Gaya Ji Shradh Rahasya: पितृ पक्ष में पूर्वजों के लिए गया जी में श्राद्ध करने का विशेष धार्मिक और पौराणिक महत्व है. गरुड़ पुराण और ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, गया जी में श्राद्ध करने से पूर्वजों की आत्मा तृप्त होती है. गया जी में श्राद्ध की परंपरा पौराणिक मानी जाती है. क्या आपको पता है कि गयाजी में श्राद्ध करने की परंपरा किस असुर को मिले वरदान के बाद शुरू हुई? आइए, जानते हैं इसकी पूरी पौराणिक कथा.
भगवान विष्णु के भक्त थे गयासुर
विष्णु पुराण और वायु पुराण के अनुसार, गयासुर भगवान विष्णु के भक्त थे. उन्होंने कठोर तपस्या करके भगवान विष्णु को प्रसन्न कर लिया. जब भगवान विष्णु गयासुर की भक्ति से प्रसन्न हुए, तो उन्होंने उनसे वरदान मांगने को कहा. कहा जाता है कि गयासुर ने भगवान विष्णु से वरदान मांगा कि जो कोई भी उन्हें छुए, उसके सारे पाप धुल जाएं. भगवान विष्णु ने गयासुर को यह वरदान दे दिया.
गयासुर के स्पर्श से मिटने लगे पाप
वरदान मिलने के बाद गयासुर के स्पर्श से लोगों के पाप कर्म नष्ट होने लगे. लोग पापों से मुक्त होकर सीधे स्वर्ग लोक जाने लगे. इससे यमलोक का काम लगभग खत्म होने लगा और सृष्टि का संतुलन भी बिगड़ने लगा. इस स्थिति से सभी देवी-देवता चिंतित हो गए. इसके बाद वे भगवान विष्णु के पास पहुंचे और पूरी स्थिति से उन्हें अवगत कराया.
गयासुर ने देवताओं को समर्पित कर दिया अपना शरीर
देवी-देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने गयासुर को आदेश दिया कि वह अपना शरीर देवताओं को समर्पित कर दें, ताकि उनके शरीर पर यज्ञ की वेदी बनाकर यज्ञ किया जा सके. भगवान विष्णु का आदेश पाकर गयासुर ने अपना शरीर यज्ञ के लिए समर्पित कर दिया. जब गयासुर यज्ञ किए जाने वाले स्थान पर लेटे, तो उनका शरीर हिलने-डुलने लगा. यज्ञ कर्म में बाधा न आए, इसलिए ब्रह्मा जी ने एक शिला (ब्रह्मशिला) मंगवाई. उस शिला को गयासुर के सीने पर रखा गया. इसके बावजूद उनका शरीर शांत नहीं हुआ.
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भगवान विष्णु ने ब्रह्मशिला को दबाया
आखिरकार, भगवान विष्णु ने अपने दाएं पैर से उस शिला को दबा दिया. इसके बाद गयासुर का शरीर शांत हो गया. इसी शिला को ब्रह्मशिला कहा जाता है. मान्यता है कि आज भी गया जी में ब्रह्मशिला की पूजा की जाती है.
गयासुर को मिला पवित्र तीर्थ का वरदान
शांत होने से पहले गयासुर ने भगवान विष्णु से एक और वरदान मांगा. उन्होंने प्रार्थना की कि जिस स्थान पर उनका शरीर हो, वह तीनों लोकों में पवित्र तीर्थ के रूप में प्रसिद्ध हो. कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने गयासुर को आशीर्वाद दिया कि जो व्यक्ति इस स्थान पर अपने पूर्वजों के लिए पिंडदान और तर्पण करेगा, उसके पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होगी.
मान्यता है कि इसी वरदान के बाद गया जी को पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए पवित्र स्थान माना जाने लगा. आज भी पितृ पक्ष के दौरान बड़ी संख्या में लोग गया जी पहुंचकर अपने पूर्वजों के लिए श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार, गया जी को इसी कारण मोक्षधाम भी कहा जाता है.
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