मध्य कोलकाता के कैमक स्ट्रीट स्थित ममता ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस (TMC) के दफ्तर से होर्डिंग हटाने को लेकर हुए विवाद में नेतृत्वक घमासान तेज हो गया है. कोलकाता पुलिस ने इस मामले में तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से बुधवार को कैमक स्ट्रीट स्थित उनके कार्यालय से जुड़े प्रकरण पर 5 घंटे से अधिक समय तक कड़ी पूछताछ की.
पूछताछ के बाद शेक्सपीयर सरणी थाने से बाहर निकलते ही डायमंड हार्बर के सांसद अभिषेक बनर्जी ने पुलिस और सत्ताधारी भाजपा प्रशासन पर नेतृत्वक प्रतिशोध और बदले की कार्रवाई का सीधा आरोप मढ़ दिया.
क्या है 27 अगस्त का पूरा विवाद
मामला 27 अगस्त का है, जब कोलकाता नगर निगम (KMC) और पुलिस की टीम कैमक स्ट्रीट स्थित इमारत से तृणमूल कांग्रेस और उसके चुनाव चिह्न ‘जोड़ा फूल’ वाले होर्डिंग हटाने पहुंची थी.
कोलकाता नगर निगम (KMC) का आरोप है कि होर्डिंग हटाने की कार्रवाई के दौरान पुलिसकर्मियों और निगम कर्मचारियों के साथ धक्का-मुक्की, बदसलूकी और मारपीट की गयी.
इस हंगामे के सिलसिले में शेक्सपीयर सरणी थाने में 3 अलग-अलग प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गयी थी. इसके अलावा अग्निशमन विभाग (Fire Department) ने भी अलग से नोटिस जारी किया था.
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अभिषेक बनर्जी को जारी किये गये 2-2 समन
मामले की जांच कर रही पुलिस ने पूछताछ के लिए अभिषेक बनर्जी के आवास पर 2 नोटिस भेजे थे. इसके बाद वे सुबह करीब 11:30 बजे शेक्सपीयर सरणी थाने पहुंचे थे.
सिर्फ TMC को बनाया जा रहा निशाना : अभिषेक
पूछताछ खत्म होने के बाद पत्रकारों से बात करते हुए अभिषेक बनर्जी ने पुलिस और प्रशासन को आड़े हाथों लिया. उन्होंने कहा कि पुलिस अपने अधिकारियों और बदले की भावना से काम करने वाली इस प्रशासन के इशारे पर काम कर रही है. चाहे ईडी हो या सीबीआई, जब भी समन मिला, मैं हमेशा हाजिर हुआ हूं. लेकिन सारधा और नारदा घोटाले में शामिल व्यक्ति (शुभेंदु अधिकारी) पर कार्रवाई क्यों नहीं होती?
अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि कैमक स्ट्रीट पर कई नेतृत्वक दलों के बोर्ड और होर्डिंग लगे थे, लेकिन केवल तृणमूल कांग्रेस के होर्डिंग को ही चुन-चुनकर निशाना बनाया गया. पार्टी के बैंक खातों को फ्रीज किया गया.
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चुनाव आयोग और CEC पर भी पूछे सवाल
टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और केंद्र प्रशासन की भी जमकर आलोचना की. उन्होंने कहा कि राज्य और केंद्र की प्रशासनें अवैध चुनावी तरीकों से बनी हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के नाम पर मतदाता सूची से लाखों वैध नागरिकों के नाम हटाये गये हैं. इस गड़बड़ी के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए.
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