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चिदंबरम बोले- ‘मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व’, रिजिजू ने गिनाईं 3 बातें; बताया किस ओर है PM का इशारा

Chidambaram on Dimagi Naxal : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ वाली टिप्पणी पर सियासी बहस तेज हो गई है. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने रविवार को इस पर तंज कसते हुए कहा, “मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व है.” इसके जवाब में केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि पीएम मोदी ने विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था, बल्कि एक खास विचारधारा वाले लोगों का जिक्र किया था. चिदंबरम ने ‘दिमागी नक्सल’ टिप्पणी पर कसा तंज पी. चिदंबरम ने सोशल मीडिया पोस्ट में प्रधानमंत्री मोदी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है. मोदी ने 15 अगस्त को लाल किले से अपने संबोधन में जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ कार्रवाई का जिक्र करते हुए ‘दिमागी नक्सल’ से सावधान रहने और उन्हें पहचानकर अलग-थलग करने की बात कही थी. रिजिजू ने बताया किन लोगों को कहा ‘दिमागी नक्सल’ इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, चिदंबरम के बयान पर किरेन रिजिजू ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने विपक्षी नेताओं को इस श्रेणी में नहीं रखा है. उन्होंने तीन तरह के लोगों का जिक्र किया जिन्हें मोदी की टिप्पणी से जोड़ते हुए कहा कि इनमें वे लोग शामिल हैं जो माओवादियों का समर्थन करते और हिंदुस्तानीय संविधान को खारिज करते हैं, अलगाववादियों के साथ खड़े होकर अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं और तीसरे वे लोग जो नॉर्थ-ईस्ट को हिंदुस्तान से अलग करने के लिए ‘चिकन नेक’ काटने की बात करते हैं. मोदी ने क्या कहा था? प्रधानमंत्री मोदी ने स्वतंत्रता दिवस पर कहा था कि जंगलों में हथियारबंद नक्सलवाद के खिलाफ देश को सफलता मिली है, लेकिन माओवादी सोच वाले कुछ लोग अब भी व्यवस्था के भीतर मौजूद हो सकते हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे लोग पहले प्रशासनी समितियों में सलाहकार बनकर नीतियों को प्रभावित करते रहे हैं. मोदी ने कहा कि देश को सतर्क रहते हुए ऐसे ‘दिमागी नक्सल’ की पहचान कर उन्हें अलग-थलग करना होगा. पीएम ने नक्सलवाद के कारण हुई हिंसा का जिक्र करते हुए कहा कि इस संघर्ष में 3,500 से अधिक सुरक्षाकर्मी मारे गए और नक्सलवाद ने लाखों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया. उन्होंने कहा कि 2014 में उनकी प्रशासन बनने के बाद नक्सलवाद को खत्म करना प्राथमिकता रही है. The post चिदंबरम बोले- ‘मुझे दिमागी नक्सल होने पर गर्व’, रिजिजू ने गिनाईं 3 बातें; बताया किस ओर है PM का इशारा appeared first on Naya Vichar.

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चमोली टनल हादसा: दो लापता मजदूरों की तलाश चौथे दिन भी जारी, हादसे की होगी मैजिस्टीरियल जांच

उत्तराखंड के चमोली जिले में टनल हादसे के बाद लापता दो मजदूरों की तलाश रविवार (16 अगस्त ) को चौथे दिन भी जारी रही. पीटीआई न्यूज एजेंसी के मुताबिक, हादसा 13 अगस्त को हुआ था, जिसके बाद से राहत और बचाव टीमें लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं. NDRF-SDRF समेत कई एजेंसियां जुटीं लापता मजदूरों को खोजने के लिए NDRF, SDRF, ITBP, पुलिस और अन्य एजेंसियों की टीमें मौके पर तैनात हैं. टीमें मलबे और पानी के बीच सुरंग के अंदर लगातार खोजबीन कर रही हैं. मलबे और पानी से भर गई थी निर्माणाधीन टनल अधिकारियों के मुताबिक, पिपलकोटी में THDC इंडिया लिमिटेड की निर्माणाधीन टनल में बृहस्पतिवार शाम को लैंडस्लाइड के बाद अचानक मलबा और पानी भर गया था. हादसे के समय टनल के अंदर कई मजदूर मौजूद थे. हादसे में 8 मजदूरों की मौत इस हादसे में अब तक 8 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 घायल मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल में भर्ती कराया गया था. वहीं, दो मजदूर अभी भी लापता हैं और उनकी तलाश जारी है. हादसे की वजह जानने के लिए मैजिस्टीरियल जांच के आदेश घटना की परिस्थितियों और हादसे के कारणों का पता लगाने के लिए प्रशासन ने मैजिस्टीरियल जांच के आदेश दिए हैं. जांच के बाद हादसे की वजह और जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं पर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है. ये भी पढ़ें: चमोली टनल हादसा: एक और शव बरामद, दो की तलाश जारी; मृतकों का आंकड़ा 8 पहुंचा The post चमोली टनल हादसा: दो लापता मजदूरों की तलाश चौथे दिन भी जारी, हादसे की होगी मैजिस्टीरियल जांच appeared first on Naya Vichar.

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30 हजार दर्शक, ढोल-नगाड़े और हर गोल पर जश्न… मोराबादी में फुटबॉल का ऐसा जुनून देख दिल्ली भी हुई फैन

Ranchi Morabadi Football Craze: 16 अगस्त की रविवार शाम मोराबादी मैदान में कुछ अलग ही नजारा था. आमतौर पर क्रिकेट के जुनून के लिए पहचाने जाने वाले रांची में रविवार को करीब 30 हजार लोग फुटबॉल के लिए एक साथ जुटे. ढोल-नगाड़ों की गूंज, तालियों की आवाज और गोल होते ही आसमान तक पहुंचता शोर बता रहा था कि रांची के दिल में फुटबॉल के लिए भी उतनी ही जगह है. डूरंड कप के 135वें सीजन का पहला क्वार्टरफाइनल स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली और मणिपुर की एफसी रेंगदाई के बीच था. मैदान पर दोनों टीमों के 22 खिलाड़ी मुकाबला कर रहे थे, लेकिन असली रोमांच स्टैंड्स में भी था. हर पास पर तालियां बज रही थीं, हर अच्छे मूव पर शोर हो रहा था और गोल होते ही हजारों दर्शक अपनी सीटों से खड़े होकर झूम रहे थे. क्वार्टर फाइनल का उद्घाटन करते हुए झारखंड के राज्यपाल (फोटो- सोशल मीडिया) मुकाबले का उद्घाटन झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार ने किया. मैच शुरू होने के बाद भी दर्शकों के स्टेडियम पहुंचने का सिलसिला नहीं रुका. पहले हाफ तक स्टैंड्स भरते रहे और देखते ही देखते मोराबादी दर्शकों से खचाखच भर गया. हर पास पर तालियां, हर गोल पर झूम उठा मोराबादी मुकाबले की खास बात यह रही कि दर्शक किसी एक टीम के साथ नहीं थे. दिल्ली का हमला हो या रेंगदाई का काउंटर अटैक, फैंस हर अच्छे मूव पर तालियों और शोर के साथ खिलाड़ियों का उत्साह बढ़ाते रहे. मैदान पर जब कोई खिलाड़ी शानदार पास देता, गेंद गोलपोस्ट के करीब पहुंचती या कोई बेहतरीन टैकल होता, तो स्टैंड्स से आवाज गूंज उठती. लेकिन जैसे ही गोल हुआ, पूरा मोराबादी स्टेडियम एक साथ झूम उठा. रेंगदाई ने 9वें मिनट में किशन सिंह के गोल से बढ़त बनाई तो उसके समर्थकों ने जमकर जश्न मनाया. दिल्ली के खिलाड़ी पहले हाफ में बराबरी के लिए संघर्ष करते रहे. लेकिन दूसरे हाफ में जैसे ही दिल्ली ने वापसी शुरू की, स्टेडियम का माहौल भी बदल गया. दिल्ली का पहला गोल और बदल गया पूरा माहौल 57वें मिनट में जोसेफ सन्नी ने दिल्ली के लिए बराबरी का गोल दागा. इसके बाद जो हुआ, वह इस मुकाबले की सबसे खास तस्वीरों में से एक रहा. दिल्ली के गोल के साथ ही दर्शकों की आवाज कई गुना बढ़ गई. इसके बाद 67वें मिनट में जोसेफ सन्नी ने अपना दूसरा गोल किया. दिल्ली 2-1 से आगे हुई तो मोराबादी में बैठे दर्शक सीटों से उठकर झूमने लगे. 81वें मिनट में रोड्रिगो अराउजो डा सिल्वा फिल्हो ने तीसरा गोल दागा तो दिल्ली की जीत लगभग तय हो गई. इसके बाद इंजरी टाइम में जुआन सेबेस्टियन पेना बरमूडेज और ऑगस्टीन लालरोचना ने गोल कर दिल्ली की जीत को 5-1 कर दिया. हर गोल के साथ स्टैंड्स में जश्न का शोर और तेज होता गया. ये भी पढ़ें: रांची में ढोल-नगाड़ों के बीच डूरंड कप के पहले क्वार्टरफाइनल का आगाज, दिल्ली और एफसी रेंगदाई आमने-सामने दिल्ली के 12वें खिलाड़ी बन गए रांची के फैंस View on Instagram दिल्ली ने मैच 5-1 से जीता, लेकिन जीत के बाद खिलाड़ियों के चेहरे पर सिर्फ अपनी जीत की खुशी नहीं थी. खिलाड़ियों ने रांची के दर्शकों की ओर हाथ हिलाकर उनका अभिवादन किया और उनके समर्थन के लिए धन्यवाद दिया. मैच खत्म होने के बाद दिल्ली के खिलाड़ी पूरे मैदान का चक्कर लगाने निकले. स्टैंड्स में मौजूद फैंस भी अपनी सीटों से खड़े होकर खिलाड़ियों का अभिवादन करने लगे. खिलाड़ियों और दर्शकों के बीच यह नजारा कुछ देर तक चलता रहा. ऐसा लग रहा था जैसे दिल्ली की जीत में रांची के फैंस भी हिस्सेदार हों. जिस तरह से दर्शकों ने दूसरे हाफ में दिल्ली का हौसला बढ़ाया, उसने मुकाबले के माहौल को पूरी तरह बदल दिया. क्रिकेट के शहर में फुटबॉल का ऐसा जुनून कम ही दिखता है रांची को क्रिकेट के लिए जाना जाता है. यहां महेंद्र सिंह धोनी की वजह से क्रिकेट का जुनून अलग ही स्तर पर देखने को मिलता है. लेकिन रविवार को मोराबादी में करीब 30 हजार दर्शकों की मौजूदगी ने एक और तस्वीर सामने रख दी. यहां शिशु थे, युवा थे, परिवार थे और फुटबॉल के पुराने प्रशंसक भी. कोई दिल्ली को सपोर्ट कर रहा था तो कोई एफसी रेंगदाई के लिए चीयर कर रहा था. लेकिन जब गोल होता, पूरा स्टेडियम एक साथ जश्न में डूब जाता. डूरंड कप का क्वार्टरफाइनल भले ही दिल्ली ने जीता, लेकिन रविवार की शाम रांची के फुटबॉल प्रेम ने भी अपना एक अलग रिकॉर्ड बना दिया. मैदान पर दिल्ली ने 5-1 से जीत दर्ज की, लेकिन मोराबादी की शाम फुटबॉल के नाम रही. ये भी पढ़ें: डूरंड कप 2026: स्पोर्टिंग क्लब दिल्ली की टीम सेमीफाइनल में, रांची में एफसी रेंगदाई को 5-1 से रौंदा The post 30 हजार दर्शक, ढोल-नगाड़े और हर गोल पर जश्न… मोराबादी में फुटबॉल का ऐसा जुनून देख दिल्ली भी हुई फैन appeared first on Naya Vichar.

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छात्रों ने हेमंत सोरेन, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव का पुतला जलाया, 18 अगस्त तक सरकार को दिया अल्टीमेटम

रांची से अभिषेक आनंद की रिपोर्ट JPSC Student Protest: झारखंड की राजधानी रांची में जेपीएससी-जेएसएससी की कथित अनियमितताओं के खिलाफ आंदोलन कर रहे छात्रों का प्रदर्शन 22वें दिन और आक्रामक हो गया. छात्रों ने अल्बर्ट एक्का चौक पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, कांग्रेस नेता राहुल गांधी और राजद नेता तेजस्वी यादव का सांकेतिक पुतला दहन कर विरोध जताया. इससे पहले छात्र मौन मार्च और तिरंगा यात्रा समेत अलग-अलग तरीकों से अपनी नाराजगी दर्ज करा चुके हैं. जेएसएससी सीजीएल रद्द करने और CBI जांच की मांग छात्रों की प्रमुख मांगों में जेएसएससी सीजीएल परीक्षा को रद्द करना और पूरे मामले की सीबीआई जांच शामिल है. छात्रों का कहना है कि बातचीत के बावजूद उनकी कई मांगें अब तक नहीं मानी गयी हैं. वहीं प्रशासन की ओर से छात्रों की बड़ी संख्या में मांगें स्वीकार किए जाने की बात कही गयी है. इसी मतभेद के कारण आंदोलन खत्म होने के बजाय लगातार आगे बढ़ रहा है. 20 अगस्त को सीएम आवास का घेराव आंदोलनकारी छात्रों ने प्रशासन को 18 अगस्त तक का अल्टीमेटम दिया है. छात्रों ने कहा है कि इस अवधि के भीतर प्रशासन बातचीत के लिए आगे आए और उनकी समस्याओं का समाधान निकाले. छात्रों के अनुसार, यदि 18 अगस्त तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलता है, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया जाएगा. हालांकि छात्रों ने यह भी स्पष्ट किया है कि बातचीत से समाधान निकलता है, तो आंदोलन समाप्त करने पर विचार किया जा सकता है. पुतला दहन के जरिए गठबंधन पर दबाव छात्रों ने जिन तीन नेताओं के पुतले जलाये, वे सत्तारूढ़ गठबंधन के प्रमुख चेहरे हैं. प्रदर्शन में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव को निशाना बनाया गया. आंदोलनकारियों का यह कदम गठबंधन के नेताओं पर छात्रों की मांगों को लेकर दबाव बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है. खासकर कांग्रेस पर यह दबाव है कि वह छात्रों की मांगों को प्रशासन के स्तर पर उठाकर जल्द वार्ता की स्थिति तैयार करे. सड़क पर उतरे तो बढ़ी छात्रों की भीड़ आंदोलन स्थल पर छात्रों की संख्या में उतार-चढ़ाव के बावजूद विरोध कार्यक्रमों में बड़ी भीड़ जुट रही है. तिरंगा यात्रा और अन्य कार्यक्रमों के दौरान सड़कों पर बड़ी संख्या में छात्र नजर आये. इससे संकेत मिलता है कि आंदोलन में सक्रिय रूप से शामिल नहीं होने वाले कई छात्र भी मुद्दे को लेकर समर्थन जता रहे हैं और निर्धारित विरोध कार्यक्रमों में पहुंच रहे हैं. प्रशासन और छात्रों के बीच संवाद की उम्मीद लगातार प्रदर्शन के बीच प्रशासन की ओर से अधिकारियों की आवाजाही भी जारी है. एसडीएम, एडीएम और एएसपी समेत प्रशासनिक अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंचते रहे हैं. छात्रों की ओर से भी यह कहा गया है कि समाधान का रास्ता संवाद से ही निकल सकता है. ऐसे में 18 अगस्त की समयसीमा से पहले प्रशासन और छात्रों के बीच दोबारा बातचीत शुरू होने की उम्मीद बनी हुई है. श्वेत पत्र और नई नियुक्तियों का सुझाव आंदोलन के समाधान के लिए प्रशासन की ओर से अब तक की कार्रवाई को सार्वजनिक करने का सुझाव भी सामने आया है. इसके तहत प्रशासन से श्वेत पत्र जारी कर यह बताने की मांग की गयी है कि छात्रों की ओर से पहले सौंपी गयी मांगों पर अब तक क्या कार्रवाई हुई. साथ ही जेएसएससी सीजीएल की करीब 2000 सीटें और जेपीएससी की कुछ सीटों पर उम्र सीमा में राहत के साथ नियुक्ति प्रक्रिया शुरू करने का सुझाव दिया गया है, ताकि आंदोलन कर रहे छात्र दोबारा अपनी पढ़ाई और परीक्षा की तैयारी पर लौट सकें. इसे भी पढ़ें: ‘हेमंत सोरेन बड़े भाई… निकालेंगे आभार यात्रा’, जानें CM आवास घेराव पर छात्रों ने क्या कहा? 20 अगस्त के फैसले पर टिकी नजर 22 दिन से जारी आंदोलन के बीच छात्रों की स्थिति भी चुनौतीपूर्ण बतायी जा रही है. बारिश और धूप के बीच प्रदर्शन कर रहे कई छात्रों के बीमार होने की बात सामने आयी है. ऐसे में आंदोलन के और लंबा खिंचने से चिंता बढ़ रही है. फिलहाल छात्रों ने 18 अगस्त तक बातचीत का रास्ता खुला रखा है. यदि इस दौरान प्रशासन और आंदोलनकारियों के बीच सहमति नहीं बनी, तो 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव की घोषणा पर छात्र कायम हैं. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: छात्रों के बीच पहुंचीं बॉलीवुड एक्ट्रेस कुनिका सदानंद, आंदोलन को दिया समर्थन The post छात्रों ने हेमंत सोरेन, राहुल गांधी और तेजस्वी यादव का पुतला जलाया, 18 अगस्त तक प्रशासन को दिया अल्टीमेटम appeared first on Naya Vichar.

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JPSC-JSSC आंदोलन: छात्रों से बातचीत के लिए सरकार ने फिर बढ़ाया हाथ, 17 अगस्त को स्टेट गेस्ट हाउस में बैठक

JPSC-JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं में धांधली के विरोध में प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत के लिए हेमंत प्रशासन ने पहल की है. हेमंत प्रशासन की ओर से आंदोलन कर रहे छात्रों को 17 अगस्त 2026 को दोपहर 2 बजे बातचीत के लिए आमंत्रित किया गया है. बैठक मोरहाबादी स्थित स्टेट गेस्ट हाउस में आयोजित की गई है. अधिकारियों की ओर से आंदोलन कर रहे छात्रों को बैठक की जानकारी दे दी गयी है. अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) और ADM, लॉ एंड ऑर्डर ने छात्रों को प्रशासन के बातचीत के प्रस्ताव से अवगत कराया. प्रशासन ने छात्रों को उनके विधिक सलाहकारों के साथ बैठक में शामिल होने का प्रस्ताव दिया है. मांगों और भर्ती प्रक्रिया पर हो सकती है चर्चा बैठक में छात्रों की मांगों और JPSC-JSSC की भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है. भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र लगातार आंदोलन कर रहे हैं. आंदोलनरत छात्रों की ओर से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच समेत विभिन्न मांगें उठायी जाती रही हैं. प्रशासन की ओर से बातचीत के लिए बुलाये जाने को आंदोलन के बीच महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है. अब छात्रों के बैठक में शामिल होने के फैसले पर नजर रहेगी. बैठक में प्रशासन के साथ बातचीत के बाद आंदोलन की आगे की रणनीति को लेकर भी छात्रों की ओर से निर्णय लिया जा सकता है. विधिक सलाहकारों के साथ बैठक का प्रस्ताव प्रशासन ने छात्रों को बातचीत के दौरान अपने विधिक सलाहकारों को साथ रखने का प्रस्ताव दिया है. इससे बैठक में भर्ती प्रक्रियाओं से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर भी चर्चा की संभावना है. अधिकारियों ने छात्रों को बैठक का समय और स्थान बता दिया है. अब देखना होगा कि आंदोलनरत छात्र प्रशासन के इस बातचीत के प्रस्ताव को स्वीकार करते हैं या नहीं और बैठक में किन मुद्दों को प्रमुखता से उठाते हैं. बैठक की जानकारी तारीख: 17 अगस्त 2026 समय: दोपहर 2 बजे स्थान: स्टेट गेस्ट हाउस, मोरहाबादी, रांची बैठक में: आंदोलनरत छात्र और उनके विधिक सलाहकार The post JPSC-JSSC आंदोलन: छात्रों से बातचीत के लिए प्रशासन ने फिर बढ़ाया हाथ, 17 अगस्त को स्टेट गेस्ट हाउस में बैठक appeared first on Naya Vichar.

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बलूचिस्तान के खुजदार में लॉकडाउन की क्या है वजह? रात होते ही दुकानें बंद, लोगों के निकलने पर रोक

Balochistan Lockdown : पाकिस्तान के बलूचिस्तान में तनाव कम नहीं हो रहा है. खुजदार शहर में पुलिस प्रशासन ने उन सभी बातों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें कहा जा रहा था कि शहर से लॉकडाउन हटा लिया गया है. पुलिस ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रही ये बातें पूरी तरह झूठ और बेबुनियाद हैं. शहर में सुरक्षा को देखते हुए पाबंदियां अभी भी लागू हैं और लोगों को नियमों का पालन करना होगा. क्यों लगाया है लॉकडाउन? बलूचिस्तान में लॉकडाउन की मुख्य वजह सुरक्षा व्यवस्था का बिगड़ना और स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त) पर बलोच संगठनों द्वारा मनाया गया ‘ब्लैक डे’ है. बलोच नेताओं द्वारा स्वतंत्रता के दावों के बाद, पाकिस्तानी सेना मस्तुंग और सुराब जैसे इलाकों में हवाई हमलों सहित कड़े सैन्य ऑपरेशन चला रही है. विद्रोही गतिविधियों को दबाने और 26 अगस्त को नवाब अकबर बुगती की बरसी पर संभावित हिंसा को रोकने के लिए इंटरनेट बंद कर रात का सख्त कर्फ्यू लगाया गया है. Also read : Video : चलती ट्रक के ऊपर चढ़कर थिरकने लगा ड्राइवर, खतरनाक स्टंट का वीडियो वायरल ​रात 8 बजते ही बंद हो रहे बाजार न्यूज एजेंसी एएनआई की रिपोर्ट में बताया गया कि प्रशासन के आदेश के मुताबिक, खुजदार में रोज शाम 8 बजे से अगली सुबह 10 बजे तक पूरी तरह लॉकडाउन रहता है. पुलिस ने दुकानदारों और आम लोगों से कहा है कि वे तय समय पर दुकानें बंद कर दें और रात के वक्त बिना वजह घरों से बाहर न निकलें. ​कई जिलों में शाम ढलते ही सन्नाटा सिर्फ खुजदार ही नहीं, बल्कि सुराब, कलात, मस्तुंग और नुश्की जैसे इलाकों में भी शाम होते ही बाजार बंद करा दिए जा रहे हैं. क्वेटा और तुर्बत में धारा 144 लगी है, जहां बाइक पर पीछे सवारी बैठाने पर भी रोक है. 14 अगस्त को पूरे इलाके में मोबाइल और इंटरनेट बंद रहा, वहीं लगातार लोगों के लापता होने की घटनाओं से स्थानीय लोगों में काफी डर और गुस्सा है. The post बलूचिस्तान के खुजदार में लॉकडाउन की क्या है वजह? रात होते ही दुकानें बंद, लोगों के निकलने पर रोक appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Student Protest: छात्रों के बीच पहुंचीं बॉलीवुड एक्ट्रेस कुनिका सदानंद, आंदोलन को दिया समर्थन

रांची से अरविंद कुमार सिंह की रिपोर्ट JPSC Student Protest: रांची में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच बॉलीवुड अभिनेत्री और अधिवक्ता कुनिका सदानंद आंदोलनरत छात्रों के समर्थन में पहुंचीं. उन्होंने छात्रों से मुलाकात की और उनकी मांगों को जायज बताया. कुणिका सदानंद ने कहा कि नौकरी और शिक्षा व्यवस्था को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों की मांगों को गंभीरता से सुना जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रशासन को छात्रों के साथ संवाद कर बीच का रास्ता निकालने की कोशिश करनी चाहिए. प्रशासन को संवेदनशीलता से निकालना चाहिए समाधान कुनिका सदानंद ने कहा कि उन्हें लगता है कि झारखंड प्रशासन केंद्र प्रशासन की तुलना में अधिक संवेदनशील है. ऐसे में प्रशासन और छात्रों के बीच बातचीत के जरिये समाधान निकाला जा सकता है. उन्होंने सुझाव दिया कि प्रशासन छात्रों को 10 से 15 दिन का समय देकर उनकी मांगों पर ठोस तरीके से विचार करे. उनका कहना था कि आंदोलन को लंबा खींचने के बजाय प्रशासन को परिणाम निकालने की दिशा में काम करना चाहिए. सीआईडी की कार्रवाई पर भी उठाए सवाल छात्रों की मांगों और जांच के मुद्दे पर कुनिका सदानंद ने कहा कि यदि किसी मामले में गिरफ्तारियां हुई हैं, तो सीआईडी की भूमिका की भी समीक्षा होनी चाहिए. उन्होंने सवाल उठाया कि यदि जांच एजेंसी ने पहले सही तरीके से काम नहीं किया, तो उसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. उन्होंने छात्रों द्वारा सीबीआई जांच की मांग का जिक्र करते हुए कहा कि यह मांग अपनी जगह हो सकती है, लेकिन उन्हें आशंका है कि जांच की प्रक्रिया बदलने से मामला और लंबा खिंच सकता है. मुंबई से आंदोलन को फॉलो कर रही थीं अभिनेत्री कुनिका सदानंद ने बताया कि वह काफी समय से मुंबई से झारखंड के छात्र आंदोलन को फॉलो कर रही थीं. झारखंड आने के बाद उन्होंने आंदोलन स्थल पर पहुंचने का फैसला किया. उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने उनकी मेहमाननवाजी की, उनसे भी उन्होंने कहा कि वह छात्रों के प्रदर्शन में जरूर जाना चाहती हैं. इसके बाद वह आंदोलन स्थल पर पहुंचीं और छात्रों से बातचीत की. दिल्ली और झारखंड के आंदोलन में बताया अंतर दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन और झारखंड के आंदोलन के बीच अंतर बताते हुए कुनिका सदानंद ने कहा कि दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग जुटे थे, क्योंकि वह देश की राजधानी और केंद्र का प्रमुख स्थान है. वहीं झारखंड में बाहर से लोगों की संख्या अपेक्षाकृत कम है, लेकिन स्थानीय स्तर पर छात्रों को अच्छा समर्थन मिल रहा है. उन्होंने कहा कि झारखंड में चल रहा संघर्ष कोई नया मामला नहीं है, बल्कि इसकी पृष्ठभूमि काफी पुरानी है. झारखंड गठन के बाद के सवालों का किया जिक्र कुनिका सदानंद ने कहा कि झारखंड के गठन के पीछे स्थानीय लोगों और आदिवासी समुदाय के अधिकारों की भी बड़ी भूमिका रही है. उनके अनुसार, राज्य बनने के बाद रोजगार और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई सवाल अब भी पूरी तरह हल नहीं हुए हैं. उन्होंने कहा कि इस समस्या की जिम्मेदारी केवल मौजूदा प्रशासन पर डालना उचित नहीं होगा, क्योंकि अलग-अलग प्रशासनों के कार्यकाल में ये मुद्दे बने रहे हैं. एक साथ वैकेंसी निकालने की व्यवस्था पर सवाल अभिनेत्री ने प्रशासनी नौकरियों की बड़ी संख्या में एक साथ रिक्तियां जारी करने की व्यवस्था पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि उनकी राय में एक साथ बड़ी संख्या में वैकेंसी घोषित करने के बजाय नियमित तरीके से नियुक्तियों की प्रक्रिया होनी चाहिए. उन्होंने आशंका जताई कि बड़ी संख्या में पद एक साथ घोषित होने पर भ्रष्टाचार या नेतृत्वक दबाव की गुंजाइश बढ़ सकती है. उन्होंने सुझाव दिया कि हर साल या हर महीने उपलब्ध रिक्तियों की स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए. रद्द परीक्षाओं के अभ्यर्थियों को उम्र में छूट देने की मांग रद्द हुई परीक्षाओं में शामिल अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर कुनिका सदानंद ने उम्र में छूट देने की बात कही. उन्होंने कहा कि जिन अभ्यर्थियों की कोई गलती नहीं थी और परीक्षा रद्द होने के कारण उन्हें दोबारा प्रक्रिया में शामिल होना पड़ रहा है, उन्हें उम्र सीमा में राहत मिलनी चाहिए. उनके मुताबिक, ऐसे अभ्यर्थियों को व्यवस्था की खामी की कीमत नहीं चुकानी चाहिए. इसे भी पढ़ें: ‘हेमंत सोरेन बड़े भाई… निकालेंगे आभार यात्रा’, जानें CM आवास घेराव पर छात्रों ने क्या कहा? आंदोलन की आवाज लोगों तक पहुंचाने की कोशिश कुनिका सदानंद ने कहा कि उनके पास जितनी भी पहचान और सामाजिक कार्यों से जुड़ा अनुभव है, उसका इस्तेमाल वह छात्रों की आवाज को अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए करना चाहती हैं. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया के माध्यम से भी आंदोलन और छात्रों की मांगों की जानकारी ज्यादा लोगों तक पहुंच सकती है. उन्होंने यह भी कहा कि वह इस बात पर चर्चा नहीं करना चाहतीं कि कौन बॉलीवुड से आंदोलन में आया और कौन नहीं आया. उनके अनुसार, हर व्यक्ति अपनी परिस्थितियों और व्यस्तताओं के अनुसार निर्णय लेता है. इसे भी पढ़ें: JPSC Student Protest: सीएम हाउस के घेराव पर अड़े आंदोलनकारी छात्र, एडीएम-एसडीएम पहुंचे मनाने The post JPSC Student Protest: छात्रों के बीच पहुंचीं बॉलीवुड एक्ट्रेस कुनिका सदानंद, आंदोलन को दिया समर्थन appeared first on Naya Vichar.

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चिराग ने PK की तारीफ की तो संतोष सुमन ने दिखाया आईना, बोले- भ्रम फैलाकर चुनाव जीते, अब 10 हजार नौकरी देकर दिखाएं

Bihar Politics: प्रशांत किशोर की तारीफ को लेकर एनडीए के अंदर ही अलग-अलग राय सामने आने लगी है. केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पीके की विकास और रोजगार की बातों का समर्थन किया था. अब बिहार प्रशासन में मंत्री संतोष सुमन ने चिराग के बयान पर प्रतिक्रिया दी है. नया विचार से बातचीत में संतोष सुमन ने कहा कि चिराग पासवान ने ऐसा कुछ नहीं कहा है, जिस पर विवाद हो. उन्होंने सिर्फ विकास की बात करने वालों के समर्थन की बात कही है. हालांकि, प्रशांत किशोर को लेकर संतोष सुमन की राय चिराग से अलग है. ‘प्रशांत किशोर ने भ्रम फैलाकर चुनाव जीता’ संतोष सुमन ने कहा कि प्रशांत किशोर विकास की बात करके नहीं, बल्कि भ्रम फैलाकर चुनाव जीते हैं. उन्होंने कहा कि पीके ने बांकीपुर की जनता के बीच यह भ्रम पैदा किया कि चुनाव जीतने के बाद वह क्षेत्र को बहुत आगे ले जाएंगे. मंत्री ने कहा कि विकास की बात करना आसान है. लेकिन उसे जमीन पर उतारना सबसे बड़ी चुनौती है. अब प्रशांत किशोर के सामने अगले चार साल में असली परीक्षा होगी. ‘10 हजार नौकरी देने की बात कही है, अब करके दिखाएं’ संतोष सुमन ने प्रशांत किशोर के रोजगार के वादे को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि पीके ने बांकीपुर के 10 हजार लोगों को नौकरी देने की बात कही है. अब उन्हें यह करके दिखाना चाहिए. मंत्री ने कहा कि सिर्फ बातें करने और उसे लागू करने में बहुत अंतर होता है. जनता अब देखेगी कि प्रशांत किशोर अपने कितने वादे पूरे कर पाते हैं. ‘बांकीपुर के 10 हजार लोगों को नौकरी मिली तो हमें भी खुशी होगी’ संतोष सुमन ने कहा कि अगर प्रशांत किशोर बांकीपुर के 10 हजार लोगों को नौकरी दिला देते हैं तो इससे उन्हें भी खुशी होगी. उन्होंने कहा कि जनता के हित में होने वाला हर काम लोकतंत्र के लिए अच्छा है. अब यह देखना होगा कि पीके अपने वादों को कितनी गंभीरता से पूरा करते हैं. ‘लोकतंत्र की परीक्षा में सोना बनकर निकलेंगे या पिघल जाएंगे, वक्त बताएगा’ प्रशांत किशोर के विधायक बनने पर संतोष सुमन ने कहा कि अब उनकी असली परीक्षा शुरू हुई है. उन्होंने कहा, “लोकतंत्र की परीक्षा में सोना बनकर निकलते हैं या पिघल जाते हैं, यह तो वक्त बताएगा.” उनके मुताबिक, चुनाव जीतना एक बात है और जनता से किए वादों को पूरा करना दूसरी बात. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें चिराग ने क्यों की थी प्रशांत किशोर की तारीफ? दरअसल, चिराग पासवान ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर पटना स्थित लोजपा (रामविलास) कार्यालय में ध्वजारोहण के बाद प्रशांत किशोर को लेकर बयान दिया था. उन्होंने कहा था कि पीके बिहार में विकास और रोजगार की बात कर रहे हैं. वह जाति और धर्म की नेतृत्व से अलग बिहार के विकास की बात कर रहे हैं. चिराग ने कहा था कि जो भी बिहार और बिहारियों को आगे बढ़ाने की बात करेगा, वह उसका समर्थन करेंगे. हालांकि, चिराग ने यह भी कहा था कि प्रशांत किशोर के सामने आने वाले वर्षों में कई चुनौतियां होंगी. अब उन्हें अपने वादों पर कितना खरा उतरते हैं, यह समय बताएगा. बांकीपुर में भाजपा को हराकर विधायक बने हैं पीके प्रशांत किशोर ने हाल ही में बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में भाजपा को हराकर जीत दर्ज की है. इसके बाद वह जन सुराज पार्टी के पहले विधायक बने हैं. बांकीपुर में भाजपा की हार के बाद चिराग पासवान ने एनडीए के घटक दलों के बीच बेहतर तालमेल की जरूरत की बात भी कही थी. अब चिराग के प्रशांत किशोर के समर्थन वाले बयान और संतोष सुमन की प्रतिक्रिया ने एनडीए के भीतर इस मुद्दे को चर्चा में ला दिया है. हालांकि, संतोष सुमन ने साफ किया कि उनका सवाल विकास की बात से नहीं, बल्कि उसे जमीन पर उतारने को लेकर है. Also Read: प्रशांत किशोर 17 अगस्त को लेंगे विधायक पद की शपथ, जानिए सदन की जगह स्पीकर के चैंबर में क्यों होगा कार्यक्रम The post चिराग ने PK की तारीफ की तो संतोष सुमन ने दिखाया आईना, बोले- भ्रम फैलाकर चुनाव जीते, अब 10 हजार नौकरी देकर दिखाएं appeared first on Naya Vichar.

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228 KM पदयात्रा, बॉर्डर सील और पुलिस का पहरा: जानिए किन मांगों को लेकर दिल्ली कूच कर रहे किसान

Farmers Delhi March: किसान खनौरी बॉर्डर (पंजाब-हरियाणा) से दिल्ली के जंतर-मंतर तक पैदल यात्रा पर निकल चुके हैं. यात्रा का समापन 29 अगस्त को दिल्ली में एक बड़ी किसान पंचायत के साथ होना है. क्यों पद यात्रा कर रहे हैं किसान? किसान संगठनों का कहना है कि यह पदयात्रा मुख्य रूप से दो प्रमुख मांगों और मुद्दों को लेकर निकाली जा रही है. MSP की कानूनी गारंटी: किसान लंबे समय से सभी फसलों की एमएसपी पर प्रशासनी खरीद के लिए कानून बनाने की मांग कर रहे हैं. हिंदुस्तान-अमेरिका व्यापार समझौते का विरोध: किसान नेताओं का दावा है कि प्रस्तावित हिंदुस्तान-अमेरिका ट्रेड डील से हिंदुस्तानीय कृषि क्षेत्र और देश के किसानों पर बेहद प्रतिकूल और नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा. सीमा पर तनाव, पुलिस ने लगाया बैरिकेडिंग पदयात्रा को हरियाणा में प्रवेश करने से रोकने के लिए पुलिस ने खनौरी बॉर्डर पर कंक्रीट के बड़े-बड़े बैरिकेड्स, कंटीले तार और दंगा नियंत्रण वाहन तैनात कर दिए हैं. जींद जिले के पुलिस अधिकारियों के अनुसार, किसानों के पास इस पदयात्रा को निकालने की प्रशासनिक अनुमति नहीं है. इसके अलावा किसान नेताओं ने आरोप लगाया है कि यात्रा शुरू होने से पहले ही हरियाणा पुलिस ने कई किसान कार्यकर्ताओं को अलग-अलग जगहों पर हिरासत में ले लिया है. प्रशासन का किसान विरोधी चेहरा बेनकाब : जगजीत सिंह डल्लेवाल संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-नेतृत्वक) के वरिष्ठ नेता जगजीत सिंह डल्लेवाल ने बताया कि इस अनुशासित और शांतिपूर्ण पदयात्रा में देश के विभिन्न हिस्सों से 51 किसान शामिल हो रहे हैं, जिनके साथ लगभग 200 स्वयंसेवक मौजूद हैं. डल्लेवाल ने कहा, “पहले प्रशासन को समस्या थी जब किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर आते थे. अब जब 51 किसानों का एक छोटा समूह पैदल दिल्ली जाना चाहता है, तब भी उन्हें रोका जा रहा है. इससे साबित होता है कि रास्ता किसान नहीं, बल्कि प्रशासन खुद रोकती है और उसका किसान विरोधी चेहरा सामने आ रहा है.” केंद्रीय मंत्रियों से बातचीत पर अड़े किसान किसान नेता ने साफ किया कि हरियाणा पुलिस के साथ शुरुआती दौर की वार्ता में राज्य के मुख्यमंत्री के साथ बैठक का प्रस्ताव आया था, जिसे किसानों ने नकार दिया. डल्लेवाल के मुताबिक, “हरियाणा के मुख्यमंत्री से बातचीत से समस्या का हल नहीं निकलेगा. इस मुद्दे के समाधान के लिए केंद्रीय कृषि मंत्री या केंद्र प्रशासन के किसी वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठक की जरूरत है.” सीमा पर शांतिपूर्वक डटे रहेंगे : किसान नेता किसान नेताओं ने घोषणा की है कि वे सीमा पर शांतिपूर्वक डटे रहेंगे और यदि केंद्र प्रशासन की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं होती है, तो वे अपने तय कार्यक्रम के अनुसार दिल्ली की ओर आगे बढ़ने का प्रयास करेंगे. ये भी पढ़ें: JPSC Student Protest: क्या प्रेशर में आ गई कांग्रेस, 20 अगस्त से पहले छात्रों से होगी बात? The post 228 KM पदयात्रा, बॉर्डर सील और पुलिस का पहरा: जानिए किन मांगों को लेकर दिल्ली कूच कर रहे किसान appeared first on Naya Vichar.

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UP में 2027 का मुकाबला होगा रोचक: क्या ब्राह्मण वोट बैंक में सेंध लगा पाएगा विपक्ष? आंकड़े कुछ और, सियासी संकेत कुछ और

UP Politics: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की सियासी बिसात अभी पूरी तरह बिछी भी नहीं है, लेकिन जातीय समीकरणों की हलचल तेज हो गई है. खासतौर पर ब्राह्मण मतदाताओं को लेकर भाजपा, समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच खींचतान बढ़ती दिख रही है. विपक्ष जहां भाजपा के परंपरागत ऊपरी जाति समर्थन में सेंध लगाने की कोशिश कर रहा है, वहीं भाजपा भी अपने सामाजिक समीकरण को साधने में जुटी है. हालांकि, यह दावा करना कि ब्राह्मणों का भाजपा से बड़े पैमाने पर मोहभंग हो चुका है, मौजूदा उपलब्ध चुनावी आंकड़ों से साबित नहीं होता. इसके उलट 2024 के लोकसभा चुनाव के CSDS-लोकनीति पोस्ट-पोल आंकड़ों के मुताबिक उत्तर प्रदेश में करीब 74 प्रतिशत ब्राह्मण मतदाताओं ने भाजपा नीत गठबंधन को वोट दिया, जबकि करीब 19 प्रतिशत ने सपा-कांग्रेस गठबंधन का समर्थन किया. 2019 में भाजपा+ के पक्ष में यह आंकड़ा करीब 84 प्रतिशत था. यानी पांच साल में भाजपा का ब्राह्मण समर्थन घटा जरूर, लेकिन समुदाय का बड़ा हिस्सा अब भी भाजपा के साथ रहा. 2024 का चुनाव बना पहला बड़ा संकेत 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में भाजपा को बड़ा झटका लगा. 2019 में 62 सीट जीतने वाली भाजपा 2024 में घटकर 33 पर आ गई, जबकि सपा 37 और कांग्रेस छह सीटों पर पहुंची. CSDS-लोकनीति के आंकड़े बताते हैं कि भाजपा के समर्थन में सबसे स्पष्ट गिरावट पिछड़े और कुछ अन्य सामाजिक समूहों में रही, जबकि ब्राह्मण मतदाताओं का बड़ा हिस्सा अब भी भाजपा के साथ था. यही वजह है कि 2027 के लिए ब्राह्मण वोट को लेकर भाजपा विरोधी दलों की उम्मीद बढ़ी है. मगर इसे भाजपा से पूरी तरह टूट चुका वोट बैंक मान लेना जल्दबाजी होगी. फिर क्यों बढ़ी ‘ब्राह्मण नाराजगी’ की चर्चा? दरअसल, पिछले कुछ महीनों में भाजपा के भीतर ब्राह्मण विधायकों और नेताओं की सक्रियता ने इस चर्चा को हवा दी है. दिसंबर 2025 में भाजपा के तीन दर्जन से ज्यादा ब्राह्मण विधायक और विधान परिषद सदस्य लखनऊ में एक भोज में जुटे थे. बैठक को लेकर पार्टी के भीतर नेतृत्वक चर्चा हुई. इसके बाद प्रदेश भाजपा अध्यक्ष पंकज चौधरी ने जातीय आधार पर इस तरह की गोलबंदी को लेकर सार्वजनिक रूप से नाराजगी जताई थी. इस घटनाक्रम को नेतृत्वक विश्लेषकों ने सिर्फ सामाजिक भोज नहीं, बल्कि पार्टी के भीतर प्रतिनिधित्व और नेतृत्वक हिस्सेदारी को लेकर उठ रहे सवालों के संकेत के तौर पर भी देखा. हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि भोज में शामिल नेताओं ने इसे औपचारिक नेतृत्वक बैठक नहीं बताया था. भाजपा में प्रतिनिधित्व का सवाल कितना सही? ब्राह्मणों की नाराजगी के दावे की दूसरी तरफ आंकड़े भाजपा के लिए राहत देने वाले भी हैं. जनवरी 2026 की एक रिपोर्ट में उपलब्ध संगठनात्मक और मंत्रिमंडलीय आंकड़ों के विश्लेषण के आधार पर बताया गया कि यूपी भाजपा के 45 प्रमुख संगठनात्मक पदों में नौ ब्राह्मण थे, जबकि योगी मंत्रिमंडल में सात ब्राह्मण मंत्री थे. यानी यह कहना भी सही नहीं होगा कि भाजपा ने ब्राह्मणों को पूरी तरह नेतृत्वक प्रतिनिधित्व से बाहर कर दिया है. मई 2026 के मंत्रिमंडल विस्तार में भी ब्राह्मण चेहरे के रूप में सपा से भाजपा में आए मनोज पांडेय को कैबिनेट मंत्री बनाया गया. हालांकि विस्तार का बड़ा फोकस ओबीसी और दलित प्रतिनिधित्व पर रहा. अखिलेश ने बदला PDA का ‘P’! भाजपा के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि विपक्ष अब सिर्फ मुस्लिम, यादव या दलित समीकरण तक सीमित नहीं रहना चाहता. समाजवादी पार्टी ने ब्राह्मणों तक पहुंच बढ़ाने की रणनीति तेज कर दी है. अगस्त 2026 में अखिलेश यादव ने PDA में ‘P’ को ‘पंडित’ के अर्थ में भी इस्तेमाल करने की बात कही. इससे साफ संकेत मिलता है कि सपा 2027 में अपने सामाजिक गठबंधन का दायरा ऊंची जातियों तक बढ़ाना चाहती है. इससे पहले जून में भी सपा ने ब्राह्मण नेताओं की बैठक कर समुदाय के बीच अपना संदेश मजबूत करने की कोशिश की थी. मायावती भी पुराने ‘ब्राह्मण-दलित’ फॉर्मूले की ओर बहुजन समाज पार्टी भी ब्राह्मण मतदाताओं को दोबारा अपने पाले में लाने की कोशिश कर रही है. पार्टी 2007 के अपने पुराने सामाजिक इंजीनियरिंग मॉडल को नए रूप में खड़ा करने की कोशिश कर रही है. रिपोर्टों के मुताबिक बसपा संगठन में ब्राह्मणों को ज्यादा भूमिका देने और 2027 के लिए पर्याप्त संख्या में ब्राह्मण उम्मीदवार उतारने की रणनीति पर काम कर रही है. इसका मतलब साफ है—ब्राह्मण वोट को लेकर मुकाबला अब एकतरफा नहीं रह गया है. फैक्ट चेक: क्या सचमुच भाजपा से टूट रहा है ब्राह्मण वोट? दावा: ब्राह्मणों का भाजपा से बड़े पैमाने पर मोहभंग हो चुका है. फैक्ट: अभी उपलब्ध प्रमुख चुनावी आंकड़े इस दावे की पुष्टि नहीं करते. 2024 में करीब 74% ब्राह्मण मतदाताओं का भाजपा+ के पक्ष में जाना बताता है कि समुदाय का बड़ा हिस्सा अब भी भाजपा के साथ है. हालांकि 2019 के करीब 84% से यह समर्थन घटा है. दूसरा तथ्य: भाजपा के भीतर ब्राह्मण विधायकों की सामुदायिक बैठक और प्रतिनिधित्व को लेकर चर्चाएं जरूर हुई हैं. तीसरा तथ्य: सपा और बसपा दोनों ब्राह्मणों को सक्रिय रूप से साधने में जुटे हैं. इसलिए फिलहाल सबसे सटीक निष्कर्ष यही है कि ‘ब्राह्मण भाजपा से पूरी तरह दूर हो गए हैं’ कहना गलत होगा, लेकिन भाजपा के लिए इस समुदाय में पहले जैसी स्वतःस्फूर्त नेतृत्वक पकड़ को लेकर चुनौती जरूर बढ़ी है. 2027 में निर्णायक हो सकता है ‘स्विंग वोट’ उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी का अनुमान विभिन्न स्रोतों में अलग-अलग मिलता है, लेकिन नेतृत्वक विश्लेषणों में इसे आम तौर पर करीब 10-12 प्रतिशत के आसपास माना जाता है. कई विधानसभा क्षेत्रों में उनकी संख्या इससे भी अधिक प्रभावी हो सकती है. ऐसे में 2027 में पूरी तस्वीर इस बात पर निर्भर करेगी कि ब्राह्मण मतदाताओं का कितना हिस्सा भाजपा के साथ बना रहता है और कितना हिस्सा सपा, बसपा या किसी अन्य विकल्प की ओर जाता है. यानी असली सवाल ‘ब्राह्मण भाजपा के साथ हैं या नहीं’ से ज्यादा बड़ा है—क्या भाजपा 2024 में दिखाई पड़ी सामाजिक दरार को 2027 से पहले भर पाती है? अगर भाजपा ब्राह्मणों के साथ अपने पुराने भरोसे को कायम रखती है तो विपक्ष की सेंध सीमित रह सकती है. लेकिन यदि ब्राह्मण वोट का एक महत्वपूर्ण

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