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May 5, 2026

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TVK की चली आंधी, तमिलनाडु में केवल एक वोट से हार गया ये दिग्गज

तमिलनाडु की नेतृत्व में बड़ा उलटफेर तब देखने को मिला, जब डीएमके के वरिष्ठ नेता और सहकारिता मंत्री के.आर. पेरियाकरुप्पन तिरुप्पत्तूर सीट से सिर्फ एक वोट से हार गए. इतनी करीबी हार ने सबको हैरान कर दिया और यह चर्चा का बड़ा मुद्दा बन गया. निर्वाचन आयोग के अनुसार, तमिलगा वेत्री कड़गम (टीवीके) के उम्मीदवार सीनिवास सेतुपति आर. ने 83,375 मत हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि डीएमके के पेरियाकरुप्पन 83,374 मतों के साथ महज एक वोट से पीछे रह गए. यह मुकाबला बेहद रोमांचक मोड़ पर खत्म हुआ. पहले पेरियाकरुप्पन 30 मतों से आगे थे, लेकिन आखिरी गणना में टीवीके उम्मीदवार बाजी मार ले गए. वहीं, हिंदुस्तानीय जनता पार्टी के के.सी. तिरुमरन 29,054 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे. सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी TVK मंत्री की ये हार दिखाती है कि विजय की TVK ने कितना बड़ा असर डाला है. पहली बार चुनाव लड़कर ही पार्टी 108 सीटें जीत गई और तमिलनाडु की पुरानी दो-ध्रुवीय नेतृत्व को हिला दिया, साथ ही सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. तिरुप्पत्तूर का यह परिणाम हिंदुस्तान के चुनावी इतिहास के सबसे करीबी मुकाबलों में दर्ज हो गया है, जो यह दिखाता है कि लोकतंत्र में हर एक मत कितनी निर्णायक भूमिका निभाता है. विजय की टीवीके ने शानदार प्रदर्शन किया तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय के नेतृत्व वाली टीवीके ने एम.के. स्टालिन के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) को पछाड़ते हुए 108 सीट हासिल की. इस चुनाव में DMK मात्र 59 सीट में ही जीत हासिल कर सकी. यहां विधानसभा चुनाव के तहत 23 अप्रैल को मतदान हुए थे और मतगणना 4 मई को हुई. विपक्षी ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कषगम (AIDMK) ने 47 सीट जीतीं, जबकि उसकी सहयोगी पट्टाली मक्कल काची (पीएमके) को चार सीट और बीजेपी के अलावा अम्मा मक्कल मुनेत्र कषगम (एएमएमके) को क्रमशः एक-एक सीट मिली. यह भी पढ़ें : प्रशासन कैसे बनेगी? तमिलनाडु में विजय की TVK के पास हैं ये ऑप्शन DMK के सहयोगी दलों में से कांग्रेस ने पांच सीट जीतीं, जबकि इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (आईयूएमएल), हिंदुस्तानीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा), मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) और वीसीके ने दो-दो सीट जीतीं. डीएमडीके को राज्य की कुल 234 विधानसभा सीट में से एक सीट मिली. The post TVK की चली आंधी, तमिलनाडु में केवल एक वोट से हार गया ये दिग्गज appeared first on Naya Vichar.

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पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण 9 को, मुख्यमंत्री का नाम तय करने कोलकाता आ रहे हैं अमित शाह और राजनाथ सिंह

Table of Contents भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व की नजर मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार West Bengal Election Result: नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का लक्ष्य पूरा हो चुका है, लेकिन इस बार बंगाल का मुख्यमंत्री कौन होगा. इस बारे में लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही हैं. अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान पहले ही घोषणा कर दी थी कि बंगाल का ही कोई मूल निवासी भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा. ऐसे में भाजपा ने बिना मुख्यमंत्री के ही चुनाव लड़ा था. इस बार बंगाल के चुनाव के बाद भाजपा किसे मुख्यमंत्री चुनेगी, इस पर काफी चर्चा हो रही है. कई नामों पर भी चर्चा हो रही है. ऐसे में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आज पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का फैसला करने के लिए कोलकाता रवाना हो सकता है. प्रदेश भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने बताया कि बंगाल में रविंद्र नाथ टैगोर की जयंती के अवसर पर शपथ ग्रहण 9 मई को कोलकाता में होगा. भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व की नजर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की एक टीम दिल्ली से आ सकती है. राजनाथ सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. इस बीच, आज सुबह 11 बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल की पूर्व निर्धारित बैठक है. समाचार है कि राजनाथ सिंह इस बैठक के बाद कोलकाता के लिए रवाना हो सकते हैं. अमित शाह का भी कोलकाता आने का कार्यक्रम है. जानकारी मिली है कि राजनाथ विधायकों के साथ संसदीय दल की बैठक में शामिल होंगे. इसके अलावा, मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चयन के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में संसदीय बोर्ड की बैठक दिल्ली में होनी है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सबसे ज्यादा चर्चा में शुभेंदु अधिकारी का नाम आ रहा है. वे अब तक विपक्ष के नेता रहे हैं. इस चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर जैसे दो महत्वपूर्ण केंद्रों से जीत हासिल की है. इतना ही नहीं, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक बार फिर हराया है. ऐसे में पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में उनका नाम सबसे पहले सामने आ रहा है. इस सूची में दिलीप घोष का नाम भी शामिल है. वे खड़गपुर सदर से चुनाव लड़ रहे हैं. स्वपन दासगुप्ता का नाम भी सूची में है. शामिक भट्टाचार्य का नाम भी सामने आ रहा है. Also Read: बंगाल चुनाव: आरएसएस के फिडबैक से आसान हुई भाजपा की राह, परिणाम में दिखा असर The post पश्चिम बंगाल में शपथ ग्रहण 9 को, मुख्यमंत्री का नाम तय करने कोलकाता आ रहे हैं अमित शाह और राजनाथ सिंह appeared first on Naya Vichar.

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सरकार कैसे बनेगी? तमिलनाडु में विजय की TVK के पास हैं ये ऑप्शन

तमिलनाडु चुनाव 2026 के नतीजों ने सबको चौंका दिया. अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी, जो कई लोगों के लिए बड़ी सरप्राइज रही. TVK सबसे बड़ी पार्टी तो बन गई, लेकिन 118 के बहुमत से 10 सीट पीछे रह गई. वह 108 सीटें ही जीत पाई. वहीं डीएमके गठबंधन को 73 सीटें मिलीं, जबकि एनडीए 53 सीटों के साथ काफी पीछे तीसरे नंबर पर रहा. इन तीनों के अलावा बाकी किसी भी पार्टी को एक भी सीट नहीं मिली. TVK अकेले चुनाव लड़ रही थी. किसी भी पार्टी या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला, तो अब सवाल उठ रहा है कि तमिलनाडु में आगे क्या होगा? क्या विजय 1967 के बाद पहले गैर-DMK और गैर-AIADMK मुख्यमंत्री बनेंगे? वे किसके साथ मिलकर प्रशासन बनाएंगे, यही अब सबसे बड़ा सवाल है. TVK अपने साथ छोटी पार्टियों को ला सकती है विजय और उनकी TVK के पास प्रशासन बनाने का एक रास्ता ये हो सकता है कि वे DMK गठबंधन के छोटे दलों को अपने साथ ले आएं. बहुमत के लिए उन्हें 10 विधायकों की जरूरत है, जबकि DMK के सहयोगी दलों के पास कुल 14 सीटें हैं. समाचारों के मुताबिक, कांग्रेस के कुछ नेता पहले से TVK के साथ आने के पक्ष में थे और उसके 5 विधायक समर्थन दे सकते हैं. वहीं CPI और CPI(M) के 2-2 विधायक भी साथ आ जाएं तो आंकड़ा और मजबूत हो जाएगा. ऐसे में बस एक और विधायक की जरूरत पड़ेगी, जो Viduthalai Chiruthaigal Katchi (VCK) से मिल सकता है. विपक्षी नेतृत्व पर पड़ेगा ये असर इस प्लान की सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इसका असर देश की बड़ी विपक्षी नेतृत्व पर पड़ेगा. अगर कांग्रेस और बाकी दल राज्य में DMK का साथ छोड़ देते हैं, तो सवाल उठेगा कि क्या DMK फिर भी INDIA गठबंधन में बना रहेगा या नहीं. यह भी पढ़ें : Video : 116 नारियल फोड़कर टीवीके प्रमुख विजय की जीत का जश्न, देखें खास सेलिब्रेशन का वीडियो DMK+ गठबंधन TVK को समर्थन देगा क्या? दूसरा रास्ता ये हो सकता है कि पूरा DMK+ गठबंधन TVK को समर्थन दे दे, जिससे विजय आसानी से मुख्यमंत्री बन सकते हैं. आंकड़ों के हिसाब से भी ये संभव है और नेतृत्व के लिहाज से भी ठीक बैठता है. इससे राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन पर कोई असर नहीं पड़ेगा, बल्कि TVK के जुड़ने से वो और मजबूत ही होगा. लेकिन क्या DMK इसके लिए तैयार है? अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है. विजय कई बार DMK को अपना सीधा नेतृत्वक प्रतिद्वंदी बता चुके हैं और खुलकर निशाना भी साधा है. क्या AIADMK देगी साथ? एक और तरीका ये हो सकता है कि AIADMK, TVK को समर्थन देकर प्रशासन बनवाए. लेकिन अभी तक ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है. उल्टा, दोनों पार्टियों के बयानों से यही लगता है कि TVK और AIADMK के साथ आने की संभावना फिलहाल काफी कम है. सीनियर AIADMK नेता सी. पोन्नैयन पहले ही कह चुके हैं कि पार्टी TVK के किसी भी गठबंधन प्रस्ताव को ठुकरा देगी. हालांकि ये बयान मतगणना के दौरान आया था, इसलिए आगे रुख बदलने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म नहीं मानी जा रही है.   The post प्रशासन कैसे बनेगी? तमिलनाडु में विजय की TVK के पास हैं ये ऑप्शन appeared first on Naya Vichar.

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पश्चिम बंगाल में कौन होगा मुख्यमंत्री, नाम तय करने कोलकाता आ रहे अमित शाह और राजनाथ सिंह

Table of Contents भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व की नजर मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार West Bengal Election Result: नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का लक्ष्य पूरा हो चुका है, लेकिन इस बार बंगाल का मुख्यमंत्री कौन होगा. इस बारे में लंबे समय से अटकलें लगाई जा रही हैं. अमित शाह ने चुनाव प्रचार के दौरान पहले ही घोषणा कर दी थी कि बंगाल का ही कोई मूल निवासी भाजपा का मुख्यमंत्री बनेगा. ऐसे में भाजपा ने बिना मुख्यमंत्री के ही चुनाव लड़ा था. इस बार बंगाल के चुनाव के बाद भाजपा किसे मुख्यमंत्री चुनेगी, इस पर काफी चर्चा हो रही है. कई नामों पर भी चर्चा हो रही है. ऐसे में भाजपा का शीर्ष नेतृत्व आज पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री का फैसला करने के लिए कोलकाता रवाना हो सकता है. भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व की नजर भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व की एक टीम दिल्ली से आ सकती है. राजनाथ सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी जा सकती है. इस बीच, आज सुबह 11 बजे केंद्रीय मंत्रिमंडल की पूर्व निर्धारित बैठक है. समाचार है कि राजनाथ सिंह इस बैठक के बाद कोलकाता के लिए रवाना हो सकते हैं. अमित शाह का भी कोलकाता आने का कार्यक्रम है. जानकारी मिली है कि राजनाथ विधायकों के साथ संसदीय दल की बैठक में शामिल होंगे. इसके अलावा, मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के चयन के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में संसदीय बोर्ड की बैठक दिल्ली में होनी है. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें मुख्यमंत्री पद के लिए कई दावेदार पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में सबसे ज्यादा चर्चा में शुभेंदु अधिकारी का नाम आ रहा है. वे अब तक विपक्ष के नेता रहे हैं. इस चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम और भवानीपुर जैसे दो महत्वपूर्ण केंद्रों से जीत हासिल की है. इतना ही नहीं, उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक बार फिर हराया है. ऐसे में पश्चिम बंगाल के अगले मुख्यमंत्री के रूप में उनका नाम सबसे पहले सामने आ रहा है. इस सूची में दिलीप घोष का नाम भी शामिल है. वे खड़गपुर सदर से चुनाव लड़ रहे हैं. स्वपन दासगुप्ता का नाम भी सूची में है. शामिक भट्टाचार्य का नाम भी सामने आ रहा है. Also Read: बंगाल चुनाव: आरएसएस के फिडबैक से आसान हुई भाजपा की राह, परिणाम में दिखा असर The post पश्चिम बंगाल में कौन होगा मुख्यमंत्री, नाम तय करने कोलकाता आ रहे अमित शाह और राजनाथ सिंह appeared first on Naya Vichar.

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ध्रुवीकरण की बदली धारा, नये सितारे का उदय और वेंटिलेटर पर वामपंथ

Election Results 2026 : बंगाल में अंतत: स्पोर्ट्सा हो ही गया. अभूतपूर्व परिणाम. ध्रुवीकरण के स्पोर्ट्स में हिंदू वोटरों का पलड़ा भारी. एसआइआर का प्रभाव. तृणमूल के अतिवाद, उग्र कार्यशैली और तुष्टीकरण की पराकाष्ठा की हार. डेमोग्राफिक बदलाव के दुष्परिणामों पर बंगाल के लोगों की प्रचंड प्रतिक्रिया. नतीजा-पहली बार बांग्ला में भी अपनी कहानी लिखेगी भाजपा. पांच राज्यों के परिणाम के मुख्य बिंदु इस प्रकार हैं- 1) बंगाल में हुआ ऐतिहासिक बदलाव, 2) केरल में हार के साथ ही वामपंथी नेतृत्व का वेंटिलेटर पर पहुंचना, 3) तमिलनाडु में द्रविड़ नेतृत्व के लिए टीवीके के रूप में नयी चुनौती. इसके अलावा असम में भाजपा की लगातार तीसरी और पुडुचेरी में दूसरी जीत देश के मौजूदा मूड को दर्शाती हैं. सबसे बड़ी सीख, जो सभी दलों को लेनी चाहिए, वह यह है कि हमेशा अल्पसंख्यकों को ढाल बनाकर चुनावी पटकथा नहीं लिखी जा सकती. सकारात्मक राष्ट्रवाद, विकास और समावेशी नेतृत्व ही जीत का आधार होने चाहिए. सकारात्मक राष्ट्रवाद से तात्पर्य यह है कि देश को भाषा, क्षेत्रीयता और उत्पत्ति (जाति, वर्ण) के आधार पर भेदभाव और ऐसे हर पाखंड से बाहर आना होगा. यह सीख भाजपा के लिए भी उतनी ही जरूरी है, जितनी अन्य दलों के लिए. हार तो सिखाती है, लेकिन कई बार जीत से भी सीख लेनी चाहिए. लगातार संगठनात्मक सक्रियता, लोगों के बीच उपलब्धता ही आपको स्वीकार्यता दिलायेगी और विजयश्री भी. स्पष्टता के बावजूद पांच राज्यों के विधानसभा परिणामों ने कई प्रमुख प्रश्नों को जन्म दिया है, जिनका उत्तर जरूरी है. पढ़िए यह विश्लेषण, कुछ अलग शैली में – तृणमूल कांग्रेस की हार के प्रमुख कारण ममता बनर्जी के नेतृत्व में 15 साल पहले एक शुरुआत हुई थी. राज्य ने इसे वामदलों के अत्याचार से मुक्ति के रूप में देखा. लेकिन, धीरे-धीरे वामदलों के कार्यकर्ता तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) का काडर बन गये और उनकी कार्यशैली पार्टी का मूल. चुनावी लाभ के लिए बांग्लादेशी घुसपैठ पर कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया गया. अतिवाद की नींव पड़ी. विरोध और विरोधी के दमन की नीति अपनायी गयी. नेतृत्वक हत्याएं आम हो गयीं. संदेशखाली से लेकर आरजी कर में नर्सिंग छात्रा के साथ दुष्कर्म जैसी घटनाओं ने सामाजिक आक्रोश का रूप ले दिया. घुसपैठियों के बढ़ते अतिक्रमण से आम बंगालियों का जीना दूभर था. ऐसे में सुरक्षाबलों की भारी तैनाती ने उन्हें बिना डरे वोट डालने का हौसला दिया. स्थानीय स्तर पर कट-मनी और सिंडिकेट सिस्टम के तहत वसूली ने उद्यमियों समेत पूरे समाज को भयाक्रांत कर रखा था. आंदोलन की जन्मभूमि रहे बंगाल को यह कैसे स्वीकार होता, इसलिए यह परिणाम. एसआइआर के जरिये घुसपैठिया भगाओ और हिंदुत्व फैक्टर कितने प्रभावी? बिहार के नेपाल और बंगाल से सटे इलाकों, बंगाल और पूरे उत्तर पूर्व में किस तरह घुसपैठिये बढ़े हैं, यह खुली आंखों से देखा जा सकता है. वोटर लिस्ट के स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन (एसआइआर) की चुनाव आयोग की नीति के चलते बंगाल में करीब 27 लाख वोटर्स वोटिंग प्रकिया में छंट गये और वोट नहीं डाल सके. सही हुआ या गलत, यह बहस का मुद्दा हो सकता है, लेकिन इनमें बड़ी संख्या में बंगलादेशी घुसपैठियों के होने का अनुमान है. इसका सीधा प्रभाव ममता का गढ़ मानी जाने वाली छह अल्पसंख्यक बहुल जिलों की 118 सीटों के नतीजों से नजर आता है. जहां पिछले चुनाव में इनमें 103 सीटें टीएमसी ने जीती थीं, वहीं इस बार यह घटकर 58 रह गयीं. जबकि भाजपा जिसे पिछली बार इन जिलों में सिर्फ 14 सीटों पर जीत मिली थी, इस बार 53 सीटें उसके खाते में आयीं. ममता के दूसरे गढ़ यानी दक्षिण चौबीस परगना में पिछली बार भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली थी, वहां इस बार 21 सीटें मिली हैं. इसके अलावा भाजपा संगठन की जमीनी रणनीति और मोदी-शाह की ताबड़तोड़ रैलियों ने वोटरों को बिना डरे वोट डालने का साहस दिया. यहां यह भी रोचक है कि एसटी की 100 प्रतिशत और एससी की 91 प्रतिशत सीटों पर भाजपा की जीत ने हिंदुत्व के वर्गीकरण की सीमाएं भी धूमिल कर दीं. जीत यह भी बताती है कि पांच लाख नये जेन-जी वोटरों ने भी पार्टी का साथ दिया. भाजपा के लिये जीत के मायने? 1977 से वाम दलों ने लगातार 34 वर्ष, फिर तृणमूल कांग्रेस ने पूरे 15 साल तक बंगाल में आधुनिक विकास की नेतृत्व को पनपने नहीं दिया. लेकिन, लगातार तीन टर्म की एंटी इन्कमबेंसी और टीएमसी के रवैये से जन्मे जनआक्रोश को भाजपा संगठन की सक्रियता ने अंतत: वोटों में बदल दिया. बिहार के बाद बंगाल जीतते ही 2029 के लोकसभा चुनावों की राह भी पार्टी के लिए आसान हो सकती है. बंगाल को जोड़ लें तो 22 राज्यों में भाजपा की प्रशासन होगी. इनमें कुल 396 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें अकेले यूपी में 80, बिहार में 40 और प़श्चिम बंगाल की 42 सीटें हैं. महाराष्ट्र की 48, मध्यप्रदेश की 29 और गुजरात की 26 सीटें भी जोड़ लें तो समीकरण पार्टी के पक्ष में नजर आते हैं. राज्यसभा में मजबूती तो तय है. जीत से पश्चिम बंगाल को क्या उम्मीद है? 1960 के पहले बंगाल देश का औद्योगिक केंद्र था. देश के जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी 10 प्रतिशत से अधिक थी. लेकिन, 1977 के बाद वाम दलों और टीएमसी के 49 साल के शासन में इस ढांचे में तेजी से गिरावट आयी. 2024 तक जीडीपी में हिस्सेदारी घटकर 5.6 प्रतिशत रह गयी. टाटा ने सिंगूर क्या छोड़ा, व्यावसायिक घरानों ने मानो राज्य से मुंह मोड़ लिया. 2019 से 2024 के बीच ही करीब 2200 एमएसएमइ यहां बंद हुईं. हालिया स्थिति यह है कि राज्य में प्रशासनी कर्मियों के वेतन के लाले पड़े हुए हैं. भाजपा प्रशासन बनने के बाद केंद्र का भरपूर सहयोग तय है, इसलिए अब विकास कार्यों में रुकावट नहीं आयेगी. केंद्र की तमाम फ्लैगशिप योजनाएं, जिन्हें ममता के शासन ने अवरुद्ध कर रखा था, अब निर्बाध रूप से चलेंगी. पार्टी को वोट मिलेंगे और प्रदेश को विकास. केरल में हार क्या वामपंथ का अंत है? इसे वामपंथ का अंत भले ही न समझा जाए, लेकिन यह संसदीय नेतृत्व में फिलहाल मृत्युशैया पर पहुंच गया है. देश में अपने खाते के इकलौते राज्य को गंवाते ही 50 साल में पहली बार लेफ्ट मेनस्ट्रीम पॉलिटिक्स से बाहर हो गया है. हालांकि, केरल में

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Video : 116 नारियल फोड़कर टीवीके प्रमुख विजय की जीत का जश्न, देखें खास सेलिब्रेशन का वीडियो

Video : आंध्र प्रदेश के तिरुमला में टीवीके प्रमुख विजय की जीत पर फैंस ने जश्न मनाया. फैंस ने मंदिर परिसर के अंदर 116 नारियल फोड़कर खुशी जताई और पार्टी की जीत को खास अंदाज में सेलिब्रेट किया. इसका वीडियो सामने आया है जिसे न्यूज एजेंसी पीटीआई ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है. वीडियो में नजर आ रहा है कि जमीन पर नारियल का ढेर पड़ा हुआ है. फैंस एक-एक करके नारियल को उठा रहे हैं और  जमीन पर पटककर तोड़ रहे हैं. आप भी देखें ये वीडियो. VIDEO | Tirumala, Andhra Pradesh: Fans of TVK chief Vijay celebrate the party’s victory in Tamil Nadu assembly elections by breaking 116 coconuts inside the temple premises.#TVK #Vijay #TamilNaduElectionResults2026 (Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/n3NQDo1saa — Press Trust of India (@PTI_News) May 5, 2026 तमिलनाडु में विजय की टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी एक्टर से नेता बने विजय की पार्टी टीवीके ने 4 मई को तमिलनाडु के चुनावी इतिहास में एक तरह का रिकॉर्ड बनाते हुए सत्तारूढ़ डीएमके और उसके अध्यक्ष मुख्यमंत्री एमके स्टालिन को उनके कोलाथुर निर्वाचन क्षेत्र में करारी शिकस्त दी. इसके बाद टीवीके सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी. वहीं, AIADMK तीसरे स्थान पर रही. 1967 में राज्य में पहली गैर-कांग्रेसी प्रशासन के सत्ता में आने के बाद से यह पहली बार है, जब दो द्रविड़ दलों के अलावा कोई अन्य पार्टी चुनाव में विजयी हुई. यह भी पढ़ें : तमिलनाडु में विजय की टीवीके बनी सबसे बड़ी पार्टी, बधाई देने पहुंचे ज्योतिष राधन पंडित, चुनाव से पहले दी थी सलाह The post Video : 116 नारियल फोड़कर टीवीके प्रमुख विजय की जीत का जश्न, देखें खास सेलिब्रेशन का वीडियो appeared first on Naya Vichar.

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विधायक बनीं दूसरे के घर झाड़ू-पोछा-बर्तन करने वाली कलिता माझी, BJP ने बंगाल में किया गजब परिवर्तन   

Kalita Majhi West Bengal MLA: 4 मार्च 2026 को पश्चिम बंगाल में नेतृत्वक परिवर्तन हो गया है. 15 साल के राज के बाद टीएमसी राज्य की सत्ता से बाहर हो गई है. 5 मार्च के सूर्योदय के साथ भाजपा का कमल पूरा खिल गया है. इस बार जनता ने स्पष्ट आदेश दिया, जिसमें नेतृत्व ही नहीं बल्कि सामाजिक परिवर्तन भी दिखा. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में आम, सताए हुए और ममता की प्रशासन से त्रस्त जनता ने अपने ही जैसे लोगों को विधायक बनाया है. ऐसी ही दिलचस्प और प्रेरणादायक जीत हुई है कलिता माझी की. कोई भी पेशा छोटा नहीं होता. हम ऐसा बिल्कुल नहीं मानते, लेकिन समाज के कुछ अनकहे नियम हैं, जिसमें कुछ कामों को छोटा देखा जाता है. अपना घर चलाने के लिए दूसरे के घर शायद वही काम करते हैं, जो आर्थिक रूप से कमजोर हों. पश्चिम बंगाल को लेकर चुनाव से पहले (हां केवल सोशल मीडिया पर ही) ऐसी धारणा बनाई गई कि इस राज्य की स्त्रीएं देश के अन्य हिस्सों में मेड (दूसरे के घरों में काम करने वाली) हैं. तो! बंगाल ने क्या किया? ऐसी ही कामगार को अपनी विधायक बना लिया. टीएमसी कैंडिडेट को दी करारी शिकस्त महज 2,500 रुपये महीने कमाने वाली एक घरेलू कामगार से विधायक बनने तक का उनका सफर चर्चा का विषय बना है. माझी ने आउसग्राम सीट से जीत दर्ज करते हुए 1,07,692 वोट हासिल किए और टीएमसी के श्यामा प्रसन्न लोहार को 12,535 वोटों के अंतर से हराया. गुस्कारा नगरपालिका क्षेत्र की रहने वाली कलिता माझी नेतृत्व में आने से पहले चार घरों में घरेलू काम करती थीं. उनकी उम्मीदवारी शुरू से ही जमीनी जुड़ाव के कारण चर्चा में थी. सोशल मीडिया पर उनकी इस जीत, परिवार की स्थिति और संघर्ष की कहानी छाई हुई है. यह जीत साफ तौर पर सामाजिक-आर्थिक बदलाव की एक बड़ी मिसाल है.  बीजेपी सांसद बोले- ऐसा केवल हमारी पार्टी में संभव बीजेपी के सांसद पीसी मोहन ऐसी जीत केवल अपनी पार्टी में ही संभव होना बताया. सोशल मीडिया पर उन्होंने लिखा, ‘बीजेपी की बंगाल उम्मीदवार कलिता माझी, जो चार घरों में घरेलू काम करके महज 2,500 रुपये महीना कमाती हैं, ने आउसग्राम विधानसभा सीट से जीत हासिल की है. यह बीजेपी की उस ताकत को दर्शाता है, जहां एक साधारण पृष्ठभूमि से आने वाला व्यक्ति भी आगे बढ़कर एक प्रेरणादायक कहानी लिख सकता है.’  BJP Bengal candidate Kalita Majhi, who works as a domestic worker in 4 households and earns ₹2,500 a month, wins from the Ausgram constituency. This is the power of the BJP, where even the most humble citizen can rise and script a truly inspiring journey. pic.twitter.com/LVI4V9xSFU — P C Mohan (@PCMohanMP) May 4, 2026 पहले भी चुनाव लड़ चुकी हैं कलिता माझी इससे पहले कलिता माझी ने 2021 के विधानसभा चुनाव में भी किस्मत आजमाई थी, लेकिन तब उन्हें तृणमूल कांग्रेस के अभेदनंद ठाकुर से 11,815 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था. इस बार फिर बीजेपी ने उन पर दोबारा भरोसा जताया, जो सही साबित हुआ. ये भी पढ़ें:- बंगाल चुनाव: TMC का डेढ़ दशक पुराना किला ढहा, क्या हैं भाजपा की जीत के कारण ये भी पढ़ें:- सयानी घोष का गाना बना TMC की हार का कारण? उमा हिंदुस्तानी का तंज बीजेपी की बड़ी जीत ने बदला बंगाल बीजेपी की कलिता माझी के अलावा आरजी कर हॉस्पिटल की रेप पीड़िता ‘अभया’ की मां रत्ना देबनाथ, संदेशखाली में टीएमसी के स्ट्रांगमैन शाहजहां शेख की सताई हुई रेखा पात्रा ने भी जीत हासिल की है. जब बदलाव ऐसा है, तो जाहिर है भाजपा ने परिवर्तन जमीन पर उतार दिया है.  राज्य में शानदार प्रदर्शन करते हुए भाजपा ने 294 सदस्यीय विधानसभा में 206 सीटें जीत लीं. इस जीत के साथ ही पार्टी ने दो-तिहाई बहुमत हासिल कर लिया और तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के शासन का अंत कर दिया. ये भी पढ़ें:- कांग्रेस को बड़ा झटका, तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे चुनाव हारे ये भी पढ़ें:- कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की पीएम मोदी और अमित शाह की तारीफ ममता भी हारीं अपनी सीट 1972 के बाद ऐसा पहली बार होने जा रहा है, जब राज्य और केंद्र में एक ही पार्टी की प्रशासन होगी. इस चुनाव में परिवर्तन का बड़ा उलटफेर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के साथ भी हुआ. उन्हें भवानीपुर सीट से हार का सामना करना पड़ा. उन्हें बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी ने हरा दिया. पिछले चुनाव में उन्होंने नंदीग्राम में ममता बनर्जी को हराया था, इस बार भवानीपुर में भी कमल खिल गया है. हालांकि, इस बड़े बदलाव के बीच कलिता माझी की कहानी खास है. रसोई में काम करने से लेकर विधानसभा तक पहुंचने का उनका सफर लोकतंत्र की ताकत और जनता की बदलाव की ताकत की मिसाल है.  The post विधायक बनीं दूसरे के घर झाड़ू-पोछा-बर्तन करने वाली कलिता माझी, BJP ने बंगाल में किया गजब परिवर्तन    appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल चुनाव: आरएसएस के फिडबैक से आसान हुई भाजपा की राह, परिणाम में दिखा असर

मुख्य बातें जमीनी स्तर पर दिन-रात काम किया निर्भीक होकर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया हिंसा के पीड़ितों के साथ खड़े रहे West Bengal Election Result: कोलकाता. आरएसएस के स्वयंसेवकों ने जमीनी स्तर पर लोगों की नब्ज पर भी नजर रखी और भाजपा को ‘जनता के मिजाज’ और ‘प्रतिद्वंद्वियों की चाल’ के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी दी, जिससे पार्टी को अपनी चुनावी रणनीति को बेहतर बनाने में मदद मिली. आरएसएस के फिडबैक ने भाजपा की राह आसान की और परिणाम में असर दिखा. बंगाल में ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस का किला ढहाने में हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (भाजपा) को मिली सफलता में आरएसएस स्वयंसेवकों के योगदान को स्वीकार करते हुए एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने बताया- उन्होंने वास्तव में बहुत मेहनत की. जमीनी स्तर पर दिन-रात काम किया आरएसएस ने भी राज्य में 2021 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद भाजपा के अगले चुनावी अभियान के लिए जमीन तैयार करनी शुरू कर दी थी. स्वंय सेवकों ने कहा कि हमने जमीनी स्तर पर दिन-रात काम किया और लोगों तक अपना संदेश पहुंचाया. भाजपा ने भी इस सफलता को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत की. उन्होंने बताया कि पार्टी और संघ के स्वयंसेवकों ने हर स्तर पर उपयुक्त समन्वय के साथ काम किया. सूत्रों के अनुसार, चुनावों के दौरान, आरएसएस स्वयंसेवकों ने बड़े पैमाने पर मतदाता जागरूकता अभियान चलाये और राज्य भर में लोगों के छोटे समूहों के साथ लगभग दो लाख बैठकें कीं. निर्भीक होकर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया एक सूत्र ने बताया कि इन बैठकों के दौरान, लोगों को चुनाव से जुड़े मुद्दों से अवगत कराया गया और निर्भीक होकर मतदान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया. उन्हें उनकी सुरक्षा का आश्वासन दिया गया. सूत्रों के अनुसार, भाजपा ने पश्चिम बंगाल में 2021 के विधानसभा चुनावों के तुरंत बाद अपना जनाधार मजबूत करते हुए उसका विस्तार करना शुरू कर दिया, जिसमें पार्टी मुख्य विपक्षी दल के रूप में उभरी और 2016 की तीन सीटों से बढ़कर 77 सीटें जीत लीं. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें हिंसा के पीड़ितों के साथ खड़े रहे संघ के एक अन्य सूत्र ने कहा कि 2021 में तृणमूल की जीत के बाद पश्चिम बंगाल में चुनाव के बाद हुई हिंसा में कई (भाजपा) कार्यकर्ता मारे गये. लेकिन हम रुके नहीं. हमने अपना काम जारी रखा. उन्होंने कहा- हम चुनाव बाद की हिंसा के पीड़ितों के साथ खड़े रहे और उन्हें राहत दिलाने के लिए हर संभव प्रयास किया. हमने उन्हें कानूनी सलाह, मुआवजा और उनके घरों के पुनर्निर्माण में मदद की, जिन्हें चुनाव बाद हुई हिंसा में आग के हवाले कर दिया गया था या क्षतिग्रस्त कर दिया गया था. हमने उनकी आजीविका का भी ध्यान रखा. Also Read: बंगाल में धीरे-धीरे खिसकती गयी ममता बनर्जी की जमीन, अबकी आखिरी दुर्ग भी ढह गया The post बंगाल चुनाव: आरएसएस के फिडबैक से आसान हुई भाजपा की राह, परिणाम में दिखा असर appeared first on Naya Vichar.

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बंगाल में धीरे-धीरे खिसकती गयी ममता बनर्जी की जमीन, इस बार आखिरी दुर्ग भी ढह गया

मुख्य बातें आंदोलन की नेतृत्व से जनाधार मजबूत 2019 में गिरावट का पहला बड़ा संकेत 2021 में खिसकने लगी जमीन 2026 में निर्णायक हार वोट शेयर का गणित यानी असली स्पोर्ट्स यहीं हुआ क्षेत्रीय आधार का टूटना एंटी-इनकंबेंसी – 15 साल की सत्ता का असर संगठनात्मक कमजोरी और दलबदल घोटाले और विवाद का असर West Bengal Election Result: अमित शर्मा, कोलकाता. 1998 में ममता बनर्जी ने करीब 26 वर्षों के कांग्रेस के नाते को तोड़ दिया. इसके बाद उन्होंने तृणमूल कांग्रेस का गठन किया. तृणमूल ने 1998 में सात लोकसभा सीटों से शुरुआत की और कुछ ही वर्षों में बंगाल की मुख्य ताकत बन गयी. एक वर्ष बाद ही यानी 1999 में आठ सीटें जीतकर उसने मजबूत वापसी की. 2011 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के साथ मिलकर 184 सीट जीतकर करीब 34 साल पुराने वाम शासन को खत्म कर दिया. 2016 में 211 सीटों के साथ यह चरम पर पहुंच गयी. 2014 लोकसभा में 42 में से 34 सीट जीतना इसका राष्ट्रीय स्तर पर सबसे उम्दा प्रदर्शन रहा. इस दौर में पार्टी का वोट शेयर करीब 45 प्रतिशत तक पहुंचा और यहां विपक्ष यानी वाममोर्चा और कांग्रेस का वर्चस्व लगभग खत्म हो गया. आंदोलन की नेतृत्व से जनाधार मजबूत सिंगूर (997 एकड़ भूमि विवाद) और नंदीग्राम (2007 में हुए भूमि आंदोलन के दौरान फायरिंग से 14 मौतें) आंदोलन तृणमूल के लिए टर्निंग प्वाइंट साबित हुए. इन आंदोलनों ने ममता बनर्जी को ‘गरीब और किसानों की नेता’ के रूप में स्थापित किया. इसका सीधा असर 2009 और 2011 के चुनावों में दिखा, जहां ग्रामीण वोट पूरी तरह तृणमूल के पक्ष में गया. 2019 में गिरावट का पहला बड़ा संकेत 2014 के लोकसभा चुनाव में पश्चिम बंगाल में 34 सीट जीतने वाली तृणमूल 2019 में 22 सीटों पर आ गयी और वोट प्रतिशत 43.28 प्रतिशत रहा. वहीं, भाजपा का उत्थान शुरू हुआ. भगवा दल दो से बढ़कर 18 सीट पर पहुंच गयी और भाजपा का वोट शेयर 10 प्रतिशत से बढ़कर लगभग 40.25 प्रतिशत हो गया. इसका मतलब था कि लगभग 25 से 30 प्रतिशत वोट शिफ्ट हुआ और विपक्ष पहली बार मजबूत हुआ. 2021 में खिसकने लगी जमीन 2021 में हुए विधानसभा चुनाव में तृणमूल ने 215 सीट जीत कर प्रशासन बनायी, लेकिन भाजपा 77 सीटों के साथ मजबूत विपक्ष बन गयी. तृणमूल का वोट प्रतिशत 48.02 प्रतिशत रहा, जबकि भाजपा का 38.15 प्रतिशत रहा. पिछले विधानसभा चुनाव यानी 2016 में तृणमूल ने 211 सीटें जीतीं थी, जबकि वोट प्रतिशत 44.91 प्रतिशत रहा. भाजपा ने तीन सीटें जीती थीं, जबकि वोट प्रतिशत 10.16 प्रतिशत रहा था. यानी 2021 के चुनाव में भगवा दल काफी तेजी से मजबूत हुआ और चुनाव में तृणमूल व भाजपा के वोट शेयर में अंतर सिर्फ करीब 10 प्रतिशत था. इस चुनाव में तृणमूल के अर्श से फर्श आने का सबसे बड़ा संकेत मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का खुद नंदीग्राम में भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी से 1956 वोटों से हारना था. यानी सत्ता बची, लेकिन नेतृत्वक जमीन खिसकने लगी थी. 2026 में निर्णायक हार 2026 के विधानसभा चुनाव में मतगणना के अंतिम दौर में तृणमूल लगभग 90 सीटों तक सिमट गयी, जबकि भाजपा 190 से ज्यादा सीटों के साथ आगे निकल गयी. 2021 के 215 सीट से गिरकर 90 सीट पर आना मतलब करीब 55 प्रतिशत से ज्यादा सीटों का नुकसान. यह सीधे तौर पर ‘अर्श से फर्श’ की स्थिति है. वोट शेयर का गणित यानी असली स्पोर्ट्स यहीं हुआ 2016 विधानसभा चुनाव में तृणमूल 44.91 प्रतिशत, भाजपा 10.16 प्रतिशत 2019 लोकसभा चुनाव में तृणमूल 43.28 प्रतिशत, भाजपा 40.25 प्रतिशत 2021 विधानसभा चुनाव में तृणमूल 48.02 प्रतिशत, भाजपा 38.15 प्रतिशत आंकड़ों से स्पष्ट है कि गत कुछ चुनावों में तृणमूल का वोट ज्यादा नहीं गिरा, लेकिन भाजपा का वोट तेजी से बढ़ा. यही कारण है कि कम वोट अंतर ने सीटों में बड़ा अंतर पैदा कर दिया. 2011 और 2016 में मुकाबला ‘वन-साइडेड’ था. 2019 के बाद मुकाबला सीधा ‘तृणमूल बनाम भाजपा’ हो गया. जैसे ही वोट एकतरफा भाजपा के पास गया, सीटों का संतुलन टूट गया. क्षेत्रीय आधार का टूटना नेतृत्व के पंडितों का मानना है कि राज्य में तृणमूल के कमजोर होने के कारणों में एक अहम वजह क्षेत्रीय आधार का टूटना भी है. मसलन गत कुछ वर्षों में उत्तर बंगाल भाजपा का गढ़ बन गया. दक्षिण बंगाल में तृणमूल की सांगठनिक पकड़ का कमजोर होना. शहरी क्षेत्रों में युवा और मध्यम वर्ग के भाजपा की ओर रुझान और ग्रामीण क्षेत्र में योजनाओं के बावजूद असंतोष. पहले जहां तृणमूल हर क्षेत्र में मजबूत थी, अब उसका आधार बिखर गया. एंटी-इनकंबेंसी – 15 साल की सत्ता का असर नेतृत्वक विश्लेषकों का मानना है कि 2011 से 2021 तक लगातार सत्ता में रहने से स्वाभाविक नाराजगी बढ़ी. आमतौर पर पांच से 10 प्रतिशत वोट सत्ता विरोध में चला जाता है और यही वोट भाजपा के पक्ष में कंसोलिडेट हो गया. संगठनात्मक कमजोरी और दलबदल तृणमूल की सांगठनिक कमजोरी के कारणों में से एक नेताओं का दलबदल भी माना जा रहा है. तृणमूल के कभी ‘चाणक्य’ माने जाने वाले मुकुल राय के बाद शुभेंदु अधिकारी जैसे बड़े नेताओं का पार्टी छोड़ना बड़ा झटका था. भाजपा को मजबूत कैडर और जमीनी नेटवर्क मिला और तृणमूल की संगठनात्मक पकड़ कमजोर हुई. पश्चिम बंगाल की अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें घोटाले और विवाद का असर सारधा चिटफंड, राज्य के स्कूलों, नगर निकायों में नियुक्तियों के घोटाले, अवैध कोयला व बालू खनन व तस्करी, राशन वितरण घोटाला, अम्फन राहत घोटाला, संदेशखाली और आरजी कर कांड जैसे मुद्दों ने खासकर ग्रामीण और गरीब वोटरों में तृणमूल पर भरोसा कमजोर किया. नेतृत्व के जानकारों का यह भी मानना है कि लक्खी भंडार, स्वास्थ्य साथी, कन्याश्री जैसी योजनाओं से लाभ जरूर मिला, लेकिन ये योजनाएं ‘एंटी-इनकंबेंसी’ को पूरी तरह रोक नहीं सकीं. वोट स्थायी रूप से नहीं जुड़ पाया. Also Read: बंगाल चुनाव: पहाड़ से समुद्र तक खिला कमल, उत्तर बंगाल में खाता भी नहीं खोल पायी तृणमूल कांग्रेस The post बंगाल में धीरे-धीरे खिसकती गयी ममता बनर्जी की जमीन, इस बार आखिरी दुर्ग भी ढह गया appeared first on Naya Vichar.

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Video: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की पीएम मोदी और अमित शाह की तारीफ

Video : शशि थरूर ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह की तारीफ करते हुए कहा कि बंगाल और असम में उनकी सफलता उनकी मजबूत संगठन क्षमता और प्रोफेशनल चुनाव मैनेजमेंट की वजह से है. उन्होंने कहा कि उनके पास संसाधनों की कमी नहीं होती और वे अभियान में पूरा जोर लगाते हैं. थरूर ने यह भी कहा कि इससे बाकी पार्टियों को सीखने की जरूरत है, लेकिन उम्मीद है कि उनका मैसेज देश को जोड़ने वाला होगा, न कि बांटने वाला. देखें शशि थरूर का ये वीडियो. #WATCH | Thiruvananthapuram, Kerala | Congress MP Shashi Tharoor says, “They (PM Modi and HM Amit Shah) have done a good job in Bengal and Assam and that’s partially because they are very good at conducting elections. They are professionally organised. They have strong… pic.twitter.com/VSP5s9VWDh — ANI (@ANI) May 5, 2026 शशि थरूर ने ने चार राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश के चुनाव नतीजों पर कहा कि पार्टी को अब गंभीर आत्ममंथन करने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि पहले भी ये बात उठी है, लेकिन अब सीखने का सही मौका है. अगर केरल में पार्टी चीजें सही कर सकती है, तो बाकी राज्यों में क्यों नहीं? थरूर ने जोर देकर कहा कि कांग्रेस को समझना होगा कि कहां कमी रह गई और उससे सीख लेकर आगे बढ़ना चाहिए.  #WATCH | Thiruvananthapuram, Kerala | On election results in four states and one UT, Congress MP Shashi Tharoor says, “I think the party will have to do some very serious introspection, no doubt about it. We’ve said this before, and today we have a very good example of what… pic.twitter.com/G1tZ1uCmky — ANI (@ANI) May 5, 2026 यह भी पढ़ें : Assam Election Results : कांग्रेस को बड़ा झटका, तीन पूर्व मुख्यमंत्रियों के बेटे चुनाव हारे पश्चिम बंगाल, असम और तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों के नतीजे विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ के लिए बड़ा झटका है. ऐसा इसलिए क्योंकि इसके दो प्रमुक क्षेत्रीय घटक तृणमूल कांग्रेस और डीएमके के किले ध्वस्त हो गए, हालांकि केरल की जीत कांग्रेस के लिये उम्मीद की नई किरण लेकर आई है. The post Video: कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने की पीएम मोदी और अमित शाह की तारीफ appeared first on Naya Vichar.

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