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रिटायर्ड हैं तो क्या हुआ? AY 2026-27 के लिए ऐसे फाइल करें ITR 

ITR Filing For Pensioners: कई बुजुर्गों को लगता है कि रिटायर होने के बाद टैक्स रिटर्न (ITR) भरना जरूरी नहीं है. लेकिन यह सच नहीं है. अगर आप पेंशनर हैं, तो भी समय पर ITR फाइल करना बहुत जरूरी है. इससे न सिर्फ आपको टैक्स रिफंड पाने में मदद मिलती है, बल्कि ब्याज और पेंशन से होने वाली कमाई का सही रिकॉर्ड भी रहता है. इससे इनकम टैक्स विभाग से नोटिस आने का खतरा नहीं रहता.

असेसमेंट ईयर (AY) 2026-27 के लिए टैक्स फाइलिंग की शुरुआत हो चुकी है. आइए जानते हैं कि इस बार पेंशनर्स के लिए टैक्स के क्या नियम हैं और उन्हें कौन सी बातों का ध्यान रखना चाहिए.

आपके लिए कौन सा ITR फॉर्म सही है?

गलत फॉर्म चुनना रिटायर्ड लोगों की सबसे आम गलती है. आपको कौन सा फॉर्म चुनना है, यह आपकी कमाई के जरिए (Source of Income) पर निर्भर करता है:

  • ITR-1 (सहज): अगर आपकी कुल सालाना कमाई 50 लाख रुपये तक है और आपकी आय का जरिया सिर्फ पेंशन, एक घर, बैंक ब्याज/डिविडेंड या 5,000 रुपये तक की कृषि आय है, तो आप इस फॉर्म को भरें.
  • ITR-2: अगर आपके पास एक से ज्यादा घर हैं, कैपिटल गेन्स (शेयर या प्रॉपर्टी बेचने से मुनाफा) है, या विदेशी संपत्ति से कमाई है, तो आपको यह फॉर्म चुनना होगा.
  • ITR-3: यह फॉर्म उनके लिए है जिन्हें किसी बिजनेस या प्रोफेशन (व्यापार या पेशा) से मुनाफा हो रहा हो.
  • ITR-4 (सुगम): अगर आपकी कमाई 50 लाख रुपये तक है और आपकी इनकम में पेंशन के साथ-साथ धारा 44AD, 44ADA या 44AE के तहत अनुमानित बिजनेस (Presumptive Income) शामिल है, तो यह फॉर्म आपके लिए है.

नए कानून के बीच टैक्स का हिसाब कैसे होगा?

नया इनकम टैक्स एक्ट 2025 भले ही 1 अप्रैल 2026 से लागू हो गया है, लेकिन ध्यान रहे कि आप असेसमेंट ईयर 2026-27 में उस कमाई पर टैक्स दे रहे हैं जो आपने पिछले साल (फाइनेंशियल ईयर 2025-26) में कमाई थी. इसलिए इस बार टैक्स का कैलकुलेशन पुराने ‘इनकम टैक्स एक्ट 1961’ के नियमों के तहत ही होगा. इसके अलावा, नई टैक्स रिजीम चुनने वाले निवासी नागरिकों को धारा 87A के तहत राहत मिलेगी, बशर्ते उनकी टैक्स योग्य आय 12 लाख रुपये से अधिक न हो.

टैक्स बचाने के लिए कहां मिलेगी छूट?

सीनियर सिटीजंस के लिए कई शानदार डिडक्शंस (टैक्स छूट) मौजूद हैं, जिनका फायदा उठाकर टैक्स बचाया जा सकता है:

  • धारा 80TTB: बैंक, पोस्ट ऑफिस या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के ब्याज से होने वाली 50,000 रुपये तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगेगा.
  • धारा 80D: स्वास्थ्य बीमा (Health Insurance) के प्रीमियम पर 50,000 रुपये तक की छूट मिलती है.
  • धारा 80DDB: गंभीर बीमारियों के इलाज पर खर्च के लिए 1 लाख रुपये तक की कटौती का दावा किया जा सकता है.
  • धारा 80C (नया नाम धारा 123): नए कानून में इसे रीस्ट्रक्चर किया गया है. इसके तहत लाइफ इंश्योरेंस, पीएफ, एनएससी और होम लोन के मूलधन (Principal) भुगतान पर 1.5 लाख रुपये तक की छूट मिलती है.
  • धारा 24(b): पुरानी टैक्स व्यवस्था में खुद के रहने वाले घर के होम लोन के ब्याज पर 2 लाख रुपये तक की छूट का प्रावधान है.

साथ ही, ऐसे बुजुर्ग जिनकी कोई बिजनेस इनकम नहीं है, उन्हें एडवांस टैक्स देने से पूरी राहत दी गई है. फिलहाल टैक्स विभाग ने ITR-1 और ITR-4 के लिए ऑनलाइन और एक्सेल यूटिलिटी चालू कर दी है, ताकि आप बिना देरी किए अपना रिटर्न फाइल कर सकें.

ये भी पढ़ें: सैलरी और शेयर से कमाते हैं? तो लाइव हो गया ITR-2, जानें किसे भरना है और कब तक

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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