खास बातें
Murshidabad Women Voters 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के शोर के बीच मुर्शिदाबाद के शमशेरगंज और लालगोला जैसे क्षेत्रों में एक खामोश इंकलाब दस्तक दे रहा है. यहां की हजारों स्त्रीएं अब केवल ‘वोट बैंक’ नहीं, बल्कि स्वतंत्र नेतृत्वक शक्ति के रूप में उभर रही हैं.
अब पति के कहने पर वोट नहीं डालेंगी रेहाना और हसीना
पलायन और बेरोजगारी की मार झेल रहे इस इलाके में स्त्रीओं ने साफ कर दिया है कि उनके लिए ‘हिंदू-मुसलमान’ की नेतृत्व से बड़ा मुद्दा उनके परिवार का अस्तित्व और मतदाता सूची में उनका नाम है. सालों से पतियों के कहने पर वोट डालने वाली रेहाना और हसीना जैसी स्त्रीओं ने अब अपने फैसले खुद लेने शुरू कर दिये हैं.
वोटर लिस्ट से सवा लाख से ज्यादा नाम गायब, खौफ में स्त्रीएं
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के बाद मुर्शिदाबाद के इन दो क्षेत्रों में जो आंकड़े सामने आये हैं, उसने स्त्रीओं की रातों की नींद उड़ा दी है. शमशेरगंज में मतदाता सूची से लगभग 92,000 नाम कटे हैं. लालगोला में भी करीब 69,000 नाम कटे हैं.
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स्त्रीएं अकेले लड़ रहीं कागजों की लड़ाई
स्त्रीएं अब दिन भर आधार कार्ड, राशन कार्ड और वोटर आईडी लेकर प्रशासनी दफ्तरों और बूथ कार्यालयों के चक्कर काट रही हैं. उनके पति और बेटे कोच्चि, दुबई और मुंबई जैसे शहरों में मजदूरी कर रहे हैं. ऐसे में कागजों की इस लड़ाई को स्त्रीएं अकेले लड़ रही हैं.
पति बेंगलुरु में रहें, मैं यहां अपना वोट खुद चुनूंगी
इस बार के चुनाव में स्त्रीओं का नजरिया पूरी तरह बदल गया है. लालगोला की शबनम खातून कहती हैं कि उनके पति ने बेंगलुरु से फोन कर बताया था कि कौन-सा बटन दबाना है, लेकिन इस बार उन्होंने दो टूक जवाब दे दिया. शबनम ने उनसे कह दिया कि आप बेंगलुरु में रहिए, यहां मैं रहती हूं. मैं वोट उसे ही दूंगी, जो यहां मेरी मुश्किलों में मदद करेगा.
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पहचान की नेतृत्व पर रोजगार और पलायन भारी
शमशेरगंज की रेहाना बीबी और हसीना खातून का दर्द एक जैसा है. उनकी शिकायत है कि नेता केवल धर्म की बात करते हैं, असल मुद्दों पर नहीं. रेहाना पूछती हैं कि नेता पूछते हैं कि हम हिंदू हैं या मुसलमान. कोई यह क्यों नहीं पूछता कि मेरे पति केरल में बर्तन क्यों धो रहे हैं?
हसीना खातून कहती हैं कि अब स्त्रीएं गांव की समस्याओं को पुरुषों से बेहतर समझती हैं. राशन की लड़ाई हो या पहचान पत्र की, वे खुद बीएलओ दफ्तर जाकर लड़ती हैं.
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Murshidabad Women Voters 2026: पहली बार खुद ले रही हैं नेतृत्वक निर्णय
मुर्शिदाबाद का यह इलाका प्रवासी बहुल है. यहां के पुरुष काम के सिलसिले में खाड़ी देशों या देश के अन्य बड़े राज्यों में रहते हैं. घर संभालने से लेकर बैंक और प्रशासनी दफ्तरों के काम तक, अब स्त्रीएं खुद ही करती हैं. यही आत्मनिर्भरता अब उनके नेतृत्वक निर्णयों में भी झलक रही है. शमशेरगंज और लालगोला में स्त्री मतदाता इस बार बड़ा उलटफेर कर सकती हैं.
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