CJP Protest: सीजेपी फाउंडर अभिजीत दीपके ने ‘56 इंच के महामानव’ का जिक्र किया. उन्होंने कहा कि रेलवे, मेट्रो रेल और सार्वजनिक परिवहन सेवाएं बंद हो सकती हैं, लेकिन हम फिर भी प्रोटेस्ट करेंगे. इसी मुद्दे पर महाराष्ट्र बीजेपी नेता संजय निरुपम ने कहा कि यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और बदतमीजी के बीच फर्क है.
संजय निरुपम ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा, “शटअप, यह FoE (Freedom of Expression) नहीं, बदतमीजी है. उन्होंने कहा कि तीनों (अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका) को कानून के बर्फ की सिल्ली पर लिटाकर मुकदमों के डंडे से पीटना चाहिए. फिर इनकी Gen Z गिरी निकलेगी.” उनका यह बयान अपने तीखे और विवादित शब्दों के कारण चर्चा का विषय बन सकता है.
क्या है FoE, जिस पर छिड़ी बहस?
FoE का पूरा नाम Freedom of Expression यानी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है. लोकतंत्र में लोगों को अपने विचार रखने और प्रशासन या नेतृत्वक नेताओं की आलोचना करने का अधिकार प्राप्त है. हालांकि, इस अधिकार की कानूनी सीमाएं भी हैं. किसी खास बयान या गतिविधि के मामले में यह तय करने के लिए कि वह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है या कानून का उल्लंघन करता है, उसके पूरे संदर्भ और लागू कानूनों को देखना जरूरी है.
ये भी पढ़ें: CJP Protest: 9 और 10 अक्टूबर को जम्मू-कश्मीर- दिल्ली जाने वाली 13 ट्रेनें रद्द, यात्रियों की बढ़ी परेशानी
The post CJP Protest: संजय निरुपम बोले- दीपेक, रांका, सौरव को कानून के बर्फ की सिल्ली पर लिटाकर के डंडे से पीटना चाहिए appeared first on Naya Vichar.
