Kumkum Mohad: 17 साल की उम्र में जब ज्यादातर खिलाड़ी अपने करियर की शुरुआत को लेकर सपने देख रहे होते हैं, तब महाराष्ट्र की कुमकुम मोहोद ने एशियन गेम्स के मंच पर अपना नाम दर्ज करा दिया है. जिस तीरंदाज के सफर की शुरुआत दादी के दिए महज 3000 रुपये के धनुष से हुई थी, उसने अब 2026 एशियन गेम्स में दो गोल्ड मेडल जीतकर अपनी पहचान बना ली है.
कुमकुम ने शनिवार को स्त्री रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा के फाइनल में दक्षिण कोरिया की येजिन ओह को शूट-ऑफ में हराकर हिंदुस्तान को 17वां गोल्ड मेडल दिलाया. इसी के साथ उन्होंने लॉस एंजिल्स ओलंपिक 2028 का टिकट भी पक्का कर लिया है.
9 साल की उम्र में शुरू हुआ था सफर
कुमकुम मोहोद का तीरंदाजी से रिश्ता साल 2018 में शुरू हुआ था. उस समय वह सिर्फ 9 साल की थीं. उनकी मां रूपाली मोहोद चाहती थीं कि बेटी किसी ऐसे स्पोर्ट्स को चुने जिसमें उसके लिए आगे बढ़ने के ज्यादा मौके हों.
एक दिन मां उन्हें अमरावती के डीवीएम कॉलेज मैदान लेकर गईं. वहां शिशु तीरंदाजी की प्रैक्टिस कर रहे थे. धनुष और निशानेबाजी ने कुमकुम को इतना आकर्षित किया कि उन्होंने इसी स्पोर्ट्स को अपनाने का फैसला कर लिया. यहीं उनकी मुलाकात कोच प्रफुल्ल डांगे से हुई. कोच ने शुरुआत में ही कुमकुम के भीतर एकाग्रता और शांत रहने की क्षमता देख ली थी.
दादी के 3000 रुपये से खरीदा पहला धनुष
कुमकुम ने शुरुआत में बांस से बने पारंपरिक धनुष से अभ्यास किया. परिवार के पास महंगा रिकर्व धनुष खरीदने के पैसे नहीं थे. ऐसे समय में उनकी दादी ने उन्हें 3000 रुपये दिए. इसी रकम से कुमकुम ने अपना पहला धनुष खरीदा. इस धनुष के साथ उन्होंने अभ्यास जारी रखा और सब-जूनियर नेशनल चैंपियनशिप में सिल्वर मेडल जीता. राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में लगातार प्रदर्शन करते हुए वह हिंदुस्तानीय रिकर्व टीम तक पहुंचीं.
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पिता बनाते हैं मिठाई की दुकानों के लिए डिब्बे
कुमकुम की सफलता के पीछे उनके परिवार का संघर्ष भी छिपा है. उनके पिता अनिल मोहोद मिठाई की दुकानों के लिए गत्ते के डिब्बे बनाने का काम करते हैं. इसी काम से होने वाली आमदनी से परिवार का खर्च चलता है. परिवार की सीमित आर्थिक स्थिति के बावजूद उन्होंने कुमकुम के स्पोर्ट्स को रुकने नहीं दिया.
स्पोर्ट्स के कारण छूटा मराठी का पेपर
कुमकुम के लिए पढ़ाई और स्पोर्ट्स को साथ लेकर चलना भी आसान नहीं रहा. प्रतियोगिताओं के शेड्यूल के कारण उनका मराठी का मुख्य पेपर छूट गया था. परिवार को लगा कि अब उन्हें परीक्षा दोबारा देनी पड़ेगी और उनका पूरा साल खराब हो सकता है.
लेकिन जब रिजल्ट आया तो तस्वीर अलग थी. राष्ट्रीय स्तर पर मेडल जीतने के लिए स्पोर्ट्स कोटे से मिले 20 अतिरिक्त अंक और स्कूल के 15 प्रैक्टिकल अंक उनके काम आए. कुमकुम ने 72 फीसदी अंक हासिल किए और अपना साल बचा लिया.
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पहले सेट में पिछड़ीं, फिर पलट दिया पूरा मुकाबला
दक्षिण कोरिया की येजिन ओह के खिलाफ एशियन गेम्स फाइनल में कुमकुम की शुरुआत आसान नहीं रही. उन्होंने पहला सेट 27-29 से गंवा दिया. दूसरे सेट में दोनों खिलाड़ियों का स्कोर 29-29 रहा और हिंदुस्तानीय खिलाड़ी 1-3 से पीछे थीं. लेकिन इसके बाद कुमकुम ने जिस तरह वापसी की, उसने पूरे मुकाबले का रुख बदल दिया. तीसरे सेट में उन्होंने तीनों तीर परफेक्ट-10 पर लगाते हुए 30 अंक हासिल किए.
चौथे सेट में कुमकुम 27-28 से हार गईं. पांचवें सेट में उन्होंने दबाव के बीच एक बार फिर परफेक्ट 30 का स्कोर किया और मुकाबले को 5-5 की बराबरी पर पहुंचा दिया. शूट-ऑफ में कुमकुम ने दबाव के इस पल में संयम बनाए रखा और गोल्ड मेडल अपने नाम कर लिया.
एशियन गेम्स में 2 गोल्ड और एक सिल्वर
कुमकुम का 2026 एशियन गेम्स अभियान यहीं नहीं रुका. उन्होंने प्रतियोगिता में दो गोल्ड और एक सिल्वर मेडल जीता. स्त्री रिकर्व व्यक्तिगत स्पर्धा के गोल्ड से पहले वह रिकर्व टीम इवेंट में भी स्वर्ण पदक जीत चुकी थीं. इसके अलावा धीरज बोम्मादेवरा के साथ मिश्रित रिकर्व टीम स्पर्धा में उन्होंने हिंदुस्तान को रजत पदक दिलाया.
मिश्रित रिकर्व के फाइनल में हिंदुस्तानीय जोड़ी को चीन की मेंगकी ली और उनके साथी के खिलाफ 3-5 से हार मिली थी. इससे पहले सेमीफाइनल में कुमकुम और धीरज ने जापान को 5-3 से हराकर फाइनल में जगह बनाई थी.
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