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March 10, 2026

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‘बिहार में चुन-चुनकर रोजगार देना है’ सीएम नीतीश की समृद्धि यात्रा में सम्राट चौधरी का ऐलान

Industry In Bihar: ‘बिहार में चुन-चुनकर रोजगार देना है. नीतीश कुमार के मार्गदर्शन में सबकुछ करना है.’ यह बात सीएम नीतीश कुमार की समृद्धि यात्रा के दौरान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कही. सीएम नीतीश सुपौल जिले में पहुंचे, जहां कार्यक्रम का आयोजन किया गया था. यहां मंच से लोगों को संबोधित करते हुए डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा, जो लोग पलायन करते हैं, उनको पलायन नहीं करने देना है. सीएम नीतीश के राज्यसभा जाने पर क्या बोले? इसके साथ ही सीएम नीतीश कुमार के राज्यसभा जाने पर कहा, मैं एनडीए की तरफ से आश्वस्त करना चाहता हूं कि नीतीश कुमार जी कहीं नहीं जा रहे हैं. नीतीश कुमार जी हमारे बीच में हम लोगों को मार्गदर्शन देंगे और बिहार फिर से श्रेष्ठ बनने का काम करेगा. बिहार पूरी तरह से सीएम नीतीश कुमार के नेतृत्व में काम करता रहेगा. इस तरह से सम्राट चौधरी ने बिहार में ही हर बिहारी को रोजगार देने की बात कही. बिहार में लाई जाएगी इंसेंटिव पॉलिसी बिहार में उद्योग को लगातार बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके जरिए ही लोगों के लिए रोजगार उपलब्ध हो सकेगा. सोमवार को सम्राट चौधरी ने बिहार में इंसेंटिव पॉलिसी लाने की बात कही थी. उन्होंने कहा था, इंसेंटिव पॉलिसी 2026 के माध्यम से राज्य में उद्योग को बढ़ावा दिया जाएगा. जो लोग मजदूरी करने के लिए बाहर जाते हैं, उन्हें पांच साल के अंदर चिह्नित कर बिहार में ही रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा. यह प्रशासन की प्राथमिकता है. बिहार में गन्ना उद्योग को दिया बढ़ावा सम्राट चौधरी ने गन्ना उद्योग को बढ़ावा देने पर जोर दिया. सम्राट चौधरी ने कृषि वैज्ञानिकों और गन्ना किसानों से अपील की कि नई तकनीक के साथ पुरानी पद्धति की ओर लौटना है. तभी हम अच्छी खेती कर पायेंगे. खेती की पुरानी पद्धति में कैसे लौटे, इस पर भी चर्चा होनी चाहिए. प्रशासन बंद मिलों को चालू कराने के साथ ही नई चीनी मिलें लगाने की दिशा में कार्य कर रही है. आज बिहार में 10 चीनी मिलें चालू हैं. Also Read: बिहार में सर्किल रेट बढ़ाने की तैयारी पूरी, इस महीने नई प्रशासन ले सकती है फैसला The post ‘बिहार में चुन-चुनकर रोजगार देना है’ सीएम नीतीश की समृद्धि यात्रा में सम्राट चौधरी का ऐलान appeared first on Naya Vichar.

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चावल भिगोने की जरूरत नहीं, रेणुका सालुंके की रेसिपी से बनाएं रवा डोसा

Rava Dosa Recipe: डोसा खाना ज्यादातर लोगों को पसंद होता है. ऐसे में जब बात आती हैं इसे बनाने कि तब चावल भिगोना और इसका पेस्ट बनाने में काफी समय लग जाता है. अगर आप भी इस बात से परेशान होकर नाश्ते या किसी भी टाइम के लिए डोसा बनाना स्किप कर देते हैं, तो ये आर्टिकल आपकी मदद कर सकता है. आज हम आपको कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाने वाला रवा डोसा बनाने की रेसिपी बताएंगे. इसे बनाने के लिए आपको चावल या दाल भिगोने की जरूरत नहीं पड़ेगी, आप घर पर सूजी और कुछ सामग्री से रवा डोसा आसानी से तैयार कर सकते है. इस रवा डोसा की रेसिपी को क्रिएटर रेणुका सालुंके ने अपने इंस्टाग्राम @homecheff_renu पर बताया है.  रवा डोसा बनाने के लिए क्या सामग्री चाहिए? सूजी – 1 कप चावल का आटा – 1 कप गेहूं का आटा – 1/2 कप दही – 1/4 कप नमक – स्वादानुसार पानी  कटा हुआ प्याज चिली फ्लेक्स- 1 बड़ा चम्मच जीरा  कटी हुई हरी मिर्च कटी हुई करी पत्ता हरा धनिया एक चुटकी बेकिंग सोडा (ऑप्शनल) तेल या घी रवा डोसा बनाने की विधि क्या है? सबसे पहले आप एक बर्तन लें. अब आप इसमें रवा, चावल का आटा, गेहूं का आटा, नमक और दही डालें. अब आप इसमें थोड़ा पानी डालकर अच्छे से मिक्स करें. इसे आप 10 मिनट के लिए ढककर रखें.  10 मिनट के बाद आप इस मिश्रण में प्याज, चिली फ्लेक्स, जीरा, हरी मिर्च कटी हुई, धनिया पत्ती और करी पत्ता डालकर अच्छे से चम्मच की मदद से मिलाएं. आप इसमें जरूरत अनुसार पानी मिला सकते हैं. लास्ट में आप इसमें बेकिंग सोडा डाल दें. आपका डोसा का घोल बनकर तैयार है.  अब एक नॉन स्टिक तवा गर्म करें. इसमें एक बड़ा चम्मच डोसा का घोल लेकर तवे पर गोल आकार में फैलाएं. इसके ऊपर से तेल डालें, अब चम्मच की मदद से इसे पलटकर एक प्लेट में निकाल लें.  अब तैयार डोसा को आप किसी भी चटनी या सांभर के साथ सर्व कर सकते हैं.  View this post on Instagram A post shared by Renuka Salunke (@homecheff_renu) यह भी पढ़ें: Moringa Chutney Recipe: टमाटर-धनिया नहीं, अब रोटी और चावल के साथ बनाएं मोरिंगा की चटनी  यह भी पढ़ें: क्रिएटर रेणुका सालुंके की रेसिपी से तैयार करें मिनटों में मसाला छाछ  The post चावल भिगोने की जरूरत नहीं, रेणुका सालुंके की रेसिपी से बनाएं रवा डोसा appeared first on Naya Vichar.

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टीएमसी की चुनाव आयुक्त पर महाभियोग की तैयारी, आधी रात से शुरू किया हस्ताक्षर संग्रह

मुख्य बातें काफी दिनों से चल रहा है विचार महाभियोग के लिए 100 सांसदों की जरुरत Gyanesh Kumar: कोलकाता: बंगाल में नेतृत्वक तापमान बढ़ता जा रहा है. एक तरफ मुख्य चुनाव आयुक्त शहर में नियमित बैठकें कर रहे हैं. वहीं दूसरी तरफ तृणमूल सुप्रीमो ममता बनर्जी मेट्रो चैनल पर धरना दे रही हैं. इस बीच तृणमूल कांग्रेस ने एक बड़ा कदम उठाने की घोषणा की है. पिछले कुछ महीनों में ममता बनर्जी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कई बार आवाज उठाया है. अभिषेक बनर्जी ने इस मामले में और भी तीखा रुख अपनाया है. अब तृणमूल कांग्रेस ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है. काफी दिनों से चल रहा है विचार कुछ दिन पहले ममता बनर्जी ने कहा था कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग चलाया जाएगा. बाद में अभिषेक ने कहा कि इस प्रक्रिया को लेकर चर्चा भी चल रही है. अटकलें शुरू हो गईं. संवैधानिक पद पर आसीन ऐसे व्यक्ति के खिलाफ महाभियोग चलाना आसान नहीं होता. व्यवहार में किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया मुख्य चुनाव आयुक्त के लिए भी समान ही होती है. हालांकि, इस बार तृणमूल कांग्रेस ने यह प्रक्रिया शुरू की है. पश्चिम बंगाल की अन्य समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें महाभियोग के लिए 100 सांसदों की जरुरत सोमवार की आधी रात को तृणमूल ने घोषणा की कि महाभियोग की प्रक्रिया शुरू हो गई है. हस्ताक्षर जुटाने का काम भी शुरू हो गया है. कम से कम 100 सांसदों के हस्ताक्षर आवश्यक हैं. तृणमूल कांग्रेस के लोकसभा और राज्यसभा में 41 सांसद हैं. ऐसे में सूत्रों का कहना है कि तृणमूल अन्य नेतृत्वक दलों से संपर्क कर रही है. हिंदुस्तान गठबंधन में शामिल अन्य पक्षों से भी हस्ताक्षर मांगे जा सकते हैं. हालांकि, भाजपा का दावा है कि तृणमूल के पास मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने का अधिकार नहीं है. भाजपा नेता जगन्नाथ चटर्जी ने कहा कि तृणमूल यह सब सिर्फ सुर्खियों में आने के लिए कर रही है. Also Read: अभिषेक बनर्जी का अमित शाह पर प्रहार, बोले- अब और स्पोर्ट्स नहीं, गेम ओवर The post टीएमसी की चुनाव आयुक्त पर महाभियोग की तैयारी, आधी रात से शुरू किया हस्ताक्षर संग्रह appeared first on Naya Vichar.

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ईरान युद्ध: पहले 48 घंटे में US ने दागे 560 करोड़ के गोला-बारूद, अब खड़ी हुई मुश्किल

Iran War: युद्ध खर्चीला होता है. हिंदुस्तान पाकिस्तान के बीच 2025 में चार दिन (87 घंटे) के छोटे से संघर्ष में प्रति घंटा 100 करोड़ का नुकसान हुआ. यह तो दोनों देशों के बीच खर्च हुआ. वहीं, अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी 2026 को ईरान पर हमला कर दिया. मिडिल ईस्ट (पश्चिम एशिया में खाड़ी के 17 देश) इस युद्ध में जहां ईरान ‘बर्बाद’ हो रहा है, तो अमेरिका का खजाना इसमें ‘पानी की तरह बह’ रहा है. वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के शुरुआती 48 घंटों के दौरान, अमेरिका ने करीब 560 करोड़ डॉलर के हथियारों का इस्तेमाल किया. रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप प्रशासन इस सप्ताह ही कांग्रेस को अतिरिक्त रक्षा बजट (सप्लीमेंटल डिफेंस बजट) का प्रस्ताव भेज सकता है, जो दसियों अरब डॉलर तक हो सकता है, ताकि सैन्य अभियान जारी रहे. वॉशिंगटन पोस्ट ने तीन अमेरिकी अधिकारियों का हवाला देते हुए बताया कि 28 फरवरी को युद्ध शुरू होने के बाद से अमेरिकी सेना ने सैकड़ों सटीक हथियारों का इस्तेमाल किया है. इनमें एयर डिफेंस इंटरसेप्टर और टॉमहॉक क्रूज मिसाइलें शामिल हैं. मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेंट्रल कमांड (यूएस सेंटकॉम) के अनुसार, ईरान में अब तक 5,000 से अधिक ठिकानों पर हमला किया जा चुका है और इसके लिए 2,000 से अधिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया है. कोरिया से हथियार शिफ्ट कर रहा अमेरिका अमेरिकी सेना अपने हथियार भंडार को तेजी से इस्तेमाल करते हुए दुनिया के अन्य हिस्सों से भी सैन्य संसाधन हटा रही है. पेंटागन दक्षिण कोरिया से टर्मिनल हाई एल्टीट्यूड एरिया डिफेंस (THAAD) प्रणाली के कुछ हिस्सों को मध्य पूर्व भेज रहा है. इसके अलावा, अमेरिकी सेना पैट्रियट इंटरसेप्टर मिसाइलों को भी इंडो-पैसिफिक (दक्षिण पूर्व एशिया और चीन-जापान का क्षेत्र) और अन्य क्षेत्रों से हटाकर ईरान के ड्रोन और बैलिस्टिक मिसाइल हमलों से बचाव के लिए इस्तेमाल कर रही है. तेहरान में तेल डिपो पर हमले के बाद काला हुआ आसमान. फोटो- एक्स. इतना खर्च होने से अमेरिका में चिंता इस अभियान से पहले जनरल डैन केन ने राष्ट्रपति ट्रंप को चेतावनी दी थी कि ईरान के साथ लंबा युद्ध अमेरिकी सटीक हथियारों के भंडार को खत्म कर सकता है. ये भंडार पहले ही रूस के खिलाफ युद्ध में यूक्रेन को वर्षों तक दी गई मदद और अन्य देशों में चल रहे अमेरिकी सैन्य अभियानों के कारण काफी कम हो चुके हैं. हालांकि, ट्रंप प्रशासन ने इस चेतावनी को कम महत्व दिया था, उनके अनुसार, ईरान युद्ध अमेरिकी सेना की तैयारी (military readiness) को तेजी से कमजोर नहीं कर रहा है. लेकिन, इस युद्ध के पहले दो दिनों में 5.6 अरब डॉलर के हथियार और गोला-बारूद खर्च होने से कैपिटल हिल में कुछ नेताओं में चिंता भी बढ़ी है.  अमेरिका के तीन एफ-15 गिरे कुवैत में एक मित्र-बलों की गलती (फ्रेंडली फायर) की घटना में अमेरिका के तीन एफ-15 लड़ाकू विमान भी गिर गए. मार्क कैंसियन के अनुसार, प्रत्येक विमान की कीमत करीब 100 मिलियन डॉलर यानी लगभग 10 करोड़ डॉलर है. इस युद्ध में अब तक सात अमेरिकी सैनिकों की मौत हो चुकी है. इनमें से छह सैनिक कुवैत में ईरान के ड्रोन हमले में मारे गए, जबकि एक अन्य सैनिक की मौत सऊदी अरब में हुए हमले में हुई.  ये भी पढ़ें:- अमेरिकी एक्सपर्ट ने खोली ट्रंप की पोल! ईरान में 150+ लड़कियों की मौत US मिसाइल से ही हुई ईरान के सटीक हमलों से हैरान अमेरिका विश्लेषकों का मानना है कि ईरान के जवाबी हमलों की तकनीकी क्षमता ने उन्हें हैरान किया है. ईरान कई बार अमेरिका और इजरायल की वायु रक्षा प्रणालियों- रडार और कमांड-एंड-कंट्रोल ढांचे को निशाना बनाने में सफल रहा है. रिपोर्ट के अनुसार रूस भी ईरान को खुफिया जानकारी दे रहा है, जिससे अमेरिकी बलों के खिलाफ उसके हमलों की सटीकता बढ़ी है. यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह युद्ध कितने समय तक चल सकता है. पिछले सप्ताह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि यह अभियान एक महीने से ज्यादा भी चल सकता है. हालांकि, सोमवार को उन्होंने सीबीएस न्यूज से कहा कि यह अभियान ‘लगभग पूरी तरह समाप्ति की ओर’ है, क्योंकि ईरान को भारी सैन्य नुकसान हुआ है. अमेरिकी हमले के बाद ईरान. फोटो- पीटीआई. सस्ते हथियारों की ओर रुख करेगा अमेरिका रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन ने पिछले हफ्ते कहा था कि शुरुआती चरण में सटीक निशाना लगाने वाले महंगे हथियारों (precision munitions) का इस्तेमाल किया गया था. लेकिन अब अमेरिकी और इजरायली सेनाएं ईरान के अंदर आगे बढ़ते हुए अधिक मात्रा में उपलब्ध लेजर-निर्देशित बमों का इस्तेमाल करेंगी, क्योंकि उन्होंने ईरान के ऊपर हवाई प्रभुत्व स्थापित कर लिया है. ये भी पढ़ें:- रमजान में अली खामेनेई की ‘शहादत’ और मुजतबा की ‘ताजपोशी’, क्या नया सुप्रीम लीडर बदलेगा ईरान? सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज में अमेरिकी हथियार भंडार पर नजर रखने वाले विश्लेषक मार्क कैंसियन ने कहा कि महंगे लंबी दूरी के हथियारों की जगह सस्ते हथियारों का इस्तेमाल शुरू होने से हर हमले की लागत काफी कम हो जाएगी. जहां पहले हर हमले पर लाखों डॉलर खर्च होते थे, वहीं अब कुछ मामलों में यह लागत एक लाख डॉलर से भी कम हो सकती है. ईरान को फिर ट्रंप की धमकी इसी बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेहरान को कड़ी चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि अगर ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले तेल के परिवहन को बाधित करने की कोशिश करता है, तो उसे भारी सैन्य जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा. ट्रंप ने कहा कि अगर इस अहम समुद्री मार्ग को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई, तो अमेरिका की प्रतिक्रिया पहले की किसी भी कार्रवाई से कहीं अधिक तीव्र होगी. ये भी पढ़ें:- जान बचाने के लिए होटल से भागीं 5 ईरानी खिलाड़ी, ऑस्ट्रेलिया में मिली पनाह, जानें पूरा मामला The post ईरान युद्ध: पहले 48 घंटे में US ने दागे 560 करोड़ के गोला-बारूद, अब खड़ी हुई मुश्किल appeared first on Naya Vichar.

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न्यायपालिका में Corruption वाले चैप्टर पर NCERT ने मांगी माफी, वापस ली किताबें 

NCERT Apology: न्यायपालिका में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर पर सुप्रीम कोर्ट से लगी फटकार के बाद NCERT ने सार्वजनिक रूप से माफी मांग ली है. संस्था ने कहा कि पूरी किताब वापस ले ली गई है और अब यह आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है. NCERT ने X पर दी जानकारी NCERT ने इस संबंध में ट्वीट के माध्यम से जानकारी दी. संस्था ने कहा, “हाल ही में क्लास 8 की सोशल साइंस की पुस्तक में Exploring Society: India and Beyond (भाग-2) प्रकाशित की थी, जिसमें चैप्टर-4 का शीर्षक था, हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका. एनसीईआरटी के निदेशक और सदस्यों ने इस अध्याय को लेकर बिना किसी शर्त के सुप्रीम कोर्ट से माफी मांगी है. साथ ही बताया गया है कि पूरी किताब को वापस ले लिया गया है और अब यह उपलब्ध नहीं है.” 𝐏𝐫𝐞𝐬𝐬 𝐑𝐞𝐥𝐞𝐚𝐬𝐞: 𝐏𝐮𝐛𝐥𝐢𝐜 𝐀𝐩𝐨𝐥𝐨𝐠𝐲 The National Council of Educational Research and Training [NCERT] has recently published a social science textbook, “Exploring Society: India and Beyond,” Grade 8 (Part II), which contained Chapter IV titled “The Role of… pic.twitter.com/mZY15aJTDo — NCERT (@ncert) March 10, 2026 इसी के साथ NCERT ने आगे कहा कि हम इस कारण हुई असुविधा के लिए ईमानदारी से खेद व्यक्त करते हैं और सभी संबंधित पक्षों की समझदारी की सराहना करते हैं. NCERT शैक्षणिक सामग्री में सटीकता, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. कहां से शुरू हुआ पूरा मामला? सुप्रीम कोर्ट NCERT की किताब में ‘न्यायपालिका में भ्रष्टाचार’ वाले टॉपिक के उल्लेख को लेकर कारण बताओ नोटिस जारी किया था. ये नोटिस 26 फरवरी को NCERT के निदेशक और शिक्षा मंत्रारलय के सचिव के लिए जारी किया गया. कोर्ट ने किताब की सभी कॉपियों को तुरंत बैन कर दिया. साथ ही पूछा कि इस मामले में आपराधिक अवमानना कार्रवाई क्यों न की जाए. यहीं से ये पूरा विवाद शुरू हुआ. क्या था सुप्रीम कोर्ट का कहना? सुप्रीम कोर्ट का मानना था कि इसमें न्यायपालिका की गलत या एकतरफा तस्वीर पेश की गई है. सुनवाई के दौरान हिंदुस्तान के मुख्य न्यायाधीश (CJI) बी.आर. गवई और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने कहा कि इस उम्र में शिशु जीवन की बारीकियों को समझना शुरू ही करते हैं, ऐसे में उन्हें गलत जानकारी देना उचित नहीं है. कोर्ट का साफ कहना था कि किताब के माध्यम से ये जानकारी स्टूडेंट्स, शिक्षक और माता पिता तक पहुंचेगी. इससे समाज पर प्रभाव पड़ेगा. यह भी पढ़ें- 11 की फीस, बदली स्टूडेंट की तकदीर! Khan Sir ने बताया सच The post न्यायपालिका में Corruption वाले चैप्टर पर NCERT ने मांगी माफी, वापस ली किताबें  appeared first on Naya Vichar.

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भारत को ‘DRS’ ने जीताया टी20 वर्ल्ड कप, जानें नया फॉर्मूला

Highlights धोनी, रोहित और सूर्या का ‘DRS’  तीन बार वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम  लगातार दो बार चैंपियन बनने का रिकॉर्ड  होम टीम का वर्ल्ड कप जीतने का कमाल  T20 World Cup: टीम इंडिया ने टी20 वर्ल्ड कप 2026 की ट्रॉफी जीत ली है. हिंदुस्तानीय टीम की इस जीत के साथ एक नया ‘DRS’ बन गया है. क्रिकेट में DRS का मतलब डिसीजन रिव्यू सिस्टम होता है. इसके अलावा सोशल मीडिया पर इसको एमएस धोनी से भी जोड़ा जाता रहा है. अक्सर विकेट के पीछे से धोनी के रिव्यू फैसले सही होते रहे हैं तो इसको धोनी रिव्यू सिस्टम भी कहा जाता है. लेकिन अब टीम इंडिया के लिए इसका एक और मतलब होगा. धोनी, रोहित और सूर्या इन तीनों कप्तानों के नाम का पहला अक्षर मिलकर DRS बनाता है. धोनी, रोहित और सूर्या का ‘DRS’  हिंदुस्तान के लिए टी20 वर्ल्ड कप में अब तक तीन कप्तानों ने ट्रॉफी जीती है. सबसे पहले साल 2007 में एमएस धोनी (MS Dhoni) की कप्तानी में टीम इंडिया चैंपियन बनी थी. इसके बाद साल 2024 में रोहित शर्मा (Rohit Sharma) ने हिंदुस्तान को दूसरी बार टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जिताया. अब 2026 में सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) की कप्तानी में हिंदुस्तान ने तीसरी बार यह ट्रॉफी हासिल की है. इन तीनों कप्तानों के नाम एक-एक अक्षर (D, R, S) को मिलाने पर ‘DRS’ बनता है. यह डीआरएस हिंदुस्तानीय क्रिकेट फैंस के लिए जीत का नया प्रतीक बन गया है. तीन बार वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम  हिंदुस्तानीय टीम तीन बार टी20 वर्ल्ड कप की ट्रॉफी जीतने वाली दुनिया की पहली टीम बन गई है. हिंदुस्तान ने पहला खिताब 2007 में साउथ अफ्रीका में जीता था. इसके बाद दूसरा खिताब 2024 में वेस्टइंडीज में जीता. अब 2026 में हिंदुस्तान ने अपने ही देश में तीसरा खिताब जीता है. यह रिकॉर्ड हिंदुस्तानीय टीम के लगातार अच्छे स्पोर्ट्स को दिखाता है. लगातार दो बार चैंपियन बनने का रिकॉर्ड  इस टूर्नामेंट में टीम इंडिया ने एक और बड़ा रिकॉर्ड अपने नाम किया है. हिंदुस्तान लगातार दो बार टी20 वर्ल्ड कप जीतने वाली पहली टीम बन गई है. टीम इंडिया ने पिछले टी20 वर्ल्ड कप 2024 में ट्रॉफी जीती थी. अब 2026 के टूर्नामेंट में भी हिंदुस्तान ने खिताब अपने पास ही रखा है. टी20 वर्ल्ड कप के इतिहास में इससे पहले कोई भी टीम लगातार दो बार चैंपियन नहीं बन सकी थी. होम टीम का वर्ल्ड कप जीतने का कमाल  साल 2026 का टी20 वर्ल्ड कप हिंदुस्तान में स्पोर्ट्सा गया. टीम इंडिया ने अपने घरेलू मैदान पर स्पोर्ट्सते हुए यह ट्रॉफी जीती है. इसके साथ ही हिंदुस्तान दुनिया की पहली ऐसी टीम बन गई है जिसने होम टीम के तौर पर टी20 वर्ल्ड कप का खिताब जीता हो. अपने देश में स्पोर्ट्सते हुए टीम ने शुरू से लेकर अंत तक शानदार प्रदर्शन किया. इस जीत के साथ हिंदुस्तान ने टी20 क्रिकेट में अपना दबदबा पूरी तरह से साबित कर दिया है. इसी के साथ टी20 वर्ल्ड कप 2026 के समय से एक ट्रेंड सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है. वह था हिस्ट्री रिपीट करेंगे, हिस्ट्री डिफीट करेंगे. यह ट्रेंड को टीम इंडिया ने सही साबित करके दिखाया. उन्होने वर्ल्ड कप जीतकर हिस्ट्री को रिपीट भी किया और डिफीट भी किया. ये भी पढ़ें- ICC टी20 वर्ल्ड कप टीम में बुमराह सहित 4 हिंदुस्तानीय खिलाड़ी, मारक्रम को बनाया कप्तान देखकर अच्छा लगा, धोनी के मुस्कान वाले पोस्ट पर गंभीर का रिएक्शन उनका बस चले तो खुद… जीत के बाद सूर्यकुमार यादव ने गौतम गंभीर पर क्या कहा? The post हिंदुस्तान को ‘DRS’ ने जीताया टी20 वर्ल्ड कप, जानें नया फॉर्मूला appeared first on Naya Vichar.

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टी-20 विश्व कप में भारतीय क्रिकेट का स्वर्णकाल, पढ़ें अभिषेक दुबे का लेख

T20 World Cup : किसी भी स्पोर्ट्स में विश्व कप की ट्रॉफी जीतना एक ऐतिहासिक लम्हा होता है. यह ऐतिहासिक पल तब यादगार स्वर्णिम काल बन जाता है, जब ट्रॉफी की जीत एक आदत बन जाती है. सूर्यकुमार यादव की अगुवाई वाली हिंदुस्तानीय क्रिकेट टीम के लिए अहमदाबाद के नरेंद्र मोदी स्टेडियम में बीते रविवार की रात उस स्वर्णिम काल का ऐलान था. कपिल देव के नेतृत्व में 1983 में और महेंद्र सिंह धोनी की अगुवाई में 2011 में हिंदुस्तान 50 ओवर के विश्व कप का चैंपियन बना. फिर धोनी की ही कप्तानी में हिंदुस्तान 2007 के टी-20 विश्व कप, फिर रोहित शर्मा की कप्तानी में 2024 में टी-20 विश्व कप का विजेता बना. वर्ष 2023 के विश्व कप में हिंदुस्तान ने फाइनल को छोड़ अपने सभी मैच जीते थे. जबकि 2024 के टी-20 विश्व कप में अपने सभी मैच जीतकर हिंदुस्तान विश्वविजेता बना था. ऐसे ही, 2025 में सभी टीमों को हराकर हिंदुस्तान चैंपियंस ट्रॉफी विजेता बना. टीम इंडिया ने 2024 के टी-20 विश्व कप और 2026 टी-20 विश्व कप के बीच टी-20 की आठ शृंखलाओं में जीत हासिल की, जिनमें से सात जीत सूर्यकुमार यादव की कप्तानी और गौतम गंभीर के हेड कोच के दौर में मिली. इस आधार पर यह निस्संदेह सफेद बॉल फॉर्मेट में हिंदुस्तानीय क्रिकेट का स्वर्णकाल है . क्रिकेट के पंडितों को हिंदुस्तानीय क्रिकेट का पराक्रम किसी दौर में वेस्ट इंडीज और ऑस्ट्रेलिया की टीमों की धमक की याद दिलाता है. यह स्वर्णिम दौर कब और कहां से आया? महेंद्र सिंह धोनी के बाद विराट कोहली ने टीम इंडिया की कमान संभाली. आइपीएल के शुरू होने से हिंदुस्तानीय क्रिकेट के टैलेंट पूल में इजाफा हुआ. विराट कोहली ने टीम को आक्रामकता, ऊर्जा और फिटनेस का मूलमंत्र दिया. इसने टीम को दो देशों के बीच सीरीज में तो जीत दिलानी शुरू कर दी, पर टीम का अभियान विश्व कप में सेमीफाइनल में जाकर रुक जाता था. फिर रोहित शर्मा टीम के सेनापति बने. उन्हें यह बात समझ में आ गयी थी कि विश्वविजेता बनने के लिए निडरता और पहली गेंद से आक्रामक रवैया जरूरी है. रोहित ने खुद मिसाल पेश करते हुए विरोधी खेमे पर पहली गेंद से ही हल्ला बोलना शुरू कर दिया. रोहित-राहुल द्रविड़ की कमान में हिंदुस्तान ने 2024 में टी-20 विश्व कप जीता और यहीं से हिंदुस्तानीय टीम के स्वर्णकाल की शुरुआत हुई. गौतम गंभीर के हेड कोच बनने के बाद हिंदुस्तानीय टीम ने 2026 के टी-20 विश्व कप की तैयारी शुरू कर दी. सूर्यकुमार यादव को टीम की कमान सौपी गयी और उन्हें सिर्फ टी-20 फॉर्मेट पर फोकस करने को कहा गया. ऐसे ही, फिटनेस की समस्या से जूझ रहे हार्दिक पंड्या टीम के लिए असरदार ऑलराउंडर साबित हुए. इसके अलावा टीम इंडिया ने ऐसी टीम की रचना शुरू कर दी, जो पहली गेंद से हल्ला बोले. रोहित शर्मा और विराट कोहली के टी-20 से रिटायरमेंट के बाद संजू सैमसन और अभिषेक शर्मा को ओपनिंग की जिम्मेदारी दी गयी. ऐसे ही, टीम को साफ संदेश दे दिया गया कि पहले तीन पोजीशन के अलावा किसी को भी कभी भी वक्त के हिसाब से भेजा जा सकता है. तिलक वर्मा, सूर्यकुमार यादव, शिवम दुबे, हार्दिक पंड्या, अक्षर पटेल और रिंकू सिंह को फ्लोटर की भूमिका दी गयी. टीम ने नाम को नहीं, फॉर्म को तवज्जो दी और इसलिए शुभमन गिल की जगह ईशान किशन को टीम में शामिल कर लिया. नतीजा सामने था. हिंदुस्तानीय टीम ने 200 के स्कोर को न्यू नॉर्मल बना लिया. जब आप 200 से अधिक का स्कोर बनाते हैं, तो टॉस और ओस मैच का फैसला तय नहीं करते. इसके अलावा टीम इंडिया ने ऑलराउंडर को टीम में तवज्जो दी. इसलिए विकेट के हिसाब से कभी कुलदीप यादव, तो कभी अर्शदीप बाहर बैठे और अक्षर, हर्षित, शिवम और वाशिंगटन सुंदर को मौका मिला. इस बीच हिंदुस्तानीय टीम के पास जसप्रीत बुमराह के रूप में नायाब हीरा है. बुमराह खुद को क्रिकेट में किसी भी दौर के महानतम गेंदबाजों में से एक साबित कर चुके हैं. वेस्ट इंडीज, पाकिस्तान और ऑस्ट्रेलिया के पूर्व महान गेंदबाज उन्हें तेज गेंदबाजी की गुर का दिग्गज मान चुके हैं. टेस्ट क्रिकेट और एकदिवसीय क्रिकेट में तो कोई बुमराह के गेंदबाजी स्पेल से बचकर निकल भी सकता है, लेकिन टी-20 क्रिकेट में उनके चार ओवर डेथ वारंट के समान होते हैं. हिंदुस्तानीय टीम प्रबंधन और चयनकर्ता ने उनके वर्कलोड को भी बेहतरीन तरीके से संभाला है. हर विश्व कप की जीत एक नायक लेकर आता है. इस बार के विश्व कप की जीत के नायक संजू सैमसन हैं. संजू सैमसन के पास हुनर है, इसका अंदाजा हर किसी को बीते दस साल से था. वह हुनर अब विश्वविजेता टीम को अपने अंजाम तक पहुंचाने में सूत्रधार बनेगा, यह टी-20 विश्व कप की तीन यादगार पारियों से साबित हुआ. संजू सैमसन की इन तीन पारियों ने हिंदुस्तान को ट्रॉफी तक पहुंचाया. लेकिन संजू और टीम इंडिया का पड़ाव अभी खत्म नहीं हुआ है. अभी एकदिवसीय विश्व कप और वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप जीतनी है. तभी सही मायने में टीम इंडिया का स्वर्णकाल होगा.(ये लेखक के निजी विचार हैं.) The post टी-20 विश्व कप में हिंदुस्तानीय क्रिकेट का स्वर्णकाल, पढ़ें अभिषेक दुबे का लेख appeared first on Naya Vichar.

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मजबूत बढ़त के साथ खुले शेयर बाजार, सेंसेक्स 591 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,186 के पार

Share Market: हिंदुस्तानीय शेयर बाजार ने मंगलवार को मजबूती के साथ शुरुआत की. शुरुआती कारोबार में BSE Sensex और NIFTY 50 दोनों में अच्छी बढ़त देखने को मिली. सुबह करीब 9:17 बजे सेंसेक्स 591.41 अंक यानी 0.76% चढ़कर 78,157.57 पर पहुंच गया. वहीं निफ्टी 50 158.20 अंक यानी 0.66% की बढ़त के साथ 24,186.25 के स्तर पर कारोबार करता दिखा. बाजार फिलहाल कमजोर लेकिन ओवरसोल्ड Shrikant Chouhan, हेड इक्विटी रिसर्च, Kotak Securities के अनुसार फिलहाल बाजार का ट्रेंड कमजोर जरूर है, लेकिन यह ओवरसोल्ड स्थिति में भी है. उनका कहना है कि डे-ट्रेडर्स के लिए निफ्टी 24,000–23,900 और सेंसेक्स 77,500–77,200 अहम सपोर्ट जोन रहेंगे. अगर बाजार इन स्तरों से ऊपर बना रहता है तो इसमें रिकवरी जारी रह सकती है और निफ्टी 24,200–24,300 तथा सेंसेक्स 78,000–78,300 तक जा सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी सलाह दी कि अगर बाजार 24,200–24,300 के स्तर पर पहुंचे तो कमजोर लॉन्ग पोजिशन कम करना बेहतर रहेगा. इन स्तरों के नीचे बढ़ सकता है बिकवाली का दबाव चौहान के मुताबिक अगर निफ्टी 23,900 और सेंसेक्स 77,200 के नीचे फिसलते हैं, तो बाजार में बिकवाली का दबाव तेजी से बढ़ सकता है. ऐसी स्थिति में बाजार फिर से निफ्टी 23,700 / सेंसेक्स 76,500 के स्तर को टेस्ट कर सकता है. अगर गिरावट जारी रहती है तो इंडेक्स निफ्टी 23,500 और सेंसेक्स 76,000 तक भी जा सकते हैं. वैश्विक घटनाओं का बाजार पर असर बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट Ajay Bagga के अनुसार फिलहाल बाजार काफी हद तक हेडलाइन रिस्क पर चल रहा है. यानी वैश्विक घटनाओं और बयानों का सीधा असर निवेशकों की धारणा पर पड़ रहा है. उन्होंने कहा कि Strait of Hormuz अभी भी वैश्विक तेल सप्लाई के लिए एक अहम और संवेदनशील मार्ग है. अगर यहां तनाव बढ़ता है या स्थिति बिगड़ती है तो कच्चे तेल की कीमतें फिर से तेजी से बढ़ सकती हैं. बग्गा के मुताबिक वैश्विक बाजारों में अचानक बदलाव तब देखने को मिला जब अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने दावा किया कि सैन्य अभियान तय समय से काफी आगे है और लगभग पूरा हो चुका है. इस बयान के बाद तेल बाजार में लंबी पोजिशन रखने वाले निवेशकों ने तेजी से मुनाफावसूली की, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई. कच्चे तेल में नरमी से हिंदुस्तान को राहत तनाव बढ़ने की आशंका के चलते Brent Crude पहले 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था. लेकिन बाद में कीमतों में गिरावट आई और यह फिर से 86 से 90 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में आ गया. विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में नरमी हिंदुस्तान की वित्तीय स्थिति के लिए राहत भरी समाचार है, क्योंकि इससे आयातित महंगाई और राजकोषीय घाटे पर दबाव कम हो सकता है. Also Read : LPG सिलेंडर बुकिंग का बदला नियम, अब 25 दिन से पहले नहीं मिलेगी दूसरी रिफिल The post मजबूत बढ़त के साथ खुले शेयर बाजार, सेंसेक्स 591 अंक चढ़ा, निफ्टी 24,186 के पार appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड में रसोई गैस की किल्लत बढ़ी, रांची में कॉमर्शियल सिलेंडर की सप्लाई पर रोक

LPG Cylinder Crisis: ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब झारखंड में भी दिखाई देने लगा है. पेट्रोलियम पदार्थों के आयात में संभावित बाधा और बाजार में फैल रही आशंकाओं के कारण राज्य के कई शहरों में रसोई गैस की किल्लत की स्थिति बनने लगी है. खासकर 19 किलो वाले कॉमर्शियल एलपीजी सिलिंडरों की आपूर्ति पर फिलहाल अघोषित रोक लगा दी गई है. तेल कंपनियों ने यह कदम घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देने के उद्देश्य से उठाया है. हालांकि, इस संबंध में कंपनियों की ओर से कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है, लेकिन गैस एजेंसियों को मौखिक रूप से निर्देश दिया गया है कि अगले आदेश तक कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति सीमित रखी जाए. घरेलू सिलिंडर की आपूर्ति को दी जा रही प्राथमिकता तेल कंपनियों का कहना है कि घरेलू गैस की बढ़ती मांग को देखते हुए यह अस्थायी व्यवस्था लागू की गयी है. इंडियन ऑयल के एक मंडल स्तरीय वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार कंपनियों का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि 14.2 किलो वाले घरेलू गैस सिलिंडरों की आपूर्ति बाधित न हो. हालांकि, अस्पतालों, स्कूल-कॉलेजों के मेस और अन्य जरूरी संस्थानों को कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति जारी रखने की बात कही गई है. लेकिन होटल, रेस्टोरेंट, कैटरिंग और शादी-समारोह जैसे आयोजनों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है. रोजाना हजारों सिलिंडरों की होती है सप्लाई राजधानी रांची में इंडियन ऑयल से जुड़ी गैस एजेंसियों के माध्यम से रोजाना 150 से लेकर 1000 तक कॉमर्शियल सिलिंडरों की आपूर्ति होती है. औसतन 500 सिलिंडर प्रतिदिन के हिसाब से केवल एक कंपनी की आपूर्ति लगभग 2.25 लाख सिलिंडरों के रोटेशन पर आधारित होती है, जो ग्राहकों तक पहुंचायी जाती है. इसी तरह हिंदुस्तान पेट्रोलियम, हिंदुस्तान पेट्रोलियम और अन्य तेल कंपनियां भी गैस की सप्लाई करती हैं. फिलहाल एजेंसियों को निर्देश दिया गया है कि घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता देते हुए गैस वितरण किया जाए. घबराहट में बुकिंग से अचानक बढ़ी मांग गैस एजेंसी संचालकों का कहना है कि वास्तविक समस्या गैस की कमी नहीं, बल्कि पैनिक बुकिंग है. मिडिल ईस्ट संकट की समाचारों के बाद लोगों ने घबराहट में अधिक मात्रा में सिलिंडर बुक कराना शुरू कर दिया है. पहले जहां रोजाना 350 से 400 घरेलू सिलिंडरों की बुकिंग होती थी, वहीं अब यह संख्या बढ़कर 2300 से 2500 तक पहुंच गयी है. इतनी बड़ी संख्या में बुकिंग होने से गैस एजेंसियों पर दबाव बढ़ गया है. एजेंसी संचालकों के अनुसार, इतनी मांग को पूरा करने के लिए दो की जगह आठ वाहनों से सिलिंडर की आपूर्ति करनी होगी, जो फिलहाल संभव नहीं है. इसी कारण कॉमर्शियल सिलिंडरों की सप्लाई सीमित कर स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है. कॉमर्शियल गैस सिलिंडर की कीमतों में उछाल रसोई गैस की किल्लत की अफवाहों के बीच राजधानी रांची में कॉमर्शियल सिलिंडरों की कीमतों में भारी उछाल देखने को मिल रहा है. कई जगहों पर सिलिंडर प्रशासनी दर से कहीं अधिक कीमत पर उपलब्ध कराये जा रहे हैं. रांची के डोरंडा स्थित एक रेस्टोरेंट के मालिक आदित्य भूषण सिंह ने बताया कि पहले उनके रेस्टोरेंट में कॉमर्शियल गैस सिलिंडर करीब 1800 रुपये में मिलता था, लेकिन अब कुछ सप्लायर इसे 2600 रुपये में देने की बात कर रहे हैं. उनका कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में संकट बढ़ने के साथ ही कालाबाजारी की आशंका भी बढ़ सकती है. प्रशासन ने शुरू की निगरानी रांची में घरेलू गैस की आपूर्ति में आ रही परेशानी को देखते हुए जिला प्रशासन ने व्यवस्था को दुरुस्त करने की पहल शुरू कर दी है. उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री के निर्देश पर एसडीओ कुमार रजत ने पेट्रोलियम कंपनियों के क्षेत्रीय प्रबंधकों के साथ ऑनलाइन बैठक की. बैठक में निर्णय लिया गया कि दो गैस बुकिंग के बीच कम से कम 25 दिनों का अंतराल अनिवार्य होगा. साथ ही बुकिंग के दो से तीन दिनों के भीतर होम डिलिवरी सुनिश्चित करने के निर्देश दिये गये हैं. इसके अलावा पांच और दो किलो के छोटे सिलिंडर बिना बुकिंग के उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है. प्रशासन ने तेल कंपनियों को टोल फ्री नंबर जारी करने और उस पर हमेशा कर्मी तैनात रखने का निर्देश भी दिया है, ताकि उपभोक्ताओं को सही जानकारी मिल सके. खूंटी और लोहरदगा में भी गैस की कमी राजधानी के अलावा राज्य के अन्य जिलों में भी गैस की कमी देखने को मिल रही है. खूंटी में लंबे समय से गैस नहीं मिलने के कारण लोग काफी परेशान हैं. कई लोग गैस सिलिंडर लेकर वितरक के यहां चक्कर लगाते नजर आ रहे हैं. मंगलवार को जैसे ही इंडियन गैस की खेप खूंटी के अनिगड़ा स्थित गोदाम में पहुंची, बड़ी संख्या में उपभोक्ता वहां पहुंच गये. सुबह से ही लंबी कतार लग गयी. हालांकि एजेंसी द्वारा बिना बुकिंग गैस देने से इनकार किया जा रहा है. वहीं, लोहरदगा में भी एलपीजी सिलिंडर की कमी शुरू हो गयी है. गैस वितरकों का कहना है कि जमशेदपुर से सिलिंडरों की आपूर्ति नहीं हो पाने के कारण यह समस्या पैदा हुई है. इसे भी पढ़ें: बे-मौसम बारिश ने खोली नगर निगम की पोल, कतरास की सड़कों पर भरा लबालब पानी शादी के मौसम में बढ़ी परेशानी शादी-विवाह के मौसम में गैस की कमी से लोगों की परेशानी और बढ़ गयी है. कई परिवारों को खाना बनाने और अन्य घरेलू जरूरतों के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है. हालांकि, प्रशासन का कहना है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और गैस वितरण व्यवस्था को सामान्य करने के लिए लगातार प्रयास किये जा रहे हैं. यदि कोई एजेंसी या वितरक कालाबाजारी करते पाया गया तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी. प्रशासन और तेल कंपनियों को उम्मीद है कि पैनिक बुकिंग पर नियंत्रण होने और नियमित आपूर्ति बहाल होने के बाद स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो जाएगी. इसे भी पढ़ें: न्यूजीलैंड को एक और झटका, ट्राइथलॉन जीतकर फुल आयरनमैन बने जमशेदपुर के अनंत राणा The post झारखंड में रसोई गैस की किल्लत बढ़ी, रांची में कॉमर्शियल 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कमर्शियल सिलेंडर की कमी, बंद होने लगे होटल

LPG Crisis : कमर्शियल LPG सिलेंडर की अचानक कमी से पूरे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर (होटल और रिसॉर्ट जैसे सेक्टर) खतरे में दिख रहे हैं. महाराष्ट्र और कर्नाटक में रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई ठीक नहीं हुई तो कुछ ही दिनों में खाने की दुकानें पूरी तरह से बंद हो सकती हैं. इस बीच समाचार है कि गैस सप्लाई नहीं होने की वजह से मुंबई के 20% होटल बंद हो गए हैं. लोकमत की समाचार के अनुसार, ईरान और इजरायल वॉर का असर मुंबई पर पड़ा है. करीब  20% होटल कमर्शियल LPG सिलेंडर की कमी की वजह से बंद हो गए हैं. अगले तीन दिन में इनकी संख्या बढ़ सकती है. सप्लाई नहीं होने की वजह से करीब 50 प्रतिशत होटल बंद हो सकते हैं. बेंगलुरु में भी नजर आ रहा असर बेंगलुरु में होटल और रेस्तरां 10 मार्च से पूरी तरह से प्रभावित हो सकते हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि गैस सिलेंडरों की आपूर्ति अचानक पूरी तरह बंद हो गई है. बैंगलोर होटल एसोसिएशन की ओर से इसकी जानकारी  दी गई है. एसोसिएशन ने एक आधिकारिक बयान में कहा कि गैस की आपूर्ति बंद होने के कारण मंगलवार से होटल बंद रहेंगे. होटल कारोबार एक जरूरी सेवा है. इसके बंद होने से आम जनता, स्टूडेंट के अलावा कई लोगों पर इसका असर पड़ेगा जो अपने रोज के खाने के लिए होटलों पर निर्भर हैं. यह भी पढ़ें : LPG सिलेंडर बुकिंग का बदला नियम, अब 25 दिन से पहले नहीं मिलेगी दूसरी रिफिल घरेलू एलपीजी की सप्लाई को प्राथमिकता गैस सिलेंडर की जमाखोरी और कालाबाजारी रोकने के लिए प्रशासन ने एलपीजी बुकिंग के नियम सख्त कर दिए हैं. मिडिल ईस्ट ( वह इलाका जहां तेल और गैस के बड़े भंडार हैं) में चल रहे संकट के बीच यह फैसला लिया गया. अब एक सिलेंडर लेने के बाद दूसरा सिलेंडर कम से कम 25 दिन बाद ही बुक किया जा सकेगा. प्रशासन ने रिफाइनरियों से कहा है कि वे गैस का उत्पादन बढ़ाएं और कमर्शियल सिलेंडरों की बजाय घरेलू एलपीजी की सप्लाई को प्राथमिकता दें, ताकि आम लोगों को गैस की कमी न हो. The post कमर्शियल सिलेंडर की कमी, बंद होने लगे होटल appeared first on Naya Vichar.

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