कुछ साल पहले तक लग रहा था कि 5G आने के बाद 4G फोन धीरे-धीरे बाजार से गायब हो जाएंगे. कंपनियां लगातार नए 5G फोन लॉन्च कर रही थीं और ग्राहकों को भी लगने लगा था कि अब नया फोन लेना है तो 5G ही लेना चाहिए. लेकिन 2026 में कहानी थोड़ी पलट गई है.
हिंदुस्तान में एक बार फिर 4G स्मार्टफोन की मांग बढ़ रही है. खासकर 10,000 से 15,000 रुपये वाले बजट में ग्राहक 5G के बजाय 4G फोन की तरफ देख रहे हैं. इसकी वजह सिर्फ ग्राहकों की पसंद नहीं है. इसके पीछे मोबाइल फोन की बढ़ती कीमत, मेमोरी चिप का महंगा होना और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी एआई की बढ़ती मांग का बड़ा स्पोर्ट्स है.
दिलचस्प बात ये है कि कंपनियां भी अब इस ट्रेंड को समझ चुकी हैं. यही वजह है कि 4G फोन सिर्फ पुराने मॉडल के रूप में नहीं, बल्कि नए मॉडल के तौर पर भी बाजार में वापस आ रहे हैं.
2026 में 4G फोन की बिक्री बढ़ने की वजह क्या है?
मार्केट रिसर्च कंपनी काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, हिंदुस्तान में 2026 के दौरान 4G स्मार्टफोन की शिपमेंट में सालाना आधार पर 3 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है.
अब इस आंकड़े को समझिए. 2025 में हिंदुस्तान में 4G स्मार्टफोन की शिपमेंट करीब 48 फीसदी गिर गई थी. यानी एक साल पहले तक 4G तेजी से पीछे जा रहा था. लेकिन 2026 में इसकी मांग फिर बढ़ती दिख रही है.
अनुमान है कि हिंदुस्तानीय स्मार्टफोन बाजार में 4G फोन की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 13 फीसदी हो सकती है.
इसकी एक बड़ी वजह 10,000 से 20,000 रुपये का सेगमेंट है. 2025 में इस कीमत वाले सेगमेंट में सिर्फ करीब 2 ब्रांड 4G मॉडल बेच रहे थे. 2026 में ऐसे ब्रांड्स की संख्या बढ़कर 12 हो गई है.
यानी कंपनियां खुद भी मान रही हैं कि ऐसे ग्राहकों की कमी नहीं है जो कम कीमत में अच्छा फोन चाहते हैं, भले ही उसमें 5G न हो.
असली स्पोर्ट्स एआई और मेमोरी चिप का है
अब सवाल है कि आखिर 5G फोन महंगे क्यों पड़ रहे हैं?
इसके पीछे एआई का भी बड़ा हाथ है.
दुनिया भर में एआई का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. एआई चलाने वाले बड़े डेटा सेंटर और सर्वर बड़ी मात्रा में मेमोरी चिप का इस्तेमाल करते हैं. ऐसे में मेमोरी बनाने वाली कंपनियों की उत्पादन क्षमता का बड़ा हिस्सा एआई और सर्वर से जुड़ी जरूरतों को पूरा करने में जा रहा है.
इसका असर स्मार्टफोन पर भी पड़ा है.
फोन में इस्तेमाल होने वाली डीआरएएम और एनएएनडी फ्लैश स्टोरेज जैसी मेमोरी की कीमत तेजी से बढ़ी है. रिपोर्ट के मुताबिक, सितंबर 2025 के बाद से स्मार्टफोन मेमोरी की कीमतों में करीब चार गुना तक बढ़ोतरी हुई है.
अब कंपनियों के लिए मुश्किल ये है कि फोन की कीमत बहुत ज्यादा बढ़ाएं तो ग्राहक महंगा फोन नहीं खरीदेंगे और कीमत कम रखें तो कंपनी का मुनाफा दब जाएगा.
यही वजह है कि 15,000 रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन सेगमेंट पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है. 2026 की दूसरी तिमाही में इस सेगमेंट की स्मार्टफोन शिपमेंट में करीब 45 फीसदी गिरावट दर्ज होने की बात कही गई है.
5G के बजाय 4G फोन में ज्यादा फीचर्स देने की कोशिश
मान लीजिए किसी कंपनी को 10,000 से 15,000 रुपये में फोन बेचना है.
अगर वह फोन 5G वाला बनाती है तो उसे 5G चिपसेट के साथ रैम, स्टोरेज और बाकी हार्डवेयर पर भी खर्च करना होगा. ऊपर से मेमोरी की कीमत पहले ही बढ़ी हुई है.
ऐसे में कंपनी के सामने दो रास्ते हैं. या तो फोन की कीमत बढ़ाए या फिर 5G हटाकर उसी बजट में बाकी हार्डवेयर बेहतर करे.
कई कंपनियां दूसरा रास्ता चुन रही हैं.
यानी 5G की जगह 4G कनेक्टिविटी, लेकिन साथ में बड़ी बैटरी, बेहतर डिस्प्ले और ज्यादा स्टोरेज.
और यहां एक और बात समझने वाली है. हर ग्राहक को 5G की जरूरत भी नहीं है.
बहुत से लोग फोन का इस्तेमाल कॉलिंग, व्हॉट्सऐप, सोशल मीडिया, यूपीआई पेमेंट, यूट्यूब और दूसरी रोजमर्रा की चीजों के लिए करते हैं. इन कामों के लिए 4G नेटवर्क अभी भी काफी है.
ऐसे में अगर 5G के लिए 2-3 हजार रुपये ज्यादा देने पड़ें और उसी पैसे में 4G फोन में बेहतर डिस्प्ले या ज्यादा स्टोरेज मिल रहा हो, तो कुछ ग्राहक 4G को चुन रहे हैं.
क्या 4G फोन की वापसी लंबे समय तक रहेगी?
ये सबसे दिलचस्प सवाल है.
काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, 2027 तक हिंदुस्तानीय स्मार्टफोन बाजार में 4G फोन की हिस्सेदारी करीब 15 फीसदी तक पहुंच सकती है.
इसका मतलब ये नहीं है कि 4G फिर से 5G को पीछे छोड़ देगा. ऐसा भी नहीं है कि 5G फोन की मांग खत्म हो रही है. असल कहानी बजट सेगमेंट की है.
जब तक मेमोरी और दूसरे सेमीकंडक्टर कंपोनेंट्स की कीमतों पर दबाव बना रहेगा, कंपनियों के लिए कम कीमत में 5G फोन बनाना चुनौती बना रह सकता है.
आईडीसी की रिपोर्ट में भी मेमोरी की बढ़ती लागत का असर हिंदुस्तानीय स्मार्टफोन बाजार पर दिखने की बात कही गई है. औसत स्मार्टफोन बिक्री कीमत यानी एएसपी भी काफी ऊपर पहुंच गई है.
ऐसे माहौल में 4G फोन कंपनियों के लिए भी एक रास्ता है और कम बजट वाले ग्राहकों के लिए भी.
यानी 5G खत्म नहीं हो रहा है. बस 4G ने एक बार फिर याद दिला दिया है कि मोबाइल बाजार में पुरानी तकनीक भी तब लौट सकती है, जब उसकी कीमत और जरूरत दोनों का हिसाब ग्राहकों के पक्ष में बैठ जाए.
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4G vs 5G फोन: अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
{“type”:”faq”,”question”:”1. क्या 2026 में 4G फोन की बिक्री बढ़ रही है?”,”answer”:”हां. काउंटरपॉइंट रिसर्च के अनुमान के मुताबिक, हिंदुस्तान में 2026 के दौरान 4G स्मार्टफोन शिपमेंट में करीब 3 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है. 4G की बाजार हिस्सेदारी करीब 13 फीसदी रहने का अनुमान है.”}{“type”:”faq”,”question”:”2. स्मार्टफोन की मेमोरी इतनी महंगी क्यों हो गई?”,”answer”:”एआई डेटा सेंटर और सर्वर में मेमोरी की जरूरत तेजी से बढ़ी है. इससे मेमोरी चिप की मांग बढ़ी और स्मार्टफोन में इस्तेमाल होने वाली डीआरएएम और एनएएनडी स्टोरेज की कीमतों पर भी दबाव आया.”}{“type”:”faq”,”question”:”3. क्या 2026 में 4G फोन खरीदना ठीक रहेगा?”,”answer”:”अगर आपका बजट 10,000 से 15,000 रुपये के आसपास है और फोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से कॉलिंग, सोशल मीडिया, यूपीआई, वीडियो और रोजमर्रा के ऐप्स के लिए होना है, तो 4G फोन एक विकल्प हो सकता है. हालांकि, फोन खरीदते समय नेटवर्क जरूरत, सॉफ्टवेयर अपडेट और फोन की बाकी खूबियों को भी जरूर देखना चाहिए.”}
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