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June 18, 2026

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‘गोली मार दीजिए लेकिन हम यहीं बैठेंगे’, FIR दर्ज नहीं होने पर भयंकर गुस्से में रौशन आनंद, बोले- फैजल खान ने कराई हत्या

Raushan Anand: ‘फैजल खान से साजिश रची है. साजिश के तहत हमको बर्बाद किया. फैजल खान ने भाई की हत्या कराई. हमारे परिवार को बर्बाद कर दिया’. एक बार फिर यह आरोप ज्ञान बिंदु कोचिंग एकेडमी के डायरेक्टर रौशन आनंद ने खान सर पर लगाया. बुधवार को वे खान सर के खिलाफ कदमकुआं थाने में मामला दर्ज कराने के लिए पहुंचे थे. इस दौरान कई छात्र और उनके समर्थक भी भारी संख्या में पहुंचे थे. थाने के बाहर धरने पर बैठे रौशन आनंद पुलिस की ओर से कदमकुआं थाने में खान सर के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं करने के बाद रौशन आनंद का गुस्सा और ज्यादा फूट पड़ा. वे थाने के बाहर ही धरने पर बैठ गए. पुलिस के खिलाफ रौशन आनंद के समर्थकों ने हाय-हाय के नारे लगाए. मीडिया के सामने रौशन आनंद ने कहा कि मुझे साजिश के तहत जेल भेज दिया गया. मेरे भाई की हत्या हो गई. किसके दबाव में FIR दर्ज नहीं हो रही है, यह कदमकुआं थाने की पुलिस बतायेगी. आगे उन्होंने यह भी कहा कि अगर आज FIR दर्ज नहीं होती है, तो हम यहीं बैठेंगे. हमको पटना पुलिस गोली मार दे, लेकिन हम यहीं बैठेंगे. रसूख का इस्तेमाल किया जा रहा है. ऊपरी दबाव के कारण मेरा FIR दर्ज नहीं किया जा रहा है. इस दौरान रौशन आनंद ने थाना प्रभारी पर एफआईआर दर्ज नहीं करने का आरोप लगाया. IG जितेंद्र राणा ने की रौशन आनंद से मुलाकात ऐसे में जब रौशन आनंद और उनके समर्थक थाने के बाहर ही डटे रहे और एफआईआर दर्ज करने पर ही अड़ गए, तब जाकर IG जितेंद्र राणा ने उनसे मुलाकात की. जानकारी के मुताबिक, आज 12 बजे तक का समय दिया गया है. रौशन आनंद ने कहा कि IG साहब ने कहा कि कल (आज) 12 बजे तक का समय दीजिए. FIR दर्ज हो जाएगा. लेकिन रौशन आनंद ने यह भी कहा कि अगर FIR दर्ज नहीं हुआ तो, हम न्यायालय का रुख करेंगे. न्यायपालिका पर हमें पूरा भरोसा है, इसलिए हमें बेल भी मिल पाया है. आवेदन में रौशन आनंद ने क्या दिया था? रौशन आनंद ने कदमकुआं थाने में आवेदन देकर अपने छोटे भाई प्रिंस यादव की हत्या, खुद को झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने और जेल के अंदर जान से मारने की कोशिश किए जाने के मामले में प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है. आवेदन में रौशन आनंद ने बताया है कि वह मुसल्लहपुर हाट स्थित ज्ञान बिंदु जीएस एकेडमी का संचालन करते हैं. उनके कोचिंग संस्थान के बगल में फैजल खान उर्फ खान सर का कोचिंग संस्थान संचालित होता है. आवेदन के अनुसार, 2 जून 2026 की रात करीब 10 बजे दोनों कोचिंग संस्थानों के स्टाफ के बीच पोस्टर हटाने को लेकर मारपीट हुई थी. इस घटना में एक गार्ड को चोटें भी आई थीं. रौशन आनंद ने आवेदन में कहा है कि उस समय न तो वह खुद, न उनके भाई प्रिंस यादव और न ही अभिषेक वहां मौजूद थे और उन्हें इस घटना की जानकारी भी नहीं थी. किस-किस पर लगाया आरोप? आवेदन में आरोप लगाया गया है कि फैजल खान, डॉ. रामाशंकर प्रसाद, कन्हैया कुमार सिंह और अन्य लोगों ने आपराधिक षड्यंत्र रचा. रौशन आनंद ने लिखा है कि वह 15 जून 2026 को जेल से रिहा हुए थे. इसके बाद वह अपने पैतृक गांव गए, जहां उन्होंने अपने भाई प्रिंस यादव का अंतिम संस्कार और अन्य धार्मिक रीति-रिवाज पूरे किए. गांव से लौटने के बाद उन्होंने बिना देरी किए कदमकुआं थाना पहुंचकर यह लिखित आवेदन दिया. आवेदन के अंत में उन्होंने पुलिस से अनुरोध किया है कि नामजद लोगों के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए. आरोपियों को गिरफ्तार किया जाए और उन्हें सजा दिलाई जाए, ताकि उन्हें और उनके परिवार को न्याय मिल सके और कानून और न्याय व्यवस्था पर विश्वास बना रहे. Also Read: रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव की मौत बनी मिस्ट्री, बयान और आरोपों से सियासत तक हिली, अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगा खुलासा The post ‘गोली मार दीजिए लेकिन हम यहीं बैठेंगे’, FIR दर्ज नहीं होने पर भयंकर गुस्से में रौशन आनंद, बोले- फैजल खान ने कराई हत्या appeared first on Naya Vichar.

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55 साल बाद बंगाल की खाड़ी में आएगी पाकिस्तान की सबमरीन! पीएनएस हैंगोर की तैनाती से बढ़ेगी भारत की चिंता?

PNS Hangor Bay of Bengal: कभी ईस्ट पाकिस्तान के नाम से जाना जाने वाला बांग्लादेश 1971 में वेस्ट पाकिस्तान से लड़कर आजाद हुआ था. आज के पाकिस्तान की क्रूरता और दमन ने ही बांग्लादेश को जन्म दिया. लगभग 50 साल से ज्यादा समय तक दोनों देशों के बीच कटुता भरा रिश्ता रहा, लेकिन 2024 में शेख हसीना प्रशासन गिरने के बाद से पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच गलबहियों का नया दौर शुरू हो गया है. अब इस नई दोस्ती में एक और कदम बढ़ा है, जो हिंदुस्तान को परेशान करने वाला है.  पाकिस्तान की पहली हैंगोर क्लास पनडुब्बी चीन में कमीशन होने के बाद पिछले सप्ताह कराची पहुंची है. इसके साथ ही पाकिस्तान नौसेना के वरिष्ठ अधिकारियों ने ऐसे संकेत दिए हैं कि भविष्य में इस पनडुब्बी का इस्तेमाल केवल अरब सागर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बंगाल की खाड़ी तक पाकिस्तान की पहुंच बढ़ाने में भी किया जा सकता है. श्रीलंका में पाकिस्तानी अधिकारी ने क्या कहा? कोलंबो के एक समाचार पोर्टल द मॉर्निंग के अनुसार, पाकिस्तान लौट रही नई पनडुब्बी के एस्कॉर्ट बेड़े का नेतृत्व कर रहे कमोडोर उमर फारूक ने इस महीने श्रीलंका में कहा कि हैंगोर क्लास पनडुब्बियों के शामिल होने से पाकिस्तान बंगाल की खाड़ी में भी अपनी उपस्थिति बनाए रखने में सक्षम होगा. उन्होंने इस पनडुब्बी को ‘गेम चेंजर’ बताते हुए कहा कि पाकिस्तान ऐसी कुल आठ पनडुब्बियों को अपने बेड़े में शामिल करने की योजना पर काम कर रहा है. यह बयान उन्होंने कोलंबो बंदरगाह पर पाकिस्तानी युद्धपोत पीएनएस तैमूर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया था. China made Pakistani Submarine in Sri Lanka. PNS/M Hangor, along with frigates PNS Taimur & PNS Aslat were on a goodwill visit to the Colombo this week. Pic released by Sri Lankan Navy pic.twitter.com/ADHni5epd8 — Sidhant Sibal (@sidhant) June 4, 2026 पाकिस्तान की नजर अब केवल तटीय सुरक्षा तक सीमित नहीं? नई हैंगोर पनडुब्बी के आने से पहले पाकिस्तान नौसेना के पास पांच पनडुब्बियां थीं. चीन निर्मित ये नई पनडुब्बियां पुरानी अगोस्ता श्रेणी की पनडुब्बियों की जगह लेंगी. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, कमोडोर उमर फारूक की टिप्पणी यह संकेत देती है कि पाकिस्तान अब केवल अपने समुद्री तटों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहता, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में व्यापक परिचालन क्षमता विकसित करने की कोशिश कर रहा है. ऐसा होने पर समुद्र में हिंदुस्तानीय और पाकिस्तानी नौसैनिक गतिविधियां अधिक बार आमने-सामने आ सकती हैं. बंगाल की खाड़ी में मौजूदगी बढ़ाने की बात क्यों महत्वपूर्ण? एक वरिष्ठ पाकिस्तानी नौसैनिक अधिकारी के अनुसार नई पनडुब्बी इस्लामाबाद को बंगाल की खाड़ी जैसे दूरस्थ क्षेत्र में भी अपनी मौजूदगी बनाए रखने की क्षमता दे सकती है. 1971 के युद्ध के बाद से इस क्षेत्र में पाकिस्तान की नौसैनिक गतिविधियां लगभग नगण्य रही हैं. वास्तव में 1971 की हार के बाद पाकिस्तान नौसेना की सक्रियता मुख्य रूप से उत्तरी अरब सागर तक सीमित रह गई थी. दूसरी ओर बंगाल की खाड़ी लंबे समय से हिंदुस्तान की सामरिक ताकत का महत्वपूर्ण केंद्र रही है. यहीं पर हिंदुस्तानीय नौसेना की पूर्वी कमान का मुख्यालय विशाखापट्टनम में स्थित है. इसके अलावा अंडमान और निकोबार द्वीप समूह भी इसी क्षेत्र में हिंदुस्तान को रणनीतिक बढ़त प्रदान करते हैं. हिंदुस्तान और बांग्लादेश के बीच व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा भी इसी समुद्री क्षेत्र से गुजरता है. हिंदुस्तान, बांग्लादेश, म्यांमार, थाईलैंड, मलेशिया, इंडोनेशिया और श्रीलंका से घिरी बंगाल की खाड़ी हाल के वर्षों में इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की बढ़ती भू-नेतृत्वक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण केंद्र बन चुकी है. हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि बंगाल की खाड़ी किसी एक देश का क्षेत्रीय समुद्र नहीं है. अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत किसी देश की संप्रभुता उसकी तटरेखा से 12 समुद्री मील तक के क्षेत्र में होती है, जबकि 200 समुद्री मील तक विशेष आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) लागू होता है. इसके आगे का समुद्री क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र माना जाता है, जहां दूसरे देशों के सैन्य जहाज भी संचालित हो सकते हैं. फिर भी हिंदुस्तान के लिए बंगाल की खाड़ी केवल समुद्री क्षेत्र नहीं, बल्कि उसकी सामरिक सुरक्षा, समुद्री व्यापार मार्गों और इंडो-पैसिफिक रणनीति का अहम हिस्सा है. पीएनएस हैंगोर का थोड़ा इतिहास भी जान लें करीब 55 साल पहले हिंदुस्तान-पाकिस्तान युद्ध के दौरान ‘हैंगोर’ नाम ने समुद्री युद्ध इतिहास में अपनी अलग पहचान बनाई थी. 1971 के युद्ध में पाकिस्तानी पनडुब्बी पीएनएस हैंगोर ने हिंदुस्तानीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस खुकरी को निशाना बनाकर डुबो दिया था. स्वतंत्रता के बाद युद्ध के दौरान हिंदुस्तानीय नौसेना के किसी युद्धपोत के डूबने की यह पहली घटना थी. इस हमले में 176 हिंदुस्तानीय नौसैनिक शहीद हुए थे, जिनमें कप्तान महेंद्र नाथ मुल्ला भी शामिल थे. बाद में उन्हें मरणोपरांत महावीर चक्र से सम्मानित किया गया. इस सफलता के बावजूद पाकिस्तान युद्ध हार गया और हिंदुस्तान ने थल, जल और वायु तीनों मोर्चों पर निर्णायक बढ़त हासिल करते हुए बांग्लादेश की आजादी का मार्ग प्रशस्त किया.  हालांकि, पाकिस्तान ने युद्ध हारने के बावजूद अपनी नई पनडुब्बी परियोजना के लिए फिर से ‘हैंगोर’ नाम चुना, जिससे स्पष्ट है कि उसकी सैन्य व्यवस्था इस ऐतिहासिक विरासत को महत्व देती है. पाकिस्तान के लिए कितनी अहम है हैंगोर क्लास? हैंगोर क्लास पनडुब्बियां पाकिस्तान की अब तक की सबसे बड़ी नौसैनिक आधुनिकीकरण परियोजना का हिस्सा हैं. पाकिस्तान कुल आठ हैंगोर क्लास पनडुब्बियां शामिल करना चाहता है और कराची पहुंची पीएनएस हैंगोर इस श्रृंखला की पहली पनडुब्बी है. चीन में बनी इन पनडुब्बियों में एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन (एआईपी) तकनीक होने की बात कही जाती है. इस तकनीक की मदद से पनडुब्बियां लंबे समय तक पानी के भीतर रह सकती हैं और उन्हें बार-बार सतह पर आकर बैटरी चार्ज करने की जरूरत नहीं पड़ती. यही वजह है कि इन्हें ट्रैक करना और पहचानना अपेक्षाकृत कठिन माना जाता है. अब बात बांग्लादेश की पाकिस्तान से बढ़ती नजदीकियों की 1971 के मुक्ति संग्राम के बाद दशकों तक ढाका और इस्लामाबाद के संबंध तनावपूर्ण रहे. लेकिन शेख हसीना प्रशासन के सत्ता से बाहर होने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में तेजी से बदलाव आया है. दशकों बाद ढाका और कराची के बीच सीधी उड़ान सेवाएं शुरू हुईं. ढाका विश्वविद्यालय में उर्दू शायरी कार्यक्रम आयोजित किए गए और प्रसिद्ध गायक राहत फतेह अली खान ने भी

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ईरान-अमेरिका में हुआ 14 पॉइंट समझौता, ट्रंप-पेजेश्कियान ने किए साइन, जानें किन-किन बातों पर बनी सहमति

US Iran 14 Point MoU: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे तनाव को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को पेरिस में फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से मुलाकात के दौरान इस दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए. ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने भी इस पर हस्ताक्षर किए, जिसके बाद यह समझौता तत्काल प्रभाव से लागू हो गया. दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने एक 14 सूत्रीय समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके तहत सैन्य गतिविधियों को रोकने, होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम तथा आर्थिक प्रतिबंधों पर व्यापक बातचीत शुरू करने पर सहमति बनी है. अमेरिका ने इस दस्तावेज को ‘संयुक्त राज्य अमेरिका और इस्लामी गणराज्य ईरान के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन’ के रूप में जारी किया है. इस समझौते का मकसद विस्तारित 60 दिन के युद्धविराम को लागू करना और इसी अवधि में दोनों देशों के बीच लंबित मुद्दों पर अंतिम समझौते का रास्ता तैयार करना है. टाइम मैगजीन के अनुसार, मेरिकी प्रशासन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि इस समझौते का मुख्य उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य को तुरंत खोलना, ईरान के संवर्धित यूरेनियम भंडार से जुड़े मुद्दों का समाधान करना और प्रतिबंधों में चरणबद्ध राहत देने के लिए एक ढांचा तैयार करना है. वहीं, सीएनएन ने एक अधिकारी के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा, ‘यह समझौता हमें होर्मुज जलडमरूमध्य को तत्काल खोलने का अवसर देता है. इसके तहत ईरान परमाणु सामग्री से जुड़े मुद्दों के समाधान के लिए प्रतिबद्ध होगा. साथ ही ऐसा तंत्र तैयार किया गया है जिसमें ईरान की ओर से सकारात्मक कदम बढ़ने पर अमेरिका भी आर्थिक और प्रतिबंध संबंधी राहत बढ़ा सकेगा, जिससे देश की समृद्धि में मदद मिलेगी.’ The moment President Trump signs the Iran deal at the Palace of Versailles. The agreement was finalized during a dinner hosted by French President Emmanuel Macron inside the historic palace. The signing marked a major diplomatic milestone after months of negotiations aimed at… pic.twitter.com/slt91WwA2O — Fox News (@FoxNews) June 18, 2026 ईरान ने भी समझौते की पुष्टि की प्रेस टीवी के अनुसार, ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने पुष्टि की कि समझौते का मसौदा अंतिम रूप देकर दोनों पक्षों ने उस पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. उन्होंने बताया कि इस विषय पर ओमान और अन्य देशों के साथ काफी समय से परामर्श चल रहा था तथा होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रबंधन से जुड़े अधिकांश मुद्दों पर सहमति बन चुकी थी. बघाई ने कहा कि समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित की जाएगी, लेकिन इसके साथ ही ‘होर्मुज जलडमरूमध्य पर इस्लामी गणराज्य ईरान की संप्रभुता और अधिकार भी सुरक्षित रहेंगे.’ 14 सूत्रीय समझौते में क्या-क्या शामिल है? 1. सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने की प्रतिबद्धता अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों ने तत्काल प्रभाव से सभी सैन्य अभियानों को समाप्त करने और भविष्य में एक-दूसरे के खिलाफ युद्ध या सैन्य कार्रवाई शुरू नहीं करने का संकल्प लिया है. इसमें लेबनान से जुड़े संघर्ष भी शामिल हैं. साथ ही लेबनान की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने पर सहमति बनी है. 2. एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान दोनों देश एक-दूसरे की स्वतंत्रता, क्षेत्रीय अखंडता और आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने की नीति अपनाएंगे. 3. 60 दिनों में अंतिम समझौते का लक्ष्य अमेरिका और ईरान ने अधिकतम 60 दिनों के भीतर अंतिम समझौता तैयार करने पर सहमति जताई है. जरूरत पड़ने पर यह अवधि आपसी सहमति से बढ़ाई जा सकती है. 4. अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी हटेगी एमओयू पर हस्ताक्षर होते ही अमेरिका ईरान के खिलाफ लागू नौसैनिक नाकेबंदी और अन्य बाधाओं को हटाने की प्रक्रिया शुरू करेगा. 30 दिनों के भीतर इसे पूरी तरह समाप्त करने का लक्ष्य रखा गया है. 5. होर्मुज जलडमरूमध्य से मुफ्त और सुरक्षित आवाजाही ईरान 60 दिनों तक फारस की खाड़ी और ओमान सागर के बीच वाणिज्यिक जहाजों को मुफ्त और सुरक्षित मार्ग उपलब्ध कराएगा. तकनीकी और सैन्य बाधाओं को हटाने तथा समुद्री बारूदी सुरंगों की सफाई के बाद 30 दिनों में यातायात सामान्य स्तर पर पहुंचाने की योजना है. 6. ईरान के लिए 300 अरब डॉलर की आर्थिक योजना अमेरिका अपने क्षेत्रीय साझेदारों के साथ मिलकर कम से कम 300 अरब डॉलर की पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास योजना तैयार करेगा. इसकी कार्यप्रणाली अंतिम समझौते में तय होगी. 7. प्रतिबंध हटाने का रोडमैप अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद, आईएईए बोर्ड और अपने सभी प्राथमिक एवं द्वितीयक प्रतिबंधों को चरणबद्ध तरीके से समाप्त करने की प्रतिबद्धता जताई है. 8. परमाणु कार्यक्रम पर समझौता ईरान ने दोहराया है कि वह परमाणु हथियार हासिल नहीं करेगा. दोनों देश संवर्धित परमाणु सामग्री के निपटारे, यूरेनियम संवर्धन और अन्य परमाणु जरूरतों पर अंतिम समझौते के तहत विस्तृत चर्चा करेंगे. 9. वार्ता के दौरान यथास्थिति बनी रहेगी अंतिम समझौते तक ईरान अपने मौजूदा परमाणु कार्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेगा. वहीं अमेरिका नए प्रतिबंध नहीं लगाएगा और क्षेत्र में अतिरिक्त सैन्य बल भी नहीं भेजेगा. 10. तेल निर्यात को तत्काल राहत एमओयू लागू होते ही अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ईरानी कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पादों और उनसे जुड़ी बैंकिंग, बीमा तथा परिवहन सेवाओं के लिए विशेष छूट जारी करेगा. 11. जमे हुए ईरानी फंड जारी होंगे अमेरिका ईरान की फ्रीज या प्रतिबंधित संपत्तियों और धनराशि को उपयोग के लिए उपलब्ध कराने पर सहमत हुआ है. इसके लिए आवश्यक लाइसेंस और मंजूरियां भी दी जाएंगी. 12. निगरानी तंत्र बनेगा समझौते के प्रभावी क्रियान्वयन और भविष्य में अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एक विशेष कार्यकारी तंत्र स्थापित किया जाएगा. 13. अंतिम समझौते पर औपचारिक वार्ता शुरू होगी एमओयू के शुरुआती प्रावधानों के लागू होने के बाद दोनों देश शेष बिंदुओं पर अंतिम समझौते के लिए औपचारिक बातचीत शुरू करेंगे. 14. संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की मंजूरी अंतिम समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के बाध्यकारी प्रस्ताव के जरिए वैधता प्रदान की जाएगी. नोट- ये सभी बिंदु अमेरिका की ओर से जारी किए गए हैं. कमोवेश ईरान ने भी इसी तरह के बिंदुओं पर ही सहमति जताई थी. हालांकि, ईरान की ओर से पूरा टेक्स्ट अभी सामने नहीं आया है. ये भी पढ़ें:- Video: अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर मुहर,

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करोड़ों में फीस लेने वाले शाहिद, करीना और आलिया ने इस फिल्म के लिए घटा दी थी फीस, किया था बड़ा समझौता

करीना कपूर, शाहिद कपूर और आलिया भट्ट की फिल्म ‘उड़ता पंजाब’ को रिलीज हुए 10 साल हो गए हैं. अब सालों बाद निर्देशक अभिषेक चौबे ने बताया कि तीनों स्टार्स ने मूवी के लिए अपनी फीस कम कर दी थी. उन्होंने बताया कि उस समय आलिया भट्ट नई थीं, जबकि करीना और शाहिद काफी पॉपुलर थे. अगर वो दोनों अपनी ओरिजनल अमाउंट चार्ज करते तो फिल्म कभी बन ही नहीं पाती. करोड़ों चार्ज करने वाले स्टार्स ने इस फिल्म के लिए कम की थी फीस अभिषेक ने स्क्रीन को दिए इंटरव्यू में कहा, ”तीनों स्टार्स ने अपनी भूमिकाओं के लिए फीस काफी कम कर दी थी. इसी वजह से फिल्म बन पाई. आलिया तब नई थीं, लेकिन अगर शाहिद और करीना मार्केट अमाउंट चार्ज करते, तो बजट इतना बढ़ जाता कि फिल्म बनाना संभव नहीं होता.” उड़ता पंजाब को लेकर क्या बोले निर्देशक उन्होंने आगे कहा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि यह मेनस्ट्रीम के सितारों वाली फिल्म होगी. फैंटम फिल्म्स ने मुझे ऐसा करने के लिए प्रेरित किया. आखिरकार, यह एक साहसिक और गंभीर फिल्म थी. इसलिए हर किसी को पसंद नहीं आई, लेकिन इसने बॉक्स ऑफिस पर ठीक-ठाक कमाई की.” कैसे बनी उड़ता पंजाब फिल्म उन्होंने यह भी याद किया कि कैसे ‘उड़ता पंजाब’ बनी. निर्देशक ने कहा, “महामारी से पहले की सारी बातें अब पुरानी यादों जैसी लगती हैं, लेकिन हां, मुझे 2013 में सुदीप शर्मा से मिलना याद है. मैंने NH10 की स्क्रिप्ट पहले ही पढ़ ली थी, जो मुझे बहुत पसंद आई थी. इसलिए, मैं उनके साथ काम करना चाहता था. मेरे मन में ड्रग्स पर आधारित फिल्म बनाने का एक हल्का-फुल्का विचार था, लेकिन तब कहानी पंजाब में नहीं, बल्कि पूरे हिंदुस्तान में फैली हुई थी.” उड़ता पंजाब के बारे में 17 जून, 2016 को रिलीज हुई ‘उड़ता पंजाब’ ने पंजाब के उन युवाओं की काली सच्चाई को बेबाकी से उजागर किया, जो नशे, भ्रष्टाचार और अपराध से जूझ रहे थे. फिल्म की दमदार कहानी ने नशे की लत से तबाह हुई चार जिंदगियों को एक साथ पिरोया. आलिया, करीना और शाहिद के अलावा, फिल्म में दिलजीत दोसांझ भी थे. यह भी पढ़ें- 3 ब्लॉकबस्टर सीजन बाद बड़ा सीक्रेट आउट, The Family Man के लिए मनोज वाजपेयी नहीं, ये साउथ सुपरस्टार थे पहली पसंद The post करोड़ों में फीस लेने वाले शाहिद, करीना और आलिया ने इस फिल्म के लिए घटा दी थी फीस, किया था बड़ा समझौता appeared first on Naya Vichar.

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पत्नी से बार-बार हो रहा है झगड़ा? ये 4 छोटे बदलाव बचा सकते हैं आपका रिश्ता

Marriage Tips: शादी का रिश्ता जितना खूबसूरत होता है, उतना ही जिम्मेदारियों से भरा भी होता है. शुरुआत में सब कुछ नया और एक्साइटिंग लगता है, लेकिन समय के साथ काम का दबाव, घर की जिम्मेदारियां और गलतफहमियां रिश्ते में तनाव बढ़ाने लगती हैं. ऐसे में छोटी-छोटी बातों पर बहस होना आम बात है. अगर आप भी अक्सर सोचते हैं कि “मेरी पत्नी और मुझमें बहुत झगड़ा होता है, क्या करूं?” तो कुछ आसान आदतें अपनाकर रिश्ते को बेहतर बनाया जा सकता है. गुस्से में तुरंत रिएक्ट न करें जब किसी बात पर बहस शुरू हो जाए, तो उसी समय जवाब देने की बजाय थोड़ा समय लें. कुछ मिनट का ब्रेक लेने से दिमाग शांत होता है और बात को बेहतर तरीके से समझने का मौका मिलता है. गुस्से में कही गई बातें अक्सर रिश्ते को ज्यादा नुकसान पहुंचाती हैं. आरोप लगाने की बजाय अपनी फीलिंग्स बताएं झगड़े के दौरान “तुम हमेशा ऐसा करते हो” या “तुम्हारी वजह से सब हुआ” जैसी बातें माहौल और खराब कर देती हैं. इसकी जगह अपनी भावनाएं शेयर करें. जैसे, “इस बात से मुझे दुख हुआ” या “मुझे ऐसा महसूस हुआ”. इससे सामने वाला आपकी बात को ज्यादा अच्छे से समझ पाता है. सिर्फ सुनें नहीं, समझने की कोशिश करें कई बार लोग बहस के दौरान सिर्फ जवाब देने के लिए सुनते हैं. लेकिन रिश्ते को मजबूत बनाने के लिए पार्टनर की बात और भावनाओं को समझना जरूरी है. जब आपकी पत्नी कोई बात कह रही हों, तो बीच में टोके बिना उनकी बात पूरी सुनें. इससे उन्हें महसूस होगा कि उनकी बात की अहमियत है. रिश्ते के लिए समय निकालें भागदौड़ भरी जिंदगी में कपल्स एक-दूसरे के लिए समय निकालना भूल जाते हैं. यही दूरी धीरे-धीरे झगड़ों की वजह बन सकती है. रोजाना कुछ मिनट साथ बिताएं, वॉक पर जाएं, साथ में चाय पिएं या बिना किसी काम की बात किए बातचीत करें. ऐसे छोटे-छोटे पल रिश्ते में फिर से मिठास ला सकते हैं. यह भी पढ़ें: रिलेशनशिप में दिख रहे हैं ये रेड फ्लैग्स? हो सकती है ‘माइक्रो चीटिंग’ की शुरुआत The post पत्नी से बार-बार हो रहा है झगड़ा? ये 4 छोटे बदलाव बचा सकते हैं आपका रिश्ता appeared first on Naya Vichar.

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इन 4 नंबरों में छिपी है टायर की पूरी कुंडली, 1 मिनट में जानें बदलने का सही समय

क्या आप जानते हैं कि आपकी कार के टायर बाहर से बिल्कुल ठीक दिखने के बावजूद खतरनाक साबित हो सकते हैं? अक्सर हम कार की सर्विस, इंजन ऑयल और माइलेज पर ही सिर्फ ध्यान देते हैं, लेकिन टायरों को तब तक नजरअंदाज करते रहते हैं, जब तक कोई समस्या सामने न आ जाए. बहुत ही कम लोग यह जानते हैं कि टायरों की भी एक एक्सपायरी डेट होती है और समय के साथ उनका रबर कमजोर होने लगता है. कई बार टायर दिखने में बाहर से बिल्कुल नए जैसे लगते हैं, फिर भी वे अंदर से पुराने और कमजोर हो चुके होते हैं. ऐसे टायर अचानक फट सकते हैं, गाड़ी की पकड़ कम कर सकते हैं और बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं. इसलिए टायर की उम्र जानना आपकी सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है. अच्छी बात यह है कि आप सिर्फ एक मिनट में अपने टायर की उम्र का पता लगा सकते हैं. आइए जानते हैं इसका आसान तरीका. टायर की उम्र जानना क्यों है जरूरी? टायर रबर से बने होते हैं और समय के साथ उनकी मजबूती कम होने लगती है. तेज धूप, गर्मी, बारिश और खराब सड़कें टायरों को धीरे-धीरे कमजोर बना देती हैं. यही वजह है कि बाहर से ठीक दिखने वाला टायर भी अंदर से पुराना हो सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, कार के टायरों को 5 से 6 साल के भीतर बदल देना चाहिए, भले ही उनका इस्तेमाल कम हुआ हो. हिंदुस्तान जैसे गर्म मौसम वाले देशों में टायरों की उम्र और तेजी से कम हो सकती है. टायर की मैन्युफैक्चरिंग डेट कैसे चेक करें? टायर की उम्र जानने के लिए आपको किसी खास डिवाइस की जरूरत नहीं पड़ेगी. बस टायर की साइडवॉल (किनारे वाले हिस्से) को ध्यान से देखें. यहां आपको DOT से शुरू होने वाला एक कोड दिखाई देगा. इस कोड के आखिर में चार नंबर लिखे होते हैं. यही नंबर बताते हैं कि टायर कब बनाया गया था. जैसे कि मान लीजिए, टायर के किनारे वाले हिस्से पर DOT XXXX 2226 लिखा हुआ है. इसमें 22 का मतलब साल का 22वां सप्ताह, 26 का मतलब साल 2026 है. यानी कि यह टायर साल 2026 के 22वें सप्ताह यानी लगभग मई 2026 में बनाया गया था. वहीं, अगर आपके टायर पर सिर्फ 3 अंकों का कोड दिखाई देता है, तो इसका मतलब है कि वह टायर साल 2000 से पहले का है और उसे तुरंत बदल देना चाहिए. कितने पुराने टायर को सुरक्षित माना जाता है? 0 से 3 साल: पूरी तरह सुरक्षित 3 से 5 साल: इस्तेमाल के लायक, लेकिन रेगुलर चेक करना जरूरी 5 से 6 साल: बदलने की तैयारी कर लें 6 साल से ज्यादा: इस्तेमाल करना सुरक्षित नहीं माना जाता कई लोग स्टेपनी (स्पेयर टायर) को भूल जाते हैं, लेकिन उसकी उम्र भी उसी तरह बढ़ती है. इसलिए उसकी मैन्युफैक्चरिंग डेट भी जरूर चेक करें. टायर पुराने होने के संकेत कई बार टायर की उम्र पूरी होने से पहले ही कुछ संकेत मिलने लगते हैं. ऐसे में इन संकेतों पर ध्यान देकर तुरंत जांच कर टायर बदलने पर विचार करना चाहिए. टायर के किनारों पर छोटी-छोटी दरारें दिखना रबर का सख्त या भुरभुरा होना बार-बार हवा कम होना सड़क पर ज्यादा शोर सुनाई देना गाड़ी की पकड़ और ब्रेकिंग में कमी महसूस होना नया टायर खरीदते समय रखें यह बात ध्यान जब भी आप अपनी गाड़ी के लिए नया टायर खरीदें, तो उसकी मैन्युफैक्चरिंग डेट जरूर चेक करें. कई बार टायर लंबे समय तक गोदाम में पड़े रहते हैं. ऐसे में दिखने में नया टायर भी पहले से पुराना हो सकता है. एक्सपर्ट्स के अनुसार, टायर खरीदते समय 6 से 12 महीने के भीतर बने टायर को प्राथमिकता देनी चाहिए. यह भी पढ़ें: टायरों का रंग हमेशा काला ही क्यों होता है? सालों से गाड़ी चलाने वाले भी नहीं जानते इसकी वजह The post इन 4 नंबरों में छिपी है टायर की पूरी कुंडली, 1 मिनट में जानें बदलने का सही समय appeared first on Naya Vichar.

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18वीं सदी में ‘सेना’ से कांपते थे डकैत, उसे पुनर्जीवित करेगी शुभेंदु अधिकारी सरकार

18th Century Paramilitary Force Revival: पश्चिम बंगाल की सत्ता संभालने के बाद हिंदुस्तानीय जनता पार्टी (BJP) की प्रशासन सूबे की कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए कमर कस चुकी है. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सिंडिकेटराज और बाहुबलियों की नकेल कसनी शुरू कर दी है. इस बीच, प्रशासनिक गलियारों में चर्चा है कि बंगाल की नयी प्रशासन राज्य के सीमावर्ती और अशांत इलाकों में सुरक्षा-व्यवस्था को मजबूत करने के लिए 18वीं सदी के ऐतिहासिक और पारंपरिक अर्धसैनिक बल (Paramilitary Force) को नये रूप में पुनर्जीवित (Revival) करने पर विचार कर रही है. जब डकैतों और उपद्रवियों का काल बना था पारंपरिक बल जिस अर्धसैनिक बल के पुनरुद्धार की बात कही जा रही है, उसका गौरवशाली इतिहास 18वीं सदी (ब्रिटिश काल और उससे पहले) से जुड़ा है. उस दौर में बंगाल के ग्रामीण इलाकों, जंगलों और तटीय क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था बनाये रखने, खूंखार डकैतों का सफाया करने और सीमापार से घुसपैठ रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर विशेष अर्धसैनिक दस्ते का गठन किया गया था. स्थानीय भूगोल के उस्ताद थे जवान इस पारंपरिक बल के जवान क्षेत्र के भूगोल से पूरी तरह वाकिफ होते थे. इनकी छापामार युद्ध शैली और त्वरित कार्रवाई इतनी अचूक थी कि बड़े से बड़े अपराधी और उपद्रवी इनके नाम से कांपते थे. आजादी के बाद और फिर दशकों लंबे वामपंथी व टीएमसी राज के दौरान आधुनिक पुलिसिंग के आने से यह पारंपरिक ढांचा पूरी तरह हाशिये पर चला गया और धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में दफन हो गया. इसे भी पढ़ें : बांग्लादेशी घुसपैठियों की अब खैर नहीं, शुभेंदु प्रशासन ने शुरू किया सर्च ऑपरेशन, बॉर्डर सील करने की तैयारी 18वीं सदी के सुरक्षा मॉडल की जरूरत क्यों? बंगाल चुनाव 2026 में जीत के बाद भाजपा और शुभेंदु अधिकारी प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती राज्य के सुदूर ग्रामीण इलाकों, विशेषकर दक्षिण 24 परगना, मालदा, मुर्शिदाबाद और उत्तर बंगाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में कानून-व्यवस्था को पटरी पर लाना है. बंगाल की समाचारें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें 18th Century Paramilitary Force Revival: लोकल इंटेलिजेंस की कमी होगी दूर आधुनिक पुलिस बल के पास अक्सर स्थानीय स्तर पर खुफिया जानकारी (Local Intelligence) की कमी होती है. अगर इस पारंपरिक बल को आधुनिक हथियारों और नयी ट्रेनिंग के साथ दोबारा खड़ा किया जाता है, तो यह स्थानीय स्तर पर सुरक्षा का एक अभेद्य चक्रव्यूह तैयार कर सकता है. घुसपैठ और सिंडिकेट पर लगेगा लगाम हिंदुस्तान-नेपाल और हिंदुस्तान-बांग्लादेश सीमा के करीब जहांगीर खान जैसे बाहुबलियों के नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त करने और सीमा पार से होने वाली अवैध गतिविधियों को रोकने में यह बल राज्य पुलिस के लिए एक बड़े ‘गेम चेंजर’ के रूप में काम कर सकता है. इसे भी पढ़ें हकीमपुर बॉर्डर पर भारी हलचल, शुभेंदु अधिकारी का अल्टीमेटम- जल्दी भागो, घुसपैठियों के दाना-पानी पर भी रोक भागो नहीं तो हम खदेड़ेंगे, शुभेंदु अधिकारी के अल्टीमेटम से घबराये बांग्लादेशियों का बॉर्डर पर लगा जमावड़ा मुख्यमंत्री बनते एक्शन मोड में शुभेंदु अधिकारी, सीमा पर बाड़बंदी के लिए BSF को जमीन, पहली कैबिनेट में 5 बड़े फैसले घुसपैठियों में बंगाल की 3D नीति का खौफ, हकीमपुर बॉर्डर पर बीएसएफ से कह रहे- साहब, हमें वापस भेज दो The post 18वीं सदी में ‘सेना’ से कांपते थे डकैत, उसे पुनर्जीवित करेगी शुभेंदु अधिकारी प्रशासन appeared first on Naya Vichar.

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वैभव सूर्यवंशी का गुस्सा पड़ा भारी! श्रीलंकाई खिलाड़ियों से विवाद के बाद हो सकती है बड़ी कार्रवाई

Vaibhav Sooryavanshi Faces Heavy Fine: हिंदुस्तान ए के युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ट्राई-नेशन सीरीज के दौरान मैदान पर हुई एक घटना के कारण मुश्किल में पड़ सकते हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, श्रीलंका ए के खिलाफ मुकाबले के बाद हुए विवाद को लेकर उन पर मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं टीम के कप्तान तिलक वर्मा पर भी कार्रवाई की सिफारिश की गई है. मैच रेफरी ने की कार्रवाई की सिफारिश ‘स्पोर्टस्टार’ की रिपोर्ट के अनुसार, डंबुला में सोमवार को स्पोर्ट्से गए हिंदुस्तान ए और श्रीलंका ए के मुकाबले के बाद मैच रेफरी प्रदीप जयप्रकाश ने वैभव सूर्यवंशी और श्रीलंकाई खिलाड़ी विशन हलंबागे पर उनकी मैच फीस का 50 प्रतिशत जुर्माना लगाने की सिफारिश की है. इसके अलावा तिलक वर्मा पर 30 प्रतिशत और श्रीलंका ए के विकेटकीपर-बल्लेबाज निरोशन डिकवेला पर 20 प्रतिशत जुर्माना लगाने का प्रस्ताव रखा गया है. मैच के बाद हुआ था तीखा विवाद रिपोर्ट के मुताबिक, मुकाबला समाप्त होने के बाद वैभव सूर्यवंशी की विशन हलंबागे और श्रीलंका ए के कुछ अन्य खिलाड़ियों के साथ तीखी बहस हो गई थी. सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में वैभव को हलंबागे को धक्का देते हुए भी देखा गया था. मैच के दौरान दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच तनाव का माहौल बना हुआ था, जिसका असर मुकाबले के बाद भी देखने को मिला. IPL प्रदर्शन को लेकर की गई थी स्लेजिंग रिपोर्ट में दावा किया गया है कि टूर्नामेंट की शुरुआत से ही श्रीलंका ए के कुछ खिलाड़ी वैभव सूर्यवंशी और हिंदुस्तान ए के अन्य खिलाड़ियों को लगातार स्लेज कर रहे थे. कथित तौर पर वैभव के आईपीएल प्रदर्शन को लेकर भी टिप्पणियां की जा रही थीं, जिससे दोनों टीमों के खिलाड़ियों के बीच तनाव बढ़ता गया. अब BCCI और श्रीलंका क्रिकेट लेंगे फैसला ए-टीम क्रिकेट में अनुशासनात्मक मामलों पर ICC सीधे कार्रवाई नहीं करता. ऐसे मामलों में मैच रेफरी अपनी रिपोर्ट संबंधित क्रिकेट बोर्डों को भेजते हैं. इस मामले में भी सिफारिशें BCCI और श्रीलंका क्रिकेट को भेज दी गई हैं. अब दोनों बोर्ड तय करेंगे कि प्रस्तावित जुर्मानों को मंजूरी दी जाए या नहीं. सुपर ओवर में हिंदुस्तान को मिली हार यह मुकाबला बेहद रोमांचक रहा था और इसका फैसला सुपर ओवर में हुआ. हिंदुस्तान ए को जीत के लिए 17 रन की जरूरत थी, लेकिन टीम केवल 9 रन ही बना सकी और मुकाबला गंवा बैठी. सुपर ओवर में वैभव सूर्यवंशी आखिरी तीन गेंदों पर सिर्फ छह रन ही बना पाए. मैच समाप्त होने के बाद श्रीलंकाई टीम जश्न मना रही थी, जबकि वैभव सूर्यवंशी और सूर्यांश शेडगे पवेलियन लौट रहे थे. इसी दौरान विवाद ने तूल पकड़ लिया. यह भी पढ़ें: हवा में लगाई छलांग…कूदकर लपका कैच, आलोचकों के मुंह पर वैभव सूर्यवंशी ने जड़ा तमाचा; देखें VIDEO The post वैभव सूर्यवंशी का गुस्सा पड़ा भारी! श्रीलंकाई खिलाड़ियों से विवाद के बाद हो सकती है बड़ी कार्रवाई appeared first on Naya Vichar.

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Video: अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर मुहर, ट्रंप बोले- ‘It’s Signed!’

Video : अमेरिका और ईरान के बीच डील साइन होने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप काफी खुश नजर आए. कई महीनों से जारी तनातनी के बाद यह समझौता एक बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है और इससे दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद बढ़ गई है. एक वीडियो फॉक्स न्यूज से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर किया है. इस वीडियो में ट्रंप दिख रहे हैं. जब पत्रकारों ने उनसे सवाल किया कि क्या समझौते पर साइन हो गया है? तो इसके जवाब में वे  उत्साहित होकर कहते दिख रहे हैं-  ‘It’s Signed…आप भी देखें ये वीडियो. “It’s signed.” President Trump told reporters he signed the Iran memorandum of understanding in Versailles as he departed the palace following a dinner with French President Emmanuel Macron. A White House official says a photo of the signed agreement was sent to Iran and the… pic.twitter.com/HVELS6RYVB — Fox News (@FoxNews) June 17, 2026 अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के मुताबिक, इस समझौते पर बुधवार (17 जून) को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन ने डिजिटल हस्ताक्षर किए. इससे पहले रविवार को अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकर कालिबाफ ने भी इलेक्ट्रॉनिक तौर पर दस्तावेज पर साइन किए थे. समझौता तुरंत प्रभाव से लागू हो गया, जिसके बाद इस सप्ताह स्विट्जरलैंड में होने वाली औपचारिक हस्ताक्षर समारोह की योजना रद्द कर दी गई. 🚨 President Donald J. Trump has SIGNED the Iran Memorandum of Understanding at Versailles in France. 🇺🇸 pic.twitter.com/JQ6qlbvFAF — The White House (@WhiteHouse) June 17, 2026 अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार रात फ्रांस के वर्साय पैलेस में आयोजित डिनर के दौरान अमेरिका-ईरान समझौते की हार्ड कॉपी पर भी आधिकारिक तौर पर हस्ताक्षर किए. उस समय फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों भी उनके साथ मौजूद थे. व्हाइट हाउस ने इस साइनिंग का वीडियो भी जारी किया है, जिसमें ट्रंप डिनर टेबल पर समझौते पर हस्ताक्षर करते नजर आ रहे हैं. यह भी पढ़ें : अमेरिका ने माना ‘ईरान के पास परमाणु बम से भी बड़ा हथियार’, खुफिया रिपोर्ट का खुलासा; जब चाहे कर सकता है इस्तेमाल The post Video: अमेरिका-ईरान के बीच शांति समझौते पर मुहर, ट्रंप बोले- ‘It’s Signed!’ appeared first on Naya Vichar.

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मौसम: जानें झारखंड और बिहार में कब से आगे बढ़ेगा मॉनसून, IMD ने जारी किया बारिश का अलर्ट

Weather Forecast : मौसम विभाग ने प्रेस रिलीज जारी करके बताया कि 18 से 22 जून के दौरान जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है. वहीं, 23 जून को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में जबकि 18 से 23 जून के दौरान हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने के आसार हैं. 18 से 22 जून के दौरान पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली में, 18 से 19 जून को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में, 18 से 19 जून और 22 से 23 जून के दौरान पूर्वी उत्तर प्रदेश में जबकि 18 से 23 जून के दौरान पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान में कहीं-कहीं हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ का मौसम कैसा रहेगा? पश्चिमी मध्य प्रदेश और पूर्वी मध्य प्रदेश में 18 से 19 जून के दौरान जबकि छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 18 से 23 जून तक कई स्थानों पर बारिश होने की संभावना है. इसके अलावा, पूर्वी और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 18 से 19 जून के दौरान जबकि छत्तीसगढ़ और विदर्भ में 18 से 21 जून तक कहीं-कहीं आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने और 40-50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने की संभावना है. पश्चिम बंगाल में होगी भारी बारिश उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग, कालिम्पोंग, जलपाईगुड़ी वाला इलाका) और सिक्किम में 18 से 23 जून के दौरान अधिकांश इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है. वहीं, गंगा के मैदानी क्षेत्रों वाले पश्चिम बंगाल (कोलकाता, हावड़ा, हुगली वाला इलाका) में 20 से 23 जून के दौरान और ओडिशा में 19 से 20 जून के दौरान कई स्थानों पर अच्छी बारिश होने के आसार हैं. यह भी पढ़ें : 70 से 80KM की रफ्तार से चलेगी तूफानी हवा, 18 से ज्यादा राज्यों में बारिश की चेतावनी, मौसम को लेकर IMD का अलर्ट अरुणाचल प्रदेश, असम के अलावा यहां होगी भारी बारिश 18 से 23 जून के दौरान अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अधिकांश इलाकों में भारी बारिश होने की संभावना है. इस दौरान इन राज्यों में कहीं-कहीं आंधी-तूफान के साथ बिजली गिरने की भी आशंका है. पूरा प्रेस रिलीज देखने के लिए यहां क्लिक करें दिल्ली का मौसम कैसा रहेगा? दिल्ली में 18 से 20 जून के दौरान मौसम गर्म और उमस भरा रहने की संभावना है. इस दौरान अधिकतम तापमान 36 से 40 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 25 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच रह सकता है. आसमान आंशिक रूप से बादलों से ढका रहेगा. 18 और 19 जून को कहीं-कहीं हल्की बारिश और गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की संभावना है, जबकि 20 जून को हल्की से मध्यम बारिश के साथ तेज हवाएं (40 से 50 किमी प्रति घंटा) चल सकती हैं. pic.twitter.com/s8R5JQVzbu — RWFC New Delhi (@RWFC_ND) June 17, 2026 The post मौसम: जानें झारखंड और बिहार में कब से आगे बढ़ेगा मॉनसून, IMD ने जारी किया बारिश का अलर्ट appeared first on Naya Vichar.

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