मीडिया कवरेज और वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर पाबंदियां लगाई गई हैं. CJP की स्त्री सदस्य ने भी लगाए मारपीट के आरोप CJP टीम की सदस्य संजू ने भी आरोप लगाया कि उनके साथ धक्का-मुक्की की गई और लाठी से हमला किया गया. उनके मुताबिक, टीम यह देखने पहुंची थी कि जिस स्कूल की खराब स्थिति को लेकर पहले सवाल उठे थे, उसमें अब कोई सुधार हुआ है या नहीं. उन्होंने दावा किया कि मौके पर मौजूद लोगों ने उनकी टीम के सदस्यों के साथ मारपीट की और पत्थर भी फेंके. ग्रामीणों ने कहा- कोई हमला नहीं हुआ दूसरी ओर, गांव के लोगों ने CJP के आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है. ग्रामीण जुगल किशोर शर्मा का दावा है कि CJP की टीम करीब 200 से 250 लोगों के साथ गांव पहुंची थी. उन्होंने कहा कि गांव वालों ने किसी के साथ मारपीट नहीं की. उनके मुताबिक दोनों पक्षों के बीच बातचीत के दौरान विवाद जरूर हुआ, लेकिन हमला नहीं किया गया. जुगल किशोर ने यह भी दावा किया कि स्कूल की मरम्मत के लिए स्थानीय विधायक की ओर से 12 लाख रुपये की राशि पहले ही मंजूर की जा चुकी है. ग्रामीणों को स्कूल का ढांचा हटाने का था डर ग्रामीण अनु शर्मा ने कहा कि इस स्कूल में करीब 20 से 25 शिशु पढ़ते हैं. उनका दावा है कि स्थानीय लोगों को आशंका थी कि CJP की टीम स्कूल के मौजूदा ढांचे को हटाने की कोशिश कर सकती है. उन्होंने कहा कि इसी बात को लेकर विरोध हुआ और दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस हुई. ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की मरम्मत के लिए फंड मंजूर हो चुका है. दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग फिलहाल CJP और स्थानीय ग्रामीणों की ओर से घटना को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं. CJP जहां मारपीट, पत्थरबाजी और तोड़फोड़ का आरोप लगा रही है, वहीं ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर केवल बहस हुई थी. The post राजस्थान स्कूल विवाद: CJP के आरोप को बीजेपी ने किया खारिज, ग्रामीणों ने कहा-वे स्कूल तोड़ने आए थे तो बहस हुई appeared first on Naya Vichar.

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सूखे होंठों से हैं परेशान? ट्राई करें प्रियंका चोपड़ा का ये आसान DIY लिप स्क्रब

DIY Lip Scrub: लिप्स की केयर के लिए हर बार महंगे प्रोडक्ट खरीदना जरूरी नहीं है. घर पर रखी कुछ आसान चीजों से भी होंठों को नरम और साफ रखने की कोशिश की जा सकती है. प्रियंका चोपड़ा का DIY लिप स्क्रब भी इन दिनों चर्चा में है, जिसमें सी सॉल्ट यानी समुद्री नमक, ग्लिसरीन और गुलाब जल का इस्तेमाल किया जाता है. हालांकि, इसे इस्तेमाल करने को लेकर स्किन एक्सपर्ट क्या कहती हैं और इसे कितनी बार लगाना सही है, यह जानना भी जरूरी है. प्रियंका चोपड़ा का लिप स्क्रब बनाने के लिए चाहिए ये चीजें इस लिप स्क्रब को बनाने के लिए आपको तीन चीजों की जरूरत होगी. सी सॉल्ट यानी समुद्री नमक ग्लिसरीन गुलाब जल इन चीजों को बहुत कम मात्रा में लेना है, ताकि होंठों पर ज्यादा रगड़ न पड़े. ऐसे तैयार करें लिप स्क्रब सबसे पहले एक छोटी कटोरी लें. इसमें थोड़ा सा सी सॉल्ट यानी समुद्री नमक डालें. अब इसमें कुछ बूंदें ग्लिसरीन और थोड़ा सा गुलाब जल मिलाएं. तीनों चीजों को अच्छी तरह मिलाकर हल्का सा मिश्रण तैयार कर लें. होंठों पर ऐसे लगाएं तैयार मिश्रण को होंठों पर बहुत हल्के हाथ से लगाएं. इसे जोर से रगड़ने की जरूरत नहीं है. कुछ देर हल्के हाथ से लगाने के बाद होंठों को साफ पानी से धो लें. इसके बाद होंठों पर लिप बाम जरूर लगाएं. इस स्क्रब से क्या फायदा हो सकता है? सी सॉल्ट यानी समुद्री नमक होंठों पर जमा सूखी त्वचा को हटाने में मदद कर सकता है. ग्लिसरीन होंठों में नमी बनाए रखने में मदद करती है. वहीं, गुलाब जल होंठों को ठंडक और ताजगी देने में मदद कर सकता है. इससे होंठ कुछ समय के लिए ज्यादा मुलायम और साफ नजर आ सकते हैं. स्किन एक्सपर्ट क्या कहते हैं? View on Instagram स्किन एक्सपर्ट डॉ. रुचि अग्रवाल ने बताया कि सी सॉल्ट होंठों की ऊपर की सूखी त्वचा हटाने में मदद करता है, ग्लिसरीन नमी बनाए रखने में मदद करती है और गुलाब जल होंठों को आराम और नमी देने में मदद कर सकता है. डॉ. रुचि के मुताबिक, इस स्क्रब से होंठ कुछ समय के लिए मुलायम और चमकदार लग सकते हैं. लेकिन यह होंठों का प्राकृतिक रंग नहीं बदलता. लिप स्क्रब सिर्फ ऊपर की सूखी त्वचा को हटाने में मदद करता है. अगर होंठों का रंग गहरा है, तो इसकी वजह धूप, जेनेटिक्स या किसी चीज से बार-बार होने वाली जलन हो सकती है. ऐसे में सिर्फ स्क्रब करने से होंठों का रंग हल्का नहीं होगा. ज्यादा स्क्रब करने से जलन बढ़ सकती है और होंठों का रंग भी और गहरा हो सकता है. इसलिए डॉ. रुचि के मुताबिक, इसे हर दो हफ्ते में सिर्फ एक बार इस्तेमाल करना बेहतर है. इस्तेमाल करते समय इन बातों का रखें ध्यान स्क्रब को बहुत हल्के हाथों से लगाएं. इसे बार-बार इस्तेमाल न करें. स्क्रब के बाद लिप बाम जरूर लगाएं. अगर होंठ कटे या फटे हुए हैं, तो स्क्रब न करें. होंठों पर जलन या परेशानी हो तो इसका इस्तेमाल बंद कर दें. यह भी पढ़ें: अमरूद के पत्तों में छिपे हैं सेहत और ब्यूटी के राज, इन 4 तरीकों से करें इस्तेमाल The post सूखे होंठों से हैं परेशान? ट्राई करें प्रियंका चोपड़ा का ये आसान DIY लिप स्क्रब appeared first on Naya Vichar.

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