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Asansol Railpar Bus Accident: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के शोर के बीच आसनसोल का रेलपार इलाका रविवार देर रात रणक्षेत्र में तब्दील हो गया. तृणमूल कांग्रेस के दिग्गज नेता और उम्मीदवार मलय घटक के समर्थन में आयोजित एक चुनावी कार्यक्रम के दौरान पुलिस लिखी एक बेकाबू बस भीड़ में घुस गयी.
झूठ और भ्रामक प्रचार के नये विवाद का जन्म
इस हादसे ने न केवल कई लोगों को जख्मी किया, बल्कि बंगाल की चुनावी नेतृत्व में ‘झूठ और भ्रामक प्रचार’ के एक नये विवाद को जन्म दे दिया है. आरोप है कि टीएमसी ने अपनी साख बचाने के लिए राज्य पुलिस की गलती को केंद्रीय बलों (CISF) के सिर मढ़ने की कोशिश की.
हादसे का खौफनाक मंजर : जुबली मोड़ से रेलपार तक तांडव
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, रविवार देर रात एक तेज रफ्तार बस, जिस पर ‘पश्चिम बंगाल पुलिस’ लिखा था, अचानक अनियंत्रित हो गयी. बस ने जुबली मोड़ से शीतला और रेलपार तक रास्ते में आने वाली दुकानों, ऑटो, टोटो और राहगीरों को बेरहमी से रौंद डाला. हादसे के बाद इलाके में चीख-पुकार मच गयी और गुस्साये लोगों ने बस में तोड़फोड़ कर सड़क जाम कर दी.
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CISF बनाम बंगाल पुलिस : सच से परदा उठा
हादसे के तुरंत बाद तृणमूल कांग्रेस के खेमे से यह समाचार फैला दी गयी कि बस को सीआईएसएफ (CISF) का एक जवान नशे की हालत में चला रहा था. हालांकि, जांच में जो सच सामने आया वह चौंकाने वाला था. बस चलाने वाला कोई केंद्रीय जवान नहीं, पश्चिम बंगाल आर्म्ड पुलिस की 7वीं बटालियन का जवान अमलेश मंडल था. जांच में उसके नशे में होने की पुष्टि हुई है.
भाजपा का पलटवार- केंद्र की छवि खराब करने की साजिश
आसनसोल उत्तर से भाजपा उम्मीदवार कृष्णेंदु मुखर्जी ने टीएमसी पर ‘फेक न्यूज’ फैक्ट्री चलाने का आरोप लगाया है. उन्होंने कहा- जान-बूझकर राज्य पुलिस के जवान की गलती को सीआईएसएफ का नाम दिया गया, ताकि केंद्रीय बलों और केंद्र प्रशासन को बदनाम किया जा सके. टीएमसी चौथी बार सत्ता पाने के लिए किसी भी हद तक गिर सकती है. मुखर्जी ने आरोप लगाया कि घायलों की मदद करने की बजाय टीएमसी नेता झूठ गढ़ने में व्यस्त थे.
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मलय घटक ने की शांति की अपील
हादसे के बाद बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए खुद मलय घटक मौके पर पहुंचे. उन्होंने प्रदर्शनकारियों को शांत कराया और घायलों के उचित इलाज का आश्वासन दिया. भारी संख्या में पुलिस और केंद्रीय बलों की तैनाती के बाद ही स्थिति नियंत्रण में आयी.
नेतृत्वक शुचिता पर खड़े हुए सवाल
फिलहाल प्रशासन इस बात की गहन जांच कर रहा है कि क्या यह महज एक दुर्घटना थी या इसके पीछे चुनावी माहौल को बिगाड़ने की कोई गहरी साजिश थी. इस घटना ने बंगाल चुनाव में सूचनाओं की विश्वसनीयता और नेतृत्वक शुचिता पर बड़े सवाल खड़े कर दिये हैं.
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