डकरा से सुनील कुमार की रिपोर्ट
Ranchi News: बीसीसीएल में नौकरी दिलाने के नाम पर करोड़ों रुपये की ठगी के मामले में अब कंपनी प्रबंधन भी सख्त नजर आ रहा है. बीसीसीएल के सीएमडी मनोज कुमार अग्रवाल ने साफ कहा है कि यदि इस गिरोह में किसी बीसीसीएल कर्मी की संलिप्तता सामने आती है तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने लोगों से अपील की है कि यदि किसी कर्मचारी की भूमिका की जानकारी हो तो उसे प्रबंधन तक पहुंचाएं. सीएमडी ने कहा कि उन्होंने इस मामले में प्रकाशित समाचारों को पढ़ा है और पुलिस में शिकायत भी दर्ज कराई गई है. पुलिस अपना काम कर रही है, लेकिन यदि किसी बीसीसीएल कर्मी की संलिप्तता साबित होती है तो विभागीय स्तर पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी.
समाचार छपने के बाद सक्रिय हुए गिरोह के सदस्य
इस मामले में एक नया मोड़ तब आया, जब नया विचार में समाचार प्रकाशित होने के बाद गिरोह से जुड़े लोग अचानक अपने-अपने उम्मीदवारों के संपर्क में आने लगे. बताया जा रहा है कि पिछले सात से आठ महीने से जिन लोगों ने उम्मीदवारों से संपर्क तोड़ रखा था, वे अब फोन कर स्थिति संभालने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि बातचीत पूरी तरह एकतरफा बताई जा रही है. पैसे लेने वाले लोग अपने हिसाब से मोबाइल पर बात कर फोन बंद कर दे रहे हैं. कई पीड़ितों का कहना है कि गिरोह के सदस्य अब मामले को शांत करने और समय लेने की कोशिश कर रहे हैं.
कैश लेने वालों पर बढ़ा दबाव
एक भुक्तभोगी ने बताया कि जिन लोगों ने नकद राशि ली थी, वे अब सबसे ज्यादा परेशान हैं. नया विचार में लगातार नाम सामने आने के बाद गिरोह के लोग अपने उम्मीदवारों पर दबाव बना रहे हैं कि वे अखबार और उसकी वेबसाइट में समाचार छपवाना बंद कराएं. पीड़ितों को यह भी कहा जा रहा है कि यदि मामला ज्यादा बढ़ा तो पैसे वापस नहीं मिलेंगे, क्योंकि अधिकांश लेन-देन नकद में हुआ है और उसका कोई आधिकारिक रिकॉर्ड मौजूद नहीं है. ऐसे में पुलिस भी कुछ नहीं कर पाएगी. हालांकि कई लोगों का मानना है कि गिरोह के सदस्य केवल समय बिताने और मामला ठंडा करने की रणनीति अपना रहे हैं. पीड़ितों को अब भी अपने पैसे वापस मिलने की उम्मीद कम नजर आ रही है.
अब नौकरी नहीं, पैसे लौटाने की बात
जो लोग अब तक बीसीसीएल में नौकरी दिलाने का भरोसा देकर पैसे ले रहे थे, वे अब नौकरी की बात करने से बच रहे हैं. गिरोह से जुड़े लोग उम्मीदवारों को बता रहे हैं कि समाचारें प्रकाशित होने के बाद “सेटिंग” खराब हो गई है और अब नौकरी नहीं हो पाएगी. सूत्रों के अनुसार, अब अधिकांश लोग पैसे वापस करने के लिए समय मांग रहे हैं. हालांकि पीड़ितों का कहना है कि अब तक किसी को पैसा वापस नहीं मिला है और केवल आश्वासन दिया जा रहा है.
जमीन और बैकलाग नौकरी का दिखाया सपना
पीड़ितों के अनुसार गिरोह के सदस्य लोगों को जमीन के बदले नौकरी, बैकलाग बहाली और झरिया रिहैबिलिटेशन योजना के नाम पर नौकरी दिलाने का सपना दिखाते थे. कई परिवारों ने अपने बच्चों के भविष्य की उम्मीद में लाखों रुपये तक दे दिए. बताया जा रहा है कि बेरोजगार युवाओं और उनके परिवारों को यह भरोसा दिलाया जाता था कि बीसीसीएल में अंदर तक उनकी पहुंच है और नौकरी आसानी से लग जाएगी. इसी भरोसे में लोग फंसते चले गए.
फर्जी नियुक्ति पत्र तक बांटे गए
मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि पैसे लेने के बाद गिरोह के लोग मेडिकल जांच, बायोमेट्रिक हस्ताक्षर और बीटीसी ट्रेनिंग तक कराने का नाटक करते थे. इसके बाद उम्मीदवारों को फर्जी नियुक्ति पत्र भी जारी किए गए. कई परिवारों ने अपने जीवनभर की जमा पूंजी बच्चों की नौकरी के भरोसे दे दी. अब वे लोग नियुक्ति मिलने का इंतजार कर रहे हैं, जबकि धीरे-धीरे उन्हें ठगी का एहसास हो रहा है.
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पुलिस जांच और विभागीय कार्रवाई पर टिकी नजर
इस पूरे मामले में अब लोगों की नजर पुलिस जांच और बीसीसीएल प्रबंधन की कार्रवाई पर टिकी हुई है. पीड़ित चाहते हैं कि गिरोह में शामिल सभी लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए. सीएमडी के बयान के बाद यह साफ हो गया है कि यदि किसी कर्मचारी की भूमिका सामने आती है तो कंपनी स्तर पर भी कार्रवाई तय मानी जा रही है. वहीं पीड़ित परिवार अब अपने पैसे वापस मिलने और दोषियों पर कार्रवाई की उम्मीद लगाए बैठे हैं.
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