Hot News

March 1, 2026

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ईरान किस सैन्य बल के लिए जाना जाता है? पढ़ें जीके के 100 ऐसे सवाल जवाब 

Top 100 GK Questions: पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है. इजरायल और अमेरिका द्वारा ईरान पर की गई संयुक्त सैन्य कार्रवाई के बाद वहां के माहौल बदल गए हैं. यह घटनाक्रम न केवल अंतरराष्ट्रीय नेतृत्व बल्कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है. ऐसे में आइए जानते हैं इजरायल और ईरान से जुड़े 100 सवाल जवाब. इजरायल-ईरान पर जीके के 10 सवाल जवाब इजरायल किस क्षेत्र में स्थित है?  मध्य पूर्व 2. ईरान की राजधानी क्या है? तेहरान 3. इजरायल की आर्थिक राजधानी कौन-सी है? तेल अवीव 4. ईरान की आधिकारिक भाषा क्या है? फारसी 5. इजरायल की संसद को क्या कहते हैं? केनेस्सेट 6. ईरान की संसद का नाम क्या है? मजलिस 7. इजरायल की स्थापना कब हुई? 1948 8. 1979 में ईरान में कौन-सी क्रांति हुई? इस्लामिक क्रांति 9. ईरान किस जलडमरूमध्य के पास स्थित है? होर्मुज जलडमरूमध्य 10. होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों महत्वपूर्ण है? वैश्विक तेल आपूर्ति मार्ग इजरायल- ईरान से जुड़े जीके के 20 सवाल 11. इजरायल का प्रमुख सहयोगी देश कौन है? संयुक्त राज्य अमेरिका 12. ईरान किस सैन्य बल के लिए जाना जाता है? रिवोल्यूशनरी गार्ड 13. Islamic Revolutionary Guard Corps क्या है? ईरान की विशेष सैन्य इकाई 14. Hezbollah किस देश में सक्रिय है? लेबनान 15. Hamas कहां सक्रिय है? गाजा पट्टी 16. गाजा पट्टी किस क्षेत्र में है? फिलिस्तीन क्षेत्र 17. इजरायल और ईरान के बीच सीधी सीमा है? नहीं 18. दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य कारण क्या है? क्षेत्रीय प्रभाव और सुरक्षा मुद्दे 19. ईरान किस देश का समर्थन करता है? सीरिया 20. इजरायल किसे अपना सबसे बड़ा खतरा मानता है? ईरान के परमाणु कार्यक्रम को 21. ईरान का परमाणु समझौता किस नाम से जाना जाता है? JCPOA 22. JCPOA कब हुआ? 2015 23. JCPOA से अमेरिका कब बाहर हुआ? 2018 24. ईरान पर अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध क्यों लगे? परमाणु कार्यक्रम 25.इजरायल किस संगठन का सदस्य है? संयुक्त राष्ट्र 26. ईरान किस संगठन का सदस्य है? संयुक्त राष्ट्र 27. इजरायल का आधिकारिक धर्म क्या है? यहूदी धर्म प्रमुख 28. ईरान का आधिकारिक धर्म क्या है? शिया इस्लाम 29. ईरान की मुद्रा क्या है? रियाल 30. इजरायल की मुद्रा क्या है? शेकेल ईरान- इरायल की मुद्रा और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंध को लेकर जीके के 20 सवाल जवाब 31. इजरायल की खुफिया एजेंसी क्या है? मोसाद 32. ईरान की विशेष विदेश इकाई क्या कहलाती है? कुद्स फोर्स 33. कुद्स फोर्स किसका हिस्सा है? IRGC 34. इजरायल किस तकनीक के लिए प्रसिद्ध है? आयरन डोम 35. आयरन डोम क्या है? मिसाइल रक्षा प्रणाली 36. ईरान किस प्रकार की मिसाइलों के लिए जाना जाता है? बैलिस्टिक मिसाइल 37. लेबनान में किस संगठन का प्रभाव है? हिज़्बुल्लाह 38. सीरिया में ईरान की क्या भूमिका है? प्रशासन का समर्थन 39. इजरायल सीरिया में क्यों हमले करता है? ईरानी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए 40. ईरान इजरायल को मान्यता देता है? नहीं 41. इजरायल किस समुद्र के किनारे है? भूमध्य सागर 42. ईरान किस खाड़ी के पास है? फारस की खाड़ी 43. फारस की खाड़ी क्यों अहम है? तेल भंडार 44. इजरायल की सेना को क्या कहते हैं? IDF 45. ईरान की सेना का नाम? आर्टेश 46. इजरायल और ईरान का संघर्ष प्रत्यक्ष है या परोक्ष? अधिकतर परोक्ष 47. परोक्ष संघर्ष का उदाहरण? प्रॉक्सी समूहों के जरिए 48. यमन में किस समूह को ईरान से समर्थन मिलता है? हूती 49. हूती किस क्षेत्र में सक्रिय हैं? लाल सागर क्षेत्र 50.लाल सागर क्यों महत्वपूर्ण है? व्यापार मार्ग इजरायल-ईरान पर आधारित जनरल नॉलेज के 30 और महत्वपूर्ण सवाल-जवाब 51. इजरायल का प्रमुख शहर? यरुशलम 52. ईरान का सर्वोच्च नेता कौन होता है? सुप्रीम लीडर 53. इजरायल का शासन प्रणाली क्या है? संसदीय लोकतंत्र 54. ईरान की शासन प्रणाली? इस्लामिक गणराज्य 55. 2023-24 में तनाव क्यों बढ़ा? क्षेत्रीय हमलों के कारण 56. गाजा संघर्ष का असर किस पर पड़ा? क्षेत्रीय स्थिरता 57. इजरायल किस तकनीकी क्षेत्र में अग्रणी है? साइबर सुरक्षा 58. ईरान किस क्षेत्र में प्रभाव बढ़ाना चाहता है? मध्य पूर्व 59. इजरायल की जनसंख्या लगभग कितनी है? करीब 1 करोड़ 60. ईरान की जनसंख्या लगभग कितनी है? 8 करोड़ से अधिक 61. इजरायल किस महाद्वीप में है? एशिया 62. ईरान किस महाद्वीप में है? एशिया 63. इजरायल का राष्ट्रीय दिवस? स्वतंत्रता दिवस 64. ईरान का राष्ट्रीय दिवस? इस्लामिक क्रांति दिवस 65. इजरायल का आधिकारिक समय क्षेत्र? IST (Israel Standard Time) 66. ईरान का समय क्षेत्र? IRST 67. इजरायल की सीमा किन देशों से लगती है? मिस्र, जॉर्डन आदि 68. ईरान की सीमा किन देशों से लगती है? इराक, पाकिस्तान आदि 69. इजरायल की प्रमुख निर्यात वस्तु? तकनीक 70. ईरान की प्रमुख निर्यात वस्तु? तेल 71. दोनों देशों के बीच साइबर हमलों की समाचारें क्यों आती हैं? डिजिटल युद्ध 72. इजरायल का प्रमुख बंदरगाह? हाइफ़ा 73. ईरान का प्रमुख बंदरगाह? बंदर अब्बास 74. इजरायल की रक्षा नीति कैसी है? आक्रामक सुरक्षा 75. ईरान की क्षेत्रीय नीति कैसी है? प्रभाव विस्तार 76. क्या दोनों देशों के राजनयिक संबंध हैं? नहीं 77. संयुक्त राष्ट्र की भूमिका क्या है? शांति प्रयास 78. क्या दोनों परमाणु क्षमता से जुड़े हैं? हां, विवाद का विषय 79. IAEA क्या करता है? परमाणु निगरानी 80. IAEA किससे जुड़ा है? संयुक्त राष्ट्र इजरायल-ईरान पर जीके 20 महत्वपूर्ण सवाल-जवाब 81. इजरायल किस गठबंधन का हिस्सा नहीं है? NATO 82. ईरान किस सैन्य गठबंधन में प्रमुख है? कोई औपचारिक नहीं 83. संघर्ष का वैश्विक असर? तेल कीमतें 84. होर्मुज बंद होने का असर? वैश्विक व्यापार प्रभावित 85. क्या दोनों के बीच सीधा युद्ध हुआ है? सीमित टकराव 86. प्रॉक्सी युद्ध का अर्थ? अन्य समूहों के माध्यम से लड़ाई 87. क्षेत्रीय तनाव किन देशों को प्रभावित करता है? लेबनान, सीरिया आदि 88. साइबर युद्ध क्यों अहम है? आधुनिक सुरक्षा 89. इजरायल का रक्षा बजट कैसा है? उच्च 90. ईरान पर आर्थिक प्रतिबंध क्यों हैं? परमाणु और क्षेत्रीय गतिविधियां 91. क्या दोनों देशों के बीच शांति वार्ता हुई? प्रत्यक्ष नहीं 92. वैश्विक शक्तियां किसे समर्थन देती हैं? अलग-अलग पक्ष 93. संघर्ष से किसे आर्थिक नुकसान? पूरे क्षेत्र को 94. क्या दोनों OPEC सदस्य हैं? ईरान हां, इजरायल नहीं 95. इजरायल का प्रमुख एयरपोर्ट? बेन गुरियन 96. ईरान का

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

बॉर्डर 2: क्या 350 करोड़ छू पाएगी ‘बॉर्डर 2’? सामने आया 37वें दिन का कलेक्शन

Border 2 Box Office Collection Day 37: सिनेमाघरों में इन दिनों कई नई फिल्में लगी हैं, ‘बॉर्डर 2’ अब भी मजबूती से टिकी हुई है. सनी देओल, वरुण धवन, अहान शेट्टी और दिलजीत दोसांझ जैसे सितारों से सजी यह फिल्म दर्शकों को लगातार थिएटर तक खींच रही है. रिलीज के 36 दिन पूरे होने के बाद भी इसका प्रदर्शन पूरी तरह थमा नहीं है. चलिए आपको 37वें दिन का बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड बताते हैं. 37वें दिन की कमाई कितनी रही? 23 जनवरी को बड़े पर्दे पर आई इस फिल्म ने शुरुआत से ही दमदार रफ्तार पकड़ी थी. अब जब फिल्म छठे हफ्ते में प्रवेश कर चुकी है, तब भी इसकी कमाई जारी है. sacnilk के मुताबिक, रिलीज के 37वें दिन यानी छठे शुक्रवार को फिल्म ने करीब 20 लाख रुपये का नेट कलेक्शन किया. पहले हफ्ते में फिल्म ने शानदार 224.25 करोड़ रुपये का कारोबार किया. दूसरे हफ्ते में कमाई 70.15 करोड़ रही. तीसरे हफ्ते में 23.35 करोड़ रुपये जुड़े. चौथे हफ्ते में यह आंकड़ा घटकर 6.6 करोड़ पर आ गया, जबकि पांचवें हफ्ते में 2.55 करोड़ की कमाई हुई. इन सभी आंकड़ों को मिलाकर 36 दिनों में फिल्म की कुल नेट कमाई 327.10 करोड़ रुपये तक पहुंच चुकी है. 330 करोड़ क्लब से बस कुछ कदम दूर अब ‘बॉर्डर 2’ 330 करोड़ क्लब में एंट्री के बेहद करीब है. लगभग 3 करोड़ रुपये और जुड़ते ही यह नया रिकॉर्ड बना लेगी. उम्मीद की जा रही है कि छठे वीकेंड में यह लक्ष्य हासिल हो सकता है. हालांकि कमाई की रफ्तार अब पहले जैसी नहीं रही, लेकिन स्थिर प्रदर्शन फिल्म की मजबूत पकड़ को दिखाता है. क्या यह फिल्म 350 करोड़ का आंकड़ा भी छू पाएगी या नहीं, ये तो आने वाले दिनों में पता चलेगा. यह भी पढ़ें- बॉर्डर 2: 36वें दिन 330 करोड़ क्लब के करीब पहुंची फिल्म, जानें कुल कमाई The post बॉर्डर 2: क्या 350 करोड़ छू पाएगी ‘बॉर्डर 2’? सामने आया 37वें दिन का कलेक्शन appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

क्या ईरान को नेस्तनाबूद करने के लिए सऊदी अरब और यूएई ने अमेरिका और इजरायल  को उकसाया?

Iran War : मिडिल ईस्ट में तनाव ने शनिवार 28 फरवरी को बड़ा रूप ले लिया, जब अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त अभियान चलाकर ईरान पर हमला कर दिया. अमेरिका और इजरायल ने ईरान की राजधानी तेहरान सहित कई अन्य अहम ठिकानों पर मिसाइल से हमले कर पूरे क्षेत्र को थर्रा दिया. इस हमले को कई नाम दिये गये हैं जिनमें से ऑपरेशन रोरिंग लाॅयन सबसे ज्यादा चर्चित है. इस हमले के जवाब में ईरान ने भी इजरायल की ओर मिसाइलें दागी हैं, लेकिन अमेरिका अपने मकसद में कामयाब हो गया क्योंकि उसने अपने पुराने विरोधी और ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई का परिवार सहित अंत कर दिया. यहां सवाल यह है कि क्या महज अमेरिका की दुश्मनी अयातुल्लाह खामेनेई के अंत का कारण है या कोई और लोग भी थे, जिन्होंंने अमेरिका और इजरायल के साथ मिलकर इस साजिश को अंजाम दिया. सऊदी अरब और ईरान के बीच दुश्मनी ने खामेनेई का अंत करवाया? सऊदी अरब और ईरान दो ऐसे देश हैं, जिनकी जमीनी सीमाएं आपस में नहीं मिलती हैं, लेकिन दोनों देश आमने–सामने हैं और दोनों के बीच फारस की खाड़ी (Persian Gulf) और कुछ हिस्सों में ओमान की खाड़ी (Gulf of Oman) है. इन दोनों देशों के बीच दुश्मनी या टकराव की सबसे बड़ी वजह धर्म है. 2023 से पहले दोनों देशों के बीच किसी भी तरह के संबंध बहाल नहीं थे. दोनों के रिश्ते बहुत ही तनावपूर्ण भी रहे हैं. सऊदी अरब में सुन्नी इस्लाम लोग रहते हैं, जबकि ईरान शिया मुसलमानों का देश है. यहां 1979 में जो इस्लामिक क्रांति हुई, उसे ईरान अन्य मुस्लिम देशों में भी फैलाना चाहता था, जिसे सऊदी अरब के शाही शासकों ने अपने लिए खतरा माना और इससे इनके बीच टकराव बढ़ा. ईरान युद्ध : खामेनेई की मौत का शोक ईरान में इस क्रांति के राजशाही का अंत हो गया था. इसके साथ ही मिडिल ईस्ट में क्षेत्रीय प्रभुत्व की भी जंग रही है, जिसमें दोनों देश आमने–सामने हो जाते हैं. इराक युद्ध, सीरिया युद्ध जैसे मुद्दों ने दोनों देशों के तनाव को और बढ़ाया, क्योंकि इससे दोनों के हित जुड़े थे. 2016 में दोनों देशों के रिश्ते बदतर हो गए थे क्योंकि जनवरी 2016 में सऊदी अरब ने शिया धर्मगुरु निम्र अल-निम्र को फांसी दी. जिसके बाद ईरान में सऊदी दूतावास पर हमला हुआ और संबंध तोड़ दिए गए थे. हाल के दिनों में सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस ट्रंप से मिलने गए थे और ऐसी संभावना जताई जा रही है कि उन्होंने ईरान के खिलाफ कार्रवाई के लिए अमेरिका को उकसाया या प्रेरित किया. क्या संयुक्त अरब अमीरात ने किया है पीठ में छुरा घोंपने का काम? संयुक्त अरब अमीरात के साथ ईरान के संबंध अच्छे तो नहीं थे, लेकिन यह कहना भी गलत होगा कि दोनों दुश्मन राष्ट्र हैं. करीब से देखें तो यह स्पष्ट मालूम होता है कि दोनों देशों के बीच सामरिक प्रतियोगिता है और दोनों के संबंध काफी सीमित हैं. दोनों देशों की सीमाएं नहीं लगती हैं , लेकिन दोनों आमने–सामने हैं और बीच में फारस की खाड़ी है. फारस की खाड़ी के तीन द्वीप भी ईरान और संयुक्त अरब अमीरात के बीच विवाद की वजहों में से एक है. दरअसल फारस की खाड़ी के तीन द्वीप अब मूसा, ग्रेटर तुंब और लेसर तुंब को संयुक्त अरब अमीरात अपना हिस्सा मानता था, जिसपर ब्रिटेन का कब्जा था. 1971 में जब ब्रिटेन ने यहां से अपनी सेनाएं हटाईं तो ईरान ने उन द्वीपों पर कब्जा कर लिया. विभिन्न विषयों पर एक्सप्लेनर और विशेष आलेख पढ़ने के लिए क्लिक करें इस वजह से दोनों देशों के बीच तनाव है और जो आज भी बना हुआ है. ईरान का खाड़ी क्षेत्र में काफी प्रभाव है और उसकी परमाणु क्षमता इस क्षेत्र के देशों के लिए बड़ी चिंता है. इस वजह से भी संयुक्त अरब अमीरात की भूमिका ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई में नजर आती है, भले ही वह प्रत्यक्ष तौर पर नहीं है. हां, यह उन देशों में शामिल हो सकता है, जिन्हें विश्वास में लेकर इजरायल और अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई की. यूएई ने इजरायल के साथ अब्राहम समझौते (Abraham Accords) पर भी हस्ताक्षर किए थे, जो यह साबित करते हैं कि यूएई का रुख किस ओर है. अब्राहम समझौते के तहत अरब के देशों ने इजरायल के साथ संबंध बहाल करने की पहल की थी, इसकी वजह यह थी कि ज्यादातर अरब देश इजरायल के खिलाफ रहे हैं. ईरान पर आक्रमण में इजरायल की क्या है भूमिका? ईरान और इजरायल के बीच जो विवाद है, उसकी मुख्य वजह यह है कि ईरान इजरायल के अस्तित्व को नकारता है. ईरान में जब इस्लामिक क्रांति हुई तो इजरायल को अवैध देश घोषित किया गया. इसकी वजह यह थी कि ईरान ने खुद को पीड़ित मुसलमानों का रहनुमा बताया और इजरायल मुसलमानों का विरोधी था. फिलिस्तीन के साथ उसके विवाद में ईरान फिलिस्तीन के साथ खड़ा रहा. इस्लामिक क्रांति के बाद ईरान ने अमेरिका का विरोध किया और उसके करीबी शाह पहलवी को हटाया. इजरायल और अमेरिका की दोस्ती भी ईरान को खटकती रही. ईरान के परमाणु कार्यक्रम की वजह से भी इजरायल के साथ उसके संबंधों में खटास रही, क्योंकि यह क्षेत्रीय शांति पर खतरा है. ईरान द्वारा हमास और हिज्बुल्लाह जैसे आतंकवादी संगठनों को इजरायल के खिलाफ पनाह देने की वजह से भी दोनों देशों में कभी भी संबंध सामान्य नहीं हुए. पिछले साल जून के महीने में भी इजरायल ने हमास को समर्थन देने की वजह से ईरान पर मिसाइलों से हमला किया था, जिसे ईरान ने खुले युद्ध की संज्ञा दी थी. ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम कसना अमेरिका की चाल अमेरिका के साथ ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह खामेनेई का विवाद जगजाहिर है. 28 फरवरी के हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने स्पष्ट कहा कि हम ईरान को परमाणु हथियार विकसित करने नहीं देंगे क्योंकि यह क्षेत्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है. ईरान के परमाणु कार्यक्रम और अमेरिका विरोधी नीति की वजह से ही ट्रंप ने इजरायल के साथ ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान चलाया. इस सैन्य अभियान के लिए कई कूटनीतिक प्रयास भी किए गए, तभी ईरान पर हमला इतनी आसानी से हो सका. ये भी

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में बवाल, अमेरिकी दूतावास में घुसी भीड़, 6 की मौत

Karachi Protest : खामेनेई की मौत के बाद रविवार को पाकिस्तान के शहर कराची में सैकड़ों लोग अमेरिकी वाणिज्य दूतावास में घुस गए. भीड़ ने खिड़कियां तोड़ दीं. पुलिस अधिकारी मोहम्मद जवाद ने बताया कि भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्स ने लाठीचार्ज किया. आंसू गैस के गोले छोड़े. BREAKING: Six killed near US consulate in Pakistan’s Karachi 🔴 LIVE updates: https://t.co/hCUJd3sXwA pic.twitter.com/0nmRzzAINu — Al Jazeera Breaking News (@AJENews) March 1, 2026 अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़प में कम से कम 6 प्रदर्शनकारी की मौत हो गई और कई अन्य घायल हुए. वाणिज्य दूतावास पर यह हमला इजराइल और अमेरिका के हमले में खामेनेई के मारे जाने के कुछ घंटे बाद हुआ. यह भी पढ़ें : क्या ईरान को नेस्तनाबूद करने के लिए सऊदी अरब और यूएई ने अमेरिका और इजरायल  को उकसाया? प्रदर्शन का वीडियो आया सामने पाकिस्तान न्यूज नाम के एक एक्स अकाउंट के पोस्ट में प्रदर्शन का वीडियो शेयर किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन की शुरुआत शांतिपूर्ण रूप से विरोध जताने के रूप में हुई, लेकिन जल्दी ही यह हिंसक हो गया. कुछ प्रदर्शनकारियों ने दूतावास के बाहर लगे खिड़कियां और दरवाजे तोड़ दिए. भीड़ ने अमेरिकी और इजराइली नीतियों के खिलाफ नारे लगाए. Latest footage from the protests outside the U.S. Consulate in Karachi#AyatollahKhamenei #Iranian #IsraelIranWar #IranRevoIution2026 #USA #Karachi pic.twitter.com/uchNBKsH3L — Pakistan News (@News3Pakistan) March 1, 2026 संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने ईरान पर हमले की निंदा की संयुक्त राष्ट्र (United Nation) प्रमुख एंतोनियो गुतारेस ने ईरान पर अमेरिका-इजरायल के हवाई हमलों की निंदा की जबकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अमेरिकी व इजराइली राजदूतों की ईरानी राजदूत से जबरदस्त बहस हुई. महासचिव गुतारेस ने चेतावनी दी कि पश्चिम एशिया में सैन्य कार्रवाई से दुनिया के सबसे अस्थिर क्षेत्र में बेलगाम घटनाओं का सिलसिला शुरू होने का खतरा है. यह भी पढ़ें : ईरान: खामेनेई की मौत के बाद कौन लेगा उनकी जगह? ये 5 करीबी या बेटा बनेगा सुप्रीम लीडर The post खामेनेई की मौत के बाद पाकिस्तान में बवाल, अमेरिकी दूतावास में घुसी भीड़, 6 की मौत appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

होली के रंगों से खराब नहीं होंगे आपके नाखून, रंग खेलने से पहले लड़कियां जरूर करें ये छोटा सा काम

Holi Nail Care Tips in Hindi: होली की मस्ती में हम चेहरे और बालों का तो ख्याल रख लेते हैं, लेकिन अक्सर अपने नाखूनों को भूल जाते हैं. होली के जिद्दी रंग नाखूनों के कोनों और पोरों में ऐसे जम जाते हैं कि हफ्तों तक नहीं निकलते, जिससे हाथ बहुत गंदे और भद्दे दिखने लगते हैं. कई बार रंगों के केमिकल की वजह से नाखून रूखे होकर टूटने भी लगते हैं. लेकिन लड़कियों को अब अपनी मैनीक्योर की चिंता करने की जरूरत नहीं है. बस रंग स्पोर्ट्सने से पहले आपको एक छोटा सा और आसान काम करना है, जिससे आपके नाखूनों पर रंगों का कोई असर नहीं होगा. इस आर्टिकल में हम आपको वो जादुई ट्रिक बताएंगे जो आपके नाखूनों को एक ढाल की तरह सुरक्षित रखेगी. तो इस बार बेफिक्र होकर रंगों से स्पोर्ट्सें, क्योंकि आपके नाखून रहेंगे बिल्कुल साफ और चमकदार. डार्क नेल पेंट का करें इस्तेमाल रंग स्पोर्ट्सने निकलने से पहले अपने नाखूनों पर किसी डार्क कलर की नेल पेंट (जैसे काला, नीला या गहरा लाल) का डबल कोट जरूर लगाएं. यह नेल पेंट आपके नाखूनों के ऊपर एक सुरक्षा की परत बना देगी. इससे होली के रंग सीधे आपके नाखूनों के संपर्क में नहीं आएंगे. जब होली स्पोर्ट्स लें, तो बस रिमूवर से नेल पेंट साफ कर लें, आपके नाखून नीचे से बिल्कुल साफ निकलेंगे. पेट्रोलियम जेली या तेल लगाएं नाखूनों के आसपास की खाल (Cuticles) बहुत नाजुक होती है और वहां रंग सबसे ज्यादा फंसता है. इससे बचने के लिए नाखूनों के कोनों पर और नाखूनों के अंदरूनी हिस्से में अच्छी तरह वैसलीन या सरसों का तेल लगा लें. तेल की चिकनाहट की वजह से रंग वहां टिक नहीं पाएगा और हाथ धोते ही तुरंत निकल जाएगा. नाखूनों को छोटा रखें अगर आप होली स्पोर्ट्सने की शौकीन हैं, तो बेहतर होगा कि आप अपने नाखूनों को थोड़ा छोटा कर लें. लंबे नाखूनों के अंदर रंग और कीचड़ जमा होने का डर ज्यादा रहता है, जिसे निकालना बहुत मुश्किल होता है. छोटे नाखूनों को साफ रखना आसान होता है और उनके टूटने का खतरा भी कम रहता है. ये भी पढ़ें: Holi Skin Care Tips: सेंसिटिव स्किन वालों के लिए होली गाइड, बिना किसी डर के स्पोर्ट्सें रंग, बस याद रखें ये 3 बातें ये भी पढ़ें: Holi Hair Care Hacks: होली के रंगों से कहीं झाड़ू जैसे न हो जाएं आपके बाल! बालों को डैमेज से बचाने के लिए अपनाएं ये 3 टिप्स Disclaimer: यह आर्टिकल सामान्य जानकारियों और मान्यताओं पर आधारित है. नया विचार इसकी पुष्टि नहीं करता है. The post होली के रंगों से खराब नहीं होंगे आपके नाखून, रंग स्पोर्ट्सने से पहले लड़कियां जरूर करें ये छोटा सा काम appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

Nagpur Explosion : कारखाने में धमाका, 17  की मौत, मची अफरा-तफरी

Nagpur Explosion : पुलिस ने बताया कि नागपुर जिले के काटोल में विस्फोटक पदार्थ बनाने वाले कारखाने में हुए धमाके में 17 लोगों की मौत हो गई. इस हादसे में 18 लोग घायल भी हुए हैं. पुलिस ने बताया कि यह विस्फोट कटोल तहसील के राउलगांव स्थित खनन और औद्योगिक कार्यों के लिए विस्फोटक पदार्थ बनाने वाली कंपनी ‘एसबीएल एनर्जी लिमिटेड’ के कारखाने में हुआ. #WATCH | Maharashtra | Visuals from the spot at SBL Energy Limited in Nagpur where 17 people died and 18 were critically injured after an explosion NDRF and SDRF teams working on the spot https://t.co/gyQWRgsJiT pic.twitter.com/adOibBhAcj — ANI (@ANI) March 1, 2026 एसबीएल एनर्जी लिमिटेड के प्रतिनिधियों ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि यह घटना कंपनी की डेटोनेटर पैकिंग इकाई में सुबह सात बजे से सवा सात बजे के बीच हुई. पुलिस ने बताया कि विस्फोट के तुरंत बाद घायलों को नागपुर के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया. लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं सीएम देवेंद्र फडणवीस सीएम देवेंद्र फडणवीस ने फैक्ट्री में हुए धमाके को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद बताया. उन्होंने पुष्टि की कि हादसे में 17 लोगों की मौत हुई है और 18 अन्य घायल हुए हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि वे लगातार स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं. धमाके के तुरंत बाद जिला कलेक्टर व एसपी मौके पर पहुंच गए थे. फडणवीस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि NDRF और SDRF की टीमें राहत-बचाव में जुटी हैं, जबकि PESO और DISH की टीमें भी पहुंच चुकी हैं. मुख्यमंत्री ने मृतकों को श्रद्धांजलि दी और घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की. घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया नागपुर ग्रामीण के पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार ने हादसे में हुई मौतों की पुष्टि की. उन्होंने बताया कि घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है. विस्फोट का सटीक कारण अभी पता नहीं चल पाया है. वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और अन्य प्रशासनिक टीमें मौके पर पहुंच गई हैं. The post Nagpur Explosion : कारखाने में धमाका, 17  की मौत, मची अफरा-तफरी appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

इंस्टाग्राम पर फीड क्लीन करना आसान, जानिए Bulk Delete और Archive करने का तरीका

आज की डिजिटल दुनिया में सोशल मीडिया प्रोफाइल को अपडेटेड और आकर्षक बना रखना बेहद जरूरी हो गया है. इंस्टाग्राम ने यूजर्स की इसी परेशानी को दूर करते हुए नया फीचर पेश किया है, जिससे आप अब एक साथ कई पोस्ट डिलीट या आर्काइव कर सकते हैं. क्यों जरूरी है Bulk Post Management? समय बचाने और प्रोफाइल को जल्दी रीफ्रेश करने के लिए पुराने या कमजोर परफॉर्मेंस वाले कंटेंट हटाने के लिए ब्रांडिंग और विजुअल स्टाइल को एक जैसा बनाये रखने के लिए बिना थर्ड-पार्टी ऐप्स के सुरक्षित मैनेजमेंट के लिए. डिलीट और आर्काइव करने में फर्क क्या है? Delete: पोस्ट हमेशा के लिए हट जाता है और वापस नहीं आता. Archive: पोस्ट पब्लिक से छिप जाता है लेकिन आपके अकाउंट में सुरक्षित रहता है. जरूरत पड़ने पर आप इसे फिर से बहाल कर सकते हैं. स्टेप-बाय-स्टेप गाइड इंस्टाग्राम ऐप खोलें और प्रोफाइल पेज पर जाएं. ऊपर दाईं ओर तीन लाइन वाले मेन्यू पर टैप करें. “Your Activity” चुनें. “Photos and Videos” → “Posts” पर जाएं. Sort & Filter से पोस्ट को डेट या टाइप के हिसाब से व्यवस्थित करें. “Select” पर टैप करके कई पोस्ट चुनें. अब “Delete” या “Archive” विकल्प चुनें. प्रोफाइल को क्लीन बनाना आसान इंस्टाग्राम का यह फीचर क्रिएटर्स, बिजनेस और आम यूजर्स सभी के लिए बेहद उपयोगी है. अब प्रोफाइल को क्लीन और ब्रांड-फ्रेंडली बनाये रखना पहले से कहीं आसान हो गया है. अक्सर पूछे जाने वाले सवाल क्या कई पोस्ट एक साथ डिलीट हो सकते हैं? हां, “Your Activity” सेक्शन से. Instagram Bulk Post Management: क्या लिमिट है? इंस्टाग्राम ने कोई तय सीमा नहीं बताई, लेकिन छोटे बैच में डिलीट करना बेहतर है. क्या डिलीट करने से फॉलोअर्स कम होंगे? नहीं, लेकिन हाई-एंगेजमेंट पोस्ट हटाने से मेट्रिक्स प्रभावित हो सकते हैं. क्या डिलीट किये गए पोस्ट वापस आ सकते हैं? नहीं, केवल आर्काइव किये गए पोस्ट ही बहाल किए जा सकते हैं. यह भी पढ़ें: Instagram पर न ऑनलाइन दिखेंगे और न ही आपकी लास्ट सीन, बस इस सेटिंग को कर दें ऑफ The post इंस्टाग्राम पर फीड क्लीन करना आसान, जानिए Bulk Delete और Archive करने का तरीका appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

अयातुल्ला अली खामेनेई: एक युग का अंत, आखिरी सांस तक इजरायल-US से लड़ते रहे, ऐसा रहा 86 साल का सफर

Iran Ayatollah Ali Khamenei Death: मध्य पूर्व की नेतृत्व में शायद ही कोई घटना इतनी दूरगामी साबित हो जितनी ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा की गई घोषणा और बाद में ईरानी मीडिया की पुष्टि ने न सिर्फ ईरान बल्कि पूरे क्षेत्र की शक्ति-संरचना को हिला दिया है. यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ईरान और इजरायल के बीच सीधा सैन्य टकराव अपने चरम पर है और अमेरिका खुलकर इजरायल के साथ खड़ा दिखाई दे रहा है. इसी साझा कार्रवाई में 28 फरवरी को ईरान के सुप्रीम लीडर की हवाई हमले में मौत हो गई. 86 साल के खामेनेई का जीवन सफर कैसा रहा? आइए इस पर एक नजर डालते हैं. मशहद से तेहरान तक: खामेनेई का सफर अली खामेनेई का जन्म 19 अप्रैल 1939 को ईरान के पवित्र शहर मशहद में हुआ. धार्मिक परिवार में पले-बढ़े खामेनेई ने कम उम्र में कुरान और इस्लामी शिक्षा ग्रहण की. बाद में क़ोम जाकर उन्होंने उन्नत इस्लामी अध्ययन किया, जहाँ वे अयातुल्ला रूहोल्लाह खोमैनी के विचारों से गहराई से प्रभावित हुए. 1960 और 70 के दशक में उन्होंने शाह के खिलाफ आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई, जिसके कारण उन्हें कई बार जेल जाना पड़ा. 1979 की इस्लामिक क्रांति ने उनके जीवन की दिशा बदल दी. क्रांति के बाद वे सत्ता के केंद्र में तेजी से उभरे और रिवोल्यूशनरी काउंसिल के सदस्य बने, फिर रक्षा मंत्रालय में अहम जिम्मेदारी संभाली और अंततः 1981 में ईरान के राष्ट्रपति चुने गए. सर्वोच्च नेता के रूप में 36 साल 1989 में खोमैनी की मृत्यु के बाद, Assembly of Experts ने खामेनेई को सर्वोच्च नेता नियुक्त किया. यहीं से उनका सबसे लंबा और विवादास्पद अध्याय शुरू हुआ. खामेनेई ने खुद को सिर्फ नेतृत्वक नहीं बल्कि धार्मिक सर्वोच्च सत्ता के रूप में स्थापित किया. धीरे-धीरे उन्होंने यह धारणा मजबूत की कि वे ‘धरती पर ईश्वर के प्रतिनिधि’ हैं. इसका संकेत उनके भाषणों और दावों में बार-बार दिखा. उनके शासनकाल में इस्लामिक रिवोल्यूश्नरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ईरान की सबसे ताकतवर संस्था बनकर उभरी. सेना, नौसेना, वायुसेना, खुफिया तंत्र और विदेशी अभियानों तक फैला IRGC, खामेनेई की असली शक्ति था. राष्ट्रपति और संसद से ऊपर, खामेनेई सीधे इसी ढांचे के जरिए अपने फैसले लागू करते थे. अमेरिका ‘सबसे बड़ा दुश्मन’ खामेनेई की नेतृत्व का केंद्रबिंदु हमेशा अमेरिका विरोध रहा. वे अमेरिका को ‘ईरान का नंबर वन दुश्मन’ कहते रहे. उनके नेतृत्व में ईरान का परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम आगे बढ़ा, जिसने पश्चिमी देशों के साथ तनाव को और गहरा किया. भले ही उन्होंने परमाणु हथियारों पर धार्मिक फ़तवा जारी किया हो, लेकिन अंतरराष्ट्रीय समुदाय कभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हुआ. इस टकराव की कीमत ईरान को भारी पड़ी. कड़े आर्थिक प्रतिबंध, अंतरराष्ट्रीय अलगाव और देश के भीतर बढ़ती बेरोज़गारी व महंगाई. स्त्रीओं पर सख्ती, नेतृत्वक विरोध का दमन और बार-बार कुचले गए जनआंदोलन उनके शासन की पहचान बन गए. खामेनेई की मौत और क्षेत्रीय भूचाल अब उनकी मौत ने पूरे मध्य पूर्व को अनिश्चितता के दौर में धकेल दिया है. ईरान ने 40 दिनों के शोक की घोषणा की है, लेकिन सड़कों पर सन्नाटा और सत्ता के गलियारों में बेचैनी साफ महसूस की जा रही है. सवाल यह है कि क्या इस्लामिक गणराज्य बिना खामेनेई के उसी तरह टिक पाएगा? इजरायल और अमेरिका के लिए यह रणनीतिक जीत हो सकती है, लेकिन इसके परिणाम खतरनाक भी हो सकते हैं. ईरान बदले की कार्रवाई कर सकता है, और क्षेत्रीय युद्ध और व्यापक रूप ले सकता है. खाड़ी देश, इजरायल, लेबनान और इराक सब इसकी चपेट में आ सकते हैं. जिसका संकेत ईरान ने हमले करके दर्शा भी दिए थे.  ईरान को लगा भारी झटका पिछले कुछ वर्षों से इजरायल और ईरान के बीच छद्म युद्ध चल रहा था. जिसमें, सीरिया, लेबनान, गाजा और यमन इसके प्रमुख मोर्चे रहे. लेकिन फरवरी के आखिरी सप्ताह में यह संघर्ष खुली जंग में बदल गया, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के परमाणु, मिसाइल और नेतृत्व से जुड़े ठिकानों पर संयुक्त हमले किए. तेहरान में खामेनेई के कंपाउंड को निशाना बनाया जाना इसी रणनीति का सबसे बड़ा और निर्णायक कदम था. इन हमलों का उद्देश्य केवल सैन्य ढांचे को कमजोर करना नहीं था, बल्कि ईरानी सत्ता की वैचारिक रीढ़ को तोड़ना भी था. खामेनेई की मौत की समाचार इसी संदर्भ में सामने आई. यह एक ऐसा झटका जो ईरानी इस्लामिक गणराज्य के लिए केवल सैन्य नहीं बल्कि वैचारिक हार भी मानी जा रही है. एक युग का अंत अली खामेनेई का जीवन एक ऐसे व्यक्ति की कहानी है जिसने शाह के खिलाफ संघर्ष से लेकर इस्लामी शासन की सबसे ऊंची कुर्सी तक का सफर तय किया. समर्थकों के लिए वे इस्लामी प्रतिरोध के प्रतीक थे, तो आलोचकों के लिए दमन और तानाशाही का चेहरा. उनकी मौत के साथ ही ईरान के इतिहास का एक निर्णायक अध्याय बंद हो गया है. अब सवाल यह नहीं कि खामेनेई कौन थे, बल्कि यह है कि उनके बाद ईरान क्या बनेगा?  ये भी पढ़ें:- ईरान: खामेनेई की मौत के बाद कौन लेगा उनकी जगह? 5 नजदीकी या उनका बेटा बनेगा सुप्रीम लीडर ये भी पढ़ें:- इजरायल ने खत्म कर दी ईरानी सेना की लीडरशिप, 7 बड़े अधिकारी मारे गए The post अयातुल्ला अली खामेनेई: एक युग का अंत, आखिरी सांस तक इजरायल-US से लड़ते रहे, ऐसा रहा 86 साल का सफर appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

झारखंड के सारंडा जंगल में IED विस्फोट, घायल अफसर एयरलिफ्ट

IED Blast in West Singhbhum, पश्चिमी सिंहभूम: पश्चिमी सिंहभूम में सारंडा के घने जंगलों में रविवार को नक्सलियों के खिलाफ चल रहे सर्च ऑपरेशन के दौरान आईईडी विस्फोट हुआ है. नक्सलियों द्वारा बिछाये गये इस आईईडी की चपेट में आकर 209 कोबरा बटालियन के सहायक कमांडेंट अजय मल्लिक गंभीर रूप से घायल हो गये. धमाका इतना शक्तिशाली था कि उसकी आवाज जंगल के काफी दूर तक सुनाई दी. गुप्त सूचना मिलने के बाद निकली थी टीम जानकारी के अनुसार, सुरक्षा बलों को जंगल में नक्सलियों की मौजूदगी की गुप्त सूचना मिली थी. इसी आधार पर कोबरा बटालियन और जिला पुलिस की संयुक्त टीम सर्च ऑपरेशन के लिए रवाना हुई थी. अभियान के दौरान जैसे ही टीम दुर्गम और घने जंगल क्षेत्र में आगे बढ़ी, उसी वक्त जमीन के नीचे प्लांट किया गया आईईडी विस्फोट कर गया. Also Read: Giridih: रिवाल्वर की नोंक पर भरकट्टा के व्यवसाय से जेवरात समेत 7 लाख 50 हजार की लूट जवानों ने संभाली स्थिति ब्लास्ट के तुरंत बाद मौके पर मौजूद जवानों ने सतर्कता दिखाते हुए पूरे इलाके को घेर लिया. सुरक्षा बलों के जवानों ने किसी भी संभावित नक्सली हमले की आशंका को देखते हुए मोर्चा संभाल लिया है. तुरंत ही घटना की सूचना पुलिस मुख्यालय और वरिष्ठ अधिकारियों को दी गयी. इसके बाद अतिरिक्त सुरक्षा बलों को इलाके में भेजकर सर्च ऑपरेशन को और तेज किया गया, ताकि जंगल में नक्सलियों की किसी और साजिश को नाकाम किया जा सके. घायल जवान को एयरलिफ्ट करने की तैयारी घायल सहायक कमांडेंट अजय मल्लिक की गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए उन्हें रांची रेफर करने का निर्णय लिया गया है. उन्हें एयरलिफ्ट कर लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गयी है. स्पोर्ट्सगांव स्थित हेलीपैड पर एंबुलेंस और डॉक्टरों की टीम को अलर्ट पर रखा गया है. वहां से उन्हें सीधे राज अस्पताल ले जाया जाएगा. घटना के बाद से पूरे इलाके में हाई अलर्ट है. सुरक्षा बल की जंगल में तलाशी अभियान लगातार जारी है. Also Read: Bokaro: कोयला राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने बेरमो में भगवान परशुराम की प्रतिमा का किया अनावरण The post झारखंड के सारंडा जंगल में IED विस्फोट, घायल अफसर एयरलिफ्ट appeared first on Naya Vichar.

ताजा ख़बर, मुख्य खबर

ईरान: खामेनेई की मौत के बाद कौन लेगा उनकी जगह? 5 नजदीकी या उनका बेटा बनेगा सुप्रीम लीडर

Who after Khamenei: इजरायली एयरफोर्स ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातोल्लाह अली खामेनेई को एयरस्ट्राइक में मार दिया. शनिवार को तेहरान में खामेनेई के आधिकारिक आवास और कार्यालय पर हमला किया गया, जहां उनके साथ उनकी बेटी दामाद और अन्य लोगों की मौत हो गई. ईरान का पावर स्ट्रक्चर ऐसा है, जिसमें सभी नीतिगत या शासन वाले फैसले सुप्रीम लीडर ही लेते हैं. उनकी मौत के बाद, ईरान में सत्ता संकट उत्पन्न हो गया है, ऐसे में अब देश की कमान किसके हाथ में होगी? इस प्रश्न का जवाब शायद खामेनेई ही तय करके गए थे, लेकिन इसका खुला ऐलान नहीं हुआ था.   खामेनेई की मौत के बाद ईरान ने 40 दिनों के शोक और 7 दिनों की सार्वजनिक छुट्टी की घोषणा की है. 1989 से ईरान का नेतृत्व कर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई मध्य पूर्व के सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने वाले राष्ट्राध्यक्ष थे. 1979 की इस्लामी क्रांति के रूहोल्लाह खुमैनी के बाद खामेनेई ने शासन संभाला, राष्ट्रपति बने, आईआरजीसी बनाई, ईरान पर कठोरता से शासन किया, लेकिन इजरायल के हमले में 86 वर्षीय नेता की मौत हो गई.  अब इस्लामिक रिपबल्कि नए सर्वोच्च नेता के चयन की तैयारी कर रहा है. हालांकि इसका चयन कैसे होता है, इसे संक्षिप्त तरीके से समझ लेते हैं.  सर्वोच्च नेता का चयन कैसे होता है? ईरान के संविधान के अनुसार, विशेषज्ञों की सभा (मजलिस-ए-खोबरेगान-ए-रहबरी) सर्वोच्च नेता की नियुक्ति और निगरानी करता है. यह व्यवस्था ‘विलायत-ए-फकीह’ के सिद्धांत पर आधारित है, जिसके अनुसार केवल कोई प्रमुख इस्लामी धर्मगुरु ही इस पद पर आसीन हो सकता है. 88 सदस्यों वाली यह संस्था इस्लामिक स्कॉलर्स से बनी होती है, जिन्हें जनता सीधे मतदान के जरिये आठ साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है. इसके संवैधानिक दायित्वों में सर्वोच्च नेता की नियुक्ति, निगरानी और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें पद से हटाना शामिल है. हालाँकि सुप्रीम लीडर को हटाना आसान नहीं होता. असेंबली के उम्मीदवारों की छँटनी गार्जियन काउंसिल करता है. खुद गार्जियन काउंसिल के सदस्य प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से सर्वोच्च नेता द्वारा चुने जाते हैं. हालांकि, यह सत्ता संरचना में एक तरह का क्लोज्ड सर्कल जैसा ही है.  खामेनेई की जगह लेने की दौड़ में प्रमुख नाम अमेरिका स्थित थिंक टैंक काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस की हालिया रिपोर्ट में संभावित उत्तराधिकारियों की चर्चा की गई थी. इसमें कई नामों का उल्लेख किया गया था. देखें-  होज्जत-उल-इस्लाम मोहसिन कोमी– खामेनेई के करीबी सलाहकार; समर्थकों का मानना है कि वह संक्रमण काल में निरंतरता और स्थिरता बनाए रख सकते हैं. आयतुल्लाह अलीरेजा आराफी– वरिष्ठ मौलवी; गार्जियन काउंसिल और असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स दोनों के सदस्य; ईरान की मदरसा व्यवस्था के प्रमुख. आयतुल्लाह मोहसिन अराकी– असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स के वरिष्ठ सदस्य; मज़बूत धार्मिक पृष्ठभूमि. आयतुल्लाह गुलाम हुसैन मोहसेनी एजई– वर्तमान में ईरान की न्यायपालिका के प्रमुख; सुरक्षा और प्रशासनिक अनुभव. आयतुल्लाह हाशेम होसैनी बुशेहरी– कोम के जुमे की नमाज के इमाम और असेंबली के सदस्य. ये भी पढ़ें:- ईरानी हमलों से दहला यूएई, दुबई में बुर्ज खलीफा, पाम जुमैरा, एयरपोर्ट बने निशाना बेटे को भी बनाया जा सकता है सुप्रीम लीडर हालांकि, खामेनेई ने अपने जीवनकाल में किसी उत्तराधिकारी का औपचारिक ऐलान नहीं किया था, लेकिन खामेनेई के बेटे का नाम भी ईरान के सुप्रीम लीडर बनने के लिए आगे आ सकता है. ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) नए सर्वोच्च नेता की नियुक्ति को लेकर जल्दबाजी में फैसला लेना चाहता है. इसके लिए संवैधानिक प्रक्रिया को किनारे करने की कोशिश भी की जा सकती है. रिपोर्ट के अनुसार, IRGC के शीर्ष नेतृत्व यह प्रयास कर रहा है कि रविवार, 1 मार्च की सुबह तक खामेनेई के उत्तराधिकारी के नाम पर सहमति बना ली जाए. ऐसे में दिवंगत नेता अली खामनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता घोषित किया जा सकता है. इन सभी के अलावा फिलहाल ईरान में राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान भी शासन कर रहे हैं. उनके नाम पर सहमति भी बन सकती है, क्योंकि अगर ईरान लोकतंत्र के रास्ते पर चलना चाहता है, तो उन्हें चुन सकता है. इसके साथ ही खामेनेई की अनुपस्थिति में ईरान की सिक्योरिटी काउंसिल के अध्यक्ष अली लाजीरानी भी ईरान के धार्मिक शासन को अपने हाथ में ले सकते हैं. फिलहाल ईरान इसकी घोषणा करने में देरी भी कर सकता है, क्योंकि इजरायल और अमेरिकी के हमले अभी रुके हुए हैं, पूरी तरह बंद नहीं. आने वाले समय में स्थिति और साफ हो सकती है. ये भी पढ़ें:- ईरान के हमले में मारे गए सैकड़ों US सैनिक, IRGC का दावा, मिडिल ईस्ट में 14 अमेरिकी सैन्य अड्डों पर किया था हमला ये भी पढ़ें:- इजरायल ने खत्म कर दी ईरानी सेना की लीडरशिप, 7 बड़े अधिकारी मारे गए The post ईरान: खामेनेई की मौत के बाद कौन लेगा उनकी जगह? 5 नजदीकी या उनका बेटा बनेगा सुप्रीम लीडर appeared first on Naya Vichar.

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top