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June 27, 2026

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भरत तिवारी को लगी थीं 5 गोलियां, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा, जानिए शरीर के किन-किन हिस्सों में मिले बुलेट के निशान

Bharat Tiwari Encounter Postmortem Report: भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आ गई है. रिपोर्ट के अनुसार, भरत तिवारी को कुल पांच गोलियां लगी थीं. सभी गोलियां शरीर के निचले हिस्से यानी दोनों जांघों और एक पैर में लगीं. रिपोर्ट सामने आने के बाद एक बार फिर पूरे मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है. पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्या सामने आया रिपोर्ट के मुताबिक पहली गोली बाईं जांघ के ऊपरी हिस्से में सामने से लगी थी. दूसरी गोली बाईं जांघ के बीच वाले हिस्से के अंदर की ओर लगी. तीसरी गोली दाईं जांघ के बीच वाले हिस्से के अंदर की तरफ लगी. चौथी गोली दाईं जांघ के बाहरी हिस्से में मिली. वहीं पांचवीं गोली बाएं पैर के बीच वाले हिस्से में पीछे से लगी थी. रिपोर्ट में सभी गोलियों के शरीर के निचले हिस्से में लगने की पुष्टि हुई है. पिता और भाई का नाम FIR से हटाया गया इस बीच भोजपुर पुलिस ने भरत तिवारी के पिता काशीनाथ तिवारी और भाई चंदन तिवारी को बड़ी राहत दी है. दोनों का नाम एफआईआर से हटा दिया गया है. पहले उन पर हथियार रखने और भरत तिवारी को संरक्षण देने का आरोप लगाते हुए विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया था. न्यायिक जांच जारी मामले की न्यायिक जांच भी शुरू हो चुकी है. गुरुवार को रिटायर्ड जज विनोद कुमार सिन्हा अपनी टीम के साथ भरत तिवारी के गांव पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने भरत के परिजनों से भी बातचीत की. इस दौरान भोजपुर के डीएम, एसपी और शाहाबाद रेंज के डीआईजी भी मौजूद रहे. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें CM सम्राट चौधरी ने क्या कहा एनकाउंटर के आठवें दिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस मामले पर अपनी पहली प्रतिक्रिया दी थी. उन्होंने कहा कि यदि जांच में कोई गड़बड़ी सामने आती है तो प्रशासन कार्रवाई करेगी. उन्होंने कहा कि मामले की जांच के लिए उच्चस्तरीय आयोग गठित किया गया है और रिपोर्ट के आधार पर उचित कदम उठाए जाएंगे. क्या है पूरा मामला 17 जून को भरत तिवारी फेसबुक लाइव पर आया था. उसने खुद को निर्दोष बताते हुए पुलिस के सामने सरेंडर करने की बात कही थी. पुलिस का दावा है कि सरेंडर के बाद उसने दोबारा हथियार उठाकर फायरिंग की कोशिश की. इसके बाद जवाबी कार्रवाई में उसे गोली लगी. अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट और न्यायिक जांच के बाद पूरे मामले पर सबकी नजर टिकी हुई है. Also Read: बिहार में अगले 48 घंटे मानसून दिखाएगा दम, IMD ने जारी किया भारी बारिश-आंधी का अलर्ट, जानें आपके जिले का हाल The post भरत तिवारी को लगी थीं 5 गोलियां, पोस्टमार्टम रिपोर्ट में खुलासा, जानिए शरीर के किन-किन हिस्सों में मिले बुलेट के निशान appeared first on Naya Vichar.

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झारखंड में बिजली विभाग का गजब कारनामा, रांची में सरेंडर मीटर का बिल चालू, चालू मीटर का बिल बंद

रांची से बिपिन सिंह की रिपोर्ट Jharkhand Electricity Billing: झारखंड की राजधानी में बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है. झारखंड बिजली वितरण निगम की ओर से केंद्रीयकृत कॉल सेंटर पर शिकायत दर्ज कराने की सुविधा उपलब्ध करायी गयी है, लेकिन इसका पर्याप्त लाभ उपभोक्ताओं को नहीं मिल रहा है. कोई बिल नहीं मिलने से परेशान है, तो किसी के यहां मीटर सरेंडर करने के बाद भी बिजली बिल भेजा जा रहा है. क्या कहती है रिपोर्ट निगम की कैंप रिपोर्ट में भी सर्वाधिक शिकायतें बिल से संबंधित दर्ज की गयी हैं. इनमें दर्ज 1616 शिकायतों में से बिल नहीं मिलने की 191, बिल सुधार की 416 और बिल से मोबाइल नंबर नहीं जुड़ने की 559 समस्या सामने आयी. इसके अलावा फोरम में आने के बाद भी उपभोक्ताओं की शिकायतों पर आदेश पालन नहीं होने के कई मामले सामने आ रहे हैं. कई शिकायतें अलग-अलग फोरम पर दर्ज कराने के बाद भी महीनों से लंबित हैं. अधिकारी भी नहीं सुनते उपभोक्ताओं की समस्या बिजली उपभोक्ता अपनी शिकायतों के लिए पहले निगम के कनीय अधिकारियों से संपर्क करते हैं. इसके बाद समाधान नहीं होने पर वरिष्ठ अफसरों को जानकारी देते हैं. इसके बावजूद अक्सर सुनवाई नहीं होती. बिल सुधार के कई मामले लंबित हैं. पदाधिकारी सुनवाई कर समाधान करने के लिए निचले क्रम पर बिजली अधिकारियों को मौके पर आदेश भी देते हैं, लेकिन शिकायतें नहीं सुलझ रही हैं. सरेंडर मीटर पर दनादन बिल रांची के कंज्यूमर नंबर एएनएजी 2424, एकाउंट नंबर 11223653253 के साथ अजीब मामला सामने आया है. यहां सरेंडर हो चुके मीटर का हर माह व्हाट्सऐप पर बिजली बिल भेजा जा रहा है. जिस दिन मीटर सरेंडर हुआ उस दिन मीटर की रिडिंग 23,597 रुपये थी, जबकि निगम के पास कंज्यूमर का सिक्योरिटी डिपॉजिट 27,800 रुपये था. कुल बकाया 25,968 रुपये था. इसके बावजूद एडजस्टमेंट नहीं हो सका. उपभोक्ता ने दो बार अधिकारियों को पत्र लिखा और व्यक्तिगत रूप से मिलकर भी गुहार लगायी, लेकिन सुनवाई नहीं हो सकी. चालू मीटर पर बिल नहीं मोरहाबादी इलाके में रहने वाले रिटायर्ड प्रोफेसर बिजली बिल नहीं आने से परेशान हैं. उनका कंज्यूमर नंबर 11221898522 है. इन्हें फरवरी 2025 से ही बिजली बिल नहीं आ रहा है. वह पार्ट पेमेंट करना चाहते हैं, ताकि बिल की राशि इतनी न बढ़े कि जमा करना मुश्किल हो जाये. एकमुश्त बिल आने के डर से उन्होंने अधिकारियों को पत्र लिखा और व्यक्तिगत रूप से मिलकर भी शिकायत की, लेकिन समाधान नहीं हो सका. उन्होंने कई बार निगम के अलग-अलग फोरम पर शिकायत की, पर सुनवाई नहीं हुई. बिलिंग एजेंसी का मनमाना रवैया रांची में बिजली की आपूर्ति और निगरानी बेहतर रहे इसके लिए छह डिवीजन तैयार किये गये हैं. डिवीजन में बिलिंग एजेंसी द्वारा मनमाना रवैया अपनाने पर निदेशक स्तर से नाराजगी दर्ज करायी गयी है. सभी एजेंसी को हाउसहोल्ड विजिट में सुधार के लिए ऊर्जा मित्रों को उपभोक्ता के घर जाकर सही बिल देने और समय पर भुगतान करने का निर्देश दिया गया था. इसे भी पढ़ें: केंद्र और राज्य की खींचतान में फंसे झारखंड के 2.5 लाख आदिवासी विद्यार्थी, साल भर से छात्रवृत्ति बंद 400 करोड़ से अधिक राजस्व संग्रह का लक्ष्य झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड की ओर से 400 करोड़ से अधिक राजस्व संग्रह का लक्ष्य तय है. रांची के छह डिवीजन में करीब 3.5 लाख स्मार्ट मीटर से 80 से 90 करोड़ रुपये प्रति माह लक्ष्य है. इनमें औद्योगिक उपभोक्ताओं (एलटीआइएस) का 95%, वाणिज्यिक उपभोक्ताओं (सीएस) का 80%, घरेलू उपभोक्ता (शहरी) का 65% तथा घरेलू उपभोक्ता (ग्रामीण) का 50% तक बिलिंग लक्ष्य है. इसे भी पढ़ें: झारखंड को मिलेंगे 1,042 नये प्राइमरी टीचर, सीएम हेमंत सोरेन 29 जून को सौंपेंगे नियुक्ति पत्र The post झारखंड में बिजली विभाग का गजब कारनामा, रांची में सरेंडर मीटर का बिल चालू, चालू मीटर का बिल बंद appeared first on Naya Vichar.

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‘बेटी की शादी तय करने चले थे, खुद का गठबंधन कर आए’, बागी नेताओं पर उद्धव का हमला

Maharashtra: उद्धव ठाकरे ने संजय देशमुख (बागी नेता) पर सीधा निशाना साधते हुए कहा, पार्टी टूटने से ठीक दो हफ्ते पहले, मैंने सांसदों की एक बैठक बुलाई थी. तब उन्होंने (संजय देशमुख) मुझसे कहा कि उन्हें अपनी बेटी का रिश्ता तय करना है, इसलिए वह वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल होंगे. मुझे क्या पता था कि वह अपनी बेटी का गठबंधन तय कर रहे हैं या खुद का ही ‘पार्टी गठबंधन’ पक्का कर रहे हैं. Yavatmal, Maharashtra: Shiv Sena (UBT) president Uddhav Thackeray says, “Poaching is being carried out even when there are no elections. They have chosen this time deliberately. We came for the Lok Sabha elections. Their slogan was ‘Ab ki baar 400 paar’ (This time, cross 400). I… pic.twitter.com/S9nl58rpp7 — ANI (@ANI) June 27, 2026 रात को फोन कर पूछा- रिश्ता पक्का हुआ क्या? उद्धव ठाकरे ने आगे कहा, मैंने उस रात उन्हें फोन भी किया और पूछा कि क्या काम हो गया? उन्होंने जवाब दिया- हां, हो गया. इसके ठीक दो दिन बाद हमें असलियत पता चली कि वहां कौन सा ‘गठबंधन’ फिक्स हुआ था. ठाकरे ने जनता से अपील करते हुए कहा कि ऐसे गद्दारों को जहां भी देखो, उनसे सवाल पूछो. उनसे पूछो कि जब पार्टी ने तुम्हें चुनकर भेजा, तो तुमने गद्दारी क्यों की? अगर मुझे पैसे का लालच होता, तो मैं भी समझौता कर लेता, लेकिन मैं भगवे ध्वज और अपनी वफादारी के साथ खड़ा रहा. ‘अबकी बार 400 पार’ के बदले दिया था ‘अबकी बार तड़ीपार’ का नारा बीजेपी और विपक्षी गठबंधन पर हमला तेज करते हुए ठाकरे ने कहा कि बिना चुनाव के भी नेताओं को तोड़ने (पोचिंग) का स्पोर्ट्स चल रहा है. यह सब एक सोची-समझी साजिश के तहत हो रहा है. उन्होंने लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा, उनका नारा था अबकी बार 400 पार’, लेकिन मैंने कहा था अबकी बार तड़ीपार. ये लोग देश का संविधान बदलना चाहते हैं. एक बार संविधान बदल गया, तो ये अपनी मनमर्जी करेंगे और तानाशाही लाएंगे. महाराष्ट्र जागेगा या सोता रहेगा? ठाकरे ने हुंकार भरते हुए कहा कि हम देश में गुलामी और तानाशाही के राज को रोकने के लिए मैदान में उतरे हैं. बाकी राज्य जब जागेंगे तब जागेंगे, लेकिन मेरा सवाल आपसे है – क्या महाराष्ट्र जागेगा या नहीं? यह लड़ाई आसान नहीं है. उन्होंने जनता से भावुक अपील करते हुए कहा कि अगला सांसद वही होना चाहिए जो भगवे ध्वज का सच्चा और कट्टर समर्थक हो. असली शिवसेना सिर्फ एक ही है और उसका भगवा झंडा भी एक ही है. ये भी पढ़ें: क्या बीजेपी के साथ फिर जाएंगे उद्धव ठाकरे? फ्लाइट में फडणवीस से हुई मुलाकात के बाद उठे सवाल The post ‘बेटी की शादी तय करने चले थे, खुद का गठबंधन कर आए’, बागी नेताओं पर उद्धव का हमला appeared first on Naya Vichar.

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पुणे मर्डर केस: रेस्क्यू टीम ने कहा- केतन का शव कुचली खोपड़ी के साथ हुआ था बरामद, सिया थी बिलकुल शांत

Pune Murder Case:पुणे के चर्चित केतन अग्रवाल की संदिग्ध मौत के मामले में रेस्क्यू टीम के सदस्य सुनील गायकवाड़ ने एएनआई न्यूज एजेंसी को बताया कि जब टीम घटनास्थल पर पहुंची तो केतन का शव गंभीर हालत में पड़ा था. उसके सिर पर गहरे घाव थे, खोपड़ी बुरी तरह से कुचला गया था और हाथ-पैरों पर भी कई चोटों के निशान मिले. पुलिस को सुबह मिली सूचना, शुरू हुआ रेस्क्यू ऑपरेशन सुनील गायकवाड़ ने बताया कि पुलिस स्टेशन को सुबह करीब 10:30 बजे घटना की सूचना मिली. इसके बाद रेस्क्यू टीम तुरंत लोहागढ़ किले के लिए रवाना हुई. दुर्गम पहाड़ी और घने जंगल के बीच शव तक पहुंचना चुनौतीपूर्ण था. टीम ने करीब दो घंटे तक सर्च अभियान चलाकर शव को सुरक्षित बाहर निकाला. #WATCH | Ketan Agarwal Murder Case | Lonavala, Maharashtra | Sunil Gaikwad, who was part of the rescue team, says, “On reaching Lohagad Fort, we discovered a deceased boy with severe head injuries, including a crushed skull, and multiple bruises on his limbs. He had died. We… pic.twitter.com/eWApjdylsK — ANI (@ANI) June 27, 2026 खड़ी चढ़ाई और जंगल के बीच शव निकालना बना चुनौती रेस्क्यू टीम के सदस्य सुनील गायकवाड़ ने बताया कि शव को खड़ी ढलान और जंगल के रास्ते बाहर लाने में काफी मशक्कत का सामना करना पड़ा.उबड़ खाबड़ रास्ते की वजह से शव को उठाकर लाना बेहद मुश्किल था. आखिरकार दोपहर 12:30 बजे तक अभियान पूरा हुआ और करीब 1:30 बजे शव को एंबुलेंस के हवाले कर दिया गया. सिया के व्यवहार ने खड़े किए कई सवाल रेस्क्यू टीम के सदस्य ने बताया कि शव निकालने के दौरान सिया भी मौके पर मौजूद थी. हालांकि, उन्होंने देखा कि वह अन्य लोगों की तुलना में काफी शांत दिखाई दे रही थी. जहां आसपास मौजूद लोग जोर-जोर से रो रहे थे और भावुक थे, वहीं सिया के चेहरे पर वैसी भावनाएं नजर नहीं आईं. उसके इस व्यवहार ने जांच एजेंसियों का ध्यान अपनी ओर खींचा है. भाई के बाद सिया के माता पिता से पूछताछ पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इस मामले में मुख्य आरोपी सिया गोयल के माता-पिता और भाई साहिल गोयल शनिवार को जांच अधिकारियों के बुलावे पर लोनावला ग्रामीण पुलिस स्टेशन पहुंचे. गोयल परिवार से लगातार दूसरे दिन पूछताछ की गई, जिससे साफ है कि पुलिस अब परिवार के बयानों और डिजिटल सबूतों की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है. यह भी पढ़े-पुणे मर्डर केसः सिया के भाई का दोस्त था चेतन, उसी ने कराई थी दोनों की मुलाकात The post पुणे मर्डर केस: रेस्क्यू टीम ने कहा- केतन का शव कुचली खोपड़ी के साथ हुआ था बरामद, सिया थी बिलकुल शांत appeared first on Naya Vichar.

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प्रणव मुखर्जी और पीएम मोदी के संबंध थे बहुत खास, शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बताया 2014 के चुनाव का किस्सा

Pranab Mukherjee PM Modi 2014 Election: 2014 में नरेंद्र मोदी पहली बार लोकसभा का चुनाव जीतकर हिंदुस्तान के प्रधानमंत्री बने थे. और अब तक हैं. तीन बार पीएम पद की शपथ ले चुके नरेंद्र मोदी देश के सबसे लंबे समय तक चुने हुए प्रधानमंत्री बनने का रिकॉर्ड भी बना चुके हैं. जब पहली बार उन्होंने जीत दर्ज की थी, तब देश के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी थे, उन्होंने ही पीएम मोदी को शपथ दिलाई थी. इसके बाद वह उनसे मिलने पहुंचे. इस दौरान हुई चर्चा का जिक्र पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी की बेटी शर्मिष्ठा मुखर्जी ने अपने एक हालिया लेख में किया है. उन्होंने बताया कि उनके पिता ने पीएम मोदी से 2014 के चुनाव की खासियत पूछी थी, जिस पर एक जवाब के बाद वह (पीएम मोदी) चुप हो गए, फिर खुद प्रणव मुखर्जी ने खुद इसे एक्सप्लेन किया.  इंडियन एक्सप्रेस में लिखे अपने आलेख में शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा, हिंदुस्तान के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले प्रधानमंत्री को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच मुझे अपने दिवंगत पिता प्रणब मुखर्जी की एक दिलचस्प बात याद आती है. यह उन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ऐतिहासिक जीत के बाद कही थी. उस समय बाबा हिंदुस्तान के 13वें राष्ट्रपति थे. अलग-अलग नेतृत्वक विचारधाराओं से होने के बावजूद दोनों के बीच बेहद अच्छे संबंध थे, जो शायद एक सच्चे लोकतंत्र की पहचान भी है. चुनाव नतीजे आने के बाद मोदी जी राष्ट्रपति भवन में बाबा से मिलने गए थे. बातचीत के दौरान बाबा ने उनसे चुनाव परिणाम के बारे में उनकी राय पूछी. मोदी जी ने जवाब दिया कि तीन दशक बाद किसी नेतृत्वक दल को पूर्ण बहुमत मिला है. बाबा ने अपने खास प्रोफेसर वाले अंदाज में फिर पूछा, ‘और क्या?’ जब मोदी जी कुछ नहीं बोले तो बाबा ने बताया कि 2014 का चुनाव लोकसभा चुनावों के इतिहास में अनोखा था, क्योंकि इसमें प्रधानमंत्री पद के लिए एक घोषित नया चेहरा सामने था. शर्मिष्ठा आगे लिखती हैं, भाजपा को जनता का मिला विशाल जनादेश केवल पार्टी के लिए नहीं था, बल्कि यह सीधे तौर पर नरेंद्र मोदी को हिंदुस्तान का प्रधानमंत्री चुनने का जनादेश था. इससे पहले के चुनावों में प्रधानमंत्री का चेहरा या तो माना जाता था लेकिन आधिकारिक रूप से घोषित नहीं किया जाता था, या फिर चुनाव के बाद निर्वाचित सांसद परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री चुनते थे, या गठबंधन की नेतृत्व के समीकरणों के आधार पर फैसला होता था. पीएम मोदी और पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी. फोटो- एक्स. पहली बार सांसद बनकर सीधे प्रधानमंत्री बने मोदी शर्मिष्ठा ने यह भी बताया कि 2014 से पहले नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय नेतृत्व में नए थे. हालांकि गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने अपनी मजबूत पहचान बनाई थी, लेकिन 2014 उनका पहला लोकसभा चुनाव था. उन्होंने इसे हिंदुस्तानीय नेतृत्व की दुर्लभ घटना बताया कि कोई व्यक्ति पहली बार सांसद बना और सीधे देश का प्रधानमंत्री बन गया. संसद भवन की सीढ़ियों पर पहुंचकर मोदी का झुककर प्रणाम करना भी उन्होंने एक भावनात्मक क्षण बताया. भाजपा की रणनीति और मोदी की छवि को बताया बड़ी वजह शर्मिष्ठा मुखर्जी ने कहा कि चुनावी जीत के पीछे कई कारण होते हैं. भाजपा का मजबूत संगठन, अलग-अलग सामाजिक समूहों तक पहुंच बनाने की रणनीति और समय के साथ अपनी रणनीति में बदलाव करने की क्षमता उसकी सफलता के बड़े कारण रहे. उन्होंने यह भी कहा कि नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत छवि भाजपा की सबसे बड़ी ताकतों में से एक बन गई है और कई लोग उन्हें एक ऐसे नेता के रूप में देखते हैं जिन्होंने मेहनत और संघर्ष के जरिए अपनी पहचान बनाई. ये भी पढ़ें:- मोदी प्रशासन फिलिस्तीन पर चुप क्यों? सोनिया गांधी ने 20 हजार बच्चों की मौत पर उठाए सवाल ‘ब्रांड मोदी’ को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता शर्मिष्ठा मुखर्जी ने लिखा कि किसी नेता की नीतियों से असहमति लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता और जनता से उनके जुड़ाव को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि 2019 और 2024 के चुनावों में भी यह प्रभाव दिखाई दिया. उनके शब्दों में, ‘आप मोदी को पसंद करें या नापसंद, लेकिन ब्रांड मोदी को नजरअंदाज करना आसान नहीं है.’ जनादेश के साथ न्याय करें पीएम मोदी; देश को और ऊंचा ले जाएं उनके आलेख के इमेज में एक कुर्सी है, जिसे हाथों ने उठा रखा है. पीछे जनता है. इस इमेज का कैप्शन भी बेहद खास है. शर्मिष्ठा ने लिखा है, बड़ी ताकत के साथ बड़ी जिम्मेदारी भी आती है. एक आम नागरिक के तौर पर मेरी प्रार्थना है कि वह जनता की ओर से मिले इस विशाल जनादेश के साथ पूरा न्याय करें और देश को और भी ऊंचाइयों तक लेकर जाएं. इन्हीं बातों से उन्होंने अपनी बातों का अंत भी किया है. The post प्रणव मुखर्जी और पीएम मोदी के संबंध थे बहुत खास, शर्मिष्ठा मुखर्जी ने बताया 2014 के चुनाव का किस्सा appeared first on Naya Vichar.

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पूड़ी-पकौड़े बनाने के बाद बचा तेल दोबारा इस्तेमाल करते हैं? पहले जान लें इसके बड़े नुकसान

Reused Cooking Oil: घरों में अक्सर तली-भुनी चीजें बनाने के बाद बचा हुआ तेल दोबारा इस्तेमाल कर लिया जाता है. कई लोगों को लगता है कि इससे तेल की बर्बादी नहीं होती और पैसे भी बच जाते हैं. लेकिन क्या आप जानते हैं कि बार-बार गर्म किया गया तेल धीरे-धीरे सेहत के लिए नुकसानदायक बन सकता है? विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे तेल में कई हानिकारक तत्व पैदा होने लगते हैं, जो शरीर पर बुरा असर डाल सकते हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बचा हुआ तेल कितने समय तक सुरक्षित रहता है और किन परिस्थितियों में उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. बार-बार गर्म करने पर तेल में क्या बदलाव आते हैं? जब किसी तेल को बार-बार तेज आंच पर गर्म किया जाता है, तो उसकी क्वालिटी धीरे-धीरे खराब होने लगती है. इस प्रक्रिया के दौरान तेल में कई ऐसे तत्व बनने लगते हैं जो शरीर के लिए हानिकारक माने जाते हैं. लंबे समय तक ऐसे तेल का सेवन करने से हृदय रोग, लिवर संबंधी समस्याएं और शरीर में सूजन जैसी दिक्कतों का खतरा बढ़ सकता है. बचा हुआ तेल कितने दिन तक इस्तेमाल करना चाहिए? यदि तेल का दोबारा उपयोग करना जरूरी हो, तो पहले उसे अच्छी तरह छान लेना चाहिए ताकि उसमें मौजूद खाने के जले हुए कण निकल जाएं. ये कण तेल को जल्दी खराब करने का काम करते हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक, बचा हुआ तेल 1 से 2 दिनों के भीतर इस्तेमाल कर लेना बेहतर माना जाता है. साथ ही इसे केवल एक बार दोबारा उपयोग करना अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता है. तेल को स्टोर करते समय किन बातों का रखें ध्यान? बचा हुआ तेल हमेशा किसी साफ और एयरटाइट कंटेनर में भरकर रखना चाहिए. इसे ठंडी और सूखी जगह पर स्टोर करना बेहतर होता है. खुले बर्तन में रखा तेल जल्दी ऑक्सीकृत हो सकता है, जिससे उसकी गुणवत्ता और खराब हो सकती है. कैसे पहचानें कि तेल खराब हो चुका है? कुछ संकेत ऐसे होते हैं जो बताते हैं कि तेल अब उपयोग के लायक नहीं रहा. यदि तेल से बासी या अजीब गंध आने लगे, उसका रंग जरूरत से ज्यादा गहरा हो जाए, उसमें झाग बनने लगे या वह सामान्य से ज्यादा गाढ़ा दिखाई दे, तो उसे तुरंत फेंक देना चाहिए. ऐसे तेल का सेवन स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है. दोबारा तेल इस्तेमाल करते समय बरतें सावधानी तेल का दोबारा उपयोग करते समय उसकी गंध, रंग और बनावट पर जरूर ध्यान दें. अगर तेल को लेकर जरा भी संदेह हो कि वह खराब हो चुका है, तो उसे इस्तेमाल करने से बचें. स्वस्थ रहने के लिए हमेशा ताजा और अच्छी गुणवत्ता वाले तेल का उपयोग करना सबसे बेहतर विकल्प माना जाता है. यह भी पढ़ें: बारिश में बच्चों को भूलकर भी न खिलाएं ये चीजें, बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा The post पूड़ी-पकौड़े बनाने के बाद बचा तेल दोबारा इस्तेमाल करते हैं? पहले जान लें इसके बड़े नुकसान appeared first on Naya Vichar.

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Madhubani: मुहर्रम जुलूस में तलवारबाजी के दौरान युवक के सिर में घुसी तलवार, घंटों चला ऑपरेशन

मधुबनी से उदय सिंह की रिपोर्ट Madhubani Muharram Talwar Bazi: मधुबनी जिले के राजनगर में मुहर्रम जुलूस के दौरान पारंपरिक तलवारबाजी का प्रदर्शन अचानक दर्दनाक हादसे में बदल गया. प्रदर्शन के दौरान एक युवक के हाथ से तलवार फिसल गई और जुलूस में शामिल 16 वर्षीय किशोर के सिर में जा घुसी. घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और जुलूस कुछ देर के लिए रोकना पड़ा. गंभीर रूप से घायल किशोर का कई घंटे तक ऑपरेशन चला, जिसके बाद डॉक्टरों ने तलवार निकालने में सफलता हासिल की. घायल युवक की तस्वीर, फोटो- नया विचार तलवारबाजी के दौरान हुआ हादसा घटना शुक्रवार देर शाम राजनगर बाजार के चट्टी रोड की है. जानकारी के अनुसार मुहर्रम जुलूस में पारंपरिक तलवारबाजी का प्रदर्शन चल रहा था. इसी दौरान एक युवक के हाथ से तलवार फिसल गई और सीधे जुलूस में शामिल एक किशोर के सिर में जा धंसी. प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार तलवार करीब ढाई इंच तक सिर में घुस गई, जिससे मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए. हादसे के बाद तलवारबाजी कर रहा युवक मौके से फरार हो गया. यह भी पढ़ें: शिकायत लेकर पहुंचने वाले फरियादी को मिला नींबू शरबत, बेतिया के नए एसपी की पहल जीत रही लोगों का दिल घायल किशोर की हुई पहचान घायल किशोर लहेरी बाजार का रहने वाला बताया जा रहा है. घटना के तुरंत बाद जुलूस में मौजूद लोगों ने उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, राजनगर पहुंचाया. प्राथमिक उपचार के बाद किया गया रेफर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. निरंजन जायसवाल और अन्य चिकित्सकों ने तलवार निकालने की कोशिश की, लेकिन तलवार गहराई तक धंसी होने के कारण उसे निकालना संभव नहीं हो सका. इसके बाद प्राथमिक उपचार देकर किशोर को सदर अस्पताल रेफर कर दिया गया. यह भी पढ़ें: Sitamarhi: इधर बेटी की डोली उठी उधर पिता ने दुनिया को कहा अलविदा, VC पर देखी थी शादी कई घंटे चले ऑपरेशन के बाद निकली तलवार परिजन बाद में घायल किशोर को सकरी स्थित रामशिला हॉस्पिटल ले गए. वहां डॉक्टरों ने कई घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद उसके सिर से तलवार सफलतापूर्वक निकाल दी. चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल किशोर की हालत स्थिर है और उसे आईसीयू में निगरानी में रखा गया है. हादसे के बाद दहशत का माहौल इस घटना के बाद जुलूस स्थल पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया. स्थानीय लोग पारंपरिक हथियार प्रदर्शन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और सावधानी बरतने की जरूरत पर जोर दे रहे हैं. The post Madhubani: मुहर्रम जुलूस में तलवारबाजी के दौरान युवक के सिर में घुसी तलवार, घंटों चला ऑपरेशन appeared first on Naya Vichar.

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घर आते ही मन हो जाता है उदास और चिड़चिड़ा? ये 4 वास्तु गलतियां हो सकती हैं कारण

Vastu Tips: दिनभर की भागदौड़, ऑफिस का काम और बाहर की टेंशन के बाद हर इंसान घर आकर सुकून चाहता है. घर को हम शांति और पॉजिटिव एनर्जी की जगह मानते हैं. लेकिन कई बार ऐसा होता है कि बाहर हम ठीक महसूस कर रहे होते हैं, पर जैसे ही घर में आते हैं, मूड अचानक खराब हो जाता है. मन में बिना किसी वजह के उदासी, घबराहट, गुस्सा या चिड़चिड़ापन आने लगता है. अगर आपके साथ भी ऐसा होता है, तो इसे सिर्फ थकान न समझें. वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर में मौजूद कुछ गलत चीजें या दोष आपकी मानसिक शांति को प्रभावित कर सकते हैं और नेगेटिव एनर्जी बढ़ा सकते हैं.  मुख्य द्वार पर अंधेरा या गंदगी होना वास्तु शास्त्र में घर के मुख्य द्वार को सबसे महत्वपूर्ण माना गया है, क्योंकि यहीं से खुशियां और सकारात्मक ऊर्जा घर में प्रवेश करती हैं. यदि आपके घर के मेन गेट पर पहुंचते ही आपको चप्पलों का ढेर, पुराना कबाड़ या अंधेरा दिखाई देता है, तो वहीं से नकारात्मकता आपके साथ घर के अंदर प्रवेश कर जाती है. इसलिए मुख्य द्वार को हमेशा साफ रखना जरूरी है. बंद या टूटी-फूटी चीजें कई लोगों की आदत होती है कि वे खराब हो चुके इलेक्ट्रॉनिक सामान, बंद घड़ियां या टूटे हुए बर्तनों को संभालकर रख लेते हैं. घर के कोनों में या बेड के नीचे कबाड़ जमा करके रखना वास्तु शास्त्र में अशुभ माना गया है. विशेषकर बंद घड़ियां समय के रुकने और तरक्की में बाधा का प्रतीक हैं. यह रुकी हुई ऊर्जा पैदा करती हैं, जिससे विचारों में भारीपन आता है और व्यक्ति बिना वजह चिड़चिड़ा हो सकता है. घर में धूप और ताजी हवा की कमी एक ऐसा घर जो हमेशा बंद रहता है और जहां प्राकृतिक रोशनी नहीं पहुंचती, वहां नकारात्मक ऊर्जा जल्दी घर बना लेती है. कई लोग दिन के समय भी खिड़कियों और दरवाजों को भारी पर्दों से ढककर रखते हैं. माना जाता है कि घर में रोशनी और ताजी हवा की कमी से उमस और भारीपन बढ़ता है, जो व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकता है और उदासी की भावना पैदा कर सकता है. बेडरूम और लिविंग रूम में गलत रंगों का चयन रंगों का हमारे मनोविज्ञान पर गहरा प्रभाव पड़ता है. वास्तु के अनुसार, घर की दीवारों के रंग हमारे मूड को प्रभावित करते हैं. लिविंग रूम या बेडरूम में बहुत ज्यादा गहरे, डार्क या चमकीले रंगों का इस्तेमाल करना अच्छा नहीं माना जाता है. घर के इन हिस्सों में हमेशा हल्के और शांत रंगों का चयन करना चाहिए. यह भी पढ़ें: Vastu Tips for Pooja Room: पूजा घर में भूलकर भी न रखें ये 5 चीजें, वरना बढ़ सकती है नेगेटिव एनर्जी The post घर आते ही मन हो जाता है उदास और चिड़चिड़ा? ये 4 वास्तु गलतियां हो सकती हैं कारण appeared first on Naya Vichar.

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चाणक्य नीति : इन 5 लोगों की भूलकर भी न करें मदद, वरना बाद में होगा पछतावा

Chanakya Niti Tips: आचार्य चाणक्य के अनुसार, हर किसी की मदद करना आपके लिए सही नहीं होता. कुछ लोग ऐसे होते हैं जिनकी भलाई करने के चक्कर में आप खुद बड़ी मुसीबत में फंस सकते हैं. आइए जानते हैं चाणक्य नीति के अनुसार वे कौन से 5 लोग हैं, जिनकी मदद करने से पहले आपको सौ बार सोचना चाहिए.  1. दुष्ट या बुरे स्वभाव वाले लोग (Chanakya Niti Tips) चाणक्य जी कहते हैं कि जो इंसान जन्म से या आदत से दुष्ट है, उसकी मदद कभी नहीं करनी चाहिए. दुष्ट व्यक्ति की तुलना सांप से की जा सकती है. आप सांप को कितना भी दूध पिला दें, वह अपना जहर उगलना नहीं छोड़ता. ठीक उसी तरह, एक बुरे इंसान की आप जितनी भी मदद कर लें, समय आने पर वह आपको ही नुकसान पहुंचाएगा. ऐसे लोगों की मदद करने का मतलब है खुद अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारना.  2. हमेशा दुखी और रोने वाले लोग  कुछ लोगों की आदत होती है कि उनके पास सब कुछ होते हुए भी वे हमेशा रोते रहते हैं. उन्हें अपनी जिंदगी में सिर्फ कमियां ही नजर आती हैं. चाणक्य नीति (Chanakya Niti) के अनुसार, ऐसे लोगों की मदद करने या उनके साथ रहने से आपकी अपनी पॉजिटिव एनर्जी भी खत्म हो जाती है. ऐसे लोग दूसरों की खुशी से भी जलते हैं. अगर आप इनकी मदद करेंगे, तो ये अपनी कमियों का दोष भी आप पर ही दे देंगे. इसलिए इनसे दूरी बनाना ही बेहतर है.  PC: चाणक्य की सिख (AI Generated) 3. जो अपनी मर्जी से मूर्ख बने रहना चाहते हैं आचार्य चाणक्य जी के अनुसार, जो व्यक्ति अज्ञानी है और अपनी मूर्खता को ही सही मानता है, उसे समझाने या उसकी मदद करने में अपना समय बर्बाद न (Chanakya Niti Tips) करें. ऐसे मूर्ख इंसान को सही बात बताने पर वह आपका ही दुश्मन बन जाएगा. वे आपकी भलाई को भी अपने खिलाफ एक साजिश समझेंगे.  PC: AI Generated 4. चरित्रहीन या गलत रास्ते पर चलने वाले लोग जो लोग समाज के नियमों को नहीं मानते, जिनका चरित्र ठीक नहीं है या जो गलत कामों (जैसे चोरी, सट्टेबाजी या नशा) में लिप्त हैं, उनकी मदद करने से आपको तुरंत पीछे हट जाना चाहिए. ऐसे लोगों की आर्थिक या किसी भी तरह की मदद करने का मतलब है कि आप उनके गलत कामों में उनका साथ दे रहे हैं.  5. एहसान फरामोश या मतलबी इंसान कुछ लोग सिर्फ तब तक आपके आगे-पीछे घूमते हैं जब तक उन्हें आपसे कोई काम होता है. काम निकलते ही वे आपको पहचानते तक नहीं. आचार्य चाणक्य के अनुसार, ऐसे मतलबी लोगों की मदद दोबारा कभी नहीं (Chanakya Niti Tips) करनी चाहिए. ये आपकी मजबूरी का फायदा उठाएंगे और जब आपको उनकी जरूरत होगी, तो सबसे पहले आपका साथ छोड़कर भागेंगे.  यह भी पढ़ें: ये 5 गलतियां इंसान को बना देती हैं गरीब, आज ही सुधार लें अपनी ये आदतें The post चाणक्य नीति : इन 5 लोगों की भूलकर भी न करें मदद, वरना बाद में होगा पछतावा appeared first on Naya Vichar.

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मोदी सरकार फिलिस्तीन पर चुप क्यों? सोनिया गांधी ने 20 हजार बच्चों की मौत पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने शनिवार (27 जून) को आर्टिकल शेयर करते हुए लिखा कि इंडिया धीरे-धीरे इजरायल के रणनीतिक प्रभाव के दायरे में जा रहा है, जबकि दुनिया का बड़ा हिस्सा उससे दूरी बना रहा है. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री की इजरायल यात्रा को इतिहास एक चौंकाने वाले रणनीतिक फैसले के रूप में देख सकता है. राहुल गांधी ने गाजा में फिलिस्तीनी बच्चों और आम नागरिकों पर हो रहे हमलों पर चिंता जतायी. उन्होंने आगे लिखा कि हिंदुस्तान की आत्मा और उसकी परंपरा यही कहती है कि हमें अपने फिलिस्तीनी भाइयों-बहनों के साथ खड़ा होना चाहिए. तो अब सवाल उठता है कि सोनिया गांधी ने आखिर इस आर्टिकल में ऐसा क्या लिखा कि राहुल गांधी को ये बातें कहनी पड़ी. तो आइए आपको बताते हैं. सोनिया गांधी ने गाजा के मामले में मोदी प्रशासन की लगातार चुप्पी पर सवाल उठाया है. उन्होंने कहा है कि हिंदुस्तान को फिलिस्तीनियों के समर्थन में स्पष्ट और मुखर रुख अपनाना चाहिए, साथ ही गाजा और वेस्ट बैंक में हो रही घटनाओं पर ग्लोबल ओपिनियन को देखते हुए रिएक्ट करना चाहिए. सोनिया ने एक इंग्लिस डेली के लिये लिखे लेख में संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय जांच आयोग की हालिया रिपोर्ट का हवाला दिया. साथ ही उन्होंने दावा किया कि गाजा में बच्चों को एक प्लान के तहत निशाना बनाया जा रहा है और वहां की मानवीय स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है. किस रिपोर्ट का जिक्र सोनिया गांधी ने किया? सोनिया गांधी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की स्वतंत्र जांच समिति ने अपनी रिपोर्ट में निष्कर्ष निकाला है कि गाजा में फिलिस्तीनियों के खिलाफ इजरायल की कार्रवाई नरसंहार जैसी है. उन्होंने बताया कि जून 2026 में आयोग ने फिर कहा कि इजरायल की नीतियों और सैन्य कार्रवाई का असर ऐसा है, जिससे गाजा में फिलिस्तीनियों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो रहा है और बच्चों तक को निशाना बनाया जा रहा है. सोनिया गांधी ने कहा कि इस आयोग की अध्यक्षता अब पूर्व न्यायाधीश एस. मुरलीधर कर रहे हैं और 94 पन्नों की इस रिपोर्ट को पढ़ना बेहद दर्दनाक और झकझोर देने वाला अनुभव है. यह भी पढ़ें : Gaza : मांगने गए खाना, मिली मौत, गाजा में सस्ती हुई लोगों की जान बच्चों को नुकसान पहुंचना कोई हादसा नहीं सोनिया गांधी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट में गाजा में हुई तबाही की बेहद दर्दनाक तस्वीर सामने आई है. उनके मुताबिक, रिपोर्ट में कहा गया है कि अब तक करीब 20 हजार बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि 44 हजार से ज्यादा शिशु घायल हुए हैं. इनमें से कई बच्चों को ऐसी चोटें लगी हैं, जिनके कारण वे पूरी जिंदगी दिव्यांग रह सकते हैं. उन्होंने कहा कि बच्चों को नुकसान पहुंचना कोई हादसा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा बताया गया है. सोनिया गांधी के अनुसार, मरने और घायल होने वालों में बड़ी संख्या बच्चों की है. गाजा के लगभग सभी स्कूल बर्बाद हो चुके हैं और अस्पतालों समेत स्वास्थ्य व्यवस्था को भी भारी नुकसान पहुंचा है, जिससे गर्भवती स्त्रीओं और नवजात बच्चों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं. यह भी पढ़ें : Israel Gaza Airstrike Video: गाजा फिर दहला, इजरायली हमलों में 60 की मौत, देखें तबाही का वीडियो मोदी प्रशासन ने रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी कांग्रेस नेता ने कहा कि कई वेस्टर्न कंट्री ने फिलिस्तीनी राष्ट्र को मान्यता दी है, कई देशों ने इजराइल के साथ अपने संबंधों की समीक्षा की है. साथ ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजराइल की कार्रवाई को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं, लेकिन हिंदुस्तान इस मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है. उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी प्रशासन ने न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) एस. मुरलीधर की अध्यक्षता वाले आयोग की रिपोर्ट पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. The post मोदी प्रशासन फिलिस्तीन पर चुप क्यों? सोनिया गांधी ने 20 हजार बच्चों की मौत पर उठाए सवाल appeared first on Naya Vichar.

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