Iran Enriched Uranium Nuclear Deal: अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से सामने आई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि ईरान अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ने के लिए तैयार हो गया है. इसे अमेरिका की अगुआई में तैयार हो रहे उस व्यापक समझौते का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद मिडिल ईस्ट में जारी संघर्ष को रोकना है. द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि यह घटनाक्रम हालिया कूटनीतिक कोशिशों में सबसे बड़ा मोड़ माना जा रहा है. हालांकि अभी यह पूरी तरह तय नहीं हुआ है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किस प्रक्रिया के तहत छोड़ेगा. इस पर अंतिम समझौते के बाद विस्तार से बातचीत की जाएगी.
अभी तय नहीं हुआ यूरेनियम हटाने का तरीका
रिपोर्ट के मुताबिक फिलहाल समझौता शुरुआती स्तर पर है. सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईरान अपने यूरेनियम भंडार को किस तरीके से छोड़ेगा. अधिकारियों ने कहा कि यूरेनियम को किसी दूसरे देश भेजा जा सकता है, उसका संवर्धन स्तर कम किया जा सकता है, या उसे इस तरह निष्क्रिय बनाया जा सकता है ताकि उसका इस्तेमाल हथियार बनाने में न हो सके. इन तकनीकी पहलुओं पर आगे होने वाली परमाणु वार्ताओं में विस्तार से चर्चा होने की संभावना है.
कितना यूरेनियम है ईरान के पास?
अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के अनुसार ईरान के पास इस समय लगभग 400 किलोग्राम ऐसा यूरेनियम मौजूद है, जिसे 60 प्रतिशत तक संवर्धित किया जा चुका है. यह स्तर हथियार-ग्रेड यूरेनियम के काफी करीब माना जाता है. इजरायली अधिकारियों का लंबे समय से दावा रहा है कि इस सामग्री को और परिष्कृत करके कई परमाणु बम तैयार किए जा सकते हैं.
2015 वाले परमाणु समझौते जैसा मॉडल भी चर्चा में
बातचीत में एक विकल्प उस मॉडल को भी माना जा रहा है जो 2015 के परमाणु समझौते के दौरान अपनाया गया था. तब पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में ईरान ने अपने संवर्धित यूरेनियम का बड़ा हिस्सा रूस भेज दिया था. अब भी ऐसी संभावना पर चर्चा चल रही है कि यूरेनियम को किसी तीसरे देश में भेजा जाए या उसका संवर्धन स्तर इतना कम कर दिया जाए कि वह हथियार बनाने लायक न रहे.
बातचीत में सबसे बड़ी अड़चन बना था यही मुद्दा
रिपोर्ट्स के अनुसार यूरेनियम भंडार का मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में सबसे कठिन बिंदुओं में शामिल था. ईरानी प्रतिनिधि चाहते थे कि इस पर फैसला बाद के चरणों में लिया जाए, लेकिन अमेरिकी पक्ष ने साफ कर दिया कि शुरुआती समझौते में कम से कम सिद्धांत रूप में प्रतिबद्धता जरूरी होगी. अमेरिकी अधिकारियों ने कथित तौर पर मध्यस्थों के जरिए ईरान को यह संदेश भी दिया कि अगर शुरुआती समझौते में यूरेनियम भंडार को लेकर सहमति नहीं बनी, तो बातचीत टूट सकती है और सैन्य कार्रवाई दोबारा शुरू हो सकती है.
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ट्रंप ने कहा था- समझौते के करीब हैं दोनों देश
यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा था कि अमेरिका और ईरान युद्ध खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा सामान्य बनाने के लिए एक अहम समझौते के करीब पहुंच चुके हैं. हालांकि ट्रंप ने प्रस्तावित डील की शर्तों का खुलासा नहीं किया था. उनके मुताबिक यह प्रस्तावित समझौता केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई क्षेत्रीय देश भी शामिल हैं. बाद में अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान ने सिद्धांत रूप में अपने लगभग हथियार-स्तर तक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को छोड़ने की सहमति जताई है.

आगे की बातचीत में क्या होगा? अरबों डॉलर की संपत्ति भी हो सकती है रिलीज
अगले दौर की वार्ता में ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम के भविष्य पर भी चर्चा होने की उम्मीद है. रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका लंबे समय तक संवर्धन गतिविधियों पर रोक चाहता है, जबकि ईरान अपेक्षाकृत कम अवधि का प्रस्ताव दे रहा है.
प्रस्तावित समझौते में विदेशों में फंसी ईरान की अरबों डॉलर की संपत्तियों को जारी करने का मुद्दा भी शामिल बताया जा रहा है. रिपोर्ट के अनुसार पुनर्निर्माण सहायता से जुड़े अधिकांश फंड तभी जारी किए जाएंगे, जब अंतिम परमाणु समझौता पूरा हो जाएगा.
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