Krishna Janmashtami Vrat Katha: आज देशभर में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जा रहा है. ये दिन श्रीकृष्ण को समर्पित है और इस दिन को भक्त कान्हा के जन्मदिन के रूप में मनाते हैं. इस दिन श्रीकृष्ण की व्रत कता का भी काफी महत्व है. कंस का अत्याचार और भगवान कृष्ण के अद्भुत जन्म से जुड़ी कहानी पूजा के तौर पर और भक्त के तौर पर भी काफी उत्साहित करती है. यहां हम बता रहे हैं श्रीकृष्ण के जन्म की कहानी
कृष्ण जन्माष्टमी व्रत कथा
एकबार देवराज इंद्र ने नारद मुनि से पूछा- हे ब्रह्मपुत्र! क्या ऐसा कोई व्रत है, जो सभी व्रतों में श्रेष्ठ हो, कोई ऐसा व्रत है जिससे मनुष्य को लाभ, मुक्ति, भोग और मोक्ष की प्राप्ति हो. इसपर इंद्रदेव ने नारदजी को त्रेतायुग के अंत और द्वापर युग के प्रारंभ की कहानी सुनाई.
कंस का अत्याचार और आकाशवानी
नारद जी बोले , उस समय कंस नाम का एक बहुत ही गलत काम करने वाला दैत्य था. उसके पिता उग्रसेन उसकी चालाकी और बुरे किरदार से हमेशा दुखी रहते थे. जब पिता ने उसे डांटा और समझाया, तो कंस ने पिता की एक नहीं सुनी. उल्टे उन्हें राजगद्दी से उतार दिया और खुद राजा बन बैठा. उसके बाद मथुरा में लोगों के साथ उसने और ज्यादा जुल्म करने शुरू कर दिए.
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अब एक हैरान करने वाली बात — इतना खतरनाक कंस भी अपनी बहन देवकी से दिल से प्यार करता था. खुद ही उसने देवकी की शादी वासुदेव से तय की और खुशी-खुशी उनका विदा करने रथ पर बैठ गया. लेकिन तभी अचानक आसमान में से एक आवाज गूंजी , “अरे बुद्दू! जिस बहन को तू प्यार से रुखसत कर रहा है, ना उसी के आठवें शिशु के हाथों तेरा अंत होगा!”
कारागार में सात बालकों का वध
बस ये आवाज सुनते ही कंस का बुरा हाल हो गया. गुस्से में आकर वो सीधा वासुदेव को मारने ही वाला था कि तभी देवकी ने आगे बढ़कर कहा, “रुको! तुम मुझ पर भरोसा करो, मैं जो भी बच्चा जन्मूंगी, पैदा होते ही खुद तुम्हें दे दूंगी.” ये सुनकर कंस मान गया, पर उसने दोनों को कैदी बनाकर कालकोठरी में बंद कर दिया. इसके बाद वादे के हिसाब से एक के बाद एक सातों बच्चों को कंस अपने हाथों से मार डालता रहा.
भगवान कृष्ण का अद्भुत जन्म
अपने आठवें शिशु के आने से पहले भगवान विष्णु खुद देवकी और वासुदेव के सपने में आए और बोले , “मैं तुम्हारे यहां इंसान बनकर जन्म लूंगा, लेकिन जन्म के बाद मुझे नंद और यशोदा के पास छोड़ देना.” फिर भाद्रपद के कृष्ण पक्ष की उसी रात, जब गोकुल में यशोदा का भी बच्चा होने वाला था, देवकी ने कृष्ण को जन्म दे दिया. भगवान के जादू से वहां के सारे पहरेदार गहरी नींद में डूब गए.
फिर वासुदेव जी ने शिशु को सूप में लिटाया और रात के अंधेरे में नंद के घर की तरफ निकल पड़े. उस वक्त यमुना जी पानी से लबालब भरी हुई थीं, लेकिन जैसे ही शिशु के पैर उसके पानी को छुए, नदी अपने आप शांत हो गई. गोकुल पहुंचकर वासुदेव जी ने अपने बेटे को यशोदा की बेटी से बदल लिया और चुपचाप वापस जेल में आ गए.
योगमाया की आकाशवाणी और कंस वध
सुबह होते ही पहरेदार दौड़कर कंस के पास पहुंचे , “महाराज, देवकी के यहां लड़की हुई है.” ये सुनकर कंस का बुरा हाल हुआ. वो बच्ची को उठाकर चट्टान पर पटकने ही वाला था कि वो बच्ची उड़कर आसमान में जा बैठी और बिजली बनकर चमकने लगी! भारी आवाज में बोली , “काम तमाम करने वाले! जो तुझे मारेगा, वो गोकुल में जन्म चुका है. और सुन ले, मैं विष्णु की माया वैष्णवी हूं.”
बाद में कंस ने पूतना राक्षसी को भेजा, जो जहरीला दूध पिलाकर कान्हा को खत्म करने आई थी. लेकिन नन्हे कान्हा ने दूध पीते-पीते ही उसकी सांसें ही खींच लीं! अंत में बड़े होकर श्रीकृष्ण ने कंस का खात्मा किया और मथुरा वालों को उसके आतंक से मुक्त करा दिया. जीवन भर अनगिनत लीलाएं करने वाले कान्हा ने गीता के उपदेश देकर पूरी दुनिया को वो ज्ञान दिया, जो आज के जमाने में भी उतना ही काम आता है.
जन्माष्टमी 2026 व्रत शुभ मुहूर्त?
पंचांग के अनुसार, जन्माष्टमी पर निशीथ काल की पूजा का मुहूर्त 4 सितंबर को मध्यरात्रि 11 बजकर 26 मिनट से 12 बजकर 12 मिनट तक है. जबकि वृषभ लग्न रात 9 बजकर 43 मिनट से 11 बजकर 40 मिनट तक रहेगा. इस साल निशीथ काल की पूजा के लिए 46 मिनट का समय मिलेगा.
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