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Gupta Empire Golden Age Of India : गुप्त काल को हिंदुस्तानीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाता है. यह काल था चौथी शताब्दी से छठी शताब्दी के बीच का जो लगभग 320 से 550 ईस्वी तक माना जाता है. इस दौर में हिंदुस्तानीय सभ्यता ऊंचाई पर थी. नेतृत्व, कला, संस्कृति, विज्ञान, गणित और स्थापत्य के क्षेत्र में हिंदुस्तानीय सभ्यता को यूरोप भी टक्कर नहीं दे पा रहा है. इस काल ने हमें आर्यभट्ट का शून्य और कालिदास का अभिज्ञान शकुंतलम् भी दिया है.
गुप्त काल हिंदुस्तानीय इतिहास के लिए इसलिए भी बहुत खास है क्योंकि इसने हमें कई ऐसे सबूत दिए जिनके आधार पर हिंदुस्तानीय इतिहास को और भी बेहतर ढंग से समझा जा सके. गुप्त काल का एक ऐसा ही शिलालेख आज भी उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिसे पहले इलाहाबाद कहा जाता था, वहां मौजूद है. यह शिलालेख गुप्तकाल के महान शासक समुद्रगुप्त के समय का है, जिसमें उस वक्त की नेतृत्व, हिंदुस्तान की सामाजिक व्यवस्था, कला–साहित्य आदि के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है.
कहां हैं गुप्तकालीन शिलालेख?
गुप्त कालीन कई शिलालेख बंगाल से काठियावाड़ तक कई इलाकों में मिले हैं. इनकी मदद से गुप्तों के इतिहास की क्रोनोलॉजी को समझना संभव हो पाया. साथ ही हमें उस वक्त की जानकारी भी मिली. गुप्तकालीन शिलालेखों में इलाहाबाद में मौजूद अशोक स्तंभ सबसे प्रमुख सबूत है, जिसपर उस वक्त की तमाम बातें बहुत ही स्पष्टता के साथ लिखी हैं. इस स्तंभ को मौर्य वंश के महान शासक सम्राट अशोक ने स्थापित किया था. इस स्तंभ पर उनके शिलालेख भी मौजूद हैं, बाद में समुद्रगुप्त ने भी इस स्तंभ पर शिलालेख करवाया.
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गुप्तकालीन शिलालेख में क्या बताया गया है?

अशोक स्तंभ पर ऊपर की ओर सम्राट अशोक के शासनकाल की बातें लिखी हुई हैं. उसके बाद इस स्तंभ पर गुप्तकालीन शिलालेख है. जिसमें समुद्रगुप्त के विजय अभियानों, उस वक्त की नेतृत्व और समाज के बारे में विस्तार से बताया गया है. यह स्तंभ यह बताता है कि गुप्तवंश की स्थापना श्रीगुप्त ने की थी. हालांकि उसका विस्तार चंद्रगुप्त प्रथम के समय हुआ. चंद्रगुप्त प्रथम समुद्रगुप्त के पिता थे और उन्होंने खुद गद्दी त्यागकर समुद्रगुप्त को सत्ता सौंपी थी. इस शिलालेख में समुद्रगुप्त का स्तुतिगान किया गया है. इसे उनके दरबार में काम करने वाले हरिषेण ने लिखा है . गुप्त कालीन शिलालेख का महत्व इसलिए बहुत ज्यादा है, क्योंकि यह हमें हिंदुस्तानीय इतिहास को समझने में मदद करता है.
हिंदुस्तानीय इतिहास का स्वर्ण युग किसे कहते हैं?
गुप्तकाल को हिंदुस्तानीय इतिहास का स्वर्ण युग कहा जाता है.
गुप्तवंश की स्थापना किसने की थी?
श्रीगुप्त ने गुप्तवंश की स्थापना की थी.
गुप्त साम्राज्य के किस राजा को हिंदुस्तान का नेपोलियन कहा जाता है?
समुद्रगुप्त को हिंदुस्तान का नेपोलियन कहा जाता है.
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कहां है मुगलों की शान तख्त ए ताऊस, जिसको बनाने में लगा था 1150 किलो सोना, कोहिनूर और दरिया ए नूर हीरा
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