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June 18, 2026

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राज्यसभा चुनाव: मतगणना से पहले राधाकृष्ण किशोर का दावा, प्रणव झा को मिलेंगे 28.97 वोट

रांची से आनंद मोहन की रिपोर्ट Rajya Sabha Election: झारखंड में राज्यसभा चुनाव के नतीजों से पहले वित्त मंत्री और कांग्रेस विधायक राधाकृष्ण किशोर ने बड़ा दावा किया है. उन्होंने कहा है कि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 28.97 वोट प्राप्त होंगे और उनकी जीत सुनिश्चित है. उनके इस बयान ने चुनावी माहौल को और दिलचस्प बना दिया है, क्योंकि सभी दल अपने-अपने दावे कर रहे हैं. इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन 81 सदस्यीय झारखंड विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. इनमें झामुमो के 34 विधायक, कांग्रेस के 16 विधायक, राजद के 4 विधायक और माले के 2 विधायक शामिल हैं. इसी संख्या बल के आधार पर गठबंधन ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. झामुमो की ओर से बैजनाथ राम उम्मीदवार हैं, जबकि कांग्रेस ने प्रणव झा को चुनावी मैदान में उतारा है. गठबंधन लगातार दोनों प्रत्याशियों की जीत का दावा कर रहा है. एनडीए के पास 24 वोट, नथवानी पर दांव दूसरी ओर एनडीए के पास कुल 24 विधायक हैं. भाजपा के 21 विधायक हैं, जबकि आजसू, जदयू और लोजपा के एक-एक विधायक हैं. इसी संख्या बल के आधार पर एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी चुनाव लड़ रहे हैं. हालांकि मौजूदा गणित के अनुसार नथवानी की राह आसान नहीं मानी जा रही है, लेकिन एनडीए के नेता लगातार उनकी जीत का भरोसा जता रहे हैं. इसे भी पढ़ें: चार घंटे तक अटकी रहेगी सबकी जान, विधानसभा में स्पोर्ट्सा होगा या बिदक जाएगा घोड़ा? दूसरी प्राथमिकता के वोटों पर टिकी नजर राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 28 वोट का आंकड़ा जरूरी माना जा रहा है. ऐसे में राधाकृष्ण किशोर का 28.97 वोट का दावा यह संकेत देता है कि कांग्रेस दूसरी प्राथमिकता के वोटों के सहारे भी अपने उम्मीदवार की जीत को लेकर आश्वस्त है. अब सभी की निगाहें मतगणना पर टिकी हुई हैं. कुछ ही घंटों में यह साफ हो जाएगा कि नेतृत्वक दलों के दावे सही साबित होते हैं या चुनावी गणित कोई नया मोड़ लेकर आता है. आखिर लोकतंत्र में अंतिम फैसला बयान नहीं, मतपेटी से निकलने वाले आंकड़े ही करते हैं. इसे भी पढ़ें: इरफान अंसारी का बड़ा दावा, बोले- राज्यसभा चुनाव में 60 वोट तक पहुंचेगा महागठबंधन The post राज्यसभा चुनाव: मतगणना से पहले राधाकृष्ण किशोर का दावा, प्रणव झा को मिलेंगे 28.97 वोट appeared first on Naya Vichar.

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RSS कार्यालय हमला मामला : हिरासत से भाग रहे अपराधियों के साथ पुलिस की मुठभ‍ेड़, 1 को लगी गोली

RSS Office Attack Case, रांची : रांची के चान्हो में बड़ी घटना हुई है. बुधवार को आरएसएस कार्यालय में पेट्रोल बम से हमला करने के मामले में कोडरमा से गिरफ्तार दो आरोपी गुरुवार को चान्हो थाना के हवालात से पुलिस का हथियार छीन कर भाग निकले. इस दौरान पुलिस के साथ उनकी मुठभेड़ हो गयी. इसमें एक को गोली लगी. The post RSS कार्यालय हमला मामला : हिरासत से भाग रहे अपराधियों के साथ पुलिस की मुठभ‍ेड़, 1 को लगी गोली appeared first on Naya Vichar.

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आकाश यादव का दावा, तेज प्रताप यादव ने घर आकर धमकाया, फिर लॉरेंस बिश्नोई के आदमी का आया फोन

FIR on Tej Pratap Yadav: लालू प्रसाद यादव के बड़े बेटे तेज प्रताप यादव और जेल में बंद गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई के खिलाफ पटना की अदालत में मुकदमा दर्ज कराया गया है. अनुष्का यादव के भाई आकाश यादव ने जान से मारने की धमकी मिलने के बाद अदालत में मुकदमा दर्ज कराया है. पटना सिविल कोर्ट में यह केस रजिस्टर्ड हुआ है और आज ही इस मामले पर कोर्ट में सुनवाई भी हुई है. पाटलिपुत्र थाने ने नहीं दर्ज की FIR, तो जाना पड़ा कोर्ट आकाश यादव ने इस मामले की शुरुआत में 10 जून को पटना के पाटलिपुत्र थाना में एक लिखित शिकायत दी थी. लेकिन पुलिस ने इस मामले में कोई एफआईआर दर्ज नहीं की. पुलिस की तरफ से कोई कार्रवाई न होते देख आकाश यादव ने 17 जून को सीधे पटना सिविल कोर्ट का दरवाजा खटखटाया. कोर्ट ने मामले की गंभीरता को देखते हुए केस रजिस्टर्ड कर लिया. BREAKING: तेज प्रताप यादव और लॉरेंस बिश्नोई से जुड़े मामले में आकाश यादव ने पटना के पाटलिपुत्र थाना में जान से मारने की धमकी की शिकायत दर्ज कराई है. FIR नहीं होने पर उन्होंने कोर्ट का रुख किया, जहां केस दर्ज कर आज सुनवाई हुई. आकाश यादव ने आरोप लगाया कि 6 जून को तेज प्रताप यादव… pic.twitter.com/t3DyCdXOes — Naya Vichar (@prabhatkhabar) June 18, 2026 घर में घुसने की कोशिश का आरोप आकाश यादव ने शिकायत में आरोप लगाया है कि 6 जून को तेज प्रताप यादव अपने साथी मोती लाल यादव के साथ पटना के पाटलिपुत्र इलाके स्थित उनके घर पहुंचे थे. उस समय वह घर पर नहीं थे और खाटूश्याम गए हुए थे. आकाश यादव के अनुसार, उनकी गैरमौजूदगी में तेज प्रताप यादव और उनके साथी ने घर में जबरन घुसने की कोशिश की. साथ ही घर के लोगों को धमकी भी दी गई. फोन पर धमकी मिलने का दावा आकाश यादव का आरोप है कि बाद में उन्हें फोन कर मोती लाल यादव के जरिए धमकी दिलाई गई. उन्होंने कहा कि मोती लाल का फोन कटने के कुछ देर बाद एक और कॉल आया. शिकायत के मुताबिक, फोन करने वाले व्यक्ति ने अपना नाम मोहित बताया और कहा कि वह लॉरेंस बिश्नोई का आदमी है. आकाश यादव का आरोप है कि कॉल करने वाले ने कहा कि मंत्री जी के खिलाफ कुछ नहीं बोलना है. बिहार की ताजा समाचारों के लिए क्लिक करें कॉल रिकॉर्डिंग को बनाया सबूत आकाश यादव ने दावा किया है कि उनके पास फोन कॉल की रिकॉर्डिंग मौजूद है. उन्होंने उस रिकॉर्डिंग को मामले में सबूत के तौर पर अदालत में जमा किया है. फिलहाल मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है. अब आगे की कार्रवाई अदालत और जांच के दौरान सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर तय होगी. इसे भी पढ़ें: पिस्टल, फेसबुक लाइव और ताबड़तोड़ फायरिंग, जानिए भरत तिवारी एनकाउंटर की पूरी कहानी The post आकाश यादव का दावा, तेज प्रताप यादव ने घर आकर धमकाया, फिर लॉरेंस बिश्नोई के आदमी का आया फोन appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड राज्यसभा चुनाव: हेमंत सोरेन की BJP विधायकों के साथ ‘चाय पर चर्चा’, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल

Jharkhand Rajya Sabha Polls: वायरल वीडियो में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का एक अलग ही अंदाज देखने को मिला. चुनावी प्रतिद्वंद्विता को दरकिनार कर सीएम सोरेन विधानसभा की कैंटीन में विपक्षी दल (बीजेपी) के विधायकों के साथ चाय का आनंद लेते नजर आए. नवीन जायसवाल और भानु प्रताप साही के साथ बात करते दिख हेमंत सोरेन वीडियो में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, बीजेपी नेता भानु प्रताप शाही और हटिया से विधायक नवीन जायसवाल के साथ बात करते दिखाई दे रहे हैं. सभी दिग्गज नेता आपस में किसी गंभीर विषय पर बातचीत करते दिख रहे हैं. VIDEO | Ranchi: During Rajya Sabha polls of two seats, Jharkhand CM Hemant Soren was seen interacting and sipping tea with BJP legislators. (Full video available on PTI Videos – https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/lKtbbh07M8 — Press Trust of India (@PTI_News) June 18, 2026 सौहार्दपूर्ण माहौल तीखी नेतृत्वक बयानबाजी से इतर, इस मुलाकात के दौरान नेताओं के चेहरों पर मुस्कुराहट और एक सहज तालमेल साफ नजर आया. इस ‘चाय पर चर्चा’ का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब सुर्खियां बटोर रहा है. दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में दो सीट के लिए तीन उम्मीदवार मैदान में हैं जिनमें बीजेपी समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी, झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के बैद्यनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा शामिल हैं. ‘क्रॉस-वोटिंग’ की आशंकाओं के बीच विधानसभा परिसर में स्थापित मतदान केंद्र पर सुबह नौ बजे मतदान शुरू हुआ और यह शाम चार बजे तक चला. ये भी पढ़ें: चार घंटे तक अटकी रहेगी सबकी जान, विधानसभा में स्पोर्ट्सा होगा या बिदक जाएगा घोड़ा? The post झारखंड राज्यसभा चुनाव: हेमंत सोरेन की BJP विधायकों के साथ ‘चाय पर चर्चा’, सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल appeared first on Naya Vichar.

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ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, बोले- ईरान के पास कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें होनी चाहिए, समझौते के बाद बदले सुर

Trump Iran Ballistic Missiles: अमेरिका और ईरान के बीच हुए 14 सूत्रीय ‘इस्लामाबाद मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग’ (एमओयू) को लेकर नई बहस छिड़ गई है. समझौते के प्रभावी होने से कुछ घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि ईरान के पास सीमित संख्या में बैलिस्टिक मिसाइलें रहने पर उन्हें आपत्ति नहीं है. इतना ही नहीं उन्होंने ईरान के न्यूक्लियर हथियारों पर भी बड़ा नरम बयान दिया. ट्रंप ने ईरान की संपत्तियों को भी मुक्त करने की बात स्वीकार की. यह बयान इसलिए अहम माने जा रहे हैं, क्योंकि युद्ध शुरू होने के समय अमेरिका और इजरायल दोनों ईरान के मिसाइल कार्यक्रम को खत्म करने की बात कर रहे थे. ट्रंप बोले- दूसरे देशों के पास हैं तो ईरान के पास भी कुछ हो सकती हैं फ्रांस में जी-7 समिट के इतर पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा, ‘अगर दूसरे देशों के पास बैलिस्टिक मिसाइलें हैं तो ईरान के पास कुछ मिसाइलें होने से उन्हें पूरी तरह रोकना थोड़ा अनुचित होगा.’ उन्होंने सऊदी अरब और कतर का उदाहरण देते हुए कहा, ‘अगर उनके पास ऐसी मिसाइलें हैं तो अनुपातिक रूप से ईरान के पास भी कुछ होना ठीक है.’ ट्रंप ने यह भी कहा कि मिसाइलें उतनी बड़ी समस्या नहीं हैं जितनी परमाणु हथियार. उनके शब्दों में, ‘मिसाइलें किसी छोटे इलाके को नुकसान पहुंचा सकती हैं, लेकिन वे दुनिया को तबाह नहीं करतीं, जैसा कि परमाणु हथियार कर सकते हैं.’ JUST IN – Trump on Iran having ballistic missiles: “There are people around me who say they shouldn’t even have one missile. I asked, what exactly do you suggest? That Saudi Arabia can have missiles and Iran cannot? It just doesn’t work that way” pic.twitter.com/hHEBE2K6PT — Insider Paper (@TheInsiderPaper) June 17, 2026 युद्ध के दौरान था मिसाइल कार्यक्रम खत्म करने का लक्ष्य 28 फरवरी को जब अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया था, तब ट्रंप प्रशासन का दावा था कि ईरान की मिसाइल क्षमता और परमाणु कार्यक्रम दोनों को कमजोर करना जरूरी है. ट्रंप ने उस समय कहा था कि ईरान की मिसाइल इंडस्ट्री को पूरी तरह नष्ट कर दिया जाएगा. हालांकि, अब उनका ताजा बयान संकेत देता है कि वॉशिंगटन इस मुद्दे पर पहले जैसी सख्त स्थिति में नहीं है. फिर भी ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अगले 60 दिनों तक चलने वाली वार्ताओं में मिसाइल कार्यक्रम पर चर्चा जारी रहेगी. यूरेनियम भंडार सौंपने की शर्त भी नहीं समझौते के सामने आए विवरणों के अनुसार ईरान को अपने उच्च स्तर तक संवर्धित यूरेनियम भंडार को तुरंत सौंपने की बाध्यता नहीं दी गई है. एमओयू में कहा गया है कि इस मुद्दे का समाधान अगले 60 दिनों में तैयार होने वाले एक अलग तंत्र के तहत किया जाएगा. इसमें अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) की निगरानी में संवर्धित यूरेनियम को कम स्तर पर लाने की प्रक्रिया पर चर्चा होगी. ट्रंप ने इस मुद्दे को भी ज्यादा महत्वपूर्ण नहीं बताया. उन्होंने दावा किया कि ईरान के परमाणु ठिकानों पर पहले हुए हमलों के बाद संवर्धित सामग्री मलबे के नीचे दब चुकी है. उन्होंने कहा, ‘यह सामग्री अब उतनी मूल्यवान नहीं है, लेकिन मनोवैज्ञानिक तौर पर हम उसे हासिल करना चाहेंगे. कोई उसे छू भी नहीं सकता.’ प्रतिबंधों में राहत और जमे हुए फंड पर भी बयान ट्रंप ने यह भी स्वीकार किया कि अमेरिका को ईरान की कुछ जमी हुई संपत्तियां वापस करनी पड़ सकती हैं. उन्होंने कहा, ‘हमने उनका काफी पैसा रोका हुआ है. वह उनका अपना पैसा है. मुझे लगता है कि हमें उसे वापस करना होगा.’ ट्रंप ने दावा किया कि यदि अमेरिका ऐसा नहीं करता तो वैश्विक निवेशकों का डॉलर पर भरोसा प्रभावित हो सकता है. इतना ही नहीं अमेरिका ने ईरान के 300 बिलियन डॉलर रिकंस्ट्रक्शन फंड को भी मान्यता दे दी है. इसका पैसा कहां से आएगा, इस पर अभी खुलकर बात नहीं हुई है.  ये भी पढ़ें:- 100 साल पहले जहां से अमेरिका बना ‘सुपर पावर’, ट्रंप ने वहीं किया ‘सरेंडर’, क्या ईरान-यूएस डील से यहूदी फिर खतरे में? ये भी पढ़ें:- ईरान-US के बीच हुआ ‘इस्लामाबाद एमओयू’, डील में पाकिस्तान का कितना योगदान? ‘डाकिया’ था या ‘ब्रोकर’ राष्ट्रपतियों द्वारा समझौते पर हुए हस्ताक्षर ट्रंप के फ्रांस के वर्साय पैलेस में डील पर साइन करने के कुछ घंटों बाद ईरान के विदेश मंत्रालय ने घोषणा की कि एमओयू के अंतिम मसौदे पर दोनों देशों के राष्ट्रपतियों ने आधिकारिक हस्ताक्षर कर दिए हैं. ईरानी मीडिया मसूद पेजेश्कियान की फोटोज शेयर कीं. ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने प्रशासनी समाचार एजेंसी इरना के हवाले से कहा, ‘इस्लामाबाद एमओयू का पाठ राष्ट्रपतियों के हस्ताक्षर के साथ अंतिम रूप ले चुका है. अब समझौते के क्रियान्वयन की परीक्षा शुरू होगी.’ न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के अनुसार, इससे पहले उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबाफ ने डिजिटल रूप से दस्तावेज पर हस्ताक्षर किए थे, जिसकी निगरानी ट्रंप ने की थी. The post ट्रंप का बड़ा यू-टर्न, बोले- ईरान के पास कुछ बैलिस्टिक मिसाइलें होनी चाहिए, समझौते के बाद बदले सुर appeared first on Naya Vichar.

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कमाई कम है तो क्या हुआ? इनवेस्टमेंट का ये तरीका बना सकता है आपको अमीर  

How to Invest in Mutual Funds: आज के समय में सिर्फ बचत करना काफी नहीं है, बल्कि पैसे को सही जगह इन्वेस्ट करना भी जरूरी है. ऐसे में म्यूचुअल फंड मिडिल क्लास परिवारों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं. इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि इसमें कम रकम से शुरुआत की जा सकती है और इनवेस्टमेंट को प्रोफेशनल तरीके से मैनेज किया जाता है. क्या होता है म्यूचुअल फंड? म्यूचुअल फंड में कई लोगों का पैसा एक जगह जमा किया जाता है. इस पैसे को एक फंड मैनेजर शेयर, बॉन्ड और अन्य इनवेस्टमेंट ऑप्शंस में लगाता है. इसका उद्देश्य इन्वेस्टर्स को बेहतर रिटर्न दिलाना होता है. इससे उन लोगों को भी इनवेस्टमेंट का मौका मिलता है जिन्हें शेयर बाजार की ज्यादा जानकारी नहीं होती.  कितने पैसे से शुरुआत कर सकते हैं? अच्छी बात यह है कि म्यूचुअल फंड में इनवेस्टमेंट शुरू करने के लिए बड़ी रकम की जरूरत नहीं होती. आप मात्र 100 रुपये प्रति माह से भी SIP (Systematic Investment Plan) शुरू कर सकते हैं. इनवेस्टमेंट का तरीका विशेषता SIP हर महीने छोटी राशि निवेश लंपसम एक बार में बड़ी राशि निवेश ELSS टैक्स बचाने वाला म्यूचुअल फंड एक्स्पर्ट्स के अनुसार, नए इन्वेस्टर्स के लिए SIP बेहतर ऑप्शन माना जाता है क्योंकि इससे बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम होता है. म्यूचुअल फंड के फायदे क्या हैं? म्यूचुअल फंड कई कारणों से इन्वेस्टर्स की पहली पसंद बन रहे हैं. प्रमुख फायदे 100 रुपये जैसी छोटी रकम से इनवेस्टमेंट की शुरुआत प्रोफेशनल फंड मैनेजर द्वारा इनवेस्टमेंट का प्रबंधन अलग-अलग कंपनियों और एसेट्स में इनवेस्टमेंट से जोखिम कम जरूरत पड़ने पर अधिकांश फंड से आसानी से पैसा निकाल सकते हैं ELSS के जरिए आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स बचत ELSS में इनवेस्ट करने पर सालाना 1.5 लाख रुपये तक की टैक्स छूट का लाभ मिल सकता है. साथ ही इसका लॉक-इन पीरियड सिर्फ 3 साल होता है, जो कई अन्य टैक्स सेविंग ऑप्शंस से कम है.  पहली बार इन्वेस्ट करते समय किन बातों का ध्यान रखें? इनवेस्टमेंट शुरू करने से पहले कुछ जरूरी बातें समझना बेहद महत्वपूर्ण है.  इन बातों को न भूलें पहले अपना लक्ष्य तय करें, जैसे घर खरीदना, बच्चों की पढ़ाई या रिटायरमेंट. अपनी जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार फंड चुनें. फंड मैनेजर का अनुभव और फंड का खर्च (Expense Ratio) जरूर देखें. सारा पैसा एक ही फंड में न लगाएं. KYC प्रक्रिया पूरी रखें. इसके लिए PAN कार्ड और पते का प्रमाण जरूरी होता है. नेट बैंकिंग सक्रिय रखें ताकि इनवेस्टमेंट आसान और सुरक्षित रहे. क्या मिडिल क्लास परिवारों को इन्वेस्ट करना चाहिए? यदि आप धीरे-धीरे संपत्ति बनाना चाहते हैं और लंबे समय के लिए इन्वेस्ट कर सकते हैं, तो म्यूचुअल फंड एक अच्छा ऑप्शन हो सकता है. इसमें कम रकम से शुरुआत, प्रोफेशनल प्रबंधन और SIP जैसी सुविधाएं इसे मिडिल क्लास परिवारों के लिए आकर्षक बनाती हैं.  ये भी पढ़ें: पहली बार भर रहे हैं ITR? इन डॉक्यूमेंट्स के बिना न करें शुरुआत The post कमाई कम है तो क्या हुआ? इनवेस्टमेंट का ये तरीका बना सकता है आपको अमीर   appeared first on Naya Vichar.

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चार घंटे तक अटकी रहेगी सबकी जान, विधानसभा में खेला होगा या बिदक जाएगा घोड़ा?

Rajya Sabha Election: झारखंड विधानसभा में राज्यसभा की दो सीटों के लिए गुरुवार को मतदान शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो गया. राज्य के सभी 81 विधायकों ने अपने मताधिकार का प्रयोग कर लिया है. अब सबकी नजरें मतगणना और नतीजों पर टिकी हैं. शाम चार बजे से मतों की गिनती शुरू होगी और करीब सात बजे तक तस्वीर साफ हो जाएगी. अगले चार घंटे झारखंड की नेतृत्व के लिए सबसे बेचैन करने वाले साबित हो सकते हैं, क्योंकि दावे बहुत हैं और गणित उससे भी ज्यादा दिलचस्प है. तीन उम्मीदवारों के बीच है मुकाबला राज्यसभा चुनाव में कुल तीन उम्मीदवार मैदान में हैं. झामुमो ने बैजनाथ राम को प्रत्याशी बनाया है, कांग्रेस की ओर से प्रणव झा चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में परिमल नथवानी मैदान में हैं. दो सीटों के लिए हो रहे इस चुनाव में मुकाबला संख्या बल, रणनीति और संभावित क्रॉस वोटिंग के इर्द-गिर्द घूम रहा है. यही वजह है कि मतदान समाप्त होने के बावजूद नेतृत्वक हलचल थमी नहीं है. रिजॉर्ट पॉलिटिक्स भी रही चर्चा में इस बार राज्यसभा चुनाव के दौरान झारखंड में रिजॉर्ट पॉलिटिक्स भी चर्चा का विषय बनी रही. मंगलवार से कांग्रेस और एनडीए के कई विधायकों को रांची के विभिन्न होटलों में ठहराया गया था. इसका मकसद विधायकों को एकजुट रखना और किसी भी तरह की नेतृत्वक उठापटक से दूर रखना बताया गया. हालांकि झामुमो ने अपने विधायकों को किसी होटल या रिसॉर्ट में नहीं रखा. पार्टी नेतृत्व का कहना रहा कि उन्हें अपने विधायकों पर पूरा भरोसा है. हॉर्स ट्रेडिंग की आशंका पर भी नजर राज्यसभा चुनाव के दौरान हॉर्स ट्रेडिंग की आशंकाओं ने भी नेतृत्वक माहौल को गर्म रखा. कई नेताओं ने साफ कहा कि यदि इंडिया गठबंधन के निर्धारित 56 वोटों से अधिक या एनडीए के 24 वोटों से काफी ज्यादा मत सामने आते हैं, तो स्वाभाविक रूप से क्रॉस वोटिंग और हॉर्स ट्रेडिंग को लेकर सवाल उठेंगे. यही कारण है कि मतगणना शुरू होने से पहले ही नेतृत्वक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं तेज हैं. अब यह देखना दिलचस्प होगा कि विधानसभा में कोई “स्पोर्ट्सा” होता है या फिर चुनावी मैदान में कोई “घोड़ा बिदक” जाता है. इंडिया गठबंधन के पास 56 विधायकों का समर्थन 81 सदस्यीय विधानसभा में इंडिया गठबंधन के पास कुल 56 विधायक हैं. इनमें झामुमो के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और माले के 2 विधायक शामिल हैं. इसी संख्या बल के आधार पर गठबंधन ने दो उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं. झामुमो के बैजनाथ राम और कांग्रेस के प्रणव झा को जीत दिलाने का दावा इंडिया गठबंधन लगातार कर रहा है. एनडीए के पास 24 वोट, नथवानी पर दांव दूसरी तरफ एनडीए के पास कुल 24 वोट हैं. भाजपा के 21 विधायक हैं, जबकि आजसू, जदयू और लोजपा के एक-एक विधायक हैं. इसी समर्थन के आधार पर एनडीए ने निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नथवानी का समर्थन किया है. हालांकि मौजूदा संख्या के आधार पर नथवानी की राह आसान नहीं मानी जा रही है. ऐसे में उनकी जीत की संभावना काफी हद तक अतिरिक्त समर्थन और संभावित क्रॉस वोटिंग पर निर्भर मानी जा रही है. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: वोटिंग के बाद बीजेपी विधायकों का दावा, ‘दिल्ली जा रहे हैं परिमल नथवानी’ 28 वोट का जादुई आंकड़ा करेगा फैसला राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए 28 वोट का जादुई आंकड़ा पार करना जरूरी है. बैजनाथ राम की स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा और परिमल नथवानी के बीच असली मुकाबला माना जा रहा है. अब शाम सात बजे तक झारखंड की नेतृत्व की धड़कनें तेज रहेंगी. सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन राज्यसभा जाएगा, बल्कि यह भी है कि क्या संख्या का गणित जीत जाएगा या फिर नेतृत्व का रसायन एक बार फिर सबको चौंका देगा. आखिर लोकतंत्र में बैलेट बॉक्स खुलने तक हर दावा सिर्फ दावा ही होता है, नतीजा नहीं. इसे भी पढ़ें: राज्यसभा चुनाव: महुआ मांझी का बड़ा खुलासा, जेएमएम विधायकों को रिसॉर्ट में रखने का भी आया था प्रस्ताव The post चार घंटे तक अटकी रहेगी सबकी जान, विधानसभा में स्पोर्ट्सा होगा या बिदक जाएगा घोड़ा? appeared first on Naya Vichar.

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शिवसेना(यूबीटी) की बैठक में नहीं पहुंचे 6 बागी सांसद, संजय राउत ने कहा-गद्दारों की सदस्यता समाप्त होगी

Shiv Sena UBT : शिवसेना(उद्धव बालासाहेब ठाकुर गुट) की संसदीय दल की मीटिंग के बाद पार्टी के शीर्ष नेता संजय राउत ने कहा कि व्हिप जारी किए जाने के बाद भी 6 सांसद बैठक में नहीं पहुंचे. हम उन सांसदों को गद्दार मानते हैं और हम उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए कदम उठाएंगे. बेईमानी कर रहे हैं गद्दार सांसद : संजय राउत संजय राउत ने मीडिया के सामने यह कहा कि जो सांसद पार्टी के आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी. उन्हें पार्टी कारण बताओ नोटिस जारी करेगी और उनकी सदस्यता समाप्त करने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे. राउत ने कहा कि पार्टी के व्हिप का उल्लंघन करना अनुशासनहीनता है. वे बेईमानी कर रहे हैं और धोखा कर रहे हैं. पार्टी के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि उन्हें शोकाॅज नोटिस आज ही भेजा जाएगा और उनसे पूछा जाएगा कि वे पार्टी की बैठक में क्यों नहीं आए. #WATCH | Delhi: After Shiv Sena (UBT) parliamentary party meeting, party MP Arvind Sawant says, “Absent MPs have betrayed the party…We are going to issue showcause notice to them. They will get the notice by the evening. If they do not respond within 7 days of receiving the… pic.twitter.com/Ic7yHsnDi3 — ANI (@ANI) June 18, 2026 गंदी नेतृत्व का परिणाम भुगतना पड़ेगा संजय राउत ने मीडिया के सामने यह कहा कि एकनाथ शिंदे और बीजेपी जिस तरह की गंदी नेतृत्व कर रही है उसका परिणाम उन्हें भुगतना पड़ेगा. संजय राउत ने बृहस्पतिवार को भी मीडिया के सामने बागी सांसदों के लिए अपशब्द कहे. उन्होंने कहा कि ये लोग बेईमान और धोखेबाज हैं, इसके साथ ही उन्होंने अपशब्द भी कहे. बुधवार को संजय राउत ने यह दावा किया था कि उनके सांसदों को 50-50 करोड़ देकर खरीदा जा रहा है. उन्होंने यह भी कहा था कि जो जाना चाहते हैं वो जाएं, लेकिन इस्तीफा देकर जाएं. इससे पीछे तर्क यह है कि वे शिवसेना के नाम पर जीतकर आएं हैं, तो जनता के साथ धोखेबाजी नहीं चलेगी. जिन छह सांसदों के अलग ग्रुप बनाने की संभावना है, उनके नाम हैं-संजय जाधव (परभणी), भाऊसाहेब वाकचौरे (शिरडी), संजय देशमुख (यवतमाल), नागेश पाटिल अष्टीकर (हिंगोली), ओमराजे निंबालकर (धाराशिव), संजय पाटिल (मुंबई नॉर्थ ईस्ट). ये भी पढ़ें : शिवसेना में फूट पर बोले जयराम रमेश-2/3 मेजॉरिटी के लिए सभी पार्टियों को तोड़ने में जुटे हैं पीएम मोदी-अमित शाह संजय राउत का दावा-50-50 करोड़ में खरीदे जा रहे हैं सांसद, 15 करोड़ दिया एडवांस, बौखलाहट में मीडिया के सामने दी गाली The post शिवसेना(यूबीटी) की बैठक में नहीं पहुंचे 6 बागी सांसद, संजय राउत ने कहा-गद्दारों की सदस्यता समाप्त होगी appeared first on Naya Vichar.

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100 साल पहले जहां से अमेरिका बना ‘सुपर पावर’, ट्रंप ने वहीं किया ‘सरेंडर’, क्या ईरान-यूएस डील से यहूदी फिर खतरे में?

Trump Iran MoU Versailles History: अमेरिका कब दुनिया में एक ताकतवर देश के रूप में स्थापित हुआ? सवाल के कई उत्तर हो सकते हैं. इतिहास में देखें तो, 1776 में अमेरिका को स्वतंत्रता मिली, फिर उसने तेजी से अपना क्षेत्र और वित्तीय स्थिति बढ़ाई. औद्योगिक क्रांति के प्रभाव से अमेरिकी उद्योग, रेल नेटवर्क और व्यापार में तेज विस्तार की बदौलत 1890 के दशक तक अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी वित्तीय स्थितिओं में शामिल हो चुका था. 1898 के स्पैनिश अमेरिकी वॉर को अक्सर अमेरिका के वैश्विक शक्ति बनने की शुरुआत माना जाता है. इस युद्ध के बाद अमेरिका का प्रभाव कैरेबियाई क्षेत्र और प्रशांत महासागर तक फैल गया. इसके बाद प्रथम विश्व युद्ध ने अमेरिका की आर्थिक ताकत को और मजबूत किया. आज से लगभग 100 साल पहले हुए इस युद्ध ने अमेरिका को दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदाता और प्रमुख औद्योगिक देश बनाया. हाँ, यहां रुकना होगा. क्योंकि इस लेख में हम यही बात करने वाले हैं. 100 साल पहले, जिस जगह ने अमेरिका को दुनिया में एक महाशक्ति के रूप में स्थापित किया. उसी जगह से अमेरिका के पराभव की शुरुआत हो रही है. हम यहां यह साफ कर दें कि यह केवल आंकलन मात्र है. यह गलत भी हो सकता है. लेकिन इसके सही होने के पीछे कुछ कारण हैं, जो इसे जस्टिफाई कर रहे हैं. कैसे? इसी को समझते हैं.   प्रथम विश्व युद्ध ने अमेरिका को दुनिया का सुपर पावर बनाने के बीज डाले प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) के बाद अमेरिका विश्व मंच पर एक बड़ी शक्ति के रूप में उभरा, हालांकि वह तत्काल अकेली महाशक्ति नहीं बना था. उसकी आर्थिक, औद्योगिक और वित्तीय ताकत में जबरदस्त वृद्धि हुई, जिसने आगे चलकर उसे वैश्विक नेतृत्व की स्थिति तक पहुंचाया. प्रथम विश्व युद्ध से पहले यूरोप की शक्तियां विशेषकर युनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन), फ्रांस और जर्मनी विश्व नेतृत्व और वित्तीय स्थिति पर हावी थीं. लेकिन युद्ध ने यूरोप की वित्तीय स्थितिओं को बुरी तरह कमजोर कर दिया. इसके उलट, अमेरिका का मुख्य भूभाग युद्ध से लगभग अछूता रहा और उसने मित्र देशों को हथियार, खाद्यान्न और अन्य सामग्री बेचकर भारी आर्थिक लाभ कमाया. युद्ध के बाद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा कर्जदाता देश बन गया. पहले यूरोपीय देश अमेरिका को कर्ज देते थे, लेकिन 1918 के बाद स्थिति उलट गई और कई यूरोपीय देश अमेरिकी ऋण पर निर्भर हो गए. इससे न्यूयॉर्क वैश्विक वित्तीय केंद्र के रूप में उभरने लगा और लंदन की पारंपरिक वित्तीय प्रधानता को चुनौती मिलने लगी. औद्योगिक उत्पादन के क्षेत्र में भी अमेरिका की स्थिति मजबूत हुई. युद्ध के दौरान अमेरिकी कारखानों ने बड़े पैमाने पर उत्पादन किया, जिससे उसकी विनिर्माण क्षमता और तकनीकी बढ़त बढ़ी.  1920 के दशक को अक्सर ‘रोरिंग ट्वेंटीज’ कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान अमेरिकी वित्तीय स्थिति तेज गति से बढ़ी. हालांकि, नेतृत्वक और सैन्य दृष्टि से अमेरिका अभी भी कुछ हद तक अलगाववादी नीति अपनाए हुए था. उसने युद्ध के बाद बनी लीग ऑफ नेशंस में भी सदस्यता नहीं ली. इसलिए प्रथम विश्व युद्ध के बाद अमेरिका आर्थिक महाशक्ति तो बन गया, लेकिन उसने अभी वैश्विक नेतृत्वक नेतृत्व की पूरी जिम्मेदारी नहीं संभाली थी. कई इतिहासकारों का मानना है कि प्रथम विश्व युद्ध ने अमेरिका को महाशक्ति बनने की दिशा में आगे बढ़ाया, जबकि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद वह वास्तव में दुनिया की दो प्रमुख महाशक्तियों में से एक बनकर उभरा. दूसरे विश्व युद्ध के बाद यूरोप और जापान की तबाही तथा अमेरिकी आर्थिक-सैन्य शक्ति के विस्तार ने उसे वैश्विक नेतृत्व की स्थिति में पहुंचा दिया. इसलिए निष्कर्ष यह है कि प्रथम विश्व युद्ध के बाद अमेरिका एक प्रमुख वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा और यही हमारा आधार बिंदु है. भले ही उसका पूर्ण महाशक्ति का दर्जा द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित हुआ. अब बात करते हैं 100 साल पहले क्या हुआ था और आज क्या हुआ? प्रथम विश्व युद्ध को समाप्त करने के लिए करीब 107 साल पहले, 28 जून 1919 को फ्रांस के वर्साय पैलेस में संधि हुई थी.  उस समय अमेरिका विजेता देशों में शामिल था और तत्कालीन राष्ट्रपति वुडरो विल्सन नई वैश्विक व्यवस्था के प्रमुख शिल्पकारों में गिने जाते थे. अब उसी महल में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के साथ एक 14 बिंदुओं वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. लेकिन इस बार बहस यह है कि क्या अमेरिका ने अपनी शर्तें मनवाईं या फिर ईरान को बड़ी रियायतें दे दीं? 1919 का वर्साय और वुडरो विल्सन के ‘14 सूत्र’ प्रथम विश्व युद्ध के बाद फ्रांस के वर्साय में आयोजित शांति सम्मेलन में अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस और इटली की भूमिका सबसे अहम थी. उस समय समझौते पर हस्ताक्षर से करीब छह महीने पहले वुडरो विल्सन ने वर्साय में कहा था, ‘आखिरकार दुनिया अब अमेरिका को दुनिया के उद्धारक के रूप में जानती है.’ विल्सन के प्रसिद्ध ’14 सूत्र’ युद्ध के बाद की नई विश्व व्यवस्था का आधार बने थे. यही वजह है कि जब 2026 में ट्रंप ने ईरान के साथ 14 बिंदुओं वाले समझौते पर हस्ताक्षर किए, तो इतिहास से तुलना होना लगभग तय है. वर्साय में ट्रंप के हस्ताक्षर और शुरू हुई नई बहस फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा साझा किए गए एक वीडियो में ट्रंप समझौते पर हस्ताक्षर करने से पहले कुछ क्षण रुकते हैं और आसपास मौजूद लोगों से कहते हैं, ‘यह आसान नहीं था, मैं आपको बता सकता हूं.’ Le Président Trump a signé ce soir à Versailles l’accord entre l’Iran et les États-Unis. Cet accord ouvre la voie à une paix durable et permet la réouverture du détroit d’Ormuz. C’est un pas important dans la bonne direction pour nos compatriotes… pic.twitter.com/b1XgZrBv0m — Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) June 18, 2026 अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से जुड़े कार्यक्रम के दौरान समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद जब ट्रंप वर्साय से बाहर निकले, तो पत्रकारों ने उनसे पूछा, ‘क्या आपने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए?’ तो उन्होंने चिल्लाकर कहा, ‘हां, समझौता हो गया. मैंने वर्साय में इस पर हस्ताक्षर किए हैं.’ इसके बाद उन्होंने हवा में हस्ताक्षर करने का इशारा भी किया. pic.twitter.com/eMuer3F1Q2 — Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) June 18, 2026 अब सवाल उठा कि जिस महल में कभी जर्मनी को झुकने पर मजबूर किया गया था,

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पुराने घरों के बीच में क्यों होता था आंगन? वजह जानकर कहेंगे- हमारे पूर्वज कितने समझदार थे

Indian Traditional Homes: पुराने समय के घरों की बात होते ही सबसे पहले आंगन की तस्वीर आंखों के सामने उभर आती है. घर के बीचों-बीच बना यह खुला हिस्सा सिर्फ वास्तु या परंपरा का हिस्सा नहीं था, बल्कि इसके पीछे कई व्यावहारिक और वैज्ञानिक कारण भी छिपे थे. उस दौर में आंगन घर की पहचान माना जाता था और परिवार की रोजमर्रा की जिंदगी का केंद्र भी होता था. सुबह की पूजा-पाठ से लेकर शाम की बैठकी तक, आंगन घर के हर सदस्य को एक साथ जोड़ने का काम करता था. आज भले ही आधुनिक फ्लैट्स और अपार्टमेंट्स में आंगन लगभग गायब हो गया हो, लेकिन इसकी उपयोगिता आज भी कम नहीं हुई है. प्राकृतिक रोशनी और ताजी हवा का स्रोत पुराने समय में बिजली और आधुनिक वेंटिलेशन सिस्टम नहीं होते थे. ऐसे में घर के बीच में आंगन बनाने से सूरज की रोशनी आसानी से अंदर तक पहुंचती थी. साथ ही ताजी हवा का प्रवाह भी बना रहता था, जिससे घर ठंडा और आरामदायक महसूस होता था. यही वजह थी कि गर्मियों में भी ऐसे घर अपेक्षाकृत ठंडे रहते थे. परिवार को जोड़ने वाली जगह आंगन सिर्फ एक खुला हिस्सा नहीं था, बल्कि परिवार के लोगों के मिलने-जुलने की जगह भी था. शिशु यहीं स्पोर्ट्सते थे, बड़े-बुजुर्ग बैठकर बातचीत करते थे और स्त्रीएं घर के कई काम यहीं करती थीं. इससे परिवार के बीच आपसी जुड़ाव मजबूत बना रहता था. स्त्रीओं के लिए सुरक्षित और खुला स्थान पुराने दौर में स्त्रीओं का अधिकतर समय घर के अंदर ही बीतता था. ऐसे में आंगन उन्हें खुली हवा और प्राकृतिक वातावरण का अनुभव करने का अवसर देता था. यह घर के भीतर ही एक सुरक्षित और निजी जगह की तरह काम करता था. त्योहारों और समारोहों का केंद्र शादी-ब्याह, पूजा, त्योहार और अन्य पारिवारिक कार्यक्रमों का आयोजन अक्सर आंगन में ही किया जाता था. यह स्थान परिवार और रिश्तेदारों को एक साथ लाने का माध्यम बनता था. प्रकृति से जुड़ाव बनाए रखता था आंगन की सबसे खास बात यह थी कि इससे लोग प्रकृति के करीब महसूस करते थे. यहां बैठकर बारिश का आनंद लिया जा सकता था, खुले आसमान को निहारा जा सकता था और रात में तारों को देखा जा सकता था. यही वजह है कि पुराने घरों का आंगन सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि जीवनशैली का महत्वपूर्ण हिस्सा था. यह भी पढ़ें: बच्चों से बुजुर्गों तक, हर उम्र के लिए फायदेमंद हैं ये 5 आसान योगासन The post पुराने घरों के बीच में क्यों होता था आंगन? वजह जानकर कहेंगे- हमारे पूर्वज कितने समझदार थे appeared first on Naya Vichar.

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