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17 सितंबर की टॉप 20 खबरें: प्रभात खबर के पत्रकार से मारपीट मामले में निशांत कुमार का एक्शन, JPSC-JSSC CGL पेपर लीक में 4 गिरफ्तार

1. नया विचार के पत्रकार से मारपीट मामले में निशांत कुमार का एक्शन, सहरसा जिला प्रशासन से तलब की रिपोर्ट, बोले- जल्द होगी कार्रवाई Saharsa Journalist Assault Case: सहरसा सदर अस्पताल में पत्रकार से मारपीट का मामला गरमा गया है. पत्रकार संगठनों ने स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार से मुलाकात कर दोषी डॉक्टर पर जल्द कार्रवाई की मांग की. मंत्री ने मामले में अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट तलब की है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 2. बाढ़ में डूबा बिहार, राहत पर गरमाई सियासत; पप्पू यादव का तेजस्वी पर हमला, PK ने BJP को घेरा बिहार में बाढ़ से 50 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं. राहत और बचाव के बीच अब सियासत भी तेज हो गई है. पूर्णिया के निर्दलीय सांसद पप्पू यादव ने तेजस्वी यादव पर बाढ़ प्रभावितों के बीच सक्रियता को लेकर सवाल उठाए हैं. वहीं, जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने बीजेपी के पार्टी फंड से बाढ़ पीड़ितों के लिए ₹500 करोड़ देने की चुनौती दी है. आरजेडी ने भी बीजेपी पर निशाना साधते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट और वीडियो के जरिए प्रशासन को घेरा है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 3. JPSC और JSSC-CGL पेपर लीक जांच में CID ने चार को किया गिरफ्तार, कोचिंग संचालक से जुड़े तार अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने JPSC और JSSC-CGL भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में बड़ी कार्रवाई करते हुए चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है. गिरफ्तारियां परीक्षाओं में अनुचित लाभ पहुंचाने के आरोपों से जुड़ी हैं. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 4. JPSC का काला इतिहास: CBI जांच से लेकर अध्यक्षों के जेल जाने तक, जानिए कैसे घोटालों की बलि चढ़ा युवाओं का भविष्य झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) अपने गठन के बाद से ही घोटालों और विवादों में घिरा रहा है. परीक्षाओं में देरी, OMR शीट में धांधली, और CBI जांच जैसे मुद्दों ने युवाओं के भविष्य पर गहरा असर डाला है. इस रिपोर्ट में जानें JPSC के पूरे विवादित इतिहास की परतें. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 5. नीरज सिंह केस से निखार सबलोक मर्डर तक, शूटर शिबू की पूरी कहानी; धनबाद में पुलिस से मुठभेड़ में घायल धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर हत्याकांड में आरोपी रहे यूपी के शूटर शिबू को निरसा में पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान घायल कर दिया. पुलिस का दावा है कि शिबू ने बचने के लिए पुलिस पर फायरिंग की थी. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 6. नदिया में TMC सांसद महुआ मोइत्रा पर फिर फेंके गये अंडे, पुलिस की मौजूदगी पर उठाये सवाल Mahua Moitra Egg Attack Nadia: तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा पर नदिया जिले के तेहट्टा में दौरे के दौरान कथित तौर पर अंडे फेंके गये. घटना के बाद महुआ ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाये. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 7. PM Modi Birthday: बंगाल में महीने भर का ‘सेवा संकल्प अभियान’, शुभेंदु अधिकारी की अपील- घरों, संस्थानों और मंदिरों में दीये जलायें PM Modi Birthday: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन और जनसेवा के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर पश्चिम बंगाल में 17 सितंबर से महीने भर का ‘सेवा संकल्प अभियान’ आयोजित किया जायेगा. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने राज्य की जनता से घरों और मंदिरों में दीये जलाने का आह्वान किया है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 8. UPI MDR पर राहुल गांधी का पीएम मोदी पर हमला, कहा- हिम्मत दिखाइए और UPI टैक्स वापस लीजिए Rahul Gandhi On UPI MDR: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने 2,000 रुपये से अधिक के चुनिंदा व्यापारी UPI लेनदेन पर MDR लागू किए जाने को लेकर केंद्र प्रशासन पर निशाना साधा है. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 9. UPI MDR: ज्योतिरादित्य सिंधिया का राहुल गांधी को पलटवार, कहा- हर जगह दिखता है अमेरिका का ‘भूत’ UPI MDR: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने UPI के नए MDR नियमों को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि ग्राहकों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा और नया MDR केवल चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा. वित्त मंत्रालय के मुताबिक P2P UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 10. मक्का के पास ड्रोन को लेकर बढ़ा तनाव, हिंदुस्तान ने जताई चिंता, सऊदी और हूतियों के दावे अलग सऊदी अरब के पवित्र शहर मक्का के पास एक कथित ड्रोन हमले को लेकर हिंदुस्तान ने चिंता व्यक्त की है. यह घटना सऊदी-हूती तनाव के बीच हुई है. जानें इस घटनाक्रम का पूरा ब्यौरा. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 11. UPI MDR: ज्योतिरादित्य सिंधिया का राहुल गांधी को पलटवार, कहा- हर जगह दिखता है अमेरिका का ‘भूत’ UPI MDR: केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने UPI के नए MDR नियमों को लेकर राहुल गांधी के आरोपों पर पलटवार किया है. उन्होंने कहा कि ग्राहकों पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा और नया MDR केवल चुनिंदा व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा. वित्त मंत्रालय के मुताबिक P2P UPI भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेंगे. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 12. प्रशासन ने EPFO की वेतन सीमा को 15 हजार से बढ़ाकर 25 हजार रुपए किया, जानिए ; आपके वेतन और पेंशन पर क्या होगा असर केंद्रीय कैबिनेट ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत वेतन सीमा को 15,000 रुपये से बढ़ाकर 25,000 रुपये प्रति माह कर दिया है. यह फैसला लाखों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है. इसका असर उनके वेतन और पेंशन दोनों पर दिखेगा. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 13. India vs West Indies: वेस्टइंडीज सीरीज के लिए हिंदुस्तानीय ODI-T20 टीम का ऐलान India vs West Indies: वेस्टइंडीज के खिलाफ आगामी घरेलू सीरीज के लिए हिंदुस्तानीय ODI और T20 टीमों का ऐलान हो गया है. जानें किन खिलाड़ियों को मिली जगह. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 14. AI Extinction Risk: क्या अगले 10 साल में इंसानों के लिए खतरा बन जाएगा AI? एक्सपर्ट्स के दावों के पीछे की पूरी कहानी समझें 2036 तक AI से मानव अस्तित्व पर खतरे को लेकर एक्सपर्ट्स की चेतावनियों का सच समझें. जानें क्या कहते हैं शोधकर्ता, RAND रिपोर्ट और सुरक्षा सर्वे. यहां पढ़ें पूरी रिपोर्ट 15. फुल चार्ज में 460km रेंज का दावा, 11 लोगों के बैठने की जगह और जबरदस्त सेफ्टी भी… बेहद खास है Kia की ये इलेक्ट्रिक वैन किआ ने अपनी नई इलेक्ट्रिक वैन PV7 से पर्दा

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Hero Cycles की पूरी कहानी: साइकिल के पुर्जे से शुरू हुआ किस्सा, फिर कंपनी ने बना दिया Guinness वर्ल्ड रिकॉर्ड

आज Hero Cycles का नाम सुनते ही साइकिल याद आती है. लेकिन 70 साल पहले ऐसा नहीं था. 1956 में लुधियाना से शुरू हुई इस कंपनी का शुरुआती काम साइकिल के पुर्जों की मैन्युफैक्चरिंग और असेंबली था. फिर कंपनी ने उत्पादन बढ़ाया, साइकिलों का बाजार बढ़ा, साथ ही Hero का नाम भी बढ़ता गया. 1986 में एक दिन में 18,500 साइकिल बनाने का रिकॉर्ड बना. 2012 तक 13 करोड़ साइकिलें बन चुकी थीं. फिर कंपनी ने प्रीमियम साइकिल, विदेशी बाजार और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की तरफ कदम बढ़ाया. तो आखिर साइकिल के पुर्जे बनाने वाली कंपनी इतनी बड़ी कैसे बनी? और आज जब साइकिल का मतलब सिर्फ पैडल वाली सवारी नहीं रह गया है, तब Hero Cycles खुद को कैसे बदल रही है? आइए, पूरी कहानी समझते हैं. फिर आया 1986 का वो दिन इसका जवाब है- बड़े पैमाने पर उत्पादन. 1986 में Hero Cycles ने एक ही दिन में 18,500 साइकिलों का उत्पादन किया. यह उपलब्धि इतनी बड़ी थी कि कंपनी का नाम Guinness Book of World Records में दर्ज हुआ. यह आंकड़ा Hero की कहानी में इसलिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पता चलता है कि कंपनी उस समय तक बड़े स्तर पर साइकिल बनाने की क्षमता हासिल कर चुकी थी. यानी Hero का मुकाबला सिर्फ अच्छी साइकिल बनाने का नहीं था. बड़ी संख्या में साइकिल बनाने का भी था. हीरो साइकिल्स का सफरनामा 2014 में बिहार पहुंचा Hero Hero ने 2014 में बिहार के बिहटा में अपना प्लांट शुरू किया. यह कंपनी के मैन्युफैक्चरिंग एक्सपेंशन का अहम हिस्सा था. आज Hero की ऑफिशियल इंफॉर्मेशन में लुधियाना के अलावा बिहार और ग्रेटर नोएडा में भी मैन्युफैक्चरिंग लोकेशन का उल्लेख है. यानी कंपनी का प्रोडक्शन बेस समय के साथ एक जगह से आगे बढ़ चुका था. हीरो साइकिल्स का सफरनामा 2015 में Firefox की एंट्री 2015 में Hero Cycles ने Firefox Bikes का अधिग्रहण किया. Hero की ऑफिशियल टाइमलाइन इसे प्रीमियम साइकलिंग सेगमेंट में कंपनी की एंट्री से जोड़ती है. यानी अब Hero के सामने सिर्फ एक सवाल नहीं था- “ज्यादा साइकिलें कैसे बनाएं?” एक दूसरा सवाल भी था- “अलग तरह की साइकिलें चाहने वाले ग्राहकों तक कैसे पहुंचें?” Firefox इसी बदलाव का हिस्सा बना. 2017 में बदली साइकिल बेचने की दुकान 2017 में Hero ने Hero Sprint Store शुरू किया. कंपनी की टाइमलाइन इसे नए साइकिलिंग रिटेल एक्सपीरियंस के तौर पर दर्ज करती है. यह छोटा बदलाव नहीं था. क्योंकि साइकिल अब सिर्फ एक उपयोगी सामान नहीं रह रही थी. उसके आसपास accessories, cycling और lifestyle का पूरा ecosystem बन रहा था. 2020 तक 15 करोड़ से ज्यादा साइकिलें Hero के production scale को समझने के लिए 2020 का आंकड़ा देखिए. कंपनी के मुताबिक, 2020 तक अकेले लुधियाना प्लांट से 150 million यानी 15 करोड़ से ज्यादा साइकिलों का उत्पादन हो चुका था. ध्यान रहे. यह पूरे Hero network का आंकड़ा नहीं है. यह सिर्फ Ludhiana plant का आंकड़ा है. यही वजह है कि यह नंबर Hero की मैन्युफैक्चरिंग journey में खास है. 2022 में Yamaha के साथ साझेदारी 2022 में Hero Cycles ने Yamaha Motor Co. Ltd. के साथ जॉइंट वेंचर किया. इसी साल Hero Sprint GEMTEC Series भी लॉन्च की गई. यह दौर Hero के लिए सिर्फ मैन्युफैक्चरिंग का नहीं था. अब technology और product development भी कहानी का हिस्सा बन चुके थे. 2024 में Hero ने फिर बदली अपनी कहानी 2024 में कंपनी ने ‘Cycle Hero Hai’ campaign लॉन्च किया. यहां Hero की सात दशक की यात्रा का एक दिलचस्प बदलाव दिखाई देता है. पहले साइकिल जरूरत थी. फिर fitness और sports का हिस्सा बनी. और अब cycling को lifestyle और community के नजरिए से भी देखा जा रहा है. तो 70 साल में Hero Cycles ने क्या बदला? Hero की कहानी को अगर एक लाइन में समझना हो, तो यह सिर्फ साइकिल बनाने की कहानी नहीं है. यह बदलती cycling जरूरतों के साथ खुद को बदलने की कहानी है. 1956- साइकिल के पुर्जों से शुरुआत. 1986- एक दिन में 18,500 साइकिलों का Guinness Record. 2012- 13 करोड़ साइकिलों का प्रोडक्शन माइलस्टोन. 2014- बिहार के बिहटा में मैन्युफैक्चरिंग प्लांट. 2015- Firefox के अधिग्रहण के जरिए प्रीमियम साइकलिंग सेगमेंट में एंट्री. 2016- UK और श्रीलंका में अधिग्रहण के जरिए इंटरनेशनल एक्सपेंशन. 2018- Hero Lectro के साथ इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में एंट्री. 2020- Ludhiana plant से 15 करोड़ से ज्यादा साइकिलों का उत्पादन. 2021- Made-in-India HNF e-bikes की पहली खेप यूरोप पहुंची. 2022- यामाहा जॉइंट वेंचर और GEMTEC Series. 2023- D2C-enabled website. 2024- ‘Cycle Hero Hai’ कैंपेन. 2025- 5,815 साइकलिंग वीडियोज के साथ Guinness World Record. आज Hero Cycles कहां खड़ा है? आज Hero की कहानी सिर्फ पारंपरिक साइकिलों तक सीमित नहीं है. कंपनी की official information में अलग-अलग तरह की cycling और electric mobility से जुड़े products मौजूद हैं. इसके मैन्युफैक्चरिंग locations भी लुधियाना से आगे बढ़ चुके हैं. Official information में लुधियाना, बिहार और ग्रेटर नोएडा के मैन्युफैक्चरिंग locations का उल्लेख मिलता है. यानी 1956 में शुरू हुई कहानी आज भी बदल रही है. The post Hero Cycles की पूरी कहानी: साइकिल के पुर्जे से शुरू हुआ किस्सा, फिर कंपनी ने बना दिया Guinness वर्ल्ड रिकॉर्ड appeared first on Naya Vichar.

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क्या आप भी लकड़ी का चम्मच-बेलन बस पानी से धोकर रख देते हैं? जानें सफाई का सही तरीका

How to Clean Wooden Utensils: काम की बात सीरीज में आज बात किचन में रोज इस्तेमाल होने वाली लकड़ी की चीजों की करेंगे. लकड़ी के चम्मच और बेलन का इस्तेमाल तो लगभग हर घर में होता है, लेकिन इनकी सफाई पर अक्सर उतना ध्यान नहीं दिया जाता. आखिर इन्हें कितने दिन में साफ करना चाहिए और सही तरीका (How to Clean Wooden Utensils) क्या है. तो आज की काम की बात में जानिए लकड़ी के चम्मच और बेलन की सफाई से जुड़ी जरूरी बातें, ताकि किचन की हाइजीन भी बनी रहे और ये लंबे समय तक इस्तेमाल किए जा सकें. हर इस्तेमाल के बाद करें ये काम लकड़ी के चम्मच और बेलन को हर इस्तेमाल के बाद साफ करना चाहिए. इन्हें लंबे समय तक सिंक में पानी के अंदर छोड़ने के बजाय इस्तेमाल के बाद धो लें. हल्के साबुन और पानी से अच्छी तरह साफ करें, खासकर अगर इन पर तेल, आटा या खाने के अवशेष लगे हों. FDA के मुताबिक, खाना बनाने में इस्तेमाल होने वाले बर्तन को गर्म साबुन वाले पानी से धोना चाहिए. धोने के बाद इन्हें अच्छी तरह सुखाना भी जरूरी है. साफ कपड़े से पानी पोंछकर इन्हें ऐसी जगह रखें जहां हवा लग सके. जरूरत के हिसाब से करें सफाई (How to Clean Wooden Utensils) लकड़ी के चम्मच और बेलन को सप्ताह में एक बार ही साफ करना जरूरी है, ऐसा कोई तय नियम नहीं है. अगर इन पर तेल, आटा या खाने की परत जम गई है, तो उसी समय इन्हें अच्छी तरह साफ करें. नरम स्पंज और साबुन-पानी से लकड़ी की सतह को धीरे-धीरे साफ किया जा सकता है. बहुत खुरदुरे स्क्रबर से रगड़ने से लकड़ी की सतह पर खरोंच या घिसाव हो सकता है. लकड़ी के सामान को पानी में न भिगोएं  लकड़ी के चम्मच और बेलन को जरूरत से ज्यादा देर तक पानी में डुबोकर रखना अच्छा तरीका (How to Clean Wooden Utensils) नहीं है. सफाई के बाद इन्हें पानी से निकालकर अच्छी तरह सुखा दें. बेलन को भी इसी तरह साफ करके सूखी और हवादार जगह पर रखना बेहतर है. FDA Food Code में बेलन को food-contact wooden utensil के रूप में स्वीकार किया गया है. PC: AI Generated यह भी पढ़ें: गैस चूल्हे की नीली आंच पड़ गई पीली? नजरअंदाज करने की गलती न करें, जानें वजह बदबू आने पर क्या करें?  अगर लकड़ी के चम्मच पर प्याज, लहसुन या मसालों की गंध रह गई है, तो उसे दोबारा साबुन-पानी से अच्छी तरह साफ करें और पूरी तरह सूखने दें. अगर लकड़ी की सतह पर खाने के अवशेष दिखाई दे रहे हैं, तो उन्हें भी साफ करना जरूरी है. सिर्फ पानी से जल्दी-जल्दी धोकर सामान रख देने से सफाई पूरी नहीं मानी जा सकती. कब बदल देना चाहिए लकड़ी का चम्मच या बेलन? सिर्फ सफाई करना ही काफी नहीं है. अगर लकड़ी का सामान बहुत ज्यादा घिस गया है या उसमें ऐसी गहरी दरारें और खांचे बन गए हैं जिन्हें अच्छी तरह साफ करना मुश्किल हो, तो उसे बदल देना बेहतर है. FDA भी अत्यधिक घिसे हुए लकड़ी का कटिंग बोर्ड को बदलने की सलाह देता है, क्योंकि गहरी दरारों और मुश्किल से साफ होने वाली जगहों में बैक्टीरिया मौजूद रह सकते हैं. यह भी पढ़ें: फ्रिज को समझ लिया है हर चीज का ठिकाना? इन 6 चीजों को अंदर रखना पड़ सकता है भारी The post क्या आप भी लकड़ी का चम्मच-बेलन बस पानी से धोकर रख देते हैं? जानें सफाई का सही तरीका appeared first on Naya Vichar.

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Computer Science का क्रेज डाउन, IIIT रांची में इस BTech ब्रांच को मिला 60 लाख का पैकेज

IIIT Ranchi Placement 2026: आईआईआईटी रांची के 2022-26 बैच के प्लेसमेंट आंकड़ों में CSE के साथ ECE और Data Science & AI ने भी शानदार प्रदर्शन किया है. खास बात यह है कि ECE का औसत पैकेज CSE से थोड़ा ज्यादा रहा, जबकि इसी ब्रांच के एक छात्र को 60 लाख रुपये का हाईएस्ट पैकेज मिला. IIIT Ranchi Placement 2026: इस ब्रांच का बोलचाल ECE इस साल सबसे ज्यादा चर्चा में इसलिए भी है क्योंकि इस ब्रांच के एक छात्र को 60 लाख रुपये सालाना का पैकेज मिला. ECE का औसत पैकेज 15.71 लाख और मीडियन पैकेज 11 लाख रुपये रहा. वहीं CSE का हाईएस्ट पैकेज 47.78 लाख रुपये रहा. हाईएस्ट पैकेज के मामले में BTech ECE ने CSE से करीब 12.22 लाख रुपये ज्यादा का आंकड़ा दर्ज किया. औसत पैकेज में DS & AI सबसे आगे अगर औसत पैकेज की बात करें तो इस आंकड़े में CSE DS & AI सबसे ऊपर है. इस ब्रांच का औसत पैकेज 22.44 लाख रुपये रहा. मीडियन पैकेज 20 लाख रुपये और हाईएस्ट पैकेज 56 लाख रुपये दर्ज किया गया. इस ब्रांच के लिए एक और खास आंकड़ा सामने आया है. उपलब्ध डेटा के अनुसार यहां प्लेसमेंट प्रतिशत 100% रहा. कुल 25 स्टूडेंट में सभी 25 कैंपस प्लेसमेंट में सेलेक्ट हो गए. BTech ब्रांच औसत पैकेज मीडियन हाईएस्ट लोएस्ट प्लेसमेंट CSE ₹15.61 लाख ₹12 लाख ₹47.78 लाख ₹3.4 लाख 89.79% CSE-DS & AI ₹22.44 लाख ₹20 लाख ₹56 लाख ₹8 लाख 100% ECE ₹15.71 लाख ₹11 लाख ₹60 लाख ₹4.8 लाख 74.55% ECE-ES & IoT ₹10.88 लाख ₹10 लाख ₹18 लाख ₹6 लाख 88.23% BTech CSE में 89.79% छात्रों का प्लेसमेंट BTech CSE की बात करें तो कुल 115 छात्रों में से 98 जॉब के लिए योग्य थे और 89 छात्रों को प्लेसमेंट मिला. इस तरह प्लेसमेंट प्रतिशत 89.79% रहा. CSE में औसत पैकेज 15.61 लाख रुपये, मीडियन 12 लाख रुपये और हाईएस्ट पैकेज 47.78 लाख रुपये रहा. ये भी पढ़ें: Computer Science नहीं, इस ब्रांच के स्टूडेंट्स को मिला 14.67 लाख का प्लेमसेंट, इंटरनेशनल कंपनी में जॉब सबसे कम पैकेज 3.4 लाख रुपये दर्ज किया गया. यानी CSE का औसत पैकेज ECE से मामूली रूप से कम है, लेकिन प्लेसमेंट प्रतिशत ECE से करीब 15 प्रतिशत अंक ज्यादा है. 195 में से 170 को मिली नौकरी पूरे 2022-26 बैच के आंकड़ों को देखें तो चारों ब्रांच में कुल 248 students थे, जिनमें 195 सेलेक्ट हुए. इनमें 170 छात्रों का प्लेसमेंट हुआ. कंपनियों की ओर से कुल 243 ऑफर्स दर्ज किए गए. ये भी पढ़ें: IIIT रांची में 60 LPA का हाईएस्ट पैकेज, BTech CSE ब्रांच का दिखा जलवा The post Computer Science का क्रेज डाउन, IIIT रांची में इस BTech ब्रांच को मिला 60 लाख का पैकेज appeared first on Naya Vichar.

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PM Modi @ 76: महिलाओं के लिए मोदी सरकार की योजनाओं और चुनौतियों की पूरी कहानी

हिंदुस्तान के विकास की कहानी में स्त्रीओं की भूमिका को लेकर नीति का फोकस पिछले कुछ वर्षों में बदला है. पहले सवाल मुख्य रूप से यह था कि स्त्रीओं तक प्रशासनी योजनाओं का लाभ कैसे पहुंचे. अब इसके साथ यह सवाल भी जुड़ गया है कि स्त्रीएं कमाने वाली, उद्यमी, किसान, तकनीकी कामगार और नेतृत्वक निर्णयकर्ता कैसे बनें. इसी सोच को केंद्र में रखते हुए प्रशासन ‘Women-Led Development’ को Viksit Bharat @2047 के बड़े लक्ष्यों से जोड़ती है. यानी 2047 तक विकसित हिंदुस्तान की कल्पना में स्त्रीओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी को एक अहम घटक माना जा रहा है. Cchavi Vasisht Drone Didi से Digital Didi तक स्त्री उद्यमिता को पारंपरिक कामों से आगे ले जाने की कोशिश भी दिखाई देती है. NaMo Drone Didi जैसी पहल में स्त्री SHGs को कृषि में ड्रोन सेवाओं से जोड़ने का प्रयास किया गया. प्रशासन ने 15,000 चयनित स्त्री SHGs को ड्रोन उपलब्ध कराने का लक्ष्य रखा था. इसका प्रतीकात्मक महत्व भी है—ग्रामीण स्त्री को केवल स्वयं सहायता समूह की सदस्य नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी आधारित सेवा देने वाली उद्यमी के रूप में देखने की कोशिश. Read more: BRICS 2026: विरोधाभासों का मंच क्यों बना दिल्ली शिखर सम्मेलन? जानिए दोस्त कौन, प्रतिद्वंद्वी कौन? बैंक खाता, ऋण और आर्थिक पहचान स्त्री सशक्तीकरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा वित्तीय समावेशन है. बैंक खाता, डिजिटल भुगतान, SHG बैंक क्रेडिट और छोटे कारोबार के लिए ऋण स्त्रीओं को आर्थिक निर्णयों में अधिक स्वतंत्रता दे सकते हैं. DAY-NRLM से जुड़े SHGs ने अब तक ₹12 लाख करोड़ से अधिक बैंक क्रेडिट तक पहुंच बनाई है. प्रशासनी आंकड़ों के अनुसार, 50 हजार से अधिक प्रशिक्षित Bank Sakhis ग्रामीण स्त्रीओं को बैंकिंग सेवाओं और ऋण तक पहुंच में मदद कर रही हैं. इसका असर केवल एक स्त्री की आय तक सीमित नहीं रहता. जब स्त्री की अपनी आर्थिक पहचान मजबूत होती है तो परिवार के खर्च, बच्चों की शिक्षा और स्थानीय वित्तीय स्थिति में भी उसका प्रभाव बढ़ सकता है. सुरक्षा और गरिमा भी विकास का हिस्सा स्त्री-नेतृत्व वाले विकास का अर्थ केवल रोजगार नहीं है. सुरक्षा, कानूनी अधिकार और गरिमा भी इसके महत्वपूर्ण हिस्से हैं. Mission Shakti के तहत One Stop Centres, Women Helpline और अन्य सहायता तंत्र चलाए जा रहे हैं. इसी व्यापक नीति ढांचे में स्त्रीओं की सुरक्षा और सहायता को जोड़ा गया है. 2019 में मुस्लिम स्त्रीओं के लिए instant triple talaq की प्रथा को कानूनी रूप से अपराध घोषित करने वाला कानून भी लागू हुआ. प्रशासन इसे स्त्रीओं के अधिकार और गरिमा से जुड़ा सुधार बताती है. नेतृत्व में 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व: लेकिन लागू होने की तारीख अभी बाकी स्त्रीओं की आर्थिक भागीदारी के बाद सबसे बड़ा सवाल नेतृत्वक प्रतिनिधित्व का है. 2023 में संसद ने नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित किया. इसके तहत लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में स्त्रीओं के लिए 33% आरक्षण का प्रावधान है. हालांकि यह प्रावधान तत्काल प्रभाव से लागू नहीं हुआ. कानून के अनुसार इसका क्रियान्वयन संबंधित जनगणना के बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जुड़ा है. इसलिए स्त्री नेतृत्वक प्रतिनिधित्व के मामले में अगला बड़ा पड़ाव कानून का वास्तविक क्रियान्वयन होगा. लेकिन असली चुनौती यहीं से शुरू होती है स्त्रीओं की भागीदारी के आंकड़े बढ़ने के बावजूद कुछ बुनियादी समस्याएं अभी बनी हुई हैं. सबसे पहला सवाल रोजगार की गुणवत्ता का है. श्रम बाजार में स्त्रीओं की भागीदारी बढ़ना सकारात्मक संकेत हो सकता है, लेकिन बड़ी संख्या में स्त्रीएं अनौपचारिक, अस्थायी या कम सामाजिक सुरक्षा वाले कामों में रहती हैं. दूसरा सवाल है—कौशल और नौकरी के बीच का अंतर. प्रशिक्षण तभी प्रभावी होगा जब वह बाजार की वास्तविक मांग, बेहतर वेतन और करियर की संभावनाओं से जुड़ा हो. तीसरी और अक्सर नजरअंदाज की जाने वाली चुनौती है unpaid care work. हिंदुस्तान के Time Use Survey 2019 के अनुसार घरेलू सदस्यों के लिए बिना भुगतान वाले घरेलू कामों में स्त्रीओं का समय पुरुषों की तुलना में काफी अधिक था. खाना बनाने और भोजन प्रबंधन जैसे कामों में भी स्त्रीओं का औसत समय पुरुषों से कहीं अधिक दर्ज किया गया. यानी यदि स्त्री के पास नौकरी है, तब भी उसके घर के भीतर काम का बड़ा हिस्सा अक्सर बना रहता है. अगला चरण: योजना से परिणाम तक इसलिए 2047 की स्त्री-नेतृत्व वाली विकास यात्रा का अगला सवाल केवल यह नहीं होगा कि कितनी स्त्रीओं को योजना का लाभ मिला? सवाल यह होगा— कितनी स्त्रीएं स्थायी आय अर्जित कर रही हैं? कितनी स्त्रीएं formal jobs में पहुंच रही हैं? कितनी स्त्री उद्यमी बाजार से जुड़ पा रही हैं? कितनी स्त्रीओं के पास सामाजिक सुरक्षा है? और कितनी स्त्रीएं परिवार से लेकर संसद तक वास्तविक निर्णय लेने की स्थिति में पहुंच रही हैं? यही वह अंतर है जो women-centric welfare और women-led development के बीच है. प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर ‘नारी शक्ति’ और ‘विकसित हिंदुस्तान 2047’ की चर्चा इसलिए केवल योजनाओं की सूची नहीं है. यह हिंदुस्तान की विकास रणनीति के उस बदलाव को समझने का अवसर है जिसमें स्त्री को विकास की लाभार्थी के साथ-साथ आर्थिक और सामाजिक परिवर्तन की भागीदार के रूप में देखा जा रहा है. आने वाले वर्षों में इस दृष्टिकोण की वास्तविक परीक्षा योजनाओं की संख्या से नहीं, बल्कि स्त्रीओं की आय, रोजगार की गुणवत्ता, आर्थिक स्वतंत्रता, सुरक्षा और निर्णय लेने की शक्ति में होने वाले ठोस बदलाव से होगी. Read more: Viral 80’s trend: ‘1980-1989’- वो 10 साल जिन्होंने आज का हिंदुस्तान बनाया The post PM Modi @ 76: स्त्रीओं के लिए मोदी प्रशासन की योजनाओं और चुनौतियों की पूरी कहानी appeared first on Naya Vichar.

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WB Census Phase 1: पश्चिम बंगाल में जनगणना का पहला चरण समय से पहले हुआ पूरा, शुभेंदु अधिकारी ने जतायी खुशी

WB Census Phase 1: पश्चिम बंगाल ने जनगणना के पहले चरण का 100 प्रतिशत क्षेत्रीय कार्य (Fieldwork) निर्धारित समयसीमा से 2 दिन पहले ही पूरा कर लिया. 14 सितंबर की समयसीमा से पहले इस चरण का काम पूरा होने पर राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने खुशी व्यक्त करते हुए इसे एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है. शुभेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर जानकारी साझा करते हुए प्रशासनिक तंत्र की कार्यकुशलता, बारीकी से तैयार की गयी योजना और टीम के लगातार प्रयासों की सराहना की. 3.68 करोड़ मकानों की हुई गिनती मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के अनुसार, राज्य के सभी जिलों, अनुमंडलों, प्रखंडों, नगर निगमों और नगरपालिकाओं में मकानों की सूचीकरण (House-listing) का शत-प्रतिशत काम पूरा कर लिया गया है. राज्य में अनुमानित 3.69 करोड़ मकानों के मुकाबले अब तक 3.68 करोड़ (3,68,30,150) मकानों की गणना दर्ज की जा चुकी है. यह आंकड़ा कुल अनुमानित परिवारों का लगभग 99.7 प्रतिशत है. कठिन परिस्थितियों में गणनाकर्मियों ने किया काम शुभेंदु अधिकारी ने जमीनी स्तर पर तैनात गणनाकर्मियों और पर्यवेक्षकों के योगदान की विशेष प्रशंसा की. उन्होंने कहा कि इन कर्मियों ने प्रतिकूल मौसम और कठिन परिस्थितियों के बावजूद राज्य के पहाड़ी, मैदानी और नदी तटीय इलाकों में घर-घर पहुंचकर आंकड़ों का संकलन किया. ये भी पढ़ें: Video: पश्चिम बंगाल में जनगणना शुरू, शुभेंदु अधिकारी ने ऑनलाइन भरा अपना फॉर्म अधिकारियों और नागरिकों को सीएम ने दिया धन्यवाद उन्होंने इस अभियान के सफल संचालन के लिए जिलाधिकारियों, अनुमंडल अधिकारियों, प्रखंड विकास अधिकारियों (BDO), नगर आयुक्तों और अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का आभार जताया. इसके साथ ही उन्होंने गणना के दौरान पूर्ण सहयोग देने के लिए राज्य के नागरिकों का भी धन्यवाद किया. ये भी पढ़ें: बांग्लादेशी घुसपैठिये कल्याणकारी योजनाओं के हकदार नहीं, हम उन्हें खाना नहीं खिलायेंगे : शुभेंदु अधिकारी The post WB Census Phase 1: पश्चिम बंगाल में जनगणना का पहला चरण समय से पहले हुआ पूरा, शुभेंदु अधिकारी ने जतायी खुशी appeared first on Naya Vichar.

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PM Modi @ 76: Rising Power से Shaping Power तक भारत की विदेश नीति का सफर

जब नरेंद्र मोदी 2014 में हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री बने, तब हिंदुस्तान को दुनिया पहले से ही एक Rising Power यानी उभरती हुई शक्ति के रूप में देख रही थी. वित्तीय स्थिति का विस्तार हो रहा था, अमेरिका के साथ रणनीतिक रिश्ते मजबूत हो चुके थे और शीत युद्ध के दौर की गुटनिरपेक्षता की सीमाओं से हिंदुस्तान धीरे-धीरे आगे बढ़ चुका था. लेकिन मोदी दौर की खासियत यह नहीं थी कि हिंदुस्तान का उदय उनके साथ शुरू हुआ. असली बदलाव हिंदुस्तान की रणनीतिक सोच, महत्वाकांक्षा और आत्मविश्वास में दिखाई देता है. प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन के मौके पर हिंदुस्तान की विदेश नीति के इसी बदलाव को समझने की कोशिश की है इजरायल की India Expert Dr Lauren Dagan Amoss ने. Dr. Lauren Dagan Amoss अब सवाल ‘क्या हिंदुस्तान बड़ी शक्ति बनेगा?’ से आगे है हिंदुस्तान के सामने अब सवाल केवल यह नहीं है कि वह एक Major Power बनेगा या नहीं. बड़ा सवाल यह है कि हिंदुस्तान किस तरह की Major Power बनना चाहता है? क्या हिंदुस्तान किसी एक वैश्विक शक्ति-गुट के साथ जाएगा या Multi-Alignment जारी रखेगा? क्या Strategic Autonomy भविष्य में भी उसकी विदेश नीति का केंद्रीय सिद्धांत बनी रहेगी? क्या Global South की आवाज बनने की कोशिश हिंदुस्तान की स्थायी कूटनीतिक भूमिका बनेगी? और सबसे महत्वपूर्ण—क्या हिंदुस्तान की बढ़ती रणनीतिक महत्वाकांक्षा को लंबे समय तक आर्थिक, तकनीकी, सैन्य और संस्थागत क्षमता में बदला जा सकेगा? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 76वें जन्मदिन पर हिंदुस्तान की विदेश नीति को देखने का शायद यही सबसे महत्वपूर्ण फ्रेम है. Read more: Viral 80’s trend: ‘1980-1989’- वो 10 साल जिन्होंने आज का हिंदुस्तान बनाया The post PM Modi @ 76: Rising Power से Shaping Power तक हिंदुस्तान की विदेश नीति का सफर appeared first on Naya Vichar.

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रिटायर्ड अफसरों के लिए सेल में नौकरी का मौका, 14 सलाहकारों की होगी नियुक्ति; वेतन 1 लाख रुपये तक

बोकारो. स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के इस्को बर्नपुर इस्पात संयंत्र में विभिन्न विभागों के लिए अनुबंध के आधार पर सलाहकारों की नियुक्ति की जायेगी. इसके लिए सेल की इकाइयों से सेवानिवृत्त अधिकारियों को मौका दिया गया है. बीएसएल समेत सेल की अन्य इकाइयों में कनीय प्रबंधक से लेकर महाप्रबंधक स्तर तक काम कर चुके अधिकारी इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं. प्रतीकात्मक फोटो इच्छुक और पात्र उम्मीदवारों को 30 सितंबर 2026 तक इस्को बर्नपुर इस्पात संयंत्र के महाप्रबंधक कार्मिक ओडी कार्यालय में अपना आवेदन जमा करना होगा. आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बाद पात्र उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया जायेगा. चयनित अधिकारियों को सलाहकार के पद पर नियुक्ति दी जायेगी. छह माह का होगा अनुबंध, प्रदर्शन के आधार पर बढ़ सकती है अवधि सलाहकार के रूप में चयनित अधिकारियों की प्रारंभिक नियुक्ति छह माह के लिए होगी. विभागीय कार्यप्रणाली और आवश्यकता के आधार पर उनके अनुबंध की अवधि को आगे बढ़ाया जा सकता है. अधिकतम एक वर्ष तक सेवा विस्तार का प्रावधान रखा गया है. ये भी पढ़ें: इंस्टाग्राम पर हुई दोस्ती, शादी का झांसा देकर युवती को ले जाने का आरोप; तीन सप्ताह बाद झारसुगुड़ा से बरामद 10 विभागों में 14 सलाहकार होंगे नियुक्त इस्को बर्नपुर इस्पात संयंत्र में कुल 14 सलाहकारों की नियुक्ति की जानी है. इनमें प्रोजेक्ट सिविल में दो, प्रोजेक्ट सेफ्टी में एक, प्रोजेक्ट हॉट स्ट्रिप मिल में दो, प्रोजेक्ट इलेक्ट्रिकल में दो और प्रोजेक्ट फाइनेंस में दो पद शामिल हैं. इसके अलावा वर्क्स सेफ्टी, वर्क्स पावर, वर्क्स वायर रॉड मिल, वर्क्स यूआरएम और ऊर्जा प्रबंधन विभाग में एक-एक सलाहकार की नियुक्ति होगी. इन अधिकारियों को नहीं मिलेगा आवेदन का मौका नियुक्ति की शर्तों के अनुसार, सेल के वैसे पूर्व अधिकारी जिन्होंने नौकरी से इस्तीफा दिया है या जिन्हें कंपनी प्रबंधन की ओर से स्वैच्छिक अथवा अनिवार्य सेवानिवृत्ति दी गयी है, वे इस पद के लिए पात्र नहीं होंगे. इसी तरह, अपने तीन साल के सेवाकाल के दौरान सी ग्रेड प्राप्त करने वाले पूर्व अधिकारियों को भी सलाहकार पद के लिए योग्य नहीं माना जायेगा. आवेदन करने वाले उम्मीदवार की अधिकतम आयु 65 वर्ष निर्धारित की गयी है. पद के अनुसार 50 हजार से एक लाख तक वेतन सलाहकार पद पर चयनित अधिकारियों को उनके पूर्व पद के स्तर के आधार पर मासिक पारिश्रमिक दिया जायेगा. पूर्व कनीय प्रबंधक से लेकर पूर्व प्रबंधक स्तर के अधिकारियों को 50 हजार रुपये प्रतिमाह मिलेंगे. ये भी पढ़ें: BSL में कर्मियों ने तैयार किया इन-हाउस CDI सिस्टम, कोक की जगह पुल्वराइज्ड कोल से सालाना 100 करोड़ की बचत का अनुमान पूर्व वरीय प्रबंधक को 60 हजार रुपये, पूर्व सहायक महाप्रबंधक को 70 हजार रुपये, पूर्व उप महाप्रबंधक को 80 हजार रुपये और पूर्व महाप्रबंधक स्तर के अधिकारी को एक लाख रुपये प्रतिमाह का पारिश्रमिक दिया जायेगा. इसके अलावा चयनित सलाहकारों को आवास और मोबाइल फोन की सुविधा भी उपलब्ध करायी जायेगी. नियुक्ति का उद्देश्य संयंत्र के विभिन्न विभागों में अनुभवी अधिकारियों के ज्ञान और कार्यानुभव का उपयोग करना है. The post रिटायर्ड अफसरों के लिए सेल में नौकरी का मौका, 14 सलाहकारों की होगी नियुक्ति; वेतन 1 लाख रुपये तक appeared first on Naya Vichar.

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नीरज सिंह केस से निखार सबलोक मर्डर तक, शूटर शिबू की पूरी कहानी; धनबाद में पुलिस से मुठभेड़ में घायल

धनबाद के चर्चित पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड में आरोपी रहे उत्तर प्रदेश के शूटर सागर सिंह उर्फ विजय सिंह उर्फ शिबू से बुधवार की शाम निरसा में पुलिस की मुठभेड़ हो गयी. निरसा थाना क्षेत्र के हाथबाड़ी स्थित आनंद वाटिका रेजिडेंसी में पुलिस टीम ने उसे घेरने की कोशिश की, तो पुलिस के अनुसार शिबू ने फायरिंग कर दी. जवाबी कार्रवाई में शिबू घायल हो गया. पुलिस के अनुसार उसके पैर में कई गोलियां लगी हैं. घायल शिबू को तत्काल धनबाद के एसएनएमएमसीएच में भर्ती कराया गया, जहां कड़ी सुरक्षा के बीच उसका इलाज चल रहा है. घटना बुधवार शाम करीब 5.15 बजे की है. आरोपी के घर के बाहर मौजूद पुलिस की गाड़ी पुलिस के अनुसार, मुठभेड़ के दौरान शिबू के दो साथी भी फायरिंग करते हुए मौके से भाग निकले. दोनों की तलाश में पुलिस टीम छापेमारी कर रही है. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटनास्थल पर कई राउंड फायरिंग की आवाज सुनायी दी. पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई में फायरिंग किये जाने की पुष्टि की है. बताया जाता है कि पुलिस की गतिविधियां बुधवार दोपहर से ही आनंद वाटिका रेजिडेंसी और आसपास के इलाके में बढ़ गयी थीं. हालांकि कार्रवाई को पूरी तरह गोपनीय रखा गया था. निरसा प्रभारी थानेदार पर गोली चलाने का पुलिस का दावा पुलिस के अनुसार, भागने के दौरान सागर उर्फ शिबू ने निरसा के प्रभारी थाना प्रभारी बालेश्वर सिंह को निशाना बनाकर अत्याधुनिक 9 एमएम पिस्टल से गोली चलायी. पुलिस ने आत्मरक्षा में जवाबी फायरिंग की, जिसमें शिबू घायल हो गया. इस घटना में निरसा के प्रभारी थाना प्रभारी बालेश्वर सिंह बाल-बाल बच गये. पुलिस का कहना है कि अपराधियों की ओर से फायरिंग के बाद टीम ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जवाबी कार्रवाई की. ये भी पढ़ें: शिबू की तलाश को लेकर जमशेदपुर और धनबाद पुलिस के बीच लगातार समन्वय की बात भी सामने आ रही है. पुलिस तकनीकी इनपुट के आधार पर उसकी गतिविधियों और संपर्क में रहने वाले लोगों की जानकारी जुटा रही है. नीरज सिंह हत्याकांड से भी जुड़ा रहा है नाम सागर सिंह उर्फ शिबू का नाम धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड से भी जुड़ा रहा है. इस मामले में सरायढेला थाना कांड संख्या 48/17 दर्ज है. शिबू उत्तर प्रदेश का रहने वाला है और पूर्व में भी आपराधिक मामलों में उसका नाम सामने आया है. निखार सबलोक (फाइल फोटो) पुलिस अब उसके आपराधिक नेटवर्क, धनबाद में उसके संपर्कों और यहां आने के उद्देश्य की पड़ताल कर रही है. The post नीरज सिंह केस से निखार सबलोक मर्डर तक, शूटर शिबू की पूरी कहानी; धनबाद में पुलिस से मुठभेड़ में घायल appeared first on Naya Vichar.

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Gandant Dosh: कुंडली में गंडांत दोष है या नहीं? चंद्रमा, गुरु और इन योगों से ऐसे समझें इसका असली प्रभाव

Gandant Dosh: कुंडली में गंडांत दोष के पहले आर्टिकल में हमने समझा था कि गंडांत और गंड मूल क्या होते हैं और नक्षत्रों की गणना के आधार पर इनकी स्थिति किस तरह बनती है. अब इसके आगे एक और जरूरी बात समझना है कि कुंडली में गंड मूल या गंडांत होने मात्र से ही उसका प्रभाव तय नहीं हो जाता. कई बार लोग गंड मूल का प्रभाव बताकर उसकी शांति करा लेते हैं, जबकि कुंडली की ठीक से जांच करने पर पता चलता है कि वहां वह योग था ही नहीं. इसलिए किसी भी उपाय से पहले यह देखना जरूरी है कि दोष वास्तव में कुंडली में मौजूद है या नहीं. इसके अलावा, पारंपरिक ज्योतिष में ऐसे कई सिद्धांत बताए गए हैं, जो गंडांत के प्रभाव को कम या समाप्त कर सकते हैं. इसके सिद्धांत क्या हैं,काशी से पं. प्रशांत पांडेय बता रहे है. कैसे समझें कुंडली में गंडांत दोष है या नहीं? मूल, आश्लेषा और रेवती से जुड़े गंडांत का प्रभाव हर स्थिति में सक्रिय नहीं माना गया है. विशेष रूप से तब, जब लग्नेश पर चंद्रमा की दृष्टि न हो. चंद्रमा किसी कमजोर पाप ग्रह के साथ हो और उस पर किसी शुभ ग्रह की दृष्टि भी न पड़ रही हो. यदि चंद्रमा बलवान हो तो नक्षत्र और तिथि गंडांत के प्रभाव काफी हद तक समाप्त माने गए हैं. इसी प्रकार बलवान गुरु लग्न या राशि गंडांत से जुड़े दोषों को कम करने में सक्षम माना गया है. केंद्र भावों (1, 4, 7 या 10) में किसी शुभ ग्रह की उपस्थिति या चंद्रमा का 11वें भाव में होना गंडांत के प्रभाव को निष्प्रभावी करने वाला माना गया है. बलवान चंद्रमा और गुरु न केवल अशुभ योगों के प्रभाव को कम करते हैं, बल्कि तिथि और लग्न गंडांत के प्रतिकूल प्रभावों को भी समाप्त करने की क्षमता रखते हैं. परंपरा में कहा गया है कि मजबूत गुरु लग्न गंडांत के दोष को दूर कर सकता है, जबकि मजबूत चंद्रमा तिथि गंडांत के प्रभाव को समाप्त कर सकता है. गंडांत का प्रभाव कम और खत्म कब होता है रविवार या बुधवार का हस्त, चित्रा, स्वाती, अनुराधा, रेवती, ज्येष्ठा या मूल नक्षत्र के साथ संयोग तथा रविवार का अश्विनी नक्षत्र के साथ संयोग, नक्षत्र, तिथि और राशि- तीनों प्रकार के गंडांत के प्रभाव को समाप्त करने वाला माना गया है. अभिजित मुहूर्त को भी एक शक्तिशाली सुरक्षा कारक माना गया है और इसे गंडांत से जुड़े प्रतिकूल प्रभावों को कम करने वाला बताया गया है. चंद्रमा की स्थिति और उसकी शक्ति भी बहुत महत्वपूर्ण मानी गई है. यदि, चंद्रमा अपने वर्ग में हो, मित्र राशि में हो या किसी शुभ ग्रह के साथ अथवा उसकी दृष्टि में हो, तो यह भी गंडांत के प्रतिकूल प्रभावों से सुरक्षा देने वाला कारक माना गया है. किसी कुंडली में गंडांत दिखाई देना ही पर्याप्त नहीं है. उसका सही आकलन करने के लिए पूरी कुंडली को देखना जरूरी है. संबंधित ग्रहों की शक्ति, लग्न, चंद्रमा, शुभ ग्रहों का प्रभाव और सबसे बढ़कर वे सभी परिस्थितियां, जो इस दोष को कम या समाप्त कर सकती हैं. पहले यह देखें कि दोष वास्तव में कुंडली में है या नहीं. फिर उसकी ताकत और प्रभाव को समझें. इसके बाद यह देखें कि उसे कम करने या समाप्त करने वाले कौन-कौन से कारक मौजूद हैं. गंड मूल और गंडांत को समझने का यही संतुलित तरीका है. इससे ज्योतिष को अनावश्यक डर और भ्रम से अलग रखकर उसके मूल सिद्धांतों के साथ समझने में मदद मिलती है. ये भी पढ़ें: Astro Special: क्या होता है ज्योतिष का संधि काल गंडांत? शुभ कार्यों के लिए अशुभ क्यों काशी से ज्योतिषाचार्य पं. प्रशांत पांडे The post Gandant Dosh: कुंडली में गंडांत दोष है या नहीं? चंद्रमा, गुरु और इन योगों से ऐसे समझें इसका असली प्रभाव appeared first on Naya Vichar.

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