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JPSC Scam: रांची के इस कोचिंग सेंटर में तैयार होता था आंसर, CID रेड में एडमिट कार्ड-मार्कशीट जब्त

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) द्वारा आयोजित विभिन्न प्रतियोगिता परीक्षाओं में कथित अनियमितता की जांच कर रही सीआईडी ने सोमवार को रांची, पलामू, हजारीबाग, बोकारो और धनबाद जिलों के 18 ठिकानों पर छापेमारी की. इनमें सनत प्रकाश का बोकारो स्थित आवास भी शामिल है. इन ठिकानों के तार किसी न किसी तरह से जेपीएससी मुख्यालय, टीडीपीएल कंपनी और कंपनी के मार्केटिंग मैनेजर रहे अभय तिवारी से जुड़े हैं. सीआईडी की टीम ने रांची के लालपुर स्थित कोचिंग संस्थान पतंजलि एकेडमी के परिसर व इसके संचालक संजीत ऊर्फ गोल्डेन के यहां भी दबिश दी है. आरोप है कि अभय तिवारी की टीम सबसे पहले ओएमआर शीट इसी कोचिंग संस्थान में लाती थी. यहीं, सवालों के सही जवाब तैयार किये जाते थे. बाद में वहीं तैयार शीट के अनुसार सभी ओएमआर शीट भरे जाते थे. सुबह 2 बजे से 6 बजे तक चली छापेमारी छापेमारी सोमवार तड़के सुबह 2:00 बजे से सुबह 6:00 बजे तक चली. छापेमारी के दौरान सीआईडी ने अलग अलग ठिकानों से लैपटॉप, मोबाइल, विभिन्न बैंकों की पासबुक-चेकबुक, अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी, एडमिट कार्ड और मार्कशीट सहित कई अहम दस्तावेज बरामद किये हैं. सीआईडी की टीम ने अभय तिवारी के देवघर स्थित आवास को भी खंगाला. वहीं, उसके साले सौरव की भी तलाश की जा रही थी, लेकिन वह नहीं मिला. छापेमारी के संबंध में सीआईडी ने अब तक कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है. ये भी पढ़ें: दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पुण्यतिथि आज, नेमरा बनेगा श्रद्धा और विकास का केंद्र, जुटेंगे राज्यभर के लोग कहां कहां पड़ी रेड रांची लालपुर में पतंजलि कोचिंग सेंटर धुर्वा सेक्टर-2 साइड-5 स्थित कोचिंग संचालक रवि कुमार और नामकुम में आदित्य पांडेय का घर पर छापा पड़ा. बोकारो सेक्टर-3सी, क्वार्टर नंबर-315 सनत प्रकाश का परिसर पर भी मारी गई रेड पलामू डालटनगंज पांकी रोड स्थित कोचिंग संचालक रविशंकर का परिसर, डालटनगंज के बीएन कॉलेज परिसर स्थित शिक्षक संतोष कुमार सिंह का परिसर, नौडीहा बाजार स्थित उसके पैतृक आवास व एक अन्य ठिकाना. धनबाद जीतेंद्र की तलाश में सरायढेला थाना क्षेत्र के वीटी इंफ्रा अपार्टमेंट, सरायढेला का एक कोचिंग सेंटर, धनबाद थाना क्षेत्र के हाउसिंग कॉलोनी और दो अन्य ठिकाने. हजारीबाग लालो यादव की तलाश में पौता और जेपीएससी में गलत तरीके से पास करने के आरोप में गिरफ्तार सुमन सौरभ के गंगादोहर स्थित आवास. ये भी पढ़ें: पांच अगस्त से कॉलेजों में चलेगा स्पेशल वोटर रजिस्ट्रेशन कैंपेन, मतदाता सूची में जुटेगा 18+ छात्रों का नाम The post JPSC Scam: रांची के इस कोचिंग सेंटर में तैयार होता था आंसर, CID रेड में एडमिट कार्ड-मार्कशीट जब्त appeared first on Naya Vichar.

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WhatsApp ने अचानक 24 घंटे के लिए किए कई अकाउंट ‘Under Review’, यूजर्स नहीं कर पाए ऐप यूज

सोमवार शाम हिंदुस्तान में कई WhatsApp यूजर्स अचानक अपने अकाउंट का यूज नहीं कर पाए. मैसेजिंग ऐप ने उनके अकाउंट को बिना किसी चेतावनी के 24 घंटे के लिए ‘Under Review’ में डाल दिया. इसके बाद वे ऐप के कई जरूरी फीचर्स यूज नहीं कर सके. इस समस्या की पहली रिपोर्ट रात करीब 8 बजे सामने आई. प्रभावित यूजर्स के WhatsApp पर एक नोटिफिकेशन दिखाई दिया, जिसमें लिखा था कि उनके अकाउंट की प्लेटफॉर्म के Terms of Service के तहत जांच की जा रही है. इस दौरान कई लोगों का अकाउंट अस्थायी रूप से सीमित हो गया. रिव्यू शुरू होने पर यूजर्स को क्या दिखा? ऐप पर एक मैसेज दिखाई दे रहा है, जिसमें लिखा है, “अकाउंट रिव्यू में है. रिक्वेस्ट की तारीख: 3 अगस्त 2026. यह जांच की जा रही है कि आपके अकाउंट की एक्टिविटी और डिवाइस की जानकारी हमारी Terms of Service के मुताबिक है या नहीं. आमतौर पर 24 घंटे के भीतर आपको इसका रिजल्ट बता दिया जाएगा.” इसके नीचे WhatsApp ने “Learn about account issues” का ऑप्शन भी दिया है. यहां “WhatsApp का जिम्मेदारी से इस्तेमाल कैसे करें” और “चोरी हुए फोन या अकाउंट से जुड़ी जानकारी” जैसी गाइड देखने का ऑप्शन मिलता है. कंपनी की ओर से अभी तक नहीं आई कोई भी जानकारी कंपनी ने अभी तक यह नहीं बताया है कि इस वजह से कितने लोगों के अकाउंट प्रभावित हुए हैं. कंपनी ने यह भी साफ नहीं किया है कि ऐसा किसी तकनीकी गड़बड़ी की वजह से हुआ, सिस्टम ने अपने आप अकाउंट की जांच शुरू कर दी या फिर स्पैम रोकने के लिए ऐसा किया गया. अभी यह भी पता नहीं चल पाया है कि यह दिक्कत सिर्फ कुछ देशों के यूजर्स को हुई है या दुनिया भर के लोग इससे प्रभावित हुए हैं. ये भी पढ़ें: .EXE और .DLL फाइल से हो रहा WhatsApp Hack, भूलकर भी न खोलें ये फाइल The post WhatsApp ने अचानक 24 घंटे के लिए किए कई अकाउंट ‘Under Review’, यूजर्स नहीं कर पाए ऐप यूज appeared first on Naya Vichar.

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बिजली और इंटरनेट नहीं, फिर भी असम के बेटे ने हासिल की नीट में सफलता

NEET Success Story: असम के एक छोटे से गांव से आने वाले बिशु लिंबू ने बिजली और इंटरनेट की कमी के साथ भी नीट जैसे टफ परीक्षा में सफलता हासिल कर ली. उन्होंने NEET UG 2026 में 720 में से 610 मार्क्स हासिल किया है. उनकी ये सफलता पूरे राज्य के छात्रों के लिए मिसाल बन गई है. आइए, जानते हैं बिशु लिंबू की कहानी. नीट यूजी परीक्षा टफ एग्जाम्स में से एक है. कई-कई साल महंगे कोचिंग में तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स को भी कई बार सफलता नहीं मिलती है. लेकिन बिशु लिंबू ने कम संसाधन में भी इस परीक्षा में सफलता हासिल की है और डॉक्टर बनने के अपने सपने की ओर पहला कदम बढ़ाया है. किसान परिवार से निकलकर मेडिकल कॉलेज तक का सफर बिशु लिंबू एक साधारण किसान परिवार से आते हैं. उनके पिता छोटे किसान हैं और परिवार की आर्थिक स्थिति हमेशा से कमजोर रही. कई बार घर चलाना भी मुश्किल हो जाता था, लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बीच उनके माता-पिता ने कभी बेटे के सपनों पर भरोसा नहीं छोड़ा. माता -पिता का यही सपोर्ट बिशु के लिए सबसे बड़ी ताकत बनी. लालटेन की रोशनी में की NEET की तैयारी बिशु के पास न बिजली थी और न ही इंटरनेट. नीट की तैयारी के लिए छात्र ऑनलाइन लेक्चर, टेस्ट सीरीज और डिजिटल स्टडी मैटेरियल का सहारा लेते है, लेकिन बिशु के पास इनमें से कुछ भी नहीं था. वे सिर्फ अपने किताब से पढ़ते रहते थे और नोट्स बनाकर सेल्फ स्टडी करते थे. वे रात में लालटेन की रोशन में पढ़ाई करते थे. 610 अंक हासिल कर किया सपना पूरा लगातार मेहनत करके बिशु ने NEET UG 2026 में 610 मार्क्स हासिल किया. असम के बिशु ने ये साबित कर दिया कि सक्सेस केवल रिसोर्सेज से नहीं मिलती है बल्कि मेहनत करने से मिलती है. बिशु लिंबू की कहानी केवल एक परीक्षा में सफलता की कहानी नहीं है, बल्कि यह उन सभी छात्रों के लिए प्रेरणा है जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को अधूरा मान लेते हैं. यह भी पढ़ें- टेलीग्राम पर हुई दोस्ती, साथ की पढ़ाई और तीनों बने अफसर, जानें इन दोस्तों की सक्सेस स्टोरी The post बिजली और इंटरनेट नहीं, फिर भी असम के बेटे ने हासिल की नीट में सफलता appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में अवैध निर्माण पर हर हाल में चलेगा बुलडोजर, अग्निमित्रा पॉल ने बता दी डेटलाइन

कोलकाता : पश्चिम बंगाल में किसी भी हाल में अवैध निर्माण की अनुमति नहीं दी जाएगी. इसीलिए, नई प्रशासन के सत्ता में आते ही, कोलकाता समेत राज्य के विभिन्न जिलों में अवैध निर्माणों को ध्वस्त करने के लिए बुलडोजर तैनात कर दिये हैं. अब शहर में अवैध निर्माण रोकने के लिए सख्त कार्रवाई की जा रही है. मंजूरी की नयी प्रणाली शुरू नगर एवं शहरी विकास मंत्री अग्निमित्रा ने निर्देश दिया है कि 31 मार्च, 2026 के बाद बने मकानों के संबंध में प्राप्त किसी भी शिकायत की प्रशासन जांच करेगी. तारातला घटना के बाद, भवन निर्माण योजनाओं को मंजूरी देने के लिए एक नई प्रणाली शुरू की जा रही है. भविष्य में, यदि किसी विशेषज्ञ संगठन से मंजूरी प्राप्त नहीं की जाती है, तो बाध्यकारी योजना पर हस्ताक्षर नहीं किए जाएंगे. भारी जुर्माना का होगा प्रवाधान अग्निमित्र ने कहा- अगर 31 मार्च, 2026 को बने मकान के बारे में कोई शिकायत आती है, तो हम भारी जुर्माना लगाएंगे. अगर हम इतना भारी जुर्माना लगाते हैं, तो आपको इसे चुकाने में बहुत मुश्किल होगी. उन्होंने आगे कहा- लेकिन हम यह भारी जुर्माना व्यावसायिक और आवासीय दोनों तरह की इमारतों पर लगाएंगे. जांच के लिए तीसरे पक्ष की होगी नियुक्त राज्य मंत्री ने कहा-हम कुछ एजेंसियों या तीसरे पक्ष को नियुक्त करेंगे, ताकि ताराताला जैसी घटनाएं दोबारा न हों. वे हर चीज़ पर नज़र रखेंगे. हम उनकी सहमति के बिना उन्हें आगे नहीं बढ़ने देंगे. एक महीने पहले ताराताला स्थित एक कारखाने में लोहे का शेड गिर गया था. आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इस घटना में कई लोगों की मौत हो गई थी और कई लोग घायल भी हुए थे. इस दुखद दुर्घटना के बाद से, इस गोदाम के निर्माण का ठेका पाने वाले ठेकेदार असगर हुसैन का कोई पता नहीं चला है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें दोबारा नहीं होगी ताराताला जैसी घटना दूसरी ओर, शंभूनाथ बेहरा ने गोदाम बनाने के लिए पोर्ट ट्रस्ट से यह ज़मीन पट्टे पर ली थी. दुर्घटना के बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए शंभूनाथ को गिरफ्तार कर लिया. इसके साथ ही, इस घटना में शामिल होने के आरोप में चार और लोगों को गिरफ्तार किया गया है. राज्य ने यह सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाए हैं कि ताराताला जैसी घटना दोबारा न हो. Also Read: उत्तर बंगाल में पर्यटन को नयी उड़ान, सैंडकफू में बनेंगे पर्यावरण अनुकूल 10 कंटेनर होम The post बंगाल में अवैध निर्माण पर हर हाल में चलेगा बुलडोजर, अग्निमित्रा पॉल ने बता दी डेटलाइन appeared first on Naya Vichar.

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‘शर्म पीड़ित को नहीं, अपराधी को होनी चाहिए’: ‘लॉक अप’ में कंटेस्टेंट्स के मोलेस्टेशन के खुलासे पर बोले रितेश देशमुख

Lock Upp 2 Riteish Deshmukh: नेटफ्लिक्स का रियलिटी शो ‘लॉक अप: सच या सजा’ अब अपने फिनाले वीक में पहुंच गया है और जल्द ही शो के विजेता का नाम सामने आएगा. पिछले कुछ हफ्तों में शो में कई ड्रामे, तीखी बहसें और भावुक पल देखने को मिले. इसी बीच,एक इंटरव्यू के दौरान शो के को-होस्ट रितेश देशमुख ने कंटेस्टेंट्स के पूरे सफर को करीब से देखने का अपना अनुभव शेयर किया. Riteish on Contestents Revealing About Molestation: मोलेस्टेशन पर बोले रितेश रितेश ने कहा कि शो में इस तरह की बातचीत होना बहुत जरूरी है. उन्होंने कहा, “मेरा मानना है कि सभी कंटेस्टेंट अपने-अपने क्षेत्र में सफल हैं और ऐसे निजी अनुभव सबके सामने शेयर करना बिल्कुल आसान नहीं होता. यह किसी दोस्त, पत्नी या माता-पिता से बात करने जैसा नहीं है. पूरी दुनिया के सामने अपनी कहानी बताना और जो हुआ उसे स्वीकार करना बड़ी हिम्मत की बात है. लेकिन जब लोग इस बारे में खुलकर बात करते हैं, तो इससे दूसरे लोगों को भी अपनी बात कहने की ताकत मिलती है.” Shame Belongs to the Perpetrator, Not the Victim: अपराध करने वाले को शर्म करनी चाहिए रितेश ने आगे कहा, “शर्म अपराध करने वाले व्यक्ति को महसूस होनी चाहिए, पीड़ित को नहीं. हमें सच का सामना करना चाहिए और हिम्मत के साथ अपनी बात रखनी चाहिए. मुझे लगता है कि शो के कंटेस्टेंट्स ने दर्शकों को भी आगे आकर अपनी बात कहने का हौसला दिया है. ऐसे लोगों की पहचान सामने आनी चाहिए और उन्हें उनके किए के लिए जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए,”.  No Favourite Contestent- Riteish: कोई पसंदीदा कंटेस्टेंट नहीं शो का विजेता कौन हो सकता हैं, इस पर रितेश ने बताया कि, उनका कोई पसंदीदा कंटेस्टेंट नहीं है. उन्होंने फिनाले से पहले पूरे गेम को करीब से देखा है, इसलिए किसी एक का नाम लेना उनके लिए आसान नहीं है. उन्होंने कहा, “दुर्भाग्य से, मेरे और फराह खान के पास किसी एक को चुनने का विकल्प नहीं है. हम सिर्फ सभी का सफर देख सकते हैं। श्रेया ने पूरे शो में शानदार प्रदर्शन किया और वह एक मजबूत खिलाड़ी रहीं. शिवांगी और हर्षद ने भी अच्छा स्पोर्ट्सा और उनका सफर भी काफी प्रभावशाली रहा. राम शुरुआत में थोड़ा झिझक रहे थे, लेकिन बाद में उन्होंने इस फॉर्मेट को अच्छी तरह अपना लिया. मुझे लगा कि वरुण ने भी बेहतरीन प्रदर्शन किया. योगेश और आकांक्षा चौधरी ने भी अच्छा स्पोर्ट्स दिखाया. वहीं, शिल्पा शिंदे भी एक मजबूत कंटेस्टेंट रहीं.” उन्होंने आगे कहा, “हर कंटेस्टेंट की अपनी अलग पहचान और सफर रहा है. इसलिए मैं फिनाले में सभी के सफर के बारे में बात करना चाहूंगा. मेरी कोशिश रहेगी कि मैं पूरी तरह निष्पक्ष रहूं और हर कंटेस्टेंट की यात्रा का सम्मान करूं.” About Lock Upp 2 Secrets: सीक्रेट्स के साथ आते हैं कंटेस्टेंट्स शो का कॉन्सेप्ट ऐसा है कि हर कंटेस्टेंट अपने साथ तीन सीक्रेट्स (राज) लेकर आता है. ये तीनों सीक्रेट्स उनके लिए लाइफलाइन की तरह होते हैं, जो उन्हें गेम में बचाने का काम करते हैं. लेकिन पिछले हफ्ते गेम में बड़ा बदलाव देखने को मिला। एक टास्क के दौरान कंटेस्टेंट्स को एक-दूसरे को निशाना बनाने की ताकत दी गई, जिसके चलते उन्हें अपना एक सीक्रेट छोड़ना पड़ा. ऐसा करने के बाद वे गेम में खतरे की स्थिति में आ गए. इस टास्क के बाद घर का माहौल काफी भावुक और मुश्किल भरा हो गया. कई कंटेस्टेंट्स ने अपने सीक्रेट्स सबके सामने बताए. श्रेया कालरा, राम कपूर, हर्षद चोपड़ा और शिवांगी जोशी समेत कई लोगों ने खुलासा किया कि कम उम्र में उनके साथ छेड़छाड़ जैसी दर्दनाक घटनाएं हुई थीं. इन निजी अनुभवों में छेड़छाड़ से जुड़ी घटनाएं एक समान विषय बनकर सामने आईं. अपनी आपबीती सुनाते समय कई कंटेस्टेंट भावुक हो गए, जबकि बाकी लोगों ने उनका हौसला बढ़ाया. सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस मुद्दे पर खुलकर बात की और बताया कि ऐसी घटनाओं का किसी व्यक्ति की जिंदगी पर कितना गहरा असर पड़ सकता है. यह भी पढ़ें: Lock Upp 2 Finale: हर्षद चोपड़ा बने शो के पहले फाइनलिस्ट, श्रेया कालरा ने किया इस कंटेस्टेंट को एलिमिनेट! The post ‘शर्म पीड़ित को नहीं, अपराधी को होनी चाहिए’: ‘लॉक अप’ में कंटेस्टेंट्स के मोलेस्टेशन के खुलासे पर बोले रितेश देशमुख appeared first on Naya Vichar.

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फिर भारत को निशाना बनाते ट्रंप टैरिफ, पढ़ें, प्रभु चावला का आलेख

लोकतांत्रिक इतिहास की लंबी धारा में, दुनिया के सबसे समृद्ध लोकतंत्र द्वारा दुनिया के सबसे बड़े और सबसे तेजी से बढ़ते लोकतंत्र को व्यवस्थित रूप से परेशान किया जाना सामान्य कूटनीतिक आक्रोश से अधिक प्रतिक्रिया की मांग करता है. डोनाल्ड ट्रंप ने कूटनीति के साधनों को दबाव और डराने-धमकाने के औजारों में बदल दिया है. यह दबाव विशेष रूप से हिंदुस्तान पर केंद्रित रहा है. व्यापार और वाणिज्य को हथियार बना दिया गया है. ट्रंप ने इन्हें सहमति बनाने के साधन से हटाकर व्यापार की शर्तें थोपने और किसी भी ऐसे साझेदार पर असमान दबाव डालने का एक कठोर उपकरण बना दिया है, जो तुरंत झुकने को तैयार नहीं होता. सबसे ताजा और उकसाने वाला कदम पिछले सप्ताह आया, जब वाशिंगटन नेशनल कैथेड्रल में सीनेटर लिंडसे ग्राहम के अंतिम संस्कार के कुछ घंटों बाद अमेरिकी सीनेट ने 86-12 के बहुमत से ग्राहम के विधेयक को आगे बढ़ाने के लिए मतदान किया. यह कानून उन देशों पर 100 प्रतिशत तक के द्वितीयक टैरिफ लगाने की अनुमति देता है, जो रूस से तेल और गैस खरीदना जारी रखते हैं. इसके पहले के मसौदे में हिंदुस्तान, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान को निशाना बनाया गया था. ट्रंप की पक्षपातपूर्ण नीति इस अधिनियम में साफ दिखाई देती है. इसमें उन 15 यूरोपीय देशों को छूट दी गयी है, जो अब भी रूसी गैस आयात कर रहे हैं. हिंदुस्तान तेल खरीदता है, लेकिन यूरोप गैस खरीदता है. फिर भी अधिकतम दबाव के लिए केवल एक श्रेणी को चुना गया. इस द्विदलीय कानून को किसी भी राष्ट्रपति आदेश की तुलना में वापस लेना कहीं अधिक कठिन है. यह दबाव भरी कूटनीति का संस्थानीकरण है, जो अस्थायी कार्यकारी निर्णय को स्थायी विधायी आदेश में बदल देता है. यह मतदान उस अभियान का परिणाम है, जिसने पिछले 15 महीनों में हिंदुस्तानीय वस्तुओं पर शुल्क को पांच बार बदला है. इन दंडात्मक परिवर्तनों का उद्देश्य स्थायी ढांचा बनाना नहीं, बल्कि और अधिक रियायतें प्राप्त करना था. अप्रैल, 2025 में वाशिंगटन ने 26 फीसदी टैरिफ की धमकी दी. अगस्त तक यह दर 50 प्रतिशत हो गयी, जिसमें अतिरिक्त 25 फीसदी केवल इसलिए जोड़े गये, क्योंकि हिंदुस्तान रूसी कच्चा तेल खरीदता रहा. इस वर्ष की शुरुआत में ट्रंप और मोदी ने एक अंतरिम समझौते की घोषणा की, जिससे दर घटकर 18 प्रतिशत हो गयी, बदले में हिंदुस्तान द्वारा अमेरिकी ऊर्जा, तकनीक और अन्य वस्तुओं की 500 अरब डॉलर की खरीद का वादा किया गया. अठारह दिन बाद अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के फैसले में कहा कि इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट इन टैरिफों की अनुमति नहीं देता था. इससे पहले ही वसूले गये 160 अरब डॉलर से अधिक अमान्य हो गये और हिंदुस्तान के साथ समझौता भी निष्प्रभावी हो गया. ट्रंप ने इस न्यायिक झटके को स्वीकार किया और तुरंत 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 122 के तहत 10 फीसदी का अतिरिक्त शुल्क लगा दिया. जब यह अस्थायी अधिकार 24 जुलाई को समाप्त हुआ, तो उसी रात धारा 301 के तहत 10 फीसदी शुल्क लागू कर दिया गया, जिसे जबरन श्रम प्रवर्तन के आधार पर उचित ठहराया गया. लगातार पांच बार दरों में बदलाव, एक देश और 15 महीने-यह एक निरंतर पुनर्संरचना की कहानी है, जो कूटनीतिक अस्थिरता को दर्शाती है. अमेरिका के 250 साल के इतिहास में पहली बार उसके राष्ट्रपति की छवि ऐसे दबंग की बन गयी है, जिसे सिद्धांत व स्थिरता की कम परवाह है. चीन भी रूस से समान मात्रा में तेल आयात करता है. लेकिन उसे बार-बार दंड का सामना नहीं करना पड़ा और उसे एक तरह के समझौते का अवसर दिया गया. हिंदुस्तान अधिक सहयोगी साझेदार है, पर उसे ही अधिक बार दंडित किया गया. रणनीतिक साझेदारी के महत्व को ध्यान में रखते हुए हिंदुस्तान ने कई रियायतें दी हैं. वर्ष 2025 में अमेरिका का हिंदुस्तान के साथ वस्तु व्यापार घाटा करीब 58 अरब डॉलर था, जो पिछले वर्ष से 27 प्रतिशत अधिक था. हालांकि, 2025-26 में हिंदुस्तान का अमेरिका के साथ अधिशेष घटकर 34.4 अरब डॉलर रह गया, जो पिछले वर्ष 40.9 अरब डॉलर था. हिंदुस्तान ने रूस से कच्चे तेल के आयात का हिस्सा कम किया, अमेरिकी ऊर्जा की खरीद बढ़ायी और बातचीत के रास्ते खुले रखे, जबकि हिंदुस्तानीय कंपनियों ने अमेरिका में नये निवेश भी किये. उच्च स्तरीय वार्ताओं के एक दर्जन से अधिक दौर और वाशिंगटन व नयी दिल्ली के बीच वरिष्ठ अधिकारियों की यात्राएं हुईं. पर इन्हें या तो औपचारिकता तक सीमित रखा गया या ट्रंप ने इन्हें अप्रासंगिक बताया. इनमें से किसी भी प्रयास से स्थिर दर, स्थायी छूट या वर्तमान शुल्कों के लिए स्पष्ट कानूनी आधार नहीं मिला. सहयोग को पारस्परिक लाभ के रूप में नहीं, बल्कि बार-बार परखा जाने वाला लचीलापन माना गया. विडंबना यह है कि ट्रंप मोदी को मित्र बताते हैं, जबकि हर संभव कानूनी और नेतृत्वक अवसर का उपयोग कर उनकी छवि को नुकसान पहुंचाते हैं. ट्रंप का राष्ट्रपति कार्यकाल वैश्विक सहमति बनाने वाली संस्था से टकराव पर आधारित व्यवस्था में बदल गया है. नेतन्याहू और जेलेंस्की जैसे नेताओं को सार्वजनिक समर्थन और कूटनीतिक छूट मिलती है, पर सबसे तेजी से बढ़ते बड़े लोकतंत्र को एक समस्या की तरह देखा जाता है. प्रधानमंत्री मोदी ने अब तक स्थिति को बढ़ाने से बचते हुए हिंदुस्तान की रणनीतिक स्वायत्तता सुरक्षित रखी है. पर यह दबाव भरा कूटनीतिक अभियान जितना लंबा चलेगा, उतना ही स्पष्ट होगा कि इसका नुकसान अंततः ट्रंप के नेतृत्वक आधार और अमेरिकी वित्तीय स्थिति को भी होगा. हिंदुस्तान अपने विनिर्माण आधार को मजबूत कर रहा है, ग्लोबल साउथ में साझेदारियां बढ़ा रहा है और दक्षिण एशिया में चीन के प्रभाव के संतुलन के रूप में उभर रहा है. इससे वह और मजबूत बनेगा. इस उभरती शक्ति को निशाना बनाकर वाशिंगटन अमेरिकियों की रक्षा नहीं कर रहा, बल्कि उन व्यापारिक और रणनीतिक संबंधों को कमजोर कर रहा है, जो एशिया में संतुलन और साझा हितों को बढ़ावा दे सकते थे. जो महाशक्ति कूटनीति को उत्पीड़न समझने लगती है, अंततः महसूस करेगी कि जिन देशों को वह नियंत्रित करना चाहती है, उनके पास विकल्प मौजूद हैं. हिंदुस्तान पहले ही एक उभरती शक्ति के रूप में धैर्य का परिचय दे चुका है, जिसे पता है कि समय उसके पक्ष में है. अमेरिका को

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बांकीपुर चुनाव के नतीजे ने भाजपा को बड़ा संदेश भेजा

आखिर सारी ताकतों और सारे संसाधनों को लगा देने के बाद भी भाजपा को शिकस्त खानी पड़ी. बांकीपुर और दतिया के उपचुनाव में भाजपा के हाथ से ये दोनों सीटें यूं फिसल गयीं, जैसे मुट्ठी से रेत फिसल जाती है. पटना लोकसभा के अंदर पड़ने वाले बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव पर पूरे देश की निगाहें टिकी थीं. वजह यह है कि यह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट है जिसे उन्होंने अभी-अभी राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने और राज्यसभा जाने पर खाली किया. जाहिर है, राष्ट्रीय अध्यक्ष की प्रतिष्ठा यहां दांव पर लगी थी, इसलिए पूरी भाजपा नेतृत्व की प्रतिष्ठा भी दांव पर लगी थी. यह बेवजह नहीं है कि नितिन नवीन लगातार बांकीपुर में कैंप कर रहे थे. 1995 से लगातार भाजपा इस सीट पर काबिज रही है और नितिन नवीन 2006 से लगातार बांकीपुर से विधानसभा चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचते रहे. यह कायस्थ बहुल क्षेत्र है और बांकीपुर में अन्य सवर्णों के साथ कायस्थ भाजपा के पक्ष में मतदान करते आये थे और अन्य सवर्णों में कुछ खिसकते भी रहे, तो भी कायस्थ का मत शत–प्रतिशत भाजपा के पक्ष में जाता रहा. इसलिए यहां से कायस्थ उम्मीदवार ही खड़े होते रहे हैं और यह भाजपा की सुरक्षित सीट मानी जाती रही है. अब सवाल यह है कि आखिर इस सेफ जोन से एनडीए उम्मीदवार और खासकर भाजपा मात क्यों खायी? पहली बात तो यह है कि भाजपा का उम्मीदवार नीरज सिन्हा बेहद कमजोर उम्मीदवार था. प्रशांत किशोर उस मुकाबले बड़े कद्दावर उम्मीदवार थे. प्रशांत किशोर पढ़े–लिखे हैं, जुझारू हैं और संघर्ष करते रहे हैं. नीरज सिन्हा को कोई नहीं जानता था. एक कार्यकर्ता के तौर पर भी नीरज सिन्हा की कोई पहचान नहीं थी. बांकीपुर के मतदाताओं में इस बात को लेकर रोष था कि कई अच्छे दावेदारों की जगह भाजपा ने नीरज सिन्हा पर दांव क्यों लगाया? इसके पहले अभिषेक बंटी नाम के उम्मीदवार का चयन हुआ और वो भी खुद नितिन नवीन के द्वारा. लेकिन आनन-फानन में उसकी उम्मीदवारी को रद्द किया गया और यह संदेश गया कि उसकी छवि अच्छी नहीं थी और उसके मां-बाप चारा घोटाला में सजायाफ्ता रहे हैं. भाजपा ने पहली गलती वहीं पर की. जब नीरज सिन्हा को लाया गया तो मतदाताओं में यह बात उठी कि इसकी छवि कौन-सी अच्छी है. एक भाजपा नेता के कथित बयान – हम किसी कुत्ते-बिल्ली को भी खड़ा करेंगे तो जीत जायेंगे- ने भी बांकीपुर के मतदाताओं में नाराजगी ला दी थी. नीट पेपर लीक को लेकर युवाओं में रोष था ही, उस पर से यह बयान आग में घी का काम किया. यह चुनाव भी इत्तफाकन उसी समय पड़ा जब नीट पेपर लीक को लेकर पूरे देश में युवाओं का रोष उफान पर था और जंतर-मंतर पर जो हुुआ, उसे पूरे देश-दुनिया ने देखा. आखिर प्रशासन को इन युवाओं की मांगों के आगे झुकना पड़ा और शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा और शिक्षा प्रणाली में मूलभूत सुधार के लिए हाई टास्क फोर्स का गठन और लोक परीक्षा सुधार बिल लाना पड़ा. बांकीपुर उपचुनाव में लोग भाजपा से नाराज थे, और खासकर युवा वर्ग. इसकी एक वजह और भी है कि कानून–व्यवस्था को लेकर लोगों में असंतोष है. भोजपुर में भरत तिवारी नाम के एक युवा का एनकाउंटर होता है और वो भी गलत ढंग से. बहुत दिनों तक उसपर पर्दा ढांकने की कोशिश की गयी. लेकिन अंतत: प्रशासन एक्सपोज हुई. फिर मुख्यमंत्री का यह बयान कि कुशवाहा की तरफ कोई आंख उठाकर देखेगा तो बख्शा नहीं जाएगा और लोगों में गलत संदेश गया कि क्या सम्राट चौधरी सिर्फ कुशवाहा के मुख्यमंत्री हैं? एक तो यूजीसी बिल को लेकर लोगों में नाराजगी पहले से थी, जिसमें सवर्णों के साथ भेदभाव की बात आयी और केंद्र प्रशासन ने सवर्णों की उस नाराजगी की अनदेखी की. यूपी के तर्ज पर जब यहां भी बुलडोजर न्याय की प्रक्रिया शुरू हुई तो मुसलमानों में एक संदेश गया कि जल्द ही यूपी के तर्ज पर यहां भी उन्हें बुलडोजर न्याय से नवाजा जाएगा. मुसलमान मतदाताओं में एक डर व्याप्त हुआ जो नीतीश कुमार के समय में नहीं था. सम्राट चौधरी को मुख्यमंत्री बनाये जाने को लेकर भी लोगों में अच्छा प्रभाव नहीं था. आखिरी बात, अब नीतीश कुमार का प्रभाव भी खत्म हो चुका है. नीतीश कुमार से बांकीपुर उपचुनाव में मतदाताओं को वीडियो संदश दिलवाया गया. लेकिन उसका कोई असर नहीं पड़ा. एक तो नीतीश कुमार संदेश देने में ही इतने कमजोर लग रहे थे कि उसका बेअसर होना लाजिमी था. भाजपा ने पवन सिंह से लेकर मनोज तिवारी तक को उतारा. लेकिन मतदाताओं ने खारिज किया और खासकर जेन जी ने. इसलिए हुकूमत को अब जेन जी के मूड को समझना होगा. युवाओं ने ही मोदी जी को सत्ता में पहंुचाया था, इसलिए युवाओं के मूड और नाराजगी को समझना पड़ेगा. दतिया में भाजपा की हार से अगर कोई सबसे ज्यादा खुश होगा तो वो होंगे नरोत्तम मिश्रा, जिन्हें भाजपा आनाकमान ने दूध में पड़ी मक्खी की तरह अलग कर दिया. अब इसका असर नितिन नवीन और सम्राट चौधरी के भविष्य पर क्या पड़ेगा, यह देखना शेष है. (ये लेखक के निजी विचार हैं) The post बांकीपुर चुनाव के नतीजे ने भाजपा को बड़ा संदेश भेजा appeared first on Naya Vichar.

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डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दो टूक चेतावनी: समझौता करो, वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहो

डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार (3 अगस्त) को कहा कि ईरान के साथ बातचीत अभी भी जारी है और यह बातचीत खुद ईरान की पहल पर हो रही है. उन्होंने चेतावनी दी कि परमाणु समझौता करने का यह ईरान के लिए आखिरी मौका हो सकता है. ट्रंप ने दावा किया कि सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर भी इस समझौते के पक्ष में हैं. हालांकि, ईरान लगातार कहता रहा है कि अमेरिका के साथ उसकी कोई सीधी बातचीत नहीं चल रही है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “मुझे लगता है कि समझौते की संभावना अभी भी है और मैं ईरान को आखिरी मौका देना चाहता हूं. लेकिन अगर बात नहीं बनी, तो हमारे सैन्य विकल्प तैयार हैं. योजना अभी भी बनी हुई है. उम्मीद है कि ईरान समय रहते समझदारी दिखाएगा और समझौते के लिए आगे आएगा.” होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने पर होगी चर्चा ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने सैन्य कार्रवाई से बचने के लिए अमेरिका से समझौते की पहल की है. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच बातचीत तेजी से आगे बढ़ सकती है. ट्रंप के मुताबिक, पहले होर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह खोलने पर चर्चा होगी. इसके बाद अगले चरण में ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बातचीत की जाएगी. ये भी पढ़ें: मिडटर्म चुनाव से ट्रंप की बढ़ी चिंता ! अब 2028 की सत्ता की बिसात बिछाने में जुटे ट्रंप ने कहा, “ईरान के अनुरोध पर अभी बातचीत चल रही है. लेकिन अगर इस बार समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के लिए अच्छा समझौता करने का यह आखिरी मौका होगा.” ट्रंप ने यह नहीं बताया कि ईरान के साथ बातचीत कहां हो रही है और इसमें कौन-कौन अधिकारी शामिल हैं. इससे अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत को लेकर भ्रम और बढ़ गया है. इससे पहले ट्रंप ने आरोप लगाया था कि ईरान सार्वजनिक रूप से बातचीत से इनकार करता है, लेकिन पर्दे के पीछे अमेरिका से मुलाकात की कोशिश कर रहा है. The post डोनाल्ड ट्रंप की ईरान को दो टूक चेतावनी: समझौता करो, वरना अंजाम भुगतने को तैयार रहो appeared first on Naya Vichar.

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डीजल एक्सपोर्ट पर ₹24/L हुआ Windfall Tax, पेट्रोल-ATF पर भी सरकार ने बढ़ाई ड्यूटी

केंद्र प्रशासन ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के एक्सपोर्ट पर लगने वाले विंडफॉल टैक्स (Windfall Tax) में बढ़ोतरी कर दी है. प्रशासन ने यह फैसला ऐसे समय लिया है जब इंटरनेशनल मार्केट में फ्यूल के एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई बेहतर बनी हुई है. हालांकि राहत की बात यह है कि घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी फिलहाल आम उपभोक्ताओं को पेट्रोल-डीजल के दाम पर इसका सीधा असर नहीं दिखेगा.  कितना बढ़ा टैक्स? प्रशासन की ओर से जारी अधिसूचना (notification) के मुताबिक तीनों प्रमुख पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर एक्सपोर्ट ड्यूटी बढ़ाया गया है. फ्यूल  पहले एक्सपोर्ट ड्यूटी नई एक्सपोर्ट ड्यूटी पेट्रोल ₹2.5 प्रति लीटर ₹3.5 प्रति लीटर डीजल ₹15.5 प्रति लीटर ₹24 प्रति लीटर ATF ₹14.5 प्रति लीटर ₹22 प्रति लीटर ये नई दरें केंद्र प्रशासन की अधिसूचना में तय तारीख से लागू होंगी.  प्रशासन ने यह फैसला क्यों लिया? प्रशासन समय-समय पर वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों और रिफाइनिंग से होने वाले मुनाफे की समीक्षा करती है.  अगर इंटरनेशनल मार्केट में फ्यूल एक्सपोर्ट करने वाली कंपनियों को ज्यादा कमाई होने की संभावना रहती है, तो प्रशासन विंडफॉल टैक्स बढ़ाकर उस अतिरिक्त मुनाफे का एक हिस्सा प्रशासनी खजाने में लाने की कोशिश करती है. यानी जब विदेशी बाजार में हालात कंपनियों के लिए ज्यादा फायदेमंद होते हैं, तब प्रशासन इस तरह का टैक्स बढ़ाने का फैसला ले सकती है.  क्या पेट्रोल-डीजल की कीमतें बढ़ेंगी? फिलहाल ऐसा नहीं माना जा रहा है. प्रशासन ने साफ किया है कि यह बदलाव केवल एक्सपोर्ट पर लागू किया गया है. घरेलू बाजार में बिकने वाले पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी पहले जैसी ही रहेगी. इसलिए इस फैसले का आम ग्राहकों द्वारा पेट्रोल पंप पर चुकाई जाने वाली कीमतों पर कोई सीधा असर नहीं पड़ने की उम्मीद है.  Windfall Tax क्या होता है? विंडफॉल टैक्स ऐसा टैक्स है जिसे प्रशासन तब लगाती या संशोधित करती है, जब किसी सेक्टर या कंपनियों को बाजार की अनुकूल परिस्थितियों की वजह से सामान्य से ज्यादा मुनाफा होने लगता है. प्रशासन वैश्विक कच्चे तेल की कीमत, पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स के अंतरराष्ट्रीय दाम और रिफाइनिंग मार्जिन जैसे पहलुओं की नियमित समीक्षा करती है. इन्हीं के आधार पर विंडफॉल टैक्स में समय-समय पर बदलाव किया जाता है. इस बार टैक्स बढ़ाने का संकेत भी यही है कि प्रशासन को एक्सपोर्ट से होने वाली कमाई मजबूत रहने की उम्मीद दिख रही है.  The post डीजल एक्सपोर्ट पर ₹24/L हुआ Windfall Tax, पेट्रोल-ATF पर भी प्रशासन ने बढ़ाई ड्यूटी appeared first on Naya Vichar.

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4 अगस्त की टॉप 20 खबरें : बांकीपुर से प्रशांत किशोर जीते, दतिया में कांग्रेस का परचम, बाबूलाल मरांडी का आरोप- JPSC और JSSC में बेची गई नौकरियां

1-Prashant Kishor Won Bankipur Seat: 19 हजार 324 वोटों से जीते प्रशांत किशोर, नितिन नवीन के गढ़ में जाकर BJP को हराया Prashant Kishor Won Bankipur Seat: बांकीपुर की सीट पर आखिरकार जन सुराज के प्रशांत किशोर ने बाजी मार ली है. बांकीपुर की जनता ने प्रशांत किशोर को जिता दिया है. इस जीत के बाद प्रशांत किशोर ने सभी वोटर्स को धन्यवाद कहा.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 2-बांकीपुर में प्रशांत किशोर की जीत के क्या हैं मायने? जेपी से लेकर नीतीश तक बदलाव की नेतृत्व से जुड़ रही नई कड़ी Bankipur By Election Result: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में प्रशांत किशोर की जीत बिहार की नेतृत्व में नई बहस छेड़ रही है. लंबे समय से भाजपा के गढ़ मानी जाने वाली सीट पर यह जीत शहरी मतदाताओं की बदलती पसंद का संकेत दे रही है.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 3-बांकीपुर जीत पर जनसुराज अध्यक्ष उदय सिंह का बयान, बोले- जनता ने अहंकारी व्यवस्था को दिया जवाब Prashant Kishor Won Bankipur Seat: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर की शानदार जीत के बाद पार्टी अध्यक्ष उदय सिंह ने जनता और कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त किया है. उन्होंने इस जीत को अहंकारी व्यवस्था को करारा जवाब बताया है.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 4-बांकीपुर जीत के बाद प्रशांत किशोर ने लिया निर्वाचन प्रमाण पत्र, बोले- यह जनता के विश्वास और बदलाव की जीत Prashant Kishor Won Bankipur Seat: बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में जीत के बाद जनसुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर निर्वाचन प्रमाण पत्र लेने पहुंचे. उनकी जीत पर समर्थकों में खासा उत्साह है और इसे बिहार की नेतृत्व में एक नए विकल्प के उदय के रूप में देखा जा रहा है.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 5-भाजपा अध्यक्ष नितिन नबीन ने स्वीकारा जनादेश, बांकीपुर-दतिया की हार पर बोले- करेंगे गंभीर आत्ममंथन Nitin Nabin: बांकीपुर और दतिया विधानसभा उपचुनावों में अपेक्षित सफलता न मिलने पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन ने पहली प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी कर जनादेश स्वीकार करते हुए आत्ममंथन की बात कही है. वहीं, गुजरात की जीत का श्रेय कार्यकर्ताओं को दिया.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 6-दतिया उपचुनाव में कांग्रेस की जीत, CM मोहन यादव ने स्वीकारा जनादेश, बोले- और मजबूती से करेंगे वापसी मध्य प्रदेश की दतिया विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में कांग्रेस ने जीत दर्ज कर बीजेपी को बड़ा झटका दिया है. कांग्रेस उम्मीदवार घनश्याम सिंह ने बीजेपी के अशुतोष तिवारी को 6,016 वोटों से हराया. इस जीत को कांग्रेस ने बदलाव का संकेत बताया है.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 7-JPSC और JSSC में खुलेआम बेची गई नौकरियां, पूर्व सीएम बाबूलाल मरांडी का तीखा हमला नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (जेएसएससी) की भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए हेमंत प्रशासन पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि दोनों आयोगों के माध्यम से खुलेआम नौकरियां बेची गईं और राज्य के युवाओं का भविष्य दांव पर लगा दिया गया.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 8-JPSC-JSSC धांधली के खिलाफ 7 अगस्त को आईसा का विधानसभा मार्च, नेहा बोरा भी होंगी शामिल ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (आईसा) ने 14वीं जेपीएससी और जेएसएससी भर्ती परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और धांधली के आरोपों को लेकर आंदोलन तेज करने का ऐलान किया है. संगठन 7 अगस्त को झारखंड विधानसभा मार्च करेगा, जिसमें छात्र-युवा बड़ी संख्या में शामिल होंगे.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 9-संसद में हंगामे के बीच दो अहम विधेयक पास; किरेन रिजिजू बोले- कांग्रेस को राह दिखाने वाला कोई नहीं संसद के मानसून सत्र में सोमवार को भारी हंगामे के बीच दो महत्वपूर्ण विधेयक पारित हो गए. संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि कांग्रेस के सांसद पूरी तरह भटक गए हैं.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 10-कर्नाटक पुलिस भर्ती विवाद: इस्तीफे की मांग पर प्रियांक खड़गे का तंज- पहले 25 दिन भूख हड़ताल, फिर लाठीचार्ज कर्नाटक राज्य पुलिस भर्ती परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर विवाद तेज हो गया है. इस बीच राज्य के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने कहा कि मैं इस्तीफा देने को तैयार हूं, लेकिन पहले उम्मीदवार भूख हड़ताल करें और उन पर लाठीचार्ज हो.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 11-सुप्रीम कोर्ट ने कहा- राज्य प्रशासनें चाहें तो छात्र आंदोलन से जुड़े केस बंद कर सकती हैं प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची एवं जस्टिस वी मोहना की पीठ ने कहा है कि छात्र आंदोलन से जुड़े केस राज्य प्रशासनें बंद करती हैं.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 12-जेन Z और जेन Alpha से 6 अगस्त को बातचीत करेंगे RSS प्रमुख मोहन भागवत RSS प्रमुख डॉ मोहन भागवत 6 अगस्त को मुंबई में जेन जेड और जेन अल्फा के सदस्यों से बातचीत करेंगे. इस कार्यक्रम में दुनिया को एकजुट करने में युवाओं की भूमिका पर युवाओं से चर्चा होगी.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 13-बंगाल में तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान मॉड्यूल तैयार कर रहा था हमीम मंडल, निशाने पर थे 6 मंत्री पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) को हमीम मंडल नामक संदिग्ध आतंकी से पूछताछ में कई सुराग मिले हैं. वह पाकिस्तान में बैठे आतंकवादियों के निर्देश पर राज्य के 6 मंत्रियों को हनीट्रैप में फंसाने और उन पर हमले की साजिश रच रहा था.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 14-हनीट्रैप के लिए खूबसूरत युवतियों का गैंग तैयार कर रहा था हमीम मंडल पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स को पड़ोसी देश की खुफिया एजेंसियों द्वारा खूबसूरत युवतियों का एक हनीट्रैप गैंग तैयार किये जाने का पता चला है. इसका मुख्य उद्देश्य राज्य के प्रमुख मंत्रियों को फंसाना था. झारखंड की एक मॉडल भी इस गैंग का हिस्सा है, ऐसी सूचना मिली है. हालांकि, उसके नाम का खुलासा नहीं हुआ है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 15- लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने कोलकाता के बिजनेसमैन से मांगी 5 करोड़ की रंगदारी, जान से मारने की धमकी दी पश्चिम बंगाल में संदिग्ध जैश आतंकी की गिरफ्तारी के बाद अब लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने दस्तक दी है. कोलकाता के एक कारोबारी से 5 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी गयी है. पैसे नहीं देने पर परिवार समेत जान से मारने की धमकी दी है. कोलकाता पुलिस और एसटीएफ ने मामले की जांच शुरू कर दी है.यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 16-UP विधान परिषद में ‘चंदा चोर, गद्दी छोड़’ के गूंजे नारे,

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