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क्या आप जानते हैं SIP का पावर? जानेंगे तो 15,000 जमा करके पा लेंगे 41 करोड़ रुपये

SIP Power: पैसा आम आदमी की जरूरत है. पैसों के बिना एक कदम चलना भी मुश्किल है. यह पैसा कहां से आएगा? सबसे बड़ा सवाल यही है. इसके दो-तीन माध्यम है. वह यह कि या तो आप नौकरी करेंगे, खेती-किसानी करेंगे या फिर व्यापार करेंगे. अगर आप नौकरी और खेती-किसानी करेंगे, तो आपकी आमदनी बस घर चलाने भर की ही होगी. बचत मुश्किल से ही हो पाएगी. व्यापार करते हैं, तो कुछ बचत होने की संभावना है. ऐसी स्थिति में आप क्या करेंगे? इसका सबसे आसान हल एसआईपी (Systematic Investment Plan) के जरिए म्यूचुअल फंड (Mutual Fund) में निवेश करना है. एसआईपी का पावर इतना अधिक है कि अगर आप हर महीने 15,000 रुपये जमा करते हैं, तो लॉन्ग टर्म में आप कम से कम 41 करोड़ रुपये के मालिक बन सकते हैं. आइए, जानते हैं इसका तरीका. एसआईपी के लिए धैर्य और अनुशासन जरूरी हिंदुस्तानीय शेयर बाजार हमेशा उतार-चढ़ाव से भरा रहता है, लेकिन स्मार्ट निवेशक जानते हैं कि धैर्य और अनुशासन से ही वेल्थ क्रिएशन संभव है. मार्केट में मौजूदा गिरावट का फायदा उठाकर अगर आप जल्दी रिटायरमेंट का सपना देख रहे हैं, तो SIP (Systematic Investment Plan) आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. खासकर अगर आप स्टेप-अप SIP का उपयोग करते हैं, तो आपकी संपत्ति कई गुना बढ़ सकती है. एसआईपी की जल्दी शुरुआत करें एसआईपी से अगर आपको करोड़पति बनना है तो आपकी जल्दी शुरुआत करनी होगी. मान लीजिए कि आपकी उम्र 25 साल है और आपने 15,000 रुपये की मंथली SIP शुरू की है. यदि अगले 35 वर्षों तक आपको औसतन 15% का सालाना रिटर्न मिलता है, तो SIP कैलकुलेटर के अनुसार, आप एक बड़ी रकम बना सकते हैं. लेकिन, अगर आप हर साल अपनी SIP राशि में 10% की वृद्धि (स्टेप-अप SIP) करते हैं, तो आपका कुल फंड 41 करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है. स्टेप-अप SIP से होगा बड़ा फायदा स्टेप-अप SIP का मतलब है कि आप हर साल अपनी मासिक SIP में 10% की बढ़ोतरी करते हैं. पहले साल आपकी एसआईपी 15,000 रुपये की होगी. अगले साल यह 10% बढ़कर 16,500 रुपये हो जाएगी. तीसरे साल यह 18,150 रुपये हो जाएगी. इसी तरह हर साल SIP बढ़ती रहेगी और कंपाउंडिंग का जादू चलता रहेगा. शेयर बाजार में गिरावट का फायदा उठाएं शेयर बाजार हमेशा लंबी अवधि में बेहतर रिटर्न देता है. अगर आप 10 से 20 साल के लिए SIP निवेश करते हैं, तो आपको एवरेजिंग का फायदा मिलेगा. बाजार में गिरावट के दौरान आपकी SIP कम कीमतों पर अधिक यूनिट खरीदती है, जिससे लंबी अवधि में ज्यादा रिटर्न मिलता है. 60 की उम्र में आरामदायक रिटायरमेंट विशेषज्ञों के अनुसार, अगर आप 60 साल की उम्र तक 10% स्टेप-अप SIP जारी रखते हैं, तो आपके पास रिटायरमेंट के लिए पर्याप्त फंड होगा. आपको सिर्फ धैर्य और अनुशासन बनाए रखना होगा. इसे भी पढ़ें: Naya Vichar Special: चीन चुपके-चुपके विकास करता रहा और हम देखते रहे, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के इंटरव्यू की तीसरी कड़ी The post क्या आप जानते हैं SIP का पावर? जानेंगे तो 15,000 जमा करके पा लेंगे 41 करोड़ रुपये appeared first on Naya Vichar.

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Mahakumbh 2025: 15 दिन में कबाड़ी वाले ने की साल भर की कमाई, चायवालों पर भी पैसों की बरसात

Mahakumbh 2025: Mahakumbh 2025: 13 जनवरी से 26 फरवारी तक प्रयागराज में आयोजित महाकुंभ में 67 करोड़ लोगों ने आस्था की डुबकी लगाई. महाकुंभ केवल धार्मिक आयोजन भर साबित नहीं हुआ, बल्कि गरीबों के लिए वरदान साबित हुआ. लोगों ने 45 दिनों के मेले में साल भर की कमाई कर ली. झारखंड के रहने वाले एक कबाड़ी का काम करने वाले शख्स ने बताया- महाकुंभ के दौरान उसने 15 दिनों तक अपनी ट्रॉली से लोगों को संगम घाट तक पहुंचाया. जिससे उसकी हजारो रुपये की कमाई हुई. उसने बताया कि उसे एक दिन में 2500 रुपये तक की कमाई हो रही थी. उसने 15 दिनों में इतने पैसे कमा लिए, जितना वो साल भर में कमाता था. शख्स ने बताया- उसके पास इतने पैसे जमा हो गए हैं कि वो अब नई ट्रॉली खरीद लेगा. महाकुंभ मेला से पहले अपनी ट्रॉली से कबाड़ खरीदने का काम करता था, लेकिन कुंभ ने उसकी जिंदगी बदल दी. अगर कुछ दिन पहले से वो ट्रॉली से सवारी ढोने का काम करता तो उसकी और अच्छी कमाई होती. ये कहानी केवल एक शख्स की नहीं है, बल्कि कुंभ में हजारों की संख्या में लोग ठेले और बाइक से श्रद्धालुओं को संगम घाट पहुंचाने का काम करते थे. जिससे उन्हें हजारों, लाखों की कमाई हुई. चाय बेचने वालों की जमकर हुई कमाई महाकुंभ 2025 की वजह से स्थानीय लोगों की भी अच्छी कमाई हुई. कुंभ मेला में केवल ट्रॉली मैन ही नहीं, बल्कि चायवाले, सड़क किनारे दुकान लगाने वाले, फूल-प्रसाद बेचने वालों की भी अच्छी कमाई हुई. ट्रॉली चलाने वाले शख्स ने कहा- कुंभ ने सिखाया की मेहनत और मौके का फायदा उठाकर अच्छी कमाई की जा सकती है. नाविकों ने लाखों में की कमाई महाकुंभ 2025 से नाविकों ने करोड़ों की कमाई की. यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में बताया था कि एक नाविक परिवार ने कुंभ में करोड़ों की कमाई की. केवल एक नाविक परिवार की कहानी नहीं है, बल्कि कई नाविकों ने कुंभ में लाखों रुपये की कमाई की. The post Mahakumbh 2025: 15 दिन में कबाड़ी वाले ने की साल भर की कमाई, चायवालों पर भी पैसों की बरसात appeared first on Naya Vichar.

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बिहार : अगर साफ-सफाई न होने से हैं परेशान, तो उठाइए फोन और दर्ज करा दीजिए शिकायत 

बिहार : नगर निगम की ओर से क्यूआर कोड के अनुसार सभी घरों से डोर-टू-डोर कचरा का उठाव किया जा रहा है. कचरा उठाव की मॉनीटरिंग निगम कार्यालय स्थित कंट्रोल रूम से की जा रही है. इसको और आगे बढ़ाते हुए अब स्वच्छ गया एप व स्वच्छता से रिलेटेड वेबसाइट gayaswm.in को सभी लोगों के लिए स्टार्ट किया गया है. उक्त बातें बेवसाइट व एप को लांच करते हुए नगर आयुक्त कुमार अनुराग ने बुधवार को कही. उन्होंने बताया कि कार्यालय या दूरभाष पर कई लोग साफ-सफाई से संबंधित फीडबैक या शिकायत करते रहते हैं. इस तरह किसी भी शिकायत या फीडबैक का फॉलोअप करना मुश्किल हो जाता है. इसको और आसान बनाने को लेकर ये व्यवस्था स्टार्ट की गयी है. नगर आयुक्त ने बताया कि अब किसी भी तरह का फीडबैक या शिकायत आप एप या वेबसाइट पर जाकर दे सकते है. उसके बाद आप अपने शिकायत को ट्रैक भी कर सकते हैं. साथ ही, निगम के स्तर से कई सुविधा व सर्विसेज भी लोगों द्वारा रिक्वेस्ट की जाती है. अब आप ऑनलाइन ही एप या वेबसाइट के माध्यम से सुविधाएं बुक कर सकते हैं. इसमें कंस्ट्रक्शन व पुराने मकानों का मलबा उठाव, डंप टैंक या डिसिल्टिंग मशीन की जरूरत, फॉगिंग, मोबाइल टॉयलेट्स, शव वाहन, सेप्टिक टैंक की सफाई आदि शामिल हैं. इससे सभी तरह के फीडबैक एवं शिकायत एक ही पोर्टल पर रहेंगे एवं कंट्रोल रूम के माध्यम से उसका फॉलोअप करते हुए निस्तारण किया जायेगा. संबंधित अपने किये हुए रिक्वेस्ट या शिकायत का फॉलोअप भी कर सकते हैं. कचरा उठाव की शिकायत घर बैठे करना आसान नगर आयुक्त ने बताया कि अगर कहीं लोगों को लगता है कि किसी स्थान से या घर से कचरे का उठाव नहीं हुआ है, तो घर बैठे ही वेबसाइट या ऐप पर ऑनलाइन नागरिक सेवा का फायदा ले सकते हैं. अपने मोबाइल नंबर से वेबसाइट एवं ऐप पर लोग शिकायत रजिस्टर कर सकते है. गया नगर निगम की ओर से उसका शीघ्र निष्पादन किया जायेगा. उन्होंने बताया कि सफाई एक ऐसी चीज है, जो सिर्फ निगम नहीं बल्कि सभी लोगों की जिम्मेदारी है. अगर लोग जान बुझ कर कचरा इधर उधर फेंकते रहेंगे, तो साफ सुथरा गया का सपना साकार नहीं हो पायेगा. इसे भी पढ़ें : Bihar: 625 करोड़ की लागत से स्मार्ट बनेगा बिहार का ये शहर, गरीबों के लिए बनेगा 2400 घर The post बिहार : अगर साफ-सफाई न होने से हैं परेशान, तो उठाइए फोन और दर्ज करा दीजिए शिकायत  appeared first on Naya Vichar.

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Muzaffarpur : होली में सप्लाई के लिए ट्रेन से शराब लेकर आ रही थी महिलाएं, पुलिस ने किया गिरफ्तार

Muzaffarpur :  उत्पाद विभाग की टीम होली को लेकर लगातार देसी व विदेशी शराब के खिलाफ अभियान चला रही है. पिछले 24 घंटे के अंदर में उत्पाद टीम ने 160 लीटर शराब के साथ 10 धंधेबाज को गिरफ्तार किया है. इसमें चार स्त्री शराब धंधेबाज को स्टेशन रोड से पकड़ा गया है. वे लोग यूपी से शराब तस्करी करके होली में सप्लाई करने को लेकर ट्रेन से शराब लायी थी. उनकी पहचान नगर थाना के सरैयागंज टावर चौक की उर्मिला देवी, सारण जिला के पटोरी थाना के लोदीपुर धीर गांव की रंजू देवी, मकेर थाना के मूराही घाट की प्रतिमा देवी, समस्तीपुर जिला के पटोरी थाना के शिवरा निवासी रंगीला देवी शामिल है. चारों के पास से 18 लीटर विदेशी शराब बरामद किया गया है. वे शराब को झोला के अंदर छिपा कर रखी थी. इनके अलावा औराई थाना के सरचिया गांव से रंगीला देवी और सिवाईपट्टी थाना के सीतलपट्टी गांव से किशन कुमार को गिरफ्तार किया गया है. लगातार हो रही छापेमारी कांटी के टरमा में जमीन के अंदर छिपाकर रखी गयी थी 35 लीटर विदेशी शराब भी बरामद किया गया है. वहीं, 51 लीटर शराब के साथ बोचहां थाना के रामदास मझौलिया से मीना देवी व सोनू कुमार को पकड़ा गया है. सकरा के गनीपुर बेझा गांव से 15 लीटर चुलाई शराब के साथ राहुल कुमार व सोनू कुमार को गिरफ्तार किया गया है. उत्पाद थानेदार दीपक कुमार सिंह ने बताया कि होली को लेकर सहायक उत्पाद आयुक्त विजय शेखर दुबे के निर्देश पर उत्पाद थाने की तीन विशेष टीम शराब को लेकर लगातार छापेमारी कर रही है. इसी कड़ी में पिछले 24 घंटे के अंदर में छापेमारी करके 10 शराब माफियाओं को गिरफ्तार किया गया है. इसमें पांच स्त्री शामिल है. सभी होली में सप्लाई को लेकर शराब की खेप स्टॉक किये थे और ला रहे थे. यूपी से शराब की तस्करी करके ट्रेन से लाने वाली चारों स्त्रीओं से पूछताछ की गयी तो बतायी कि होली में शराब बेचकर मोटी रकम कमाने की योजना थी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें जिले के 200 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा पर साटा गया पोस्टर मुजफ्फरपुर उत्पाद विभाग की टीम जिले के 200 से अधिक होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा पर पर पोस्टर चस्पा किया है. इसपर लिखा हुआ है कि बिहार में पूर्ण शराबबंदी है. शराब पीना, रखना, बेचना एक दंडनीय अपराध है. अगर किसी भी तरह शराबबंदी कानून की अवहेलना की जाती है तो कानूनी कार्रवाई की जाएगी. पोस्टर चस्पा करने के दौरान सहायक उत्पाद आयुक्त भी मौके पर मौजूद रह रहे हैं. इसे भी पढ़ें : Bihar : 250 करोड़ की लागत से बिहार के इस जिले में बनेगा रेलवे स्टेशन, सुविधाओं के मामले में एयरपोर्ट को करेगा फेल पढ़ें नया विचार की प्रीमियम स्टोरी : पीएम मोदी का मॉरीशस में बिहारी गीत-गवई से स्वागत- ‘राजा के सोभे ला माथे, सैकड़ों साल पुरानी परंपरा में जीवित संस्कृति The post Muzaffarpur : होली में सप्लाई के लिए ट्रेन से शराब लेकर आ रही थी स्त्रीएं, पुलिस ने किया गिरफ्तार appeared first on Naya Vichar.

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ISRO: स्पेस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कई देशों के साथ किया गया है समझौता

ISRO: देश के स्पेस सेक्टर के विकास में इसरो का अहम योगदान रहा है. मौजूदा समय में इसरो दुनिया के प्रमुख स्पेस एजेंसी के तौर पर खुद को स्थापित करने में सफल रहा है. देश के कई सैटेलाइट का प्रक्षेपण करने के साथ ही संस्था दूसरे देशों की सैटेलाइट को भी कम कीमत पर लांच करने का काम कर रहा है. स्पेस क्षेत्र के और विस्तार के लिए केंद्र प्रशासन ने निजी क्षेत्र की भागीदारी को मंजूरी दी. मौजूदा समय में इसरो का स्पेस के क्षेत्र में 61 देशों और 5 अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के साथ समझौता है. समझौते के तहत सैटेलाइट रिमोट सेंसिंग, सैटेलाइट नेविगेशन, उपग्रह संचार, सैटेलाइट विज्ञान और ग्रहों की खोज एवं क्षमता निर्माण शामिल है.  हिंदुस्तानीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) पहले से ही अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी (नासा) के साथ मिलकर एक संयुक्त उपग्रह मिशन पर काम कर रहा है. ‘निसार (नासा इसरो सिंथेटिक अपर्चर रडार)’ का निर्माण अंतिम चरण में है. इसके निर्माण से स्पेस क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव आने की संभावना है. इसरो सीएनईएस (फ्रांसीसी राष्ट्रीय अंतरिक्ष एजेंसी) के साथ मिलकर ‘तृष्णा (हाई रिजोल्यूशन प्राकृतिक संसाधन आकलन के लिए थर्मल इंफ्रारेड इमेजिंग सैटेलाइट)’ नामक एक संयुक्त उपग्रह मिशन पर काम कर रहा है. इसके अलावा इसरो और जेएक्सए (जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी) ने संयुक्त चंद्र ध्रुवीय अन्वेषण मिशन पर मिलकर काम कर रहा है.  निजी क्षेत्र की भागीदारी से इनोवेशन को मिलेगा बढ़ावा स्पेस क्षेत्र में देश की क्षमता को विकसित करने के लिए प्रशासन की ओर से निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनिश्चित की गयी है. इसके तहत हिंदुस्तानीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (इन-स्पेस) का गठन अंतरिक्ष विभाग में गैर-प्रशासनी संस्थाओं (एनजीई) की अंतरिक्ष क्षेत्र में गतिविधियों को प्रोत्साहित, अधिकृत और निगरानी करने के लिए किया गया है. हिंदुस्तानीय अंतरिक्ष नीति-2023 को प्रशासन ने विभिन्न हितधारकों द्वारा अंतरिक्ष गतिविधियों को नियामक निश्चितता प्रदान करने के लिए तैयार किया है. इसका मकसद एक समृद्ध अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है. निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित करने और सहायता प्रदान करने के लिए विभिन्न योजनाएं भी इन-स्पेस द्वारा घोषित एवं लागू की गई है.  सीड फंड योजना, मूल्य निर्धारण समर्थन नीति, मेंटरशिप समर्थन, तकनीकी केंद्र, एनजीई के लिए डिजाइन लैब, अंतरिक्ष क्षेत्र में कौशल विकास, इसरो सुविधा उपयोग समर्थन, एनजीई को प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, अंतरिक्ष क्षेत्र से जुड़े सभी हितधारकों से जुड़ने के लिए इन-स्पेस डिजिटल प्लेटफॉर्म बनाया गया है. हिंदुस्तानीय अंतरिक्ष क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए एक हजार करोड़ करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल बनाया गया है. इन-स्पेस ने गैर-प्रशासनी संस्थाओं (एनजीई) के साथ लगभग 78 समझौतों पर हस्ताक्षर किया है. यह जानकारी केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दिया.  ReplyForward The post ISRO: स्पेस क्षेत्र को आगे बढ़ाने के लिए कई देशों के साथ किया गया है समझौता appeared first on Naya Vichar.

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Pakistan Train Hijack: सामने आया ट्रेन हाईजैक के पीछे का कारण, ऑडियो जारी कर BLA ने बताई वजह

Pakistan Train Hijack: बलोच लिबरेशन आर्मी की ओर से जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को हाईजैक करने के बाद BLA ने एक ऑडियो जारी किया है. न्यूज चैनल आजतक की एक रिपोर्ट के मुताबिक बीएलए (बलोच लिबरेशन आर्मी) ने अपने जारी ऑडियो में पाकिस्तान की सेना पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. बीएलए ने ऑडियो में जिक्र किया है कि उसने इतने लोगों को बंधन क्यों बनाया है. बलोच लिबरेशन आर्मी ने यह भी दावा किया गया है कि उसके पास अभी 200 से ज्यादा नागरिक बंधक हैं. पाकिस्तानी सेना पर बीएलए ने लगाए गंभीर आरोप अपनी ऑडियो में बीएलए ने पाकिस्तान की आर्मी पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं. बीएलए ने बताया कि पाकिस्तान सेना के अत्याचार और बलूचिस्तान के संसाधनों के शोषण के कारण उन्होंने यह कदम उठाया है. बलोच लिबरेशन आर्मी ने कहा है कि उनके प्रांत का लगातार शोषण किया गया है. इसके खिलाफ वे आवाज उठा रहे हैं. 190 यात्रियों को बचाने का दावा इससे पहले पाकिस्तान के सुरक्षा अधिकारियों ने जानकारी देते हुए कहा है कि बलूचिस्तान हाईजैक रेलगाड़ी के 190 यात्रियों को बचा लिया गया है. सुरक्षाबलों ने यह भी दावा किया है कि 30 उग्रवादियों को अब तक मार गिराया गया है. अधिकारियों ने बताया कि सुरक्षाबलों और उग्रवादियों के बीच मुठभेड़ बुधवार को भी जारी रही. सेना और फ्रंटियर कोर सहित सुरक्षा बल क्वेटा से 160 किलोमीटर दूर एक सुरंग में गुडलार और पीरू कुनरी के पहाड़ी इलाकों के पास ट्रेन पर नियंत्रण करने वाले उग्रवादियों का मुकाबला कर रहे हैं. सुरक्षा सूत्रों ने बताया कि यह अब तक यह साफ नहीं हो पाया है कि हमले में कितने उग्रवादी शामिल हैं, लेकिन उनमें से कुछ अपने आकाओं के संपर्क में रहने के लिए सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल कर रहे हैं. पढ़ें नया विचार की प्रीमियम स्टोरी : पीएम मोदी का मॉरीशस में बिहारी गीत-गवई से स्वागत- ‘राजा के सोभे ला माथे, सैकड़ों साल पुरानी परंपरा में जीवित संस्कृति जाफर एक्सप्रेस ट्रेन को बीएलए ने किया हाईजैक मंगलवार को जब जाफर एक्सप्रेस ट्रेन क्वेटा से खैबर पख्तूनख्वा के पेशावर जा रही थी, इसी दौरान उग्रवादियों ने विस्फोट कर पहले ट्रेन को बेपटरी किया और उस पर कब्जा कर लिया. जिन नौ डिब्बों पर बीएलए ने कब्जा किया है उसपर करीब 400 यात्री सवार थे. घटना के बाद बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी ने हमले की जिम्मेदारी ली थी. न्यूज एजेंसी पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक उग्रवादियों ने छह सैनिकों की हत्या कर दी है, लेकिन पाकिस्तान की ओर से अब तक मारे गये लोगों की पुष्टि नहीं की है. हमेशा से अशांत रहा है बलूचिस्तान पाकिस्तान का बलूचिस्तान प्रांत हमेशा से अशांत रहा है. लेकिन, यह पहला मौका है जब बलूचिस्तान प्रांत में बीएलए या किसी भी उग्रवादी समूह ने यात्रियों से भरी ट्रेन को हाईजैक किया है. इससे पहले बीएलए के उग्रवादी प्रांत के विभिन्न हिस्सों में सुरक्षाबलों, प्रतिष्ठानों और विदेशियों पर निशाना बनाते थे. हाल के दिनों में उनके हमलों में खासा इजाफा हुआ था. पिछले साल नवंबर महीने में क्वेटा रेलवे स्टेशन पर बीएलए के एक आत्मघाती हमलावर ने खुद को बम से उड़ा लिया था जिसमें 26 लोगों की मौत हो गई थी. 62 अन्य लोग घायल हो गए थे. ट्रेन हाईजैक के बाद बीएलए ने चेतावनी जारी की है कि अगर पाकिस्तान की सेना कोई अभियान चलाती है तो सभी बंधकों को मार दिया जाएगा. बता दें, बीएलए पर पाकिस्तान, ब्रिटेन और अमेरिका में प्रतिबंध लगा है. The post Pakistan Train Hijack: सामने आया ट्रेन हाईजैक के पीछे का कारण, ऑडियो जारी कर BLA ने बताई वजह appeared first on Naya Vichar.

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CAG: नियुक्ति प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी बनाने की है जरूरत

CAG: सीएजी की उपयोगिता, कार्यप्रणाली, विश्वसनीयता, उसकी सीमा और शक्ति सहित ऑडिट के तरीके सहित विभिन्न मुद्दों पर कैग के पूर्व महानिदेशक पी शेषकुमार से नया विचार के राष्ट्रीय ब्यूरो प्रमुख अंजनी कुमार सिंह की बातचीत के मुख्य अंश:  सवाल : सीएजी की भूमिका को लेकर अक्सर विवाद होता रहता है. क्या आपको लगता है कि जनता या मीडिया सीएजी के अधिकार क्षेत्र को सही ढंग से नहीं समझ पाते हैं या फिर इसे गलत तरीके से पेश किया जाता है? नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक जिसे सीएजी कहते हैं इसके विषय में आम जनता में कम जानकारी  है. मीडिया और जनता दोनों ही सीएजी  के अधिकार क्षेत्र को सही ढंग से नहीं समझ पाते हैं. इसका एक प्रमुख कारण यह है कि सीएजी अपने प्रचार तंत्र से बहुत दूर है. कैग का मानना है कि उसकी रिपोर्ट के आधार पर ही उसे लोग जाने. एक तो सीएजी आम तौर पर प्रचार से कतराता है और दूसरा उसके पास समर्पित पेशेवर मीडिया विंग नहीं है.मीडिया द्वारा सनसनीखेज निष्कर्षों को गलत तरीके से प्रस्तुत करना या चुनिंदा तरीके से हाईलाइट करना भी संभव है. इसे आम तौर पर जनता द्वारा उठाया जाता है. क्योंकि सीएजी की रिपोर्ट जब तक संसद या विधानसभा के पटल पर न रख दिया जाये, तब तक वह गोपनीय रहता है. रिपोर्ट टेबल होने के बाद जब मीडिया, आम जनता या पॉलिटिकल पार्टी इस पर सवाल-जवाब करते हैं, तब वह लोगों के बीच आता है.12 साल पुरानी 2 जी स्पेक्ट्रम हो या कोल स्पेक्ट्रम या चारा घोटाला उन रिपोर्टां की आज भी चर्चा होती रहती है. अभी की रिपोर्ट की तुलना भी पिछले रिपोर्ट के आधार पर की जाती है. इसलिये काफी प्रश्न आम आदमी, मीडिया, बुद्धिजीवियों के बीच सुनने-समझने को मिलती है. आम जनता भी सीएजी की रिपोर्ट को पढ़े और उस पर विचार करें, तो यह देश हित में होगा. इस पर मैंने हाल ही में एक पुस्तक लिखी है, जिसका नाम है, “सीएजी एन्स्योरिंग अकाउंटेबिलिटी एमिड्स कॉन्ट्रोवर्सी: इन इनसाइड व्यू”. यह किताब सभी को पढ़ना चाहिये. आखिर सीएजी है क्या? इसकी सीमा और शक्ति क्या है? इसके काम करने के तरीके सहित इस पर कितना दबाव रहता है जैसे मुद्दों पर विस्तार से प्रकाश डाला गया है. सीएजी की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठते रहे हैं. सीएजी की विश्वसनीयता को और अधिक कैसे बढ़ाया जा सकता है?सबसे पहले सीएजी में होने वाली नियुक्ति प्रक्रिया को समझना होगा. इसके लिए कोई पॉलिसी या कोई कमिटी सिस्टम नहीं है. एक मुद्दा जिस पर अभी भी ध्यान देने की जरूरत है, वह है “चुनाव आयुक्त और सीबीआई निदेशक की तर्ज पर सीएजी की नियुक्ति के लिए समिति” की मांग. शायद, जिस बात पर बहस या आंदोलन किया जाना चाहिए, वह है सीवीसी और मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के समान बहु-सदस्यीय सीएजी की ओर बदलाव, साथ ही नियुक्ति के लिए एक संवैधानिक प्रावधान”. बदलावों के लिए संवैधानिक संशोधन की आवश्यकता होगी. इससे तीन उद्देश्य पूरे होंगे: चयन में पारदर्शिता, इंडियन ऑडिट एंड एकाउंट्स सर्विस (आइएएएस) को तीन सदस्य पदों में से कम से कम एक के लिए विचार किए जाने का अवसर और सीएजी में लगभग शून्य जवाबदेही के साथ एक व्यक्ति के वर्चस्व की प्रणाली को समाप्त करना. वर्तमान में कैबिनेट सेक्रेटरी अधिकारियों का एक पैनल बनाती है और उस पैनल में से प्रधानमंत्री किसी एक को नियुक्त करते हैं. इसके साथ ही एक बात और ध्यान देने की है कि नियुक्ति के बाद सीएजी महोदय को इतनी पॉवर और छूट दी गयी है, कि उस पर फिर किसी का दबाव काम नहीं कर सकता है. इन्हें सुप्रीम कोर्ट के जज का हैसियत हासिल है. इन्हें नौकरी से कोई हटा नहीं सकता है. इनको हटाने के लिए भी पार्लियामेंट में महाभियोग लाना पड़ता है. इनके आफिस के खर्च को लेकर पार्लियामेंट में वोटिंग भी नहीं हो सकती है. कार्यालय के खर्च का कोई ऑडिट नहीं होगा. इन्हें कौन सा सब्जेक्ट का चुनाव करना है, उसमें कितनी गहराई तक जाना है, कितने दिनों में रिपोर्ट देनी है, कब बनानी है, इसके लिए भी सीएजी को पूरा पावर दिया गया है. एक बार नियुक्त होने के बाद उनके ऊपर किसी तरह का दबाव आने की आशंका कम रहती है. लेकिन आप पूछेंगे की प्रैक्टिकली क्या हो रहा है? तो प्रैक्टिकली इनके पास पूरे पॉवर है, लेकिन अब उस व्यक्ति पर निर्भर करता है कि वह उस पावर को कैसे यूज कर रहे हैं. सवाल : आप सीएजी और न्यायपालिका के बीच के जटिल संबंधों पर चर्चा करते हैं. आपके मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के प्रमुख निर्णयों ने सीएजी के अधिकार क्षेत्र और प्रभावशीलता को कम किया है. कैसे?  वर्ष 2012 के माननीय सुप्रीम कोर्ट के निर्णय ने सीएजी के ऑडिट के दायरे का विस्तार करते हुए इसे ‘मुनीम’ या सिर्फ एक अकाउंटेंट की तरह मानने के बजाय प्रदर्शन ऑडिटिंग को शामिल किया. उसी फोरम ने अगस्त 2024 में यह भी निर्णय लिया कि सीएजी की रिपोर्ट केवल उनका दृष्टिकोण या विचार हैं और जब तक पीएसी संसद को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत नहीं करती, तब तक वे अंतिम नहीं होती हैं. इसका असर सीएजी रिपोर्ट की प्रभावशीलता पर पड़ा है. अब सीएजी की रिपोर्ट की वैल्यू तभी है, जब पीएसी संसद को अपनी सिफारिशें दें. इसमें यह भी नहीं है कि इतने समय के अंदर इसे टेबल करना जरूरी है. प्रशासन चाहे तो वर्षों तक रिपोर्ट को टेबल नहीं कर सकती है. अभी हाल ही में सीएजी महोदय ने  2024 में ही दिल्ली की रिपोर्ट पर हस्ताक्षर की थी, लेकिन उसकी रिपोर्ट फरवरी 2025 में विधानसभा में आयी है. इससे कई सारी समस्याएं पैदा होती है. सीएजी किसी समस्या को सुधार करने के लिए अपनी रिपोर्ट में दो साल पहले सिफारिश की है और दो साल तक उस रिपोर्ट को टेबल ही नहीं किया गया, तो इन दो सालों में वह समस्याएं विकराल हो जायेगी या फिर दूसरी समस्या में तब्दील हो गयी होगी. मेरा मानना है कि सीएजी के काम में और अधिक सुधार के लिए उसे और शक्ति देना जरूरी है. सीएजी की रिपोर्ट को पेश करने के लिए प्रशासन को एक अनिवार्य समय दे दिया जाये, चाहे वह समय दो महीना हो या छह महीना. लेकिन प्रशासन की यह

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MP Police Constable Final Result: एमपी पुलिस कांस्टेबल फाइनल रिजल्ट जारी, यहां से करें डाउनलोड

MP Police Constable Final Result: मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB) ने एमपी पुलिस कांस्टेबल 2023 का फाइनल रिजल्ट अपनी आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जारी कर दिया है. उम्मीदवार इस वेबसाइट से अपना रिजल्ट डाउनलोड कर सकते हैं. एमपी पुलिस कांस्टेबल रिजल्ट अब मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB) की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर उपलब्ध है. एमपी पुलिस कांस्टेबल रिजल्ट कैसे डाउनलोड करें? उम्मीदवार नीचे दिए गए स्टेप्स का पालन करके आधिकारिक वेबसाइट से अपना MP Police Constable Final Result कर सकते हैं- चरण 1- मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन बोर्ड (MPESB) की आधिकारिक वेबसाइट esb.mp.gov.in पर जाएं. चरण 2- होमपेज पर “रिजल्ट सेक्शन” पर जाएं और “रिजल्ट- पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा 2023” पर क्लिक करें. चरण 3- एमपी पुलिस कांस्टेबल रिजल्ट पीडीएफ स्क्रीन पर दिखाई देगा. चरण 4- पात्र उम्मीदवारों की सूची में अपना रोल नंबर खोजें, आप CTRL+F का उपयोग करके भी अपना रोल नंबर खोज सकते हैं. चरण 5- भविष्य के संदर्भ के लिए एमपी पुलिस रिजल्ट पीडीएफ डाउनलोड करें और उसका प्रिंटआउट लें. Naya Vichar Premium Story: झारखंड में परीक्षाओं में धांधली को लेकर केंद्र से भी सख्त कानून, फिर भी थमने का नाम नहीं ले रहे पेपर लीक के मामले एमपी पुलिस कांस्टेबल फिजिकल टेस्ट डिटेल (MP Police Constable)  MP Police Constable Final Result आने के बाद फिजिकल टेस्ट के बारे में समझना जरूरी है. जिन लोगों के लिए फिजिकल टेस्ट के लिए बुलाया जाएगा तो उन उम्मीदवारों को न्यूनतम 30% अंक (100 में से 30 अंक) प्राप्त करने होंगे. ऑपरेटर-रेडियो पदों के लिए पीईटी एक योग्यता प्रकृति है. रेडियो ऑपरेटर पदों के लिए न्यूनतम योग्यता अंक 20% न्यूनतम (40 में से 8 अंक) है. यह भी पढ़ें- SSC MTS Result: किसी भी समय जारी हो सकता है SSC MTS रिजल्ट, चेक करने के लिए अपनाएं ये तरीका The post MP Police Constable Final Result: एमपी पुलिस कांस्टेबल फाइनल रिजल्ट जारी, यहां से करें डाउनलोड appeared first on Naya Vichar.

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Prabhat Khabar Special: चीन चुपके-चुपके विकास करता रहा और हम देखते रहे, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के इंटरव्यू की तीसरी कड़ी

Naya Vichar Special: ‘हमारा पड़ोसी देश चीन कभी आर्थिक मजबूती के तौर पर हिंदुस्तान से काफी पीछे था. वह चुपके-चुपके विकास करता रहा और हम देखते रहे.’ यह हम नहीं, बल्कि राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के एक्सक्लूसिव इंटरव्यू का सार है. राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश के साथ नया विचार डॉट कॉम के संपादक जनार्दन पांडेय ने लंबी बातचीत की है. पेश है उस एक्सक्लूसिव इंटरव्यू की तीसरी कड़ी… हरिवंश: इस विकास की यात्रा में हर राज्य को समझना होगा कि उनकी साझेदारी उतनी है. उनका योगदान उतना ही जरूरी है. मैं आजकल दो तीन विधानसभाओं में नए देश के हाल के महीने डेढ़ महीने में गया. उनके जो नए विधायक होते हैं. ओरिएंटेशन प्रोग्राम होता है. उनके साथ संवाद करने के लिए मुझे बुलाया गया. जनार्दन पांडेय: अभी आप जाने वाले भी है शायद? हरिवंश: नहीं, ऑलरेडी यहां कल मैं बात कर चुका हूं लंबा और एक जम्मू कश्मीर में गया था और एक अभी चंडीगढ़ गया था. उसके पहले पटना में दूसरे ढंग का स्पीकर्स कॉन्फ्रेंस था. उसके पहले इसी कार्यक्रम के लिए ओडिशा में गया था. अभी हाल में मैं एक-एक लेख के बारे में राज्यों में भी कहता हूं और मीडिया से भी कहता हूं. मैंने अभी पढ़ा ही हुआ है. मैं आपको दिखा दूं. ये लेख है. इकोनॉमिक टाइम्स में छपा है 8 फरवरी को. यह लेख भी किसी असाधारण व्यक्ति का ही है. यह हैं कृष्णमूर्ति सुब्रमण्यम. यह साधारण व्यक्ति हैं. यह हिंदुस्तान के आर्थिक सलाहकार पहले रहे हैं. आज की तारीख में आईएमएफ के एक्सक्यूटिव डायरेक्टर हैं. इन्हीं की किताब है इंडिया एट द रेट ऑफ 100 यानी 100 वर्षों बाद हिंदुस्तान दुनिया के बड़े अर्थशास्त्री ही आईएमएफ एक्टिव डायरेक्टर होंगे. कहने की जरूरत नहीं हिंदुस्तान के बारे में. इस व्यक्ति ने किताब लिखी. अब वो अर्थशास्त्री हैं, जो हिंदुस्तान के बारे में कंसर्न हैं, सोचते हैं. इनका सवाल है मीडिया से लेकर के और हमारे सारे जो बौधिक हैं देश के उनसे. और सारे ये जितने बॉडीज हैं, आपके चेंबर ऑफ कॉमर्स जैसे इस तरह की जितनी बॉडीज हैं, उन सब से कि भाई केंद्र प्रशासन का जब बजट आता है, तो केंद्र प्रशासन के बजट पर चर्चा, राज्य प्रशासन के बजट की स्क्रूटनी क्यों नहीं? तब तो आप चैनलों पर बड़ा लंबा डिस्कशन चलाते हैं. ओपेट चलाते हैं. अखबारों में सब लोग विचार व्यक्त करते हैं, पर असल विकास का इंजन तो एक तरह से कहें… यह मैं कह रहा हूं, वह तो राज्यों के हाथ में है. क्या राज्य के मीडिया राज्य के लोग राज्य के चेंबर ऑफ कॉमर्स, राज्य का सीआईआई कन्फेडरेशनों, टेड माइंड उस व्यक्ति का यह कहना वो कहते क्या हैं. आगे मैं बहुत संक्षेप में आपको सुना रहा हूं. बड़ा मौजू है ये, क्योंकि दो बड़े राज्यों का… हिंदुस्तान के दो बड़े राज्यों के बजट लगभग तैयार हैं और इस महीने में वो पेश होंगे. कहते हैं, ‘एवरी मैन्युफैक्चरिंग फर्म रिलाइज ऑन सिक्स क्रिटिकल इनपुट्स’. देश में मैन्युफैक्चरिंग पर जोर 2014 के बाद पड़ा. चीन ने मैन्युफैक्चरिंग के लिए 1977 से अपनी कोशिश की और कैसे उन्होंने इसके लिए अलग से उन्होंने प्रयास किए. यह एक लंबा किस्सा है. मैं जिस अखबार में काम करता था या 10 वॉल्यूम की बात किया, उसमें लिखा है, उस सज्जन जो उनका पहला वो था स्पेशल जोन, जो सज्जन उन्होंने बनाया हांगकांग के बगल में. वो देंग शियाओ पेंग ने कैसे बनाया और सबसे पहले वो जापान के पास गए. आप देखिए प्रैक्टिकल सोच जापान और चीन का रिश्ता. इतिहास आप उठाकर देखें, तो बिल्कुल डागर्स का रहा है, बिल्कुल एक दूसरे के खिलाफ आंख मिलाकर के बिल्कुल तरेरने वाला और बहुत क्या कहें. मतलब एक-दूसरे के प्रति बहुत कटू भाव रहे हैं उनके. इतिहास में उसकी वजह रही है, क्योंकि चीन मानता है कि सेकंड वर्ल्ड वॉर में कई जगहों पर जापान ने का कब्जा किया था और वहां मानते हैं उनके अनुसार कि जापान ने वहां पर अपने ढंग से क्रूरता की. इसलिए हाल-हाल तक वे मांग करते हैं कि जापान हमें उसके लिए माफ मांगे. उसी जापान में देंग शियाओ पेंगजब नया सपना देखते हैं चीन को बनाने का, तो सबसे पहले वो आदमी जापान जाते हैं. सी द प्रैक्टिकल विजन और जापान जाकर वो वहां के बादशाह के सामने खड़े हो जाते हैं. देंग शियाओ पेंग… बड़े… मैं तो छोटा हूं. मेरा कद बहुत छोटा है, पर वो शायद मुझसे भी कद में बड़े छोटे थे. उस इतिहासकार ने लिखा है, जिसने उस वर्ल्ड… उस पर पॉलिटिक्स और टर्न अराउंड पर.. जो सामग्री लिखी थी, जो मैं पढ़ा था उसमें कि वो उसमें भी काफी झुक करके द शियाओ पेंग ने सम्राट के सामने कहा कि हम अतीत को भूल जाएं… हम अतीत को भूल जाएं और चीन अब एक नया अध्याय शुरू करना चाहता है. उसमें जापान की उसको जरूरत है और जापान टेक्नोलॉजी में सबसे आगे था. ये सारे मेरे लिखे हुए लेख हैं उसी अखबार में, जो बाद में संकलन में आए हैं. किताबों में भी शामिल होगा. फिर यही नहीं कहा, उसके बाद जापान ने 100 बिलियन डॉलर पहला पैसा दिया. जापान ने उसके बाद वहां की जितनी बड़ी कंपनियां थीं, ऑटोमोबाइल की टोयोटा से लेकर सबमें… उसमें देंग शियाओ पेंग एक-एक बड़ी कंपनी में गए. उतने बड़े स्टेचर का नेता, जो चीन का चीफ था, ऑटो कंपनियों के पास जा रहे हैं. ऑटो कंपनियों के जो सीईओ हैं सारे, उन सबको इनवाइट किया. पहली चीन का सारा सक्सेस मैन्युफैक्चरिंग का. हम देख नहीं सके, हमारे राजनेता देख नहीं सके. हम बदलने से इंकार करते रहे. हमारा देश बैंकरप्ट होने के कगार पर खड़ा था. उसके बारे में मैं आपको बताऊंगा. हम इतने विजनरी के अभाव वाले नेताओं का देश यह रहा कि जो सिर्फ सत्ता प्रिय हो गए और हमारे सामने एक देश करवट लेकर के हमसे बहुत तेज से आगे बढ़ रहा था. वो खतरे हम समझ रहे थे, पर हम चुप थे. ये एक नागरिक के तौर पर मैं कह रहा हूं अभी आपको कि जब मैं ये सवाल उठा रहा हूं, तो मैं एक सांसद के रूप में नहीं या जिस पद पर हूं, उसके रूप में

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बिहार में चुनाव से पहले बदले जाएंगे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष! प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने दिया संकेत

बिहार में इस साल के आखिरी में विधानसभा चुनाव होने वाला है. एक तरफ जहां दूसरी पार्टियां चुनाव की रणनीति बनाने में व्यस्त हैं. वहीं, सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस अपने ही नेताओं के बीच में चल रही खींचतान से परेशान है.  बताया जा रहा है कि इसको लेकर पार्टी का प्रदेश नेतृत्व नाखुश है और चुनाव में जान से पहले पार्टी हाईकमान बड़ा फैसला ले सकती है.  इन सबके बीच 12 मार्च को दिल्ली में बिहार कांग्रेस के नेताओं के साथ मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी की होने वाली बैठक भी टल गई है. पटना में आयोजित कार्यक्रम में अखिलेश प्रसाद सिंह और कृष्णा अल्लवारू 16 मार्च से पदयात्रा निकाल रही है कांग्रेस  कांग्रेस का प्रभारी बनने के बाद से ही कृष्णा अल्लावरु लगातार राज्य का दौरा कर रहे हैं. अपनी पिछली बिहार यात्रा के दौरान ऐलान किया कि नौकरी और पलायन के मुद्दे पर 16 मार्च से पश्चिम चंपारण से एक पदयात्रा निकाली जाएगी. इसमें यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई के कार्यकर्ता भाग लेंगे. एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रभारी कन्हैया कुमार इस यात्रा में शामिल होंगे. बताया जा रहा है कि इस कार्यक्रम के बारे में  प्रदेश कांग्रेस नेतृत्व के साथ सलाह मशविरा नहीं किया गया. जिससे बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह नाराज हैं.   बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें जा सकती है कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी  कांग्रेस में एक धड़ा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश प्रसाद सिंह को बदलना चाहता है. हालांकि लालू प्रसाद यादव के साथ अखिलेश सिंह की निकटता को देखते हुए चुनावी साल में ये आसान कदम नजर नहीं आता. खास तौर पर तब जब बिहार में कांग्रेस सीटों की संख्या को लेकर आरजेडी के सामने पहले से बैकफुट पर है. कन्हैया कुमार को लेकर भी आरजेडी की असहजता जगजाहिर है. वही अल्लावरू ने कहा था कि पार्टी इस बार के चुनाव में बी नहीं ए टीम बनकर चुनाव लड़ेगी और इसके लिए अगर उसे कोई बड़ा फैसला लेना पड़े तो भी वह पीछे नहीं हटेगी. ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि चुनाव से पहले कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी जा सकती है. इसे भी पढ़ें : Bihar : 250 करोड़ की लागत से बिहार के इस जिले में बनेगा रेलवे स्टेशन, सुविधाओं के मामले में एयरपोर्ट को करेगा फेल इसे भी पढ़ें : दरभंगा की मेयर अंजुम आरा ने होली पर दिया ऐसा बयान, यूपी, बिहार, महाराष्ट्र तक छिड़ा घमासान पढ़ें नया विचार की प्रीमियम स्टोरी : पीएम मोदी का मॉरीशस में बिहारी गीत-गवई से स्वागत- ‘राजा के सोभे ला माथे, सैकड़ों साल पुरानी परंपरा में जीवित संस्कृति The post बिहार में चुनाव से पहले बदले जाएंगे कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष! प्रभारी कृष्णा अल्लावरू ने दिया संकेत appeared first on Naya Vichar.

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