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SIR पर CEO के रवि कुमार का Exclusive Interview: बोले, ‘100 वैलिड वोटरों की सूची दें राजनीतिक दल, जिनका कटा है नाम’

रांची से नवीन शर्मा की रिपोर्ट

Jharkhand SIR: हिंदुस्तान के निर्वाचन आयोग की ओर से मतदाताओं के कराए जा रहे SIR यानी विशेष गहन पुनरीक्षण पर पूरे देश में नेतृत्वक बवाल मचा हुआ है. राजनेता सार्वजनिक मंचों से निर्वाचन आयोग पर वैलिड मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काटने का आरोप लगा रहे हैं. SIR पर नेतृत्वक दलों के आरोप-प्रत्यारोप के बीच झारखंड के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी (CEO) के रवि कुमार ने नया विचार डिजिटल से खुलकर बातचीत की. बातचीत के दौरान उन्होंने स्पष्ट तौर पर कहा कि चुनाव आयोग किसी भी नेतृत्वक दल के दबाव में काम नहीं करता, बल्कि वह संविधान, नियम और कानून के तहत अपनी जिम्मेदारी निभाता है.

सवाल: नेतृत्वक दल लगातार SIR में गड़बड़ी के आरोप लगा रहे हैं. क्या इन आरोपों में कोई तथ्य है?

के. रवि कुमार: SIR की प्रक्रिया अपने डिजाइन के अनुसार ट्रांसपेरेंट और पार्टिसिपेटिव है. हर स्तर पर नेतृत्वक दलों की भागीदारी रहती है. BLA-1 और BLA-2 के माध्यम से बैठकें होती हैं और सभी डाटा शेयर किया जाता है. जनता और मीडिया के साथ भी डाटा साझा किया जाता है. केवल आरोप लगाने से बात साबित नहीं होती. नेतृत्वक दलों से मेरा आग्रह है कि वे किसी गांव में 100 लोगों के नाम कटने जैसे आरोप लगाते हैं, तो उन 100 लोगों की सूची दें. हम प्रत्येक मामले का सत्यापन करेंगे.

सवाल: क्या ऐसी कोई शिकायत आपके सामने आई है कि किसी गांव में 100 जीवित लोगों के नाम काट दिए गए?

के. रवि कुमार: अभी तक ऐसी कोई विशिष्ट शिकायत सामने नहीं आई है. एक मामला सामने आया था, जिसमें एक व्यक्ति के नाम को लेकर शिकायत की गई थी कि वह जीवित है, लेकिन उसका नाम हटा दिया गया. जांच में पता चला कि उसका नाम दो जगह दर्ज था. एक जगह से नाम हटाया गया और दूसरी जगह ड्राफ्ट रोल में उसका नाम मौजूद था. अगर किसी कर्मचारी से गलती हुई है, तो उसे सुधारा जा सकता है. इसलिए बिना सबूत के बड़े आरोप लगाना उचित नहीं है.

सवाल: आप नेतृत्वक दलों से किस तरह की शिकायत चाहते हैं?

के. रवि कुमार: किसी भी नेतृत्वक दल का प्रतिनिधि आए और विशिष्ट आरोप लगाए. अगर कहा जाता है कि 100 जीवित लोगों के नाम काट दिए गए हैं, तो उन 100 लोगों की सूची दी जाए. हम सामने बैठकर उसका सत्यापन करेंगे. झारखंड में करीब 60 हजार लोग चुनाव प्रक्रिया में काम कर रहे हैं. सभी अपने स्तर पर ईमानदारी से काम कर रहे हैं.

सवाल: क्या पात्र हिंदुस्तानीय नागरिकों का नाम वोटर लिस्ट से कट सकता है?

के. रवि कुमार: पात्र हिंदुस्तानीय नागरिक का नाम नहीं कटेगा. SIR का उद्देश्य स्पष्ट है कि सभी पात्र हिंदुस्तानीय नागरिकों का नाम सूची में रहे और विदेशी नागरिकों के नाम हटाए जाएं. अगर कहीं गलती होती है, तो उसे बताइए. हम उसे सुधारने के लिए तैयार हैं.

सवाल: फॉर्म-6 को लेकर विवाद क्यों है? क्या SIR में इसमें बदलाव किया गया है?

के. रवि कुमार: फॉर्म-6 आज का नहीं है. इसका इस्तेमाल पहले से होता रहा है और आगे भी होता रहेगा. किसी पात्र हिंदुस्तानीय नागरिक का नाम मतदाता सूची में दर्ज कराने के लिए फॉर्म-6 का इस्तेमाल किया जाता है. झारखंड में अभी करीब सात लाख फॉर्म-6 के आवेदन आए हैं.

सवाल: क्या SIR के दौरान फॉर्म-6 में कोई बड़ा बदलाव किया गया?

के. रवि कुमार: फॉर्म-6 में कोई अमूलचूल बदलाव नहीं किया गया है. SIR के दौरान एक डिक्लेरेशन जोड़ा गया था. पहले भी फॉर्म-6 में आवेदक हिंदुस्तानीय नागरिक होने और संबंधित स्थान पर रहने की घोषणा करता था. इस डिक्लेरेशन के समर्थन में दस्तावेज मांगे गए थे.

सवाल: समाचार थी कि जिन राज्यों में SIR पूरा हो गया, वहां फॉर्म-6 वापस ले लिया गया. क्या यह सही है?

के. रवि कुमार: फॉर्म-6 वापस नहीं लिया जा सकता. रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के तहत यह प्रक्रिया पहले भी लागू थी और आगे भी लागू रहेगी. SIR के दौरान जो डिक्लेरेशन फॉर्म जोड़ा गया था, उसे हटाया गया है. फॉर्म-6 को नहीं हटाया गया.

सवाल: झारखंड में SIR के बाद कितने मतदाता ASD श्रेणी में हैं?

के. रवि कुमार: करीब 43.5 लाख मतदाता ASD श्रेणी में हैं. ASD का मतलब Absent, Shifted, Death और Duplicate जैसी श्रेणियों से है. इसमें कुछ अन्य मामले भी शामिल हैं. यह 2003 की सूची से सीधे जुड़ी श्रेणी नहीं है, बल्कि 2026 की वर्तमान मतदाता सूची के आधार पर बनी है.

सवाल: 19 अक्टूबर को अंतिम मतदाता सूची जारी होनी थी. क्या यह तारीख बरकरार रहेगी?

के. रवि कुमार: झारखंड में सुनवाई की प्रक्रिया अभी जारी है. करीब 12 लाख फॉर्म अभी डिजिटाइज किए जाने बाकी हैं. नोटिस और वेरिफिकेशन का करीब 80 प्रतिशत काम पूरा हुआ है. इसलिए हमने समय बढ़ाने का अनुरोध किया है. अंतिम तारीख को लेकर फैसला आयोग स्तर पर होगा. मौजूदा वर्कलोड को देखते हुए 19 अक्टूबर की तारीख पर अंतिम सूची जारी होना संभव नहीं है.

सवाल: विदेशी नागरिकों को लेकर क्या स्थिति सामने आई है?

के. रवि कुमार: झारखंड में सत्यापन के दौरान चार विदेशी नागरिकों के मतदाता सूची में शामिल होने की कोशिश के मामले सामने आए हैं. इनमें बांग्लादेश, नेपाल, अफगानिस्तान और ईरान के नागरिकों के मामले बताए गए. संविधान के अनुच्छेद 326 के अनुसार मतदाता सूची में केवल हिंदुस्तानीय नागरिक ही शामिल हो सकते हैं. विदेशी नागरिकों का नाम मतदाता सूची में शामिल करना चुनाव मशीनरी का काम नहीं है और ऐसे मामलों को रोकना उसकी जिम्मेदारी है.

सवाल: क्या लोगों की शिकायतों पर भी सत्यापन किया जा रहा है?

के. रवि कुमार: हां. जनता की ओर से शिकायत मिलने पर संबंधित चुनाव मशीनरी सत्यापन करती है. ERO और AERO स्तर पर जांच होती है. हिंदुस्तानीय नागरिकता और उम्र सहित जरूरी पात्रता देखी जाती है. इसके लिए निर्धारित दस्तावेजों के आधार पर जांच की जाती है.

सवाल: SIR को लेकर नेतृत्वक दबाव के बीच चुनाव अधिकारी कैसे काम कर रहे हैं?

के. रवि कुमार: चुनाव प्रक्रिया संविधान, जनप्रतिनिधित्व कानून, रजिस्ट्रेशन ऑफ इलेक्टर्स रूल्स और चुनाव आयोग के निर्देशों के आधार पर चलती है. सभी चुनाव अधिकारी इन्हीं नियमों के अनुसार काम करते हैं. नेतृत्वक दलों के साथ नियमित बैठकें भी होती हैं. उनकी समस्याओं और आपत्तियों को सुना जाता है.

सवाल: बीएलओ पर काम का दबाव बढ़ने और मानसिक तनाव की शिकायतें भी सामने आई हैं. क्या यह चिंता का विषय है?

के. रवि कुमार: बीएलओ का वर्कलोड बढ़ा है और इससे कुछ जगहों पर मानसिक तनाव भी है. हम लगातार उनका मनोबल बढ़ाने और उन्हें सहयोग देने का काम कर रहे हैं. झारखंड में बीएलओ मेहनत से काम कर रहे हैं. अधिकारियों को भी फील्ड में जाकर उनसे बात करने और उनकी समस्याएं समझने के लिए कहा गया है. आम लोगों से भी अपील है कि वे बीएलओ का सहयोग करें.

सवाल: दूरदराज के इलाकों में बुजुर्गों और ग्रामीण आदिवासी लोगों के लिए दस्तावेज जुटाना मुश्किल है. क्या उन्हें राहत मिलेगी?

के. रवि कुमार: ऐसे लोगों के लिए वैकल्पिक दस्तावेज की व्यवस्था की जा रही है. वरिष्ठ नागरिकों के मामले में उनके बेटे-बेटी के दस्तावेजों में दर्ज जानकारी का भी इस्तेमाल किया जा सकता है. कमजोर और वंचित वर्गों के लिए वैकल्पिक दस्तावेज की व्यवस्था है. किसी पात्र व्यक्ति का नाम केवल दस्तावेज की कमी के कारण नहीं काटा जाएगा. विदेशी नागरिकों के नाम को लेकर नियम अलग हैं.

सवाल: SIR के दौरान नेतृत्वक दलों की भूमिका क्या है?

के. रवि कुमार: नेतृत्वक दलों के प्रतिनिधियों के साथ CEO स्तर के अलावा जिला और ERO-AERO स्तर पर भी नियमित बैठकें होती हैं. प्रमुख नेतृत्वक दलों के प्रतिनिधि इन बैठकों में शामिल होते हैं. उनका सुझाव और आपत्तियां सुनी जाती हैं और जरूरी मुद्दों का समाधान किया जाता है.

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सवाल: आगे SIR को लेकर गतिरोध बढ़ने की स्थिति में कर्मचारियों को क्या निर्देश हैं?

के. रवि कुमार: चुनाव मशीनरी को संविधान और कानून के अनुसार ही काम करना है. किसी के दबाव में नहीं, बल्कि लिखित नियमों और आयोग के निर्देशों के आधार पर निर्णय लिया जाता है. सभी अधिकारियों को इसी व्यवस्था के तहत काम करना है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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