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नालंदा में छह साल में 1,994 मौतें, अंधेरे में खड़े ट्रक-ट्रैक्टर बन रहे जानलेवा, दोपहिया चालक सबसे ज्यादा प्रभावित

बिहारशरीफ से कंचन की रिपोर्ट
Bihar Sharif News : नालंदा जिले में सड़क दुर्घटनाएं अब केवल यातायात की समस्या नहीं, बल्कि जनसुरक्षा का गंभीर मुद्दा बन चुकी हैं. जिले में पिछले छह वर्षों (2020-2025) के दौरान 2,589 सड़क हादसों में 1,994 लोगों की जान चली गई. यानी औसतन हर वर्ष 431 दुर्घटनाएं और 332 मौतें हुईं. आंकड़े बताते हैं कि जिले में लगभग हर दूसरे दिन एक व्यक्ति सड़क हादसे में जान गंवा रहा है. सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों के अनुसार नालंदा में प्रतिवर्ष होने वाली कुल दुर्घटनाओं में करीब 4 से 5 प्रतिशत हादसे राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर बिना पार्किंग लाइट, इंडिकेटर अथवा रिफ्लेक्टर के खड़े वाहनों के कारण होते हैं. एनएच-20, एनएच-82, एनएस-33 और पटना-सरमेरा मार्ग पर रात के समय सड़क किनारे खड़े ट्रक, ट्रैक्टर और अन्य भारी वाहन दोपहिया चालकों के लिए मौत का जाल बन रहे हैं. अंधेरे में इन वाहनों की पहचान नहीं होने के कारण बाइक और स्कूटी चालक सीधे उनसे टकरा जाते हैं.

2025 में फिर बढ़ा हादसों का ग्राफ

जिला पुलिस के आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2020 में 484 सड़क दुर्घटनाओं में 377 लोगों की मौत हुई थी. वर्ष 2021 में 437 दुर्घटनाओं में 367, वर्ष 2022 में 424 दुर्घटनाओं में 349 तथा वर्ष 2023 में 368 दुर्घटनाओं में 289 लोगों की जान गई. वर्ष 2024 में 398 हादसों में 286 मौतें दर्ज की गईं. हालांकि 2025 में एक बार फिर दुर्घटनाओं का ग्राफ बढ़ गया और 478 हादसों में 326 लोगों की मौत हो गई. सड़क सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में होने वाली कई दुर्घटनाएं रिकॉर्ड तक नहीं पहुंच पातीं, इसलिए वास्तविक संख्या इससे अधिक हो सकती है.

हर 100 दुर्घटनाओं पर 77 मौतें

नालंदा के सड़क हादसों की सबसे चिंताजनक तस्वीर मौतों का अनुपात है. छह वर्षों में 2,589 दुर्घटनाओं में 1,994 लोगों की मौत हुई, यानी हर 100 हादसों पर लगभग 77 लोगों की जान चली गई. विशेषज्ञों के अनुसार हेलमेट नहीं पहनना, सीट बेल्ट का उपयोग नहीं करना, तेज रफ्तार, गलत दिशा में वाहन चलाना, सड़क किनारे खड़े वाहनों से टकराव तथा दुर्घटना के बाद समय पर इलाज नहीं मिलना इसकी प्रमुख वजहें हैं.

एनएच-20 और एनएच-82 सबसे संवेदनशील

बिहारशरीफ-पटना मार्ग (एनएच-20) और राजगीर-गया मार्ग (एनएच-82) जिले के सबसे संवेदनशील मार्गों में शामिल हैं. इन सड़कों पर रात में खड़े भारी वाहनों से दुर्घटना की आशंका सबसे अधिक रहती है. इसके अलावा एनएस-33 (जहानाबाद-बिहारशरीफ मार्ग) और पटना-सरमेरा मार्ग पर भी लगातार गंभीर हादसे हो रहे हैं. बिहारशरीफ शहर के बाजार क्षेत्रों में अव्यवस्थित पार्किंग और सड़क किनारे वाहनों के खड़े रहने से यातायात बाधित होने के साथ दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा है.

पांच माह में आधा दर्जन बड़े हादसे

पिछले पांच महीनों के दौरान जिले में कई ऐसी दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें दो या उससे अधिक लोगों की मौत हुई. चंडी थाना क्षेत्र के सालेहपुर मोड़ के पास हुई दुर्घटना में दो इंजीनियरिंग छात्रों की जान चली गई. धरमपुर में पांच वाहनों की टक्कर में एक व्यक्ति की मौत हुई. दीपनगर थाना क्षेत्र में ट्रक और ऑटो की भिड़ंत में तीन छात्रों की जान गई. वहीं 17 जनवरी 2026 को जहानाबाद-बिहारशरीफ मार्ग पर हुए भीषण सड़क हादसे में तीन लोगों की मौत ने सड़क सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे.

जून और दिसंबर सबसे खतरनाक महीने

छह वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि जून और दिसंबर महीने सड़क हादसों के लिहाज से सबसे अधिक संवेदनशील रहे हैं. वर्ष 2020 में दिसंबर में 57 दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 53 लोगों की मौत हुई थी. जून 2020 में 52 हादसों में 41 लोगों की जान गई थी. वर्ष 2025 में भी मई, जून और दिसंबर सबसे अधिक दुर्घटनाओं वाले महीने रहे. विशेषज्ञों के अनुसार कोहरा, कम दृश्यता, त्योहारों और शादी-विवाह के मौसम में बढ़ी आवाजाही तथा ओवरस्पीडिंग दुर्घटनाओं का जोखिम बढ़ा देती है.

आईआरएडी से होगी वैज्ञानिक निगरानी

दुर्घटनाओं के कारणों की पहचान और रोकथाम के लिए नालंदा जिले में इंटीग्रेटेड रोड एक्सीडेंट डाटाबेस (आईआरएडी) प्रणाली लागू की गई है. इसके तहत पुलिस मोबाइल एप के माध्यम से दुर्घटनाओं का पूरा विवरण दर्ज करती है. बाद में विशेषज्ञ संस्थान इन आंकड़ों का विश्लेषण कर दुर्घटना-प्रवण स्थलों की पहचान करते हैं और सुधारात्मक उपाय सुझाते हैं.

क्या कहते हैं अधिकारी

मो. खुर्शीद आलम, डीएसपी (यातायात), नालंदा ने कहा कि बेगूसराय की सड़क दुर्घटना बेहद दुखद थी. उस घटना से सबक लेते हुए नालंदा में सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष अभियान चलाया जा रहा है. राष्ट्रीय राजमार्गों और प्रमुख सड़कों पर दिन-रात पुलिस पेट्रोलिंग बढ़ाई गई है तथा अवैध पार्किंग करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है. वर्ष में तीन या उससे अधिक दुर्घटनाओं वाले मार्गों और ब्लैक स्पॉट की पहचान कर संबंधित सड़क निर्माण एजेंसियों को सुधारात्मक उपाय करने का निर्देश दिया गया है, ताकि सड़क हादसों में कमी लाई जा सके.

छह वर्षों का रिकॉर्ड

वर्ष दुर्घटनाएं मौतें
2020 484 377
2021 437 367
2022 424 349
2023 368 289
2024 398 286
2025 478 326
कुल 2,589 1,994

केवल चालान नहीं, स्थायी समाधान जरूरी

विशेषज्ञों का मानना है कि सड़क दुर्घटनाओं पर प्रभावी नियंत्रण के लिए केवल चालान अभियान पर्याप्त नहीं है. राष्ट्रीय राजमार्गों और मुख्य मार्गों पर अवैध पार्किंग के खिलाफ सख्त कार्रवाई, सभी भारी वाहनों पर रिफ्लेक्टर और पार्किंग लाइट की अनिवार्यता, ब्लैक स्पॉट का सुधार, बेहतर प्रकाश व्यवस्था और दुर्घटना के बाद त्वरित चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना समय की मांग है. तेजी से विकसित हो रहे नालंदा जिले में सड़क सुरक्षा अब प्रशासन और समाज दोनों के लिए सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुकी है.

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विनोद झा
संपादक नया विचार

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