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April 18, 2026

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घुसपैठ और गोरखालैंड पर हिमंता का बड़ा बयान, कहा- ममता बनर्जी को हटाओ नहीं तो बंगाल हमसे छिन जायेगा

खास बातें ममता ने घुसपैठियों के लिए आरक्षित किया बंगाल का खजाना : हिमंता उत्तर बंगाल की अनदेखी और गोरखालैंड पर बड़ा वादा भाजपा प्रशासन बनते ही बाहर होंगे घुसपैठिये Himanta Biswa vs Mamata Banerjee: बंगाल चुनाव 2026 के बीच असम के मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) के फायरब्रांड नेता हिमंता बिस्व सरमा ने ममता बनर्जी प्रशासन पर अब तक का सबसे तीखा हमला बोला है. शनिवार को कलिम्पोंग में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए सरमा ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर ममता बनर्जी को सत्ता से नहीं हटाया गया, तो आने वाले समय में बांग्लादेशी मुसलमान बंगाल को हमसे छीन लेंगे. उन्होंने टीएमसी प्रशासन पर वोट बैंक की नेतृत्व के लिए राज्य के संसाधनों को घुसपैठियों के हवाले करने का गंभीर आरोप लगाया. ममता ने घुसपैठियों के लिए आरक्षित किया बंगाल का खजाना : हिमंता असम के चीफ मिनिस्टर सरमा ने अपनी रैली में घुसपैठ के मुद्दे को केंद्र में रखा और पड़ोसी राज्यों का उदाहरण दिया. उन्होंने दावा किया कि असम और त्रिपुरा में भाजपा की प्रशासनों ने कड़ाई बरतते हुए बांग्लादेशी मुसलमानों के हिंदुस्तान में प्रवेश को पूरी तरह रोक दिया है, जबकि बंगाल में अवैध घुसपैठ अब भी बेरोकटोक जारी है. ममता बनर्जी ने बंगाल का पूरा खजाना घुसपैठियों के लिए आरक्षित कर दिया है. उत्तर बंगाल की अनदेखी और गोरखालैंड पर बड़ा वादा पहाड़ों की नेतृत्व को साधते हुए सरमा ने क्षेत्र के विकास और स्थानीय भावनाओं पर भी बात की. उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी के कार्यकाल में उत्तर बंगाल पूरी तरह से उपेक्षित रहा है. यहां विकास का कोई काम नहीं हुआ. उन्होंने पहाड़ के लोगों को भरोसा दिलाया कि अगर बंगाल में भाजपा की प्रशासन बनती है, तो पार्टी ‘गोरखालैंड’ के मुद्दे का स्थायी संवैधानिक समाधान खोजेगी और गोरखा समुदाय को न्याय दिलायेगी. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें Himanta Biswa: भाजपा प्रशासन बनते ही बाहर होंगे घुसपैठिये मुख्यमंत्री पद से ममता बनर्जी की विदाई को बंगाल के अस्तित्व के लिए जरूरी बताते हुए सरमा ने भविष्य का खाका पेश किया. उन्होंने कहा कि बंगाल को बर्बादी से बचाने के लिए ममता बनर्जी को पद से हटाना अनिवार्य है. उन्होंने कहा कि भाजपा की प्रशासन आते ही बंगाल के कोने-कोने से सभी बांग्लादेशी घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर निकाला जायेगा. इसे भी पढ़ें गोरखालैंड से शासन तक : दार्जिलिंग पर्वतीय क्षेत्र का नये नेतृत्वक दौर में प्रवेश उत्तर बंगाल में गरजे हिमंता बिस्व सरमा, घुसपैठ, बीफ और चाय श्रमिकों पर ममता बनर्जी को घेरा भवानीपुर में ममता बनर्जी vs शुभेंदु अधिकारी, जानें BJP का ’बूथ-दर-बूथ’ सोशल इंजीनियरिंग प्लान बंगाल चुनाव 2026: ‘सांप-सीढ़ी’ वाली सियासत, दुर्गापुर में TMC बांट रही लूडो, पिला रही कोल्ड ड्रिंक्स बंगाल चुनाव के पहले चरण के लिए EVM-VVPAT तैयार, 44378 पोलिंग स्टेशनों पर 23 अप्रैल को वोट The post घुसपैठ और गोरखालैंड पर हिमंता का बड़ा बयान, कहा- ममता बनर्जी को हटाओ नहीं तो बंगाल हमसे छिन जायेगा appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में फिर ‘दीदी’ के करीब आया अल्पसंख्यक वोट बैंक! स्टिंग और UCC के डर ने बिगाड़ा खेल, जानें नये सियासी समीकरण

इसे भी पढ़ें फिर ममता बनर्जी के पीछे एकजुट हुए मुस्लिम वोटर बिखरता स्वतंत्र नेतृत्व और टीएमसी की मजबूती SIR और नागरिकता का डर UCC का वादा और धार्मिक नेताओं की अपील आंकड़ों में टीएमसी का दबदबा Minority Vote Bank West Bengal 2026: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से पहले राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर है. करीब एक महीने पहले तक ऐसा लग रहा था कि तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सबसे मजबूत ‘अल्पसंख्यक वोट बैंक’ में 15 साल में पहली बार बड़ी दरार पड़ने वाली है. लेकिन, पिछले तीन हफ्तों के घटनाक्रम ने पूरी तस्वीर ही बदल दी है. फिर ममता बनर्जी के पीछे एकजुट हुए मुस्लिम वोटर नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में नाम हटने का डर, हुमायूं कबीर का स्टिंग विवाद और हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) के समान नागरिक संहिता (UCC) के वादे ने मुस्लिम मतदाताओं को एक बार फिर ममता बनर्जी के पीछे एकजुट कर दिया है. बिखरता स्वतंत्र नेतृत्व और टीएमसी की मजबूती मार्च 2026 की शुरुआत तक इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF), असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM और हुमायूं कबीर की पार्टी AJUP एक साथ मिलकर ‘स्वतंत्र मुस्लिम नेतृत्व’ की बात कर रहे थे. वक्फ कानून और मदरसा भर्ती जैसे मुद्दों पर नाराजगी के सहारे ये दल करीब 110 मुस्लिम बहुल सीटों पर टीएमसी के आधार में सेंध लगाने की तैयारी में थे. अचानक हुए बदलावों ने इस मोर्चे को कमजोर कर दिया. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें एआईएमआईएम और आम जनता उन्नयन पार्टी (एजेयूपी) के बीच गठबंधन उस समय टूट गया, जब हुमायूं कबीर का एक कथित स्टिंग वीडियो सामने आया. इस वीडियो में उन्हें हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साथ सौदेबाजी की बात करते सुना गया. हालांकि कबीर ने इसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का कमाल बताया, लेकिन नुकसान हो चुका था. किसी मजबूत तीसरे विकल्प की अनुपस्थिति में मतदाताओं को अब फिर से टीएमसी ही एकमात्र सहारा नजर आ रही है. इसे भी पढ़ें : भवानीपुर में वोटर लिस्ट से 40 फीसदी मुस्लिम गायब, गुजराती वोट बैंक भी नाराज, ‘गढ़’ बचा पायेंगी ममता बनर्जी? SIR और नागरिकता का डर विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से करीब 91 लाख नाम हटाये गये हैं, जिसने पूरे राज्य में खलबली मचा दी हैय हटाये गये नामों में करीब 34 प्रतिशत मुस्लिम हैं. मुर्शिदाबाद, मालदा और 24 परगना जैसे जिलों में इसे लेकर गहरी असुरक्षा की भावना है. विश्लेषक मैदुल इस्लाम का कहना है कि अल्पसंख्यक मतदाता उत्साह में नहीं, बल्कि ‘डर’ की वजह से टीएमसी के पीछे खड़े हो रहे हैं. उन्हें लगता है कि अगर वोट बंटा, तो इसका सीधा फायदा भाजपा को होगा. इसे भी पढ़ें : दरक रहा ममता बनर्जी का अल्पसंख्यक दुर्ग? ओवैसी, हुमायूं और नौशाद ने बढ़ायी तृणमूल की टेंशन UCC का वादा और धार्मिक नेताओं की अपील भाजपा के घोषणापत्र में सत्ता में आने के 6 महीने के भीतर समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के वादे ने भी माहौल बदल दिया है. ऑल बंगाल माइनॉरिटी यूथ फेडरेशन और नाखोदा मस्जिद के इमाम का मानना है कि अब लड़ाई सड़क या बिजली की नहीं, संवैधानिक अधिकारों और धार्मिक पहचान की रक्षा की है. इमाम मौलाना मोहम्मद शफीक कासमी के अनुसार, मुस्लिम मतदाता उन छोटी पार्टियों को वोट देकर अपना वोट ‘बर्बाद’ नहीं करना चाहेंगे, जो सांप्रदायिक ताकतों से सीधे नहीं लड़ सकतीं. इसे भी पढ़ें : ममता बनर्जी से दूर मुस्लिम वोट बैंक? असम-बिहार और महाराष्ट्र के नतीजों ने बढ़ायी टेंशन, जानें 160 सीटों का समीकरण Minority Vote Bank: आंकड़ों में टीएमसी का दबदबा वर्ष 2021 के चुनावों में तृणमूल कांग्रेस ने उन 89 सीटों में से 87 पर जीत हासिल की थी, जहां अल्पसंख्यक मतदाता 30 प्रतिशत से अधिक थे. विश्लेषकों का कहना है कि वर्ष 2026 में भी यही कहानी दोहरायी जा सकती है, क्योंकि अल्पसंख्यक मतदाताओं को अब ममता बनर्जी के अलावा कोई दूसरा व्यावहारिक विकल्प नजर नहीं आ रहा है. नेतृत्व में ‘असुरक्षा’ अक्सर सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बनती है. बंगाल में इस समय ठीक यही हो रहा है. वर्ष 2026 का बंगाल चुनाव अब ‘त्रिकोणीय’ होने की बजाय एक बार फिर टीएमसी और बीजेपी के बीच सीधा मुकाबला बनता दिख रहा है. इसे भी पढ़ें बंगाल में गरजे पीएम मोदी- बंगालियों को अपनी ही मिट्टी पर अल्पसंख्यक नहीं बनने देंगे, ममता बनर्जी प्रशासन पर बोला हमला अल्पसंख्यकों के विकास के लिए विभागीय बजट में की गयी 10 गुना से अधिक वृद्धि : मुख्यमंत्री मुर्शिदाबाद में उग्र प्रदर्शन पर ममता बनर्जी का गैर-जिम्मेदाराना बयान, कहा- अल्पसंख्यकों का गुस्सा ‘जायज’, दंगे भड़काने की साजिश रच रही बीजेपी मोदी प्रशासन पर बरसीं ममता बनर्जी- स्त्री आरक्षण और परिसीमन को जोड़ना हिंदुस्तान बांटने की साजिश The post बंगाल में फिर ‘दीदी’ के करीब आया अल्पसंख्यक वोट बैंक! स्टिंग और UCC के डर ने बिगाड़ा स्पोर्ट्स, जानें नये सियासी समीकरण appeared first on Naya Vichar.

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महिला आरक्षण: जब पक्ष-विपक्ष दोनों समर्थक, तो 543 सीटों पर क्यों लागू नहीं हो सकता कानून?

women reservation bill lok sabha : स्त्री आरक्षण अधिनियम में संशोधन के लिए संसद में लाया गया बिल शुक्रवार को गिर गया. अब प्रशासन और विपक्ष दोनों एक दूसरे को स्त्री विरोधी बता रहे हैं. ऐसे में आम जनता यह सोच रही है कि जब प्रशासन और विपक्ष दोनों ही स्त्रीओं को आरक्षण देने के मामले में एकमत हैं, तो फिर आखिर संशोधन बिल गिरा क्यों? एक और सवाल यह भी है कि आखिर वर्तमान स्थिति में यानी 543 लोकसभा सीटों पर ही स्त्रीओं को आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता है? नारी शक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का बिल क्यों गिरा? नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 को लोकसभा चुनाव 2029 में लागू करवाने के उद्देश्य से प्रशासन इसमें संशोधन का प्रस्ताव लेकर आई थी. प्रशासन की मंशा यह थी कि जनगणना और परिसीमन के बाद आरक्षण को लागू करवाने के लिए समय सीमा 2029 तय हो जाए. अभी की स्थिति में अधिनियम में इस तरह के प्रावधान हैं कि स्त्री आरक्षण 2029 में लागू नहीं किया जा सकता है. इसकी वजह यह है कि अभी जनगणना शुरू नहीं हुई है. जनगणना के बाद परिसीमन होगा और उसके बाद ही आरक्षण लागू हो पाएगा, इस प्रक्रिया में आरक्षण 2034 से पहले लागू हो पाएगा, इसकी संभावना बहुत कम है. वहीं विपक्ष का आरोप है कि प्रशासन अभी परिसीमन कराकर अपने प्रभाव वाले क्षेत्र यानी उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में लोकसभा की सीट बढ़ाना चाहती है. साथ ही जहां उसका प्रभाव सीमित है यानी दक्षिण के राज्य, वहां सीटें कम कराना चाहती है. विपक्ष इसे संघीय ढांचे पर प्रहार बता रहा है क्योंकि किसी भी राज्य को कम आंकना और किसी को ज्यादा यह संघीय ढांचे और लोकतंत्र दोनों के खिलाफ है. इसी वजह से विपक्ष ने एकजुट होकर मतदान किया जिसकी वजह से बिल पारित नहीं हो पाया. 543 सीटों वाली लोकसभा में क्यों नहीं लागू हो सकता है कोटा? नरेंद्र मोदी प्रशासन के 12 साल के कार्यकाल में ऐसा पहली बार हुआ है कि कोई बिल संसद में गिर गया. सबके मन में यह सवाल है कि अगर स्त्रीओं को आरक्षण देने के लिए दोनों पक्ष सहमत हैं, तो 543 सीटों पर ही आरक्षण क्यों नहीं दिया जा सकता, सीट बढ़ाने की जरूरत क्या है? 2023 में संसद ने स्त्रीओं को आरक्षण देने के लिए नारी शक्ति वंदन विधेयक को बिना किसी विरोध के पास किया. अबतक यह कानून स्त्रीओं को आरक्षण का लाभ नहीं दे पाया है, क्योंकि इसके लिए पहले जनगणना का होना जरूरी है. उसके बाद चुनाव क्षेत्रों को फिर से बांटने और फिर से बनाने के लिए डीलिमिटेशन यानी परिसीमन की प्रक्रिया होगी, उसके बाद ही आरक्षण लागू होगा. विपक्ष का कहना है कि स्त्री आरक्षण को लागू करने के लिए हमने जनगणना, फिर परिसीमन तब आरक्षण की मांग नहीं की थी. यहां गौर करने वाली बात यह है कि अधिनियम में यही बात है, यानी कि कानूनन आरक्षण तब ही लागू हो सकता है, जब जनगणना का नया आंकड़ा आए. यह अभी संभव नहीं है, क्योंकि जनगणना हुई नहीं है. इस परिस्थिति में प्रशासन संशोधन लेकर आई थी, ताकि संभवत: पुराने डेटा के आधार पर परिसीमन का काम करा लिया जाता और जब नई जनगणना के आंकड़े आते, तो सबकुछ व्यवस्थित कर लिया जाता. हालांकि प्रशासन ने संशोधन बिल में इसपर कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा था. बावजूद इसके विपक्ष ने इसी मुद्दे पर संशोधन का विरोध किया और बिल पारित नहीं हो पाया. The post स्त्री आरक्षण: जब पक्ष-विपक्ष दोनों समर्थक, तो 543 सीटों पर क्यों लागू नहीं हो सकता कानून? appeared first on Naya Vichar.

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BJP महिला कार्यकर्ताओं का कांग्रेस के खिलाफ हल्ला बोल, राहुल गांधी के आवास की बढ़ाई गई सुरक्षा

BJP Protest Against Congress: BJP के जबरदस्त विरोध प्रदर्शन के बीच, लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आवास के बाहर भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है. #WATCH | Delhi: Heavy Police deployment outside the residence of Lok Sabha LoP Rahul Gandhi amid a massive protest by BJP after the Constitution (131st Amendment) Bill failed to pass in the Lok Sabha. pic.twitter.com/AoD8sgoZKA — ANI (@ANI) April 18, 2026 पूरे विपक्ष ने स्त्रीओं की पीठ पर छुरा घोंपा : बांसुरी स्वराज BJP सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा- पूरे विपक्ष ने, खासकर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने इस देश की स्त्रीओं के साथ विश्वासघात किया. उन्होंने स्त्रीओं की पीठ में छुरा घोंपा. वे चाहते हैं कि स्त्रीओं की भूमिका सिर्फ पोलिंग बूथ तक ही सीमित रहे. जब नेतृत्वक प्रतिनिधित्व की बात आई, तो उन्होंने अपने स्वार्थ को प्राथमिकता दी और स्त्रीओं के गुस्से का शिकार बन गए. उन्होंने स्त्रीओं के साथ विश्वासघात किया है. #WATCH | BJP MP Bansuri Swaraj says, “Entire Opposition, especially LoP Rahul Gandhi, betrayed the women of this country yesterday. They backstabbed women. They want women’s role to be restricted only to polling booths. When it came to political representation, they prioritised… https://t.co/OzZtk8GlPy pic.twitter.com/v3ndcoso1q — ANI (@ANI) April 18, 2026 INDI गठबंधन ने स्त्रीओं को दिया धोखा : BJP सांसद कमलजीत BJP सांसद कमलजीत सहरावत ने कहा- INDI गठबंधन के लोगों ने एक बार फिर साजिश रची और स्त्री आरक्षण बिल को हरा दिया. नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 में पास हुआ था. लेकिन इसे असल में लागू करने के लिए, एक संशोधन जरूरी था. जब कल यह संशोधन पेश किया गया, तो INDI गठबंधन ने इसके खिलाफ वोट दिया और बिल गिर गया. स्त्री आरक्षण बिल को लागू करना प्रशासन की प्राथमिकता थी. स्त्रीएं देख सकती हैं कि एक बार फिर INDI गठबंधन ने उन्हें धोखा दिया और बिल को हरा दिया. कांग्रेस के विरोध में सड़क पर उतरी रेखा गुप्ता लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक पारित न हो पाने के एक दिन बाद, CM रेखा गुप्ता और BJP की स्त्री नेताओं और कार्यकर्ताओं ने लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के आवास की ओर मार्च किया. कांग्रेस ने देश की सभी स्त्रीओं का किया अपमान : रक्षा खडसे केंद्रीय राज्य मंत्री रक्षा खडसे ने कहा, स्त्रीओं को बहुत उम्मीदें थीं कि सभी विपक्षी दल इस बिल का समर्थन करेंगे. लेकिन कांग्रेस और सभी विपक्षी दलों ने इस बिल को रोक दिया और इसके खिलाफ वोट दिया. मुझे लगता है कि यह देश की सभी स्त्रीओं का अपमान है. प्रधानमंत्री ने कहा था कि वे (विपक्ष) इसका श्रेय (स्त्री आरक्षण बिल का) ले सकते हैं, लेकिन बिल को पास जरूर करें. हालांकि, कांग्रेस ने नेतृत्व की. कांग्रेस पीछे हट गई और स्त्रीओं को उनके अधिकारों से वंचित रखा. ये भी पढ़ें: किरेन रिजिजू बोले- स्त्रीओं को अधिकार न देकर विपक्ष ने किया पाप, कांग्रेस पर लगा काला धब्बा The post BJP स्त्री कार्यकर्ताओं का कांग्रेस के खिलाफ हल्ला बोल, राहुल गांधी के आवास की बढ़ाई गई सुरक्षा appeared first on Naya Vichar.

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धू-धू कर जली हाजीपुर की फोम फैक्ट्री, जान बचाकर भागे मजदूर, इलाके में मची भगदड़

Hajipur Industrial Area, कैफ अहमद: हाजीपुर के इंडस्ट्रियल एरिया में शनिवार दोपहर एक बड़ा हादसा हो गया. यहां एक फोम बनाने वाली फैक्ट्री में अचानक भीषण आग लग गई. आग लगते ही फैक्ट्री में काम कर रहे मजदूरों के बीच अफरातफरी मच गई. लोग अपनी जान बचाने के लिए तुरंत बाहर भागे. जांच शुरू कुछ ही देर में आग तेजी से फैलने लगी और देखते ही देखते उसने भयानक रूप ले लिया. आग की ऊंची लपटें और काले धुएं का गुबार दूर से ही दिखाई देने लगा. आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई और बड़ी संख्या में लोग मौके पर इकट्ठा हो गए. घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची. पुलिस ने इलाके को घेर लिया और लोगों को सुरक्षित दूरी बनाए रखने की सलाह दी. साथ ही आग लगने के कारणों की जांच भी शुरू कर दी गई है. हाजीपुर: इंडस्ट्रियल एरिया की फैक्ट्री में भीषण आग. आर एंड डी थर्मोप्लास्ट इंडस्ट्री में लगी आग. शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका. इलाके में अफरा-तफरी. फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां मौके पर. कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू. SDPO सुबोध कुमार, SDO रामबाबू बैठा मौजूद. अधिकारियों ने… pic.twitter.com/XdId7NcE76 — Naya Vichar (@prabhatkhabar) April 18, 2026 बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें तेजी से फैली आग आग की सूचना मिलते ही दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुंचीं. दमकल कर्मी लगातार आग बुझाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन फोम सामग्री होने के कारण आग तेजी से फैल रही है. आग पर काबू पाना काफी मुश्किल हो रहा है. स्थानीय लोग भी राहत और बचाव काम में जुटे हुए हैं. बताया जा रहा है कि यह फैक्ट्री पासवान चौक के पास चाणक्य कॉलोनी रोड पर स्थित है. आग अचानक लगी और पूरे परिसर में फैल गई. फिलहाल किसी के घायल या हताहत होने की सूचना नहीं मिली है. प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है. इसे भी पढ़ें: विजय सिन्हा की सुरक्षा घटी, निशांत कुमार को मिली Z केटेगरी सुरक्षा, बिहार प्रशासन का फैसला The post धू-धू कर जली हाजीपुर की फोम फैक्ट्री, जान बचाकर भागे मजदूर, इलाके में मची भगदड़ appeared first on Naya Vichar.

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कोचिंग का खर्चा नहीं, YouTube बना गुरु, 22 की उम्र में अंशिका ने UPSC में गाड़ा झंडा

Anshika Sangwan Success Story: हरियाणा की अंशिका सांगवान ने बिना किसी कोचिंग की देश की सबसे कठिन परीक्षा क्रैक कर चुकी हैं. अंशिका ने अपने दम पर इसे पहले ही प्रयास में क्लियर कर लिया. खास बात ये है कि अंशिका सांगवान का नाम अब देश की सबसे कम उम्र की ऑफिसर्स की लिस्ट में शामिल हो जाएगा. उन्होंने महज 22 की उम्र में एग्जाम क्रैक किया है. Anshika Sangwan Success Story: कौन हैं अंशिका सांगवान? अंशिका सांगवान हरियाणा के चरखी दादरी जिले के छोटे से गांव चन्देनी की रहने वाली हैं. उनके पिता बस कंडक्टर रह चुके हैं और मां एक टीचर हैं. साधारण परिवार से होने के बावजूद अंशिका के सपने बड़े थे. उन्होंने 10वीं कक्षा में ही तय कर लिया था कि उन्हें सिविल सर्विस में जाना है और देश के लिए काम करना है. 12वीं के बाद अंशिका ने Deen Dayal Upadhyaya College में एडमिशन लिया. यहां से उन्होंने पॉलिटिकल साइंस और इकोनॉमिक्स में ग्रेजुएशन किया. खास बात ये है कि उन्होंने ग्रेजुएशन के दूसरे साल से ही UPSC की तैयारी शुरू कर दी थी. उन्होंने सबसे पहले पूरा सिलेबस समझा और उसे छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ाई की. YouTube से पढ़ाई अंशिका ने YouTube को ही अपना गुरु बना लिया. उन्होंने अलग-अलग चैनल्स से पढ़ाई की, नोट्स बनाए और लगातार प्रैक्टिस करती रहीं. उन्होंने कभी किसी कोचिंग इंस्टिट्यूट का सहारा नहीं लिया. UPSC के लिए उपलब्ध सभी फ्री स्टडी मैटेरियल का इस्तेमाल किया. अंशिका की UPSC मार्कशीट पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक अंशिका सांकवान ने UPSC सिविल सर्विस एग्जाम अपने पहले ही प्रयास में क्रैक कर लिया. उन्होंने ऑल इंडिया रैंक 330 हासिल की. कुल 971 अंकों में से उन्हें 798 अंक लिखित परीक्षा में और 173 अंक इंटरव्यू में मिले. यह भी पढ़ें: पिता करते हैं थैला प्रिंटिंग, बेटी बन गई अफसर, नवादा की रितिका को UPSC AIR 185 The post कोचिंग का खर्चा नहीं, YouTube बना गुरु, 22 की उम्र में अंशिका ने UPSC में गाड़ा झंडा appeared first on Naya Vichar.

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1 लीटर में 45 किलोमीटर, इस कार ने बना डाला माइलेज का रिकॉर्ड

चीनी ऑटोमेकर Geely Auto ने अपनी नयी हाइब्रिड तकनीक i-HEV Intelligent Hybrid System पेश की है, जो माइलेज के मामले में पूरी दुनिया का ध्यान खींच रही है. कंपनी का दावा है कि इस सिस्टम से लैस कार ने हाईवे टेस्टिंग में 45 किमी प्रति लीटर का माइलेज दिया है. इसका मतलब है कि रांची (झारखंड) से जगन्नाथ पुरी (ओडिशा) तक का लगभग 550 किमी का सफर महज ₹1200 में पूरा किया जा सकता है. 45 किमी/लीटर का रिकॉर्ड Geely की Emgrand कार ने टेस्टिंग के दौरान सिर्फ 2.22 लीटर प्रति 100 किमी फ्यूल खर्च किया. यह आंकड़ा लगभग 45 किमी/लीटर माइलेज के बराबर है. कंपनी का कहना है कि यह उपलब्धि गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में दर्ज की गई है. अन्य मॉडलों में टेस्टिंग Geely ने इस तकनीक को कई मॉडलों में टेस्ट किया है. Preface: 3.98 लीटर प्रति 100 किमी Monjaro i-HEV: 4.75 लीटर प्रति 100 किमी यह दिखाता है कि चाहे सेडान हो या SUV, दोनों सेगमेंट में यह तकनीक बेहतर एफिशिएंसी देने में सक्षम है. हाई एफिशिएंसी और AI सपोर्ट इस हाइब्रिड सिस्टम की थर्मल एफिशिएंसी 48.4% बतायी गई है, जो बड़े पैमाने पर बनने वाली हाइब्रिड कारों में काफी ऊंची है. इंजन कम फ्यूल में ज्यादा ताकत पैदा करता है. साथ ही यह सिस्टम AI तकनीक से लैस है, जो रियल टाइम में टेंप्रेचर, नमी और हाईट जैसी स्थितियों को समझकर फ्यूल का इस्तेमाल ऑप्टिमाइज करता है. हिंदुस्तान में लॉन्च की संभावना Geely Auto फिलहाल हिंदुस्तानीय बाजार में उतरने की योजना नहीं बना रही है. हालांकि, कंपनी हाइब्रिड और EV सेगमेंट में क्रांतिकारी बदलाव कर रही है. अगर भविष्य में यह तकनीक हिंदुस्तान आती है, तो यह कार बाजार का पूरा समीकरण बदल सकती है. यह भी पढ़ें: 7-सीटर SUV Kia Sorento Hybrid हिंदुस्तान में आने को तैयार, XUV 7XO को सीधी चुनौती यह भी पढ़ें: Kia Sonet से Scorpio-N तक: हैचबैक से SUV में अपग्रेड करने वालों के लिए टॉप 5 ऑप्शंस The post 1 लीटर में 45 किलोमीटर, इस कार ने बना डाला माइलेज का रिकॉर्ड appeared first on Naya Vichar.

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60% महंगाई भत्ते के बाद अब कितनी बढ़ेगी आपकी सैलरी? समझें पूरा गणित

8th Pay Commission: केंद्र प्रशासन ने 1.19 करोड़ कर्मचारियों और पेंशनर्स को तोहफा देते हुए महंगाई भत्ते (DA) को 58% से बढ़ाकर 60% कर दिया है. लेकिन असली चर्चा 8वें वेतन आयोग को लेकर है, जो प्रशासनी कर्मचारियों की पूरी सैलरी स्ट्रक्चर को बदलने वाला है. वेतन आयोग आने पर DA का क्या होगा? नियम के अनुसार, जब भी नया वेतन आयोग लागू होता है, तो पिछला महंगाई भत्ता शून्य (Zero) कर दिया जाता है. मर्जर (Merger): मौजूदा 60% DA को आपकी बेसिक पे में जोड़ दिया जाता है. नई शुरुआत: नई बेसिक पे पहले से ही बढ़ी हुई होती है, इसलिए महंगाई की गणना फिर से 0% से शुरू होती है. 8वें वेतन आयोग में सैलरी कैलकुलेशन मान लीजिए आप पे-लेवल 6 पर हैं. 7वें और 8वें वेतन आयोग के बीच का अंतर इस प्रकार हो सकता है (यदि फिटमेंट फैक्टर 3.83 रहता है) घटक (Components) 7वां वेतन आयोग (मौजूदा) 8वां वेतन आयोग (संभावित) बेसिक पे ₹35,400 ₹1,35,582 DA (महंगाई भत्ता) ₹21,240 (60%) ₹0 (रीसेट) HRA (मेट्रो सिटी – 27%) ₹9,558 ₹36,607 कुल सैलरी (Total) ₹66,198 ₹1,72,189 फिटमेंट फैक्टर: सैलरी बढ़ाने वाला ‘जादुई’ नंबर फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक (Multiplier) है जिससे पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई सैलरी निकाली जाती है. 7वें वेतन आयोग में यह 2.57 था. 8वें वेतन आयोग में इसके 3.83 होने की उम्मीद है. यह नंबर महंगाई और जीवन स्तर में आए बदलावों को देखकर तय किया जाता है. किसे मिलेगा फायदा और किसे नहीं? फायदा मिलेगा फायदा नहीं मिलेगा केंद्रीय कर्मचारी और रक्षा कर्मी राज्य प्रशासन के कर्मचारी (इनके लिए अलग राज्य पे कमीशन होते हैं) रेलवे और केंद्रीय संस्थानों के शिक्षक सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (PSB) के कर्मचारी प्रशासनी स्वामित्व वाले PSU के कर्मी RBI और अन्य नियामक संस्थाओं के कर्मचारी केंद्रीय पेंशनर्स बैंक पेंशनर्स (ये IBA समझौतों पर निर्भर हैं) कब-कब आए वेतन आयोग? 5वां वेतन आयोग: 1994 में बना, 1996 से लागू हुआ (34 पे स्केल्स किए गए). 6ठा वेतन आयोग: 2006 में बना, 2006 से ही बैकडेट से लागू हुआ. 7वां वेतन आयोग: 2014 में बना, 2016 से प्रभावी हुआ. 8वां वेतन आयोग: अक्टूबर 2025 में शर्तों को मंजूरी मिली, जल्द ही इसकी सिफारिशें आने की उम्मीद है. Also Read : DA Hike: कर्मचारियों और पेंशनर्स का इंतजार खत्म; कैबिनेट ने दी 2% बढ़ोतरी को मंजूरी, 3 महीने का मिलेगा एरियर The post 60% महंगाई भत्ते के बाद अब कितनी बढ़ेगी आपकी सैलरी? समझें पूरा गणित appeared first on Naya Vichar.

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रविवार को दिखें ये 3 संकेत तो समझिए बदलने वाली है आपकी किस्मत, नजरअंदाज किया तो हाथ से छूट सकता है बड़ा मौका

Vastu Tips: वास्तु शास्त्र के अनुसार हमारे घर में जो भी छोटी से छोटी चीजें हो रही है या फिर दिख रही हैं, उनका काफी गहरा असर हमारे जीवन पर पड़ता है. खासकर जब बात आती है रविवार की, तो इसे काफी ज्यादा खास माना जाता है. रविवार का दिन सूर्यदेव को समर्पित माना जाता है. अगर आप नहीं जानते हैं तो बता दें सूर्य को हमेशा से एनर्जी, सफलता और अच्छी किस्मत का फैक्टर माना जाता है. अगर आप वास्तु शास्त्र में छिपे रहस्यों को जानने में दिलचस्पी रखते हैं, तो आज की यह आर्टिकल खास आपके लिए है. आज हम आपको कुछ ऐसे संकेतों के बारे में बताने जा रहे हैं जो अगर आपको रविवार के दिन दिखाई दे तो इन्हें काफी शुभ माना जाता है. ये संकेत बताते हैं कि आपकी किस्मत जल्द बदलने वाली है और आपका अच्छा समय जल्द शुरू होने वाला है. तो चलिए इन संकेतों के बारे में विस्तार से जानते हैं. सुबह पक्षियों का दिखना अगर रविवार के दिन आपको सुबह के समय घर की खिड़कियों या फिर आंगन पर कोई पक्षी दिखाई दे, खासकर कोई चिड़िया या फिर कबूतर, तो इसे एक बेहद ही शुभ संकेत की तरह देखा जाता है. वास्तु शास्त्र के अनुसार यह बताता है कि आपके घर में पॉजिटिव एनर्जी बढ़ रही है. इसके अलावा यह इस बात की तरफ भी इशारा करता है कि आने वाले समय में आपको पैसों से जुड़ा कोई फायदा हो सकता है या फिर अच्छी समाचार भी मिल सकती है. अगर आपका कोई काम लंबे समय से रुका हुआ है, तो वह भी जल्द पूरा हो सकता है. यह भी पढ़ें: क्या आपको भी रात भर रहती है टेंशन और बेचैनी? आराम पाने के लिए सोने से पहले जरूर कर लें ये 5 काम घर में सुगंध या फूलों की खुशबू का आना अगर आपको रविवार के दिन घर पर बिना किसी वजह के भी अच्छी खुशबू या फिर फूलों की सुगंध आ रही है, तो आपको इसे भी एक शुभ संकेत की तरह लेना चाहिए. यह बताता है कि आप पर देवी-देवताओं की खास कृपा बनी हुई है और जल्द आपके जीवन में चल रही परेशानियां खत्म हो सकती हैं. इस तरह का संकेत मेंटल पीस और जीवन में मिलने वाले नए मौकों की तरफ भी इशारा कर सकते हैं. पानी का साफ और स्थिर दिखना वास्तु शास्त्र के अनुसार पानी आपके जीवन और इमोशंस का प्रतीक होता है. अगर आपको रविवार के दिन घर पर रखा हुआ पानी का बर्तन ज्यादा साफ, स्थिर और चमकदार दिखाई दे या फिर पानी अपने आप में भी ज्यादा शांत लगे, तो यह इस बात की तरफ इशारा करता है कि आपकी किस्मत जल्द मजबूत होने वाली है. इसके अलावा यह इस बात की तरफ भी इशारा करता है कि आपको आर्थिक स्थिति जल्द काफी बेहतर होने वाली है. यह भी पढ़ें: झाड़ू-पोछा करते समय की ये 5 गलतियां बना सकती हैं आपको कंगाल, दरिद्रता से बचने के लिए जान लें सही तरीका The post रविवार को दिखें ये 3 संकेत तो समझिए बदलने वाली है आपकी किस्मत, नजरअंदाज किया तो हाथ से छूट सकता है बड़ा मौका appeared first on Naya Vichar.

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DA और DR में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को केंद्र की मंजूरी, देखें मंत्रिमंडल के अहम फैसले

Union Cabinet Meeting: मंत्रिमंडल ने शनिवार को केंद्र प्रशासन के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) दो प्रतिशत बढ़ाने का फैसला किया. इससे केंद्र प्रशासन के लगभग 50.46 लाख कर्मचारियों और 68.27 लाख पेंशनभोगियों को लाभ होगा. मंत्रिमंडल की बैठक में लिए गए निर्णयों के बारे में सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा- महंगाई भत्ते और महंगाई राहत, दोनों में वृद्धि के कारण प्रशासनी खजाने पर कुल 6,791.24 करोड़ रुपये सालाना का बोझ पड़ेगा. अतिरिक्त किस्त एक जनवरी, 2026 से दी जाएगी. मंत्रिमंडल में लिए गए अन्य फैसले केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा, आज कैबिनेट बैठक में लिए गए फैसलों में शिपिंग सेक्टर के लिए हिंदुस्तान मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल शामिल है. साथ ही प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (चरण 3) को तीन साल के लिए आगे बढ़ाया गया है. दो रेल परियोजनाएं भी शामिल हैं: गाजियाबाद से सीतापुर तक तीसरी और चौथी लाइन, और राजमुंदरी से विशाखापत्तनम तक तीसरी और चौथी लाइन… एक बड़ा फैसला लिया गया है. #WATCH | Delhi: Union Minister Ashwini Vaishnaw says, “The decision taken in the cabinet meeting today includes the Bharat Maritime Insurance Pool, for the shipping sector, DA and DR have been increased for all our central government employees. DR is for pensioners, DA is for… pic.twitter.com/X1m2wObZld — ANI (@ANI) April 18, 2026 क्या है हिंदुस्तान मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल केंद्र प्रशासन ने हिंदुस्तान मैरीटाइम इंश्योरेंस पूल के गठन को मंजूरी दी है. अश्विनी वैष्णव ने बताया- समुद्र में जाने वाले हर जहाज का बीमा होता है. कई तरह की गतिविधियों के लिए बीमा उपलब्ध है. नुकसान की भरपाई के लिए बेसिक इंश्योरेंस होता है. दूसरा, सुरक्षा और क्षतिपूर्ति (Indemnity) के लिए होता है… समुद्री बीमा के लिए लगभग 12,980 करोड़ रुपये का एक ‘सॉवरेन गारंटी फंड’ बनाया जाएगा. यह समुद्री क्षेत्र से जुड़े सभी प्रकार के जोखिमों को कवर करेगा, जिसमें मशीनरी, माल (Cargo) और युद्ध से जुड़े जोखिम शामिल हैं. यह सुविधा हिंदुस्तानीय ध्वज वाले जहाजों, हिंदुस्तानीय नियंत्रण वाले जहाजों, और उन जहाजों को दी जाएगी जिनका उद्गम या गंतव्य हिंदुस्तान में है. यह योजना दस साल की अवधि के लिए होगी, जिसे पांच साल के लिए और बढ़ाया जा सकता है. इसे भी पढ़ें: पीएम मोदी आज रात 8:30 बजे देश को करेंगे संबोधित The post DA और DR में 2 प्रतिशत की बढ़ोतरी को केंद्र की मंजूरी, देखें मंत्रिमंडल के अहम फैसले appeared first on Naya Vichar.

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