Hot News

Explained: कभी केजरीवाल को जिताया, अब देंगे टक्कर! क्यों जन सुराज का दिल्ली डेब्यू कराना चाह रहे हैं प्रशांत किशोर?

चुनाव रणनीतिकार से राजनेता बने प्रशांत किशोर ने 2 अक्टूबर 2024 को पटना के गांधी मैदान में बड़ी रैली की. बिहार के अलग-अलग इलाकों से जुटे समर्थकों के सामने जन सुराज पार्टी लॉन्च करने का ऐलान किया था. जन सुराज की लॉन्चिंग के समय पीके का दावा था कि बिहार में पार्टी के एक करोड़ कार्यकर्ता हैं. बिहार चुनाव में पीके के दावे की पोल खुल गई और पार्टी का प्रदर्शन निराशाजनक रहा. बीजेपी अध्यक्ष नितिन नवीन की सीट बांकीपुर पर जीत के बाद प्रशांत किशोर की नजर अब दिल्ली पर है. बांकीपुर की जीत के करीब 55 दिन बाद दिल्ली में जन सुराज पार्टी एक बड़ी बैठक आयोजित कर रही है.

इस बैठक में दिल्ली की नेतृत्व में जन सुराज की एंट्री का प्रस्ताव पेश किया जा सकता है. यह भी चर्चा है कि प्रशांत किशोर इस प्रस्ताव का अनुमोदन कर देंगे और जन सुराज की दिल्ली इकाई के गठन पर औपचारिक रूप से मोहर लग जाएगी. हालांकि, जन सुराज ने दिल्ली प्लान पर आधिकारिक रूप से कोई ऐलान नहीं किया है. ऐसे में सवाल उठता है कि प्रशांत किशोर आखिर दिल्ली की नेतृत्व में जन सुराज का डेब्यू क्यों कराना चाह रहे हैं? बिहार की 238 सीटों पर 3.44 फीसद वोट हासिल कर एक भी सीट नहीं जीत सकने वाली पार्टी क्या दिल्ली में कमाल दिखा पाएगी?

जन सुराज के दिल्ली डेब्यू की चर्चा क्यों?

जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर इन दिनों दिल्ली में हैं. उनके सम्मान में दिल्ली में एक कार्यक्रम आयोजित हो रहा है. दिल्ली में रहने वाले प्रशांत किशोर के समर्थक यह मांग कर रहे हैं कि जन सुराज को दिल्ली में भी संगठन का गठन करना चाहिए. इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि संभवत: इसको लेकर प्रस्ताव भी पेश किया जा सकता है. अगर जन सुराज की दिल्ली इकाई का गठन होता है तो बिहार के बाहर यह संगठन विस्तार की दिशा में पहला कदम होगा.

प्रशांत किशोर के लिए दिल्ली में संगठन खड़ा करना चुनौतीपूर्ण होगा: एक्सपर्ट

नेतृत्वक विश्लेषक रशीद किदवई ने नया विचार डिजिटल से बातचीत में कहा कि प्रशांत किशोर पहले चुनावी रणनीतिकार के तौर पर सफल रहे हैं और अब खुद नेतृत्व में हैं. नेतृत्वक दल बनाने के बाद प्रशांत किशोर की महत्वाकांक्षा सिर्फ बिहार की सियासत तक सीमित रहेगी, ऐसा नहीं है. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नेतृत्व में प्रशांत किशोर की भूमिका को लेकर भी चर्चा जोरों पर है. प्रशांत किशोर की दिल्ली में सक्रियता, जन सुराज के सियासी डेब्यू की चर्चा को इसी से जोड़कर देखा जा सकता है. रशीद किदवई ने साथ ही यह भी जोड़ा कि दिल्ली की नेतृत्व आसान नहीं है.

रशीद किदवई ने कहा कि दिल्ली में बीजेपी, आम आदमी पार्टी और कांग्रेस के रूप में तीन बड़े नेतृत्वक दल पहले से ही मजबूत स्थिति में हैं. ऐसे में प्रशांत किशोर और जन सुराज के लिए दिल्ली में संगठन खड़ा करना अपने आप में चुनौतीपूर्ण होगा. उन्होंने कहा कि दिल्ली का महत्व सिर्फ विधानसभा की नेतृत्व तक सीमित नहीं है. राष्ट्रीय राजधानी में किसी नेतृत्वक संगठन की गतिविधियों पर देशभर की नजर रहती है. इसलिए दिल्ली में मौजूदगी प्रशांत किशोर को राष्ट्रीय स्तर पर अपनी नेतृत्वक भूमिका बनाने का अवसर भी दे सकती है.

‘जन सुराज बिहार के बाहर भी विस्तार को लेकर गंभीर है’

बिहार की नेतृत्व को वर्षों से कवर करते आ रहे एक वरिष्ठ पत्रकार की राय है कि प्रशांत किशोर के दिल्ली प्लान के पीछे यह संदेश देने की रणनीति हो सकती है कि जन सुराज बिहार के बाहर भी विस्तार को लेकर गंभीर है. दिल्ली में इसका चुनावी असर क्या होगा, यह देखना होगा. उन्होंने कहा कि जन सुराज के लिए अभी यही बेहतर होता कि पार्टी बिहार में अपनी जमीन मजबूत करने की दिशा में काम करती. प्रशांत किशोर ने बांकीपुर उपचुनाव में जीत जरूर दर्ज की है, लेकिन इसे अभी पूरे बिहार या राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी नेतृत्वक सफलता का संकेत नहीं माना जा सकता.

बिहार चुनाव में जन सुराज खाता तक नहीं खोल सकी थी, लेकिन एक धारणा जरूर बनी थी कि प्रशांत किशोर चुनावी मुकाबले में एक फैक्टर हैं. दिल्ली में सक्रियता के जरिये जन सुराज को यह संदेश देने का मौका मिल सकता है कि पार्टी बिहार से बाहर अन्य राज्यों और राष्ट्रीय नेतृत्व को लेकर गंभीर है. बिहार में मिली पहली जीत के बाद प्रशांत किशोर के लिए दिल्ली अगला नेतृत्वक प्रयोग हो सकता है. राष्ट्रीय राजधानी में सक्रियता प्रशांत किशोर को नेतृत्वक दृष्टि से राष्ट्रीय विमर्श में बनाए रख सकती है.

कभी केजरीवाल के लिए बनाई थी चुनावी रणनीति

दिल्ली की नेतृत्व का मैदान प्रशांत किशोर के लिए नया नहीं है. साल 2019 में I-PAC ने अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी के साथ काम करना शुरू किया था. इसके एक साल बाद 2020 में हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी के लिए चुनावी रणनीति तैयार करने की जिम्मेदारी भी इसी कंपनी की थी. चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 70 में से 62 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी. तब I-PAC की पहचान ही प्रशांत किशोर के नाम से हुआ करती थी. हालांकि, जन सुराज की लॉन्चिंग के साथ ही प्रशांत किशोर ने इस कंपनी में सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था. अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली जिस आम आदमी पार्टी के लिए कभी पीके ने विजयी रणनीति बनाई थी, क्या अब उसी दल को जन सुराज चुनावी चुनौती देगी? यह देखना दिलचस्प होगा.

ये भी पढ़ें: प्रशांत किशोर का मिशन 2030: बिहार के बाद अब दिल्ली में उतरेगी जन सुराज

The post Explained: कभी केजरीवाल को जिताया, अब देंगे टक्कर! क्यों जन सुराज का दिल्ली डेब्यू कराना चाह रहे हैं प्रशांत किशोर? appeared first on Naya Vichar.

Spread the love

विनोद झा
संपादक नया विचार

You have been successfully Subscribed! Ops! Something went wrong, please try again.

About Us

नयाविचार एक आधुनिक न्यूज़ पोर्टल है, जो निष्पक्ष, सटीक और प्रासंगिक समाचारों को प्रस्तुत करने के लिए समर्पित है। यहां राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, तकनीक, शिक्षा और मनोरंजन से जुड़ी हर महत्वपूर्ण खबर को विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत किया जाता है। नयाविचार का उद्देश्य पाठकों को विश्वसनीय और गहन जानकारी प्रदान करना है, जिससे वे सही निर्णय ले सकें और समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें।

Quick Links

Who Are We

Our Mission

Awards

Experience

Success Story

© 2025 Developed By Socify

Scroll to Top