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August 12, 2026

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बाजार की उठापटक के बीच SIP पर भरोसा कायम, जुलाई में ₹31,961 करोड़ का निवेश

शेयर बाजार में लगातार उतार-चढ़ाव के बावजूद म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले लोगों का भरोसा बना हुआ है. जुलाई 2026 में Systematic Investment Plan यानी SIP के जरिए निवेश बढ़कर ₹31,961 करोड़ पहुंच गया. जून में यह आंकड़ा ₹31,781 करोड़ था. यानी एक महीने में करीब ₹180 करोड़ की बढ़ोतरी हुई. यह अब तक के सबसे ऊंचे स्तरों में से एक है और बताता है कि बाजार की हलचल के बावजूद निवेशक नियमित निवेश से पीछे नहीं हट रहे हैं. SIP में निवेश क्यों बढ़ रहा है? SIP की खासियत यह है कि इसमें निवेशक हर महीने तय रकम म्यूचुअल फंड में लगाता है. इससे बाजार ऊपर हो या नीचे, निवेश जारी रहता है. जुलाई के आंकड़े बताते हैं कि निवेशकों ने बाजार की उठापटक के बीच भी इस तरीके पर भरोसा बनाए रखा है. जुलाई में SIP के जरिए आया निवेश ₹31,961 करोड़ रहा, जबकि जून में यह ₹31,781 करोड़ था. पिछले साल जुलाई में SIP के जरिए ₹28,464 करोड़ जमा हुए थे. यानी सालाना आधार पर भी SIP निवेश करीब 12% बढ़ा है. इक्विटी फंड में निवेश क्यों घटा? SIP के आंकड़ों में मजबूती के उलट इक्विटी म्यूचुअल फंड में निवेश कुछ कम हुआ है. जुलाई में इक्विटी फंड में ₹24,697 करोड़ का निवेश आया, जबकि जून में यह ₹28,973 करोड़ था. यानी महीने-दर-महीने करीब 15% की गिरावट रही. इसका मतलब यह नहीं है कि निवेशकों ने शेयर बाजार से पूरी तरह दूरी बना ली है. बल्कि आंकड़े दिखाते हैं कि लोग एकमुश्त निवेश के बजाय नियमित SIP के जरिए निवेश जारी रखना पसंद कर रहे हैं. ये भी पढ़ें: SBI की इस स्कीम में हर महीने ₹610 करें जमा, मैच्योरिटी पर पाएं ₹1 लाख म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का AUM कितना पहुंचा? जुलाई के अंत तक म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल AUM यानी Assets Under Management बढ़कर करीब ₹85.76 लाख करोड़ पहुंच गया. जून के अंत में यह ₹82.22 लाख करोड़ था. यानी एक महीने में इसमें करीब ₹3.53 लाख करोड़ की बढ़ोतरी हुई. वहीं, डेट फंड में जुलाई के दौरान ₹1.88 लाख करोड़ का निवेश आया. इसमें लिक्विड फंड का हिस्सा करीब ₹1.19 लाख करोड़, ओवरनाइट फंड का ₹40,413 करोड़ और मनी मार्केट फंड का करीब ₹21,300 करोड़ रहा. निवेशकों ने किन इक्विटी फंड्स को ज्यादा पसंद किया? इक्विटी कैटेगरी में भी निवेशकों की पसंद एक जैसी नहीं रही. जुलाई में स्मॉल-कैप फंड्स में करीब ₹7,768 करोड़ का निवेश आया, जो जून के ₹5,602 करोड़ से ज्यादा है. मिड-कैप फंड्स में भी करीब ₹6,792 करोड़ का निवेश हुआ. दूसरी ओर, लार्ज-कैप फंड्स में करीब ₹1,322 करोड़ की निकासी हुई. करीब 30 महीने बाद इस कैटेगरी में पहली बार निकासी देखने को मिली. निवेशकों के लिए इसका क्या मतलब है? जुलाई के आंकड़ों से एक बात साफ है कि बाजार में उतार-चढ़ाव के बावजूद SIP निवेशकों का भरोसा कायम है. हालांकि इक्विटी फंड में एकमुश्त निवेश घटा है, लेकिन हर महीने SIP के जरिए पैसा लगाने का सिलसिला जारी है. इससे पता चलता है कि कई निवेशक बाजार की छोटी अवधि की हलचल के बजाय नियमित निवेश पर ज्यादा भरोसा कर रहे हैं. ये भी पढ़ें: किराए का घर छोड़ते समय सिक्योरिटी डिपॉजिट में कटेगा कितना पैसा? जानिए क्या कहता है कानून The post बाजार की उठापटक के बीच SIP पर भरोसा कायम, जुलाई में ₹31,961 करोड़ का निवेश appeared first on Naya Vichar.

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शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 82 अंक लुढ़का, निफ्टी 30 पॉइंट डाउन

हिंदुस्तानीय शेयर बाजार ने बुधवार को कम जोर शुरुआत की. कारोबार शुरू होते ही BSE सेंसेक्स 81.87 अंक यानी 0.10% गिरकर 78,072.38 पर आ गया. वहीं, NSE निफ्टी 50 भी 29.70 अंक यानी 0.12% की गिरावट के साथ 24,442.00 पर रहा. बाजार पर ग्लोबल तनाव और महंगे कच्चे तेल का दबाव देखने को मिला. बाजार में गिरावट की वजह क्या है? घरेलू बाजार में बिकवाली के पीछे सबसे अहम वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमत और भू-नेतृत्वक तनाव है. ईरान और अमेरिका के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर स्थिति अभी साफ नहीं हुई है. इससे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता बनी हुई है और क्रूड की कीमतें ऊंची हैं. Geojit Investments के चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट वीके विजयकुमार के मुताबिक, बाजार फिलहाल ऊपर की तरफ ब्रेकआउट नहीं कर पा रहा है और एक दायरे में कारोबार कर रहा है. उन्होंने कहा कि ब्रेंट क्रूड के फिर 89 डॉलर के ऊपर जाने से बाजार में तेजी पर दबाव बना हुआ है. बुधवार को रिपोर्टिंग के समय ब्रेंट क्रूड 1.01% चढ़कर 90.02 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया. वहीं, क्रूड ऑयल 1.10 डॉलर बढ़कर 84.30 डॉलर प्रति बैरल रहा. क्या हिंदुस्तान की ग्रोथ बाजार को सहारा दे सकती है? कच्चे तेल और भू-नेतृत्वक तनाव से दबाव के बावजूद हिंदुस्तान की आर्थिक ग्रोथ को लेकर उम्मीद बनी हुई है. विजयकुमार ने बताया कि SBI की ताजा रिपोर्ट में FY27 के लिए हिंदुस्तान की GDP ग्रोथ 8% रहने का अनुमान लगाया गया है. यह RBI के 6.7% के अनुमान से ज्यादा है. अगर यह अनुमान सही साबित होता है, तो FY27 में कंपनियों की कमाई उम्मीद से बेहतर रह सकती है. इससे शेयर बाजार को आगे सपोर्ट मिल सकता है. इस बीच मिड-कैप और स्मॉल-कैप शेयरों में भी अच्छी गतिविधि देखने को मिल रही है. सोने और विदेशी बाजारों में क्या हुआ? सोने की कीमत भी बढ़त के साथ कारोबार कर रही थी. रिपोर्टिंग के समय गोल्ड 0.77% चढ़कर 4,403.84 डॉलर पर पहुंच गया. Motilal Oswal Financial Services के कमोडिटीज एनालिस्ट मानव मोदी के मुताबिक, निवेशक अमेरिका-ईरान समझौते की संभावना, तेल की कीमत और अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों पर नजर रख रहे हैं. अमेरिकी बाजार में भी कमजोरी रही. मंगलवार के कारोबार में Nasdaq 0.60% गिरकर 26,445.45 और S&P 500 0.32% टूटकर 7,728.20 पर बंद हुआ. ये भी पढ़ें: बाजार की उठापटक के बीच SIP पर भरोसा कायम, जुलाई में ₹31,961 करोड़ का निवेश एशियाई बाजारों का रुख कैसा रहा? एशिया के प्रमुख बाजारों में मिला-जुला कारोबार रहा. बाजार बदलाव जापान का Nikkei 225 +0.53% दक्षिण कोरिया का KOSPI +4.35% हांगकांग का Hang Seng -1.15% इस बीच पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने कहा कि अमेरिका और ईरान किसी समझौते के करीब हैं. हालांकि, ईरान का कहना है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज खोलने के लिए अमेरिका को नाकेबंदी हटाने और युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा देना होगा. यही अनिश्चितता क्रूड और ग्लोबल बाजारों के लिए अहम बनी हुई है. ये भी पढ़ें: ईरान-अमेरिका में समझौते की उम्मीद से थमी तेल की तेजी, ब्रेंट 89 डॉलर के करीब The post शेयर बाजार की कमजोर शुरुआत, सेंसेक्स 82 अंक लुढ़का, निफ्टी 30 पॉइंट डाउन appeared first on Naya Vichar.

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क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने जॉर्जिना रोड्रिगेज से की शादी, 10 साल बाद बने पति-पत्नी

Cristiano Ronaldo wedding: पुर्तगाल के दिग्गज फुटबॉलर क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने अपनी लंबे समय से पार्टनर और मॉडल-इन्फ्लुएंसर जॉर्जिना रोड्रिगेज के साथ शादी कर ली है. पुर्तगाली मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दोनों ने 11 अगस्त को पुर्तगाल के तटीय शहर कैस्केस में एक सिविल समारोह (प्रशासनी अधिकारी के सामने की गई कानूनी शादी) में शादी की. इस खास मौके पर उनके पांचों बच्चों के भी मौजूद रहने की बात कही जा रही है. View on Instagram रोनाल्डो ने सोशल मीडिया पर शेयर किया फोटो रोनाल्डो ने सोशल मीडिया पर एक तस्वीर साझा कर अपनी शादी की समाचार को सार्वजनिक किया. तस्वीर में दो हाथ नजर आ रहे हैं, जिनमें शादी की अंगूठियां दिखाई दे रही हैं. माना जा रहा है कि इनमें से एक हाथ रोनाल्डो और दूसरा जॉर्जिना का है. पोस्ट सामने आते ही सोशल मीडिया पर इसे लेकर जबरदस्त प्रतिक्रिया देखने को मिली. रिपोर्ट्स के मुताबिक, पोस्ट किए जाने के महज 30 मिनट के भीतर इसे 30 लाख से ज्यादा लाइक्स मिल चुके थे. शादी के बंधन में बंधे रोनाल्डो-जॉर्जिना क्रिस्टियानो रोनाल्डो और जॉर्जिना रोड्रिगेज करीब एक दशक से साथ हैं. दोनों की मुलाकात मैड्रिड में हुई थी. उस समय जॉर्जिना एक गुच्ची स्टोर में काम करती थीं, जबकि रोनाल्डो स्पेनिश क्लब रियल मैड्रिड के लिए स्पोर्ट्स रहे थे. समय के साथ दोनों का रिश्ता मजबूत होता गया और जॉर्जिना रोनाल्डो के निजी जीवन के साथ-साथ सार्वजनिक जीवन में भी लगातार उनके साथ नजर आती रहीं. दोनों ने अपने रिश्ते और परिवार की कई तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा की हैं. पिछले साल किया था सगाई का ऐलान रोनाल्डो और जॉर्जिना ने पिछले साल 11 अगस्त को अपनी सगाई की घोषणा की थी. जॉर्जिना ने उस समय सोशल मीडिया पर एक बड़ी अंगूठी वाली तस्वीर साझा की थी. उन्होंने स्पेनिश भाषा में लिखा था, जिसका अर्थ था-“हां, मैं करती हूं. इस जीवन में भी और अपनी सभी जिंदगियों में भी.” सगाई के बाद से ही दोनों की शादी को लेकर अटकलें लगाई जा रही थीं. अब करीब एक साल बाद उनके शादी करने की समाचार सामने आई है. पांचों शिशु भी समारोह में रहे मौजूद रोनाल्डो और जॉर्जिना के परिवार की बात करें तो दोनों के पांच शिशु हैं और रिपोर्ट्स के अनुसार, शादी के समारोह में शिशु भी शामिल हुए. रोनाल्डो अपने पारिवारिक जीवन को लेकर काफी निजी रहे हैं, हालांकि जॉर्जिना के साथ वह अक्सर परिवार की तस्वीरें सोशल मीडिया पर साझा करते हैं. जॉर्जिना ने रोनाल्डो के बच्चों की परवरिश में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और दोनों लंबे समय से एक परिवार के रूप में साथ नजर आते रहे हैं. करीब 1,000 गोल के बेहद करीब रोनाल्डो फुटबॉल के मैदान पर भी रोनाल्डो का शानदार करियर जारी है. पुर्तगाली स्टार ने अपने करियर में स्पोर्टिंग लिस्बन, मैनचेस्टर यूनाइटेड, रियल मैड्रिड, जुवेंटस और सऊदी अरब के अल-नस्र जैसे बड़े क्लबों के लिए स्पोर्ट्सा है. वह पुर्तगाल की राष्ट्रीय टीम के भी लंबे समय से प्रमुख खिलाड़ी रहे हैं. रोनाल्डो अपने करियर में करीब 1,000 गोल के आंकड़े तक पहुंचने के बेहद करीब हैं. उनकी गोल स्कोरिंग क्षमता ने उन्हें फुटबॉल इतिहास के सबसे सफल खिलाड़ियों में शामिल किया है. छठे वर्ल्ड कप में उतरकर बनाया रिकॉर्ड रोनाल्डो ने हाल ही में अपने छठे फीफा वर्ल्ड कप में भी हिस्सा लिया. पुरुष वर्ल्ड कप के इतिहास में छह अलग-अलग संस्करणों में स्पोर्ट्सने का रिकॉर्ड उनके नाम है, जिसे वह अर्जेंटीना के स्टार फुटबॉलर लियोनेल मेसी के साथ साझा करते हैं. फुटबॉल के मैदान पर लगातार रिकॉर्ड बनाने वाले रोनाल्डो के लिए अब निजी जिंदगी में भी एक बड़ा अध्याय जुड़ गया है. करीब 10 साल लंबे रिश्ते के बाद जॉर्जिना रोड्रिगेज के साथ उनकी शादी ने उनके प्रशंसकों के बीच भी खुशी की लहर पैदा कर दी है. सोशल मीडिया पर छाई शादी की समाचार रोनाल्डो की शादी की समाचार सामने आते ही सोशल मीडिया पर प्रशंसकों और फुटबॉल जगत में इसकी चर्चा तेज हो गई. शादी की आधिकारिक घोषणा के तौर पर साझा की गई अंगूठियों वाली तस्वीर ने कुछ ही समय में लाखों लोगों का ध्यान खींच लिया. रोनाल्डो और जॉर्जिना की प्रेम कहानी लंबे समय से उनके प्रशंसकों के बीच लोकप्रिय रही है. अब शादी के बाद दोनों के रिश्ते ने एक नए पड़ाव में प्रवेश किया है. इसे भी पढ़े- हिंदुस्तानीय स्पोर्ट्स जगत में 12 अगस्त क्यों है खास? जानिए इसके पीछे की पूरी कहानी The post क्रिस्टियानो रोनाल्डो ने जॉर्जिना रोड्रिगेज से की शादी, 10 साल बाद बने पति-पत्नी appeared first on Naya Vichar.

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10 साल, शराबबंदी और हजारों करोड़ का नुकसान… बिहार में आखिर क्या-क्या बदला? पूरी तस्वीर आंकड़ों में समझिए

Bihar Sharabbandi: बिहार में शराबबंदी को लागू हुए 10 साल हो चुके हैं. 1 अप्रैल 2016 को जब तत्कालीन नीतीश कुमार प्रशासन ने राज्य में पूर्ण शराबबंदी लागू की थी, तब इसे सिर्फ शराब की बिक्री रोकने वाला कानून नहीं बताया गया था. इसके पीछे एक महत्वपूर्ण सामाजिक उद्देश्य था. प्रशासन का तर्क था कि अगर शराब आसानी से उपलब्ध नहीं होगी तो घरेलू हिंसा कम होगी, स्त्रीओं के खिलाफ अपराध घटेंगे, परिवार की आर्थिक स्थिति सुधरेगी और शराब पर खर्च होने वाला पैसा बच्चों की पढ़ाई और घर की दूसरी जरूरतों पर खर्च होगा. शुरुआत में इस फैसले को स्त्रीओं का व्यापक समर्थन भी मिला. लेकिन 10 साल बाद तस्वीर को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं. क्या बिहार में शराबबंदी ने अपने उन सामाजिक लक्ष्यों को हासिल किया, जिनके लिए इसे लागू किया गया था? क्या शराब पीने वालों की संख्या वास्तव में कम हुई? क्या घरेलू हिंसा और स्त्रीओं के खिलाफ अपराध घटे? क्या परिवारों की आर्थिक स्थिति सुधरी? या फिर शराब की मांग खत्म होने के बजाय उसका रास्ता बदल गया और वैध शराब की जगह अवैध शराब, तस्करी और दूसरे नशीले पदार्थों ने ले ली? इन्हीं सवालों के बीच देश की प्रतिष्ठित आर्थिक नीति अनुसंधान संस्था नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च यानी NCAER की एक रिसर्च ने बिहार की शराबबंदी को लेकर बहस फिर तेज कर दी है. इंडिया पॉलिसी फोरम में पेश किए गए रिसर्च पेपर ‘बिहार के विकास का व्यापक परिप्रेक्ष्य: उपलब्धियां, अपूर्ण एजेंडा और आगे की राह’ में रत्ना सहाय के नेतृत्व में अर्थशास्त्रियों की टीम ने बिहार के विकास से जुड़े कई पहलुओं का स्टडी किया है. रिपोर्ट में शराबबंदी को लेकर शोधकर्ताओं ने बेहद महत्वपूर्ण सवाल उठाए हैं और प्रशासन को पूर्ण शराबबंदी खत्म कर नियंत्रित या विनियमित बिक्री की दिशा में जाने की सलाह दी है. लेकिन कहानी इतनी सीधी भी नहीं है. क्योंकि दूसरी तरफ NFHS के आंकड़े बताते हैं कि शराब की खपत में बड़ी गिरावट आई है. तो फिर असली तस्वीर क्या है? आइए आंकड़ों और दावों के जरिए समझते हैं कि बिहार में शराबबंदी के 10 साल में आखिर बदला क्या? पहले समझिए, शराबबंदी लागू करने की जरूरत क्यों महसूस हुई थी? 1 अप्रैल 2016 को बिहार में पूर्ण शराबबंदी लागू की गई. उस समय प्रशासन का सबसे बड़ा तर्क था कि शराब सिर्फ व्यक्ति की आदत नहीं, बल्कि परिवार और समाज की समस्या है. मान्यता यह थी कि शराब की वजह से घरेलू हिंसा बढ़ती है. शराब पर पैसा खर्च होने से परिवार की आर्थिक स्थिति बिगड़ती है और इसका सबसे ज्यादा असर स्त्रीओं और बच्चों पर पड़ता है. प्रशासन को उम्मीद थी कि शराब की उपलब्धता बंद होने के बाद परिवार की आय का इस्तेमाल दूसरी जरूरतों के लिए होगा. यही वजह थी कि शराबबंदी को सिर्फ कानून-व्यवस्था का मुद्दा नहीं, बल्कि स्त्री सुरक्षा, परिवार की आर्थिक स्थिति और सामाजिक सुधार का फैसला बताया गया. स्त्रीओं ने भी इस फैसले का बड़े स्तर पर समर्थन किया. लेकिन सवाल यही है कि 10 साल बाद उस समर्थन और उम्मीद का परिणाम क्या निकला? सांकेतिक फोटो घरेलू हिंसा का आंकड़ा क्या कहता है? NFHS के आंकड़े एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखते हैं. NFHS-4 में अत्यधिक शराब पीने वाले पतियों की 83.1 प्रतिशत पत्नियों ने शारीरिक या यौन हिंसा का अनुभव होने की बात कही थी. वहीं शराब नहीं पीने वाले पतियों के मामलों में यह आंकड़ा 31.7 प्रतिशत था. NFHS-5 में अत्यधिक शराब पीने वाले पतियों के मामलों में यह आंकड़ा 83.3 प्रतिशत रहा, जबकि शराब नहीं पीने वाले पतियों के मामलों में यह 33.8 प्रतिशत दर्ज किया गया. यानी शराब और घरेलू हिंसा के बीच संबंध जरूर दिखाई देता है. लेकिन दूसरी तरफ यह भी स्पष्ट है कि शराब न पीने वाले परिवारों में भी घरेलू हिंसा के मामले मौजूद हैं. इसलिए सवाल यह नहीं है कि शराब घरेलू हिंसा का कारण है या नहीं. सवाल यह है कि क्या शराब बंद करने भर से घरेलू हिंसा खत्म हो सकती है? NCAER की रिसर्च इसी बिंदु पर शराबबंदी की प्रभावशीलता पर सवाल खड़े करती है. गर्भावस्था के दौरान हिंसा में क्या हुआ? NFHS-5 के अनुसार बिहार में गर्भावस्था के दौरान हिंसा के मामलों में 2 प्रतिशत की कमी आई. तुलना करें तो उत्तर प्रदेश में यह कमी 0.7 प्रतिशत और पश्चिम बंगाल में 1.5 प्रतिशत रही. यानी इस मोर्चे पर बिहार में गिरावट पड़ोसी राज्यों की तुलना में ज्यादा रही. इस आंकड़े को शराबबंदी के सकारात्मक प्रभाव के रूप में भी देखा जा सकता है. लेकिन पूरी तस्वीर में अवैध शराब, अपराध और नशे के दूसरे रूपों की समस्या को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. शराब की जगह दूसरे नशे का खतरा शराबबंदी की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक यह भी है कि शराब की उपलब्धता कम होने के बाद कुछ लोग दूसरे नशीले पदार्थों की तरफ बढ़े. NCAER की रिसर्च में दावा किया गया है कि शराब की जगह सिंथेटिक ड्रग्स, नशीली गोलियों और कफ सिरप जैसे दूसरे नशीले पदार्थों का इस्तेमाल बढ़ा है. अगर ऐसा है तो यह प्रशासन के लिए और बड़ी चुनौती है. क्योंकि सवाल सिर्फ शराब रोकने का नहीं रह जाता. सवाल यह बन जाता है कि क्या शराब की जगह उससे भी ज्यादा खतरनाक नशे ने ले ली है? अवैध शराब का नेटवर्क अलग. नशीले पदार्थों का बाजार अलग. और इन दोनों के साथ अपराध तथा भ्रष्टाचार का खतरा अलग. यानी शराबबंदी ने नशे की समस्या खत्म करने के बजाय उसके स्वरूप को बदल दिया हो, यह चिंता अब बहस का बड़ा हिस्सा बन चुकी है. सम्राट चौधरी NDA के अंदर भी एक राय नहीं शराबबंदी के मुद्दे पर एनडीए के घटक दलों के बीच भी पूरी तरह एकमत स्थिति नहीं है. मोकामा से जदयू विधायक अनंत सिंह कई बार शराबबंदी खत्म करने की मांग उठा चुके हैं. उनका तर्क है कि शराबबंदी के कारण दूसरे प्रकार के नशे बढ़ रहे हैं, जो समाज के लिए ज्यादा नुकसानदायक साबित हो सकते हैं. केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी भी शराबबंदी के कानून को लेकर अलग रुख रखते हैं. उनका कहना है कि नशाबंदी का कानून ठीक है, लेकिन इसे लागू करने में पुलिस और प्रशासन के

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ईरान-अमेरिका में समझौते की उम्मीद से थमी तेल की तेजी, ब्रेंट 89 डॉलर के करीब

कच्चे तेल की कीमतों में पिछले कुछ दिनों से जारी तेजी पर बुधवार को थोड़ी राहत दिखी है. इसकी वजह ईरान और अमेरिका के बीच स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर संभावित समझौते की उम्मीद है. हालांकि, इस अहम समुद्री रास्ते से तेल की आवाजाही अभी भी बुरी तरह प्रभावित है. यही वजह है कि तेल की कीमतें अभी भी कई महीनों के ऊंचे स्तर के करीब बनी हुई हैं. ब्रेंट क्रूड करीब 89 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है. पिछले पांच कारोबारी सत्रों में इसकी कीमत करीब 12% चढ़ चुकी है. वहीं, अमेरिकी WTI क्रूड 83 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है. अमेरिका और ईरान के बीच क्या चल रहा है? पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अमेरिका और ईरान किसी तरह के समझौते के करीब पहुंच रहे हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि हालात शांति की तरफ बढ़ रहे हैं. पाकिस्तान दोनों देशों के बीच बातचीत में मदद कर रहा है. इसके अलावा, स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को लेकर ईरान और ओमान के बीच बातचीत भी आगे बढ़ी है. अल जजीरा ने कतर के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता के हवाले से बताया कि दोनों देशों के बीच बातचीत एडवांस स्टेज में पहुंच चुकी है. तेल बाजार में फिलहाल सबसे ज्यादा नजर इसी बात पर है कि हॉर्मुज से सामान्य आवाजाही कब शुरू होती है. समझौते की उम्मीद बढ़ते ही तेल की कीमतों पर दबाव आ सकता है, जबकि बातचीत रुकने की आशंका कीमतों को फिर ऊपर धकेल सकती है. हॉर्मुज से तेल की सप्लाई क्यों अहम है? अमेरिका के ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य मदद के साथ स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज से करीब 90 लाख बैरल तेल रोजाना गुजर रहा है. लेकिन इलाके में हालात अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हैं. स्थिति कितनी तनावपूर्ण है, इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी नौसेना के एक हेलिकॉप्टर ने ईरानी बंदरगाहों की नाकाबंदी तोड़ने की कोशिश कर रहे पनामा-फ्लैग वाले एक कार्गो जहाज पर दो हेलफायर मिसाइलें दागी. इस सप्लाई संकट का असर कच्चे तेल के साथ-साथ पेट्रोलियम प्रोडक्ट्स पर भी पड़ा है. इस साल अब तक क्रूड की कीमतें 40% से ज्यादा बढ़ चुकी हैं. रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी सप्लाई की परेशानी ने डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ाया है. ये भी पढ़ें: क्रूड ऑयल 2% से अधिक महंगा, US-ईरान तनाव से तेल सप्लाई बाधित होने की आशंका अमेरिका के तेल भंडार में कितना बदलाव आया? अमेरिका के तेल भंडार का आंकड़ा भी बाजार के लिए अहम है. अमेरिकन पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट के मुताबिक, पिछले हफ्ते अमेरिका में कच्चे तेल का स्टॉक 91 लाख बैरल बढ़ा है. अगर प्रशासनी आंकड़ों में भी इसकी पुष्टि होती है, तो यह फरवरी के बाद एक हफ्ते में सबसे बड़ी बढ़ोतरी होगी. ज्यादा स्टॉक का मतलब बाजार में सप्लाई बेहतर रहने की उम्मीद हो सकती है, जिससे तेल की कीमतों पर दबाव बन सकता है. आगे तेल की कीमतों पर क्या असर पड़ेगा? अमेरिकी एनर्जी इंफॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन का अनुमान है कि ईरान से जुड़े संघर्ष की वजह से तेल की सप्लाई में रोजाना करीब 6 लाख बैरल की कमी 2027 के अंत तक बनी रह सकती है. बुधवार को इंटरनेशनल एनर्जी एजेंसी और OPEC की मासिक रिपोर्ट भी आने वाली है. इनमें दुनिया में तेल की मांग और सप्लाई को लेकर नए अनुमान मिलेंगे. इसलिए आने वाले समय में तेल की कीमतों की दिशा तय करने में हॉर्मुज की स्थिति, अमेरिका के तेल भंडार और OPEC-IEA के अनुमान अहम रहेंगे. ये भी पढ़ें: ईरान पर ट्रंप की नई शर्त से बढ़ी टेंशन, फिर चढ़ा कच्चा तेल, ब्रेंट 88 डॉलर के करीब The post ईरान-अमेरिका में समझौते की उम्मीद से थमी तेल की तेजी, ब्रेंट 89 डॉलर के करीब appeared first on Naya Vichar.

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9124 पद पर SBI Clerk की भर्ती, ग्रेजुएट्स की बल्ले-बल्ले!

SBI Clerk Recruitment 2026: बैंक में नौकरी करना चाहते हैं तो आपके लिए काम की समाचार है. स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) ने जूनियर एसोसिएट्स (Customer Support & Sales) यानी SBI Clerk Recruitment 2026 के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है. ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया 11 अगस्त 2026 से शुरू हो गई है, जबकि उम्मीदवार 31 अगस्त 2026 तक आवेदन कर सकते हैं. SBI Clerk Recruitment 2026: यहां देखें जरूरी डेट्स महत्वपूर्ण तारीख विवरण ऑनलाइन आवेदन शुरू 11 अगस्त 2026 आवेदन की लास्ट डेट 31 अगस्त 2026 फीस भुगतान की लास्ट डेट 31 अगस्त 2026 प्री एग्जाम एडमिट कार्ड बाद में जारी होगा प्रीलिम्स परीक्षा तारीख बाद में घोषित होगी प्रीलिम्स रिजल्ट बाद में जारी होगा मेन्स एडमिट कार्ड और परीक्षा बाद में घोषित होगी SBI Clerk Recruitment 2026: कौन कर सकता है आवेदन? SBI Clerk भर्ती के लिए कैंडिडेट के पास हिंदुस्तान के किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से किसी भी स्ट्रीम में ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए. लास्ट सेमेस्टर में पढ़ रहे कैंडिडेट्स भी अप्लाई कर सकते हैं. जिस राज्य के लिए अप्लाई कर रहे हैं, वहां की स्थानीय भाषा की समझ होनी चाहिए. SBI नोटिस (PC- ऑफिशियल वेबसाइट) SBI Clerk Age Limit: यहां देखें उम्र सीमा आयु सीमा की गणना 1 अप्रैल 2026 के आधार पर की जाएगी. न्यूनतम आयु: 20 वर्ष. अधिकतम आयु: 28 वर्ष. आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों को नियमानुसार अधिकतम आयु सीमा में छूट मिलेगी. SBI Clerk Recruitment: आवेदन शुल्क SBI Clerk Recruitment 2026 में सामान्य, OBC और EWS कैटेगरी से आने वाले कैंडिडेट्स के लिए आवेदन शुल्क 750 रुपये निर्धारित किया गया है. वहीं SC, ST, PwBD और XS वर्ग के कैंडिडेट्स से आवेदन शुल्क नहीं लिया जाएगा. फीस का भुगतान डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या इंटरनेट बैंकिंग के जरिए किया जा सकता है. SBI Clerk Selection: कैसे होगा चयन? SBI Clerk भर्ती में कैंडिडेट्स का चयन प्रीलिम्स और मेन्स परीक्षा के आधार पर किया जाएगा. कैंडिडेट्स को दोनों चरणों की परीक्षा में सफल होना होगा. चयन प्रक्रिया से जुड़ी डिटेल के लिए नोटिफिकेशन देख लें. SBI Clerk Notice: यहां देखें नोटिस SBI Clerk Vacancy Notification.pdf SBI Clerk Salary: कितना मिलेगा वेतन? जूनियर एसोसिएट्स पद के लिए वेतनमान 24,050 रुपये से 64,480 रुपये तक है. इसमें निर्धारित नियमों के अनुसार वेतन वृद्धि और अन्य लाभ शामिल होंगे. SBI Clerk Recruitment 2026: आवेदन के लिए किन डॉक्यूमेंट्स की जरूरत? ऑनलाइन आवेदन के दौरान कैंडिडेट्स को निर्धारित फॉर्मेट में फोटो, साइन, बाएं हाथ के अंगूठे का निशान और हैंडरिटन डिक्लेरेशन अपलोड करना होगा. फोटो: 20-50 KB, JPEG/JPG साइन: 10-20 KB, JPEG/JPG. बाएं हाथ के अंगूठे का निशान: 10-20 KB. हैंडरिटन डिक्लेरेशन: 50-100 KB. SBI Clerk Recruitment 2026: कैसे करें अप्लाई? सबसे पहले SBI की आधिकारिक करियर वेबसाइट पर जाएं. Careers सेक्शन में जाकर Current Openings पर क्लिक करें. Junior Associates Recruitment 2026 के आवेदन लिंक को चुनें. New Registration पर क्लिक करके रजिस्ट्रेशन करें. नाम, मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी सहित जरूरी जानकारी भरें. रजिस्ट्रेशन नंबर और पासवर्ड से लॉगिन करें. आवेदन फॉर्म में व्यक्तिगत और शैक्षणिक जानकारी भरें. फोटो, साइन, अंगूठे का निशान और हैंडरिटन डिक्लेरेशन अपलोड करें. लागू होने पर आवेदन शुल्क का भुगतान करें. फॉर्म सबमिट करके आवेदन की कॉपी और ई-रसीद सेव कर लें. ये भी पढ़ें: SSC Stenographer में बढ़ गई पदों की संख्या, अब 1275 पदों पर होगी भर्ती The post 9124 पद पर SBI Clerk की भर्ती, ग्रेजुएट्स की बल्ले-बल्ले! appeared first on Naya Vichar.

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रात 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, जानिए कहां और कैसे दिखेगा यह दुर्लभ नजारा!

Surya Grahan 2026: आज बुधवार 12 अगस्त 2026 को साल का दूसरा सूर्य ग्रहण लगने जा रहा है. वैदिक ज्योतिष में सूर्य ग्रहण को महत्वपूर्ण खगोलीय घटना के साथ-साथ धार्मिक दृष्टि से भी विशेष माना जाता है. ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इस ग्रहण का संबंध कर्क राशि और आश्लेषा नक्षत्र से बताया जा रहा है. वहीं, श्रावण मास की अमावस्या होने के कारण स्नान, दान, पितृ तर्पण और भगवान शिव की उपासना का भी महत्व माना जाता है. हालांकि, ग्रहण से जुड़े ज्योतिषीय प्रभाव धार्मिक मान्यताओं पर आधारित हैं. कब लगेगा सूर्य ग्रहण? जानें पूरा समय हिंदुस्तानीय समय के अनुसार सूर्य ग्रहण 12 अगस्त की रात शुरू होगा और इसका प्रभाव 13 अगस्त की देर रात तक चलने की बात कही जा रही है. आपके दिए विवरण के अनुसार ग्रहण का प्रारंभ रात 9:04 बजे, मध्य रात्रि 11:16 बजे चरम और समाप्ति रात 1:28 बजे होगी. प्रकाशित करने से पहले स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि जरूर करें. क्या हिंदुस्तान में दिखाई देगा सूर्य ग्रहण? 12 अगस्त 2026 का पूर्ण सूर्य ग्रहण हिंदुस्तान से दिखाई नहीं देगा. NASA के अनुसार पूर्ण ग्रहण की पट्टी उत्तरी रूस से होकर ग्रीनलैंड, आइसलैंड और स्पेन तक जाती है, जबकि यूरोप, उत्तरी अमेरिका और उत्तर-पश्चिमी अफ्रीका के कुछ हिस्सों में आंशिक ग्रहण दिखाई देगा. हिंदुस्तान में लगेगा सूतक काल या नहीं? धार्मिक परंपरा के अनुसार सूतक काल उस स्थान पर माना जाता है जहां ग्रहण दिखाई देता है. चूंकि 12 अगस्त का सूर्य ग्रहण हिंदुस्तान में दिखाई नहीं देगा, इसलिए हिंदुस्तान में इसके सूतक काल को मान्य नहीं माना जाएगा. हालांकि, अलग-अलग परंपराओं और पंचांगों में नियमों में अंतर हो सकता है. ये भी पढ़ें: रिश्तों पर न लगने दें मनमुटाव का ‘ग्रहण’, आज साल के अंतिम सूर्यग्रहण पर पति-पत्नी साथ मिलकर करें ये सरल उपाय ग्रहण देखने वालों के लिए जरूरी सावधानी जहां सूर्य ग्रहण दिखाई दे रहा हो, वहां इसे देखने के लिए केवल सुरक्षित सोलर-व्यूइंग चश्मे या ISO 12312-2 मानक वाले सोलर फिल्टर का इस्तेमाल करें. सामान्य धूप के चश्मे सुरक्षित नहीं हैं. आंशिक ग्रहण के दौरान बिना उचित सुरक्षा के सीधे सूर्य को देखना आंखों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है. धार्मिक दृष्टि से क्या करें? आज श्रावण अमावस्या होने के कारण श्रद्धालु अपनी आस्था के अनुसार स्नान, दान, पितृ तर्पण और भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं. ग्रहण से जुड़े धार्मिक उपाय और ज्योतिषीय प्रभाव आस्था एवं परंपराओं पर आधारित हैं, जबकि सूर्य ग्रहण स्वयं सूर्य, चंद्रमा और पृथ्वी की स्थिति से बनने वाली वैज्ञानिक खगोलीय घटना है. The post रात 9 बजकर 04 मिनट से शुरू होगा सूर्य ग्रहण, जानिए कहां और कैसे दिखेगा यह दुर्लभ नजारा! appeared first on Naya Vichar.

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बिहार में पेपर लीक पर ED की एंट्री, TRE-3 से NEET तक 4 परीक्षाएं रडार पर, अब माफियाओं के पैसे और संपत्ति का होगा हिसाब

Bihar Paper Leak: बिहार में पेपर लीक और परीक्षा धांधली के खिलाफ जांच अब और तेज होने वाली है. बहाली परीक्षाओं में गड़बड़ी करने वाले परीक्षा माफियाओं पर शिकंजा कसने के लिए अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ED की भी एंट्री हो गई है. 2024 या उसके बाद बिहार में हुई बहाली परीक्षाओं में पेपर लीक, फर्जीवाड़े और दूसरी गड़बड़ियों की जांच ED ने अपने स्तर से शुरू कर दी है. आर्थिक अपराध इकाई यानी EOU ने ऐसी परीक्षाओं की सूची केंद्रीय एजेंसी को भेजी है. ED अब यह पता लगाएगी कि पेपर लीक के पीछे कौन लोग थे. इस पूरे नेटवर्क में कितनी रकम का लेन-देन हुआ. अपराध से कमाए गए पैसे को कहां लगाया गया. परीक्षा माफियाओं पर अब ED का शिकंजा बिहार प्रशासन ने परीक्षा माफियाओं पर कार्रवाई के लिए वर्ष 2024 में बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 लागू किया था. अब इस मामले में केंद्रीय एजेंसी की जांच भी जुड़ गई है. देश के चर्चित परीक्षा माफिया संजीव मुखिया से जुड़े मामले की जांच ED पहले से कर रही है. अब 2024 और उसके बाद हुई दूसरी परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामलों को भी जांच के दायरे में लाया जा रहा है. ED परीक्षा माफियाओं, उनके सहयोगियों और संगठित गिरोह के खिलाफ PMLA की धाराओं के तहत कार्रवाई करेगी. इस जांच में सिर्फ पेपर लीक तक मामला सीमित नहीं रहेगा. फोकस उस पैसे पर भी होगा, जो इस पूरे स्पोर्ट्स से कमाया गया. चार बड़ी परीक्षाएं ED के रडार पर 1. TRE-3, 2024 बिहार शिक्षक भर्ती परीक्षा यानी TRE-3 में पेपर लीक का मामला सामने आया था. इसके बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी. इस मामले में 296 लोगों को जेल भेजा गया. बाद में दोबारा परीक्षा कराई गई और बहाली की प्रक्रिया पूरी हुई. अब इस मामले में पेपर लीक से जुड़े आर्थिक लेन-देन की भी जांच ED कर सकती है. 2. NEET, 2024 NEET 2024 को लेकर भी बिहार में गड़बड़ी का मामला सामने आया था. कुछ सेंटरों पर परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं की जांच हुई. इस मामले में 45 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की गई. बाद में परीक्षा प्रक्रिया आगे बढ़ी. अब ED यह पता लगाने की कोशिश करेगी कि इस पूरे मामले में पैसे का लेन-देन किस तरह हुआ और कौन-कौन लोग इससे जुड़े थे. 3. CHO, 2025 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर यानी CHO भर्ती परीक्षा भी ED के रडार पर है. पेपर लीक का मामला सामने आने के बाद परीक्षा रद्द करनी पड़ी. इस मामले में 40 लोगों को जेल भेजा गया. अभी तक इस परीक्षा का दोबारा आयोजन नहीं हुआ है. अब जांच का एक अहम हिस्सा यह होगा कि पेपर लीक से जुड़े लोगों ने कितनी रकम कमाई और उसका इस्तेमाल कहां किया. 4. AEDO, 2026 AEDO भर्ती परीक्षा भी पेपर लीक के आरोपों के बाद जांच के घेरे में आई. मामला सामने आने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई. इस केस में 27 लोगों को जेल भेजा गया. फिलहाल परीक्षा दोबारा नहीं हुई है. ED अब इस मामले में भी आर्थिक नेटवर्क की जांच करेगी. बिहार की ताजा समाचारों के लिए यहां क्लिक करें ED की जांच में सबसे बड़ा फोकस क्या होगा? ED की जांच का सबसे अहम हिस्सा पैसे का पूरा ट्रेल होगा. यानी जांच एजेंसी यह पता लगाएगी कि पेपर लीक से जुड़े लोगों ने कितनी रकम कमाई. पैसा कहां से आया? किसके जरिए पहुंचा? कहां-कहां खर्च किया गया? और आखिर में पैसा किन लोगों तक पहुंचा? इसके अलावा पेपर लीक के पीछे काम कर रहे पूरे नेटवर्क की भी पड़ताल होगी. कौन मुख्य आरोपी था? कौन उसके संपर्क में था? किसने पेपर उपलब्ध कराया?किसने अभ्यर्थियों से पैसे लिए? पैसा किन लोगों के खातों या संपत्तियों तक पहुंचा? इन सभी सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे. संपत्तियों पर भी हो सकती है कार्रवाई जांच में अगर यह साबित होता है कि किसी आरोपी ने पेपर लीक या परीक्षा फर्जीवाड़े से कमाई की है, तो उसकी संपत्ति भी जांच के दायरे में आएगी. ED अपराध से अर्जित आय का पता लगाएगी. जरूरत पड़ने पर ऐसी संपत्तियों को जब्त करने की कार्रवाई भी हो सकती है. यानी अब परीक्षा माफियाओं के लिए खतरा सिर्फ गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगा. पेपर लीक से कमाया गया पैसा और उससे बनाई गई संपत्ति भी जांच के घेरे में होगी. Also Read: शराबबंदी के 10 साल, बिहार में आखिर क्या-क्या बदला? आंकड़ों से समझिए एक-एक बात The post बिहार में पेपर लीक पर ED की एंट्री, TRE-3 से NEET तक 4 परीक्षाएं रडार पर, अब माफियाओं के पैसे और संपत्ति का होगा हिसाब appeared first on Naya Vichar.

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JPSC Scam: 70 लाख में अफसर बनाने का खेल, सदस्यों और चेयरमैन पर लगा इंटरव्यू सेटिंग का आरोप

JPSC Scam, रांची : जेपीएससी परीक्षा घोटाले की जांच में महत्वपूर्ण मोड़ सामने आया है. आरोपी अभय तिवारी ने सीआईडी को दिये अपने बयान में जेपीएससी के तीन सदस्यों अजीता भट्टाचार्य, जमाल अहमद और अनीमा हांसदा की कथित भूमिका को लेकर कई चौंकानेवाले खुलासे किये हैं. अभय ने बताया है कि उसने जेपीएससी की परीक्षा लेनेवाली कंपनी टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह के माध्यम से उन सदस्यों तक अभ्यर्थियों की पैरवी कराई. अभय तिवारी ने आगे बताया कि जेपीएससी 11वीं से 13वीं सिविल सेवा पीटी का कथित रेट सामान्य वर्ग के लिए पांच लाख और एसटी-एससी के लिए दो-तीन लाख रुपये था, जबकि अंतिम परिणाम तक का रेट प्रति अभ्यर्थी 60 से 70 लाख रुपये बताया गया है. अभय तिवारी के मुताबिक, 11वीं से 13वीं जेपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में जमाल अहमद, अजीता भट्टाचार्य और अनीमा हांसदा के साथ-साथ जेपीएससी चेयरमैन से संपर्क कर उसके द्वारा आदित्य पांडेय नामक व्यक्ति से संपर्क कर अभ्यर्थी उपलब्ध कराये गये. उन अभ्यर्थियों को आदित्य पांडेय ने अजीता भट्टाचार्य के पीए ब्रजराम, टीडीपीएल के निदेशक रामवीर सिंह, जमाल अहमद, अनीमा हांसदा और चेयरमैन एल खियांग्ते तक पहुंचाया. कुल 7 अभ्यर्थियों को पहुंचाए गए लाभ बताया जा रहा है कि इस सेटिंग से कुल सात अभ्यर्थियों को लाभ पहुंचाया गया, जिसके एवज में प्रति अभ्यर्थी 15 लाख रुपये वसूले गये. आरोप है कि इंटरव्यू के पैसे अजीता भट्टाचार्य के पीए और मोरहाबादी निवासी ब्रजराम को दिये जाते थे, जबकि चेयरमैन एल खियांग्ते धर्मेंद्र नामक व्यक्ति के माध्यम से पैसा लेते थे. वहीं, जमाल अहमद पर हजारीबाग के कई दलालों के जरिये अभ्यर्थियों की सेटिंग कराने और इसकी पूरी जानकारी रामवीर सिंह को देने का आरोप लगाया गया है. बयान के अनुसार, ये तीनों सदस्य टीडीपीएल प्रमुख रामवीर सिंह पर इंटरव्यू के दौरान अभ्यर्थी के कोड को डी-कोड कराने का कथित दबाव बनाते थे. आरोप है कि चेयरमैन एल खियांस्ते इंटरव्यू से एक दिन पहले ही रामवीर सिंह से कोड डी-कोड करा लेते थे, ताकि इंटरव्यू के दिन संबंधित अभ्यधी को अपने या भट्टाचार्य के बोर्ड में ही आवंटित किया जा सके. ये भी पढ़ें: विधानसभा में सीएम हेमंत सोरेन का बड़ा ऐलान, 14वीं JPSC और दो बैकलॉग परीक्षाएं होंगी रद्द सीडीपीओ परीक्षा में भी वसूली का दावा अभय अभय तिवारी के मुताबिक, सीडीपीओ परीक्षा में भी टीडीपीएल की ओर से अभ्यर्थी उपलब्ध कराये गये. जिसका प्रति अभ्यर्थी रेट 10 लाख रुपये बताया गया, इसमें एक अभ्यर्थी रजक का इंटरव्यू बोर्ड चेयरमैन एल खियांगते के पास था, जिसमें रामवीर सिंह से बात होने के बाद 15 लाख रुपये चेयरमैन को दिये जाने का आरोप है. वहीं कथित तौर पर काजल हिंदुस्तानी का इंटरव्यू बोर्ड भट्टाचार्य के पास था, जिसके लिए उनके पीए ब्रजराम को 10 लाख रुपये दिये जाने का दावा किया गया है. अभय तिवारी के बयान के साथ-साथ रामवीर सिंह के कथित कबूलनामे का भी उल्लेख है. ये भी पढ़ें: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने विधानसभा परिसर में पत्रकारों से बातचीत की, कहा- युवाओं की आकांक्षाओं के अनुरूप आगे बढ़ रहा झारखंड The post JPSC Scam: 70 लाख में अफसर बनाने का स्पोर्ट्स, सदस्यों और चेयरमैन पर लगा इंटरव्यू सेटिंग का आरोप appeared first on Naya Vichar.

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आज का सूर्य ग्रहण भारत में नहीं आएगा नजर! जानिए क्या गर्भवती महिलाओं के लिए सूतक और नियम लागू होंगे?

Surya Grahan 2026: साल 2026 का प्रमुख सूर्य ग्रहण आज 12 अगस्त को लगेगा. यह एक खगोलीय घटना है, जिसमें चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर कुछ समय के लिए सूर्य के प्रकाश को ढक देता है. ग्रहण की पूर्ण अवस्था ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी रूस, स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगी. हिंदुस्तान इस ग्रहण के दृश्यता क्षेत्र में शामिल नहीं है. गर्भवती स्त्रीओं के लिए धार्मिक मान्यता क्या कहती है? हिंदुस्तानीय परंपरा में ग्रहण के समय गर्भवती स्त्रीओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इस दौरान भगवान का स्मरण, मंत्र जाप और सकारात्मक विचार करना शुभ माना जाता है. हालांकि, ग्रहण के कारण गर्भस्थ शिशु को नुकसान पहुंचता है, इसका कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है. कौन से मंत्रों का कर सकती हैं जाप? धार्मिक आस्था के अनुसार गर्भवती स्त्री ग्रहण के दौरान शांत मन से ‘ॐ नमः शिवाय’ का जाप कर सकती हैं. इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का जाप भी शुभ माना जाता है. अपनी श्रद्धा के अनुसार ‘ॐ सूर्याय नमः’ या गायत्री मंत्र का मानसिक जाप किया जा सकता है. मंत्र जाप को मन को शांत रखने और सकारात्मक वातावरण बनाने का धार्मिक उपाय माना जाता है. ग्रहण के दौरान क्या करना चाहिए? यदि गर्भवती स्त्री धार्मिक मान्यताओं का पालन करना चाहती हैं तो घर में रहकर मंत्र जाप, ध्यान या भगवान का स्मरण कर सकती हैं. पर्याप्त पानी पीना, समय पर भोजन करना और आराम करना ज्यादा जरूरी है. किसी भी तरह की कमजोरी या परेशानी महसूस होने पर आराम करें और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लें. ये भी पढ़ें: सूर्य ग्रहण का राशिफल: आज बदलेगी ग्रहों की चाल, जानें मेष से मीन तक का ऐसा रहेगा हाल क्या ग्रहण देखना गर्भवती स्त्री के लिए खतरनाक है? हिंदुस्तान में यह ग्रहण दिखाई नहीं देगा, इसलिए यहां रहने वाली गर्भवती स्त्रीओं के लिए ग्रहण देखने से जुड़ा प्रत्यक्ष आंखों का जोखिम नहीं है. सामान्य स्थिति में सूर्य को सीधे देखना आंखों के लिए नुकसानदायक हो सकता है, चाहे व्यक्ति गर्भवती हो या नहीं. इसलिए दिखाई देने वाले सूर्य ग्रहण को बिना उचित सोलर फिल्टर के सीधे नहीं देखना चाहिए. ये भी पढ़ें: ग्रहण का गर्भस्थ शिशु पर क्या पड़ता है असर? जानें धार्मिक आस्था, मान्यता और इससे बचने के पीछे की असली वजह मान्यता और विज्ञान को अलग-अलग समझें सूर्य ग्रहण के दौरान चाकू न चलाने, कुछ न खाने या गर्भस्थ शिशु को नुकसान होने जैसी कई मान्यताएं प्रचलित हैं, लेकिन इनके पीछे वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं. गर्भवती स्त्री के लिए इस दौरान सबसे जरूरी है कि वह पर्याप्त पोषण, आराम और चिकित्सकीय सलाह का ध्यान रखे. धार्मिक आस्था के अनुसार मंत्र जाप करना मानसिक शांति के लिए किया जा सकता है, लेकिन इसे चिकित्सकीय सुरक्षा का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए. The post आज का सूर्य ग्रहण हिंदुस्तान में नहीं आएगा नजर! जानिए क्या गर्भवती स्त्रीओं के लिए सूतक और नियम लागू होंगे? appeared first on Naya Vichar.

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