प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के मामले में 25 वर्षीय एक युवती के खिलाफ नोएडा पुलिस ने FIR दर्ज की है. मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस ने हिंदुस्तानीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है. इस कार्रवाई के बाद सोशल मीडिया पर इस सवाल को लेकर चर्चा की जा रही है कि क्या हिंदुस्तान में किसी को गाली देने या किसी नेता के खिलाफ अपमानजनक भाषा इस्तेमाल करने पर जेल हो सकती है? कई यूजर इसको लेकर कानून के बारे में भी जानना चाह रहे हैं.
पहले समझिए नोएडा में क्यों दर्ज हुआ केस?
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, 20 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के दौरान प्रधानमंत्री के खिलाफ कथित आपत्तिजनक टिप्पणी किए जाने के आरोप में नोएडा पुलिस ने एक युवती के खिलाफ जीरो FIR दर्ज किया है.
यानी कानून सिर्फ शब्द नहीं देखता, बल्कि यह भी देखता है कि वे किस संदर्भ में बोले गए, उनका उद्देश्य क्या था और उनका असर क्या पड़ा. यदि कोई मामला अदालत तक पहुंचता है, तो न्यायालय कई पहलुओं पर विचार करता है. जैसे
- बयान किस परिस्थिति में दिया गया?
- उसका उद्देश्य क्या था?
- क्या उससे किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा को वास्तविक नुकसान पहुंचा?
- क्या उससे सार्वजनिक शांति भंग होने की संभावना थी?
- क्या बयान संविधान द्वारा संरक्षित अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के दायरे में आता है?
इन सभी तथ्यों के आधार पर ही तय होता है कि मामला आपराधिक अपराध बनता है या नहीं.
कुल मिलाकर ऐसे मामलों में कार्रवाई इस बात पर निर्भर करती है कि कथित बयान का संदर्भ क्या था, उसका उद्देश्य क्या था, उससे सार्वजनिक व्यवस्था या किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर क्या प्रभाव पड़ा और संबंधित कानून की सभी आवश्यक शर्तें पूरी होती हैं या नहीं. अंतिम निर्णय हमेशा अदालत ही करती है. इसलिए, अश्लीलता और गाली से संंबंधित सवाल का जवाब ‘हां’ या ‘नहीं’ में नहीं दिया जा सकता. क्योंकि हिंदुस्तानीय कानून हर अपमानजनक शब्द को अपराध नहीं मानता. यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह टिप्पणी किस परिस्थिति में की गई, उसका उद्देश्य क्या था और उससे क्या परिणाम निकल सकते थे.
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