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शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर में आगे, लेकिन निवेशकों की पहली पसंद नहीं बन पाया बिहार, जानिए क्या कहती है नीति आयोग की रिपोर्ट

Bihar News: (अनुराग प्रधान, पटना) देश में निवेश के लिए अनुकूल माहौल बनाने की होड़ के बीच बिहार को झटका लगा है. नीति आयोग की इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स-2026 रिपोर्ट में राज्य का प्रदर्शन उम्मीद से काफी कमजोर रहा. 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों की सूची में बिहार को 26वां स्थान मिला है. वहीं बड़े राज्यों की श्रेणी में बिहार 17वें यानी अंतिम पायदान पर है.

100 अंकों के पैमाने पर बिहार को 41.2 अंक मिले हैं. इसी आधार पर राज्य को ‘इमर्जिंग परफॉर्मर’ श्रेणी में रखा गया है. इस श्रेणी में झारखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, मेघालय, नागालैंड और पुडुचेरी भी शामिल हैं.

शिक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर में अच्छी तस्वीर

रिपोर्ट में बिहार की कुछ उपलब्धियों का भी जिक्र किया गया है. राज्य ने शिक्षा पर बड़े राज्यों के औसत से 46 प्रतिशत अधिक प्रशासनी खर्च किया है. इसके अलावा सड़क, रेलवे और अन्य बुनियादी ढांचे की उपलब्धता भी कई राज्यों की तुलना में बेहतर बताई गई है.

बिजली और जलापूर्ति व्यवस्था में भी पहले की तुलना में सुधार दर्ज किया गया है. पर्यावरणीय मंजूरी की प्रक्रिया भी निवेशकों को पहले से आसान लगी है.

इन वजहों से पीछे रह गया बिहार

रिपोर्ट के अनुसार, बिहार का सबसे कमजोर पक्ष बिजनेस क्लाइमेट है. राज्य में निवेशकों के अनुकूल माहौल अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाया है.

औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र, नवाचार, उद्योगों के लिए भूमि उपलब्धता, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और कानून-व्यवस्था जैसे कई महत्वपूर्ण मानकों पर बिहार अन्य बड़े राज्यों से काफी पीछे है. यही वजह है कि बड़े निवेशक अभी भी राज्य में निवेश करने से हिचकते हैं.

प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से काफी कम

नीति आयोग के मुताबिक बिहार की प्रति व्यक्ति जीएसडीपी 44,705 रुपये है. यह बड़े राज्यों के औसत से करीब 72 प्रतिशत कम है. राज्य की वित्तीय स्थिति में सेवा क्षेत्र की हिस्सेदारी 67.5 प्रतिशत, उद्योग की 22.1 प्रतिशत और कृषि की 10.4 प्रतिशत है.

विदेशी निवेश भी बेहद कम

वर्ष 2023-24 में बिहार को केवल 0.16 मिलियन डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) मिला. राज्य में फूड प्रोसेसिंग और कोक व रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद प्रमुख औद्योगिक क्षेत्र हैं. रिपोर्ट में कहा गया है कि कृषि आधारित उद्योगों की अच्छी संभावनाएं होने के बावजूद निवेशकों का भरोसा जीतने के लिए बेहतर औद्योगिक माहौल तैयार करना जरूरी है.

वित्तीय स्थिति पर भी चिंता

नीति आयोग ने राज्य की वित्तीय स्थिति पर भी सवाल उठाए हैं. रिपोर्ट के अनुसार बिहार की कुल बकाया देनदारियां राष्ट्रीय औसत से करीब 500 बेसिस प्वाइंट अधिक हैं. इससे वित्तीय सुधार की जरूरत साफ दिखाई देती है.

निवेशकों ने क्या कहा?

1,850 से अधिक निवेशकों की राय के आधार पर तैयार रिपोर्ट में बिहार की ताकत और कमजोरियों दोनों का उल्लेख किया गया है.

निवेशकों ने माना कि बिजली, पानी और पर्यावरणीय मंजूरी की व्यवस्था पहले से बेहतर हुई है. लेकिन उन्होंने उद्योगों के लिए 24 घंटे निर्बाध बिजली, बेहतर कानून-व्यवस्था, आसान भूमि आवंटन और मजबूत डिजिटल नेटवर्क की जरूरत बताई.

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बिहार की प्रमुख ताकतें

  • शिक्षा पर औसत से 46% अधिक प्रशासनी खर्च
  • रेलवे नेटवर्क और सड़क कनेक्टिविटी बेहतर
  • कोल्ड स्टोरेज क्षमता बड़े राज्यों से 23% अधिक
  • बिजली और जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार
  • प्राकृतिक संसाधनों की अच्छी उपलब्धता
  • पर्यावरणीय मंजूरी प्रक्रिया पहले से आसान

ये हैं सबसे बड़ी चुनौतियां

  • बड़े राज्यों में सबसे कमजोर बिजनेस क्लाइमेट
  • समर्पित औद्योगिक पार्कों की कमी
  • टियर-2 और टियर-3 शहरों की कमजोर हवाई कनेक्टिविटी
  • उद्योगों के लिए 24×7 बिजली की कमी
  • डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कमजोर
  • कानून-व्यवस्था को लेकर निवेशकों की चिंता
  • भूमि आवंटन प्रक्रिया जटिल
  • रोजगार के सीमित अवसर
  • बैंक ऋण और एमएसएमई की कम हिस्सेदारी

नवाचार के मामले में भी पिछड़ा बिहार

रिपोर्ट बताती है कि बिहार में सक्रिय कंपनियों के मुकाबले पेटेंट आवेदन का अनुपात केवल 0.48 प्रतिशत है, जबकि बड़े राज्यों का औसत 3.6 प्रतिशत है.

एमएसएमई क्षेत्र में छोटे और मध्यम उद्योगों की हिस्सेदारी के मामले में बिहार 32वें स्थान पर है. वहीं उद्योगों को मिलने वाला बैंक ऋण राज्य की जीएसडीपी का केवल 6.7 प्रतिशत है, जिसे औद्योगिक विकास के लिए पर्याप्त नहीं माना गया है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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