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पटना एयरपोर्ट के रनवे विस्तार के लिए फिर होगी जू की जमीन की मापी, जानिए दोबारा सर्वे कराने की नौबत क्यों आई

Patna Airport: (अनुपम कुमार) पटना एयरपोर्ट के रनवे विस्तार और एप्रोच फनल को मजबूत करने के लिए एक बार फिर पटना जू की जमीन का सर्वे किया जाएगा. एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) अब एप्रोच लाइट सिस्टम को नए तरीके से अपग्रेड करने की तैयारी में है. इसी वजह से जमीन की जरूरत और पूरा प्लान दोबारा तय किया जा रहा है.

पहले मांगी गई थी 360 मीटर जमीन

पिछले साल एयरपोर्ट अथॉरिटी ने वन एवं पर्यावरण विभाग से पटना जू के अंदर 360 मीटर लंबी जमीन की मांग की थी. यहां 60-60 मीटर की दूरी पर छह एप्रोच लाइट लगाने की योजना थी. इसके लिए आसपास के पेड़ों की ऊंचाई भी 10 से 15 फीट तक सीमित करनी थी. लेकिन अब सिर्फ एप्रोच लाइट ही नहीं, बल्कि रनवे विस्तार पर भी विचार किया जा रहा है.

रनवे बढ़ा तो जू की बड़ी जमीन होगी प्रभावित

अगर रनवे विस्तार की योजना को मंजूरी मिलती है तो पीर अली पथ को पार करते हुए जू के गेट नंबर-2 तक करीब 60 मीटर चौड़ी जमीन की जरूरत पड़ेगी. इससे जू का बड़ा हिस्सा प्रभावित होगा. रनवे जू के करीब पहुंचने पर विमान उड़ान भरते समय तेज आवाज करेंगे, जिसका असर जानवरों की सेहत पर पड़ सकता है. ऐसे में रनवे के आसपास बने कई जानवरों के बाड़ों को दूसरी जगह शिफ्ट करना पड़ेगा. करीब 17 हेक्टेयर जमीन खाली करनी पड़ सकती है, जो पटना जू के कुल क्षेत्रफल का लगभग 28 प्रतिशत हिस्सा है.

बिना बदले की जमीन दिए नहीं मिलेगा जू का हिस्सा

पटना जू की जमीन संरक्षित वन क्षेत्र में आती है. नियमों के मुताबिक, वन भूमि का अधिग्रहण तभी हो सकता है जब उसके बदले उतनी ही दूसरी जमीन वन क्षेत्र के रूप में दी जाए. लेकिन एयरपोर्ट अथॉरिटी के पुराने प्रस्ताव में पटना जू को बदले में जमीन देने का स्पष्ट जिक्र नहीं था. इसी कारण वन विभाग की प्रस्ताव मूल्यांकन समिति ने आपत्ति जताते हुए प्रस्ताव वापस कर दिया था.

अब बदलेगा पूरा प्लान

एयरपोर्ट अथॉरिटी ने कहा है कि वह अब एप्रोच लाइट सिस्टम का अपग्रेडेड वर्जन लगाने पर काम कर रही है. इससे जमीन की जरूरत पहले से अलग हो सकती है. इसी वजह से जू की जमीन का नया सर्वे कराया जाएगा और उसके बाद नया प्रस्ताव तैयार कर वन विभाग को भेजा जाएगा.

कई जानवरों के बाड़े हटाने पड़ सकते हैं

रनवे विस्तार की स्थिति में हाथी, गैंडा, जिराफ, ब्लैक बक और गौड़ जैसे जानवरों के इनक्लोजर हटाने पड़ सकते हैं. इसके अलावा नए लेआउट को केंद्रीय जू प्राधिकरण और सुप्रीम कोर्ट की पर्यावरण समिति से मंजूरी लेनी होगी. ऐसे में नया प्रस्ताव आने के बाद भी पूरी प्रक्रिया में लंबा समय लग सकता है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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